पागल लंड ‘नयी घोड़ी’–6

पिछले अंक से आगे की कहानी…..
Hindi Sex Stories Antarvasna Kamukta Sex Kahani Indian Sex Chudai मैं: आपने तो सोनू को सोमवार का वादा कर दिया. क्या सचमुच आप सोमवार को उसे अपनी गांड चोदने को देंगीं? क्या सोमवार को सुधा दीदी वहां नहीं होंगी?

दीदी: मैंने अपनी गांड की नहीं बल्कि तेरी गांड की बात की है.

मैं: क्या?

दीदी: हाँ…….सोमवार को सोनू मेरी नहीं बल्कि तेरी गांड चोदेगा.

मैं: ओह्ह्ह……..वाऊऊऊ…दीदी…….कैसे? कब? कहाँ? …
दीदी: यार बबिता वो तो पता नहीं पर अब सोनू को तड़पता हुआ नहीं देख सकती.
मैं: वैसे दीदी मेरे पास एक आईडिया है…….
दीदी: क्या?
क्यूँ ना हम आज रात सोनू भैया को घर पर बुला लें?
मरवाएगी क्या बबिता……मम्मी को पता चल गया तो आफ़त आ जाएगी.
दीदी आज रात तो मम्मी खेत पर रहेंगी और कल दोपहर तक ही वापस आएँगी. आज रात तो घर पर तुम और मैं अकेले हैं.
हाँ यार बबिता………ये तो तूने मस्त आईडिया दिया. वो तो पहले मम्मी से अलग तेरा डर रहता था नहीं तो मैं सोनू को घर पर बुला ही सकती थी. उफ्फ्फ्फफ्फ्फ्फ़……….तू पहले क्यूँ नहीं खुल गयी मेरे साथ. दोनों आराम से मस्ती मारते पूरी रात. मम्मी तो हफ्ते में तीन चार दिन तो खेत पर ही रहती हैं रात को.
दीदी अब खुल गयी हूँ…….अब तो हम दोनों में कोई शरम नहीं और ना ही कोई डर. अब ख़ूब मस्ती करेंगे…….और ख़ूब चुदेंगे.
लेकिन यार हमें हीरा, मुन्ना, भोंदू और नंदू से सावधान रहना पड़ेगा. अगर किसी ने सोनू को घर में आता जाता देख लिया तो गड़बड़ हो सकती है. चारों नौकर मम्मी के बड़े वफ़ादार हैं.
वो तुम मेरे पर छोड़ दो दीदी. किसी को पता नहीं चलेगा कि सोनू भैया कब घर में आये और कब चले गए.
वो कैसे??
वो पीछे वाला गोदाम है ना उसका एक दरवाज़ा पीछे वाली गली में खुलता है और गोदाम से एक सीड़ी सीधा ऊपर आती है. बस हो गयी प्रॉब्लम ख़तम!
अरे वाह्ह्ह….बबिता तू तो बड़ी सयानी हो गयी है. वैसे सही बात है जब लड़की चुदना चाहती है तो कोई ना कोई रास्ता ढूंढ ही लेती है.
अब जल्दी से सोनू भैया को फ़ोन लगाओ और उन्हें पीछे वाली गली में आने को बोलो.
गीता दीदी ने तुरंत सोनू को फ़ोन लगाया.
trrrrringgggggggggg trrringgggggggggg
सोनू: हेल्लो
दीदी: गांड मारनी है अभी इसी वक़्त?
दीदी ने सीधा सवाल पूछा सोनू से………..उफ्फ्फ्फफ्फफ्फ्फ़….
सोनू: उफ्फ्फ्फफ्फफ्फ्फ़………….गीता………क्यूँ चिढ़ा रही हो मुझे?
चिढ़ा नहीं रही हूँ……….पूछ रही हूँ. बोलो चोदनी है गांड?
उफ्फ्फ्फफ्फफ्फ्फ़……..हाँ…..चोदनी है. पर किसकी गांड? कब? और कहाँ?
मेरी गांड………अभी………..और मेरे घर पर……….
क्यूँ मजाक कर रही है गीता की बच्ची………कुतिया…..
तेरी ये कुतिया आज मजाक नहीं बल्कि अपने कुत्ते का इंतज़ार कर रही है वो भी अपने घर पर!
उफ्फ्फ्फफ्फ्फ़……..क्या सुधिया आंटी और बबिता नहीं हैं घर पर.
तुम्हारी सुधिया आंटी तो नहीं है पर बबिता है.
फिर कैसे होगा और तुम्हारे वो सारे नौकर? किसी ने भी देख लिया तो बहुत बुरा होगा.
अरे सुन तो ले पहले. मैंने बबिता को सब बता दिया अपने बारे में और मैंने बबिता को पटा कर मना लिया है. बबिता का अब कोई डर नहीं है. बबिता को कोई प्रॉब्लम नहीं है अगर तुम यहाँ आकर मुझे चोदो तो.
उफ्फ्फ्फफ्फफ्फ्फ़……..तुम पागल हो गीता. अपनी छोटी बहन को सब बता दिया…..उफ्फ्फ्फफ्फ्फ़…….पागल लड़की. और तुम्हारे घर के अंदर जाते हुए जरूर कोई देख लेगा मुझे. तुम मेरा बैंड बजवा दोगी और बबिता कहाँ रहेगी जब तुम मुझसे चुदोगी तो?
सोनू ने बहुत सारे सवाल एक साथ पूछ लिए. उसकी आवाज़ से ही लग रहा था कि वो कितना ज्यादा उत्तेजित हो गया था.
यार तुम पहले बोलो कि गांड चोदने का मन है कि नहीं?
यार गीता मेरा सिर्फ़ मन ही नहीं है मैं तेरी गांड चोदने के लिए मरा सा जा रहा हूँ. पर…….
पर………..वर ……..फिर कुछ नहीं. तुम आ जाओ और फ़िक्र मत करो मेरे राजा………तुम पीछे गली वाले रस्ते से आना और हमारे गोदाम के पिछले दरवाज़े से अंदर आना. और रही बात ये कि बबिता कहाँ रहेगी………..तो क्या तुम मुझे बबिता के सामने नहीं चोद सकते?
जैसे ही दीदी ने ये बात बोली तो मैं थोड़ा झेप सी गयी पर सोनू तो जैसे उछाल सा गया. मुझे अजीब सी गुदगुदी होने लगी कि दीदी को अपने सामने चुदते हुए देखूंगी.
उफ्फ्फ्फफ्फ्फ्फ़………..तुम मजाक तो नहीं कर रही हो.
मैं फ़ोन रख रही हूँ पांच मिनट के अंदर पीछे गली में आ जाओ. बबिता गोदाम का दरवाज़ा खोल देगी.
इतना कह कर दीदी ने फ़ोन रख दिया.
बबिता तो जल्दी गोदाम में जा और पीछे का दरवाज़ा खोल दे.
पर दीदी मुझे नहीं लगता कि सोनू भैया आयेंगे.
वो जरूर आएगा. आज बहुत मस्ती आने वाली है बबिता.
सच दीदी?
सच्ची……….बबिता तू बस लंड देखना सोनू का. क्या मस्त लंड है. और क्या मस्त बॉडी है तेरे ‘मास्टर जी’ की………
दीदी वैसे मैंने भी अभी तक किसी जवान लड़के को करीब से नंगा नहीं देखा. हीरा काका तो अधेड़ उम्र के हैं और भोंदू और नंदू को बस कभी कभी चुदाई करते हुए ही नंगा देखा है.
अरे तू देखना बस सोनू को जब वो नंगा होगा तो. बहुत हॉट लगता है कमीना. मैं और सुधा तो दोनों उसे देखते रह जाते है जब वो नंगा होता है तो. और उसकी आदत भी है वो आते ही सबसे पहले अपने सारे कपड़े उतार देगा और बिलकुल नंगा हो जायेगा. और उसका लंड तो बहुत ही मस्त है. जैसे कोई लम्बा सा केला होता है थोड़ा सा घूमा हुआ सा…….बल्कि सच में ऐसा ही लगता है जैसे कोई लम्बा केला लगा रखा हो सोनू ने अपने आगे. बिलकुल केले के आकार का गोलाई में घूमा हुआ लंड. और उसके लंड पर बहुत सारे दाने से हैं………शायद मस्से है या तिल पर पुरे लंड पर दाने से उभरे हुए हैं. उन मस्सों की वजह से तो सोनू का लंड और भी मस्ती देता है. तू देखना बस बबिता………उसका लंड ऐसा है जैसे कोई चितकबरा सा केला हो. सुधा को क्या पता कि ऐसे घुमावदार टेढ़े और दाने वाले लंड से गांड मरवाने में कितना मज़ा आता है. उफ्फ्फफ्फ्फ़………बबिता……सब तेरी वजह से मेरी बहन…….सब तेरी वजह से. अब जा जल्दी से गोदाम में जाके दरवाज़ा खोल पीछे वाला.
मैंने नीछे गोदाम में जाके जैसे ही दरवाज़ा खोला तो सोनू भैया गली में ही खड़े थे. वो सिर्फ़ 4 मिनट में ही आ गए थे. उफ्फ्फ्फफ्फफ्फ्फ़………गज़ब की ठरक होती है इन लड़को की. लड़की बस इशारा कर दे तुरंत भागे चले आते हैं.
हेल्लो भैया……आ जाओ अंदर. आप ऊपर चले जाओ सीड़ियों से मैं आती हूँ अभी दरवाज़ा बंद करके.
सोनू भैया ने एक सफेद टी शर्ट और सॉफ्ट सा पजामा पहन रखा था. बहुत ही सुंदर सा चेहरा और मस्त हट्टा कट्टा शरीर. मुझे दरवाज़ा बंद करने में कुछ २ मिनट लग गए…तब तक भैया ऊपर जा चुके थे. मैं जब ऊपर पहुँची तो मैं जैसे एकदम से उछल गयी. दीदी सच कह रही थीं सोनू भैया के बारे में कि वो आते ही सबसे पहले सारे कपड़े उतार के बिलकुल नंगा हो जाता है. ये सच मैं अपनी आखों से देख रही थी. मैं बस दरवाज़ा बंद करके आई थी भैया के पीछे पर तब तक सोनू ने अपने सारे कपड़े उतार दिए थे और वो गीता दीदी के रूम में बिलकुल नंगे खड़े थे.
ये सब मेरे लिए एकदम नया और उत्तेजित करने वाला था. मैं अब तक सिर्फ़ तीन बार चुदी थी पर वो भी डर डर के! और मुझे चोदा भी किसने………हीरा काका ने……एक अधेड़ उमर का मर्द! खेतों में किसी के आ जाने के डर से तीनों बार हीरा काका ने मुझे बिना नंगा किये हुए ही चोदा था. हर बार हीरा काका ने मेरी चुड़ीदार सलवार और मेरी कच्छी को बस घुटनों तक सरका कर मेरी चुदाई करी. और ख़ुद भी बस अपनी पैन्ट की चैन से लंड बाहर निकाल कर चुदाई की. चुदाई के वक़्त ऊपर से नीचे तक बिलकुल नंगा होना मेरे लिए अभी भी एक अंजाना अहसास था. हालाँकि दोपहर में जो चुदाई का नंगा नाच मैंने देखा था उससे तो यही लगता था कि चुदने का मज़ा बिलकुल नंगी होके ही आता होगा. क्यूंकि मम्मी, गीता दीदी और रंभा काकी सब कि सब दोपहर में बिलकुल नंगी होके चुद रही थीं. और मुन्ना काका, भोंदू और नंदू भी पुरे नंगे थे. दोपहर में भी मैं भोंदू और नंदू के नंगे शरीर से बहुत आकर्षित हो रही थी. मैं थोड़ा दूर खड़ी थी पर दिल में ज़ोर की इच्छा थी कि उन प्यारे-प्यारे नंगे मर्दों को पास से देखूं……….छू के देखूं……
और अब रात में मैं और गीता दीदी घर पर बिलकुल अकेले थे और हमें देखने वाला कोई नहीं था. और हमारे कमरे में इतनी रात को एक मस्त लड़का मौजूद था जो इस वक़्त कमरे में एकदम मादरजात नंगा खड़ा था! जब मैं दरवाज़े पे खड़ी थी तो सोनू भैया की पीठ मेरी तरफ थी जिससे मैं उनका लंड नहीं देख पा रही थी. पर सोनू का मस्त, तगड़ा और बिलकुल नंगा शरीर मुझे पीठ की तरफ से भी बहुत आकर्षक लग रहा था. मन में तेज़ गुदगुदी हो रही थी ये सोच कर ही कि आज रात ना किसी का डर है ना किसी की शरम. इतना मस्त नंगा लड़का सिर्फ़ मेरे और गीता दीदी के लिए हमारे घर आया था इतना ज़ोखिम उठा के. पर ज़ोखिम सिर्फ़ घर के बाहर तक ही था. घर के अंदर आते ही सोनू भैया में एक अलग ही एनर्जी थी.
दीदी: अरे बबिता वहां क्यूँ खड़ी हो?? यहाँ आ और देख कितना प्यारा लंड है इस पागल लड़के का! और देख तो कमीना कितना खुश हो रहा है………पागल……..देख कैसे फुर्ती से अपने सारे कपड़े उतार के बिलकुल नंगा हो गया है.
मैं: अरे दीदी…….. “मम्म्मी”………..
मेरे मुँह से मम्मी का नाम सुनते ही सोनू से झट से बिस्तर पर पड़ी दीदी की चुन्नी उठाई और फुर्ती से चुन्नी को अपनी कमर पर लपेट लिया जैसे तौलिया बाँधी जाती है.
ये देख में हंसने लगी तो दीदी बोली………
दीदी: हरामज़ादी मार खाएगी तू मुझसे बबिता………..क्यूँ डराया सोनू को…?
सोनू: ओह्ह्ह्हह्ह……..मतलब इसने ऐसे ही कहा मुझे डराने के लिए! बड़ी शैतान है ये बबिता तो.
JJJJदीदी: क्यूँ शैतान मैं नहीं हूँ क्या????
सोनू: तू तो मेरी जान है गीता………..चल यार अब रुका नहीं जा रहा.
और इतना कह के सोनू अपनी कमर पे लिपटी दीदी की चुन्नी हटाने ही वाला था कि दीदी ने उसे रोक दिया.
दीदी: नाआआअ……….तू मत हटा ये चुन्नी…….सोनू! अब बबिता ही हटाएगी ये चुन्नी.
इधर आ बबिता………अब तंग मत कर सोनू. आजा इधर आ और खोल अपने इस गिफ्ट को.
मैं दीदी के पलंग पर जाके दीदी की बगल में बैठ गयी. सोनू बिलकुल हम दोनों के सामने खड़ा था. वो बिलकुल नंगा था बस दीदी की चुन्नी उसकी कमर से लिपटी थी. और उसका लंड………बाप रे ………चुन्नी में दुपका हुआ भी अपनी लम्बाई का अहसास करवा रहा था. ऐसा लग रहा था जैसे दीदी की चुन्नी किसी बड़े से खूंटे पे लिपटी हो. मैंने एक बार दीदी की तरफ़ देखा और फिर सोनू के लंड पर लिपटी चुन्नी खींचने लगी. चुन्नी के खींचने से सोनू का लंड हलके झटके के साथ उछल कर बाहर आ गया. जैसे ही लंड उछल कर बाहर आया तो इतने मस्त और लम्बे लंड को नंगा देख कर मेरे हाथ से चुन्नी छुट गयी और चुन्नी सोनू की कमर में अभी भी लिपटी थी. सोनू कमर में लिपटी चुन्नी को हटाने लगा तो उसका नंगा लंड हमारे सामने लहराने लगा. फिर सोनू ने चुन्नी को कमर से निकाल कर फ़र्श पर फेंक दिया और अपने दोनों हाथ कमर के पीछे करके अपने लम्बे तगड़े लंड को और आगे को कर दिया. सोनू लंड को बिलकुल हमारे चेहरे के पास करके ऐसे मुस्कुरा रहा था जैसे कोई योद्धा अपनी नंगी तलवार निकाल कर गर्व से मुस्कुराता है!
दीदी: उफ्फ्फ्फफ्फ्फ्फ़…………क्या मस्त लंड है यार !!!!!!!
मैं: सच्ची दीदी…….. वाओ………कितना प्यारा और लम्बा लंड है भैया का!
दीदी: क्या बात है सोनू……….आज बड़ा तन्नाया हुआ है तेरा लंड!
सोनू: उफ्फ्फ्फफ्फ्फ्फ़………गीता………कितने महीनों से तड़प रहा था तेरी गांड मारने के लिए. वो कामिनी सुधा……कभी गांड मारने ही नहीं देती. आज तो मेरे लंड को तेरा मस्त गोल मटोल पिछवाड़ा चोदने को मिलेगा…..तो लंड तो तन्नायेगा भी और गुर्रायेगा भी…..
दीदी: कहीं ये पागल लंड ‘नयी घोड़ी’ को देख कर तो नहीं इतना तन्ना रहा?
दीदी ने मेरी तरफ देख कर कहा…….मैं समझ गयी कि ‘नयी घोड़ी’ कौन है……..
सोनू: पहले पुरानी घोड़ी का पिछवाड़ा तो दुरुस्त कर दूँ अपने इस लंड से चोद-चोद के! फिर ‘नयी घोड़ी’ को भी देख लेंगें कि कैसी दौड़ती है.
सोनू ने दीदी की कुर्ती ऊपर करके उतार दी जिससे दीदी ऊपर से बिलकुल नंगी हो गयी. फिर दीदी सोनू के एक इशारे पर घूम गयी और सोनू की तरफ़ अपने चूतड़ करके पलंग के किनारे पर घोड़ी की तरह खड़ी हो गयीं. दीदी ने अभी भी चुड़ीदार सलवार पहनी हुई थी पर घोड़ी बनी हुई बहुत ही प्यारी लग रही थीं.
सोनू: उफ्फ्फ्फफ्फफ्फ्फ़…….क्या मस्त घोड़ी बनती है तू गीता…….उफफ्फ्फ्फ़……..क्या मस्त, चौड़ी और गद्देदार गांड है……….आज तो तेरी मस्ती आने वाली है ‘छोटे सोनू’
सोनू अपने लंड को हाथ से पुचकारते हुए दीदी की गांड से चिपक कर खड़ा हो गया. वो अपने लम्बे लंड को दीदी के सलवार में कैद मस्त उठे हुए चूतड़ों पर घिसने लगा और दीदी के मुलायम कमर पकड़ कर अपनी कमर को ऐसे हिलाने लगा जैसे दीदी को पीछे खड़ा होके चोद रहा हो.
फिर सोनू नीचे झुक कर दीदी के चूतड़ों पर चुम्मी लेने लगा और अपने हाथ आगे करके दीदी की सलवार का नाड़ा खोलने की कोशिश करने लगा. वो काफ़ी देर तक दीदी के चूतड़ों में मुँह मारता रहा और सलवार का नाड़ा खोलने की कोशिश करता रहा पर शायद दीदी का नाड़ा उलझ गया था. अब लड़की की सलवार का नाड़ा लड़की ही अच्छे से खोल सकती है!
दीदी: उम्म्म्मम्म्म्म……….बबिता…………तू खोल दे सलवार का नाड़ा……….नहीं तो कहीं जोश में ये पागल मेरी सलवार ही ना फाड़ दे!
दीदी खिलखिला रही थी और गुदगुदा रही थी क्यूंकि सोनू उनके चूतड़ों में मुँह मार रहा था. मैंने कोशिश की तो २ मिनट में दीदी का नाड़ा खुल गया. नाड़ा खुलते ही सोनू ने दीदी की सलवार नीचे खींच दी जिससे सलवार दीदी के घुटनों में अटक गयी और दीदी की मस्त प्रिंटेड कच्छी सोनू की नज़र में आ गयी.
सोनू: उफ्फ्फ्फफ्फफ्फ्फ़……….क्या मस्त माल लगती है तू इस फूल पत्ती वाली प्रिंटेड पैंटी में………उफ्फ्फ……….उम्म्म्मम्म्म्म………..म्मूउन्न……..च्च्च्चच….
सोनू दीदी को कच्छी में देख के पगला सा गया और दीदी के चूतड़ पर ज़ोरदार चुम्मी लेने लगा. और फिर उसने पहले सलवार को दीदी की लंगड़ी टांगों से बाहर निकाला और फिर ऐसे ही दीदी की कच्छी भी दीदी के मस्त जिस्म से उतार फेंकी. अब मेरी दीदी कमरे में बिलकुल मादरजात नंगी थी और बिस्तर पर घोड़ी बनी हुई थी.
थोड़ी देर दीदी की नंगी गांड को चूमने चाटने के बाद सोनू दीदी के पीछे खड़ा हो गया और अपने लंड को दीदी की गांड की दरार में घिसने लगा. दीदी सोनू की इस हरकत से ‘सी’ सी’ करने लगी पर तभी दीदी एकदम से उछली और पलंग के दुसरे किनारे पर गिरी………..
दीदी: उफ्फ्फ्फफ्फफ्फ्फ़……….सोनू……….कितनी तेज़ चुभा मुझे……….क्या कर रहा है……..अगर गांड में डालना है तो बता तो दे मुझे………कमबख्त……….मैं तैयार भी नहीं थी और तू गड़ाने लगा लंड को मेरी गांड में. और कुछ लगा तो ले……..पहले…….तेल या घी………एकदम बेसबरा हुआ जा रहा है. मैं कहीं भागी थोड़ी जा रही हूँ. आराम से मज़ा ले यार…………पूरी रात आज मैं सिर्फ़ तेरी ही हूँ.
“और मैं तो जैसे हूँ ही नहीं इस कमरे में”….मैंने मन में सोचा…….
सोनू दीदी का हाथ पकड़ कर फिर से उसको घोड़ी बनाने लगा.
सोनू: ले…….मैंने ढेर सारा थूक लगा लिया लंड पर………अब आजा…..अब नहीं चुभेगा तुझे…..
सोनू ने बहुत सारा थूक अपने हाथ पर थूका और उसे अपने लंड पर लसेढ़ लिया.
दीदी: ना…….रे ना………..मैंने तुझे अपनी गांड ‘मारने’ के लिए बुलाया है ना कि गांड ‘फाड़ने’ के लिए. थूक से तो कभी भी नहीं………मैं मर जाउंगी………बबिता जा रसोई से थोड़ा घी कटोरी में गरम करके ले आ.

मैं सोनू भैया की हालत समझ रही थी. वो बस जल्दी से दीदी की गांड में लंड घुसाने के लिए तड़प रहे थे. सोनू ने लंड पर ख़ूब सारा थूक भी लसेढ़ लिया था और दीदी को कस के पकड़े हुए था. दीदी भी अब मुझे लंड गांड में डलवाने के लिए बेताब सी लग रही थीं पर वो शायद अपनी गांड और थोड़ी चिकनी कर लेना चाहती थीं.
मैं जल्दी से रसोई से घी लेने चली गयी. घर में सन्नाटा था जिससे कमरे में दीदी और सोनू की बातें मुझे रसोई में भी सुनाई दे रही थीं.
दीदी: ओह्ह्ह्हह…….सोनू………रुक जा दो मिनट……….क्यूँ मरा जा रहा है. आज जी भरके मार लेना मेरी गांड ……… सिर्फ़ तेरी हूँ मेरे मास्टर जी……
सोनू: यार गीता……अब रुका नहीं जा रहा……बस ठोकने दे मुझे इस मस्त चुदक्कड़ गांड को………उफ्फ्फफ्फ्फ़……..दीवाना हूँ मैं गीता तेरी इस मटकती गांड का………..क्या बताऊँ……जब तू अपने घुटनों पर चलती है तो कितनी मस्ती से लहराती और मटकती है तेरी ये मस्त गांड…….
दीदी: ऊओफ़्फ़्फ़्फ़…….ओ………तू तो बस पागल ही रहना मेरे लिए……. ‘मेरा नुन्नू’………मुझे पता है कि तू मेरी गांड के लिए कितना तड़पता है. इसलिए ही तो मैंने तुझे तुरंत बुला लिया जैसे ही मुझे बबिता ने प्लान बताया.
सोनू: यार……..मस्त है ये बबिता भी.
दीदी: और बबिता की गांड भी !!!!!!!!!
सोनू: चल पगली……….क्यूँ तंग करती है मुझे……
दीदी: देख ले………कहीं फिर बाद में रोना नहीं कि क्यूँ नहीं चोदी. एकदम कुंवारी है बबिता की गांड.
सोनू: लेकिन चूतड़ तो काफ़ी भरे हुए है बबिता के भी.
दीदी: ओह्ह्ह्ह……ओ……तो ज़नाब ने मेरी बहन के चूतड़ भी नाप लिए !
सोनू: तू भी ना गीता………..बहुत बदमाश है.
दीदी: ह्ह्ह्हुन्न्नन्न्न्न……….जब चोदोगे बबिता को तब देखूंगी कि कौन बदमाश है. मन में लड्डू फूट रहे हैं कि आज दो मस्त-मस्त घोड़ियाँ चोदने को मिल रही हैं.
सोनू: देखते हैं पर अगर तुम राज़ी हो तब ही करूँगा……बबिता के साथ.
दीदी: ओये…..होए…….मेरा वफ़ादार मास्टर जी……..चल कमीने……मैं भी राज़ी हूँ और मेरी बहन भी……..आज मस्त कर देना उसको भी……!!! उसे अपनी गांड मरवानी है……….समझे बुद्धू………तभी तो इतना साथ दे रही है मेरा.
सोनू: यार……सच्ची…………तू मजाक कर रही है ना!!!!!………मेरे नसीब में कहाँ है यार.!!!!!!! मैं तो बस औरत की गांड चोदने के लिए तड़पता ही रहता हूँ…….सुधा तो मुझे पसंद भी बहुत करती है पर फिर भी कामिनी ने कभी भी मुझे अपनी गांड नहीं चोदने दी……….जबकि साली की कितनी प्यारी गांड है……एकदम बड़े दिल के आकार की. बहुत दिल करता है गीता कि कभी सुधा की गांड चोदने को मिल जाए.
दीदी: अरे भूल जा उस कामिनी सुधा को तो. वो अपनी गांड तो छोड़………तुझे मेरी गांड भी चोदने नहीं देती. नहीं तो मैं ऐसी लड़की नहीं हूँ जो अपने आशिक़ की हसरतें पूरी ना करूँ. सुधा नहीं होती तो मैं तो तुझसे रोज़ अपनी गांड मरवाती. वैसे भी मुझे गांड में चुदना बहुत अच्छा लगता है. और बबिता भी बहुत अच्छी है. उसकी गांड भी बहुत दिलकश है और ख़ूब मटकती है!!!!!!!!!!!
सोनू: हाँ वो देखा मैंने अभी जब वो रसोई में जा रही थी……मस्त भरी-भरी और उठी हुई गांड है.
दीदी: अरे गज़ब की है उसकी गांड. बिलकुल पीछे को निकली हुई है उसकी गांड जिसकी वजह से और ज्यादा मटकती है उसकी गांड. और ख़ूब चौड़ी सी और गद्देदार है उसकी गांड………..तू तो मस्त तबला बजायेगा आज रात उसकी गांड पर.
सोनू: ही…ही …ही……ही………तू भी ना गीता………..हा…..हा…….हा… ‘तबला’
दीदी: और नहीं तो क्या!!!!!!!! आज तबला ही तो बजेगा मेरी बहन का.
सोनू: लेकिन पहले तेरा तबला बजेगा मेरी जान……….
दीदी: चल नालायक………..हरामी……..कुत्ता………..जानू……..अरे कहाँ रह गयी बबिता………ये लड़की कभी रसोई में घुसती हो तो पता चले कि कोई चीज़ कहाँ रखी है.
सोनू: रुको मैं ले आता हूँ घी……..कहाँ रखा है रसोई में मुझे बताओ. वैसे थूक से हो जाता गीता………
दीदी: नहीं……….बाबू………माफ़ करो मुझे……..बड़ा खतरनाक सा लंड है तेरा. पिछली बार तो तूने पोंड्स क्रीम लगा के मारी थी मेरी गांड और तब इतना दर्द हुआ था…….थूक लगा के मारेगा तो मर ही जाउंगी मैं तो.
सोनू: यार मेरा दोस्त ‘पिंटू’ का लंड तो मेरे लंड से भी और दो इंच लम्बा है और मेरे लंड से ज्यादा मोटा भी है. पर वो तो ख़ूब अपनी उस ‘कमली’ बुआ की गांड मारता है और वो भी सिर्फ़ थूक लगा के.
दीदी: यार………होगा उसका लंड लम्बा पर तेरा लंड घूमा हुआ है केले की तरह और कितने सारे मस्से है तेरे लंड पे जिससे बहुत ज्यादा रगड़ लगती है और चुदने में ज्यादा तकलीफ़ होती है.
सोनू: पर सुधा को तो इन मस्सों की वजह से ही मेरे लंड से चूत मरवाने में मज़ा आता है.
दीदी: चूत में तो खेर सच में बहुत मज़ा आता है तेरे लंड से पर गांड में तेरा तिरछा लंड बड़ा दर्द देता है……….इसलिए थूक लगा के मेरी गांड चोदने की बात मत कर कमीने……….मैं नहीं दूंगी तुझे अपनी गांड थूक से चोदने के लिए!!!!!
इतने में मैं घी गरम करके कमरे में ले आई. मैं पूरी कटोरी भर कर घी लायी थी और एक चम्मच भी साथ लायी थी. मैं अब दोनों को और नहीं तड़पाना चाहती थी. मैंने रसोई से सारी बात सुनी थी और समझ रही थी कि दीदी और सोनू दोनों ही अब चुदाई के लिए तड़प रहे थे. मैं जैसे ही पलंग पर जाके बैठी सोनू अपना लंड लहराता हुए मेरे सामने आके खड़ा हो गया.
सोनू: बबिता जल्दी से लंड को पूरा भिगो दे इस गरम घी में……..आज तेरी दीदी की खेर नहीं……. देखना कैसे बकरी की तरह मिमियाय्गी……….जब चुदेगी तो!!!
मैं सोनू के लंड पर चम्मच से घी डाल कर हाथ से लंड पर मलने लगी. लंड एकदम से बहुत ही ज्यादा चिकना हो गया.
दीदी: बबिता लंड के ऊपर और नीचे सब जगह अच्छे से लगा देना घी…….
मैं: हाँ दीदी……..पुरे लंड पर घी लगा के मल रही हूँ………तुम चिन्ता मत करो……
दीदी: और सुन बबिता…….वहां मेरी मेज़ की दराज़ में एक मोटा वाला ‘ड्रॉपर’ रखा है. उस ड्रॉपर में भी थोड़ा सा घी भर कर मेरी गांड के अंदर भी लगा दे. नहीं तो ये ज़ालिम आज मेरी गांड के चिथड़े कर देगा चोद—चोद के.
मैंने जल्दी से दीदी की दराज़ खोली तो उसमे मुझे एक मोटा ड्रॉपर रखा दिखा. मैंने ड्रॉपर में घी भर दिया और दीदी के पास गयी. दीदी बिलकुल नंगी घोड़ी बनी हुई बहुत ही ज्यादा कामुक दिख रही थीं.
दीदी: बबिता धीरे से घुसाना ड्रॉपर और दबा के पूरा घी भर दे गांड में.
मैं: दीदी इतना मोटा लंड तुम्हारी गांड में घुसने वाला है और तुम इस छोटे से ड्रॉपर से डर रही हो.
दीदी: डर नहीं रही हूँ कमीनी…….बस ऐसे ही……..और ये लंड आज मेरी गांड में घुसने के बाद तेरी गांड में भी तो घुसेगा!!!!!!
मैं: क्या दीदी……….तुम भी ना……..
दीदी: ओह्ह्ह हो………देखो कैसे शरमा रही है. अभी अभी सोनू के नंगे लंड पे घी मल रही थी और अब अपनी दीदी की गांड लंड के लिए चिकनी करने जा रही है और देखो कैसे शरमा रही है……….कमीनी……!!!!
मैंने दीदी के नंगे चूतड़ एक हाथ से फेलाया तो सोनू ने अपने हाथ से दीदी का दूसरा चूतड़ फेलाया. दीदी की गांड का भूरा छेद ने एकदम से सामने आके अपना मुँह खोल दिया. दीदी की गांड का छेद फूल पिचक रहा था जैसे कुछ कहना चाह रहा हो.
सोनू: उफ्फ्फ्फफ्फफ्फ्फ़………..कितना प्यारा छेद है इस कमीनी का. वाओ…..एकदम भूरा छेद……….बिलकुल ऐसा ही छेद पसंद है मुझे. उफ्फ्फफ्फ्फ़….क्या मस्त गांड चोदने को मिल रही है……..थैंक्स बबिता. सब तेरी वजह से मुमकिन हो पा रहा है.
मैंने धीरे से ड्रॉपर की पाइप दीदी के गांड के छेद पे लगा के आगे को दबा दिया. ड्रॉपर सीधा जाके चार इंच तक दीदी की गांड में घुस गया!!!! फिर मैंने धीरे से ड्रॉपर की रबर दबा के ड्रॉपर में भरा सारा घी दीदी की गांड में भर दिया और ड्रॉपर को वापस दीदी की गांड से बाहर खींच लिया. ऐसा दो-तीन बार और करने से दीदी की गांड में काफ़ी सारा घी भर गया और फिर सोनू ने मुझे दीदी के पीछे से हटा दिया और ख़ुद कमान संभाल ली. मैं भी थोड़ा पीछे हट गयी और उन दोनों के देखने लगी. सोनू ने अपना तन्नाया हुआ घी में सना लंड दीदी की गुदा से चिपका दिया और दीदी के चूतड़ पकड़ कर ज़ोर से लंड को दीदी की गांड में दबाने लगा. मोटा लंड ‘पुछक्क’ की आवाज़ के साथ तीन इंच दीदी की गांड में घुस गया जिससे दीदी को एक जलन सी हुई और वो आगे को सरकने लगीं पर सोनू ने दीदी की कमर पकड़ ली और एक और ज़ोरदार धक्का दीदी की गांड में दे मारा. मोटा लंड और तीन इंच दीदी की गांड में घुस गया. दीदी ने ज़ोर से मुट्ठी भींच ली और दर्द को सहन करने लगीं. और उधर सोनू ने एक और ज़ोर का धक्का मारा और उसका पूरा लंड दीदी की गांड में घुस गया.

दीदी की गांड सोनू के लंड को पूरा का पूरा निगल गयी थी. इतना बड़ा लंड अचानक से गायब हो गया था…….लंड पूरा का पूरा दीदी की गांड में घुस गया था.
सोनू: आआह्ह्ह्ह………ह्ह्ह्हह्ह्ह्हह्ह…………इसी अहसास के लिए तो मैं मरा जा रहा था इतने दिनों से…..उफ्फ्फ्फफ्फ्फ़…….कितनी गरम है ये गांड अंदर से….मेरा तो लंड जैसे भुन जायेगा.
दीदी: उफ्फ्फ्फफ्फ्फ़……..बहनचोद ने पूरा लंड घुसेड़ दिया…….आईईईईईईईईईईईईई ……..कैसे अकड़ा हुआ है लंड मेरी गांड में घुस कर………उम्म्म्मम्म बबिता….. बहुत अच्छा लग रहा है……
फिर सोनू ने दीदी की गांड को चोदना शुरू कर दिया. वो अपनी कमर हिला के लंड को आधा बाहर निकालता और फ़िर हुमच के लंड को पूरा जड़ तक दीदी की गांड में घुसा देता. सोनू बहुत ही जोशीले ढंग से दीदी की गांड चोद रहा था जिससे दीदी कुछ ही देर में बिलबिलाने लगीं. दीदी मस्ती से चुद रही थीं और शोर भी मचा रही थीं. मैं तो बस दीदी की गांड को ही लगातार देख रही थी जो गपा-गप लंड को अंदर बाहर होने दे रही थी. सोनू का लंड दीदी की गांड सटा-सट अंदर बाहर हो रहा था जिससे दीदी मज़े से सिसकने लगीं थीं.

दीदी बड़े मज़े से चुद रही थीं. वो दोनों पैरों से विकलांग थी….लंगड़ी थी….पर गज़ब की चुदक्कड़ लड़की थीं! दिन में मुन्ना काका से इतनी बुरी तरह चुदने के बाद अब रात में फिर से मस्ती के साथ अपनी गांड मरवा रही थीं. और सोनू वो तो जैसे चोदने के लिए ही पैदा हुआ था. मैंने आज तक सोनू भैया को सिर्फ़ एक पढ़ाकू लड़के की तरह ही देखा था. हमेशा सादे कुर्ते पजामे में रहने वाला गाँव का मास्टर जी……..इतना मस्त चोदू भी हो सकता है मैंने सोचा नहीं था……बिलकुल नंगा मेरे ठीक सामने मेरी दीदी को चोद रहा था कमीना……!!!!!
सोनू चोदते-चोदते कई बार दीदी की गांड से अपना लंड बाहर निकाल लेता था और दीदी के नंगे चूतड़ों पर अपने खड़े लंड से थपकियाँ देने लगता था और कभी-कभी दीदी के चुदे छेद में फ़िर से अपनी गरम जीभ डाल कर चाटने लगता था. इससे दीदी और मस्त हो जाती और सोनू को फिर से गांड में लंड डालने के लिए पुकार उठती. सोनू फिर से दीदी की गांड में लंड डाल कर चोदने लगता और दीदी फिर से चीखने लगती. दीदी मज़े से बहुत ज्यादा चीख़ रहीं थीं.
दीदी: ओह्ह्ह्हह्ह्ह्ह………बब्ब्बब्ब्बिता……….उईईईईईईईईई…….माँ ………मर गयी…… क्या चोद रहा है कमीना……..उफ्फ्फ्फफ्फ्फ़……..हाऐईईईईई… सोनू…. ऐसे ही……..उम्म्मम्म्म्म………और ज़ोर से………क्या मस्त चोद रहा है तू…. उईईईईईईईईई ……….. उईईईईईई………..आआह्ह्ह्ह ………कुत्ते……….
सोनू ने लंड बाहर निकाल लिया और कमरे में कुछ ढूँढने लगा.
सोनू: बबिता वो छोटा वाला स्टूल उठाना ज़रा…..
सोनू ने दीदी के कमरे में पड़े एक छोटे से स्टूल को उठाने को कहा. मैंने स्टूल उठाके सोनू को दिया. सोनू ने स्टूल कमरे के बीचो-बीच फ़र्श पर रख दिया. दीदी घोड़ी बनी लहरा रही थी…….शायद सोच रही थीं कि ये सोनू चोदना बंद करके क्या करने लगा.
सोनू: गीता…….अब तुम इस छोटे से स्टूल पर घोड़ी बन जाओ. बड़ा मज़ा आएगा तुम्हे इस छोटे स्टूल पर घोड़ी बना के चोदने में!!!!!!!!
दीदी के साथ-साथ मैं भी चौंक गयी क्यूंकि स्टूल बहुत ही छोटा था. इतने छोटे स्टूल पर घोड़ी बन कर चुदना किसी कलाकारी से कम नहीं था! पर मेरी दीदी धीरे से पलंग से उतर कर उस छोटे स्टूल पर चढ़ गयी. दीदी ने पहले अपने हाथ फ़र्श पर रख कर अपने घुटने उस स्टूल पर रखे और फिर घुटनों को स्टूल के किनारे पर रख कर अपने हाथ भी स्टूल पर ही टिका लिए. दीदी मस्त घोड़ी की तरह खड़ी हो गयी उस छोटे से स्टूल पर!!!
सोनू: वाओ………. कितनी प्यारी लग रही हो तुम गीता…….. उफ्फ्फफ्फ्फ़….. तू बहुत चुदक्कड़ है…..कुछ उस हरामज़ादी सुधा को भी सिखा दे. उम्म्मम्म…….पुन्छ्ह…..पूऊउछ्ह्ह….
सोनू दीदी के चूतड़ सहलाने लगा.
दीदी: पर इस बार धीरे-धीरे चोदना………. नहीं तो मैं गिर जाउंगी स्टूल से नीचे अगर ज़ोर से चोदेगा तो.
सोनू: अब तो ऐसा चोदुंगा कि तेरी नानी याद आ जाएगी…..
और फिर सोनू ने देर ना करते हुए फिर से अपना वो मस्त लौड़ा दीदी की गांड में डाल दिया और दीदी की कमर पकड़ कर धे…..दना दन चोदने लगा. इस बार सोनू दीदी के ऊपर बिलकुल चढ़ कर दीदी को चोद रहा था. बिलकुल किसी कुत्ते की तरह चोद रहा था वो सीधा-साधा मास्टर……….!!!!
इतना मस्त और गरम चुदाई देख कर मेरी भी हालत पतली होने लगी थी. अब मैं भी चुदना चाह रही थी. मेरे भी मन में आने लगा था कि मैं भी इसी तरह घोड़ी बन जाऊं और कोई मस्त लड़का मुझे भी इस तरह ख़ूब कूद-कूद के चोदे!!!
तभी मैंने देखा कि सोनू ने अपना लंड दीदी की गांड से बाहर निकाल लिया और घूम कर दीदी के चेहरे के सामने जाके खड़ा हो गया. और दीदी ने सोनू का लंड तुरंत अपने मुँह में दबा लिया. इस्स्स्सस्स्स्स…….. दीदी ने अपनी गांड से निकला हुआ लंड अपने मुँह में ले लिया था और चूस रहीं थीं. मैं बस हैरानी से ये सब देख रही थी. सोनू भैया दीदी के सर के बाल सहला रहे थे और दीदी को लंड चूसा रहे थे. तभी दीदी ने मेरी तरफ देखा और कहा.
दीदी: अरे बबिता मेरी अलमारी से शहद का ज़ार उठाना ज़रा.
मेरी दीदी को शहद और गुलाब का गुलकंद बहुत पसंद था. वो अपने कमरे में शहद और गुलकंद हमेशा रखती थी और जब मन करता था चम्मच भर खाती थीं. मैंने शहद का ज़ार दीदी को दिया. दीदी तब तक स्टूल से उतर कर फिर से बिस्तर पर घोड़ी बन गयीं थीं और सोनू का लंड चूस रहीं थीं. दीदी ने ज़ार खोला और सोनू के लंड को पकड़ कर शहद के ज़ार के अंदर डाल दिया. ज़ार में ऊपर तक शहद भरा था जिससे लंड पर बहुत सारा शहद लग गया. दीदी ने लंड बाहर निकाला और लंड पर लगा शहद चाटने लगीं और फिर सोनू के लंड को ज़ोर ज़ोर से चूसने लगीं. कुछ ही देर में दीदी ने सोनू के लंड पर लगा शहद चाट कर साफ़ कर दिया और लंड को दुबारा शहद के ज़ार में डालने लगीं. पर इस बार सोनू ने मना कर दिया और कहने लगा…
सोनू: क्यूँ ना एक काम करें……….इस मीठे शहद को तुम्हारी गांड में भर देता हूँ. फिर तुम्हारी गांड में लंड डाल कर जब लंड बाहर निकालूँगा तब तुम लंड को चूसना. इससे तुम्हें मीठा लंड चूसने को मिलता रहेगा और मुझे तुम्हारी मीठी गांड चोदने को मिलेगी!
दीदी: वाओ……..पर गांड में शहद कैसे भरोगे??
सोनू: ड्रॉपर में तो शहद भरेगा ही नहीं……..क्या तुम्हारे घर में कोई ‘तेल की कीप’ है? गांड में कीप लगा के आराम से शहद भरा जा सकेगा…
दीदी: नहीं ‘तेल की कीप’ तो नहीं होगी.
सोनू: रुको सोचने दो………उम्म्मम्म्म्म…………बबिता…….जल्दी से कोई मोटे कागज़ वाली किताब लाओ.
कहानी जारी रहेगी