एक कीमत “ज़िंदगी” की–39

अंकित :- री..त्तिका..आ..आ….कहाँ हो….यार ऐसे बाँध के कहाँ गायब हो गयी..देखो प्लीज़ ऐसा मज़ाक पसन्द

Hindi Sex Stories Antarvasna Kamukta Sex Kahani Indian Sex Chudai

नही है मुझे….(और फिर अपने आप से) ले अंकित और उछल दे दिया ना अपना चेहरा इस बिल्ली को..अब जब तक कुरेद नही देगी बुरी तरह से जब तक छोड़ेगी नही…अब क्या होगा मेरा….

इतना सोच ही रहा होता है कि उसे एक गेट खुलने की आवाज़ आती है..

अंकित :- रितिका….

रितिका :- ह्म्‍म्म्म…..

वो एक गेरी सांस छोड़ता है…यार ऐसे बाँध के कहाँ चली गयी थी…..अंकित बोलता है पर रितिका उसकी बातों का

कोई जवाब नही देती..और उसके बेहद करीब आ जाती है..

अंकित की तो साँसे चढ़ जाती है..जैसे ही वो पास आती है एक मस्त खुशुबू उसकी नाक में चढ़ जाती है

और वो मदहोश सा हो जाता है..रितिका अपनी हथेली को अंकित की थाइस पे रख के अपने एक घुटने को अंकित की दोनो टाँगों के बीच में रख लेती है और उसके उपर झुक जाती है…..

डर गये थी क्या…उसके कान के पास जाके बड़े ही सेडक्टिव वॉल्यूम में बोलती है..

अंकित का छुआ तो अब हिलने के साथ साथ चलने लगा था कहने का मतलब अब उसका लंड जो हिल रहा था अब वो अंदर ही अंदर उसमे हवा भर चुका था..और अपना साइज़ बढ़ा रहा था…

रितिका ने अपनी उंगलियों से अंकित की शर्ट के बटन खोलने शुरू किए और धीरे धीरे करके सारे बटन खोल डाले…और उसकी चेस्ट पर उंगली फिराने लगी….

अंकित तो मस्ती में अपनी गर्दन हिलाने लगा कि तभी उसके मुँह से एक दर्द भरी आह..निकल गयी क्यूँ कि रितिका ने उसकी चेस्ट पे आए छोटे छोटे कुछ बालों को हल्का सा खिच लिया…….

पर अगले ही पल अपने होंठ आगे बढ़ा के उसके चेस्ट पे रख दिए और वहाँ पे फिराने लगी…अंकित की तो बॅंड ही बज गयी…..वो अपनी गर्दन हिला रहा था पर कुछ नही कर सकता था..उसके हाथ पैरों की

हथेलियाँ हिल रही थी….

तभी रितिका आगे हुई तो उसका घुटना जो लंड के पास ही था..वो अंकित के लंड वाले हिस्से से जाके जुड़ गया…जिससे उसकी जीन्स पिचाक गयी….और उसका अंदर बैठा शैतान भी हल्का सा दब गया…

अब इस पल में अंकित को जितना मज़ा आया उतना ही दर्द भी हुआ…इसलिए मिली जुली सिसकी उसके मुँह से निकल

गयी..अहह ओह्ह्ह..रितिका..आ.आ.आ.आ..आ………

रितिका :- क्या हुआ अंकित…..(उसने अपना हाथ अंकित के चेहरे पे फिराया)

पर अंकित कुछ ना बोला…बस उसके मुँह से लंबी लंबी साँसे निकल रही थी..

रितिका समझ गयी थी..पर उसे अंकित को ऐसे तड़पाने में मज़ा बेहद आ रहा था..इसलिए उसने अपने होंठों को आगे बढ़ाया और उसकी नाक उसके गालों पर चुंबनों के बौछार कर दी..और अपने हाथों को उसकी चेस्ट पे घुमाना जारी रखा…और नीचे अपने घुटने को बार बार आगे पीछे कर रही थी…..

ऐसे तीन तरफे हमले से अंकित की सॉलिड लगी हुई थी..जीन्स में फँसा हुआ उसका लंड अब अपने पूरे होशो आवाज़ में आ चुका था..और वो अंदर ही अंदर गहरे दर्द में डूबा हुआ था…

लेकिन शायद इस दर्द को और बढ़ाना चाहती थी…इसलिए उसने अपने सॉफ्ट लिप्स को अंकित के लिप्स से जोड़ दिए..और उन्हे बड़े ही सॉफ्ट्ली चूमने लगी..कभी उपर लिप्स को होंठों में भरती तो कभी लोवर लिप्स को…ऐसा ही चलत रहा कुछ सेकेंड्स तक…फिर अपनी जीब बाहर निकाल के रितिका ने होंठों को चाटना शुरू किया और उसके बाद अंकित के मुँह मे अंदर डाल के उसके जीब से अपनी जीब मिला दी..और फिर अपने होंठ चिपका डाले……

अंकित तो कोई रेस्पॉन्स नही कर रहा था…उस वक़्त पर उसे ऐसा नही आया था..और वो भी शुरू हो गया..एक सॉफ्ट किस वाइल्ड कब बन गयी….पता ही नही चला…दोनो वाइल्ड्ली किस कर रहे थी…लंड में दर्द है बेइंतिहा पर इस किस में अंकित ने कोई कमी नही छोड़ी…उसे ऐसे चाट रहा था…मानो कभी नही मिलेगा फिर….

रितिका भी अंकित के बालों पे हाथ फिराती हुई उसके होंठों और उसके जीब को चूस रही थी….

कुछ मिनट तक ये खेल चलता ही रहा…..फिर रितिका आगे बड़ी और अपने वो फ्लफी बिल्कुल खड़े हुए निपल्स के साथ अपने बूब्स अंकित की चेस्ट में धँसा दिए..और अपने होंठ अंकित की गर्दन और गले पे रख दिए और उन्हे वहाँ चूसने लगी….लंड पे घुटने अभी तक बार बार ठोकर मार रहा था…

आहह रितिका..प्लीज़…उफफफफफफफफफफफ्फ़……….आहह वो बेचारा ना हाथ हिला पा रहा था ना पैर और ना ही अपना लंड जो अंदर फँसा हुआ था….बुरी तरह से फँसा हुआ था..पर मज़ा भी दो गुना मिल रहा था उसे…….

वो अपने मन में सोचने लगा….आख़िर फँस ही गया…ये इतना ख़तरनाक तरीका अपनाएगी पता नही था..ओह्ह..बहुत दर्द हो रहा है…अब अगर बाहर नही निकाला तो अंदर ही फट जाएगा मेरा लंड…अब कैसे

समझाऊ इस लड़की को……कोई तो बचाओ……….

पर अंकित की आज पूरी तरह से लगाने का इंतेज़ाम कर रखा था रितिका ने…..कुछ देर उसकी गर्दन के साथ खेलने के बाद फिर धीरे धीरे नीचे आई..और उसकी चेस्ट के निपल्स के करीब जाके वहाँ पे गरम गरम साँसे छोड़ने लगती है….

अंकित को तो ऐसे लगा मानो उसके निपल्स को कोई झुलसा रहा हो….कुछ देर तक रितिका ऐसे ही रही ना तो

हिली ना डुलि बस अपनी गरम साँसों से उसके निपल्स पे वार करती रही…..

फिर अपनी रेड टॅंग को बाहर निकाला और अंकित के उस लाइट ब्राउन के निपल को उसने चाट डाला..

अह्हाआ…एक सांस अंकित के मुँह से निकल गयी…रितिका उसके चेहरे को देख के मुस्कुराने लगी

उसे अंकित की ऐसी हालत देख के बड़ा ही मज़ा आ रहा था…..

रितिका ने अपने होंठ आगे बढ़ाए और उसके नन्हे से निपल्स को चूसने लगी…..

अहहह….सिसकते हुए वो हल्का सा कुर्सी पे हिला जिससे कुर्सी भी हिली…अंकित अपने हाथ और पैर छुड़ाने की कॉसिश में था….पर ऐसा नही हो पाया..

रितिका ने अंकित के निपल्स को चूसना छोड़ दिया अंकित का निपल एरेक्ट होके अपना साइज़ बढ़ाने लगा…

रितिका ने दूसरे निपल् के साथ भी यही किया….और वैसी ही सिसकी अंकित के मुँह से निकल गयी….

उसके बाद रितिका ने अपनी जीब को उसके पूरे पेट पर रगड़ते हुए उसकी नाभी पे आके वहाँ अपनी जीब रख के घुमाने लगी..

रीतित्कतका नूओ…..प्लीस.ए.ए..ए.ए…आहह सिसकते हुए उसका पेट उपर नीचे हो रहा था…

कुछ सेकेंड तक उसकी नाभी को ऐसे अपनी जीब से सहलाने के बाद वो हटी..

रितिका :- क्यूँ बच्चू..जब तुम खुद ऐसा करते हो तब समझ नही आता कि कैसा लगता है..

अंकित :- हाँ पर..(गहरी साँसे लेते हुए) ऐसे हाथ पैर बाँध के तड़पाते हुए थोड़ी करते हैं….

यार अब खोल दो ना…

रितिका खिल खिला के हँसने लगी…..

रितिका :- लेकिन मेरी पनिशमेंट तो अभी बाकी है….. (बोलते हुए उसके हाथ उसके पेट को सहलाते हुए

नीचे उसकी जीन्स पे बने हुए उभार के उपर आ गया और उसे वहाँ बढ़ने लगी…उसके जीन्स के उपर

से उसके लंड को नीचे बढ़ाने लगी…

अहह हाँ……….ओह्ह्ह्ह रितिका…नो डोंट….डू दिस.स..स.आहह इट्स हार्टीन्ज्ग.ग..ग.आहह

वो कुर्सी पर हिलने लगा …. कुर्सी बुरी तरह से हिल रही थी…. लेकिन रितिका के चेहरे पर अभी भी मुस्कान बनी हुई थी..उसे बड़ा मज़ा आ रहा था…..वो उसके लंड को अपनी हथेली से जीन्स के उपर से और

ज़्यादा दबा रही थी…..

आआहह उफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफ्फ़….ससीसीई ृित्तत्तिकक.आ..आ.आ.आ.आ.आ………

ओह्ह गॉड्ड्ड..द.द.द….इट्स रियली हारटिंग मी……वो अपना सर इधर उधर हिलाने लगा….

आख़िर जब रितिका को लगा कि सच में उसे ज़्यादा दर्द हो रहा है..तो उसने उसका लंड दबाना छोड़ दिया..

और उसके चेहरे को अपने हाथ से सहलाते हुए….

रितिका :- सॉरी अंकित ईज़ इट हारटिंग….टू मच आइ आम सॉरी..में अभी खोल देती हूँ…(वो थोड़ा घबरा गयी)

रितिका उसके चेहरे पे हाथ फेर रही थी..तो ग़लती से उसकी उंगलियाँ अंकित के होंठों के उपर चली गयी..

रितिका कुछ कर पाती…उससे पहले अंकित ने अपने होत खोल के उसकी उंगलियाँ मुँह में ले ली…..

और उसे चूसने लगा….अंकित रितिका की उंगलियों को अपने मुँह के अंदर चूसने लगा..एक पल तो रितिका

भी उस पल में खो गयी…पर फिर एक दम उसने हाथ बाहर खिच लिया…

रितिका :- अच्छा बच्चू मुझसे फिर पंगा….

अंकित रितिका की बात सुन के मुस्कुरा पड़ा…रितिका को गुस्सा आया तो उसने अपनी जंगली बिल्ली को जागाते हुए

एक बार फिर से अंकित के लंड को दबा डाला…

आहह रितिका…आ.आ.आ.आ..आ……..

हहेहेहेहीः क्यूँ मज़ा आया ना…..मुझसे पंगा नही लेना अंकित….(बोलते हुए उसने अपने नाख़ून

अंकित के चेहरे में गढ़ा दिए और फिर दुबारा बोली) अब देखो तुम्हे कैसे मज़ा चखाती हूँ….

(और फिर अपने होंठों को गोल करके अंकित के चेहरे पर फूँक मारती है)