एक कीमत “ज़िंदगी” की–34

दिशा :- स्मार्ट हाँ….वैसे इसी की वजह से आइ लाइक यू…

अंकित :- तो फिर कब कर रहे हैं हम…
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दिशा :- क्या?

अंकित :- यू सेड यू लाइक मी..तो मेने सोचा कुछ बात आगे बढ़ानी चाहिए ना..

दिशा :- हाँ हाँ जब तू बोले..

अंकित को इस जवाब की उम्मीद नही थी…वो फिर से सोच में डूब गया….ये तो लगता है इसी इन्विटेशन के इंतजार में बैठी है…बस इधर मेने दिया ये तो सब कुछ खोल के किसी खुले हुए गिफ्ट की तरह मेरे सामने पसर जाएगी…

अंकित :- हाँ बिल्कुल यार..उसमे क्या है…आइ आम ऑल्वेज़ रेडी कल ही मिलते है…(अंकित भी थोड़ा आगे बढ़ा बस ये सोच के थोड़े सा मज़ाक ही तो चल रहा है)

दिशा :- नही यार कल तो में बिज़ी हूँ..लेट नाइट तुझे चलेगा..

अंकित की फिर लग गयी…

अंकित :- ओये में तो मस्ती कर रहा था..तू सीरियस हो गयी..

दिशा :- हाहहहहहहः…बस हवा टाइट हो गयी बच्चू…मेने तुझे कहा था ना कि में किसी को भी चाहू अपने क़ब्ज़े में कर सकती हूँ..

अंकित :- हाँ वो पता चलता है…तेरी बातों से

दिशा :- क्या मतलब (थोड़ी गुस्से की टोन में)

अंकित :- ये मतलब कि अब तुझसे बाद में बात करूँगा..ओके…

दिशा :- ओके..फिर मिलने का प्लान कब है तेरा?

अंकित :- ह्म्‍म्म्म जब तू बिल्कुल फ्री हो तो मूवी का प्लान बनाते हैं

दिशा :- चल में बताती हूँ…जब भी फ्री होती हूँ आइ विल कॉल यू..

अंकित :- ओके देन..बाबयए स्वीटी..

दिशा :- बाबयए … हॅंडसम….

(फोन कट)

अंकित अपने आप से……….उफ्फ ये लड़की तो सच में……..(बोलता हुआ रुक जाता है और मुस्कुरा देता है)

अगले कुछ दिन कॉलेज नही जाना था..असल में कॉलेज ट्रिप पे गया हुआ है…लेकिन अंकित इसलिए नही गया क्यूँ कि अंकिता मॅम लीव पर थी और अपने घर गयी हुई थी..उनकी फॅमिली में किसी की तबीयत खराब थी..तो भाई साहब अंकिता मॅम नही गयी तो खुद भी नही गये…विकी ने तो बहुत बार चलने को पूछा लेकिन अंकित ने हाँ नही किया….बाकियों से अंकित की पटती कम ही थी क्लास में….लड़कियों की तरफ तो वो देखता ही नही था…

ऐसे करते करते 5 दिन गुज़र गये….

सॅटार्डे टाइम 4 के आस पास..

नोएडा सेक्ट 19 में…एक ब्लू कलर की बहुत बड़ी बिल्डिंग….उसके अंदर ऑफीस में ढेर सारे स्टाफ और अपने कॅबिन में बैठी….

रितिका….

वो कुछ काम कर रही थी कि तभी उसके सेल पे कॉल आया…वो नंबर देख के थोड़ा सरप्राइज हो गयी..उसने रिसीव किया…

रितिका :- हाउ यू नो…(वो बस इतना ही बोल पाई कि सामने से फोन पे किसी ने कहा) क्या…नो वे…कहाँ पर..नही में आ रही हूँ…बिल्कुल नही..आइ सेड ना…जस्ट वेट आइ आम देअर् इन 5 मिनट..

(फोन कट)

ओह्ह गॉड….रितिका बोलते हुए फाइल बंद करी और कॅबिन से निकल के जाने लगी….

उसके चेहरे पे हल्का सा टेन्षन था एक हाथ से साड़ी पकड़ी और एक हाथ को अपने माथे पे लगाया जल्दी जल्दी चल रही थी…उसने लिफ्ट ली और ग्राउंड फ्लोर पे उतरी और तेज कदमों से चलती हुई वो एक कोने मे जाके पतली सी गलेरी में से होते हुई एक जगह आके खड़ी हो जाती है…

एक तरफ मेल्स टाय्लेट और उसकी बगल में फीमेल टाय्लेट … रितिका फीमेल टाय्लेट के गेट के बाहर खड़ी हो जाती है….उसने अपने हाथों से हॅंडल को दबाया और इधर उधर देखने लगी कि कोई देख तो नही रहा..फिर हॅंडल नीचे करके उसने दरवाजा खोला और फट से घुस गयी अंदर….

अंदर वॉशरूम काफ़ी बड़ा और स्टाइलिश था…डोर के ठीक पीछे वॉशबेसिन और मिरर थे…उसी के साइड में कॅबिन्स बने हुए थे 6 या 7 थे…उसके सामने की जगह खाली थी….काफ़ी स्टाइलिश बाथरूम बना हुआ था

रितिका अंदर घुस के अपनी गर्दन घुमाने लगी और अंदर आके डोर को बंद कर दिया..

यू देअर… वो हल्के से बड्बडायि…उसको डर लग रहा था…(वो चलती हुई कॅबिन्स के सामने आके खड़ी हो गयी)

सभी कॅबिन्स के डोर बंद थे … उसने पहले सोचा कि उसे नॉक किया जाए..लेकिन फिर कुछ सोच के नही किया..

ओफफफूऊऊ…..(अपने माथे पे हाथ रख के धीरे से बोली और घूम गयी और सामने दीवार की तरफ देखने लगी)

फिर फोन पे कॉंटॅक्ट्स खोले और नंबर डाइयल करने लगी….

कि तभी पीछे से धीरे से बिना आवाज़ करे एक कॅबिन का डोर खुला और उसमे से निकला हाथ सीधी रितिका के मुँह पर पड़ा…रितिका की आँखें फट गयी उसका मुँह बंद था इसलिए वो चिल्ला भी नही पा रही थी…

तभी उन हाथों ने उसे कॅबिन के अंदर खीच लिया और कॅबिन का डोर बंद कर दिया…

रितिका अंदर छूटने के लिए छटपटा रही थी….उहं उंगघह छूटने के लिए दम लगा रही थी ….

कि अचानक वो हाथ रितिका के उपर से खुद ब खुद हट गया…..रितिका सीधी खड़ी होके गहरी गहरी साँसे लेने लगी…कि तभी…

हाहहहहहहाहा……..रितिका के पीछे से हँसने की आवाज़ आई….रितिका गुस्से से भरा चेहरा लेके पीछे

मूडी

सामने अंकित अपने हाथों से तालियाँ बजाता हुए आँख मीच के हंस रहा था…

रितिका ने कंधे पे चमाटे लगा दिए एक के बाद एक 3 – 4..

अरे मार क्यूँ रही हो… (हँसना बंद करते हुए अपने शोल्डर्स को सहलाने लगा)

रितिका :- अच्छा…क्यूँ ना मारू..ऐसा भी कोई करता है..कितना डर गयी थी में..

ओह…गोल मुँह करके अंकित बोलता है…

रितिका :- क्या ओह्ह्ह…..एक पल के लिए मेरी जान ही निकल गयी थी..

ये बात सुन के अंकित रितिका की कमर में हाथ डाल के उसे थोड़ा अपने करीब कर लेता है..

अंकित :- ऐसे कैसे निकल जाने देता…..

रितिका :- हट..बदमाश…(थोड़ा सा पीछे होती है) अरे याद आया(अपने सर पे हाथ मारते हुए) अंकित तुम्हे यहाँ नही आना चाहिए था ये मेरा ऑफीस है और वो भी फीमेल्स वॉशरूम में आर यू मॅड…तुम्हे पता है ना..तुम जाओ यहाँ से फ़ौरन प्लीज़….अगर किसी ने देख लिया तो क्या होगा तुम्हे पता है..ओह्ह माइ गॉड..नो प्लीज़..तुम निकलो बाहर… (वो अंकित का हाथ खीच रही थी थोड़ी घबराई गयी थी)

अंकित :- ओफूओ….यार कितना डरते हो..कसम से…कुछ नही होगा….में तुम्हे तो कुछ नही होने दूँगा..

(उसने दोनो हाथों को पकड़ के उसे विश्वास दिलाया)

रितिका :- तुम ना….(और मुस्कुरा दी…इसी मुस्कान पे तो अंकित भाई साहब फिदा थे) लेकिन तुम्हे कैसे पता कि में आ गयी हूँ…

अंकित :- ह्म्म(अपने दोनो हाथ गले के दोनो तरफ डालते हुए) मेडम 5 दिन कैसे काटे हैं हमने..ये हम ही जानते हैं..में कैसा जानता हूँ ये छोड़ो लेकिन ये बताओ कि आपने मुझे क्यूँ नही बताया कि आप गये हो..

रितिका :- यार आज सुबह 3 ऑक्लॉक आई…और फिर सुबह ही ऑफीस चली गयी…वैसे आज ईव्निंग में तुम्हे सरप्राइज देती…लेकिन तुमने तो मुझे सरप्राइज कर दिया…. (बोलते हुए वो अपनी आँखें और चेहरा ऐसा बना रही थी जैसे वो बच्चों की तरह सच में सरप्राइज ना देने पर निराश हो)

पर उस टाइम वो इतनी भोली लग रही थी कि अंकित बस उसे ही देखे जेया रहा था कि तभी रितिका ने उसकी आँखों में देखा..

क्रमशः…