निशा का नशा Indian Sex Story

Antarvasna Hindi sex stories Kamukta निशा पेट के बाल आँखे बंद किए लेती हुई थी. उसके शरीर पर सिर्फ़ पेंटी और ब्रा ही शेष थे अन्यथा वो पूरी तरह नग्न थी. वो आँखे बंद करके उस वक्त की सकचाई से भागने की कोशिश कर रही थी, ठीक उस कबूतर की तरह जो की बिल्ली को सामने देख कर आँखे बंद कर लेता है. मगर जीवन के सच से भागना अक्सर आसान नही होता. 21 वर्षीया निशा यूस्ब में म्बा की च्चात्रा थी. उसके मा बाप ने बड़े प्यार से पाला था उसे. उसके दौ छ्होटे भाई थे जो की स्कूल में पढ़ते थे. निशा के पिता बॅंक में क्लर्क थे और उसकी मा स्कूल टीचर थी. एक उमंग और उल्लास के साथ म्बा में अड्मिशन लिया था निशा ने. उसकी चाहत थी की वो अपने पेरेंट्स को कुछ बन कर दीखाएगी. जीवन की हर उँचाई को च्छुने की तम्माना थी उसकी. उसना चाहती थी वो आज़ाद पंछी की तरह. मगर उसे क्या पता था की वक्त उसके पंख कुटर देगा और वो धदाम से नीचे गिरेगी मूह के बाल. गिरने के अहसास में खोई थी वो इस वक्त. आँखे बंद किए यही कामना कर रही थी की काश सब ठीक हो जाए और ये सब एक बुरे सपने की तरह बीट जाए.
“निशा मेरी जान आँखे खोल ना, आँखे बंद रखेगी तो मज़ा नही आएगा.” कुणाल ने मुस्कुराते हुवे कहा.

कुणाल बिस्तर के ठीक सामने न्यू एअर कुर्सी पर बैठा था. ये वही कुणाल था जीश से निशा 6 महीने पहले मिली थी. उसकी फ़्रेंड जीया ने मिलवाया था उसे कुणाल से. एक बार मूल्काट क्या हुई निशा से कुणाल की, वो अक्सर निशा से कही ना कही टकरा जाता था. वो म्का कर रहा था. बहुत सीधा साधा था दीखने में कुणाल. बहुत प्यारी बाते कराता था. ऐसी बाते जिनमे की कोई भी निशा जैसी सारीफ़ लड़की फँस जाए. नही जानती थी निशा ये सब. वो तो प्यार करने लगी थी कुणाल से. इतना प्यार की वो उसे अपने पेरेंट्स से भी मिलवाना चाहती थी. शादी के सपने देख रही थी वो. मगर कुणाल क्या खेल खेल रहा है वो बेख़बर थी.

एक दिन गार्डेन में मिले दोनो. कुणाल ने ही प्रोग्राम बनाया था मिलने का. “यार तुम्हारे घर जाने से पहले एक बार शांति से मिलते हैं. तुम मुझे अपने घर वालो के बड़े में सब बता दौ ताकि कोई दिक्कत ना हो.”

“तुम्हे पता तो है सब कुछ” निशा ने कहा.

“अरे फिर भी कुछ तो ऐसा होगा जो की मैं नही जानता. कल मिलते हैं रोज़ गार्डेन में ओके. ठीक 11 बजे पहुँच जाना.”

निशा तैय वक्त के मुताबिक पहुँच गयी गार्डेन में. कुछ देर निशा के घर की बाते करने के बाद कुणाल ने अपनी गेम स्टार्ट कर दी.

“यार निशा देखो आज मैं थोड़ा बहक सा रहा हूँ. शायद तुम्हारे प्यार ने मुझे बहका दिया है.”

“अच्छा ऐसा क्यों?”

“कल रात मैने सपने में देखा की तुम मेरे पेनिस को चूस रही हो हहहे”

“धात्ट म…म ऐसा क्यों करूँगी.” निशा शरम से लाल हो गयी.

“क्यों प्यार नही कराती क्या मुझसे?”

“वो तो कराती हूँ पर…”

“पर वार कुछ नही मेरा सपना पूरा करो तुम.”

“क्या!” निशा के तो पैरो के नीचे से ज़मीन ही निकल गयी.

“प्लीज़ निशा, मेरी खातिर प्लीज़. पता है मैं कल रात से ही बहुत बेचैन हूँ.” और ये कहते हुवे उसने अपनी पेंट की ज़िप खोलनी शुरू कर दी.

“क्या कर रहे हो कुणाल, रूको.”

“अब रुका नही जाएगा. तुम्हे मेरा सपना पूरा करना ही होगा.” ये कहते ही कुणाल ने अपना लिंग ज़िप से बाहर खींच लिया.

निशा तो देखती ही रह गयी. पहली बार किसी पूरेुष के लिंग को देख रही थी इसलिए उत्सुकता स्वाभाविक थी.

“देख क्या रही हो, आगे बढ़ो और लॉलिपोप की तरह चूसना शुरू करो.”

“तुम्हे ये अचानक क्या हो गया कुणाल. तुम तो ऐसे नही थे.”

“निशा क्या अपनी प्रेमिका से प्यार की उम्मीद करना गल्लत है. तुम मुझसे शादी करना चाहती हो. कल मैं तुम्हारे घर वालो से मिलने वाला हूँ. तुम्हे नही लगता हमें इस रिश्ते को थोड़ा आगे बढ़ाना चाहिए.”

“हन पर ये सब शादी के बाद ही अच्छा लगता है कुणाल. मैने तुमसे ऐसी उम्मीद नही की थी.”

“यार बस इतना ही प्यार है तुम्हारा. सिर्फ़ एक ब्लो जॉब ही तो माँग रहा हूँ. इतना भी नही कर सकती. मेरी खातिर प्लीज़.”

निशा माना कराती रही. कुणाल उसे मनाता रहा. बार बार गिड़गिदा रहा था वो.

“अच्छा ऐसा करो सिर्फ़ एक बार मूह में ले लो मेरी खातिर प्लीज़…..” कुणाल गिड़गिडया.

आख़िरकार निशा कुणाल की खातिर मन ही गयी. उसने चारो तरफ देखा. गार्डेन में दूर दूर तक कोई दीखाई नही दे रहा था. जिस बेंच पर दोनो बैठे थे उसके पीछे एक घाना पेड़ था. निशा कुणाल के लिंग पर झुक गयी और अपनी आँखे बंद कर ली. आँखे खोल कर वो शायद ये ग़लत काम नही कर सकती थी.

निशा ने मूह खोला और कुणाल के लिंग के टॉप को होंटो में ले लिया. कुणाल को पता था की निशा की आँखे बंद हैं. इसलिए उसने तुरंत मोबाइल को ठीक ऐसी पोज़िशन में रखा लिया जिस से की निशा का पूरा चेहरा दीखे उसमे और उसके मूह में उसका लिंग जाता हुवा भी दिखे. निशा इस सब से बेख़बर कुणाल के लिंग को मूह में थामे झुकी रही. उसने कोई भी हरकत नही की. बस लिंग को मूह में थामे रही.

“अरे यार चूसोगी भी या यू ही मूह में पकड़े रहोगी.”
निशा ने आँखे खोली तो हैरान रह गयी.

“य…ये मोबाइल से क्या किया तुमने, क्या वीडियो बनाई मेरी.”

“हन बना ली, देखोगी.”

कुणाल ने क्लिप प्ले करके मोबाइल निशा की आँखो के सामने कर दिया.

“कुणाल डेलीट करो इसे इसी वक्त.”

“नही मेरी जान ये डेलीट नही होगी. ये क्लिप तो तेरी चुत तक ले जाएगी मुझे हाहहाहा.”

“क्या मतलब, ये क्या बोल रहे हो तुम.”

“ये सब करना पड़ा मुझे क्योंकि मैं तुम्हारे घर नही जाना चाहता था. पता था मुझे की तुम इतनी आसानी से नही दौगी चुत मुझे. इसलिए ये प्लान बनाया. बेबी शादी को छोड़ो और अब हनिमून की तैयारी करो…. हाहहाहा.”

“कुणाल तुम ये सब क्या कह रहे हो…प्लीज़ मज़ाक बंद करो.” निशा को अपने कानो पर विस्वास ही नही हो रहा था.

“मज़ाक नही है ये मेरी जान, अभी तो ये लंड तुमने मूह में लिया था. अब तुम इसे अपनी चुत में भी लॉगी वो भी बड़े प्यार से.”

“बस करो कुणाल बस करो…मैं जा रही हूँ.”

“चली जाओ मगर जाते जाते ये लेती जाओ.” कुणाल ने उसे काग़ज़ का एक टुकड़ा तमाते हुवे कहा.

“ये क्या है?”

“अड्रेस है, कल सुबह तुम्हे ठीक 11 बजे यहा पहुँचना है. अगर नही आई तो ये वीडियो क्लिप नेट पे डाल दूँगा और इसकी एक कॉपी तेरे बाप को भी भिजवा दूँगा.”

ये सुनते ही निशा के रोंगटे खड़े हो गये. उसके हाथ पाँव काँपने लगे.

“तुम ऐसा क्यों कर रहे हो मेरे साथ कुणाल.” निशा सबक पड़ी.

“सब चुत का चक्कर है मेरी जान. बिना ये सब किए तुम मुझे दौगी नही और तुमसे शादी करने का कोई इरादा नही है मेरा. अभी मैं निकल रहा हूँ, कुछ काम है मुझे याद रखना कल ठीक 11 बजे पहुँच जाना वरना अंजम बहुत बुरा होगा.”

“रूको कुणाल प्लीज़….”

मगर कुणाल नही रुका और निशा को वही छोड़ कर चला गया. उसे पता था शायद की निशा उसके जाल में फँस चुकी है.
निशा इतनी स्तब्ध थी की उसे कुछ समझ ही नही आ रहा था की वो क्या करे और क्या ना करे. उसने तुरंत जीया को फोन मिलाया. जीया ने ही तो मिलाया था उसे कुणाल से. मगर उसने फोन नही उठाया. निशा की क्लास मेट थी जीया. उसने तुरंत यूस्ब जाने का फ़ैसला किया. जीया उसे लाइब्ररी में मिली. उसे पूरी बात बतने के बाद निशा ने पूछा, “ये कुणाल है क्या चीज़ यार. मुझे कुछ बताओ उसके बड़े में आज. मैने काई बार पूच्छा तुमसे पहले भी मगर तुमने सही सही जवाब नही दिया. आज तुम्हे बठाना ही होगा.”

“आज तुमने असली चेहरा देखा है कुणाल का. उसका यही काम है. प्यार के झाँसे में लड़कियो को फसाना और फिर उनके साथ मनमानी करना.”

“और ये तुम मुझे आज बता रही हो जीया, कैसी दोस्त हो तुम.”

“मैं मजबूर थी निशा. मैने सब कुछ उसके कहने पे किया.”

“क्या मजबूरी है तुम्हारी.”

“जैसे आज उसने तुम्हारी वीडियो बनाई है ऐसी ही उसके दोस्त विशाल ने मेरी बनाई थी. एक साल से झेल रही हूँ मैं उसे.”

“मुझे खुल कर बताओ जीया.”

“निशा बहुत गंदे लोग हैं ये.”

“गंदे लोग मतलब.”

“ये टीन लड़को का गान्ड है निशा. पहले एक प्यार का नाटक करके फँसाएगा और फिर….” जीया फूट फूट कर रोने लगी.

निशा का तो गला ही सूक गया ये सुन कर.

निशा का नशा – Indian Sex Story