मस्ती का भंवर–4

“ओ‍ओ‍ओ‍ओ‍ओ‍ओ‍ओ ईईईईईईईईईईईईईई ईंईंईंईंआंआंआंआंआंऊंऊंऊंऊंऊं मैं मर गयी…ईईईईईईईई”, Hindi Sex Stories Antarvasna Kamukta Sex Kahani Indian Sex Chudai और उसका लंड मेरी चूत को फाड़ता हुआ मेरे पेट में घुस चुका था। मेरा अंदर का दम अंदर और बाहर का दम बाहर रह गया और मुझे लगा मानो किसी ने मेरी चूत को किसी तेज़ चाकू से काट डाला हो। चूत में बहुत ज़ोर की जलन होने लगी और विकी के जिस्म पे मेरी ग्रिप बहुत ही टाइट हो गयी। मेरे मुँह से “ऊऊऊफफफफ” और “आआआहहहह” की तेज़ आवाज़ें निकलने लगीं जैसे किसी बकरे को हलाल करने के टाईम पे बकरे के मुँह से निकलती है और फिर मेरी ग्रिप विकी के जिस्म से एक दम से लूज़ हो गयी और मेरे हाथ बेड पे गिर गये और मेरे सैंडल ज़मीन पर टकराये और फिर ऐसे लगा जैसे टोटल ब्लैक ऑऊट, और मैं शायद चार या पाँच मिनट के लिये बेहोश हो गयी थी। मेरा सारा जिस्म पसीने से भीग चुका था। साँसें तेज़ी से चल रही थी और मेरी आँख खुली तो सारा कमरा धुँधला सा नज़र आ रहा था और धीरे-धीरे मुझे साफ़ नज़र आने लगा और मैं होश में आ गयी।

और जब होश आया तो विकी मेरे ऊपर लेटा था और लोहे जैसा सख्त लंड मेरी छोटी सी नाज़ुक चूत को फाड़ के अंदर घुस चुका था, लेकिन धक्के नहीं लगा रहा था। शायद विकी को पता था कि मेरा टोटल ब्लैक ऑउट हो गया है और मैं बेहोश हो चुकी हूँ। फिर थोड़ी देर के बाद जब मेरे जिस्म में कुछ जान वापस आयी तो मैंने फटी आँखों से विकी की तरफ़ देखा जैसे मेरी आँखें विकी से कह रही हों कि तुम बड़े ज़ालिम हो, हथोड़े जैसे लंड से मेरी नाज़ुक चूत को फाड़ डाला। पर शायद वो मेरी नज़रों को समझ नहीं पाया और थोड़ा सा मुस्कुरा दिया और किस करने लगा। उसका लंड मेरी चूत में फँसा हुआ था। मेरी चूत पूरी तरह से खुल चुकी थी और मुझे लग रहा था जैसे मेरी चूत के अंदर कोई रेल इंजन का पिस्टन घुसा हो जिससे मेरी चूत के अंदर की सारी हवा निकल गयी हो। मुझे लग रहा था कि मेरे जिस्म के दो टुकड़े हो गये हों। थोड़ा और होश आया और मेरी आँखें खुली तो विकी ने पूछा, “क्यों मेरी रानी, अभी तक तकलीफ हो रही है क्या??” मेरे मुँह से एक शब्द भी नहीं निकला, मैंने बस सिर हिला के हाँ मैं जवाब दिया तो वो मुझे किस करने लगा और कहा, “अभी सब ठीक हो जायेगा, तुम फिक्र ना करो”, और धीरे से लंड को बाहर खींचने लगा। जैसे-जैसे वो अपने लंड को बाहर खींचता, मुझे लगाता जैसे मेरे जिस्म में से कोई चीज़ बाहर निकल रही हो और मेरे जिस्म को खाली कर रही हो। पहले तो वो आहिस्ता आहिस्ता धक्के मारने लगा और धीरे-धीरे उसकी चुदाई की स्पीड बढ़ने लगी। अब मेरी चूत विकी के इतने बड़े और मोटे लंड को पूरी तरह से एडजस्ट कर चुकी थी और मैं मज़े लेने लगी और सिसकने और चींखने लगी, “आआआहहहह ओ‍ओ‍ओहहह औंऔंऔं।“ मुझे इतना मज़ा पहले कभी नहीं आया था। मेरी टाँगें उसके बैक पे लिपटी हुई थी और वो नीचे खड़े-खड़े धक्के मार रहा था और लंड चूत के अंदर बाहर हो रहा था। उसी ताल में मेरे सैंडल उसकी चूतड़ों पे थाप रहे थे। जैसे ही लंड बाहर निकलता तो मुझे लगाता जैसे मेरा जिस्म खाली हो रहा हो और जैसे ही फिर से लंड चूत के अंदर घुस जाता मुझे लगाता जैसे मेरा जिस्म और चूत फिर से भर गये हों। उसके हर झटके से मेरे मुँह से “हंफहंफहंफ ऊफौफऊपऊप आआआहहहह ऊऊईईईई ईंईंईंईं आंआंआं ऊंहऊंहऊंह” जैसी आवाज़ें निकल रही थी और मैं फिर से झड़ने लगी। अब मेरी आँखों से आँसू भी नहीं निकल रहे थे। तकलीफ कि जगह मज़े ने ले ली थी और मैं मस्त चुदाई के पूरे मज़े ले रही थी। दोस्तों आप यह कहानी चुनमुनिया डॉट कॉमपर पढ़ रहे है |

विकी अपनी गाँड हिला-हिला के लंड को पूरा बाहर तक निकाल-निकाल के मुझे गचा-गच गचा-गच चोद रहा था। कमरे में चुदाई की फच-फच-फच की आवाज़ें गूँज रही थीं। मैं विकी के जिस्म से चिपकी हुई थी। मेरी चूचियाँ हर एक झटके से मेरे जिस्म पे डाँस करने लगती। विकी कभी मेरी चूचियों को पकड़ के मसल देता, कभी झुक के मुँह में लेकर चूसने लगता और कभी निप्पलों को काटने लगता। लंड सुपाड़े तक पूरा बाहर निकाल-निकाल के वो मेरी टाइट चूत में घुसेड़ देता तो मेरी आँखें बाहर निकल आतीं और मुझे लगाता जैसे विकी का मूसल जैसा लंड मेरी चूत को फाड़ के मेरी गाँड मैं से बाहर निकल जायेगा। अब मैं दर्द और मज़े से कराह रही थी। बेहद मज़ा आ रहा था और मैं विकी के जिस्म से छिपकली की तरह चिपकी हुई थी। मैंने उसके जिस्म को टाइट पकड़ा हुआ था और वो था कि फ़ुल स्पीड से चोदे जा रहा था। मैं तो पता नहीं कितनी दफ़ा झड़ गयी। झड़ने से चूत अंदर से बेहद गीली हो गयी थी और अब लंड आसानी से अंदर-बाहर फिसल रहा था। मेरी चूत पूरी तरह से खुल चुकी थी और सूज के डबल रोटी हो गयी थी। चुदाई की स्पीड बढ़ गयी थी और मेरी चूत के अंदर फिर से लावा निकलने को बेचैन होने लगा। मेरे मुँह से मज़े की सिसकारियाँ निकलने लगी और उसी टाईम पे विकी की चुदाई की स्पीड और बढ़ गयी और फिर विकी ने अपना “आकाश मिसाइल” जैसा रॉकेट -लंड पूरा सुपाड़े तक बाहर निकाला और एक इतनी ज़ोर से धक्का मारा कि मैं फिर से चिल्ला उठी, “आआआआआहहहहहह अल्लाहहह…आआआआआआ ऊंऊंऊंऊंऊंआआआआआआंआंआं”, और मुझे लगा जैसे कमरा गोल-गोल घूम रहा हो और मुझे कुछ नज़र ही नहीं आ रहा था। सारा जिस्म पसीने से भीग चुका था। आँखें बाहर को निकल गयी थीं और फिर उसके लंड में से मलाई की पिचकारियाँ निकलने लगी। पहली पिचकारी मेरी चूत में लगते ही मेरी चूत फिर से झड़ने लगी और जो लावा चूत के अंदर उबल रहा था, बाहर निकलने लगा। उसकी पिचकारियाँ निकलती रही और उसके धक्के धीरे होते गये और थोड़ी देर में विकी मेरे जिस्म पे गिर गया और मेरी ग्रिप भी उसके जिस्म पे लूज़ हो गयी और मेरे हाथ पैर फिर से ढीले पड़ गये। दोस्तों आप यह कहानी चुनमुनिया डॉट कॉमपर पढ़ रहे है |

हम दोनों गहरी-गहरी साँसें ले रहे थे। मेरी चूचियाँ हम दोनों के जिस्म के बीच में पिसी जा रही थीं और दोनों के जिस्म के बीच में दोनों चूचियाँ फ़्लैट हो गयी थीं। झड़ने के बाद भी उसका लंड मेरी चूत में फूलता रहा और फिर वो मेरे ऊपर से मेरे साईड में लेट गया तो उसका लंड एक प्लॉप की आवाज़ के साथ ही मेरी फटी चूत से बाहर निकल गया और हम दोनों थोड़ी देर ऐसे ही लेटे रहे। फिर हम दोनों ऊपर खिसक कर बेड के ऊपर आ गये। उसका लंड चूत से बाहर निकलते ही मेरी चूत में से दोनों की मिली जुली क्रीम निकल के बेड पे गिरने लगी। थोड़ी देर में देखा तो पता चला कि मेरी चूत से सच में खून निकल आया है। मैं हैरान रह गयी कि मेरी चूत की सील तो पहले ही टूट चुकी थी, फिर ये सेकेंड टाईम खून क्यों निकला। फिर ख़याल आया कि इतना बड़ा मूसल जैसा लंड इतनी छोटी सी चूत में घुसेगा तो खून तो निकलेगा ही और ये ख़याल आते ही मेरे मुँह पे हल्की सी मुस्कुराहट आ गयी। मेरी अंगारे की तरह से जलती और प्यासी चूत को आज इतने महीनों के बाद करार आया था। चूत की प्यास बुझ चुकी थी और चूत की आग ठंडी पड़ चुकी थी। मैं आँखें बंद किये लेटी रही और हम दोनों गहरी-गहरी साँसें लेते रहे।

विकी ने कहा, “वॉव डॉली, तुम्हारी चूत तो एक दम से टाइट है…. क्या जय तुम्हें चोदता नहीं है?” तो मैंने कहा कि “पहले तो तुम्हारा लंड देखो, कितना बड़ा, लंबा-मोटा और कितना सख्त है, जैसे कोई स्टील का पाइप हो और ये मेरी इतनी छोटी सी चूत में घुसेगा तो तुम्हें तो टाइट ही लगेगा ना, और देखो इस मूसल ने मेरी छोटी सी चूत का क्या हाल बना दिया है….. इसमें से खून भी निकाल दिया…. इसने मेरी चूत को फाड़ डाला, और दूसरे ये कि हाँ, जय से मुझे कभी भी मज़ा नहीं आया….. वो तो बस मेरी चूत में आग लगा के खुद ठंडा पड़ जाता है और पलट के सो जाता है और मैं सारी रात जलती रहती हूँ। कभी-कभी ही तो उसका छोटा सा लंड जो इतना सख्त भी नहीं होता, अंदर जाता है और फ़ौरन ही उसकी मलाई निकल जाती है….. ऐसा लगाता है जैसे मेरी गरम चूत में उसकी मलाई पिघल के निकल गयी हो और कभी-कभी तो बिना अंदर घुसाये ही, ऊपर ही अपना माल गिरा देता है और आज मुझे ऐसे लग रहा है जैसे आज ही मेरी सुहाग रात हुई हो और ऐसी चुदाई ज़िंदगी में कभी नहीं हुई।“ मैंने आगे कहा कि, “विकी! तुम्हारी वाइफ के तो मज़े होंगे?” वो बोला कि “नहीं! ऐसी कोई बात नहीं….. पहली टाईम तो वो भी तुम्हारी तरह से बेहोश हो गयी थी और अब उसकी चूत मेरा लंड आसनी से ले लेटी है….. मैं तो उसकी गाँड में भी डालता हूँ और वो गाँड भी असानी से मरवा लेती है।“ मैंने हैरत से कहा कि उसकी गाँड में इतना मोटा और बड़ा लंड घुस कैसे जाता है तो वो बोला कि “पहले टाईम ही थोड़ा सा दर्द होता है…. फिर बाद में नहीं होता और पहले टाईम डालने के लिये बहुत सा तेल लगाना पड़ा था, तब कहीं जा कर धीरे-धीरे घुसा सका था।“

हम ऐसे ही बातें करते रहे और विकी ने मेरा हाथ पकड़ के अपने लंड पे रख दिया जो फिर से इरेक्ट हो चुका था। उसने फिर से मेरी चूत में अपनी उंगली डाल के क्लिटोरिस को मसलना शुरू कर दिया तो मेरी चूत फिर से गरम हो आयी और गीली हो गयी। वो मेरी चूचियों को चूस रहा था और खुद सीधा लेट के मुझे अपने ऊपर खींच लिया। फिर से उसका मूसल जैसा लंड किसी खौफनाक मिसाइल की तरह से खड़ा हो चुका था। मैं एक बार फिर से डर गयी। विकी ने मुझे आगे की तरफ़ खींच लिया और मैं उसके मुँह पे बैठ गयी मेरे दोनों घुटने मुड़े हुए थे और मेरे पैर उसके सिर के दोनों तरफ़ थे। मैं अभी भी अपने सैंडल पहने हुए थी और मैं उसके मुँह पे अपनी चूत रगड़ रही थी। विकी ने अपने हाथ बढ़ा के मेरे बूब्स को मसलना शुरू कर दिया। उसके दाँत मेरी चूत के अंदर बहुत मज़ा दे रहे थे और मैं झड़ने लगी। मैं इतने टाईम झड़ चुकी थी और ऐसे लगाता था जैसे मैं आज झड़ने के सारे रिकोर्ड तोड़ने वाली हूँ।

अब विकी ने मुझे पलटा दिया और हम सिक्स्टी-नाईन पोज़िशन में आ गये। मैं झुक कर उसके मूसल जैसे लौड़े को अपने मुँह में लेने की कोशिश करने लगी पर उसके सुपाड़े से ज़्यादा मेरी मुँह में कुछ नहीं गया। मेरा मुँह उसके लंड के सिल्की सॉफ्ट चिकने सुपाड़े पे लगते ही विकी ने अपनी गाँड उठा के लंड मेरे मुँह में घुसेड़ना चालू कर दिया जिससे वो कुछ और अंदर गया और मेरा मुँह उसके लंड से फ़ुल हो गया। मेरा मुँह पूरा खुल चुका था पर वो अपनी गाँड उचका-उचका कर मेरे मुँह में लंड घुसा रहा था। उसका लौड़ा तकरीबन आधा या उससे कुछ ज़्यादा ही अंदर घुसा होगा और अब वो मेरे हलक तक घुस चुका था और मैं उसका लंड चूसने लगी। मेरे मुँह में दर्द हो रहा था। इतना मोटा लंड इतनी देर तक नहीं ले पा रही थी। लंड में से चिकना-चिकना प्री-कम निकल रहा था जिसे मैं टेस्ट कर रही थी। उसका लंड उसके प्री-कम से और मेरे थूक से बहुत गीला हो चुका था। वो लगातार मेरी चूत को चूस रहा था और मेरी गाँड में अपनी उंगली घुसेड़ रहा था। बहुत मज़ा आ रहा था। कभी-कभी पूरी चूत को अपने दाँतों में पकड़ के काट लेता और ऐसे चबाता जैसे पान चबा रहा हो और मेरी चूत का फ़ालूदा बना के खा रहा हो। मैं इतनी मस्ती में आ गयी कि फ़ौरन ही झड़ने लगी। मेरी चूत का रसीला पानी विकी के मुँह में जाने लगा जिसे वो शहद की तरह से चाटने लगा। अब विकी ने मुझे फिर पलटा दिया। मैं उसके जिस्म के दोनों तरफ़ घुटने मोड़ कर बैठी थी जैसे घोड़े की सवारी कर रही हूँ। उसका मिसाइल जैसा लंड सीधा खड़ा था। मैं थोड़ा सा ऊपर उठी और उसके लंड के सुपाड़े को अपनी चूत के सुराख में रगड़ने लगी। गीली चूत और चिकने प्री-कम से भरा हुआ लंड का सुपाड़ा मेरी चूत के अंदर आसनी से घुस गया। अब तो मेरी चूत का सुराख बहुत ही बड़ा हो चुका था। इतने बड़े मोटे और लोहे जैसे लंड से जो चुद चुकी थी। अब मैंने धीरे-धीरे उसके मूसल लंड पे बैठना शुरू किया तो वो मेरी गीली चूत के अंदर घुसने लगा उसी वक्त विकी ने मुझे झुका लिया और मेरी चूचियों को अपने मुँह में लेकर चूसना शुरू कर दिया और निप्पलों को काटने लगा। मैं और ज़्यादा मस्ती में आ गयी और अब वो अपनी गाँड उठा के अपने लंड को मेरी चूत में अंदर बाहर करने लगा। अब उसका चिकना लंड गीली चूत में आधा ही आसनी से घुस रहा था। उसने देखते ही देखते अपनी गाँड को ज़ोर से ऊपर उठाया और लंड को जड़ तक मेरी चूत के अंदर पेल दिया और मेरी आँख में फिर से पानी आ गया और मुँह से “ऊऊऊऊईईईईईई.. या अल्लाह आआआआआ” निकल गया और मैं उचक के लंड को बाहर निकालने की कोशिश करने लगी। पर विकी ने मुझे ज़ोर से पकड़ा हुआ था। अब मैं फिर गहरी-गहरी साँसें ले रही थी। बहुत दर्द हो रहा था। थोड़ी ही देर के बाद मेरी चूत फिर से उसके लंड को अपने अंदर एडजस्ट करने लगी। थोड़ी देर ऐसे ही लेटे रहने के बाद मेरी साँसें कुछ ठीक हुई तो विकी ने अपनी गाँड उठा-उठा के मुझे चोदना शुरू कर दिया और मेरी चूचियों को चूसने लगा। मुझे भी अब मज़ा आने लगा और मैं उसके मूसल लंड पे उछलने लगी। जब उसका लंड चूत के अंदर घुसता तो लगाता जैसे चूत फाड़ के मेरे पेट तक घुस आया हो। बेतहाशा मज़ा आ रहा था। उसने मेरी डाँस करती हुई चूचियों को पकड़ के चूसना शुरू कर दिया और मैं झड़ने लगी पर उसके लंड से मलाई निकलने का नाम ही नहीं ले रही थी।

मैं झड़ चुकी थी और मेरे हाथ पैर ढीले हो गये थे। विकी समझ गया कि अब मैं बिल्कुल खल्लास हो चुकी हूँ तो उसने मुझे पीछे को हटा दिया और अपनी फैली हुई टाँगों के बीचे में लिटा लिया और मेरे सिर को उठा के मेरे मुँह में अपना मोटा लंड घुसा दिया। उसके लंड पे लगा हुआ मेरा पानी अच्छा लग रहा था मैं उसके लंड को चूसती रही। अब मैं उसके लंड को गले तक अंदर लेकर चूस रही थी। विकी के हाथ मेरे सर पे थे और वो मेरे सिर को पकड़ के मेरा मुँह अपने लंड पे दबा रहा था और अपनी गाँड उठा-उठा कर मेरे मुँह को चोद रहा था। मुझे लगा कि उसका मूसल जैसा लंड मेरे मुँह के अंदर फूल रहा है और इससे पहले कै मैं कुछ समझ पाती और अपना मुँह लंड पे से हटा सकती, उसने एक ज़ोर दार धक्का मारा जिससे उसके लंड का सुपाड़ा मेरे हलक में घुस गया और उसके लंड में से मलाई की पिचकारियाँ निकलने लगी, जो डायरेक्ट मेरे हलक में चली गयी। मैं उसका लंड चूसती रही और उसकी मलाई खाती रही। जब वो पूरी तरह से झड़ चुका तो मुझे अपने ऊपर खींच के मेरे मुँह में अपनी जीभ डाल के फ्रेंच किस करने लगा, जिस पर उसकी मलाई का टेस्ट था। उसका लंड अब थोड़ा सा सोफ़्ट हो चुका था और हमारे जिस्मों के बीच में सैंडविच बना हुआ था। ऐसे ही हम दोनों एक दूसरे के जिस्म पे पड़े रहे। थोड़ी देर के बाद विकी ने शॉवर लिया। मेरी तो उठने की हिम्मत नहीं थी। शॉवर से बाहर निकल कर उसने अपने कपड़े पहने और मुझे किस करने लगा। मेरे चेहरे को अपने हाथों में ले लिया और बोला कि “डॉली तुम बहुत ही खूबसूरत हो और ऑय लव यू वेरी मच….. यू आर द बेस्ट…..” और मैं किसी कुँवारी लड़की की तरह से शरमा रही थी।

और जब विकी जाने लगे तो मैं उनके सीने से लिपट गयी और मेरी आँख में आँसू निकलने लगे। मैं रोने लगी। मुझे एक ही दिन में विकी से अपनी जान से ज़्यादा मोहब्बत हो गयी थी । वो मुझे किस करने लगा और कहने लगा, “अरे डॉली! ऐसे रोया नहीं करते, मैं हूँ ना तुम्हारे साथ, तुम किसी बात की फिक्र नहीं करना, मैं तुम्हारा ज़िंदगी भर साथ नहीं छोड़ुँगा। मैं तुमसे प्यार करने लगा हूँ, बस ये राज़ मेरे और तुम्हारे बीच ही रहने दो…. जय को इसकी खबर न हो, नहीं तो अच्छी बात नहीं होगी….. वो क्या फ़ील करेगा मेरे बारे में।“ मैंने आँसू भरी आँखों से विकी की तरफ़ देखा और अपना सर हाँ में हिला दिया। मैं विकी को छोड़ना ही नहीं चाह रही थी और उसे कस के पकड़ा हुआ था। मैं चाह रही थी कि कम से कम आज की रात विकी मेरे साथ ही रहे और सारी रात मुझे प्यार करता रहे और मैं उसकी बाँहों में छिप के सो जाऊँ पर क्या करती, मजबूरी थी। उसको भी अपने घर जाना था। उसके भी तो बीवी बच्चे थे। आँसू भरी आँखों से विकी को रुखसत किया और बेड पे गिर के रोने लगी। ये एक अजीब से रिश्ते की बुनियाद थी जिसे क्या नाम दूँ, मेरी समझ में नहीं आ रहा था। थोड़ी देर उदास रही पर फिर इस ख़याल से खुश हो गयी कि अब मुझे अपने चूत की प्यास बुझाने के लिये तरसना नहीं पड़ेगा। पता नहीं कब मैं वैसे ही सिर्फ सैंडल पहने, बिल्कुल नंगी सो गयी। दोस्तों आप यह कहानी चुनमुनिया डॉट कॉमपर पढ़ रहे है |

सुबह उठी तो तबियत कुछ अजीब सी लग रही थी। बेड पे ही काफी देर तक लेटी रही और रात की चुदाई का सोच सोच के मुस्कुराती रही और फिर जब उठके बाथरूम जाने लगी तो पता चला कि मेरी चूत काफी सूज गयी है और चूत में बहुत दर्द हो रहा था। मैं रातभर से नंगी तो थी ही। अपने सैंडल उतार कर मैं बाथरूम में गयी और गरम-गरम पानी से शॉवर लिया और चूत में साबुन लगा के गरम पानी से धोया, तब कहीं जा कर चूत कि तकलीफ कुछ कम हुई और शॉवर से बाहर निकल के अपने जिस्म को टॉवल में लपेट के जिस्म सुखा रही थी तो सारे जिस्म में एक मीठा-मीठा सा दर्द हो रहा था जो बेहद अच्छा लग रहा था। नहाने के बाद कपड़े पहने और कॉफी बना कर पीने लगी। रात में कुछ खाया भी नहीं था और सच मानो कुछ खाने का मूड भी नहीं कर रहा था। कॉफी के साथ कुछ बिस्कुट खा लिये और मैं फ़्रेश हो गयी तो मुझे कल विकी के साथ अपनी चुदाई का हाल याद आ गया तो मैं फिर से मुस्कुराने लगी और विकी का खयाल आते ही मैंने ऑफिस के टेलीफोन पे विकी का नम्बर डायल किया।

“हेलो डॉली, कैसी हो…..” उसने पूछा। “छोटी सी चूत को फाड़ के अब पूछते हो कैसी हूँ?” मैंने हँसते हुए कहा तो वो भी हँसने लगा। मैंने पूछा, “तुम कैसे हो?” तो उसने कहा कि “जब से तुम्हारे घर से वापस आया हूँ, किसी काम में दिल नहीं लग रहा है, तुम्हारी याद सता रही है और तुम्हारी बांहों में सोने का मन कर रहा है।“ मैंने हँस कर कहा, “आ जाओ ना फिर…. देखो मैं तुम्हारा ही इंतज़ार कर रही हूँ”, तो विकी ने हँसते हुए पूछा कि “तुम इंतज़ार कर रही हो या तुम्हारी चूत??” मैंने हँस के कहा, “खुद ही आ के पूछ लो, वो तो ज़खमी है…. शायद उसको मसाज की ज़रूरत पड़ेगी।“ विकी ने फिर से हँसते हुए कहा कि “चलो अगर चूत ज़खमी है तो आज गाँड से ही काम चला लेते हैं”, तो मेरे मुँह से एक दम से चींख निकल गयी “नही….ईईईईईईई।“ वो हँसने लगा और कहा कि “चलो मैं थोड़ी देर में आता हूँ और खुद ही पूछ लुँगा कि कौन मुझे याद कर रहा है।“ फिर विकी ने पूछा, “रात नींद कैसी आयी डॉली?” तो मैंने कहा “बहुत वंडरफुल नींद आयी, ऐसी मस्ती में सोयी जैसे बेहोश हो गयी हूँ और बस अभी- अभी आँख खुली है। बस अभी शॉवर लेकर आयी हूँ, मुझसे तो ठीक से चला भी नहीं जा रहा है, कुछ मीठा-मीठा सा दर्द सारे जिस्म में है।“ विकी हँसने लगा और कहा, “अभी क्या इरादा है?” मैंने कहा, “आ जाओ…. अब तुम्हारे बिना एक मिनट भी दिल नहीं लग रहा है।“ विकी ने कहा, “मेरा भी यहीं हाल है।“ मैंने कहा, “विकी क्या आज कि रात मेरे साथ रुक सकते हो….. मैं अकेली हूँ और जय भी शायद एक वीक के बाद ही आयेगा!” तो उसने कहा, “हाँ रुक तो सकता हूँ पर एक शर्त है अगर तुम रेडी हो गयी तो मैं आज की रात क्या, जय के आने तक तुम्हारे पास ही रुक सकता हूँ।“ एक वीक तक हर रात मेरे साथ गुज़ारने का सुन के मैं तो जैसे खुशी से पागल हो गयी और कहा कि, “विकी तुम एक वीक तक मेरे साथ गुज़ारोगे तो मुझे तुम्हारी हर शर्त मंज़ूर है और अगली बार के लिये भी सारी शर्तें मंज़ूर हैं…. बस तुम आ जाओ और मेरे साथ एक वीक की सारी रातें गुज़ारो…. मैं तुम्हारे लिये कुछ भी कर सकती हूँ….. अपनी शर्त बोलने की ज़रूरत नहीं है…. ओके!” तो विकी ने कहा, “देखो सोच समझ के जवाब दो और मेरी शर्त तो सुन लो”, तो मैंने कहा “मुझे कुछ नहीं सुनना है…. बस मैंने कह दिया ना कि मुझे तुम्हारी हर शर्त बिना सवाल के मंज़ूर है।“ उसने कहा, “ठीक है अगर तुमहारा यहीं फ़ैसला है तो…. ओके मैं आज से एक वीक की सारी रातें तुम्हारे ही साथ गुज़ारुँगा। और हाँ! तुम आज सारा दिन रेस्ट ले लो और सो जाओ क्योंकि मैं आज की रात से एक वीक तक की रातें तुम्हें सोने नहीं दुँगा।“ ये सुन के मेरा दिल खुशी के मारे उछलने लगा और मैं बच्चों की तरह से खुश हो गयी। विकी ने कहा “तो ठीक है मैं ऑफिस खतम कर के सीधे तुम्हारे पास ही आ जाऊँगा और तुम डिनर तैयार नहीं करना, मैं पिज़्ज़ा हट से सूपर सुप्रीम पिज़्ज़ा लेकर आ रहा हूँ।“ मैंने कहा, “ठीक है” और वेट करने लगी। वॉव विकी एक वीक तक मेरे साथ ही रहेगा तो खुशी के मारे मुझसे खाना भी नहीं खाया गया। मैं बेसब्री से रात का और विकी का इंतज़ार करने लगी। जैसे-तैसे लंच किया और सोने के लिये बेड पे लेट गयी पर नींद कहाँ आती। मेरा सारा दिमाग तो विकी के लंड में अटक के रह गया था। बस बेड पे लेटी रेस्ट करती रही और चुदाई का खयाल आते ही मुस्कुरा देती। शाम को पाँच बजे के आसपास मैं तैयार होने उठी। पहले मैंने अपनी टाँगों, बाँहों, चूत और गाँड पर वैक्सिंग की और फिर खूब अच्छे से नहाई। बालों को शैंपू करके हेयर ड्रायर से सुखाया। फिर शिफॉन का पिंक रंग का सलवार-कमीज़ पहना। कमीज़ स्लीवलेस और बेहद गहरे गले का था। साथ में मेल काते काले रंग के साढ़े-चार इंच हाई-हील के स्ट्रैपी सैंडल पहने। फिर थोड़ा सा मेक-अप किया।

तकरीबन सात बजे बेल बजी। डोर खोला तो देखा कि विकी खड़ा मुस्कुरा रहा है। ब्लैक पैंट और व्हाइट शर्ट पे डार्क ब्लू और रेड स्ट्रैप की टाई में वो बहुत ही शानदार लग रहा था। मैं तो देखती की देखती ही रह गयी। विकी ने हँस के कहा, “अंदर आने भी दोगी या यहीं खड़ा रखोगी” तो मैं चौंक गयी और कहा, “ओह सॉरी, अंदर आ जाओ प्लीज़”, तो विकी अंदर आ गये और अपने पीछे डोर को लॉक कर दिया। उनके हाथ में एक बड़ा पिज़्ज़ा और एक शॉपिंग बैग में चॉकलेट आईस क्रीम थी। मैंने पूछा कि “आपको कैसे पता चला कि आई लव चॉकलेट आईस क्रीम” तो विकी ने कहा “सबसे पहले तो ये आप-आप करना छोड़ो और हाँ मुझे पता है कि हर स्वीट लड़की को चॉकलेट आईस ख्रीम ज़रूर पसंद होती है, बस दिल ने दिल से कहा और मैंने सुन लिया” तो मैं मुस्कुरा दी और विकी से लिपट गयी और अपना मुँह उसके सीने में छिपा कर उसके जिस्म को बे-हताशा प्यार करने लगी और बोली के “आई लव यू सो मच, विकी आई लव यू सो मच, आई नीड यू आलवेज़, मैं तुम्हारे बिना नहीं रह सकती, अब विकी प्लीज़ तुम डेली आते रहना मेरे पास नहीं तो मैं नाराज़ हो जाऊँगी।“ विकी ने मुझे अपने आप से लिपटा लिया और मेरे जिस्म पे हाथ फेरा और अपनी बांहों में जकड़ लिया और बोला कि “हे डॉली, आई आलसो लव यू सो मच डॉली, यू डोंट वरी, मैं डेली तुम्हारे पास आऊँगा और तुम्हारी हर इच्छा पूरी करूँगा, यू आर द डार्लिंग ऑफ़ माय हार्ट एंड सोल।“ हम दोनों एक दूसरे से लिपटे रहे। वो मुझे प्यार करने लगा और मैंने थोड़ा सा ऊपर उठ के विकी के लिप्स पे किस किया। फिर हम दोनों के मुँह खुल गये और हम एक दूसरे की ज़ुबान चूसने लगे। विकी के जिस्म से आती हुई पर्फयूम की खुशबू मुझे पागल किये दे रही थी। दोस्तों आप यह कहानी चुनमुनिया डॉट कॉमपर पढ़ रहे है |

हम दोनों टेबल पे आ गये और पिज़्ज़ा खाने लगे। विकी मुझे अपने हाथों से पिज़्ज़ा खिला रहे थे तो मैंने एक पिज़्ज़ा का पीस अपने मुँह में रखा और विकी को खिलाया और उसके साथ ही किस भी हो गया। इसी तरह से हम एक दूसरे को एक दूसरे के मुँह से खिलाते रहे और एक-एक पीस के साथ किसिंग भी चलती रही। दिल कर रहा था कि विकी और मैं तमाम ज़िंदगी एक दूसरे के साथ ही रहें और ऐसे ही एक दूसरे को प्यार करते रहें। ये ऐसी दिल थी जो पूरी नहीं हो सकती थी, ये मुझे भी मालूम था और विकी को भी। पिज़्ज़ा खतम हो गया और हम थोड़ी देर ऐसे ही मस्ती करते रहे।

डिनर खतम होने तक तकरीबन नौ बज गये थे। थोड़ी देर के बाद विकी ने व्हिस्की के दो पैग बनाये और हम दोनों सोफ़े पे बैठ के व्हिस्की पीने लगे। व्हिस्की पीते-पीते विकी ने मेरी कमीज़ के स्ट्रैप मेरे कंधों से नीचे खिसका दिये और मेरी चूचियों से खेलने और दबाने लगा। पिछली रात की चुदाई के बाद और व्हिस्की के सुरूर से अब मैं भी बोल्ड हो गयी थी और मैंने अपना हाथ विकी के लंड पे रखा तो उसका लंड फौरन उसकी पैंट के अंदर खड़ा हो गया। मैंने सोचा कि इतना बड़ा और मोटा लंड पैंट के और अंडरवीयर के अंदर अकड़ेगा तो विकी को तकलीफ होगी। इसलिये मैं सोफ़े से उठ गयी और अंदर कमरे में जा कर जय की एक लुँगी ले आयी और विकी को दे दी। चलते वक्त मुझे महसूस हुआ कि मुझ पर व्हिस्की का नशा हावी होने लगा था क्योंकि मेरे कदम उन हाई-हील सैंडलों में थोड़े से लड़खड़ा रहे थे। विकी सोफ़े से उठ कर खड़ा हुआ और अपनी शर्ट और बनियान निकाल दी और बोला, “डॉली ज़रा पैंट निकाल दो” तो मैंने पैंट की बेल्ट खोली और ऊपर से हुक खोल कर ज़िप को नीचे करके पैंट उतार दी। अब लंड अंडरवीयर के अंदर तंबू बनाये हुए था। मैंने थोड़ा सा आगे को झुक कर अंडरवीयर के दोनों तरफ़ से दो हाथ डाल कर जैसे ही अंडरवीयर नीचे किया तो मैं एक दम से उछल पड़ी। लंबा, मोटा रॉकेट जैसा लंड उछल कर मेरे मुँह के सामने लहराने लगा तो मैंने मस्ती में उसको अपने हाथ से पकड़ लिया और लंड के सुपाड़े का एक ज़बरदस्त चुंबन ले लिया और थोड़ा सा चूस लिया। विकी ने अभी मेरे मुँह में लंड घुसाना सही नहीं समझा क्योंकि अभी-अभी हम ने खाना खाया था और मैं व्हिस्की के तीन पैग पी चुकी थी। उसने सोचा होगा कि कहीं उलटी ना हो जाये और खाना बाहर निकल ना जाये। विकी ने लुँगी लपेट ली। फिर विकी ने कहा कि अरे इसकी क्या ज़रूरत है और अपनी लूँगी निकाल दी और बिना शर्ट और बिना लुँगी के मेरे पास नंगा ही सोफ़े पे बैठ गया। मैं अपने लिये चौथा पैग डालने लगी तो विकी ने मुझे रोक दिया। विकी ने मेरे भी सारे कपड़े भी उतार दिये और अब मैं भी सिर्फ सैंडल पहने, नंगी ही उसके साथ सोफ़े पे बैठी थी और हम एक दूसरे के जिस्म से खेलने लगे। मैं उसका लंड दबाती और मसलती रही। वो मेरी चूचियों को मसलता और निप्पलों को काटता रहा और चूत का मसाज भी करता रहा। दोस्तों आप यह कहानी चुनमुनिया डॉट कॉमपर पढ़ रहे है |

हम तकरीबन एक घंटे तक ऐसे ही सोफ़े पे बैठे रहे। मेरा जिस्म जोश में गरम हो गया था और नशे में मुझे काफी हल्का और मदहोश महसूस हो रहा था। विकी ने कहा कि “डॉली तुम्हारा जिस्म इतना गरम क्यों हो गया, तुम्हें इतनी व्हिस्की नहीं पीनी चाहिये थी क्योंकि तुम्हें आदत नहीं है।“ मैंने हँस के कहा कि “नहीं विकी, ये मेरे जिस्म का टेम्परेचर ज्यादा व्हिस्की पीने की वजह से नहीं है, ये तो मेरी चूत का टेम्परेचर है जो जिस्म पे महसूस हो रहा है।“ विकी ने हँस के कहा कि “लगाता है तुम्हारी चूत की गर्मी को निकालना पड़ेगा, बोलो तैयार हो?” तो मैंने हँस कर कहा कि “कल रात तुम जबसे गये हो, मैं तो तब ही से तैयार हूँ, जैसे तुम चाहो, निकाल दो इस चूत की सारी गर्मी को।“ विकी ने कहा “ठीक है अभी मैं चूत को ठंडा करने का इंतज़ाम करता हूँ” और फ्रिज से चॉकलेट आईस क्रीम निकाल के ले आया।

मैं उतनी देर में सोफ़े के सामने पड़ी हुई सेंटर टेबल पर से व्हिस्की की बोटल और ग्लास उठा के ले गयी। अब तो मेरे कदम ज़ाहिराना तौर से लड़खड़ा रहे थे पर मैं तो अपनी ही मस्ती में मदहोश थी। हमारी सेंटर टेबल सोफ़ा सेट के बीच में पड़ी है जो रेक्ट-‍एंगल शेप की है और अच्छी खासी बड़ी है, जिसपर एक आदमी अपनी टाँगें नीचे लटका कर आराम से लेट सकता है। टेबल बहुत ऊँची भी नहीं है और बिल्कुल नीची भी नहीं। मतलब के ऐसी हाईट की है कि कोई टेबल पे लेटा हो तो उसको बहुत मस्त तरीके से चोदा जा सकता है। हाँ तो विकी ने मेरे सारे कपड़े तो पहले ही उतार दिये थे और मैं सिर्फ सैंडल पहने हुए थी। विकी ने मुझे सेंटर टेबल पे लिटा दिया। मैं घुटने मोड़कर टाँगें नीचे छोड़ कर टेबल पे लेट गयी और मेरे पैर साढ़े-चार इंच ऊँची हील के सैंडल पहने होने से आसानी से फ़्लोर पे लग गये। विकी खुद टेबल के साईड में खड़ा हो कर मेरे जिस्म पे ठंडी ठंडी चॉकलेट आईस ख्रीम डालने लगा। ठंडी आईस क्रीम जिस्म पर लगते ही सारे जिस्म में एक करंट सा दौड़ गया और मज़ा आने लगा। विकी ने सारी क्रीम मेरे जिस्म पे डाल दी और मेरे जिस्म पे मलने लगा। चूत पे कुछ ज़्यादा ही क्रीम डाली। गरम चूत पे ठंडी क्रीम बहुत अच्छी लग रही थी और गरम चूत पे ठंडी आईस क्रीम पड़ते ही चूत की गर्मी से पिघलने लगी।

चूचियों पे आईस क्रीम डाल कर वो मसलता और दबाता रहा। मेरा तो आने वाली चुदाई का सोच के ही चूत में से पानी निकलने लगा। जब सारे जिस्म पे क्रीम फैला दी तो अब विकी मेरे जिस्म को चाटने लगा। कुछ क्रीम मेरे मुँह पे भी लगा दी थी। पहले तो किस किया जिससे क्रीम हम दोनों के मुँह में भी गयी और मज़ा आने लगा। अब विकी मेरे जिस्म को चाट रहा था। छूचियों को दोनों हाथों से पकड़ के मसल भी रहा था और चूस भी रहा था और आईस क्रीम के मज़े भी ले रहा था। विकी मेरी दोनों टाँगों के बीच में खड़ा हुआ तो मेरी टाँगें खुद-ब-खुद उसके जिस्म के ऊपर कैंची बन गयीं और उसके जिस्म को अपनी टाँगों से पकड़ लिया। ऐसी पोज़िशन में उसके तने हुए लहराते लंड को देख कर मेरी चूत के मुँह में पानी आ गया। विकी मेरी चूचियों को चूसता रहा और फिर मेरे नेवल के आसपस क्रीम डाल कर चाटता रहा। मेरा तो मस्ती के मारे बुरा हाल हो गया था। मेरी साँसें गहरी हो गयी थीं। अब विकी नीचे फ़्लोर पे बैठ गया और मेरी टाँगों और पैरों और सैंडलों से क्रीम चाटने लगा। फिर जब वो चूत पे से क्रीम चाटने लगा तो मैंने अपने पैर उसकी गर्दन पे डाल कर अपनी चूत में उसका मुँह खींच लिया और उसका सर पकड़ के चूत के ऊपर दबा दिया और उसके मुँह से अपनी चूत को रगड़ने लगी। ठंडी क्रीम चूत के अंदर बहुत अच्छी लग रही थी। उसकी जीभ चूत के अंदर, ऊपर से नीचे और नीचे से ऊपर होने लगी। मेरी आँखें बंद होने लगीं और मैं मस्ती मैं आ गयी और मेरी चूत के अंदर से पानी रेडी हो गया तो मैंने उसके सर को ज़ोर से पकड़ के अपनी चूत से रगड़ दिया। उसके दाँत मेरी चूत और क्लीटोरिस से लगते ही मैं झड़ने लगी और जैसे-जैसे मेरी चूत में से पानी निकलने लगा, मैं उतनी ही तेज़ी से उनके सर को पकड़े उनके मुँह पे अपनी चूत रगड़ती रही। थोड़ी देर के बद मेरा झड़ना बंद हुआ तो मैंने कहा, “विकी अब बर्दाश्त नहीं होता, प्लीज़ चोद डालो ना अब, कल से तड़प रही हूँ मैं तुम्हारे लंड के लिये।“ विकी ने कुछ और आईस क्रीम मेरी चूत में लगायी उठ कर खड़ा हुआ और अपने लंड के सुपाड़े को चूत के सुराख में टिका कर मेरे ऊपर झुक गया और मेरी चूचियों को चूसना शुरू कर दिया। वो मेरे कंधों को पकड़ कर अपनी गाँड हिला-हिला कर लंड को चूत के अंदर बाहर करता रहा। फिर वो थोड़ा सा सीधा हुआ पर उसका लंड चूत के आधा ही अंदर रहा। उसने बहुत सारी क्रीम अपने लंड पे डाल दी और एक ज़ोर से झटका मारा तो मेरे मुँह से चींख निकल गयी “आआआआईईईईईई ईंईंईंईं”, और फचक-फचक की आवाज़ से उसका इतना बड़ा, मोटा ताज़ा लंड मेरी गीली चूत में आईस क्रीम के साथ घुस गया। अब फिर से वो मुझ पे झुक गया और मेरे बगल के नीचे से हाथ डाल के मेरे कंधों को पकड़ लिया और चुदाई शुरू कर दी। लंड अंदर-बाहर हो रहा था। इतना मोटा लंबा लोहे जैसा सख्त लंड छोटी सी चूत मे घुसता तो चूत के लिप्स भी लंड के साथ अंदर तक घुस जाते और फिर लंड के साथ ही बाहर निकल आते। मुझे बहुत मज़ा आ रहा था। दोस्तों आप यह कहानी चुनमुनिया डॉट कॉमपर पढ़ रहे है |

विकी नीचे फ़्लोर पे खड़ा था और अपने पैरों की ग्रिप लेकर पूरी ताकत से मुझे चोद रहा था। मेरे मुँह से सिसकारियाँ निकल रही थी, “आआआआआहहहहहह बबब..बहुत ममम…मज़ाआआआ आआआआ रहा….आआआ है….. आआआईंईंईं ऐसे ही चोदो….. ऊऊऊफफफ आआआहहहह यूऊऊऊ आर वंदर फुलललल आआआआहहहहह ऐसे ही ओ‍ओ‍ओ‍ओ‍ओहहहह।“ वो पूरा लंड, सुपाड़े तक बाहर निकाल-निकाल कर चोद रहा था। बेइंतेहा मज़ा आ रहा था। विकी के लंबा मोटा लंड मेरी बच्चे दानी को हिट कर रहा था जिससे मुझे और मज़ा आ रहा था। मेरे पैर उसकी बैक पे लिपटे हुए थे और मैं उसकी गाँड को पकड़ के चुदाई के मज़े ले रही थी। वो एक बार फिर थोड़ी और क्रीम अपने लंड पे डाल के चोदने लगा और अब उसकी चुदाई की स्पीड बढ़ गयी थी। मैंने अपने पैर उसकी बैक से हटा कर नीचे फ्लोर पे टिका दिये और सैंडल की हील्स को ज़मीन पे गड़ा कर अपने चूतड़ उठा-उठा कर उससे चुदवाने लगी। विकी ने फिर एक इतनी ज़ोर से झटका मारा कि मेरे मुँह से फिर से चींख निकल गयी। मुझे लगा जैसे मेरी चूत फिर से फट गयी हो और सारा कमरा गोल-गोल घूमने लगा। मेरे आई बॉल्स ऊपर चड़ गये और मेरी ग्रिप विकी के जिस्म पे टाइट हो गयी और मैंने उसको ज़ोर से पकड़ लिया। वो बहुत तेज़ी से और ज़ोर से चोद रहा था। उसका लंड मेरी छोटी सी चूत के अंदर मुझे फूलता हुआ महसूस हुआ और उसने फिर एक ज़ोर का झटका मारा तो मेरी बच्चे दानी में हलचल होने लगी और उस के साथ ही विकी के लंड में से गाढ़ी-गाढ़ी थिक क्रीम के फुव्वारे निकलने लगे। मैं विकी से ज़ोर से लिपटी रही और मेरी ग्रिप टाइट थी। अब उसके धक्के स्लो होने लगे और मुझे लग रहा था जैसे मेरी चूत के मसल विकी के लंड को जैसे निचोड़ रहे हों और जैसे उसके लंड से निकली हुई क्रीम की एक एक बूँद को चूत के अंदर लेना चाहती हो। उसकी क्रीम के साथ ही मेरा पानी भी निकलने लगा और हम दोनों के क्रीम से मेरी चूत लबालब भर गयी। दोस्तों आप यह कहानी चुनमुनिया डॉट कॉमपर पढ़ रहे है | थोड़ी देर तक विकी मेरे ऊपर ऐसे ही लेटा रहा और अपने लंड को चूत के अंदर ही रहने दिया। जब हम दोनों की साँसें थोड़ी ठीक हुई तो विकी ने अपना लंड मेरी बहती हुई चूत से बाहर निकाल लिया और फौरन ही पलट के मेरे मुँह की तरफ़ अपना लंड कर दिया, जिसमें से हम दोनों की क्रीम टपक रही थी। मैंने फौरन ही अपना मुँह खोल दिया और उसके लंड को चूसने लगी और दोनों की मिली मलाई का लेने लगी। मैंने डिब्बे से थोड़ी आईस क्रीम निकाल के विकी के लंड पे लगाई और चूसने लगी। आआहहह क्या मज़ा आ रहा था, ऐसी आईस क्रीम पहली दफ़ा खा रही थी जिसपर आईस कि क्रीम के साथ हम दोनों की लंड और चूत की क्रीम भी थी। मैं चोको -बार की तरह से चूस रही थी उसका मोटा लंड। अब उसका लंड फिर से अकड़ गया था और मेरे मुँह में फूलने लगा था। मेरी चूत में से भी पानी निकलना शुरू हो गया था। विकी ने मेरी चूत में उंगली करना शुरू कर दिया। अब वो जोश में मेरे मुँह को चोद रहा था और चूत को अपनी उंगली से चोद रहा था। मेरी क्लीटोरिस पे उसकी उंगली की रगड़ से मैं झड़ने लगी। विकी मेरे मुँह को चोद रहा था। उसका इतना मोटा, लंबा लंड का सुपाड़ा मेरे हलक में टक्कर मार रहा था। मेरा पानी लगातार निकल रहा था और मैं उसी मस्ती में विकी का लंड ज़ोर-ज़ोर से चूसने लगी और वो अपनी गाँड हिला-हिला कर अपना लंड पूरा बाहर निकाल-निकाल कर मेरे मुँह को चूत समझ कर चोदने लगा। मेरा तो दम ही घुटने लगा था और फिर थोड़ी ही देर में मेरे मुँह की चुदाई की स्पीड बढ़ गयी और उसके लंड के सुराख में से क्रीम के फुव्वारे निकल-निकल के मेरे हलक में डायरेक्ट उतरने लगे। मुझे लगा जैसे तकरीबन एक कप जितना गाढ़ा-गाढ़ा निकला होगा और मैं उसके लंड की सारी मलाई मज़े से खा गयी। उसके लंड से क्रीम निकलते ही मेरी चूत फिर से झड़ने लगी और मैं अपनी गाँड उठा के चूत उसके हाथ से रगड़वाने लगी। जब दोनों की मलाई निकल गयी तो दोनों शाँत हो गये। मैं बेदम हो कर वहीं लेटी रही और विकी नीचे फ़्लोर पे लुढ़क गया। दोनों गहरी गहरी साँसें ले रहे थे और दोनों की आँखें बंद हो गयी थी।

थोड़ी देर तक ऐसे ही लेटे रहे। फिर विकी ने मुझे उठाया और पूछा कि “डॉली मज़ा आया क्या” तो मैंने एक ज़ोरदार चुम्मा लिया और कहा, “विकी डॉली की छोटी सी चूत को अपने लंबे मोटे मूसल जैसे लंड से चोदे और डॉली को मज़ा ना आये, ऐसे हो सकता है किया ?? और ये तुम्हारा ही लंड है जिसने मेरी प्यासी चूत की प्यास बुझायी है और इस में लगी आग को ठंडा किया है।“ विकी हँसने लगा और मुझे उसी हालत में उठा कर बाथरूम में ले गया और शॉवर खोल दिया। दोनों ने एक दूसरे को साबुन लगाया और अच्छी तरह से एक दूसरे को साफ़ किया और नहाने लगे। नहाते-नहाते मैं विकी के लंड को पकड़ के मसलती रही तो वो फिर से खड़ा हो गया। यही हाल मेरी चूत का भी था। विकी जब मुझे साबुन लगा के चूत धो रहे थे तो अपनी उंगली चूत के सुराख के अंदर डाल के उंगली से चोदने लगे। मैं भी मस्ती में आ गयी और विकी से लिपट गयी। इसी तरह से नहाते-नहाते मस्ती करते रहे और फिर हम बाथरूम के बाहर निकल आये और टॉवल से एक दूसरे के जिस्म को साफ़ किया और फिर सोफ़े पे आ के बैठ के व्हिस्की पीते हुए बातें करने लगे और एक दूसरे के जिस्म से खेलने लगे। विकी ने जय के बारे में पूछा कि वो कैसे चोदता है तो मैंने बता दिया कि “शादी के कुछ ही दिनों तक तो उसका लंड मेरी चूत के अंदर गया और बस दो या तीन धक्कों में उसकी क्रीम निकल गयी। ऐसे लगाता था जैसे क्रीम उसके लंड के सुपाड़े में रेडी है, चूत की गर्मी लगी और क्रीम निकल गयी। उसके बाद से तो अब तक ऐसा है कि कभी तो उसका छोटा सा पतला लंड पूरी तरह से अकड़ता भी नहीं और कभी अकड़ भी जाता है तो चूत के अंदर घुसाने से पहले ही मेरी चूत के लिप्स के ऊपर ही अपनी क्रीम गिरा देता है जिससे मेरी चूत की आग बढ़ जाती है पर मुतमाइन कभी नहीं हुई और शादी के बाद से पहली चुदाई से लेकर आज तक मुझे उसके लौड़े से कभी सेटिसफेक्शन नहीं मिला। कल जब तुमने चोदा तो मुझे पता चला की सही मानों में चुदाई कैसे होती है और औरत को चुदाई का मज़ा कैसे आता है। जब मैं सत्रह-अठारह साल की थी तो मेरे कज़न ने मुझे चोदा था पर अब तो उस बात को भी तकरीबन दस-ग्यारह साल हो गये हैं और उस टाईम पे मुझे मेरे कज़न के लंड से चुदवाने में बहुत मज़ा आया था पर तुम्हारी चुदाई और तुम्हारा लंड तो इतना वंडरफुल है कि जी चाहता है कि तुम मुझे चोदते जाओ और मैं तुम से चुदवाती जाऊँ।“ विकी ने पूछा, “अच्छा तो तुमने कज़न से भी चुदवाया है” तो मैंने कहा हाँ, “ऐसे ही हो गया था बस” और फिर उसको अपनी पहली चुदाई की दास्तान सुना डाली। विकी मेरी कहानी सुनते-सुनते फिर से मेरे बूब्स को दबाने लगा और मेरा हाथ पकड़ के अपने लंड पे रख दिया, जो फिर से अकड़ के लोहे जैसा सख्त हो चुका था और मैं उसके लंड को दबाने लगी। विकी ने पूछा, “अब कैसा लग रहा है डॉली”, तो मैंने कहा “बहुत मस्त फ़ील कर रही हूँ…. इस व्हिस्की का नशा सा छाया हुआ है और सारे जिस्म में एक अजीब सा मीठा-मीठा मस्ती-भरा दर्द जैसे हो रहा है।“ विकी ने कहा, “चलो मैं तुम्हारे जिस्म की मालिश कर देता हूँ” तो मैंने कहा, “माशा अल्लाह! मालिश से तो मज़ा ही आ जायेगा…. चलो बेडरूम में चलते हैं।“ उसने कहा कि “कोई प्लास्टिक हो तो बेड पे बिछा दो।“ मैंने कहा कि नहीं, “ऐसा कोई प्लास्टिक तो नहीं है….. मैं कोई पुरानी वाली बेडशीट बिछा देती हूँ” और अलमारी से एक पुरानी वाली बेड शीट निकाल के बेड पे बिछा दी। विकी ने पूछा कौन सा तेल है तो मैंने कहा मालिश के लिये कौन-सा तेल अच्छा होता है। उसने पूछा कि “घर में ऑलिव ऑयल है क्या?” तो मैंने कहा कि “हाँ, है एक डिब्बा ऑलिव ऑयल का…. क्या उससे मालिश करोगे?” विकी ने कहा कि “हाँ, वो ऑलिव ऑयल ही सब से अच्छा होता है मालिश के लिये।“ मैं थोड़ा सा लड़खड़ाती और सैंडल खटखटाती हुई दूसरे रूम में गयी और ऑलिव ऑयल का डिब्बा लेकर आ गयी।

विकी ने कहा कि अब तुम सीधी लेट जाओ तो मैं ऐसे ही लेट गयी। टाँगें चौड़ी करके फैला लीं । विकी मेरी टाँगों के बीच में घुटनों के बल बैठ गया और मेरे जिस्म पे तेल डालना शुरू किया। सारे जिस्म पे तेल डाला, चूचियों की गोलाई में और नाफ़ के सुराख में और चूत के पास तक डाल दिया और डिब्बा एक तरफ़ रख कर मालिश करना शुरू कर दिया। सारे जिस्म पे हाथ से तेल को फैला दिया और मालिश करने लगा। वो चूचियों को मसलता रहा। सारा जिस्म स्लिपरी हो गया। बहुत मज़ा आने लगा और जिस्म बहुत लाईट महसूस होने लगा। जब वो मेरे पैरों पे मालिश करने लग तो मैंने कहा कि मैं सैंडल उतार देती हूँ जिससे तुम ठीक से मालिश कर सको। वो बोला कि “डॉली रहने दो, इन हाई हील सैंडलों में तुम्हारे ये सैक्सी पैर और भी सैक्सी लगते हैं”, और फिर उसने मेरे सैंडलों और पैरों को चूम लिया तो मैं सिसक उठी। मेरी चिकनी चूत को देख कर उसका लंड फिर से टनटना कर खड़ा हो गया था और मेरी चूत देख कर उसके लंड के मुँह में से प्री-कम का पानी आने लगा था। हम दोनों एक दूसरे की आँख से आँख मिला कर एक दूसरे को घूर रहे थे। दोनों नंगे थे और बहुत अच्छा लग रहा था। विकी बड़ी ज़बरदस्त मालिश कर रहा था। मेरे जिस्म में मस्ती छा रही थी और मेरी चूत पानी के निकलने से गीली हो चुकी थी। उसका लंड मेरी चूत के सामने था। एक टाईम जब वो झुक कर मालिश कर रहा था और उसका लंड मेरी चूत के सामने ही था तो उसका हाथ फिसल गया। मेरी टाँगें तो फैली ही थीं, जिससे चूत खुली हुई थी और जब उसका हाथ फिसला और वो बैलेंस ऑउट होने की वजह से सामने की तरफ़ फिसल गया तो उसका लंड एक ही झटके में मेरी चिकनी चूत के अंदर घुसता चला गया। मेरी आँखें एक दम से बाहर निकल आयीं। मैं उसका लंड चूत के अंदर एक्सपेक्ट नहीं कर रही थी। विकी ने थोड़े झटके मारे और जब मेरी चूत ने उनके लंड को एडजस्ट कर लिया और मुझे मज़ा आने लगा तो विकी ने अपना अकड़ा हुआ लंड बाहर निकाल लिया। मैंने कहा, “अरे ये क्यों, विकी….. रहने दो ना अंदर ही…. अच्छा मज़ा आ रहा है”, तो उसने कहा, “रुको अभी चोदता हूँ थोड़ी देर में, पहले अच्छी तरह से मालिश तो कर लूँ”, तो मैंने कहा, “ठीक है।“

फिर विकी ने कहा, “अब तुम बेड पे उलटी लेट जाओ और तकिया निकाल दो और अपने हाथों को अपने मुँह के सामने फ़ोल्ड करके रख लो”, तो मैं वैसे ही लेट गयी जैसा विकी ने बोला था। अब मैं उलटी लेटी हुई थी और इसी लिये विकी को नहीं देख सकती थी। विकी ने फिर मेरे पीछे पीठ पे ऑलिव ऑयल डाला और कंधों के पास और फिर पीठ पे फैला दिया और फिर मेरे गोल-गोल चूतड़ों पे तेल डाल के फैला दिया ताकि तेल नीचे ना गिरे और फिर मेरी टाँगें फैला करके वो मेरी टाँगों के बीच में फिर से घुटनों के बल बैठ गया और झुक कर दोनों हाथों से मेरे कंधों की मालिश करने लगा। ऑयल बहुत चिकना था और उसके हाथ आसानी से फिसल रहे थे। मुझे बहुत अच्छा लग रहा था जिस्म में मस्ती छा रही थी। मेरी आँखें बंद हो रही थी। विकी ने मेरे पेट से थोड़ा नीचे चूत के पास फिर से तकिया रख दिया जिससे मेरे चूतड़ ऊपर उठ गये। अब विकी मेरे दोनों चूतड़ों को मसल रहा था और ज़ोर-ज़ोर से दबा रहा था। थोड़ा और तेल डालकर उसने थोड़ा तेल मेरी गाँड खोल के उसके सुराख में भी डाल दिया। अब विकी मेरी टाँगों के बीच में अपने पैर फ़ोल्ड करके बैठा था। ऐसी पोज़िशन में उसके लंड का सुपाड़ा कभी मेरी चूत से टकराता तो कभी गाँड से। वो आधा उठ-उठ के मालिश कर रहा था और चूतड़ों को ज़ोर-सोर से मसल रहा था और मुझे बहुत मज़ा आ रहा था। दोनों चूतड़ खोल-खोल के गाँड में भी तेल डाल के अपनी उंगली गाँड में अंदर बाहर करता तो मुझे और ज़्यादा मज़ा आता। दोस्तों आप यह कहानी चुनमुनिया डॉट कॉमपर पढ़ रहे है |

विकी ने अपना लंड तेल के डिब्बे में डाल कर पूरी तरह से तेल से भर लिया। फिर वो मेरे ऊपर आ गया और चूतड़ों के बीच में लंड रख कर मेरे ऊपर झुक गया और मेरे कंधों को मालिश करने लगा। उसका लंड दोनों चूतड़ों के बीच में ऊपर-नीचे ऊपर-नीचे हो रहा था। कभी-कभी लंड का सुपाड़ा फिसल के चूत के सुराख में घुस जाता तो मुझे बहुत मज़ा आता और कभी फिसल के गाँड के सुराख में अटक जाता तो मुझे तकलीफ होती पर मैंने कुछ कहा नहीं क्योंकि तकलीफ उतनी ज़्यादा नहीं होती थी। उसका लंड बिना गाँड के सुराख में घुसे, चूतड़ों की खायी में ऊपर नीचे हो रहा था। अब वो फिर से मेरे जिस्म पे झुका हुआ था और पीठ की मालिश कर रहा था जिससे उसका लंड गाँड के सुराख से टकरा रहा था। उसने बहुत सा तेल फिर से मेरी गाँड में डाल दिया और अपने लंड के सुपाड़े को गाँड के सुराख में घुसा कर ऊपर से तेल टपकाने लगा जिससे तेल डायरेक्ट उसके सुपाड़े पर और गाँड के छेद में गिरता हुआ मुझे महसूस हो रहा था। ऐसे ही करते-करते वो प्रेशर दे रहा था तो सुपाड़ा पूरा अंदर चला गया। मेरी गाँड खुलने-बंद होने लगी। उसने कहा, “रिलैक्स डॉली!” तो मैं चौंकी और कहा, “नहीं विकी प्लीज़….. गाँड मे नहीं डालना नहीं तो मैं मर जाऊँगी।“ विकी ने कहा “तुम फिक्र ना करो डॉली, तुम्हें कोई तकलीफ नहीं होगी…. मैं गारंटी देता हूँ”, तो मैंने कहा, “नहीं प्लीज़!” तो विकी ने कहा कि “तुम हमारी शर्त को भूल रही हो।“ मैंने पूछा “कैसी शर्त?” विकी ने कहा, “ओह तुम मेरी शर्त भूल गयी क्या? रात यहीं गुज़ारने की?” तो मुझे अचानक याद आ गया और मैं घबरा गयी। तब समझ में आया कि ये किस शर्त की बात कर रहा है। पर अब क्या हो सकता था और अब मुझे यकीन हो गया कि आज मेरी गाँड की खैर नहीं। विकी मेरी गाँड मारे बिना छोड़ने वाला नहीं। मैं डर रही थी पर कुछ कर भी नहीं सकती थी।

मैं विकी की मिन्नतें करने लगी कि प्लीज़ गाँड मारने को छोड़ के कोई भी शर्त मंज़ूर है तो उसने कहा, “अब नहीं हो सकता…. तुमने कहा था कि तुम्हें मेरी हर शर्त बिना सुने ही मंज़ूर है।“ विकी ने कहा, “देखो डॉली, आज तो मैं तुम्हारी गाँड ज़रूर मारूँगा और अगर तुम अपनी गाँड को टाइट करोगी तो तुम्हें तकलीफ होगी। तुम्हारी गाँड में फ़ुल तेल लगा हुआ है और अगर तुम अपनी गाँड को बिल्कुल रिलैक्स कर दोगी तो बिल्कुल भी तकलीफ नहीं होगी और लंड आसानी गाँड के अंदर फिसल जायेगा क्योंकि मैं मेरे लंड को और तुम्हारी गाँड को तेल से चिकना कर चुका हूँ….. तो बेहतर यही है कि तुम रिलैक्स हो जाओ और गाँड में लंड लेने का मज़ा लो।“ मैंने सोचा कि आज तो मेरी गाँड इस लौड़े से नहीं बच सकती तो क्यों ना विकी जैसे कहता है, मैं वैसे ही करती रहूँ। ये खयाल आते ही मैंने अपनी गाँड को रिलैक्स कर दिया और गहरी-गहरी साँस लेने लगी जिससे मेरी गाँड कुछ रिलैक्स हुई। मैंने फिर कहा, “देखो विकी बहुत धीरे करना, नहीं तो मेरी गाँड फट जायेगी।“ विकी ने हँस कर कहा, “तो क्या हुआ….. चूत भी तो फट चुकी है तुम्हारी…. अब अगर गाँड भी फट जायेगी तो क्या प्रॉबलम है।“ मैंने कहा, “मुझे बहुत दर्द होगा” तो उसने कहा कि “तुम गाँड को रिलैक्स रखो इससे तुम्हें कोई दर्द नहीं होगा, ओके?” तो मैंने भी कहा, “ओके।“ अब वो फिर से मालिश करने लगा। लंड का सुपाड़ा ऐसे ही गाँड के छेद में ही टिका हुआ था। उसने थोड़ा सा और तेल खुली हुई गाँड में टपकाया और लंड के सुपाड़े को अंदर-बाहर करने लगा। अब उसका लंड और मेरी गाँड, बहुत ही चिकने हो चुके थे और सुपाड़ा आसानी से अंदर-बाहर हो रहा था। विकी अब मेरे ऊपर फिर से झुक कर करीब लेट गया और मेरे कंधों को ऐसे पकड़ लिया कि उसके दोनों हाथ मेरी दोनों चूचियों के बीच में थे, जिससे मुझे बहुत मज़ा आ रहा था। उसने धीरे-धीरे अपनी गाँड उठा-उठा कर लंड के सुपाड़े को मेरी गाँड के अंदर-बाहर अंदर-बाहर करना शुरू कर दिया। दोनों के जिस्म चिकने होने से फिसल रहे थे। तकिया मेरी गाँड के नीचे होने से गाँड ऊपर उठ गयी थी और लंड को अंदर आने की दावत दे रही थी। विकी ने सुपाड़ा अंदर-बाहर करते-करते एक जम के झटका दिया तो लंड तकरीबन आधा गाँड के अंदर घुस गया और मेरे मुँह से एक चींख निकल गयी “हाय…. मैं मर गयीईईईईईई….. निकाल लो इसे आआआआहहहह।“ वो थोड़ी देर ऐसे ही आधा लंड अंदर घुसेड़ कर मेरे ऊपर लेटा रहा। मेरी गाँड विकी के लंड से कुछ एडजस्ट हुई तो फिर विकी थोड़ा सा ऊपर उठ गया और फिर से अपने लंड पे, जो आधा मेरी गाँड के अंदर घुसा हुआ था, उसके डंडे पे तेल उढ़ेलने लगा और लंड को अंदर बाहर करने लगा। तेल उढ़ेलने से लंड का डंडा और स्लिपरी हो चुका था और गाँड का सुराख भी स्लिपरी हो गया था।

विकी ने कहा, “डॉली अब तुम थोड़ा सा ऊपर उठ कर अपने नीचे से तकिया निकल लो….. अब उसकी ज़रूरत नहीं है…… ऐसे ही नीचे रहेगा तो तुम्हें और दर्द होगा।“ मैं थोड़ा सा उठी और विकी ने मेरे नीचे से तकिया निकाल लिया। विकी ने कहा, “डॉली अब तुम अपनी गाँड को थोड़ा सा ऊपर उठा लो” तो मैंने अपने चूतड़ों को थोड़ा ऊपर उठा लिया। अब मैं बेड पे उलटी लेटी थी और मेरी गाँड थोड़ी सी ऊपर उठी हुई थी और विकी का मूसल लंड गाँड में आधा अंदर घुसा हुआ था। विकी ने फिर से अपने हाथ मेरे जिस्म के नीचे से डाल के कंधों को पकड़ लिया और उसके हाथ मेरी चूचियों से लगने लगे। दोनों हाथ दोनों चूचियों के बीच में थे। दोनों थोड़ी देर तक ऐसे ही चिपके हुए लेटे रहे। अब मेरी गाँड उसके लंड से पूरी तरह एडजस्ट हो चुकी थी और मेरी गाँड अपने आप ही थोड़ी सी उठ गयी और गाँड के सुराख के मसल थोड़े रिलैक्स हुए तो विकी ने समझ लिया कि अब मैं अच्छी तरह से गाँड मरवाने के लिये रेडी हूँ। उसने अपने लंड को आधा ही अंदर-बाहर अंदर-बाहर करके मेरी गाँड मारनी शुरू कर दी। अब मुझे भी अच्छा लगने लगा और मैं मज़े लेने लगी। लंड और गाँड दोनों बहुत ही चिकने और स्लिपरी हो चुके थे। मेरी साँसें अब ठीक से चलने लगी थी। विकी ऐसे ही गाँड के अंदर आधा लंड घुसा के धक्के मारता रहा और फिर मेरे कंधों को ज़ोर से पकड़ कर इतनी ज़ोर से झटका मारा कि मैं चिल्ला पड़ी, “ऊऊऊईईईई अल्लाहहह….आआआआ मर गयी…ईईईईईई ऊऊऊऊऊऊऊ निकाल लो!!” पर अब उसका लंड पूरा जड़ तक मेरी गाँड में घुस चुका था और मुझे उसका लंड गाँड फाड़ कर पेट में से घुस कर मुँह से बाहर तक निकलता हुआ महसूस होने लगा। दर्द से मेरी आँखें बाहर निकल गयी और साँसें रुक गयीं और मेरे सामने अंधेरा छाने लगा। शायद मैं फिर से बेहोश हो गयी थी। दोस्तों आप यह कहानी चुनमुनिया डॉट कॉमपर पढ़ रहे है | विकी मेरी गाँड में अपना रॉकेट जैसा लंड घुसेड़ कर थोड़ी देर ऐसे ही मेरे ऊपर लेटा रहा। कुछ ही देर के बाद मेरी गाँड अब पूरी तरह से रेडी हो गयी थी और अब गाँड में लंड अच्छा लग रहा था तो विकी ने पीछे बेड से पैर टिकाकर उछल-उछल के मेरी गाँड मारनी शुरू कर दी। कभी आधा लंड बाहर तक खींच लेता तो कभी सुपाड़े तक बाहर निकाल कर ज़ोर का झटका मारता तो मेरी जान ही निकल जाती और अंदर की साँस अंदर और बाहर की बाहर रह जाती। थोड़ी देर तक तो तकलीफ होती रही लेकिन थोड़ी ही देर में मुझे गाँड मरवाने में बहुत ही मज़ा आने लगा और मैं अपनी गाँड से लंड को पीछे से धक्के मारने लगी। तेल लगा होने से फच-फचक-फचक की आवाज़ें आ रही थी और विकी का मूसल जैसा लंड मेरी गाँड में घुसा हुआ था। वो ज़ोर-ज़ोर से खचाखच मेरी गाँड मार रहा था और मैं मज़े से मरवा रही थी। मैं अपनी गाँड पीछे धकेल कर उसका मोटा लंड अपनी गाँड में ले रही थी। बहुत मज़ा आने लगा था और उसी वक्त मेरा जिस्म काँपने लगा और मेरी चूत में से पानी निकलने लगा। मेरा ऑर्गेज़म चलता रहा और मैं बे-दम हो कर बेड पे गिर गयी। विकी अपनी गाँड उठा-उठा कर लंड को पूरा सुपाड़े तक बाहर निकाल-निकाल के मेरी गाँड मार रहा था। उसकी स्पीड बढ़ गयी और वो दीवानों की तरह से मेरी गाँड के अंदर अपना मूसल लंड घुसेड़ रहा था और तेज़ी से मेरी गाँड मार रहा था। फिर उसने एक बहुत ही ज़ोरदार झटका मारा तो मेरे मुँह से फिर से चींख निकल गयी “आंआंआंआंआं मर गयी….ईईईई” और फिर फौरन ही उसके लंड से मलाई की पिचकारियाँ मेरी फटी हुई गाँड में निकल कर गिरने लगी। पहली पिचकारी के साथ ही मेरी चूत से पानी निकलने लगा और मैं भी झड़ने लगी। विकी के लंड में से मलाई निकलती गयी और मुझे लगने लगा जैसे उसकी मलाई से मेरी गाँड और मेरा पेट दोनों भर जायेंगे। अभी उसका लंड मेरी गाँड के अंदर ही घुसा हुआ था और वो मेरे जिस्म पे गिर गया। हम दोनों गहरी गहरी साँसें ले रहे थे। थोड़ी ही देर के बाद जब हमारी साँसें ठीक हुई तो विकी मेरे ऊपर से मेरी साईड में लुढ़क गया और उसका लंड मेरी गाँड में से निकलते ही मेरी गाँड में से उसकी मनि बाहर निकलने लगी और मेरी चूत की दरार में से होता हुई नीचे बेड शीट पर गिरने लगी।

मैं भी अब सीधी हो कर लेट गयी और करवट लेकर विकी को प्यार करने लगी। दोनों करवट से लेटे थे, एक दूसरे की तरफ़ मुँह करके। फिर हम दोनों एक दूसरे से लिपट के गहरी नींद सो गये। सुबह उठी थो चूत और गाँड में मीठा-मीठा दर्द हो रहा था। हम दोनों ने साथ ही शॉवर लिया और दोनों एक दूसरे को साबुन लगा कर नहलाने लगे। विकी ने मेरी चूत और गाँड में साबुन लगाया और मैंने विकी के लंड पे साबुन लगायी और धोने लगी। विकी के लंड पे हाथ लगते ही उसका लंड एक बार फिर से खड़ा हो गया और मेरे नंगे जिस्म को और मेरी चिकनी मक्खन जैसी चूत को सेलयूट करने लगा जैसे हाथी अपनी सूँड से सेलयूट करता है। मैंने हँस कर कहा, “वॉव विकी…. ये तो फिर से अकड़ने लगा…..” तो उसने कहा, “डॉली तुम्हारी मक्खन जैसी चिकनी और प्यारी चूत शायद मेरे लंड को पसंद आ गयी है और फिर से ये उस में घुसना चाहता है।“ मैं हँसने लगी और बोली कि “विकी, मैं तुम्हारे लिये और तुम्हारे इतने शानदार लंड के लिये हमेशा ही रेडी हूँ।“ फिर शॉवर के अंदर ही विकी ने मुझे अपनी गोदी में उठा लिया और दीवार से टिका कर मेरी चूत में लंड एक ही झटके में पेल दिया और चोदने लगा। मेरी बैक, दीवार से टिकी हुई थी और पैर विकी की बैक पे लिपटे हुए थे और मैं अपने हाथ विकी की गर्दन में डाल कर उसके जिस्म से झूल रही थी और उसका लंड मेरी चूत में तूफान मचा रहा था। वो गचागच चोद रहा था और उसका लंड चूत के अंदर ऐसे जा रहा था जैसे हथोड़े से दीवार में सुराख कर रहा हो। मुझे लग रहा था कि मेरी चूत और गाँड फाड़ कर उसका लंड दीवार में घुस जायेगा। उसके एक-एक झटके से मेरी चूचियाँ डाँस करने लगी। विकी के हाथ मेरे चूतड़ों पे थे और मेरी बैक दीवार से टिकी थी। वो इसी तरह चोदता रहा और मैं दो बार झड़ चुकी थी। अब मुझे लगा कि विकी भी झड़ने वाला है तो मैंने उसको कस कर पकड़ लिया। विकी के झटके बहुत ही तेज़ हो गये और मेरी ज़बरदस्त चुदाई होने लगी और फिर उसने एक इतनी ज़ोर से झटका मारा कि मेरी चींख निकल गयी, “ऊऊऊऊईईईईईई ईईईईईईई”, और मेरा मुँह खुला का खुला रह गया और मैंने महसूस किया कि विकी का लंड मेरी चूत में फूल रहा है और उसके लंड से गरम-गरम मलाई की पिचकारियाँ निकल रही हैं और मैं फिर से झड़ने लगी। चुदाई होने के बाद उसने मुझे नीचे उतारा और हम ने फिर से शॉवर लिया।

बाथरूम से बाहर निकल कर मैंने फिर से हाई-हील के सैंडल पहने और फिर जब कपड़े पहनने लगी तो विकी ने कहा, “नहीं डॉली….. मैं और तुम जितनी देर घर में अकेले रहेंगे, तुम और मैं कोई कपड़ा नहीं पहनेंगे और हम दोनों नंगे ही रहेंगे…. तुम सिर्फ ये सैक्सी सैंडल पहने रहो…..” तो मैंने मुस्कुराते हुए कहा, “ओक विकी….. मैं तो तुम्हारी गुलाम हो गयी हूँ….. तुम जैसा कहोगे, मैं वैसा ही करुँगी।“ फिर मैंने सिर्फ सैंडल पहने, नंगी ही किचन में गयी और ब्रेकफास्ट बनाया और हम दोनों ने नंगे ही डायनिंग टेबल पे बिठ कर खाया। वो शनिवार का दिन था तो विकी ने ऑफिस फोन कर दिया कि वो किसी और जगह काम से जा रहा है और ऑफिस नहीं अयेगा और फिर अपनी सेक्रेटरी को कुछ इंस्ट्रक्शन दे दिये और सारा काम समझा दिया। शनिवार और इतवार को मेरी जम कर चुदाई हुई। अब मैं जय को भूल चुकी थी और मुझे जय की याद भी नहीं आ रही थी। मैं तो ये सोच रही थी कि विकी ही मेरा शौहर है और मैं उसकी बीवी ।