Antarvasna जब मेरी गाण्ड की सील टूटी

Antarvasna जब मेरी गाण्ड की सील टूटी

बात उन दिनों की है जब मेरी गाण्ड की किसी ने ठीक से ठुकाई नहीं की थी और मैं बस ब्लू-फिल्में देख कर मन ही मन अपने भी जीवन में कुछ मस्ती लाने के सपने देखा करता था।

मेरे बदन पर बाल नहीं थे और छाती और कमर भी काफी घुमावदार लचीली सी थी। अपनी उम्र के लड़कों से अलग मेरी जांघें, कमर.. छाती और गाण्ड सुडौल और सधे हुए हो गए थे। ऊपर से मेरा लंबा कद.. मुझे नंगे होने पर किसी विदेशी ब्लू-फिल्म की हीरोइन होने का एहसास देता था।

जब कोई घर में न होता तो अक्सर मैं अपने आपको नंगा करके.. शीशे में देखता और अपनी किसी जवान कमसिन कुँवारी लड़की जैसी कमर और गोल-गोल गाण्ड को देख कर खुद ही कामुक हो उठता।

मैंने कभी-कभी अपनी गाण्ड में उंगली करने की कोशिश की थी.. लेकिन मेरी गाण्ड इतनी टाइट थी कि उंगली भी ठीक से अन्दर-बाहर न हो पाती और मैं बस अपने गाण्ड में उठी गुदगुदी के नशे में डूब कर किसी ब्लू-फिल्म की हीरोइन की तरह ‘आह.. आह.. ओह.. यस.. ओह.. यस..’ की सिसकारियाँ भर लेता था।

लेकिन मुझे नहीं पता था कि मेरे पड़ोस के अंकल.. जो मेरे दोस्त अंकित के छोटे चाचा थे.. की नजर मेरी इन हरकतों पर थी। वो अक्सर खिड़की के किनारे से मेरे कसे हुए बदन को देख मेरी गाण्ड चोदने के मौके के इंतज़ार में रहते थे। मेरा बदन और नैन-नक्श भी ऐसे ही थे कि किसी भी जवान मर्द का लंड मेरे मुँह में जाने और मेरी गाण्ड चोदने को फनफना उठता।

जहाँ मैं पढ़ता था.. वहाँ भी कुछ लड़कों ने मज़ाक-मज़ाक में मेरी गाण्ड पर कभी-कभी थपकी मारी थी और लालच भरी नजरों से मेरे बदन को देखा था.. पर मैं उस वक़्त बिलकुल भी चुदने के मूड में नहीं था। मैं तो बस अपनी ही गाण्ड और लंड से खेल कर संतुष्ट था। मैंने उस वक़्त तक सपने में भी नहीं सोचा था कि एक दिन मैं पैसे लेकर ‘गे-सेक्स’ का सुखद अनुभव अपने कामुक बदन से मर्दों में बाटूँगा।

फिर वो दिन आ ही गया.. जिस दिन पहली बार किसी ने पैसे देकर मेरी गाण्ड का मज़ा लिया। हुआ यूं कि मैं अक्सर अंकित के घर जाता था.. जहाँ उसके चाचा मुझे घूर-घूर कर देखते.. उनकी शादी उस वक़्त तक नहीं हुई थी और मैं उन्हें अंकित की तरह अंकल कहता था।

एक दिन जब मैं अंकित से मिलने उसके घर गया.. तो देखा की घर काफी शांत था और अंकल बस अंडरवियर में सोफ़े पर बैठे हुए थे, जब मैंने उनसे पूछा- अंकल अंकित कहाँ है?

तो उन्होंने कहा- अंकित तो अपनी माँ और पिताजी के साथ अपने मामा के पास गया है.. पर मेरे पास तुम्हें दिखाने को कुछ है, देखोगे?

मैं ठहरा सीधा-साधा.. सोचा अंकित मेरे लिए कुछ छोड़ कर गया होगा.. सो मैंने झट से बोला- जरूर अंकल।

तभी वो अन्दर गए और अपने हाथ में कुछ किताबें ले आए और बोले- देखो इन्हें..

मैंने देखा.. उसमें लंबी-लंबी विदेशी लड़कियों के नंगे चित्र थे और वे चुदाई भी कर रही थीं। कोई अपने गोरे मुँह में काला लंड लेकर आँखें बंद करके लौड़ा चूस रही थी.. तो कोई सेक्सी अदाओं के साथ गाण्ड चुदवा रही थी।

मैंने न चाहते हुए भी.. अपनी बड़ी-बड़ी आँखें.. उन किताबों पर से हटाईं और कहा- ये सब क्या है अंकल..! मैं घर जा रहा हूँ।

तभी अचानक उनके तेवर बदल गए और कहा- साले.. मैं सब देख चुका हूँ.. कैसे तू अपने बदन के साथ खेलता है और चुदने को मचलता है। मैं भी बस तेरे सेक्सी बदन के साथ थोड़ा खेलना चाहता हूँ.. तुझे भी मजा आएगा.. मान जा।

मैं घबरा कर बोला- नहीं अंकल.. ये आप क्या कह रहे हैं?मुझे घर जाने दो.. मैं कोई खेल नहीं खेलता।

वो बार-बार कहते- अपनी इस टाइट गाण्ड का मजा तो ले ले.. नहीं तो साला ऐसा मस्त छोकरी जैसा बदन लेकर क्या उखाड़ लेगा।

जब मुझे लगा कि आज लगता है.. ये मेरी गाण्ड की सील तोड़ कर ही रहेंगे.. तो मैं भी थोड़ा बेशर्म होकर बोलने लगा।
‘जाने दो ना.. मैं बस दिखता वैसा हूँ.. मैं नहीं चुदा पाऊँगा.. गाण्ड फट जाएगी मेरी.. नहीं चुदा पाऊँगा मैं।’

लेकिन अंकल मेरी गाण्ड मारने की ज़िद पर अड़े थे, उन्होंने अंत में कहा- ले.. तीन हज़ार रख ले और बस चुपचाप अपनी गाण्ड खोल दे।

मैंने सोचा तीन हज़ार हाथ से जाने देना सही नहीं होगा और मैं भी तो कब से अपनी गाण्ड की बिंदास चुदाई के सपने देख रहा हूँ।

मैं मान गया और धीरे से बोला- ठीक है.. पर जो करना जल्दी से करना और ज्यादा दर्द ना हो।

मेरा इतना कहना था कि उन्होंने मुझे झट से अपनी ओर खींच लिया और बिस्तर पर पटक दिया और कहा- तू जैसे अपने बदन से खेलता है.. थोड़ा वो दिखा ना।

मैं धीरे-धीरे अपनी गाण्ड मटका-मटका कर अपने कपड़े उतारने लगा और जब पूरा नंगा हो गया.. तब अपने एक हाथ से अपनी छाती को मसलने लगा और एक हाथ से अपनी गोल गाण्ड को दबाने लगा।

ये देख कर उनका लंड तन कर सख्त हो गया और वो अपने अंडरवियर को उतार कर अपने लंड को अपने हाथ में पकड़ कर मेरे मोटे होठों से रगड़ने लगे।

मैं समझ गया कि वो क्या चाहते हैं.. सो मैंने कहा- अंकल मैं मुँह में नहीं लूँगा.. बस ब्लू-फिल्म की तरह मेरी गाण्ड बजानी हो तो बजा लो।

ये सुनते ही उन्होंने अपने लंड को थोड़ा पीछे किया और कहा- साले भड़वे.. ब्लू-फिल्म की तरह गाण्ड मराएगा.. लेकिन ब्लू-फिल्म की तरह लंड नहीं चूसेगा.. ले एक हज़ार और ले लेना.. बस अभी के अभी लंड चूस साले।

मैंने भी सोचा थोड़ा लंड का स्वाद चख लूँ..

सो अपने मुँह को खोल दिया और उनका मोटा लंड मेरे होठों से रगड़ खाता हुआ.. मेरे मुँह में समा गया।

‘गुप्प-गुप्प’ की आवाज के साथ मेरे मुँह की चुदाई होने लगी और मैं भी मस्त होने लगा।

मैंने सोचा अब काहे की शरम.. और उनका लवड़ा किसी रंडी की तरह चूसने लगा।

जब उनका लंड कभी मेरे गले तक पहुँच जाता.. तो मेरी बड़ी-बड़ी आँखें और बड़ी हो जातीं.. मेरे मोटे होंठ खुल से जाते और मैं बस छटपटा उठता.. जो उन्हें किसी जन्नत का मजे दे देता था।

करीब 6-7 मिनट तक मेरे मुँह को चोदने के बाद अंकल ने अपना लंड निकाला और मुझे झटके के साथ बिस्तर पर उल्टा करके मेरी गाण्ड के छेद पर अपना सुपाड़ा रगड़ने लगे।

मैंने कहा- चचा.. कोई क्रीम लगा तो लो.. क्या सूखी ही मारोगे?

‘हाँ चिकने.. तू सच कहता है.. ले अभी ले।’

तो उन्होंने पास में पड़ी नारियल तेल की बोतल उठाई और ढेर सारा तेल अपने लंड और मेरी गाण्ड पर रगड़ दिया। फिर उन्होंने धीरे-धीरे अपने लंड से मेरी गाण्ड पर धक्के मारने लगे.. मेरी कसी हुई गाण्ड थी.. सो जरा दिक्कत हो रही थी।

फिर जो हुआ वो मैं अपने जीवन में कभी भूल नहीं सकता.. उन्होंने कहा- सह लेना हरामी.. थोड़ा दर्द होगा.. आज तेरी सील टूट रही है।

इसी के साथ उन्होंने एक झटके के साथ अपने पूरे लंड को मेरी गाण्ड में उतार दिया।

इससे पहले कि मेरे मुँह से आवाज़ निकलती उन्होंने मेरे मुँह को कस कर अपने हाथ से दबा दिया और मेरे पूरे बदन में जैसे करंट दौड़ गया.. मेरा शरीर ढीला होने लगा.. दर्द इतना तेज था कि जैसे गाण्ड में भूकम्प आ गया हो। मेरी आँखें बंद हो गईं और मैं बस लुढ़क सा गया.. मुझे तो पता भी नहीं चला कि कब वो पूरे जोश से मेरी गाण्ड चुदाई करने लगे थे।

शायद दर्द के कारण कुछ देर के लिए गाण्ड सुन्न पड़ गई थी.. जब शरीर में थोड़ा होश आया तो उनके लंड से गाण्ड चुदाई के मीठे दर्द का एहसास हुआ और मेरे मुँह से अपने आप ‘आह.. ऊह.. आह..’ की आवाजें निकलने लगीं।

उनके लौड़े की हर थाप से मेरी जान जैसे मुँह में आ जाती थी और मैं बस उस मदहोशी में ब्लू-फिल्म की चुदासी लौन्डिया की तरह ‘आह.. येस्स.. ऊह..’ करता रहता।

मैंने सपने में भी नहीं सोचा था कि चुदाई में मेरे शरीर को इतना कुछ झेलना होगा।

करीब 10 मिनट की इस पलंगतोड़ चुदाई के बाद आखिर उनके धक्के एकाएक तेज़ हो गए और मेरे बदन का एक-एक हिस्सा जैसे हवा में उड़ने लगा।

वो अपने एक हाथ से मेरा लवड़ा मुठिया रहे थे.. जिससे दुगना आनन्द मिल रहा था। तभी मैं झड़ गया था तो मेरे माल को वे मेरी चूचियों पर लगा कर मेरी छाती मसलने लगे।

फिर 6-7 ज़ोर के धक्के देने के बाद वो भी झड़ गए और सारा माल मेरी गाण्ड के अन्दर ही उड़ेल दिया। उनके गरम माल से जलती हुई गाण्ड को थोड़ा सुकून मिला और मैं चैन की सांस ले पाया कि आखिर चुदाई खत्म हुई।

जब मैंने खड़े होने की कोशिश की.. तो मुझे चक्कर सा लगा.. उन्होंने मुझे पकड़ कर सहारा दिया और मुझे बाथरूम तक ले गए। उधर उन्होंने मेरी गाण्ड सफाई में भी साथ दिया।

अब तक मैं अपने आपको संभाल चुका था और सोच रहा था कि आखिर मेरे जवान बदन की चुदाई भी आखिर आज से शुरू हो ही गई।

जब मैं जाने लगा तो उन्होंने मुझे हज़ार रुपए दिए और पूछा- अगर मेरे कुछ दोस्त भी तुझे पैसे देकर तुझे चोदना चाहें.. या चुदाना चाहें.. तो क्या तू उनके साथ भी अपनी जवानी का खेल खेलेगा?

मैं कुछ देर चुप रहा और कहा- अब जब मैंने लंड गाण्ड के साथ खेलना शुरू कर ही दिया.. तो रुकना कैसा?

बस उस दिन से वो और उनके कुछ दोस्त भी पैसे देकर मुझे अपने घर ले जाते और जी भर के चोदते.. और कुछ तो मुझसे अपनी ही गाण्ड मराते।

मैं बस चुदाई के बाद उनके खुश चेहरे देखता हूँ और सोचता हूँ.. जो भी है.. सही है।

मेरी कहानी आपको कैसी लगी मुझे ईमेल करके जरूर बताइएगा।