Antarvasna मस्ती का भंवर–3

कांता आँटी ने मुझे लिटा दिया और मेरे पैरों के बीच में बैठ गयीं Hindi Sex Stories Antarvasna Kamukta Sex Kahani Indian Sex Chudai और झुक कर मेरी टाँगें और पैर चूमने-चाटने लगीं। मैंने गर्दन उठा कर देखा तो दंग रह गयी कि वो मेरे पैरों में बंधे सैंडलों को भी बड़ी शिद्दत से चाट रही थीं। फिर वो मेरी सैंडल की लंबी हील को मुँह में लेकर इस तरह चूसने लगीं जैसे लंड चूस रही हों। ये नज़ारा देख कर मेरी चूत और भी फड़कने लगी। फिर उन्होंने आगे झुककर चूत पे किस किया और अपनी जीभ मेरी चूत के अंदर डाल कर चाटना शुरू किया तो मेरी मुँह से “आआआआआआ आआआहहहहह” की सिसकरी निकल गयी और मैंने आँटी का सर पकड़ के अपनी चूत में दबा दिया और उसी वक्त मेरी अंगारे जैसी गरम चूत झड़ने लगी। मेरी आँखें बंद हो चुकी थी और मस्ती में मैं गहरी-गहरी साँसें ले रही थी। फिर आँटी मेरे ऊपर सिक्स्टी-नाईन की पोज़िशन में आ गयी और मेरे मुँह पे अपनी चूत को रगड़ने लगी तो मेरा मुँह खुल गया और कांता आँटी की चूत का इस्तक़बाल किया। उनकी गरम चूत में से नमकीन गाढ़ा पानी निकलने लगा। मैंने आँटी की पूरी चूत को अपने मुँह में लेकर दाँतों से काट डाला तो उनके मुँह से चींख निकल गयी, “आआआआहहहाह्ह ओंहओंहओंहओंहओंह आआआआआ ईईईईईईई ऊऊऊऊहहहहह”, और उनकी चूत में से पानी निकलने लगा और वो झड़ने लगी। बहुत देर तक हम बिना कोई बात किये ऐसे ही सिक्स्टी-नाईन की पोज़िशन में लेटे रहे। फिर थोड़ी देर के बाद आँटी ने कहा कि “आज मैं बहुत दिनों बाद इतना झड़ी हूँ और बहुत मज़ा आया!” मेरा भी कुछ ऐसा ही हाल था। जय तो मेरी चूत में आग लगा के खुद झड़ के सो जाते थे और मैं रातों में तड़पती रहती थी। ऐसे में आँटी की चूत को चूसने से बहुत सकून मिला। उस दिन के बाद जब कभी आँटी को झड़ना होता तो वो अपनी चूत को अच्छी तरह से शेव करके मेरे पास आती और फिर हम दोनों व्हिस्की पी कर घंटों तक एक दूसरे की चूत चाटते और आपस में अपनी चूतें रगड़ कर मज़ा करते। कांता आँटी के पास दो तरह के डिल्डो भी थे। एक तो करीब दो फुट लंबा डबल डिल्डो था जिसके दोनों तरफ लंड थे और दूसरा बेटरी से चलने वाला नौ इंच लंबा डिल्डो था। कांता आँटी किसिंग में तो बेहद माहिर थीं और उनके रसीले होंठों को चूमना और आपस में एक दूसरे के मुँह में ज़ुबाने डाल कर चूसना मुझे बेहद अच्छा लगता था। इसके अलावा कांता आँटी को ऊँची हील के सैंडलों का बेहद जुनून था और मेरे साथ लेस्बियन चुदाई के वक़्त खुद भी हाई हील के सैंडल पहने रहती और मुझे भी सैंडल पहने रखने को कहतीं। उन्हें मेरे पैर और सैंडल चाटने में बेहद मज़ा आता था और फिर मुझे भी इसमें मज़ा आने लगा। हकीकत में, उसके कुछ ही दिनों बाद मेरी चुदाई अपने बॉस के साथ होने लगी थी लेकिन मैं आँटी को इस बात का पता नहीं चलने देना चाहती थी। मैं अपना हर सीक्रेट उन्हें नहीं बताना चाहती थी, इसी लिये आँटी से नहीं कहा और उनके सामने ऐसी बनी रहती जैसे मेरी चूत बरसों कि प्यासी हो और उनके साथ मुझे बहुत ही मज़ा आता था। दोस्तों आप यह कहानी चुनमुनिया डॉट कॉमपर पढ़ रहे है |

हुआ यूँ कि मैं घर में अकेले रहते-रहते बोर होने लगी थी। सिवाय खाना पकाने के और कोई काम ही नहीं था। हर दूसरे दिन एक धोबन आ के हमारे कपड़े धो जाया करती थी। बोर होने की वजह से मैंने जय से कहा कि अगर वो बुरा ना माने तो मैं कोई जोब कर लूँ ताकि मैं बिज़ी रह सकूँ। जय को भी अपने बिज़नेस से फ़ुर्सत नहीं मिलती थी और अब तक तो उसको पता चल ही गया था कि मेरी चूत उसके लंड से और उसकी चुदाई से मुतमाईन नहीं है तो उसने कहा, “ठीक है मेरा एक फ्रैंड है, वो अपनी खुद की कंपनी चलाता है, मैं उससे बात कर लूँगा, तुम घर बैठे ही उसका काम कर देना ताकि तुम बिज़ी भी रहो और तुम्हारा दिल भी लगा रहे।“ फिर एक दिन जय ने बताया कि उसने अपने दोस्त को डिनर पे बुलाया है और साथ में काम की भी बात कर लेते हैं, तो मैं खुश हो गयी और अच्छे से अच्छा खाना बना के अपने होने वाले बॉस को खिलाना चाहती थी इसलिये मैं किचन में डिनर की तैयारी में बिज़ी हो गयी।

रात के खाने के टाईम से पहले ही जय का दोस्त आ गया। कॉलबेल बजी तो जय ने दरवाजा खोला और “हेलो, हाऊ आर यू”, कह कर अंदर बुला लिया। मैं देख के दंग रह गयी। वो तो एक अच्छा खासा स्मार्ट आदमी था। तकरीबन छः फ़ुट के करीब उसकी हाईट होगी, गोरा रंग, चौड़े कंधे। हट्टा कट्टा मज़बूत जवान लग रहा था। उसे देखते ही मेरी चूत में एक अजीब एक्साइटमेंट सी होने लगी और मुझे लगा के मेरी चूत गीली हो रही है। मुझे खुशी हुई कि मैंने उस दिन ठीक से मेक-अप करके चूड़ीदार सलवार और स्लीवलेस कमीज़ पहनी थी जिसका गला भी लो-कट था। खुशकिस्मती से मैंने चार इंच उँची हील के सैंडल पहने हुए थे जिससे मेरी हाईट बढ़ कर पाँच फुट सात इंच के करीब हो गयी थी उसकी ऊँचाई के मुनासिब लग रही थी। जय ने इंट्रोड्यूस करवाया और कहा कि ये मेरे बचपन का दोस्त और क्लासमेट राजीव कुमार श्रीवास्तव है जो अपनी फायनेंस कंपनी चलाता है। दोनों स्कूल से कॉलेज खतम होने तक क्लास-मेट रहे हैं और एक दूसरे से बहुत ही फ्री हैं। ऑफिस में वो ‘विकी’ के नाम से फेमस है। और फिर जय ने कहा, “विकी! ये मेरी वाइफ है डॉली!” हम दोनों ने एक दूसरे को सलाम किया और हम सब अंदर ड्राईंग रूम में आ के सोफ़े पे बैठ गये। जय और विकी बैठ के व्हिस्की पीते हुए बातें करने लगे। जय के कहने पर मैंने भी एक पैग पिया और फिर मैं खाना टेबल पे रखने के लिये चली गयी।

टेबल रेडी हो गयी तो मैंने दोनों से कहा कि “चलिये डिनर रेडी है!” वाश बेसिन पे हाथ धो के वो दोनों आ गये। सब मिलकर खाना खाने लगे। विकी मेरे बनाये हुए खाने की बहुत तारीफ कर रहे थे। खाने में परांठे, दम का चिकन, आलू गोश्त का कोरमा, कबाब, टमाटर की चटनी, पुलाव बना के उस पे उबले अंडों को आधा काट कर सजा के रखा था और कस्टर्ड और आईसक्रीम थी। खाना सच में बहुत लज़ीज़ था। जय कभी मुझे कुछ देता तो कभी विकी कि प्लेट में कुछ डाल देता। खाना खाने के बाद फिर से वो दोनों ड्राईंग रूम में जा के सोफ़े पे बैठ गये और मैं टेबल साफ़ कर के वहीं आ गयी और हम सब साथ बैठ के व्हिस्की पीने लगे और बातें करने लगे। दोस्तों आप यह कहानी चुनमुनिया डॉट कॉमपर पढ़ रहे है |

जय ने कहा, “यार विकी! देखो तो डॉली घर में अकेली रहती है और अकेले रहते-रहते बोर हो गयी है….. वो अपने आप को बिजी रखने के लिये कोई काम करना चाहती है…… तुम्हारे पास अगर कोई ऐसा काम हो तो बताना।“

विकी ने कहा, “ये तो बहुत अच्छी बात है, मेरे पास डेटा एंट्री करने का काम पड़ा हुआ है। मेरे पास डेटा एंट्री का जो क्लर्क था वो चला गया। डॉली ऑफिस से इनवोयस और वाऊचर घर ला सकती है और घर बैठे-बैठे ही मेरा काम कर सकती है। ऑफिस तो तुम्हारे घर के करीब ही है। डॉली ऑफिस आके, डेली या वीकली, काम लेकर आ सकती है और घर बैठे ही काम कर सकती है। मैं शुरू में डेली आके चेक करता रहुँगा और उसको गाईड करता रहुँगा। मेरे पास ऑफिस में एक एक्स्ट्रा कंप्यूटर भी है, मैं वो भी डॉली के पास भेज दुँगा….. यहीं किसी रूम में रख लेना और वो आराम से घर बैठे ही काम कर लेगी।“

जय ने कहा कि ये तो बहुत अच्छी बात है, “डॉली कल ही तुम्हारे ऑफिस अआ जायेगी और काम भी देख लेगी!”

दूसरे दिन मैं बेहद अच्छे से तैयार हो के विकी के ऑफिस गयी। मैं साड़ी कुछ खास मौकों पर बहुत कम पहनती हूँ लेकिन उस दिन मैंने फिरोज़ी रंग की साड़ी इस तरह बांधी थी की मेरी पतली कमर और नाभी दिखायी दे और मेरा स्लीवलेस ब्लाऊज़ भी काफी लो-कट और लगभाग बैकलेस था। मैंने ब्रा नहीं पहनी थी क्योंकि मेरा ब्लाऊज़ किसी ब्रा से ज्यादा बड़ा नहीं था। साथ ही मैं चार इंच ऊँची हील के काले रंग के स्ट्रैपी सैंडल पहनना नहीं भूली क्योंकि एक तो इससे मेरी हाईट पौने छ: फुट के करीब हो गयी थी और दूसरा ये कि उँची हील के सैंडलों से मेरा फिगर और कयामत-खेज़ हो गया था क्योंकि मेरी छातियाँ बाहर को उघड़ रही थीं और चूतड़ भी और ज्यादा उभर आये थे और चाल में भी नज़ाकत आ गयी थी। मैंने अपने लंबे बाल खुले ही रखे थे।

ऑफिस अच्छा खासा बड़ा था और नीट और क्लीन था। सारे ऑफिस में कार्पेट बिछी हुई थी और विकी का ऑफिस तो एक दम से शानदार था। एक बहुत बड़ी सेमी-सर्क्यूलर टेबल थी जिसके एक साईड में छोटी सी कंप्यूटर टेबल भी थी जिस पर कंप्यूटर, एल-सी-डी मॉनिटर और नीचे प्रिंटर भी रखा हुआ था। डोर को अंदर से लॉक करने ये खोलने के लिये उसके पास आटोमेटिक बटन था। उसके रूम के बाहर एक छोटा सा कैमरा था जिससे उसको पता चल जाता था कि बाहर कौन वेट कर रहा है और उसको मिलना हो तो वो आटोमेटिक लॉक का बटन प्रेस कर देता जिससे दरवाजा खुल जाता और फिर अंदर से खुद-ब-खुद बंद भी हो जाता। ऑफिस सेंट्रली एयर कंडिशंड था। सब मिलाकर बहुत शानदार ऑफिस था। ऑफिस का सारा स्टाफ अपने-अपने काम में बिज़ी था। दोस्तों आप यह कहानी चुनमुनिया डॉट कॉमपर पढ़ रहे है |

मैं ऑफिस गयी तो विकी ने मुझे फौरन अंदर बुला लिया और अपनी चेयर से खड़ा हो के मुझसे शेक हैंड किया तो उसका गरम हाथ मेरे हाथ में आते ही मेरे जिस्म में बिजली दौड़ने लगी और मेरी चूत गीली होने लगी। मैंने कहा कि “सर आपका ऑफिस तो वंडरफुल है, एक दम से शानदार।“ उसने कहा कि “देखो डॉली मुझे ये सर वगैरह कहने की ज़रूरत नहीं है। तुम मेरे लिये डॉली हो और मैं तुम्हारे लिये राजीव, तुम मुझे सब की तरह विकी भी कह सकती हो लेकिन अगली बार से सर नहीं कहना, ठीक है?” मैंने मुस्कुराते हुआ कहा, “ठीक है सर!” और हम दोनों हँस पड़े। विकी ने कॉफी के लिये ऑर्डर दे दिया जो थोड़ी ही देर में आ गयी। कैपेचिनो कॉफी की फ़र्स्ट क्लास खुशबू से सारा ऑफिस महक उठा। दोनों कॉफी पीने लगे। उसके बाद उसने किसी को बुला के एक कंप्यूटर, मॉनिटर और प्रिंटर अपनी कार में रखने के लिये कहा और थोड़ी देर के बाद वो मुझे अपनी कार में लेकर मेरे घर आ गया। हमारे घर में एक स्पेयर रूम भी है जिस में कंप्यूटर रख दिया गया। कंप्यूटर की स्पेशल टेबल तो नहीं है लेकिन घर की ही एक टेबल पे रख दिया गया और विकी ने कंप्यूटर के कनेक्शन लगा दिये और कंप्यूटर स्टार्ट कर के मुझे बता दिया। कनेक्शन लगाने के बाद वो हाथ धोने के लिये बाथरूम में चला गया तो मैं कॉफी बनाने लगी। हम दोनों ड्राईंग रूम में आ के बैठ गये और कॉफी पीने लगे। विकी और मैं इधर-उधर की बातें करने लगे। वो अपने स्कूल और कॉलेज के किस्से सुनाने लगे कि कैसे वो कॉलेज में बदमाशियाँ किया करते थे और लड़कियों को छेड़ते रहते थे। मैंने कहा कि “आप पर तो लड़कियाँ मरती होंगी!” तो वो हँस पड़ा और कहा “नहीं ऐसी बात नहीं है, बस हमारे कुछ क्लासमेट और कुछ जूनियर लड़कियाँ थीं, हम (एक आँख दबा के बोला) मस्ती करते थे।“ इतनी देर में लंच का टाईम हो गया तो मैंने कहा कि यहीं रुक जायें और साथ में खाना खा कर ही जाना तो उसने कहा कि “डॉली तुम जैसी क्यूट लड़की के साथ किसे लंच या डिनर करना पसंद न होगा, पर सच में मुझे थोड़ा सा काम है….. हम किसी और दिन लंच या डिनर ले लेंगे साथ में।“ जब उसने मुझे क्यूट लड़की कहा तो मेरा चेहरा शरम से लाल हो गया जिसको उसने भी नोट किया। उसने कहा कि मैं कल ऑफिस आ जाऊँ, तब तक वो सारी चीज़ें रेडी रखेगा मेरे लिये। दोस्तों आप यह कहानी चुनमुनिया डॉट कॉमपर पढ़ रहे है |

दूसरे दिन मैं फिर सजधज कर ऑफिस गयी तो उसने मुझे अपने कंप्यूटर के प्रोग्राम पर ही बता दिया के कैसे एंट्रिज़ करनी हैं और कहा कि ये प्रोग्राम, मेरे पास जो कंप्यूटर भेजा है, उस पर भी है। काम उतना मुश्किल नहीं था, जल्दी ही समझ में आ गया। हाँ कुछ चीज़ें ऐसी थी जो कि समझ में नहीं आ रही थी। कुछ केलक्यूलेशन थे कुछ एडिशन और सबट्रेक्शन थे पर उसने कहा कि जो भी मैं कर सकती हूँ करूँ और जो मेरी समझ में नहीं आ रहा है, वो लंच टाईम पे मेरे पास आ कर मुझे समझा देगा। मैं इनवोयस का बंडल उठा के घर चली आयी।

ऑफिस से घर, तकरीबन पंद्रह-बीस मिनट की वॉक है। घर आने के बाद सारे इनवोयस और वाऊचर को अपने सामने रख कर पहले तो ऐसे ही समझने की कोशिश करती रही और थोड़ी देर के बाद एंट्री करना शुरू किया। नया-नया काम शुरू किया था तो काम करने में मज़ा आ रहा था और जोश के साथ काम कर रही थी। मुझे टाईम का पता ही नहीं चला। शाम के साढ़े तीन हो गये और जब विकी ने बेल बजायी तो मैंने टाईम देखा। “उफ़ ये तो साढ़े तीन हो गये।“

मैंने डोर खोला। विकी अंदर आ गया और हम दोनों कंप्यूटर वाले रूम में चले आये। पता नहीं विकी की पर्सनैलिटी में क्या था कि मैं उसको देखते ही अपने होश खो बैठती और गीली होना शुरू हो जाती। उसने काम देखना शुरू किया। कुछ मैंने गलत किया था कुछ सही किया था। उसने केलक्यूलेशन वगैरह करना सिखाया और कुछ देर बैठ कर कॉफी पी कर चला गया। जितनी देर वो मेरे पास बैठा रहा, उसके जिस्म से हल्की उठती हुई पर्फ़्यूम की खुशबू से मैं मस्त होती रही। उसके साथ बैठना मुझे बहुत अच्छा लग रहा था। मैं तो ये सोचने लगी के विकी यहीं मेरे साथ ही रहे तो कितना अच्छा हो और मेरी गरम और प्यासी चूत को चोद-चोद के अपनी क्रीम चूत के अंदर डाल के उसकी प्यास बुझा दे और मेरी गरम चूत को ठंडा कर दे। पर ये मुमकिन नहीं था। एक तो वो मैरिड था और रात मेरे साथ नहीं रह सकता था, दूसरे ये कि ऑफिस के दूसरे काम भी तो देखने होते हैं। मैं विकी को अपने दिल की बात ना कह सकी पर मेरा दिल चाह रहा था के वो मेरे साथ ही रहे। वो मेरा काम देख के और कुछ काम समझा के अपने घर चला गया और मैं पता नहीं क्यों उदास हो गयी।

इसी तरह से एक हफ़्ता गुज़र गया। कोई खास बात नहीं हुई बस ये कि मैं उसके लिये हर रोज़ अच्छे से तैयार होती और जितनी देर वो मेरे करीब रहता, मैं मस्त रहती और पूरे मूड में रहती, पर उसके चले जाने के बाद मैं उदास हो जाती। मैं ऑफिस से तकरीबन दो हफ़्तों का काम ले आयी थी तो ऑफिस भी नहीं जाना था। सुबह उठ के नाश्ता कर के, फिर अच्छे से तैयार होकर, काम शुरू करती और काम के बीच-बीच में अपने काम भी करती रहती, जैसे खाना बनाना या और भी छोटे-मोटे काम। धोबन तो हर दूसरे दिन आ कर कपड़े धो जाया करती थी। इसी तरह से रुटीन चलने लगी। कांता आँटी को भी पता चल गया था के मैं दिन में बिज़ी रहती हूँ तो वो भी मुझे दिन के टाईम पे डिस्टर्ब नहीं करती और कभी उनका मन करता तो वो शाम को या रात को किसी टाईम पे आ जाती और गप्पें लगाने लगती और साथ में हम वही करते जो बालकोनी में किया था और फिर आँटी चली जाती और मैं मस्त हो के सो जाती। पहले भी जब जय मेरी चूत में आग लगा देता और बुझा नहीं पता तो मैं कभी-कभी बैंगन, मोमबत्ती या लंड की शक्ल की कोई और चीज़ अपनी चूत में डालकर मज़ा ले लेती थी पर आजकल काम में बिज़ी रहने के बावजूद मेरी ये हरकत बहुट बढ़ गयी थी। कंप्यूटर पर डेटा ऐंट्री करते-करते विकी की याद आ जाती तो उसके लंड का तसव्वुर करते हुए मैं खुद ही अपनी चूत को कोई भी लंड के शक्ल की चीज़ से चोद-चोद कर झड़ जाती और फिर अपना काम में लग जाती।

एक दिन ऐसे हुआ के मैं काम कर रही थी और विकी आ गये और मेरे पीछे खड़े हो कर काम देखने लगे। कभी-कभी कोई मिस्टेक हो जाती तो बता देते। मैं काम में बिज़ी थी। बीच में मुड़ कर देखा तो विकी मेरे पीछे नहीं थे। मैंने सोचा कि शायद कुछ काम होगा और चले गये होंगे और मैं उठ कर बाथरूम में गयी। बाथरूम का डोर खोल के अंदर पैर रखते ही एक शॉक लगा। विकी वहाँ खड़ा पेशाब कर रहा था और उसने अपना इतना मोटा गधे जैसा बे-खतना लौड़ा हाथ में पकड़ा हुआ था। पूरा हाथ में पकड़ने के बाद भी उसका लंड उसके हाथ से बाहर निकला हुआ था और अभी वो इरेक्ट भी नहीं था। मैं एक ही सेकेंड के अंदर पलटी और “ओह सॉरी” कह कर बाहर निकल गयी और सोचने लगी के अभी उसका लंड अकड़ा नहीं है तो ये हाल है उसके लौड़े का और जब अकड़ जायेगा तो क्या हाल होगा और ये तो लड़कियों की चूतें फाड़ डालेगा। इसी सोच के साथ मैं दूसरे बाथरूम में चली गयी और पेशाब करके वापस आ गयी और अपने काम में लग गयी। विकी फिर से मेरे पीछे आ कर खड़ा हो गया और मेरा काम देखने लगा। मैं काम तो कर रही थी पर मेरा सारा ध्यान उसके लंड में था और उसका लंड जैसे ही मेरे ज़हन में आया, मेरी चूत गीली होनी शुरू हो गयी। विकी को भी पक्का यकीन था के मैंने उसके लंड को देख लिया है और औरों की तरह मैं भी हैरान रह गयी हूँ।

मैं काम में बिज़ी थी और वो पीछे खड़ा था। अब उसने मेरे कंधे पे हाथ रख दिया और कहा कि “डॉली तुम्हारा ध्यान किधर है?” मैं घबड़ा गयी और सोचने लगी के उसको कैसे पता चला कि मैं दिल में क्या सोच रही हूँ। मैं खामोश रही तो उसने कहा कि “देखो तुमने कितनी एंट्रिज़ गलत कर दी हैं।“ मैं और घबरा गयी क्योंकि सच में मेरा दिल काम में था ही नहीं। मेरा दिमाग तो विकी के लंड में ही अटक के रह गया था। मैं घर में होने के बावजूद मैं काफ़ी सजधज कर और अच्छे कपड़े पहन कर काम करती थी क्योंकि विकी कभी भी आ सकता था। लो-कट गले वाले स्लीवलेस और टाईट सलवार-कमीज़ और साथ में उँची हील के सैंडल पहनना नहीं भूलती थी। कभी-कभार साड़ी भी पहनती थी| उस दिन भी मैंने स्काई ब्लू कलर की स्लीवलेस कमीज़ और सफेद सलवार पहनी थी जो मेरे जिस्म पे बहुत अच्छी लग रही थी। मेरी कमीज़ का गला भी काफी लो-कट था और चूछियों का क्लीवेज काफी हद तक नुमाया हो रहा था। मेरे कंधे खुले हुए थे और विकी के दोनों हाथ मेरे कंधों पे थे। उसके गरम हाथों के लम्स से मेरा सारा जिस्म जलने लगा और मेरी ज़ुबान लड़खड़ाने लगी। मैं कुछ बोलना चाहती थी और ज़ुबान से कुछ और निकल रहा था। मेरे सारे जिस्म में जैसे बिजली का करंट दौड़ रहा था और दिमाग में साँय साँय होने लगी थी।

विकी के दोनों हाथ अब मेरे कंधों से स्लिप हो के मेरी चूचियों पे आ गये थे और मेरी आँखें बंद होने लगी थी। पहले कमीज़ के ऊपर से ही दबाता रहा और फिर बिना हुक खोले ऊपर से ही कमीज़ के अंदर हाथ डाल दिये। क्योंकि मैंने लो-कट कमीज़ के नीचे ब्रा नहीं पहनी थी तो उसके हाथ डायरेक्ट मेरी चूचियों के ऊपर आ गये और वो उनको मसलने लगा। मेरी कुर्सी सेक्रेटरी चेयर टाइप कि थी जिस में नॉर्मल कुर्सी की तरह से बैक-रेस्ट नहीं था बल्कि पीठ की जगह पर एक छोटा सा रेस्ट था और कुर्सी के बैठने कि जगह से बैक-रेस्ट तक पतली सी प्लास्टिक की पट्टी लगी हुई थी जिससे मेरा पीछे से सारा जिस्म एक्सपोज़्ड था, सिर्फ मेरी पीठ का वो हिस्सा छोड़कर जहाँ बैक रेस्ट का छोटा सा कुशन था। विकी मेरे और करीब आ गया तो उसकी पैंट में से उसके लंड का लम्स मुझे मेरे जिस्म पे महसूस होने लगा। मैं तो उसका हाथ चूचियों पे महसूस कर के पहले से ही गीली हो चुकी थी और जब लंड मेरे जिस्म से लगा तो मैं अपनी जाँघें एक दूसरे से रगड़ने लगी और एक ही मिनट में झड़ गयी और मेरे मुँह से एक लंबी सी “आआआआहहहहह” निकल गयी और मैं अपनी कुर्सी पे थोड़ा सा और आगे को खिसक गयी और मेरे पैर खुद-ब-खुद खुल गये। मेरी जाँघें और टाँगें मेरे चूत के रस से भीग गयीं और मेरी आँखें बंद हो गयीं और मैं रिलैक्स हो गयी। मेरी सलवार बिल्कुल भीग गयी और मुझे अपना रस टाँगों से बह कर अपने पैरों के तलवों और सैंडलों के बीच में चूता हुआ महसूस हुआ। इतना रस था कि ऐसा लग रहा थ जैसे मेरा पेशाब निकल गया हो। अब मुझे यकीन हो गया कि आज मेरे दिल कि मुराद पूरी होने वाली है। दोस्तों आप यह कहानी चुनमुनिया डॉट कॉमपर पढ़ रहे है |

विकी मेरी चूचियों को मसल रहा था और मैं इतनी मस्त हो चुकी थी कि दिखावे की मुज़ाहमत भी नहीं कर सकी और मेरे हाथ उसके हाथ पे आ गये और मैं उसके हाथों को सहलाने लगी। उसने मेरी दोनों चूचियों को पकड़ लिया और दबाने लगा और निप्पलों को पिंच करने लगा। मैं इतनी मस्त हो चुकी थी कि अपने ही हाथों से अपनी कमीज़ के हुक खोलने लगी। हुक खोल कर कमीज़ ढीली करते हुए ज़रा नीचे खिसका दी और अब वो मेरी चूचियों को अच्छी तरह से मसल रहा था और कह रहा था कि, “आअहह डॉली! क्या मस्त चूचियाँ हैं, लगाता है जय इन्हें दबाता नहीं है।“ मैं कुछ नहीं बोली और खामोश रही। वो मेरे पीछे से ही झुक कर मेरी गर्दन पे किस करने लगा और उसके लिप्स मेरे जिस्म पे लगते ही मेरे जिस्म में एक करंट सा दौड़ने लगा। फिर ऐसे ही किस करते-करते वो झुके हुए ही मेरी चूचियों को किस करने लगा तो मेरे हाथ बेसाखता उसकी गर्दन पे चले गये और मैं उसको अपनी तरफ़ खींचने लगी।

अब विकी मेरे पीछे से हट कर मेरे सामने आ गया था। उसकी पैंट में से उसका लंड बाहर निकलने को बेताब था। उसने मेरा हाथ पकड़ा और मेरे हाथ को अपने लंड पे रख दिया और सच मानो, मैं अपना हाथ वहाँ से हटा ही नहीं सकी और उसने मेरे हाथ को ऐसे दबाया जैसे मेरा हाथ उसके लंड को दबा रहा हो। उसने अपनी पैंट की ज़िप खोल दी और बोला कि, “डॉली! इसे बाहर निकाल लो”, तो मैंने उसका अंडरवीयर नीचे को खींच दिया और उसका लंड बाहर निकाला तो वो एक दम से उछल के मेरे मुँह के सामने आ गया और मैं तो सच में डर ही गयी। इतना लंबा मोटा बिला-खतना लंड और उसका मशरूम जैसा चिकना सुपाड़ा चमक रहा था और जोश के मारे हिल रहा था। मेरे मुँह से निकल गया, “हाय अल्लाह!! ये क्या है विकी? इतना बड़ा और मोटा….. ये तो किलर है…. ये तो जान ही ले लेगा!” तो वो हँसने लगा और बोला कि “आज से ये तुम्हारा ही है, जब चाहो ले लेना” और फिर उसने अपनी पैंट नीचे करके उतार दी। दोस्तों आप यह कहानी चुनमुनिया डॉट कॉमपर पढ़ रहे है |

उसका लंड इतना मोटा और लंबा वो भी बिला-खतना लंड देख कर मैं तो सच में घबरा गयी थी और मन में ही सोचने लगी कि ये तो मेरी चूत को फाड़ के गाँड में से बाहर निकल जायेगा। इतना मस्त लंड और उसका सुपाड़ा भी बहुत ही मोटा था, बिल्कुल हेलमेट की तरह से, जैसे कोई बहुत बड़ा चिकना मशरूम हो और लंड के सुपाड़े का सुराख भी बहुत बड़ा था। मैंने कभी इतना बड़ा और मोटा लंड नहीं देखा था। और पहली दफा बिला -खतना लंड देख रही थी| उसका लंड बहुत गरम था। हाथ में लेते ही मुझे लगा जैसे कोई गरम-गरम लोहे का पाइप पकड़ लिया हो। लगाता है वो झांटें शेव करता था। उसका लंड एक दम से चिकना था और बिना झाँटों वाला लंड बेहद दिलकश लग रहा था। उसने अपनी शर्ट भी उतार दी तो मैं उसके नंगे जिस्म को देखती ही रह गयी। सारे जिस्म पे हल्के-हल्के से नरम-नरम बाल जो बहुत सैक्सी लग रहे थे और मसक्यूलर बॉडी। उसने मुझे चेयर पे से उठाया और मेरे हाथ पीछे कर के मेरी कमीज़ को निकाल दिया और साथ में मेरी सलवार का नाड़ा उसने एक ही झटके में खोल दिया और मेरी टाँगों से चिपकी हुई भीगी सलवार एक-एक करके मेरी दोनों टाँगों और सैंडलों से नीचे खींचते हुए उतार दी।

मैं एक दम से नंगी हो चुकी थी और वो भी। चार इंच ऊँची हील के सैंडल पहने होने के बाद भी मेरी हाईट विकी की हाईट से काफी कम थी और जब उसने मुझे खींच के अपने जिस्म से लिपटा लिया तो उसका लंड मेरे पेट में घुसता हुआ महसूस होने लगा। वो लोहे की तरह से सख्त था और मेरे पेट में ज़ोर से चुभ रहा था और मेरी चूचियाँ हम दोनों के जिस्म के बीच में चिपक गयी थीं। उसका नंगा जिस्म मेरी चूचियों को टच होते ही मेरे निप्पल खड़े हो गये। इसी तरह से वो मुझसे लिपटा रहा। मैं भी ज़ोर से उसको पकड़े रही और अपनी ग्रिप टाइट कर ली। मेरी चूत का हाल तो मत पूछो। उस में से पानी ऐसे निकल रहा था जैसे कोई नल खुला हो और उस में से पानी निकल-निकल के बह रहा हो। उसने मेरा हाथ पकड़ कर अपने लंड से लगाया तो मेरे जिस्म में झुरझुरी सी आ गयी। पहले तो मैंने डर के मारे अपना हाथ हटा लिया पर विकी ने फिर से मेरा हाथ अपने लंड पे रखा तो मैं उसको धीरे से दबाने लगी और दिल में सोचने लगी कि आज मेरी छोटी सी चूत की खैर नहीं। आज तो ज़रूर मेरी चूत फटने वाली है। विकी के हाथ मेरे जिस्म पे फिसल रहे थे, कभी चूचियों पर तो कभी गाँड पर, और जब उसका हाथ मेरी चिकनी चूत पे लगा तो मैं बहुत ज़ोर से काँपने लगी और साथ में ही झड़ने लगी तो विकी बोला, “वॉव डॉली, तुम्हारी चूत तो मक्खन जैसी चिकनी और समंदर जैसी गीली है….. मज़ा आयेगा इसे चोदने में।“ और जब उसने अपनी मोटी उंगली मेरी छोटी सी चूत के अंदर डाली तो मानो ऐसे महसूस हुआ कि कोई छोटा सा लंड ही घुस गया हो। वो मेरा पानी उंगली में लेकर चूसने लगा और बोला, “वाह तुम्हारी मीठी चूत का पानी भी बहुत मीठा है”, और फिर से मेरी चूत में अपनी उंगली डाल के मेरी चूत का पानी निकाल के मेरे मुँह में दे दिया और कहा कि “तुम भी टेस्ट करो कि तुम्हारी चूत का पानी कितना मीठा है।“ मैंने अपनी चूत का पानी चाट तो लिया पर मस्ती में मेरी कुछ समझ में नहीं आया कि टेस्ट कैसा है। कंप्यूटर की टेबल काफी बड़ी थी। कंप्यूटर रखने के बाद भी काफी जगह रहती थी तो विकी ने मुझे मेरे बगल से पकड़ कर उठा लिया और मुझे टेबल पे बिठा दिया और वो नीचे खड़े-खड़े मेरी चूचियों को दोनों हाथों से मसलने लगा और एक के बाद दूसरी चूँची को चूसने लगा और निप्पलों को काटने लगा। मैं बहुत ही मस्त और गरम हो गयी और उसके अकड़े हुए लंबे लंड को अपने हाथों से पकड़ लिया। मैं उसके लंड को अपने दोनों हाथों से पकड़े हुए थी लेकिन उसका लंड फिर भी मेरे दोनों हाथों के थोड़ा सा बाहर निकल रहा था और मैं उसके लंड को अपने पूरे हाथ में पकड़ नहीं पा रही थी। कितना मोटा और बड़ा था उसका लंड जो मेरे हाथ में नहीं आ रहा था। मैं उसके लंड को दोनों हाथों से पकड़ कर आगे पीछे करने लगी। वो मेरे सामने खड़ा था और उसका लंड मेरे जाँघों पे लग रहा था। मैं खुद थोड़ा सा टेबल पे सामने को खिसक गयी और टेबल के किनारे पे आ गयी तो उसका लंड अब मेरी चूत पे लगने लगा जिसमें से निकलता हुआ प्री-कम मेरी चूत के अंदरूनी हिस्से को चिकना कर रहा था। मैंने अपनी टाँगें थोड़ी और खोल लीं और उसके बैक पे क्रॉस कर लीं और उसे अपनी तरफ़ खींचने लगी। उसके लंड के सुपाड़े को अपनी चूत के लिप्स के अंदर रगड़ना शुरू कर दिया और इतना एक्साइटमेंट था कि उसके प्री-कम से चिकने लंड का सुपाड़ा चूत के अंदर लगने से मैं जल्दी ही झड़ने लगी। इतना बड़ा तगड़ा लंड देख के डर भी लग रहा था और मज़ा भी आ रहा था।

वो कभी मेरी चूचियों को मसलता तो कभी मेरी गाँड को दबाता। मेरा तो मस्ती के मारे बुरा हाल था। उसने चेयर को टेबल के करीब खींच लिया और उसपे बैठ गया और मेरी टाँगों और जाँघों पे अपने होंठ रख दिये। मैं टेबल के पूरे किनारे पे आ गयी और अपने हाथों से उसका सर पकड़ के अपनी चूत पे दबा दिया और अपनी टाँगें उसके कंधों पे रख के उसको अपनी तरफ़ खींचने लगी। उसका मुँह मेरी चूत पे लगते ही मैं फिर से झड़ने लगी। मैं आज बहुत मस्ती मैं थी, एक तो ये कि आज से पहले कभी इतना बड़ा और इतना मस्त लंबा-मोटा और लोहे जैसा सख्त लंड देखा भी नहीं था और दूसरे ये कि जय तो बस आग लगाना ही जानता था, आग बुझाना नहीं। आज मुझे पक्का यकीन था के मेरी इतने महीनों से जलती चूत में लगी आग आज इस तगड़े लंड से बुझ जायेगी। मेरे हाथ उसके सर को पकड़े हुए थे और मैं उसके सर को चूत के जितना करीब हो सकता था, दबा लेना चाहती थी। वो चाटता रहा और उसकी ज़ुबान मेरी चूत के अंदर बहुत मज़ा दे रही थी। कभी-कभी तो पूरी चूत को अपने दाँतों से पकड़ के काट लेता तो मेरी सिसकरी निकल जाती। मेरी आँखें बंद थी। “ओ‍ओ‍ओ‍ओ‍ओहहहह”, बेइंतेहा मज़ा आ रहा था। चूत बेहद गीली हो चुकी थी और पानी लगातार निकल रहा था। पता नहीं कितने टाईम मैं झड़ गयी और विकी सारा पानी पीता रहा। दोस्तों आप यह कहानी चुनमुनिया डॉट कॉमपर पढ़ रहे है |

थोड़ी देर के बाद विकी खड़ा हो गया और मुझे उठा लिया तो मेरी टाँगें उसकी बैक पे लिपट गयीं और मैं उसके बंबू जैसे लंड पे बैठ गयी और वो मुझे ऐसे ही उठाये-उठाये बेडरूम में ले आया और मुझे ऐसे आधा बेड पे लिटा दिया कि हाई हील सैंडल पहने मेरे पैर ज़मीन पर थे और मेरे घुटने मुड़े हुए थे और मेरा आधा जिस्म बेड के किनारे पे था। अब विकी फिर से ज़मीन पे बैठ गया और मेरी चूत को सहलाने लगा और कहने लगा कि, “वॉव डॉली, क्या मक्खन जैसी चिकनी चूत है…. मस्त मलाई जैसी चूत…. लगाता है आज ही झाँटें साफ़ की हैं तुमने।“ मैं कुछ भी नहीं बोल सक रही थी। मस्ती में आँखें बंद थी और गहरी-गहरी साँसें ले रही थी। थोड़ी देर ऐसे ही चूत को सहलाते-सहलाते उसने मेरी चूत को एक बार फिर से मुँह में लेकर चूसना शुरू कर दिया और चूत में से पानी लगातार निकलने लगा और मेरी चूत में आग लगने लगी। मेरी टाँगें उसकी गर्दन पे थीं और मैं उसके सिर को पकड़ के अपनी चूत पे दबा रही थी और अपनी गाँड हिला-हिला के अपनी चूत उसके मुँह में रगड़ रही थी। मेरी चूत में से पानी निकलता रहा और मैं झड़ती रही। थोड़ी देर के बाद वो अपनी जगह से उठा और अपने लंड के मशरूम जैसे सुपाड़े को मेरी चूत के लिप्स के बीच में रख दिया तो मैं तभी उसके लंड को अपने हाथ में लेकर अपनी चूत में रगड़ने लगी। लंड का प्री-कम और चूत का पानी, दोनों मिल कर मेरी नाज़ुक चूत को गीला कर चुके थे और मेरी चूत बेहद गीली और स्लिपरी हो चुकी थी।

वो अपने लंड के सुपाड़े को चूत के दरवाजे पे रख कर मेरे ऊपर झुक गया और मुझे किस करने लगा। दोनों एक दूसरे की ज़ुबानें चूस रहे थे। मेरी गाँड बेड के किनरे पे थी और मेरी टाँगें उसके बैक पे लपटी हुई थी और वो ज़मीन पे खड़ा हुआ था। वो धीरे-धीरे अपने लंड का दबाव बढ़ा रहा था और उसके लंड का सुपाड़ा मेरी चूत के होल में स्लिप हो कर अटक गया और अभी सिर्फ़ सुपाड़ा ही अंदर गया था कि मैं चींख उठी, “ऊऊऊऊईईईईईईई अल्लाह….आआआआआ धीरे! विकी धीरे!” वो फिर से किस करने लगा और सिर्फ़ अपने लंड के सुपाड़े को ही चूत के अंदर-बाहर करने लगा तो मुझे बेहद मज़ा आने लगा और मैं झड़ने लगी। फिर ऐसे ही सुपाड़ा अंदर-बाहर-अंदर-बाहर करते-करते उसने एक धक्का मारा तो लंड थोड़ा और अंदर घुस गया और मेरे मुँह से चींख निकल गयी, “ऊऊऊऊऊऊऊईईईईईई ईईईईईईईईईईईई आंआंआंआंआं ईईईईईईईंईंईंईंईं” और मैं उसको अपने ऊपर से धकेलने लगी क्योंकि चूत में जलन होने लगी थी। वो एक दम से रुक गया और झटका देना बंद कर दिया। मेरी आँख से आँसू निकल गये और जैसे ही उसका लंड मेरी चूत के अंदर घुसा वैसे ही मेरी आँखें बाहर निकलने लगी और मुझे लगा के मेरी आई बॉल्स अपने सॉकेट में से बाहर निकल गयी हों। थोड़ी देर वो ऐसे ही मेरे ऊपर झुका-झुका मुझे फ्रेंच किस करने लगा तो थोड़ी देर के बाद मेरी चूत ने उसके लंड को अपने अंदर एडजस्ट कर लिया। अब वो ऐसे ही तकरीबन आधे से कुछ कम लंड को अंदर-बाहर करने लगा जिससे मुझे मज़ा आने लगा और चूत के पानी से उतना लंड आसनी से फिसल के अंदर-बाहर होने लगा। उसके हाथ मेरी बगल में से निकल कर मेरे कंधों को ज़ोर से टाइट पकड़े हुए थे। अब मेरी चूत उसके लंड को एडजस्ट कर रही थी। उसका लंड अंदर-बाहर स्लिप हो रहा था और कभी-कभी वो सुपाड़े तक निकाल के अंदर घुसाता तो कभी ऐसे ही छोटे-छोटे धक्के से अंदर बाहर करता। फिर उसने देखा कि मेरी ग्रिप उसके ऊपर कुछ लूज़ होने लगी और मेरी चूत उसके लंड को अपने अंदर एडजस्ट कर चुकी है तो वो समझ गया कि बाकी का लंड खाने के लिये अब मैं रेडी हूँ। फिर उसने मुझे टाइट पकड़ कर लंड को पूरा सुपाड़े तक बाहर निकाल के एक इतना ज़ोरदार झटका मारा कि मेरे मुँह से चींख निकल गयी,