बहना अपने भाई से क्या शरमाना–1

बात तब की है जब डॉली जवानी की दहलीज पर कदम रख रही थी Hindi Sex Stories Antarvasna Kamukta Sex Kahani Indian Sex Chudai जैसा कि आप लोगों को पता है कि मैं कितना बड़ा चोदू हूँ तो मेरी नज़र से डॉली के शरीर में होने वाले बदलाव मेरी नज़र से कैसे बचते। मुझको पता चल रहा था कि कब उसके चपटे सीने में से तीखे उभार निकलने लगे थे, उसके चुनमुनियाड़ उभर रहे थे। और वैसे भी चूंकि मैं बाहर रहता था तो उसके जिस्म में होने वाले बदलाव मुझको और आसानी से पता चल रहे थे। उसके जिस्म से एक अलग से खुशबू आने लगी थी जो उसकी जवानी को और मादक बना रही थी। जब भी वो मेरे पास आती थी तो उसके जिस्म की खुशबू मुझको पागल कर देती थी।हमेशा की तरह हम लोग पास बैठ कर बहुत बातें करते थे। वो मेरे बहुत करीब चिपक कर बैठती थी, वो अपनी बातो में मस्त रहती थी और मैं उसके जिस्म की खुशबू के मज़े लेता रहता था। बातें करते वक़्त वो कई बार मेरे गले लग जाती थी और उस वक़्त उसके चुचे मेरे बदन से चिपक जाते थे जो मुझको मस्त कर देते थे।
अब बस इंतजार था तो बस उसके मेरे बिस्तर पर आने का। जब से मैंने उसको जवानी की दहलीज में देखा था बस एक ही बात मेरे दिमाग में रहती थी कि वो कब मेरे बिस्तर में नंगी होकर लेटेगी, कब मेरे बाबूराव को उसकी चुनमुनिया की गुफा में घुसने का मौका मिलेगा। सपनों में कई बार मैं उसके मम्मो को मसल कर उसकी चुनमुनिया मर चुका था अब इंतजार सिर्फ उसके हकीकत में बिस्तर पर लेटने का था।
एक दिन मेरे अंकल-आंटीऔर डॉली हमारे घर आये। सब लोग बातों में मस्त थे और मैं और डॉली हर बार की तरह अपनी बातों में मस्त थे। वो मेरे साथ बच्चों की तरह मस्ती कर रही थी। वो मेरे गुदगुदी करने लगी जवाब में मैंने भी जब गुदगुदी की तो वो भागने लगी। मैंने उसको पकड़ के अपनी तरफ खींच लिया, वो तैयार नहीं थी और झटके से मेरी गोद में आ गिरी। मैं पलंग पर पजामा पहने बैठा था और इतनी देर की मस्ती में मेरा बाबूराव खड़ा हुआ था और वो आचानक लगे इस झटके से मेरी गोद में मेरे बाबूराव पर आकर गिर गई।
मेरा बाबूराव उसके चुनमुनियाड़ों की दरार में अटक सा गया।
थोड़ी देर वो ऐसे ही रही और जब उसको ध्यान आया तो वो उठने लगी पर मेरे हाथ उसकी कमर से होते हुए उसके पेट पे थे सो वो उठ नहीं पाई। उसके उठने और मेरे पकड़े रहने की इन कोशिशों में मेरा बाबूराव उसकी गांड में घिस रहा था और इस कारण मेरा बाबूराव और खड़ा हो के मोटा हो गया था जो उसकी गांड की दरार में लगा हुआ था।
मैंने उसके पेट पर थोडा और जोर लगाया तो मेरा बाबूराव उसकी दरार में बिलकुल फिट हो गया। मैंने नीचे बैठा अपने चुनमुनियाड़ हिला कर बाबूराव आगे पीछे करने लगा।
वो थोड़ी थोड़ी कोशिश कर रही थी उठने की पर मैंने उसको उठने नहीं दिया। थोड़ी देर में उसने अपनी कोशिश छोड़ दी।
मैंने अपनी कमर हिलाना शुरु कर दिया। मैं समझ गया कि डॉली भी मेरे बाबूराव पर अपनी गांड घिस रही है। वहाँ सब लोग थे तो मैं वो नहीं कर पा रहा था जो चाहता था, मैंने डॉली के कान में ऊपर बने कमरे में आने को कहा और यह कह कर मैं उसको छोड़ के ऊपर चला गया।थोड़ी देर में डॉली भी वहाँ आ गई। मेरा ऊपर वाले कमरे में किसी के आने या देखने का डर नहीं था। डॉली थोड़ी शर्माते हुए कमरे में घुसी। उसने पजामा और टॉप पहना हुआ था। मैंने जल्दी से उसको पकड़ लिया और अपने साथ पलंग पर ले गया। मैं पलंग पर बैठ गया और अपना बाबूराव पजामे के अंदर सीधा करके रख लिया और डॉली को अपने बाबूराव पे बैठा दिया। मेरा बाबूराव दुबारा से उसकी गांड की दरार में घुस गया।
मैं अपने चुनमुनियाड़ हिला कर लण्ड आगे पीछे करने लगा और उसकी कमर को पकड़ कर भी हिलाने लगा। वो अभी भी शरमा रही थी।
मैंने उसके कंधों पर किस किया तभी अचानक वो बोली- भईया यह गलत है ना !
मैंने उसके कंधों पर हाथ रखा और कहा- गलत तो तब होगा ना जब किसी को पता चलेगा और ना तो मैं ना ही तू किसी को यह सब बतायेंगे और हम लोग सिर्फ मज़े ही तो कर रहे हैं। तू चिंता मत कर कुछ नहीं होगा, सिर्फ इससे मिलने वाले मज़े पे ध्यान दे !
अब मैं अपना बाबूराव उसकी दरार में जोर जोर से रगड़ रहा था और वो भी कमर हिला हिला के मेरा साथ दे रही थी। मेरे बाबूराव उत्तेजना से फूल कर मोटा हो गया था।
थोड़ी देर में मैंने उसको पूछा- और मज़ा लेना है?
तो वो कुछ बोली नहीं।
मैंने कहा- बहना, अपने भाई से क्या शरमाना, बता कुछ और मज़ा लें?
तो वो बोली- कोई आ जायेगा।
मैंने कहा- तू चिंता मत कर, ऐसा कुछ नहीं करूँगा जिससे कोई कुछ पकड़ सके।
उसने हाँ में सर हिला दिया तो मैंने उसको उठाया और अपना पजामा घुटनों तक उतार दिया फिर उसका पजामा भी घुटनों तक उतार दिया। उसने शर्म से अपनी आँखें बंद कर ली। उसने काले रंग की पेंटी पहनी हुई थी जो इतनी देर मेरे बाबूराव घिसने के कारण उसकी गांड में घुस गई थी। उसके गोल गोरे चुनमुनियाड़ मेरी आँखों के सामने थे।
मैंने अपने हाथों से उसके चुनमुनियाड़ों को सहलाया, वो एकदम से कांप गयी। शायद पहली बार उसने किसी आदमी का हाथ अपने उस जगह महसूस किया था। मैंने चुनमुनियाड़ों को सहला कर एक बार दबा दिया और उसकी कमर से खींच के फिर से अपने बाबूराव पर बैठा दिया।
अबकी बार वो भी अपनी कमर हिला रही थी। मैंने अपने हाथ उसकी नंगी जांघों पर रख दिए और उसकी जाँघें सहलाने लगा।

एकदम चिकनी जाँघें थी उसकी मक्खन जैसी।
मेरे हाथ उसकी जाँघों पर चल रहे थे और धीरे धीरे मेरे हाथ उसकी पेंटी के किनारों से होते हुए उसकी दोनों जांघों के अंदर वाले भाग जहाँ पेंटी के किनारे होते हैं, वहाँ चलने लगे पर मैंने अभी तक उसकी चुनमुनिया को नहीं छुआ था क्योंकि मैं जल्दी कुछ नहीं करना चाहता था।
वो आँखें बंद किये हुए अपनी कमर हिलाने में मस्त थी। थोड़ी देर बाद मैंने बस एक बार उसकी चुनमुनिया के ऊपर हाथ फेरा जिससे वो आंखें खोल कर एकदम से खड़ी हो गई। उसकी आंखों में अपने गुप्तांग को छूने की शर्म दिख रही थी।
मैंने अब और आगे बढ़ने की सोची और अपनी चड्डी उतार दी।
वो मेरी तरफ पीठ करके खड़ी थी। मैंने एकदम से उसकी पेंटी को पकड़ा और घुटनों तक खींच दी । उसकी नंगी गांड मेरी आँखों के सामने थी।
वो एकदम हुई इस हरकत के लिए तैयार नहीं थी। उसने अपने हाथो से अपनी गांड छुपाने की कोशिश की तो मैंने उसके हाथ हटा दिए और उसको फिर से अपनी और खींच लिया। मैंने एक हाथ से अपने बाबूराव को सेट किया और दूसरे से उसको फिर से अपनी गोद में पटक लिया। पहली बार मेरे बाबूराव का स्पर्श उसकी नंगी गाण्ड से हुआ था। एक अजीब सा अहसास था वो। मैंने अपने हाथों से उसके चुनमुनियाड़ों को चोड़ा किया और बाबूराव को सेट किया। मैंने उसकी चुनमुनिया की तरफ हाथ बढ़ाये और उसकी नंगी चुनमुनिया पर हाथ फेरा।
वो सी सी कर रही थी।
मैंने उसकी चुनमुनिया के दोनों होंठों को सहलाया। अब मेरे हाथ उसकी जाँघों और चुनमुनिया को पूरी तेज़ी से सहला रहे थे। गांड में मेरा बाबूराव घिस रहा था।
थोड़ी देर में मैंने अपने हाथ उसके मम्मो की ओर बढ़ा दिए। मैंने टॉप के ऊपर से उसके चुचे पकड़ लिए और मसल दिए। अब मैं उसके मम्मों को दबा रहा था और मेरे होंठ उसके कंधों पे, पीठ पे किस कर रहे थे।
अब मैंने उसका मुँह अपनी और किया और उसके होंठों पे अपने होंठ रख दिए। मैं उसके होंठों को चूसने लगा, कभी उपर वाले होंठ को चूसता तो कभी नीचे वाले को।
वो मेरा साथ देने की कोशिश कर रही थी पर अभी उसको इतना अच्छे से आता नहीं था। वक़्त देखते हुए मैंने ज्यादा आगे ना बढ़ने का विचार किया और उसको पजामा और अपने कपड़े सही करने को कहा।
वो उठी और अपना पजामा चढ़ाने लगी। मैंने उसको रोका और उसके चुनमुनियाड़ों पर चूम लिया और पजामा ऊपर कर दिया और अपने कपड़े भी सही कर लिए।
मैंने उससे पूछा- कैसा लगा?
तो वो मुस्कुराने लगी।
मैंने एक बार और उसको किस किया और हम नीचे आ गये।
अब मुझको इंतजार था अगले सही मौके का जब मैं अपनी परी को अपने बिस्तर के रानी बना सकूँ।
प्लान मेरे पास था और जल्दी ही वो काम भी कर गया।
2-3 दिन के इंतजार के बाद ही एक दिन हम लोग अंकल के घर गए। मैंने डॉली को एक तरफ ले जाकर सब कुछ समझा दिया और सब लोगो के साथ आकर बैठ गया। थोड़ी देर में डॉली आई और आंटी को कहा कि उसको किसी काम से बाहर जाना है।
मैंने कहा- मैं भी चलता हूँ, यहाँ बोर हो जाऊँगा। तुमको जहाँ जाना है, वहाँ छोड़ कर मैं अपने दोस्तों से मिलने निकल जाऊँगा। वापसी में तुमको लेता आऊँगा।
मेरी यह बात सबको सही लगी।
डॉली ने कहा- मैं तैयार होकर आती हूँ।
थोड़ी देर में डॉली लम्बा स्कर्ट और टॉप पहन के आ गई। मैंने अपनी बाइक उठाई और डॉली को पीछे बैठा के अपने योजना के अनुसार अपने घर आ गया। घर के चाबी पहले ही मैंने अपने पास रखी थी ताकि कोई भी मेरे वापस आने तक घर आने की सोच भी ना सके।
मैंने घर का ताला खोला और अन्दर आ गया, मेरे पीछे पीछे डॉली भी अन्दर आ गई। मैंने दरवाजा बंद कर दिया। डॉली घर के अन्दर जा रही थी, मैंने पीछे से डॉली को अपनी बाहों में भर लिया और उसके गले पर चुम्बन करने लगा। वो भी आँखें बंद करके मज़े ले रही थी। मैं उसके पेट पर हाथ से सहला रहा था, उसके गालों और गले को चूम रहा था।
मेरा बाबूराव जो अब तक उत्तेजना से खड़ा हो चुका था, उसकी कूल्हों क़ी दरार में घुस रहा था।
थोड़ी देर में वो बोली- भईया, अन्दर चलते हैं, यहाँ मुझको शर्म आ रही है।
मैंने डॉली को अपनी गोद में उठा लिया। चूंकि उसने स्कर्ट पहनी थी तो उसको उठाते समय मेरा हाथ उसकी स्कर्ट के अन्दर चला गया और उसकी नंगी टाँगें मेरे हाथ में आ गई। इससे वो और शरमाने लगी और उसने आँखें बंद कर ली।
मैं उसको अपने कमरे में ले आया और बिस्तर में बैठा दिया और खुद नीचे उसके घुटनों पर हाथ रख कर बैठ गया। उसकी आँखों में शर्म साफ़ साफ़ दिख रही थी पर शर्म के साथ वासना भी अपना असर दिखा रही थी।
मैंने उससे पूछा- शुरु से सब कुछ करें या जहाँ छोड़ा था, वहाँ से आगे?
तो वो कुछ नहीं बोली।

मैंने सोचा कि यह अभी नई है इस खेल में और अभी तक उसने कुछ किया भी नहीं है तो उसको पहले उत्तेजित करना होगा। एकदम करने से उसको दर्द भी ज्यादा होगा और काम खराब होने का डर भी रहेगा।
सो मैंने उसको उठा कर अपनी गोद में बैठा लिया जैसा हमारे साथ पहली बार हुआ था। वो मेरे बाबूराव पर बैठ गई और मैं उसकी कमर पकड़ कर आगे पीछे करने लगा।
आज चूंकि घर में कोई नहीं था सो हमको कोई डर भी नहीं था। वो भी अपने चुनमुनियाड़ आगे पीछे करके मेरा साथ देने लगी। आज मेरे हाथ उसके पूरे जिस्म को सहला रहे थे और बार बार उसके मम्मों पर आकर रुक जाते थे। अब चूंकि वो अपनी कमर हिला कर मेरा साथ दे रही थी तो मैंने अपने दोनों हाथ उसके मम्मों पर रख दिए और उनको धीरे धीरे सहलाने लगा। मैं उसके मम्मों को कभी पकड़ता, दबाता और कभी उसकी नई नई चूचियों को मसल देता। जब भी मैंने ऐसा करता वो सिसक जाती। मेरे होंठ उसके गले और गालों परबराबर घूम रहे थे।
मैंने अपने हाथों से उसका मुँह अपनी ओर किया और उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए। एकदम पतले, गुलाब क़ी पंखुड़ियों से लाल रसीले होंठ थे उसके। मैंने उसके होंठ अपने मुँह में लेकर उसको चूसना शुरु कर दिया। फिर मैं कभी उसके ऊपर का होंठ चूसता, कभी नीचे वाला।
वो भी मेरा साथ दे रही थी। अब तो हम लोगो क़ी जीभ एक दूसरे के मुँह में सैर कर रही थी। मैंने अपने हाथ उसको घुटनों पर रख दिए और उसकी स्कर्ट ऊपर करना शुरु कर दी। जल्दी ही उसकी स्कर्ट उसके घुटनों तक आ गई थी। मैंने उसकी स्कर्ट के अन्दर हाथ डाला और उसकी जांघों को सहलाने लगा। मेरा हाथ उसकी दोनों जांघों के बीच वाले भाग को छू रहा था जिसको हम आम भाषा में चुनमुनिया कहते है। अब मैंने उसको खड़ा किया और अपनी पैंट निकाल दी और पीछे से उसका स्कर्ट पूरा ऊपर करके उसको अपने ऊपर बैठा लिया। मेरा बाबूराव उसकी पैंटी के ऊपर से उसकी गांड में सेट हो के आगे पीछे हो रहा था। थोड़ी देर तक ऐसा करने के बाद जब मेरे हाथों ने उसकी चुनमुनिया को छुआ तो उसकी पैंटी के बीच वाली जगह गीली हो चुकी थी। अपने अनुभव से मैं इतना समझ गया कि अब लड़की मेरे नीचे आने को तैयार है।
मैंने डॉली को उठा कर बिस्तर पर लेटा दिया और खुद उसके ऊपर चढ़ गया। मेरे शरीर का सारा भार उसके ऊपर था जिसके कारण हमारे बीच जगह कम हो गई थी और उसके उभार मेरे शरीर में घुस रहे थे। नए नए उभरे हुए चुचे मेरे सीने में गड़ रहे थे जो मुझको और उत्तेजित कर रहे थे। मेरा लण्ड पहली बार उसकी चुनमुनिया के मुँह पर छू रहा था।
मैंने उसको अपनी बाहों में भर लिया और उसके होंठों का रस पीने लगा। उसके हाथ मेरी पीठ पर जमे हुए थे और मुझको अपने से और चिपकाने की उसकी कोशिश मुझको साफ़ पता चल रही थी।
हम लोग ऐसे चिपक रहे थे मानो दोनों अपने बीच में हवा तक नहीं आने देना चाहते हो।
दोस्तो, मैं अपनी तरफ से पूरी कोशिश कर रहा हूँ कि आप लोगों को सारी बातें महसूस करा सकूँ पर मेरा निवेदन है कि आप लोग अपनी कल्पना का पूरा इस्तेमाल करें ताकि आप वो फीलिंग महसूस कर सके जो हम लोगों के बीच उस वक़्त थी।
मेरे होंठ उसके होंठों से लगे थे और मेरे हाथ उसके टांगों से लेकर उसके सीने तक पूरे जिस्म पर घूम रहे थे और उसके उभारों और गहराइयों को टटोल रहे थे। उसका स्कर्ट काफी ऊपर हो चुका था और मेरे हाथ उसकी नंगी जाँघों को छू रहे थे जो किसी मक्खन जैसी थी।
मैंने उसको करवट लेकर लिटा दिया और उसके पीछे आकर उसके टॉप में हाथ डाल दिए। मेरे हाथ उसके नंगे पेट को सहलाते हुए उसके मम्मों तक चले गए जो ब्रा क़ी कैद में थे।
मैंने ब्रा के ऊपर से उसके मम्मों को दबाना शुरु कर दिया। सहलाने का वक्त अब जा चुका था और अब वक्त था जंगली सेक्स करने का।
मैं उसके मम्मों को मसलने लगा और वो आँखें बंद करके उसके मज़े ले रही थी। मैंने बिना समय गंवाए उसका टॉप ऊपर कर के उतार दिया और अपनी टीशर्ट भी अलग करके उसके पीछे से चिपक गया। मैं उसकी नंगी पीठ पर किस करने लगा और हाथों से उसके पेट, नाभि, मम्मों को सहलाने और दबाने लगा। मैंने उसकी ब्रा का स्ट्रेप उसके कंधों से नीचे कर दिया और उस जगह किस किया।

अब उसके सीधे होने का समय था। मैंने जब उसको सीधा किया तो उसने अपने हाथों से अपने मम्मों को छिपाने क़ी कोशिश क़ी। उसके ब्रा के स्ट्रेप उसकी कोहनी तक गिर चुके थे और चुचे आधे चाँद क़ी तरह ब्रा के बाहर झांक रहे थे।
दोस्तो, आप लोगों ने महसूस किया हो तो लडको को लड़की के वो अंग जो पूरे खुले हों, उतने उत्तेजित नहीं करते जितने कि वो अंग करते हैं जो दिख कर भी नहीं दिख पा रहे हों। वही हालत मेरी थी। उसके आधे चुचे मेरे सामने थे, पूरे दिख नहीं रहे थे। मैंने उसके आधे मम्मों को चूमना शुरु किया और उसकी ब्रा को उसके शरीर से अलग करना शुरु किया।
थोड़ी देर में ही उसका ब्रा उसके जिस्म से अलग होकर मेरे हाथ में झूल रही थी।
ब्रा अलग होते ही उसके आधे कच्चे आम जैसे चुचे मेरे सामने थे जिन पर छोटी छोटी भूरे से रंग क़ी निप्पल थे। मैंने अपनी जीभ निकाली और उसके निप्पल पर लगा कर उनको चाटने लगा।
थोड़ी देर में ही उसके चुचे मेरे मुँह में थे, मैं उनको पूरा अपने मुँह में लेना चाहता था पर हो नहीं पा रहा था। मेरे हाथ उसकी स्कर्ट के अन्दर घुस चुके थे और उसके चुनमुनियाड़ सहला रहे थे।
मैंने काफी देर तक उसके मम्मों का रस पिया फिर अपनी जीभ से उसके पूरे नंगे जिस्म को चाट चाट कर गीला कर दिया। बाकी काम मेरे हाथ ने उसकी स्कर्ट में कर दिया था। वो सिर्फ आँखें बंद करके सबका मज़ा ले रही थी। हालांकि मुझको यह सब अच्छा लग रहा था क्योंकि जिस लड़की को मैं अपने बिस्तर में लाने क़ी सोच रहा था वो आज मेरे बिस्तर क़ी रानी बन के पूरी नंगी होने को तैयार थी।
कहानी जारी रहेगी