आंटी बोली बेटा मुठ मार कर दिखा

वो मेरी मम्मी की antarvasna सहेली थी और हमारे kamukta अपार्टमेंट में ही पास वाले फ्लैट में रहती थी. हम लोगो का घर हम लोगो के सेम फ्लोर पर था. लीला आंटी इतनी सेक्सी थी, कि किसी का भी लंड खड़ा करवा सकती थी. वो ड्रेस और टॉप भी डीप नेक वाली पहनती थी. हलाकि वो सोसाइटी में दुपट्टा ही रख कर निकलती थी. लेकिन हमारे घर बिना दुपट्टे के आया करती थी मम्मी के साथ. उसका एक ३ साल का लड़का भी था. मैं कई बार उसके घर पर गया था. उसके लड़के के साथ खेलने के लिए… तब वो जान बुझ कर दुपट्टा नहीं करती थी और झुकती थी. तब मैंने उसका क्लीवेज पहली बार देखा था. ऐसा अक्सर होता था. आंटी ने ये कई बार नोटिस किया, लेकिन उन्होंने कभी कुछ बोला नहीं. मैं आंटी के ब्रा और पेंटी, जो वो छत पर सुखाने के लिए डालती थी.. उसको चुरा लेता और उसमे मुठ मारता था.

एक बार मेरे घर पे, मेरी फॅमिली बाहर गयी हुई थी. आंटी ने मम्मी को बोला, कि उनकी एब्सेंस में वो मेरे लिए खाना बना दे. अंकल सेल्समेन थे, इसलिए उनको अक्सर आउट ऑफ़ स्टेशन जाना पड़ता था. उस दिन भी अंकल नहीं थे. मैंने लीला आंटी ने और उसके लड़के ने खाना खा लिया था. मैंने खाने की तारीफ की, तो आंटी शर्मा गयी. मैंने मौके के फायदा उठाया और बोल दिया, खाना आपकी तरह से गरम था. ये सुन कर आंटी ने मुझे नॉटी वाली स्माइल दे दी. फिर वो बोली, इतनी बाहर धुप है. थोड़ी देर मेरे साथ बैठ जाओ और बातें करो. थोड़ी देर में चले जाना, घर में वैसे भी कोई नहीं होगा और कॉलेज में छुट्टिया चल रही है तेरे.

आंटी का बच्चा सोने की जिद कर रहा था. तो आंटी उसे गेस्ट रूम में ले जाने लगी. उसका बच्चा मुझे भी बुलाने लगा. वो बोल रहा था, कि भैया चलो ना तुम भी और मुझे कोई अच्छी स्टोरी भी सुना देना. आपकी कहानी सुनकर मजा आता है. तो हम उसे सुलाने के लिए गए थे. मैंने कहानी कह रहा था और आंटी भी वहीँ लेटी हुई थी. बच्चा धीरे – धीरे सो रहा था. देसी पोर्न स्टोरी डॉट कॉम

तभी मौके का फायदा उठा कर मैं आंटी के बूब्स और गांड पर हाथ लगा रहा था. आंटी ने कुछ नहीं कहा. ऐसे ही पड़ी रही वो, जैसे ही उसको कुछ पता नहीं हो. लेकिन मुझे उसकी साँसे बढती हुई महसूस होने लगी. ऐसे मैं बच्चा सो गया. मैंने आंटी को बोला, मैं एक मिनट में आया. मुझे वाशरूम जाना है. मैं आंटी के बेडरूम वाले वाशरूम में चला गया. मेरा लंड अभी भी आंटी के खयालो में था और हार्ड हो रहा था.

तभी मैंने आंटी की यूज्ड ब्रा एंड पेंटी देखी. मैंने पेंटी ली और उसे सूंघने लगा. फिर मैंने अपने लंड को सहलाने लगा. मैं इतना पागल हो चूका था पेंटी को सूंघने में, कि मैं ये भूल गया, कि मैंने वाशरूम का दरवाजा बंद नहीं किया था. अचानक से वो वहां पर आ गयी और मुझे मुठ मारते हुए पकड़ लिया. वो मुझ पर नाराज हो रही थी. असल में वो नाटक कर रही थी. वो बोल रही थी, ये क्या कर रहे हो? मम्मी को शिकायत करू क्या? मैंने कहा – सॉरी. आंटी सॉरी, आगे से ऐसे नहीं होगा. मेरे लंड अभी तक खड़ा ही हुआ था.

आंटी ने मेरे लंड को देखा और बोला, अभी तक क्यों खड़ा है? मैंने कहा, आप जैसी आंटी सामने हो, तो कैसे बैठेगा? आंटी कुछ देर चुप रही और फिर बोली – चल मुझे मुठ मार कर दिखा, कैसे मारेगा? मैं भी देखू, कैसे करता है? मैं हिल नहीं रहा था. मैंने कहा – अब तो सिर्फ आप ही इसे शांत कर सकती हो. आंटी मन ही मन में मेरे लंड को देख कर खुश हो रही थी. उसने कहा, ठीक है. उन्होंने कहा, कि टू ऐसे ही कपडे के ऊपर से मेरी गांड को सहला सकता है. उसने साड़ी निकाल दी और वो अब सिर्फ ब्लाउज में और साड़ी के नीचे जो पहनते है, उसमे थी.

फिर उसने दीवाल पकड़ी और वो थोडा झुकी. मैंने मेरे प्यारे लंड को उसके ऊपर रगड़ना शुरू किया और दोनों हाथो से आंटी कि कमर से उसे पकड़ लिया. फिर मैंने मुह से उसकी पीठ पर किस करना चालू किया. आंटी ने पूछा, ये क्या कर रहा है? तो मैंने कहा, ऐसे ही फीलिंग आती है मुझे. तो उसने कहा, ठीक है. मैंने उसकी कमर और पीठ पर सोफ्ट सी किस कर रहा था. वो भी ओन होने लगी थी. फिर मैंने जानबूझ कर हाथ से शावर ओन कर दिया, ताकि हम दोनों भीग जाए. अब पेटीकोट उसकी बड़ी सी गांड से चिपक गया था. आंटी ने कहा, ये किसने चालू किया? मैंने नाटक करते हुए कहा, शायद गलती से हाथ लग गया. देसी पोर्न स्टोरी डॉट कॉम

आंटी ने कहा, मैं सब जानती हु बेटा. तभी मैंने आंटी को धक्का लगा कर दीवाल कि तरफ पुश किया और उसके रसीले होठो पर अपने होठो को रख दिया. क्योंकि मैं जानता था, कि उसे सेक्स करना था. सिर्फ नाटक कर रही थी. जैसे ही मैंने किस स्टार्ट की, उसने मुझे उसकी ओर खीचा और किस करने लगी. मैंने किस करते हुए उसके बाल खोल दिए और अब वो गीली ब्लाउज में एकदम हॉट लग रही थी. उसकी क्लीवेज भी मुझे साफ़ दिख रही थी. फिर मैंने आंटी की जीभ को चूसने लगा और उसके ब्लाउज को खोल दिया.

फिर मैंने उसके गाल, कान को किस किया और वो मेरे चेस्ट पर हाथ फेर रही थी. फिर मैंने उसकी कमर और पेट पर किस किया. आगे – पीछे सब जगह पर और वो मेरे लंड पर हाथ फेर रही थी. फिर मैंने उसका चनिया भी उतार दिया और उसको बाहों में ले कर पीछे से दोनों हाथ से गांड दबाने लगा. वो आँखे बंद कर के फील कर रही थी. फिर मैं उसे बेडरूम में ले गया और उसकी चूत को पेंटी के ऊपर से सहलाने लगा. मैंने उसकी ब्रा के ऊपर से ही उसके बूब्स को दबाना शुरू कर दिया. वो एकदम मूड में थी. उसने मुझे खीच कर सीधा कर दिया और समुच चालू कर दिया. तब तक मैंने उसकी ब्रा ब्रा निकाल दी.

फिर मैं उसके बूब्स को दबाने लगा और चुन्चिया मसलने लगा. वो आहाहा अहः हाहा निकाल रही थी अहः अहहाह आराम से कर.. अहः अहः पर फिर मैंने एक बूब को चुसना स्टार्ट कर दिया और दुसरे को दबाने लगा. देसी पोर्न स्टोरी डॉट कॉम फिर ऐसे ही दूसरी तरफ किया. अब उस से रहा नहीं जा रहा था. उसने कहा, मेरी आग बुझा दे बेटा. प्लीज फक मी नाउ. मैंने उसकी पेंटी निकाल दी और उसकी गुलाबी शेव चूत को चाटने लगा. वो म्मम्म म्मम्मम व्व्वीविविविव कर रही थी और बोल रही थी फक मी… फिर मैंने कहा, आंटी ऐसे नहीं. मेरे लंड को ६९ में लेना पड़ेगा. फिर मैं उसके ऊपर बैठ कर उस से लंड चुस्वाने लगा और मैं उसकी चूत को चाट रहा था. हम दोनों को ही मजे आ रहे थे. फिर मैंने आंटी को मेरे पे बैठा कर लंड को अन्दर डालने लगा. आंटी की चूत एकदम गीली और टाइट थी. इसलिए मैंने फट से लंड अन्दर डाला. उसके मुह से आवाज़ आई आहाहाह…

फिर मैंने चोदना चालू किया. मैं अन्दर बाहर कर रहा था लंड को. साथ – ही – साथ उसके बूब्स को दबा कर उसके साथ किस चालू रखी. और वो अहः अहः अहः ऊऊफ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़् फक फक ऊओह्ह्हो स्स्स्स.. कर रही थी. थोड़ी देर में, मैं झड़ने वाला था. मैंने आंटी से पूछा, कि कहाँ पर झाड़ू? उसने कहा, उसके मुह में. फिर मैंने आंटी के मुह में झड दिया अहः अहः अहः.. और आंटी ने फिर से मेरा लंड चाटा. फिर हम बाथरूम में गए और एकदूसरे को साफ़ किया. और फिर हम ने अलग – अलग डोग्गी और दूसरी पोजीशन में सेक्स किया… पूरी दोपहर. आज भी अगर मुझे मौका मिलता है, तो मैं लीला आंटी को चोदता हु. होप.. आप भी कहानी को पढ़ कर अपना झाड़ चुके हो?