स्वाहा 4

धनश्याम ने उस लिफाफे antarvasna को उलट पुलट का देखा बोला kamukta गंगा I लिफाफे पर कोई नाम नहीँ लिखा है। लेकिन तुम मुझे मेंरे सबाल का जबाब दो कि क्या यह तुम्हारी भाजी नहीं हैI”

‘ ‘भाजी है लेकिन सगी नहीँ-ओंर यह बात सब जानते है ।”

‘ ‘बात सगे या सौतेले की नहीं है गंगा I यह तुम्हारी भाजी है ना, चाहे रिश्ते की सही और इसका नाम… ।” घनश्याम बोलते-बोलते सोचने लगा ।

‘ ‘इसका नाम रेखा है । ” गंगा मोसी ने उसका नाम बताया और उसकी तरफ देखा ।

घनंयाम बोला “मुझे बाबा ने यह लिफाफा देते हुए कहा था किं ‘वह’ लड़की गगा’ मौसी के साथ आएगी-उसे यह लिफाफा दे देना और उसे हिदायत कर देना कि वह यह लिफाफा सबके सामने न खोले । अपने घर जाकर एंकात में खोले । इस लिफाफे में इसका ख्वाब वद है।

”ख्वाब .. !” वह चौकी । उसका नाम रेखा ही था । ख्वाब के जिक्र पर ख्सका र्चोंकना सभाविक था I वह वोल उठी–‘ ‘मेरा ख्वाब…॥ लेकिन दादा जी को कैसे पता चला । मेने तो अपने ख्वाब का जिक्र ही अभी तक किसी से नहीं किया है, गंगा मोसी से भी नहीं किया…?”

गगा’ मोसी उसकी सूरत देखने लगी. ।

“बह में नहीं जनता!” घनश्याम लापरवाही सें बोला–” और अब तुम्हारे इस इकरार के बाद यह पक्का हो जाता है कि यह लिफाफा तुम्हारे लिए है। याद आया-एक बात और भी कही थी बाबा ने… । ‘ ‘

‘ ‘वह क्या…?’ ‘ रेखा ने अपने होठों पर जिव्हा फिराई।

‘ ‘उन्होंने कहा था कि उस लडकी… का नाम रेखा है… -लेकिन यह उसका असली नाम नहीं है । उसका असली नाम शीना है… । ”

“शीना…. I. ‘ ‘ रेखा परेशान होकर बोली— “लेकिन…लेकिन… नाम तो रेखा है और यह सब जानते है। ‘ ‘

‘ ‘इस बारे में मैं कुछ नहीं कह सकता… । बाबा ने मुझसे जो कहा था, वह मैंने तुम्हें बता दिया । यह लो अपनी अमानत. .. ।’ ‘ घनश्याम ने वह ससफेद लिफाफा रेखा की तरफ बढा दिया ।

रेखा ने कापते’ हाथों से वह लिफाफा थाम लिया । उसे उलट-पुलट कर देखा और फिर अपने हैण्ड बैग में रख लिया। .’’रेखा वेटी I ‘ ‘ घनश्याम उसे परेशान देखकर बोला–“शायद तुम्हें यह बात मालूम न हो कि बावा एक ज्योतिषी भी थे । किसी का भी भूत वर्तमान, भविष्य उनसे छिपा न रहता था। और ख्वाब ख्वाबों की पहेली का हल बताने में तो माहिर थे । लोग बहुत दूर दूर से उनसे अपने सपनो’ का स्वप्न फल मालूम करने आते थे ।”

‘ ‘मुझें मालूम है। ” रेखा धीमे से बोली—“मोसी ने आज ही रास्ते मे मुझें बताया था। ‘ ‘

“और आज ही मुझे भी अपने बाबा के बारे मॅ एक बात और मालूम हुई है कि स्वप्न फल के साथ-साथ ख्वाब देखने वाले के भूत व भविष्य सै भी अच्छी तरह वाकिफ हो जाते थे। सब कुछ जान लेते थे। तुम यह कह सकती हो बेटी कि वो बहुत पहुचे हुए बुजुर्ग है। लेकिन उन्होंने खुद को हमेशा छिपाकर रखा I ‘ ‘

‘ ‘अरे आपको नहीं मालूम होगा। मुझें तो बाबा के बारे में अच्छी तरह अन्दाजा था कि वह कितने पहुचे हुए बुजुर्ग है। आखिर लोग उनके पास यू ही नहीं आते थे। ” मीरा खुद को बोलने से न रोक सकी थी।