स्वाहा 2

उसने अपने दिमाग पर बहुत antarvasna जोर डाला था कि वह kamukta इस आवाज को पहचान जाए, लेकिन वह पहचान न सकी थी, यह आवाज उसके लिए निदात अजनबी थी । उसके किसी प्रियजन. किसी सगे-सम्बन्धी या जानने वाले की आवाज नहीं थी।

वह एक निडर लडकी थी । लेकिन इस ख्वाब के खौफ ने उसकी निर्भयता व दुस्साहस में दरारें डालना शुरू कर दी थी । अब वह सोचने लगी थी कि कल से वह नीचे सोयेगी या फिर अपने साथ कमरे में किसी को बुलाकर सुंलाएगी।

लेकिन सुलाएगी किसको?

ले देकर माया ही तो थी जो उसके साथ सो सकती थी या फिर गंगा मोसी थी । मगर मौसी ऊपर नहीं आ सकती थी। वह गठिया की मरीज थी…सीढिया चढना, उसके बस की बात न थी। बस यही हो सकता था कि वह खुद ही उनके कमरे में जा सोया करे ।

उसने अभी तक अपना यह ख्वाब किसी क्रो नहीं बताया था…गगा मौसी की भी नहीं।

लेकिन अब उसमे हिम्मत न रही थी। उसने तय कर लिया था वह सुबह होते ही गगा मोसी को अपने इस सपने के बारे में जरूर बताएगी।

यूं तौ अभी उसकी उम्र खैर से ख्वाब ही देखने बाली थी ।
— उसने अपने दिमाग पर बहुत जोर डाला था कि वह इस आवाज को पहचान जाए, लेकिन वह पहचान न सकी थी, यह आवाज उसके लिए निदात अजनबी थी । उसके किसी प्रियजन. किसी सगे-सम्बन्धी या जानने वाले की आवाज नहीं थी।

वह एक निडर लडकी थी । लेकिन इस ख्वाब के खौफ ने उसकी निर्भयता व दुस्साहस में दरारें डालना शुरू कर दी थी । अब वह सोचने लगी थी कि कल से वह नीचे सोयेगी या फिर अपने साथ कमरे में किसी को बुलाकर सुंलाएगी।

लेकिन सुलाएगी किसको?

ले देकर माया ही तो थी जो उसके साथ सो सकती थी या फिर गंगा मोसी थी । मगर मौसी ऊपर नहीं आ सकती थी। वह गठिया की मरीज थी…सीढिया चढना, उसके बस की बात न थी। बस यही हो सकता था कि वह खुद ही उनके कमरे में जा सोया करे ।

उसने अभी तक अपना यह ख्वाब किसी क्रो नहीं बताया था…गगा मौसी की भी नहीं।

लेकिन अब उसमे हिम्मत न रही थी। उसने तय कर लिया था वह सुबह होते ही गगा मोसी को अपने इस सपने के बारे में जरूर बताएगी।

यूं तौ अभी उसकी उम्र खैर से ख्वाब ही देखने बाली थी ।