स्वाहा 3

इस उम्र में लड़की ऐसे antarvasna रहस्यमय व भयभीत kamukta करने वाले ख्वाब कहा देखती हैं? उन्हें तो हर तरफ घोडे पर सवार एक सुदर्शन राजकुमार ही नजर आता है। वे अपनी पसन्द के अनुसार अपने-अपने ‘आईडियल के सपने देखती हैं। वड कौन होगा? कहा से आयेगा? कब आएगा?

लडकिया ही क्या ख्वाब तो सभी देखते हैँ I क्या बूढे? क्या बच्चे? क्या जवान? अपनी-अपनी अतृप्त ख्वाहिशों को पूरा होते देखने के लिए अपनी उम्र का आधा हिस्सा इंसान आखें बंद करके गुजार देता है । यह वन्द आखें कितनी पुरसुकून हैं कार..आमद है– यह वात कोई उन लोगों से पूछे जो करबटें बदलते खुली आखों से गुजार देते है ।

साथ ही में नींद और खवाब ऊपर वाले का बरदान है। अगर इन्सान से उसकी नींद उसके ख्वाब छीन लिए जाए तौ यह जीवन नर्क बन जाए। कैसा यात्तनामय हो जाये ।

ये ख्वाब, गरीब को अमीर बनाते हैँ और कुवारो को विवाहिता यह तो प्रभु कृपा है किं सपनों पर कोई अकुश नहीं हैँ-इनक्री कोई सीमा नहीं है I इसान कैसे-सै ख्वाब देखता है….अगर यही ख्वाब यातनामय हौ जाए तो कैसे कैसे मासूम कैसी कैसी सजा पाये?

उसे दिखाई देने बाला यह ख्वाब उसके लिए किसी सजा से कम नहीं था।

वह सोच-सोच कर हलकान हुईं जा रही थी किं आखिह उसे यह सजा क्यो मिल रही है । यह ख्वाब उसपर, उसकी नींद पर, क्यो हावी कर दिया गया है। इस दिल दहला देने वाले ख्वाब में सोचते सोचते अतत: उसे नीद आ गई ।

और फिर………..

अगला अपडेट 8 बजेसातों भाईयों में बडा अपनापन था। लेकिन इन भाईयो की सन्तानों में प्यार-मुहब्बत न थी। उनमें सै कई लडके… घर छोडकर. जा चुके थे और अलग-अलग मकानों में रहते थे।

इन सात, भाईयों की पत्निया’ भी वहुत अच्छी थीं । उन्होने इस घर में जाकर घर को जोडने की तो कोशिश की थी तोडने… की कोशिश न की थी ।

गंगा मौसी हरि ओम के बड़े बेटे घनश्याम से बातें का रही थीं । घनश्याम अपने बाप की खूबियां ब्यान कर रहा था । दादा की जिन्दगी की घटनाएं, उनसे जुडी यादें और उनके गुणों की ही चर्चा हो रही थी और गगा’ मौसी यह सव बडे शोक से बडी. दिलचस्पी के साथ सुन रही थीं।

तभी धनश्याम की पत्नी मीरा हाथ में ट्रे लिये अन्दर आई। ट्रे में चाय के चार कप रखे थे। मीरा ने उन तीनों को एक-एक कप दिया च चौथा खुद’ लेकर सोफे पर बैठ गई। पर तभी न जाने क्या ख्याल आया-कप मेज पर रखा और अपने पति घनश्याम के पास जाकर उसके कान में कुछ कहा ।

घनश्याम ने अपनी बीवी की बात सुनकर उसकी तरफ देखा, फिर बोला— ” ठीक है जाओ, ले आओ॥”

” गंगा मोसी, मैं अभी आई। ” यह कहती हुईं मीरा कमरे सै निकल गई।