करिश्मा की प्यारी सी कुंवारी चूत

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मैं सहारनपूर का निवासी हूँ और मैंने अभी अपनी बारहवीं की परीक्षा दी है।

यह बात चार महीने पहले की है तब मैं रोज स्कूल जाता था। मेरी कक्षा में करिश्मा नाम की लड़की पढती थी।

वह बिल्कुल परी की तरह लगती थी। बेहद सुरूली आवाज़ थी उसकी। रंग गोरा और बहुत प्यारी सी।

उसका मन बहुत साफ था और क्लास में भी हमेशा प्रथम आती थी।

मुझे वह पसंद आने लगी थी।

कुछ दिन तो बस मैं उसकी तरफ़ देखा करता था।

फिर एक दिन मैंने उसके बैग में खाली काग़ज़ रख दिया।

जब उसने वह काग़ज़ देखा तो वह इधर-उधर देखने लगी कि किसने रखा।

उसके अगले दिन मैंने एक काग़ज़ में आई लव यू लिख कर रख दिया।

लेकिन उसे पता नही चला कि किसने रखा।

कुछ दिन बाद मैंने हिम्मत करके उससे कहा – मैं तुम्हें पसन्द करता हूँ।

वह चुप रही तब मेरा दिल बहुत तेज़ धडक रहा था। कुछ सोच के उसने कहा कल बतायेगी।

दूसरे दिन उसने हाँ कर दी। अब हमारी बातें होने लगीं।

थोड़े दिन बाद उसने अपने जन्मदिन के दिन मिलने का प्रोग्राम बनाया।

जब हम मिले तो खाने-पीने के बाद हम बातें करने लगे।

कुछ देर बाद मैंने अपना हाथ उसके हाथ पर रख दिया। वह शरमा सी गई लेकिन मैं उसका हाथ पकड़ कर बातें करने लगा।

मैंने उससे पूछा – क्या तुम मुझसे प्यार करती हो? तो उसने आँखें झुका ली और हाँ कर दिया।

अब मैं उसके नजदीक आ गया। मैंने उसे किस करना चाहा तो उसने मना कर दिया।

फिर थोड़ी देर बाद खुद ही बोली – अच्छा, कर लो तो मैंने अपने होंठ उसके होंठों पर रख दिये।

मैंने पहले उसका नीचे वाला होंठ चूसा फिर ऊपर वाला। उसने मुझे बहुत कस कर पकड़ रखा था।

करीबन 15 मिनट तक मैंने उससे चूमा। फिर मैं अपने हाथ उसकी जाँघ पर ले गया तो उसने मना कर दिया और बोली – अभी नही, बाद में।

कुछ देर बाद हम अपने घर चले गए। मैंने घर आते ही हस्तमैथुन किया।

बदक़िस्मती से उसके बाद हमारी सर्दी की छुट्टी पढ गईं। फिर आया हमारा फैरवेल। उस दिन सब लड़कियाँ साड़ी पहन कर आईं थीं।

उफ़!! क्या कमाल लग रही थी वो।

फैरवेल खत्म होने पर हमारा प्लान होटल जाने का था, वहाँ मैंने पहले से ही कमरा बुक करा रखा था।

हम कमरे मैं जाकर बैठ गए वहाँ हमने कुछ देर बातें की और फिर मैंने कहा – जान, आज तो मना मत करना।

थोड़ी ना-नुकर के बाद उसने कहा – ठीक है।

फिर हमने एक-दूसरे को चूमना शुरू किया। उसका अब पूरा सहयोग मिल रहा था और मुझे मज़ा आ रहा था।

अब मैंने उसकी साड़ी उतारी और उसके ब्लाउज के ऊपर से उसके चुचे चूसने लगा। वह ज़ोर-ज़ोर से सिसकारियाँ ले रही थी।

कुछ देर बाद मैंने उसकी बुर पर मुँह रखा और उसे बेतहाशा चाटने लगा।

करीब 10 मिनट बाद ही उसने पानी छोड दिया। फिर हम कुछ देर तक ऐसे ही लेटे रहे।

अब मैंने चॉकलेट जो उसे मैंने थोड़ी देर पहले ही दी थी, थोडी सी लेकर उसके मम्मे पर ङाल दी और उसके मम्मे चाटने लगा।

उसे भी मजा आने लगा और मुझे भी। उसके मम्मे चूसने के बाद मैंने थोड़ी चॉकलेट उसकी चूत और पेट पर लगा दी और चूसने लगा। चूसने के बाद वह कहने लगी – जल्दी से कुछ करो, मुझे कुछ हो रहा है।

फिर मैंने अपना लंड उसकी चूत पर लगाया और धक्का लगाया। उसकी चीख निकल गई।

मैंने अपने होंठ उसके होंठों पर लगाए और चूसने लगा।

कुछ देर में वह शांत हो गई तब मैंने एक धक्का और लगाया। इस बार मेरा लंड उसकी चूत में पूरा चला गया।

अब उसे भी मजा आने लगा था। करीब 15 मिनट मे मेरा निकल गया।

इसके बाद जब मैंने बिस्तर देखा तो वहाँ खून पडा था। फिर मैंने अपने रूमाल से खून साफ किया और मेरी गुलाबो को फिर कपड़े पहना कर हम चल दिए।

आज हम साथ नहीं है।

आपको कैसी लगी मेरी प्रेम कथा।

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