स्वाहा 5

बडे चकरा देने वाले antarvasna हालात थे। पहले kamukta वे भयावह स्वप्न और अब यह रहस्यमय लिफाफा रेखा बडी मुशिकल से ही खुद को सयत्त रख पा रही थी । कुछ देर बाद ही गगा मौसी और रेखा ने घनश्याम से इजाजत ली। गगा’, मीरा से गले लगकर मिली ।

घनश्याम ने अपने बडे वेट क्रो बुलाकर उससे कहा कि वह उन दौनों को अपनी गाडी में उनके घर तक छोडकर आए।

गगा’ मौसी ने मना भी किया कि इस कष्ट की जरूरत नही-कि वे किसी रिक्शा या आँटो में घर पहुच जायेगी, लेकिन घनश्याम ने उनकी एक न सुनी। वे धर के गेट तक गंगा मौसी व रेखा को विदा करने आए और जब तक वह गाडी में बैठकर चली न गयीं, वो गेट पर ही खडे रहे।

बापसी का सफर बडी खामोशी से कटा ।

गंगा मौसी ने बात करनी भी चाही, लेकिन रेखा ने जवाब मे उन्हे खाली खाली निगाहों से देखा तो वह समझ गई कि रेखा अन्दर से परेशान है।

रेखा वास्तव मे. ही परेशान थी। उसकी समझ में नहीं आ रहा था कि दादा जी को उसके ख्वाब के बारे में किस तरह पता चल गया था और इस लिफाफे मे उसके भयानक सपने का केसा स्वप्न-फल बंद है।

रेखा शीघ्र अतिशीघ्र इस स्वप्न-फल के बारे में जान लेना चाहती थी।

घर पहुचते’ ही. रेखा ने सीधे ही अपने कमरे का रूख किया । वह अपने बेडरूम में दाखिल हुई। दरवाजा बद किया हैण्ड बैग बैड पर’ उछाल दिया और बाथरूम में जा घुसी ।

वह नहा-घोकर बाहर निकली। ठण्डे पानी से राहत-सी पहुची’ थी। वह स्वयं को तरोताजा महसूस करने लगी थी ।

वह दादा का पत्र पढने की बेकरार थी । और फिर अभी उसने बैग से लिफाफा निकाला ही था और खोलना ही चाहती थी कि सहसा दरवाजे पर दस्तक हुई।

दरवाजा बडे जोर से फडफडाया जा रहा था और साथ ही माया र्चीख भी रही थी—-

“जल्दी दरवाजा खोलें, बीबी… ।

रेखा ने लिफाफा फौरन वापिस बैग में रखा और बैग को बैड पर छोड़ दरवाजे की तरफ बढी।

माया क्री हडबडाहट… ने उसे बदहवास कर डाला था। उसका दिल. बडे जोर-जोर से धडकने लगा था । “है प्रभु. ..कृपा… । ” रेखा ने जेसे ही दरवाजा खोला तो उसे देखकर वह बरबस ही र्चीख माराकर पीछे हट गई ।

माया के हाथ में एक पिन्जरा था-ओर उस पिजरे’ में एक उल्लू बन्द था। रेखा ने उल्लू को देखकर ही चीख मारी थी।

माया ने वह पिन्जरा दहलीज पर रख दिया व तसल्ली देते हुए बोली—-“डरते नहीं बीबी! यह पिन्जरे में बद’ है। ”

“यह पिन्जरा कहा से आया-कौन लाया है इस उल्लू को…? रेखा सहमकर पिन्जरे में बन्द उल्लू कौ देख दूर से ही बोली ।

“बीबी अभी एक आदमी आया था वही दे गया है। ” माया ने पिन्जरे के कुन्डे पर हाथ रखते बताया । फिर पूछा-“अन्दर ले आऊं, बीबी ।”

“नहीं-नहीं… । तुम पागल हो गई हो क्या, माया… !” रेखा ने उसे डाटते हुए कहा-“तुम अंदर आ जाओ-इसै बहीं रहने दो. . . । ”

माया पिन्जरा वहीं छोडकर. अन्दर आगई। रेखा कापती टागों से अपने ब्रैड पर आ बैठी | ब्रैड पर उसका बैग और वह बन्द लिफाफा पड़ा था जो दादा हरि औम ने उसके लिए छोडा था और हिदायत दी थी कि उसे सबके सामने न खोला जाऐ ।