एक कीमत “ज़िंदगी” की–36

रितिका उसकी तरफ देखती हुई घुटनो के बल वहाँ बैठी और अंकित के लंड को अपने हाथ में ले लिया..और

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उसे उपर नीचे करने लगी…आज बहुत दिन बाद अंकित को लंड के आगे पीछे होने का सुखद एहसास हो

रहा था क्यूँ कि जब से रितिका गयी थी उसने मूठ नही मारी थी……

सिई आह वो सिसका….और उधर से वो औरत आहह ओह्ह्ह हल्की आवाज़ में सिसकी…..

इधर दोनो के दिलो में और शरीर में एक अजीब और बेहद रोमांचक एहसास पैदा हो गया…रितिका ने

अंकित के आँखो में देखा..और उसके लंड को मुँह में भर लिया और पूरा ज़ड तक एक बार मुँह में

उतारा और बाहर निकाला..

अंकित तो इस एहसास से पागल ही हो गया क्यूँ कि ये फर्स्ट टाइम था जो रितिका उसके लंड को ऐसे चूस रही

थी…लंड रितिका के थूक से चमक रहा था…उसके लंड की नसें फूल के फटने को थी..जल्दी उसे गर्म पानी

की ज़रूरत थी…सुपाडा बिलकल चमक रहा था….

रितिका ने जीब आगे बधाई और सुपाडे पर फिरा दी….सिस अहह एक लंबी आहह निकल गयी अंकित के मुँह

से और उसने सहारा लेने के लिए साइड में लगा टवल स्टॅंड पकड़ लिया…

इतने से ही लंड से प्रेकुं बाहर आ गया…..अंकित काफ़ी एग्ज़ाइटेड लग रहा था….

(और हो भी क्यूँ ना एक तो ऑफीस उपर से बाथरूम और उपर से ये पता हो कि बगल में कोई और भी

है और वो पकड़ भी सकती है..इन सब का डर इस पल को और एक्सिटमेंट बना देता है)

रितिका ने फिर लंड को मुँह में लिया उसे अंकित के प्रेकुं का टॅस्टी महसूस होने लगा..वो भी बहुत ज़्यादा

एग्ज़ाइट हो गई थी..कुछ गुस्सा भी था कि अंकित ने उस औरत के पास जाने के लिए क्यूँ कहा…..

इसलिए वो सोचते हुए..अंकित के टट्टो पे उसके हाथ चले गये और वो लंड को ज़ोर ज़ोर से चूसने लगी….

अंकित के हाथ रितिका के सर पे आ गये थे…उसकी आँखें बंद हो गयी थी…..उसके चेहरे से यही लग रहा

था कि आज उसको किसी जनन्त में एक परी के साथ सैर करने का मौका मिला है…

रितिका पागलों की तारह चूस रही थी..इससे अंकित का पानी उबलना शुरू हो गया…क्यूँ कि बहुत ज़्यादा एक्सआईट था

इसलिए अपने आप को रोक पाना मुश्किल था और वो ये भी जानता था कि अभी निकल गया तो गड़बड़ हो जाएगी

उसने अपने हाथ से रितिका के सर को पीछे खीचा..लेकिन वो तो हटने का नाम ही ही ले रही थी…पर जैसे

तैसे करके अंकित ने जान लगा के उसका सर पीछे खिच ही डाला…और गहरी गहरी साँसे भरने

लगा…

रितिका उसकी तरफ देखी वो भी हाँफ रही थी..पर उसको देख कर ऐसे मुस्कुराइ जैसे बोल रही हो आगे से कभी

पंगा मत लेना….

अंकित :- तो सच में शहर में रहने वाली इंसानी बिल्ली है…..(और मुस्करा पड़ा..)

रितिका खड़ी हुई और उसके करीब पहुच के…..डोंट सॉरी टू से दट अगेन..तुम मेरे साथ हो तो किसी और

के पास जाने की कोई ज़रूरत नही है..समझे..

रितिका के ये रूप अंकित पहली बार देख रहा था……उसको अंदर ही अंदर बेहद खुशी हो रही थी…

अंकित :- अभी तो तूने अपना जकवा दिखाया..अब देख ये शहर का कुत्ता कैसे अपनी बिल्ली को मारता है..

(शैतानी आवाज़ में धीरे से रितिका के कान में बोलता है और उसे घुमा देता है)

और उसकी पीठ पे हाथ से प्रेस करके उसे झुका देता है..ऑलमोस्ट डॉगी स्टाइल में आ गयी थी…

फिर अंकित साड़ी और पेटिकोट को नीचे से उठाता है…और कमर के उपर रख देता है..पीछे से वो व्हाइट

गान्ड दूध से भी ज़्यादा सफेद और किसी स्पंच की तरह सॉफ्ट उसपे ब्लू कलर की पतली सी पेंटी…अंकित उंगलियाँ

फँसा के उसे भी नीचे कर देता है……और उसके सामने आ जाती है…हल्के हल्के बालों वाली गीली चूत…

पीछे से वो दिख रही पतली सी…छेद वाली चूत पागल बना रही थी..अंकित ने अपनी एक उंगली आगे बढ़ाई और उसकी

चूत की लकीर पे हल्का सा फँसा के उसे कुरेद दिया उपर से लेकर नीचे तक….

और इस बार सिसकी लेने की बारी रितिका की थी..उसकी आँखें बंद हो गयी…उसकी टाँगें इतने में ही काँपने

लगी….

अंकित ने अपना चेहरा चूत की तरफ किया और जीब निकाल के उसकी चूत की दरार को अपने थूक से भरने की

कॉसिश करने लगा और उसपे उपर नीचे फिराने लगा..

आह्ह्ह्ह ओह नो……बहुत दबी हुई आवाज़ में रितिका सिसकी….पर अब अंकित से रहना मुश्किल हो रहा था..

वो सीधा खड़ा हुआ और रितिका की चूत पे लंड सेट किया…उसकी कमर को पकड़ा और हल्का सा पुश किया…

इस पर उसकी उम्मीद से ज़्यादा जल्दी लंड अंदर फिसलता हुआ अंदर जाने लगा…उसकी तो कोई मेहनत ही नही हुई

और वो फिसलता हुआ चूत की जड़ तक समा गया…दोनो के चेहरे एक सुख में खो गये…..

अंकित :- नाउ हियर आइ स्टार्ट…..

बोलते हुए अंकित ने कमर को झटका मारा जिससे लंड आधा बाहर आया और फिर चूत में जा घुसा..

अहह अंकित.त.त..त… हल्की वाय्स में बोलती हुई..उसने आगे दरवाजे के हॅंडल को पकड़ लिया उसके पैर कांप

रहे थे..इसलिए सहारा लेने के लिए उसे पकड़ना पड़ा…

तेज रफ़्तार धक्कों को मारने की वजह अंकित ने बाथ स्लॉवव और बहुत नेचुरल मूव्स के साथ धक्के

मारे…जैसे वो एक एक धक्के को महसूस करना चाहता हो और रितिका को भी महसूष कराना चाहता हो..

आहह ओह्ह्ह एस्स..स..स..स.ओह्ह याइ गोस्शश्…आइ म फूसीन इन माइ ओन ऑफीस टाय्लेट..ओह्ह हगोष् दिस बॉय इस

क्राज़ययी आंड गेट्ट मी क्राज़ययी आहः ओह्ह टू..

अंकित रितिका की गान्ड को सहलाते हुए धक्के मार रहा था…….आहह ऊवू र्टिटिका…येस्स.स..आहहहः..

और फिर उसकी रफ़्तार थोड़ी तेज़ हो गयी….वो इसलिए वो बिल्कुल झड़ने के करीब था…आहह ईये एम कमिंग

रितिका.आ…(हल्की आवाज़ में) आइ आम कमिंग टू ऊ यस..स.स.स…हर्दड़.ड…….फुक्कककककक मी हार्ड.द.द.

(हल्की आवाज़ में सिसकती हुई उसकी नाक एक दम लाल हो चुकी थी)

अंकित ने थोड़ी रफ़्तार बढ़ा दी……उसकी थाइस तप ट्प करते हुए रितिका की गान्ड पे बज रही थी लंड

ज़ोरों से अंदर बाहर हो रहा था..और फिर वो पल आ गया..

एस्स.स..आ.आहह दोनो एक साथ सिसके….और अपने शरीर को झटके मारने लगे…अंकित ने

अपना 5 दिन से भरा लावा रितिका की चूत की गहराइयों में बहा दिया और रितिका की चूत ने अपना पानी

बहा के एक संगम बनाते हुए बाहर निकलने लगा….

अंकित ने हान्फते हुए रितिका की पीठ पे अपना सर रख दिया….और रितिका भी सर झुकाए हाँफने लगी…

कि तभी एक डोर खुलने की आवाज़ आई..और जिस कॅबिन में दोनो थे..उसके सामने किसी की आहट सुनाई और दिखाई

पड़ी…..