Antarvasna अमीना की मस्ती–3

अमीना जय की उँगली शौकिया तौर पे एक रंडी जैसे चाट कर Hindi Sex Stories Antarvasna Kamukta Sex Kahani Indian Sex Chudai और फिर अपनी एक उँगली उसके लंड के साथ अपनी चूत में डाल कर निकाल के जय को चाटने के लिये देते हुए बोली, “अरे कईं लोगों ने मुझे क्या कईं औरतों को मसला है… इसलिये तो हम औरतों को भीड़ में जाना पसंद नहीं। रही बात औरों से मसलवाने कि तो कईं बार मसली गयी हूँ पर किसी में तेरे जितना दम ही नहीं था इसलिये सिर्फ़ मसलने पे ही बात खतम हुई। तू जिस हिसाब से मेरी बात माने बिना भीड़ में ब्लाऊज़ खोलने लगा… तब मैंने फ़ैसला किया कि तुझे अपने साथ आने को कहूँगी।”

अमीना की उँगली पूरी चाट कर हल्के से चबाते हुए जय बोला, “क्या बोलती है? तेरी जैसी गरम रंडी औरत को भीड़ में जाना पसंद नहीं? अरे तेरी जैसी औरत को ही तो मैं भीड़ में ढूँढ कर गरम कर कर चोदता हूँ, तू मेरी ज़िंदगी में बस में मिली वैसे तीसरी चूत है। तूने भीड़ में सामने वाले को आज के पहले कितनी लिफ़्ट दी और वो कहाँ तक आया तेरे साथ?” जय अब चूत चोदते हुए अमीना की गाँड में एक के बाद दूसरी उँगली डालते हुए अब चूत और गाँड एक साथ चोदने लगा। अमीना पूरी मस्ती में आ कर अपनी कमर उछाल-उछाल कर चुदवाती हुई बोली, “और तेज़ भौंसड़ी के… और तेज़ डाल ना, मज़ा आ रहा है एक साथ चूत और गाँड चुदवाने में। उफ़्फ़्फ़ बड़ा ज़ालिम मर्द है तू… जय, और चोद मुझे गाँडू।” अमीना की गाँड में तीसरी उँगली डाल के घुमाते हुए उसकी चूत को जय चोद रहा था। अमीना की चूत में लंड घुसने की ’थप थप’ की आवाज़ आने लगी और अमीना की सिसकरियाँ सुनायी देने लगी। जय फिर निप्पल खींचते हुए बोला, “ये ले रानी और ले और ले, तेरी माँ की चूत… आज तेरी गाँड और चूत फाड़ दूँगा। बोल तूने कहाँ तक लिफ़्ट दी है मर्दों को जब उन्होंने तेरा जिस्म भीड़ में मसला… अमीना रानी?”

कमर उछाल-उछाल कर चुदवाने से अमीना के मम्मे उछल रहे थे और फचक-फचक की आवाज़ आने लगी जब जय का लंड उसकी चूत में घुस कर बाहर निकलता क्योंकि दोनो बहुत गीले हुए थे। निप्पल खींचने से अमीना दर्द और मस्ती से बोली, “आहह आहहह और तेज़ गाँडू, मेरे जिस्म को बेरहमी से मसलते हुए चोद मेरी चूत। जय मैंने तेरे से ज्यादा किसी को लिफ़्ट नहीं दी। लिफ़्ट तो बस भीड़ तक ही दी, जो दूसरे मर्दों ने किया, वो भीड़ में वहीं करने दिया पर तेरे सामने नंगी हो कर जैसे चुदवा रही हूँ वैसा मौका किसी भी मर्द को नहीं दिया। एक दो मर्दों ने भीड़ में ही अपना लंड पैंट की ज़िप खोल कर बाहर निकाल कर मेरी सलवार के ऊपर से गाँड पे रगाड़ा भी और मेरी पीठ और सलवार पर अपना वीर्य भी छोड़ा पर मैंने चुदवाया किसी से नहीं”

अमीना का जोश और बढ़ावा देख कर खुश हो कर जय ने सोचा कि साली को सच में आज तक ऐसा लौड़ा नहीं मिला जो ये इतनी उछल कर चुदवा रही है। अब इसको और मज़ा दूँगा। वो अमीना की कमर पकड़ कर बोला, “सुन रंडी चूत… अब मैं नीचे आऊँगा और तू मेरे ऊपर आ कर मेरे लौड़े से तू चूत चुदवा ले अपनी… समझी रंडी?” अमीना को बाहों में पकड़ कर घूम कर उसे जय अपने ऊपर ले कर बोला, “चल रंडी अब देखता हूँ… कितना दम है तुझ में।” अमीना के लाल मम्मों को अब और बेरहमी से मसलते हुए और निप्पल खींच कर उसे दर्द और मज़ा देते हुए नीचे से गाँड उठा कर उसके धक्कों का जवाब जय देने लगा। इस पोज़िशन में आठ-दस धक्के खाने के बाद अमीना चूत से लंड निकाल कर घूम के अपनी पीठ जय की तरफ कर के लंड अपनी चूत में डाल कर चुदवाने लगी। ऐसा करने से जय को अपना लंड अमीना की चूत से अंदर बाहर होते दिखने लगा। साथ-साथ अमीना अपने मम्मे खुद दबा कर कईं बार अपनी चूत को सहलाते हुए सिसकरियाँ भरती हुई चुदवाने लगी।

अमीना के इस स्टाइल और बे-शर्मी से खुश हो कर जय उसकी चूत सहलाते हुए अब आराम से उसकी गाँड में भी उँगली करने लगा। बीच में उसके मम्मे भी खींच कर नोचते हुए वो बोला, “बहनचोद तू तो बड़ी मस्त रंडी है, क्या स्टाइल से चुद रही है राँड, ऐसा कभी देखा नहीं छिनाल, और ज़ोर से चुदवा ले रंडी, देखने दे तेरी चूत में कितनी गर्मी है छिनाल। आहहहहह साली और ज़ोर से उछल, लंड तेरी बच्चेदानी पे टकरा रहा है या नहीं रखैल?”

नीचे के धक्कों से अमीना भी अब अपना पूरा ज़ोर लगा कर उछलने लगी। काफी चूदाई के बाद उसकी चूत में अब सूजन महसूस होने लगी जिसका जय को भी एहसास हुआ। ज़ोर से उछलने और हिलने से अमीना के मम्मे हवा में झूल रहे थे और जय उनको बेरहमी से मसल रहा था। अपनी चूत सहलाते हुए अमीना बोली, “हाँ जय… साले! तेरा लंड मेरी बच्चेदानी पे ठोकर दे रहा है। लगता है तेरे लौड़े को मेरी गरम चूत में झड़ कर इस चूदाई की निशानी छोड़नी है। तेरे लौड़े से चुदवाने से मेरी चूत सूज गयी है लेकिन अभी तक दिल नहीं भरा… मेरे चोदू राजा।”

अमीना के उछलते मम्मे मुठ्ठी में दबाते हुए जय बोला, “साली रंडी अब और चोदुँगा तुझे, ये तो नॉर्मल स्टाइल हुई… अभी तुझे कुत्तिया बनाके चोदना है। तेरी जैसी गरम मुसलमान औरत को कुत्तिया बनाके चोदने में बड़ा मज़ा आता है मुझे… अमीना छिनाल! इससे लंड को ठंडक पहुँचती है मेरे। देख मम्मे कैसे उछल रहे हैं हवा में, मादरचोद मज़ा आ रहा है तुझे चोदने में।”

अब अमीना की हालत बड़ी खराब होने लगी। इतना दर्द उसे पहले कभी नहीं हुआ था। वो कमर थोड़ी ऊपर करके अब जय का पूरा लंड चूत में ना लेते हुए बोली, “हाँ… हाँ… तुझे मज़ा आ रहा है भड़वे! पर मेरी हवा बिगड़ने लगी है तेरे लौड़े से।”

अमीना की कमर कस कर पकड़ कर चूत में लंड ठेलते हुए जय बोला, “तो क्या करूँ? तुझे नीचे ले कर आखिरी धक्के मार के तेरी चूत में अपनी निशानी छोड़ जाऊँ क्या अमीना रंडी?” अमीना को अब बोलने की ताकत नहीं रही थी इसलिये वो चिल्लाते हुए बोली, “आह आहहह आहहह ओहहह अल्लाह आहहह ओहहह मेरे मौला ओहहह अल्लाह चूत फट गयी ओहहहहह हाय गाँआँआँडू आहहहहह आहहह होओओओओ अल्लाह।”

जानवर बनके जय बिना रहम के उसको चोदते हुए बोला, “फटने दे रंडी, तुझे याद रहेगा कि असली मर्द के लंड से तेरी चूत फटी, ये ले… और ले… और ले साली।” बेरहमी से उसे चोदते हुए और फिर उसे अपने नीचे ले कर जय चोदते हुए बोला, “बोल मेरी रंडी बनेगी ना? तेरी बेटियाँ देगी ना मुझे अमीना?” अब जय का लंड पूरा का पूरा अमीना की बच्चेदानी पर धक्के देने लगा था। अपना सीना जय के मुँह पे दबाते हुए अमीना बोली, “अरे बन गयी हूँ ना अब मैं तेरी रंडी जय और हाँ… दूँगी तुझे अपनी बेटियाँ भी। पर क्या मेरी बेटियाँ तुझसे चुदवा सकेंगी, ये तगड़ा लौड़ा उनकी चूत फाड़ नहीं देगा राजा?”

मुँह पे आये अमीना के मम्मे चूसते हुए और कमर कस के पकड़ कर चोदते हुए जय बोला, “नहीं ले सकी मेरा लंड तो चूत फटेगी और क्या होगा? पर असली मर्द से चूत फटने का मज़ा तो मिलेगा ना उनको? नहीं तो ना जाने कौनसे चूतियों से अपनी चूत चुदवाके अपनी जवानी बर्बाद करेंगी वो दोनों।”

अमीना जय के बाल संवारते हुए झड़ने के करीब होने से अपना जिस्म जय के बदन से रगड़ते हुए बोली, “ठीक है भोंसड़ी वाले! तुझे मैं अपनी बेटी को चोदने दूँगी में। तूने जो मुझे चोदके मुझ पर मेहरबानी की है उसके लिये तुझे अपनी बेटी जरूर दूँगी।”

जय भी झड़ने पे आया था। वो कस कर अमीना को पकड़ कर उसके निप्पल बेरहमी से चूसते चबाते और चूत चोदते हुए बोला, “मैं भी झड़ने वाला हूँ तेरी गरम चूत में, बहुत मज़ा आया जान, ले और ले रंडी। आहहहहहह ये ले रंडी साली मज़ा आया तुझे चोदने में अमीना।”

अमीना जैसे ही झड़ने लगी तो चिल्लाती हुई बोली, “आहहहहह आआआहहहह आँआँआँआँहहहहह मैं तो ओओओओओओ गयीईईईई ऊऊईईईई अल्लाह आहहहह, मुझे कस कर पकड़ जय।” अमीना की उछल कूद से जैसे ही जय झड़ने लगा तो अमीना को कस कर पकड़ कर अपना लंड पूरा अंदर तक घुसाते हुए बोला, “ये ले छीनाआआआआल चूत आहहहहहहह क्क्याआआआआ चूत है तेरीईईईई।” जय कस के अमीना को पकड़ कर लंड का पानी उसकी चूत में छोड़ने लगा। अमीना को वो गरम पानी अपनी बच्चेदानी पे गिरने का एहसास होने लगा। वो गरम-गरम लावा उसकी चूत में जाके उसकी चूत को ठंडक देने लगा। लंड का पानी चूत को भरने लगा और चूत भरने के बाद काफी वीर्य बाहर आकर अमीना की जाँघों को गीला करता हुआ नीचे गिरने लगा। जय निप्पल चूस कर बोला, “ले जान आआआआआहहहहहह सालीईईईई पूराआआआआ पानी ले रही है तेरी चूत अमीना छिनाल।”

अमीना ने जय का चेहरा पकड़ कर एक ज़ोरदार चुम्मा उसके होंठों पे सटाया। अमीना अब भी हाँफ रही थी और संतोष के मारे उसकी आँखें अभी भी बंद थी। पूरा झड़ने के बाद दोनों हाँफ रहे थे। जैसे ही जय का लंड चूत से निकला तो ’पॉप’ की आवाज़ हुई और लंड निकालने के बाद चूत में वीर्य बाहर बहने लगा। अमीना की ब्रा से चूत साफ़ करके जय उठ कर घुटनों पे खड़ा हो कर लंड अमीना के होंठों के पास लाते हुए बोला, “मेरे इस मुस्टंडे लंड को कैसे साफ़ करेगी अमीना राँड?” लंड अमीना के होंठों पे घुमाते हुए जय आगे बोला, “ले रंडी चाट के साफ़ कर मेरा लंड… छिनाल अमीना।” अमीना थकान की वजह से यंत्रवत अपनी जीभ बाहर निकाल कर जय का लंड चाटने लगी। जय हौले-हौले अपना लंड अमीना के मुँह में डाल के साफ़ करते हुए बोला, “अच्छे से चूस कर साफ़ कर रंडी, ये तेरे हिजड़े शौहर का लौड़ा नहीं है, तेरे यार का लौड़ा है। ठीक से साफ़ कर इसे।”

अमीना के पूरा लंड चाट कर साफ़ करने के बाद वो दोनों उसी खुली हवा में थकान से निढाल हो कर लेट गये।

******************

उस रात जय से चुदवाने के बाद अमीना सहेली के घर जाने की बजाय वापस अपने घर गयी। उन फटे और गंदे कपड़ों में सहेली के घर जाती तो सहेली को पक्का शक हो जाता। फटे ब्लाउज़ में बिना ब्रा के सीने को गंदी साड़ी में लपेट कर, साड़ी बिना पेटीकोट के पैंटी पर बाँध कर वो घर आयी। जय अमीना को घर तक छोड़ने गया था। अमीना की बेटी सो रही थीं इसलिये उसे कुछ तकलीफ नहीं हुई घर में।

६-७ दिन के बाद वो जय से मिलने उसके घर गयी। चुदाई के बाद जब वो जय की बांहों में पड़ी थी तो जय ने उसकी बेटियों के बारे में पूछा। मुस्कुराते हुए अमीना बोली, “तू मेरी बेटियों के बारे में जानने के लिये बेताब है… यह मैं जानती हूँ जय… तो सुन, मेरी एक बेटी हॉस्टल में पढ़ती है और दूसरी घर में रहती है। ज़हरा इंजीनियरिंग में है और रुबीना बी.कॉम कर रही है। मैंने तुझसे वादा किया था तो अब निभाने का वक्त आया है। बोल कैसे करना चाहता है तू चुदाई का खेल मेरी रुबीना के साथ?”

जय ने प्लैन पहले ही सोच कर रखा था। अमीना के मम्मों से खेलते हुए वो बोला, “चल कोई बात नहीं, सिर्फ़ रुबीना भी मिली तो कोई गम नहीं, मौका मिला तो ज़हरा को भी चोदुँगा। सुन अमीना तू एक काम कर, अपने घर में मुझे तू अपने मायके का फैमली फ्रेंड बना कर रख। २-३ दिन में घर के लोगों का टाइमिंग ऑबज़र्व कर के प्लैन बनाऊँगा।”

अमीना ने जय की यह बात मानी और कुछ ही दिनों में जय को अपने घर में मुँह बोला भाई बना के ले आयी। अमीना के शौहर और बेटी ने अमीना की बात मान कर जय का स्वागत किया। रुबीना को देखके ही जय का लंड उठने लगा। वो बीस साल की जवान लड़की एक दम उसकी माँ पर गयी थी। वहीं रंग, वहीं चेहरा, वहीं आँखें, वैसा ही गठीला जिस्म, बत्तीस के कड़क मम्मे, पतली कमर और गोल गाँड। सलवार कमीज़ और ऊँची हील की सैंडल में रुबीना का वो रूप देख कर जय उसे देखता ही रह गया। जय ने नोटिस किया कि रुबीना उसको अजीब नज़र से देख रही थी। उस नज़र से जय समझ गया कि रुबीना को अपनी जवानी का एहसास है और वो भी मर्द का साथ चाहती है।

इन दिनों में जय ने देखा कि रुबीना उसे कई बार ध्यान से देखती थी। वो जब वक्त मिले तब जय से बात करने बैठ जाती। जय भी यही चाहता था और वो भी दिल खोल कर रुबीना से बातें करता था। बात करते वक्त वो रुबीना का पूरा जिस्म निहारता और रुबीना भी बिना कोई डर या शरम के उसके सामने बैठ कर बात करती थी। प्लैन के मुताबिक जय ने घर के लोगों का टाइमिंग ऑबज़र्व किया। अमीना का शौहर सुबह जा कर रात में ही आता था और रुबीना का दोपहर का कॉलेज होता था इसलिये वो सुबह घर में ही रहती थी। यह सब देख कर जय ने प्लैन बनाया और अमीना को बताया। जय का प्लैन सुन कर अमीना खुश हुई और प्लैन के मुताबिक चलने का वादा किया। उन ५-६ दिनों में जय रोज़ दोपहर को अमीना को चोदता था। रुबीना के कॉलेज जाने के बाद शाम तक यह मस्ती चलती रहती थी। जय ने अमीना को शराब पीने की भी आदत डाल दी। शराब पी कर अमीना नशे में और भी मादकता से चुदवाती थी।

दूसरे ही दिन सुबह शौहर के काम पर जाने के बाद जब रुबीना नहाने गयी तो अमीना और जय एक दूसरे की बांहों में आ गये। लूँगी के ऊपर से जय का लंड पकड़ कर अमीना ने कहा, “जय, आज तुझे मैं अपनी रुबीना दे रही हूँ। मुझे पता है कि मेरी बेटी गरम है। मुझे कई बार उसके बिस्तर के नीचे खीरा-काकड़ी मिली है। बाथरूम में अभी चूत में उँगली कर रही होगी। तू उसे अब खूब चोद और उसे भी जवानी का मज़ा दे।”

अमीना को नीचे बिठा कर अपना लंड उसके होंठों पे रख कर जय बोला, “तू अब उसकी चिंता मत कर मेरी रंडी, उसे तो खूब मस्ती से चोदुँगा मैं। मुझे पता है तेरी बेटी है तो वो गरम चूत तो होगी है।”

बाथरूम के दरवाजे के बाहर नीचे बैठ कर अमीना जय का लंड चूसने लगी और जय की-होल से बाथरूम में रुबीना को देखने लगा। रुबीना को नहाते देखने के ख्याल से और अमीना द्वारा लंड चूसने से वो यह सोच कर गरम हुआ कि, है तो साली बीस साल की पर जिस्म एक भरी हुई औरत जैसा है। जय ने यह भी सोचा कि यह भी उसकी माँ जैसी ही गरम और नमकीन होगी बिस्तर में। की-होल से जय ने देखा कि कपड़े निकाल कर रुबीना अपना नंगा जिस्म आइने में देखती हुई सहला रही है। घूम कर अपनी गाँड, सीना और चूत को देख कर रुबीना उनको सहलाने लगी। जय का लंड नंगी रुबीना को देख कर और गरम हो गया जिसे अमीना मस्ती से चूस रही थी। कितनी हरामी औरत थी यह अमीना जो अपने यार को अपनी नंगी बेटी का जिस्म दिखा कर उसका लंड चूस रही थी। अब जय ने देखा कि रुबीना अपने मम्मे मसलते हुए साबून से अपनी चूत को भी सहलाने लगी। ऐसा करते वक्त वो अपनी आँखें बंद कर रही थी और अपने होंठों को अपने दाँतों से दबाती थी। रुबीना बार-बार अपनी चूत में उँगली भी कर रही थी। उसकी गुलाबी, बिना झाँटों वाली चूत गीली थी। उँगली से वो दाना दबा कर सिसकरियाँ भरती और दूसरे हाथ से मम्मे मसलती हुई आँखें बंद करके मस्ती कर रही थी।

यह सब देख कर जय ने अमीना के मम्मे मसलते हुए उसका मुँह चोदना शुरू किया। उसने सोचा कि यह साली अपनी माँ पर गयी है, गरम माल है, काटे पर आयी है, थोड़ा और गरम करो, इसकी शरम हटाओ तो चुदवाने को तैयार होगी। वैसे भी प्लैन के मुताबिक घर में सिर्फ़ हम दो हैं और उसकी रूम लॉक है जिससे उसे सिर्फ़ टॉवल में ही बाहर आना है। १०-१५ मिनट उस कमसिन जवानी का नंगा नज़ारा देख कर जय का लौड़ा एक दम गरम हो गया। अब उसने अमीना को उठाया और जाने के लिये बोला। अमीना रुबीना का रूम लॉक करके कहीं बाहर चली गयी। रुबीना का रूम बाथरूम के पास ही था, इसलिये वो नहाने जाते वक्त अपने बाकी सब कपड़े बिस्तर पर निकाल कर रख कर सिर्फ़ टॉवल में नहाने गयी थी। जैसे ही रुबीना का नहाना हुआ और उसने टॉवल लपेट लिया तो जय आ कर सोफ़े पर बैठ गया।

रुबीना जब बाथरूम से टॉवल लपेट कर बाहर आयी तो जय को देख कर शर्मा गयी पर फिर हल्की मुस्कुराहट दे कर अपने कमरे के पास गयी। कमरे का दरवाजा लॉक देख कर वो हॉल क्रॉस करके अपनी माँ के बेडरूम की तरफ़ गयी। जब वो जय के सामने से गुजरी तब जय उसका गीला जिस्म बड़े ध्यान से देखते हुए आँखों में भरने लगा। माँ को बेडरूम में ना पा कर रुबीना वहीं से चिल्लायी, “अम्मी… ओ… अम्मी मेरे कपड़े तो देना। कहाँ हो तुम अम्मी?”

आँखों के कोने से जय रुबीना को देखने लगा। गीले गोरे जिस्म पर लाल टॉवल लिपटा था, बाल और जिस्म भीगे हुए थे, गोरी टाँगें घुटनों के थोड़े ऊपर तक नंगी नज़र आयी उसे। पूरा हुस्न देख कर जय बोला, “क्या हुआ रुबीना? क्यों इतनी ज़ोर से चिल्ला कर अपनी अम्मी को बुला रही हो तुम?” जय को अपना भीगा जिस्म देखते देख कर रुबीना ज़रा शरमा कर कमरे में जा कर बोली, “अम्मी कहाँ है? उसको कहो ना मेरे रूम में आये।”

जय बोला, “अरे अमीना तो कुछ काम से बाहर गयी है, वो बोली थी की एक घंटे में आऊँगी, तुम को क्या काम है बोलो?” यह सुन कर रुबीना धीरे से बोली, “ओफ्फ ओह उसको भी इसी वक्त जाना था? अब मेरे कपड़े? क्या करूँ मैं? क्या पूरा घंटा सिर्फ़ यह टॉवल लपेटे रहूँ?” जय अब उसके रूम में आ कर रुबीना को पूरी तरह देखते हुए बोला, “क्या हुआ तेरे कपड़ों को? क्यों परेशान है तू?”

जय को अचानक रूम में देख कर रुबीना पर्दे को अपने आप पर लपेट कर बोली, “ओहह आप क्यों आये यहाँ? मॉम ने आपको चाबियाँ दी हैं मेरे वार्डरोब की?” रुबीना की अदा पर मुस्कुराते हुए जय बोला, “अरे क्या हुआ? अब तेरी अम्मी मुझे चाबियाँ क्यों देगी? आखिर हुआ क्या है जो इतनी परेशान हो गयी है तू?”

“देखो ना… उससे बोला था कि वार्डरोब में से कपड़े निकाल कर जाओ। उसने कपड़े भी नहीं रखे और चाबियाँ भी नहीं हैं। अब क्या मैं ऐसे बैठूँ उसके आने तक?” जय ने रुबीना के माथे पर पसीना देखा। जय अमीना के बिस्तर पे बैठ कर वहाँ पड़ी मैगज़ीन देखते हुए बोला, “अरे हाँ यह तो सही है, पर अब किया भी क्या जा सकता है? अब तेरी अम्मी आने तक तुझे ऐसे ही बैठना पड़ेगा।”

रुबीना सोच में डूब गयी और उसके हाथ से पर्दा छूट गया। जय अब एक दम पास से टॉवल में लिपटी रुबीना को देखने लगा। टॉवल काफी छोटा था, बड़ी मुश्किल से रुबीना की जाँघों से शुरू हो कर उसके मम्मों के ऊपर तक आया था। रुबीना का कमसिन गीला जिस्म, टॉवल के ऊपर से झाँक रहे मम्मे, उसकी गोरी टाँगें, उसका हुस्न देख कर जय का लंड लूँगी में उछलने लगा। रुबीना के सीने पे नज़र गड़ा कर वो बोला, “बोल मैं कैसे मदद करूँ तेरी? वार्डरोब तोड़ डालूँ क्या तेरे लिये?”

रुबीना को जय की बात और नज़र से ख्याल आया कि वो टॉवल में जय के सामने खड़ी है पर अब वो बिना झिझक उसी हाल में रूम में घूमते हुए सोचने लगी। कमरे में घूमते वक्त उसकी नज़र जय के तने हुए लौड़े पर पड़ी। वो जय के लंड की तरफ़ देख कर बोली, “नहीं… नहीं वार्डरोब ना तोड़ो… लेकिन कुछ सोचो ना।” रुबीना की नज़र अपने लंड पर देख कर अंजान बन कर जय अपने पैर थोड़े और खोलते हुए बोला, “एक काम कर सकते हैं अगर तू हाँ बोले तो। चाहे तो मेरी शॉट्‌र्स और बनियान पहन सकती है तू।” जय को अजीब नज़रों से देखते हुए रुबीना बोली, “क्या आपकी शॉट्‌र्स और बनियान पहनूँ मैं?”

रुबीना के पास जा कर जय बोला, “हाँ, क्यों? कोई प्रॉब्लम है तुझे? या तुझे इस टॉवल में ही रहना है रुबीना?” रुबीना ज़रा सोच कर बोली, “पर… वो मैं… ठीक है दे दो अपनी शॉट्‌र्स और बनियान मुझे।” रुबीना का हाथ पकड़ कर अपने रूम में ले जा कर जय ने उसे एक दम छोटा बनियान और छोटी सी शॉट्‌र्स दी। रुबीना शॉट्‌र्स और बनियान देख कर दंग हो गयी। शॉट्‌र्स पे जगह-जगह दाग लगे थे और बनियान भी बड़ी छोटी साइज़ का था। दोनों कपड़े देख कर रुबीना बोली, “ये कपड़े? ये शॉट्‌र्स तो बिकिनी से भी छोटी है, बनियान कितना छोटा और टाइट है।”

जय रुबीना के हाथ से कपड़े ले कर बिस्तर पर फ़ैलाते हुए बोला, “अब हमारे पास कोई और चारा भी तो नहीं है, देख कम से कम इससे तेरे बदन पे कपड़े तो होंगे ना? भले ये कपड़े छोटे हैं पर तेरी इस टॉवल से अच्छे हैं, चल वो शॉट्‌र्स और बनियान पहन ले जल्दी।”

और कोई रास्ता नहीं था तो रुबीना कपड़े उठाने के लिये झुकी। जैसे ही वो झुकी, उसका टॉवल खुल गया। रुबीना ने झट से टॉवल से वापस अपना जिस्म ढक लिया पर तब तक उसने जय को अपने नंगे जिस्म का पूरा नज़ारा दिखा दिया था। वो टॉवल बाँध कर, कपड़े उठा कर ज़रा शर्माते हुए बोली, “उफ्फ, इस टॉवल को भी अभी गिरना था क्या? पर अब ठीक है… क्या करें? ये कपड़े तो पहनने ही पड़ेंगे… नहीं तो टॉवल बार-बार खुलेगा। लेकिन यह दाग धब्बे कैसे हैं इस शॉट्‌र्स पर?” रुबीना के पूरे नंगे जिस्म की झलक देख कर जय का लंड और तन गया। होंठों पे जीभ घुमा कर मुस्कुराते हुए वो रुबीना के पास आ कर टॉवल की गाँठ पक्की करते हुए बोला, “वो दाग काहे के हैं… बाद में बताऊँगा तुझे, पर एक बात अभी सुन, तू बिना कपड़ों के बड़ी मस्त दिखती है, दिल करता है तेरा टॉवल बार-बार निकल जाये ।” जय की बात से रुबीना एक दम फीकी पड़ गयी और शरमा कर अपने रूम में कपड़े लेकर दौड़ गयी। दरवाज़ा बंद करके बिना लॉक किये वो टॉवल निकाल कर जय के दिये हुए कपड़े पहनने लगी। सिर्फ़ दो कपड़ों में वो खुद को आइने में देख कर शर्माते हुए फिर बाहर आयी।

रुबीना को उन कपड़ों में देख कर जय खुश हुआ। शॉट्‌र्स से सिर्फ उसकी गाँड ढकी थी, गोरी टाँगें साफ़ झलक रही थी, बनियान नाभि तक आया था और टाइट होने से मम्मे उभरे हुए दिख रहे थे और रुबीना के कड़क निप्पल भी जय को साफ़ दिख रहे थे। गोल घूम कर रुबीना का उन तंग कपड़ों में ढका जिस्म देख कर वो बोला, “वाह क्या अच्छी दिखती हो इन कपड़ों में तुम। कसम से… इतनी मस्त लड़की आज तक देखी नहीं मैंने।” रुबीना बार-बार बनियान नीचे खींचती हुई अपनी नाभि को ढकने की कोशिश कर रही थी।

सोफ़े पे बैठ कर वो बोली, “क्या आप भी ना? कैसी बात करते हो? मुझे शरम आ रही है आपकी बातों से।” रुबीना के सामने बैठ कर उसका कमसिन जिस्म निहारते हुए जय बोला, “रुबीना अगर तुझे लड़कों ने इस ड्रेस में देखा तो टूट पड़ेंगे तुझ पर, तेरी जैसी मस्त लड़की उन्होंने कभी देखी नहीं होगी और ना देखेंगे। मैं झूठ नहीं बोल रहा हूँ बेटी, ऐसी कमसिन लड़की को इतने तंग कपड़ों में लड़के देखेंगे तो ना जाने क्या करेंगे तेरे बदन के साथ।”

अब और भी शर्माते हुए रुबीना ने अपनी नाभि छुपाने के लिये बनियान नीचे खींची। पर इससे जय को उसका आधे से ज्यादा क्लीवेज दिखने लगा। दुविधा में फंसी रुबीना बोली, “हुम्म जाने दो ना… आज सुबह से आपको कोई मिला नहीं? ऐसे कपड़े पहन कर क्या कोई लड़की बाहर जायेगी? यह तो आज अम्मी बाहर गयी है… इसलिये मैंने पहने हैं घर में यह कपड़े… नहीं तो मैं कभी नहीं पहनुँगी यह कपड़े।”

जय अपनी टाँगें फ़ैला कर अंजान बनते हुए लंड को मसलता हुआ रुबीना का क्लीवेज देख कर बोला, “अरे रुबीना तेरी जैसी सैक्सी लड़की कसम से आज तक ना दिखी ना मिली। तेरी बात सच है कि तू बाहर नहीं जायेगी ऐसे कपड़े पहन कर पर घर में जो मर्द हैं वो अपने पर काबू कैसे रख पायेंगे तेरा यह कमसिन जिस्म इन कपड़ों में देख कर रुबीना?”

रुबीना ने शरमा कर बनियान अपने सीने पे खींचा जिससे उसकी नाभि नंगी हो गयी। असल में रुबीना को मर्द का साथ चाहिये था। जबसे उस पर जवानी आयी और जबसे मर्द उसको अजीब नज़रों से देखने लगे थे, तबसे वो मर्दों से अपनी तारीफ सुनने को लालियत हो गयी थी। जब कोई लड़का उस पर फिकरा कसता या भीड़ में कोई उसका बदन छूता तो उसे अच्छा लगता था। वो चुदाई के बारे में सब जानती थी। जब तक ज़हरा यहाँ थी वो दोनों बहनें अक्सर चुदाई की बातें करती थीं पर जबसे ज़हरा हॉस्टल गयी तबसे वो अकेली पड़ गयी थी। अब जबसे जय घर में आया था, उसकी नज़रों से रुबीना समझ गयी थी कि यह मर्द उसे चाहता है। वो भी जय पर पहली नज़र में फ़िदा हो गयी थी। इसलिये वो जय से खूब बातें करती और आज भी बिंदास हो कर वो सिर्फ़ शॉट्‌र्स और उस छोटी सी बनियान में उसके सामने बैठी थी। आज जय अगर कुछ करना चाहे तो रुबीना ने फ़ैसला किया था कि वो झूठा नाटक करेगी पर उसे सब करने देगी। आज उसकी अम्मी भी घर में नहीं थी तो उसे कोई डर भी नहीं था। अपनी नंगी टाँगें सहलाती हुई रुबीना बोली, “क्या आप भी ना? अब जाने दो मेरी बात, आपने इन धब्बों की वजह नहीं बतायी, कैसे लगे यह धब्बे यहाँ?” यह पूछते हुए रुबीना ने अपनी टाँगें खोल कर उँगली अपनी चूत के ऊपर शॉट्‌र्स पे लगे धब्बे पे रखी।

जय आ कर रुबीना के पास बैठ गया। रुबीना के जवाब और हर्कत से वो समझ गया कि रुबीना शर्माने वाली लड़की नहीं है। वो जवानी में कदम रखती हुई ऐसी लड़की है जो मर्द का साथ चाहती थी। रुबीना के कंधे पर हाथ रख कर नज़र उसकी चूत और मम्मों पर बारी-बारी घुमाते हुए जय बोला, “अरे इतनी क्या जल्दी है बेटा, सब होने के बाद बता दूँगा। मेरी बात का जवाब दे, तुझे ऐसे देख कर घर का यह मर्द अपने आप पे काबू कैसे रख सकता है? ऐसा कसा हुआ गोरा जिस्म इतने कम कपड़ों में देख कर मेरी तो हालत मस्त हो रही है ।”

जय के स्पर्श से रुबीना सिहर गयी। उसे मर्द का स्पर्श तो अच्छा लगा पर शर्माते हुए वो बोली, “क्या आप भी? मैं तो आपसे बहुत छोटी हूँ और आप यह कैसी बात कर रहे हैं मुझसे? यह सब बातें जाने दो, चलो टीवी देखते है हम।” रुबीना ने रिमोट ले कर टीवी ऑन किया। रिमोट लेने के बहाने रुबीना और जय में लड़ाई शुरू हुई। रुबीना ने घूम कर रिमोट छुपाया और जय पीछे से उसे दबोचते हुए रिमोट लेने की कोशिश करने लगा। रुबीना ने भी रिमोट नहीं छोड़ा तो जय रिमोट लेने के बहाने रुबीना का जिस्म अपनी बांहों में ले कर दबाने लगा। इससे रुबीना की गाँड पर उसका लंड रगड़ रहा था। इस खींचा तानी में उसने रुबीना के सीने पर भी हाथ फिराया। रुबीना के कड़क मम्मे छू कर जय खुश हो कर बोला, “बोला ना टीवी मत लगाओ, हम सिर्फ़ तेरी बात करेंगे। रुबीना माना मेरी उम्र सिर्फ २६ की है तो तू इतनी भी छोटी नहीं है मुझसे… लगभग हम-उम्र ही हैं हम?”

जय का लंड गाँड पे रगड़ने और मम्मे मसलने से रुबीना एक दम सिहर गयी। अपनी गाँड और मम्मों पे जय का कड़क लंड और उसके हाथ उसे अच्छे लगे। वो जय की बांहों से छूटने की कोई कोशिश ना करते हुए बोली, “पर हैं तो आप अम्मी के मुँह बोले भाई ना? वो सब जाने दो, देखो अब टीवी ऑन करो नहीं तो मैं आप से नहीं बोलूँगी और रूम में चली जाऊँगी।”

रुबीना की तरफ़ से कोई विरोध ना पा कर जय उसे और कस कर पकड़ कर लंड पर दबाते हुए और दूसरे हाथ से मम्मे मसलते हुए बोला, “हाँ मेरी और तेरी अम्मी की बात जाने दे, अब सिर्फ़ तेरी बात करेंगे हम। तुझे मैंने रूम में जाने दिया तभी तो जायेगी ना तू? वर्ना मेरी बांहों से कैसे निकल कर जा सकती है… बता मुझे? वैसे भी उस बेकार टीवी से अच्छा तो हमारा यह लाइव चैनल है समझी?” रुबीना को अपने जिस्म से हो रहा यह खिलवाड़ अच्छा लग रहा था। उसने रिमोट साइड में रख दिया पर फिर भी जय ने उसे छोड़ा नहीं। उसके मसलने से अब रुबीना के मम्मे और कड़क हो कर निप्पल भी तन गये। वो बिना कुछ किये बोली, “क्या? लाइव चैनल? वो कौनसा?”

जय अब बनियान में हाथ डाल कर रुबीना के नंगे मम्मे सहलाने लगा। उसके निप्पल आराम से सहलाना और गाँड पे लंड रगड़ना उसने जारी रखा। रुबीना के नंगे कड़क निप्पल से खेलते हुए जय बोला, “लाइव चैनल कौनसा है वो बताऊँगा तुझे रुबीना, सब्र कर। यह बता कि कितने लड़के तुझ पर मरते हैं? तेरा रूप देख कर मरने वालों की कमी नहीं होगी ना? कोई खास पीछे पड़ा है तेरे?” रुबीना अब और गरम हो गयी थी। वो जो चाहती थी वो मिल रहा था उसे। जय की बांहों में बिना हिले मस्त होती हुई वो बोली, “हाँ एक पूरा ग्रुप है लड़कों का, उसका लीडर है सबीर, सब के सब मुस्टंडे हैं, सबीर, केतन, कैलाश और नईम। पूरा ग्रुप पीछे पड़ा है मेरे और बहुत छेड़ता भी है।”

हल्के से दूसरा मम्मा भी मसलते हुए जय बोला, “ओह अच्छा… ४-४ लड़के पीछे पड़े हैं तेरे? वैसे भी तू है इतनी मस्त कि कोई भी तेरे पीछे पडेग़ा। रुबीना तू दिखती ही है इतनी मस्त है कि कोई भी लड़का तुझ पर मर मिटे। क्या छेड़ते हैं तुझे? उनमें से कोई पसंद है तुझे?” दोनों मम्मे मसलने से रुबीना बेहद गरम हो गयी पर अब उसे ज़रा शरम भी आ रही थी। जय की बांहों से छूटने का नाटक करती हुई वो बोली, “आप मुझे ऐसे मत छूयें। प्लीज़ मुझसे दूर बैठ कर बात करो। शी मुझे नहीं कोई पसंद कोई उन लड़कों में से, सबके सब मवाली जैसे हैं। पता नहीं कॉलेज वालों ने कैसे एडमिशन दिया उनको।”

रुबीना को और कस कर पकड़ कर एक हाथ मम्मों पे रख के दूसरे हाथ से रुबीना का नंगा पेट मसलते हुए जय बोला, “हा हा… अरे तेरी जैसी मस्त लड़की को छेड़ने के लिये ही एडमिशन लिया होगा उन्होंने। अच्छा यह बता कि क्या छेड़ते हैं तुझे वो लड़के?”

रुबीना को यह मस्ती अच्छी लगने लगी पर नाटक करते हुए वो झपट के जय के चुंगल से खुद को छुड़ा कर अब उसके सामने सोफ़े पे बैठ कर बोली, “जाओ मैं आपसे नहीं बोलती। आप भी उन लड़कों जैसे छेड़ रहे हो, वो लड़के मुँह से छेड़ते हैं और आप हाथ से। वो लोग तो बहुत गंदा-गंदा बोलते हैं, वो सुन कर तो कान का कचरा भी निकल जाये, ऐसा तो कोई बोल ही नहीं सकता।”

क्रमशः