Antarvasna दीदी मेरा प्यार 5

अपने कमरे में मैने अपनी बाकी की पढ़ाई पूरी कर ली ..10 बज चूके थे …. Hindi Sex Stories Antarvasna Kamukta Sex Kahani Indian Sex Chudai

मैं दीदी के कमरे की ओर चल पड़ा……. आज मन में बहुत गुदगुदी सी हो रही थी …. सोचते ही मेरा लंड खड़ा हो रहा था ..मैने हाथ से हल्के हल्के लंड पॅंट के उपर से ही सहला रहा था ..बड़ा मज़ा आ रहा था ..अंदर झाँका तो देखा मामी और दीदी बैठे बातें कर रहे थे …मैं भी उनके साथ बैठ गया …

बातें दीदी की शादी के गहनों के बारे हो रही थी ….. थोड़ी देर मैं सुनता रहा ..पर ना जानें क्यूँ आज मुझे उनकी शादी की बात अछी नहीं लगी ..इसलिए नहीं के वो मुझ से दूर हो जाएँगी ..पर शायद इसलिए के वो अब वो सब जो मेरे साथ करती हैं …किसी और के साथ करेंगी …मेरा मन जाने क्यूँ गुस्से से भर उठा ..और मैं वहाँ से अचानक उठ गया .

दीदी ने कहा “किशू ..बैठ ना कहाँ जा रहा है …..”

पर मैं उनकी बात अनसुनी करते हुए सीधा अपने कमरे में आ गया ….

थोड़ी देर बाद दीदी मेरे कमरे में आईं ….मैं लेटा था ….उन्होने पहले तो मेरे कमरे के दरवाज़ों को बंद किया ..और फिर मेरे बगल मे आ कर लेट गयीं …और मेरे बालों को सहलाते हुए पूछा ..

“क्या हुआ किशू ..? तू वहाँ से क्यूँ वापस आ गया..क्या मेरी माँ वहाँ थी इसलिए ..???”

” नहीं दीदी….!”

“फिर क्या बात है ..बता ना ..प्लज़्ज़्ज़ …मुझ से कुछ मत छुपा किशू ..मैं खुद इतनी परेशान हूँ अपनी शादी की बात से , और तू ये सब क्या कर रहा है..??”

” हां दीदी मैं भी परेशान हूँ आपकी शादी से ….”

” पर तू क्यूँ परेशान है..? तू तो खुश था मेरी शादी की बात से ….??”

” दीदी ……..”

“हां हां किशू बोल ना …”

“दीदी शादी के बाद आप जीजा जी के साथ भी तो वोई सब करेंगी ना ….जो मेरे साथ करती हैं ..???”

दीदी ने अपनी भवें सिकोडते हुए कहा

“हां रे करूँगी तो ज़रूर ..”

” आप के शादी के गहनों की बात से मुझे अब ये लगा के आप की शादी सही में हो रही है ….. और आप किसी और के साथ ये सब करेंगी……मुझे अच्छा नहीं लगा …मुझे बहुत गुस्सा भी आया …….” मैने दीदी से सारी बात कह दी ..ना जाने क्यूँ मैं उन से कुछ छुपा नहीं सकता था …

” ह्म्‍म्म तो ये बात है ….. तू मुझे इतना प्यार करता है रे किशू ..??? तू मुझे किसी और के साथ नहीं देख सकता ..?? ”

” हां दीदी …..मैं आप से बहुत प्यार करता हूँ ..बहुत …”

” मैं भी तो उतना ही प्यार करती हूँ किशू …..”

और मैं उन से लिपट गया , उन्होने भी मुझे अपनी बाहों में भर लिया ..हम दोनों हिचकियाँ ले ले कर रो रहे थे ….एक दूसरे को चूमे जा रहे थे ..बार बार बाहों में जकड़े जा रहे थे ..मानों कभी अलग ना हों …… दोनों के आँसू मिल कर एक हो रहे थे …..दोनों का गम एक था …..

काफ़ी देर तक हम ऐसे ही एक दूसरे से लिपटे एक दूसरे को चूमते रहे ….. सुबक्ते रहे ….

हम दोनों एक दूसरे को बार बार चिपकते , गाल चूमते …होंठ चूमते ..एक दूसरे के पैरों से पैर मिला जाकड़ लेते ..मानों कभी अलग नहीं होना चाहते ….

दीदी सिसकते सिसकते कहती जातीं ” हां रे शादी के बाद मेरा सब कुछ तेरे जीजा जी का होगा ..पर मेरा मन तो तेरा ही रहेगा ना किशू ..बिल्कुल तेरा ……हमेशा ..सारी जिंदगी …..तू ही तो मेरा सब कुछ है …मेरी जिंदगी है रे…”

और फिर दीदी ने झट अपनी ब्लाउस और ब्रा उतार दी , मेरे सर अपने हाथों से थामते हुए अपने सीने से चिपका लिया ..मेरा चेहरा उनकी गुदाज , कड़ी पर फिर भी मुलायम चूचियों में धँस गया ……

अपनी चूची अपने हाथ से थामते हुए उसे मेरे मुँह में डाल दिया “ले ..मेला बच्चा ..पी …देख कितनी गर्मी है तेरे लिए मेरे अंदर …..”

मैने भी अपना मुँह खोलते हुए होंतों के बीच उनकी चूची थामते हुए बूरी तरह चूसने लगा ……” हां दीदी बहुत गर्मी है यहाँ ..लग रहा है जैसे तुम मेरे अंदर आती जा रही हो …..” और सही में मुझे ऐसा महसूस हुआ उनकी चूची नहीं मैं उनकी जान , उनके दिल की धड़कन ..उनका पूरा अस्तित्व सब कूछ अपने अंदर समाए जा रहा हूँ …..एक अद्भुत अनुभव था …

मैं लगातार चूसे जा रहा था …चूसे जा रहा था , पूरे कमरे में चप चप की आवाज़ आ रही थी ..

” हां रे किशू बस चूस ..चूस ..मुझे पूरा चूस ले , निचोड़ ले ..भर ले अपने अंदर …..”

फिर उन्होने अपनी दूसरी चूची भी मेरे मुँह में लगा दी ……उफफफफफफफ्फ़ हम दोनों जैसे एक दूसरे के लिए पागल थे ..

इसी दौरान पता नहीं कब और कैसे दीदी ने अपनी साड़ी और पेटिकोट भी उतार दी थी और मेरे पॅंट के बटन भी खोल रही थी ..एक झटके में ही उन्होने मुझे भी नंगा कर दिया और मुझे अपने उपर करते हुए चिपका लिया बूरी तरह …….

हम दोनों के बीच अब हवा भी नहीं जा सकती ….उन्होने अपनी टाँगें भी मेरे जांघों पर रखते हुए वहाँ भी जाकड़ लिया ..मेरा कड़ा लंड उनकी चूत की दीवारों में रगड़ खा रहा था …..

एक एक अंग एक दूसरे से चिपका एक दूसरे को महसूस कर रहा था …एक दूसरे को अपने में समा रहा था ……

अब दीदी ने मेरा चेहरा अपनी हाथों से थाम लिया …..अपनी जीभ मेरे मुँह के अंदर डाल दी और मुझ से कहा

” ले ले ……किशू ..तू ने छाती का रस तो पी लिया ना ..अब ले मेरे मुँह का रस भी ले ले ……चूस मेरी जीभ ..अच्छे से चूसना ..मेरा पूरा लार ..मेरा पूरा थूक ….सब कूछ ले ले ..कुछ मत छोड़ना ..है ना …..??”

“हां दीदी ..आज मैं आप का सब कुछ अंदर ले लूँगा …सब कुछ …आख़िर ये सब तो मेरा ही है ना दीदी ……”

और दीदी की जीभ चूसने लगा … दीदी अपनी जीभ गीली करती जातीं और मैं चूस्ता जाता …उफफफफफफफफफ्फ़ मैं मस्ती में था ..उनके लार का स्वाद अमृत जैसा था ..मैं पिता जा रहा था ..चूस्ता रहा था ……मैने अपनी जीभ भी उनके गालों के अंदर , उनके तालू , उनके कंठ तक ले जाता और चाट ता जाता ..हम एक दूसरे की हर चीज़ अपने अंदर ले रहे थे..

“हां हाआँ किशू …चाट ले …चाट ले ……अच्छा लग रहा है ना ..??? ”

“हां दीदी बहुत अच्छा लग रहा है ….”

फिर दीदी ने अपना हाथ मेरे कड़क लंड पर ले गयीं ……उसे जाकड़ लिया ..उनकी चूत से तो बस लगातार पानी रिस रहा था ..अपनी गीली ऊट में अपने हाथों से मेरा लंड घिस रही थी …… उनका चूतड़ उछल रहे थे …..अंग अंग कांप रहा था ..सिहर रहा था ..

मस्ती में वो कुछ भी बोले जा रही थी ..मैं भी आनंद और मस्ती में सराबोर था ……

मैं लगातार उनके मुँह के अंदर चाट रहा था उनकी जीभ चूस रहा था …फिर मैने महसूस किया मेरा लंड उनके चूत की रस से बूरी तरह भीग गया था …..पूरी तरह गीला था …..

” दीदी ….आपकी चूत चाटने का मन कर रहा है ..देखिए ना कितना गीला है ..उसका रस भी अंदर लेना है..”

” अरे तो रोका किस ने है किशू ..??”

और उन्होने अपनी टाँगें फैला दी और अपनी उंगलियों से अपनी चूत की फांके भी चौड़ी कर दी

” आ जा ..मेला बच्चा …..चूस …जो जी में आए चाट ले ..जहाँ जी में आए चूस ले ….ले एयेए ”

मैं अपनी जीभ उनकी चूत में ले जाते हुए उनकी खूली , गुलाबी फांकों के अंदर डाल दी और लपा लॅप..सटा सॅट चाटने लगा …… पूरी गीली चूत का रस अब मेरे मुँह के अंदर जा रहा था …..दीदी ने भी अपने चूतड़ को उपर कर लिया था और मेरे सर को थामते हुए चूत में धंसा लिया था..

मैं कभी चूस्ता , कभी चाट ता कभी अपने होंठों से उनकी चूत की पंखुड़ीयाँ दबा लेता ….

” हां ..हां किशू ..तू अब काफ़ी कुछ सीख गया है …..बस ऐसे ही करता रह …उफफफफफफ्फ़ ….तू सही में मेरी जिंदगी है रे ….सही में …देख ना तेरे जीजा मुझे चोद के भी इतना मज़ा नहीं दे सकते ..जितना तू सिर्फ़ चूस चूस के दे रहा है ….है….उूउउइईई माआआं …..आआआआः ….हां …”

उनके मुँह से चोद्ना शब्द सुन ते मेरा लॉडा एक दम से फॅन फ़ना उठा ..और मैं काफ़ी उत्तेजित हो गया , मेरे उनकी चूत को चाटने की स्पीड बढ़ गयी ….

दीदी चूतड़ उछाल रही थी ….मेरे सर को जकड़ी थी अपनी टाँगें मेरी पीठ पर रखे मुझे अपनी ओर खींच रही थी …..मेरे में समान जाना चाह रही थी ….. सिसकारियाँ और आहों से कमरा गूँज रहा था ……

और फिर ” हाइईइ रीईईईईई…..उफफफफफफफफफफफफ्फ़ किशुउऊुुुुुुुुुुुुुुुुउउ ले ले मेरी पूरी चूत ले ले ……आआआआआआआआआअ….” और जोरों से चूतड़ उछलते हुए एक जोरदार रस की फुहार मेरे मुँह पर छोड़ दिया उन्होने …दो तीन जोरदार उछाल मारी उनकी चूतड़ ने , मेरा पूरा मुँह उनके रस से भर गया , और वह शांत हो कर पड़ गयीं ….

मेरा लंड पूरी तरह आकड़ा था ….

मैं हाथ चला रहा था , दीदी ने देखा …वो झट से उठीं और मेरे लौडे को अपने हाथों में ले लिया ..उनकी गरम गरम हथेलियों के छूने से मेरा लॉडा और भी अकड़ गया …लॉडा हाथ में थामे पहले उन्होने जीभ चलाते हुए मेरे मुँह में लगे अपनी चूत रस को चाटा और फिर मेरे लौडे को मुँह में डालते हुए कहा ” वाह रे मेरा रस तो तू पी गया …और अपना रस ऐसे ही हाथ से बाहर गिराएगा और वो भी मेरे सामने ……..?????”

और उन्होने अपने होंठों से जकड़ते हुए बूरी तरह मेरे लंड को चूसना शुरू कर दिया …अपने हाथ से सहलाती भी जातीं …….मैं तो वैसे ही काफ़ी एग्ज़ाइटेड था ..और दीदी के होंठ और जीभ के कमाल के सामने टिक नहीं पाया …और मैने भी अपनी पिचकारी उनके मुँह मेी छ्चोड़ दी …….

उनका पूरा मुँह भर गया …उन्होने एक भी बूँद बाहर नहीं गिरने दी ..पूरे का पूरा गटक गयीं ..और जो भी मेरे लंड में लगा था ..जीभ से सॉफ कर दी ….

हम फिर एक दूसरे से चिपके थे …..आँसू ने रस का रूप ले एक दूसरे को अंदर और बाहर से पूरी तरह सराबोर कर दिया था ….

हम उसी रस की मिठास , मधुरता और मादकता एक दूसरे की बाहों में महसूस किए जा रहे थे ..एक ऐसे सूख और आनंद में डूबे थे ..जिसे बताया नहीं जा सकता ..सिर्फ़ महसूस किया जा सकता था ..और हम दोनों एक दूसरे की बाहों में इसे महसूस कर रहे थे ….

मैने लेटे लेटे ही दीदी की टाँगों पर अपने पैर रख लिए ..दीदी आँखें बंद किए सूस्त पड़ी थी …

मैं बस उन्हें निहारे जा रहा था ….मेरे लिए अगर कोई सुंदरता की छवि थी तो दीदी की छवि थी ,सुंदरता की देवी थी मेरे लिए …… मैं उनको अपनी आँखों में ..अपने दिल में , अपने रोम रोम में बसा लेना चाहता था ..इतना के फिर कभी जिंदगी में मुझ से अलग ना हो पायें …हर वक़्त मैं उनको महसूस करता रहूं………..

मैं बिना पलक झपकाए उन्हें ताक रहा था..

फिर मैं अपने सर को उठाता हुआ अपने होंठ उनके होंठों से लगाया और लगा बेतहाशा चूसने …….

दीदी ने आँखें खोल दी और मेरी तरफ देख रही थी…..वो समझती थी सब कुछ,
जैसे मेरे मन के अंदर झाँक रही थी ……मेरी ललक .मेरी तड़प , मेरी चाहत अपने लिए , वे सब समझती थी ….उन्होने चूपचाप अपने होंठ और फैला दिए ..मुँह और खोल दिया

“हाआँ किशू चूस ले …..जी भर ले अपना…….जब तक मैं हूँ यहाँ मुझे निच्चोड़ ले , समा ले अपने अंदर ….मैं हमेशा तेरे अंदर रहूंगी …..”

और मैं उनके उपर आ गया उनसे फिर बूरी तरह लिपट गया , टाँगों से टाँगे ..हाथों से हाथ , छाती से छाती , होंठों से होंठ ..एक एक अंग एक दूसरे को अपने में समा लेने की पुरजोर कोशिश में जूटा था..

हम सिसक रहे थे ..कराह रहे थे ..तड़प रहे थे एक दूसरे की बाहों में , एक अभुत्पूर्व आनंद में डूबे थे….

मैं अपने एक हाथ से दीदी की हथेली को जोरों से थामे था , मसलता जा रहा था ….इसमें भी एक अजीब ही आनंद था…..दीदी मुँह के अंदर ही अंदर सिसकारियाँ भर रही थी..तभी मेरा हाथ नीचे उनकी चूत पर पहून्च गया ..और मैं उसे सहलाने लगा और मेरी उंगलियाँ उनकी चूत के काँपते और थरथराते होंठों से होती हुई उनकी बिल्कुल गीली चूत के होल पर पहून्च गयी,

मैने कौतूहलवश दीदी से पूछा ” दीदी ये होल क्या है..क्या इसी के अंदर लंड जाता है ???”

” उफफफफफफफफफ्फ़……….” वहाँ मेरी उंगली के स्पर्श से ही दीदी मचल उठीं ” अरे भोले राजा येई तो सब कुछ है रे…….येई तो हमारा सब से बड़ा खजाना है …..तुम्हारे जीजू इसी होल के अंदर अपना लंड डालेंगे और मेरी सील तोड़ेंगे …..”

” ये सील का क्या मतलब दीदी..??”

दीदी ने अपनी उंगलियों से अपनी टाइट चूत फैला दी….और टाँगें भी ..देख ले अंदर …”हर कुँवारी लड़की की चूत के अंदर एक पतली झिल्ली होती है ……उसे ही मैने सील कहा ….जो पहली बार लंड अंदर जाने से टूट ती है ..और लड़की का कुँवारापन टूट जाता है ….”

मैने अंदर झाँका ..मुझे कोई सील तो नहीं दिखाई दी पर जो दिखाई दी , उतने से ही मेरा लॉडा तंन हो गया था…

अंदर कितना मुलायम था…गुलाबी , पानी रिस रहा था, गुलाबी दीवारों पर रस ऐसे दिखते जैसे चमकते हुए मोतियों के दाने …दीदी भी बातें करते इतनी मस्त हो गयीं थी के उनकी चूत की दीवारें अंदर फडक रही थी….

मेरा मन किया की मैं अपना लंड अंदर डाल दूँ …..पर मैं तो दीदी से बहुत प्यार करता था ना ..मैं कैसे उनका ये अनमोल खजाना ले सकता था..ये तो उनके पति के लिए ही था ….मेरा उस पर अधिकार नहीं था….मैं उनके सुहागरात का मज़ा कम नहीं करना चाहता..

“दीदी ये अनमोल ख़ज़ाना तो आप जीजा जी के लिए ही संभाल के रखो …मेरा तो बहुत मन करता है अपना लंड अंदर डाल दूँ….मैं तड़प रहा हूँ दीदी ….”

“हां रे मैं समझती हूँ ..पर तू नहीं जानता मैं कितनी खुश हूँ तेरी बातों से ..मेला बच्चा सही में कितना समझदार है ..और मुझ से इतना प्यार और कोई नहीं कर सकता ….किशू …पर तू निराश मत होना ..मेरे राजा ……तुम्हारे जीजा जी के बाद सिर्फ़ तुम्हीं ऐसे इंसान रहोगे जिसे मैं अपनी चूत का मज़ा दूँगी और ऐसा मज़ा दूँगी के बस ……तू जिंदगी भर याद रखेगा ……..”

“हां दीदी मैं भी अपना एक एक पल उस दिन के इंतेज़ार में गुज़ार दूँगा ….हां दीदी..आप देखना मैं अपनी शादी भी जब तक आपकी चूत में अपना लंड नहीं डाल लेता..नहीं करूँगा..”

और मैने अपना हाथ उनकी चूत से हटा लिया और उस हाथ से उनकी दूसरी हथेली भी जाकड़ ली..और उनसे फिर से चिपक गया और उनकी चूची मुँह में भर चूसने लगा ……. मेरा लॉडा एक दम कड़क हो कर उन के जांघों और पेट से रगड़ खा रहा था…..मचल रहा था अंदर जाने को…

दीदी ने मेरी बेचैनी भाँप ली थी..

“अले अले मेला बच्चा ..इतनी बेचैनी..? अरे मेरे पास चूत के सिवा भी बहुत कुछ है किशू .तेरे लंड की बेचैनी मिटाने के लिए …..आख़िर तेरी स्वेता दीदी की ही तो चेली हूँ ना …..”

और वह पलंग के सिरहाने तकिया रख , उस पर अपनी पीठ टिकाए अपनी दोनों चूचियाँ हाथों से थामते हुए मुझ से कहा

” ले किशू चोद मेरी चूचियों के बीच..दोनों चूचियों के बीच अपना लंड पेल दे और ऐसे चोद जैसे तेरा लंड मेरी चूत के अंदर हो …चल जल्दी कर आ जा ..”

और मैं अपने घूटनों के बाल बैठ अपने हाथ से लंड थामते हुए उनकी चूचियों के बीच डाल कर लगा ताबड़तोड़ धक्के लगाने लगा ….

उनकी मुलायम गुदाज चूचियों के बीच लंड से चोदे जा रहा था ..मुझे नहीं मालूम था चूत की चुदाई कैसी होती है ..पर ये चुदाई उस से कम नहीं होगी इतना मुझे मालूम हो गया था

मेरा लंड चूचियों को चोद्ता हुआ उनके मुँह तक पहून्च जाता और दीदी ने फिर अपना कमाल दिखा दिया ..उन्होने मेरे सुपाडे को अपनी लप्लपाति जीभ से चाटना भी शुरू कर दिया ..

उफफफफफफफफफ्फ़ ये कैसी चुदाई थी..जिसमें चोद्ने और जीभ से चटाने ..दोनों का मज़ा मिल रहा था

मैं लगातार उनकी चूचियाँ चोद रहा था ….दीदी अपने हाथों से चूचियों को ज़ोर ..और ज़ोर और जोरों से दबाती जाती और मेरा लंड जैसे जैसे अंदर जाता मैं सिहर उठ ता , कांप उठता ..और जीभ की चटाई से मज़ा और भी बढ़ जाता ….

“हां …हां …किशू…हाआँ ..बस ऐसे ही धक्के लगा…उफफफफफफफफफफ्फ़ ..आआआआ……आ ज़ाआाआ….अपना पूरा रस मुझ पर छ्चोड़ दे…….आ जाआ……..एयेए जाआ…मेला बच्चा …”

दीदी की ऐसी बातों से मैं और भी एग्ज़ाइटेड होता जा रहा था…….

मेरा चोद्ना और भी तेज़ हो जाता ……..

और फिर मैं टिक नहीं सका ..मेरी पिचकारी छूटने लगी ..दीदी की छाती पर..उनकी चूचियों पर , उनके मुँह पर ..मैं झटके पे झटका देते झाड़ रहा था ..मेरा पूरा बदन अकड़ता हुआ खाली होता जा रहा था

दीदी ने मुझे अपनी बाहों में ले लिया….”हां हां मेला बच्चा …..आ जा ..आ जा ” मेरे सर को अपने सीने से चिपका लिया, मेरे बाल सहलाने लगी …..”अच्छा लगा ना ….???.”

“हां दीदी बहुत अच्छा लगा”..मैं हाफते हुए कहा और उनके सीने पर सर रखे अपने आप को उनके हवाले कर दिया …….

“किशू..किशू …..मैं तेरी कर्ज़दार हूँ रे …मैं अपना क़र्ज़ ज़रूर चूकाऊँगी एक दिन ..ज़रूर ..मेला बच्चा ..मेला बच्चा ….” वो मुझे चूमती जातीं …मेरे बाल सहलाए जाती और प्यार और, आभार के आँसू बहाए जा रही थी..मैं उन आँसुओ से सराबोर ….एक असीम आनंद में डूबता जा रहा था …..

हम दोनों एक दूसरे की बाहों में थे , एक दूसरे को महसूस कर रहे थे ….पता नहीं कब दोनों एक दूसरे की बाहों में ही नींद की बाहों में खो गये …

जब नींद अच्छी आती है तो खूल भी जल्दी ही जाती है……मैं सुबेह तड़के ही जाग गया ….दीदी अभी भी मेरी बाहों में सो रही थी…चेहरे पर ज़रा भी शिकन नहीं ….जैसे कितनी शांत हों………..उनकी चूचियों, छाती और चेहरे पर अभी भी मेरा रस लगा था..मैं अपने हाथ उनकी पीठ से लगाता हुआ उन्हें अपनी ओर उपर खींच लिया और अपनी लप्लपाति जीभ से चाट चाट कर सफाई करने लगा..क्या सोंधा सोंधा टेस्ट , और साथ में दीदी के शरीर का अपना एक अलग टेस्ट , उनके हल्के हल्के पसीने का स्वाद ..उनके बदन की खूशबू …उफफफफफफफफफ्फ़ एक अजीब ही नशा सा छा गया…… ..मैं जोरों से चाट रहा था…दीदी की आँखें खूल गयीं, एक नज़र मेरी तरफ डाला..और फिर मुस्कुराते हुए आँखें बंद कर लीं और लेटे लेटे मेरे चाटने का मज़ा ले रही थी………मेरा लॉडा सुबेह सुबेह तो ऐसे ही कड़क रहता है और आज जब डॉली दीदी मेरी बाहों में थी मेरा लंड और भी कड़क हो गया……..अब तक दीदी भी जाग गयीं ……उन्होने मंद मंद मुस्कुराते हुए मेरी ओर देखा और चूप चाप लेटी रहीं ……. मेरी हरकतों का मज़ा ले रहीं थी…

मैने उनकी जांघों को आपस में मिला दिया ..अपना लॉडा उनकी जांघों के बीच , पेल दिया और लगा उनकी जांघों के बीच उनको चोद्ने …….उफफफफफफफफ्फ़ ………क्या मस्त जंघें थी उनकी…मांसल , सॉफ्ट , गुदाज …और साथ में उनकी चूचियाँ , उनके होंठ , उनका पेट …उनकी नाभि ..चाट ता जाता ……

दीदी कितनी अंडरस्टॅंडिंग थीं …मेरी हालत वह समझ रही थी ..उन्होने अपनी जांघों को और भी टाइट कर लिया …….उफफफफफफफफफफफफफ्फ़ …मैं पागल हो उठा था ..मैने उन्हें अपने से बूरी तरह चिपका लिया और जोरदार धक्के पे धक्का लगाए जा रहा था..जैसे आज के बाद और कुछ नहीं …..

दीदी अपनी अलसाई आवाज़ में कहती जातीं ..”वाह रे वाह ..तू भी कितना कुछ सीख लिया …मेरी हर जागेह चुदाइ कर रहा है .. देख ना एक चूत के ना मिलने से तुझे और कितनी नयी नयी जागेह मिल रही है मुझे चोद्ने को………..हाां चोद रे किशू …चोद ले रे ..जहाँ जी चाहे चोद ..सब कुछ तेरा ही तो है ….हाआँ अपनी ख्वाहिश पूरी कर ले..मैं भी तुझे खुश देखना चाहती हूँ ….. आआआहह चाट और चाट ..और चूस ….उईईईईईईई …..हाआँ मेरी नाभि के अंदर जीभ घूसा …हाआँ ……..जीभ से वहाँ भी चोद …..उफफफफफफफफफफ्फ़ ………..आाआऐययईईई…..हाँ हां ऐसे ही …..” वह अपना पेट और उपर कर लेती ..जिस से मेरी जीभ और भी अंदर घूस जाती उनकी नाभि में ….

और मेरा चाटना , चूसना , जांघों को चोद्ना ज़ोर और ज़ोर पकड़ता गया ..उनकी जंघें टाइट और टाइट होती गयी….उनकी जंघें मेरे लौडे के रस से इतनी गीली थीं के मुझे लंड पेलने में कोई दिक्कत नहीं होती ..एक दम मक्खन जैसा था

दीदी की चूत से भी लगातार पानी रिस रहा था, उन्हें अपनी नाभि में मेरे जीभ का चलाना बहुत ही एग्ज़ाइट कर रहा था …..

अपनी चूतड़ उछाल उछाल कर मस्ती में डूबी थीं ..और मैं उन्हें उनके पेट से उनको जकड़ा था , मुलायम और सपाट पेट ….जीभ नाभि के अंदर डाल देता ..और लंड जांघों के बीच एक अजीब मस्ती के सफ़र का आनंद ले रहा था..

“आआआआह्ह्ह्ह्ह्ह……हाईईईईईईईईई..हाां किशू………मेला बच्छााआआ ….आआआआअहह …..”

” दिदीइ…..आआआआआ ……बस और नहीं …….ऊऊऊऊऊऊ …” और मैं उनके जांघों पर जोरदार पिचकारी चोद्ना शुरू कर दिया …जांघों पर ..उनके पेट पर …उनकी छाती पर ..लॉडा हाथ से थामे झटके पर झटका देता जाता ..मेरे रस की गर्मी..उसकी तेज़ फूहार से दीदी का सारा बदन झुरजुरी से कांप उठा और वह भी चूतड़ उछाल उछाल कर अपनी चूत से पानी छ्चोड़े जा रही थी ……..

हम दोनों के अंदर की सारी मस्ती , सारी खूषी , सारी ललक बाहर आ रही थी ..एक दूसरे पर हम छिड़के जा रहे थे ….

कुछ देर तक हम ऐसे एक दूसरे की बाहों में पड़े थे……

अब तक सुबेह काफ़ी निकल चूकि थी ..बाहर चिड़ियों का चहचाहना और सूरज की किरणों ने हमारी आँखें खोलीं ….

दीदी ने अंगडायाँ लेते हुए मुझे अपने उपर से हटाया ……उफ़फ्फ़ दीदी की अंगड़ाई ने फिर से मेरे अंदर हलचल मचानी शुरू कर दी….

पर इसके पहले के मैं कुछ कर पाता , “बस किशू ….देख अब सब लोग जाग गये हैं ..कोई आ जाए तो मुश्किल हो जाएगी..मैं जा रही हूँ ” और वो मेरे लौडे को कस के दबाती हुई बाहर निकल गयी ….

मैं दीदी को देखता रहा…….और फिर मैं भी बाथरूम के अंदर चला गया …

उस दिन नाश्ते के टेबल पर जब दीदी ने मुझे खिलाना शुरू किया ..मेरी माँ ने दीदी के हाथ थामते हुए कहा “अरे डॉली ..अब तो तू इसे अपने हाथ से खाने दे…तू जब चली जाएगी तो किस के हाथ से खाएगा ..क्या भूखा ही रहेगा ..??” और फिर मेरी तरफ देखते हुए कहा “किशू तू भी खुद से खाना शुरू कर दे ..दीदी का लाड़ प्यार बहुत हो गया..!”

मैं जानता था एक दिन ये होनेवाला ही है ..मैं चूप रहा…..मुझे अंदर से जैसे किसी ने झकझोर दिया था..मैं आसमान से सीधे ज़मीन पर आ टपका था..वास्तविकता और सचाई मेरे सामने खड़ी थी…..

दीदी समझ गयीं मुझे गहरा धक्का लगा था …..” ठीक है बुआ ..पर आज तो खिलाने दे ..कल से किशू खुद ही खाएगा ..है ना किशू …..?”

मैं क्या बोलता ??? ..एक बहुत ही आभार से भरी नज़रों से दीदी की ओर देखा ..दीदी अपने आँचल से अपनी आँखें पोंछते हुए मुझे खिलाने लगीं.

शाम को जब स्कूल से आया ..दीदी ने दरवाज़ा खोला …… आज फिर घर में सन्नाटा था ..

” कहाँ हैं सब लोग दीदी ..???” मैने पूछा ..

” माँ और बुआ शादी की शॉपिंग को गये हैं और पापा ( मामा) और फूफा ऑफीस से कब तक आएँगे किसे मालूम..????”

मेरे चेहरे पे चमक आ गयी ..मेरा मन गुदगुदी से खिल उठा

मैने दीदी को अपनी बाहों में जाकड़ लिया , अपने सीने से लगाता हुआ उन्हें चूमने लगा

” ओओओओओओह्ह दीदी यानी के हम दोनों अकेले …..??????”

” अरे बाबा अभी तो छ्चोड़ ना किशू ..चल हाथ मुँह धो ले साथ में नाश्ता करते हैं ….फिर कुछ और ..” और मुस्कुराते हुए मुझे अपने से अलग किया .

तभी कॉल बेल की तीखी आवाज़ आई……..

” अभी कौन आ गया..” मैने झुंझलाते हुए बड़बड़ाता हुआ दरवाज़ा खोला..

बाहर स्वेता दीदी खड़ी थीं………

मैं एक टक उन को(स्वेता दीदी) देखता रहा….मेरी आँखें चौंधिया गयीं , पालक झपकने को तैयार ही नहीं ….

उन्होने कपड़े इस तरह पहेन रखे थे…..कपड़े बदन ढँकने के बजाए उन्हें और उभार रहे थे…मानों एक एक अंग कपड़ों को चीरता हुआ बाहर आ जाए …पतली और तंग टाइट ब्लाउस ……उनकी चूचियों की उभार छुपाने की नाकामयाब कोशिश में जुटी थीं ….गले से नीचे नंगा सीना ……..साड़ी नाभि से नीचे ….पेट उघ्ड़ा ……आँचल कंधों से फिसलता हुआ ………

” अरे क्या देख रहा है किशू ..मुझे अंदर तो आने दे..क्या बाहर ही खड़ी रहूं..???” स्वेता दीदी की आवाज़ से मेरा ध्यान उनके शरीर से उनकी आवाज़ पर आया….

“ओह..अरे हां आइए ना ..” और मैं दरवाज़े से हट ता हुआ उन्हें अंदर आने का इशारा किया….

मटकती हुई चाल से स्वेता दीदी अंदर आईं …..मैं उनके पिछे था …उनकी मटकती चाल से उनके दोनों चूतड़ साड़ी से उछल बाहर आने को मचल रहे थे…. उधर उनके चूतड़ उछल रहे थे और इधर मेरे पॅंट के अंदर भी उछल कूद मची थी…….

” डॉली कहाँ है किशू..?” उन्होने हंसते हुए पूछा .

“दीदी शायद किचन में हैं …आप जाइए ना ..देख लीजिए ..” मेरा गला सूख रहा था …..स्वेता दीदी की मटकती चाल से , उनकी अजीब मुस्कान से ..उनकी तीखी और पैनी नज़रों से ..मानों वह मुझे खा जाना चाहती हों …..

थोड़ी देर बाद दोनों दीदी किचन से बाहर निकलीं ..

डॉली दीदी ने कहा ” चल किशू मेरे रूम में …हम तीनों नाश्ता करते हैं …..”