एक कीमत “ज़िंदगी” की–33

अंकित हल्का सा मुस्कुराया और घूर्ने लगा…रितिका को थोड़ा अच्म्बा हुआ कि वो क्या घूर रहा है…..फिर

Hindi Sex Stories Antarvasna Kamukta Sex Kahani Indian Sex Chudai उसने ध्यान दिया..कि उसके अलावा उसके पास एक और बेहद खूबसूरत सी चीज़ है……

उसके गाल ये सोचते ही बेहद लाल हो गये….वो बहुत ज़्यादा शर्मा गयी…(अब जब उस शरीर से जुड़ी वासना की कमी दूर हो गयी तो एक औरत का शरमाना तो लाजमी है..)

वो शरमाती हुए मूड गयी और दीवार से जाके सट गयी…..और अपना चेहरा हल्का सा दीवार से हटा के

एक बेहद प्यारी मुस्कान अपने चेहरे पे फैला देती है…जो अंकित पीछे लेटे देख पा रहा था…

अंकित तो वो नज़ारा देख के ही फ्लॅट हो जाता है…अपने मन में..

इस नज़ारे को देखने के बाद तो कोई भी आपसे प्यार कर बैठे रितिका जी…पर में…नही नही…नही कर सकता क्यूँ कि मुझे पता है उस प्यार का कोई वजूद नही रहेगा और ना ही कोई रिज़ल्ट रहेगा बचेगा तो सिर्फ़ एक दुख … पर इस वक़्त आपसे प्यारा इस पूरी दुनिया में कोई नही होगा…यू आर दा बेस्ट फॉर मी ऑल्वेज़ हमेशा के लिए…(अपने मन में रितिका के लिए एक रेस्पेक्ट एक प्यार को बढ़ावा देता है)

अंकित के चेहरे पे एक प्यार था रेस्पेक्ट के साथ रितिका के लिए…वो बेड से खड़ा हुआ…और चलते हुए

रितिका के पास जाने लगा….रितिका अपनी तिरछी नज़रों से उसे आते हुए देख रही थी…जिससे उसके

दिल की धड़कने और ज़ोर से बीट हो रही थी…..

अंकित रितिका के पास पहुचा और उससे बस कुछ ही फीट दूरी पे खड़ा हो गया…और रितिका को उपर से लेकर नीचे तक निहारने लगा….

वो गोरी पीठ…और नीचे उसकी बाहर की तरफ निकल रही उस लाजवाब गान्ड को कैसे ना निहारे जबकि वो बिल्कुल नंगी थी…..इतनी सुंदर इतनी सॉफ्ट दिख रही थी कि किसी का भी मन ललचा जाए और उसे चबा जाए…लेकिन फिलहाल अंकित के दिल में एक प्यार उमड़ आया था चाहे हो थोड़ी देर के लिए ही क्यूँ ना हो….

अंकित ने अपना हाथ आगे बढ़ाया और अपनी उंगलियाँ रितिका की पीठ पे रख दी और उन्हे वो बड़े ही नर्म

हाथों से सहलाता हुआ नीचे लाने लगा…

आहह अंकित.त…अब और…प्लीस.ए…हमम्म्ममममममम….रितिका का इस एहसास से शरीर में एक अजीब सी फीलिंग फैल गयी..और उसकी आँखें बंद हो गयी….

अंकित अपनी उंगलियों का कमाल दिखाता हुआ नीचे गान्ड तक आ गया…..और फिर लेग्स की पीछी से होते हुए नीचे तक चला गया…इसी बीच रितिका की सिसकियाँ निकल रही थी..

सीईईईईईईईई आहह अंकित..प्लीज़..मत करो….कुच्छ हो रहा है…

लेकिन अंकित तो यही चाहता था कि वो रितिका को जितना हो सके उतना अच्छे तरीके से प्यारा एहसास दे सके………

फिर अंकित खड़ा हुआ और अपने हाथ ले जाके रितिका के कंधे पे रख दिए…..रितिका ने अपनी आँखें बंद कर ली और फिर अंकित ने अपने होंठ आगे बढ़ा की रितिका की गर्दन के नीचे रख दिए…

रितिका कसमसा सी गयी और अपनी गर्दन को हिलाने लगी……पर अंकित उसके शोल्डर को पकड़ते हुए अपने होंठ

नीचे तक लाने लगा घसीटता हुआ…और सीधे पहुच गया रितिका की गान्ड पे….

अपने हाथों से उसे हिलाने लगा….जैसा पानी से भरी थैली को नीचे सेहाथ पर हिलाते हैं….

बिल्कुल वैसे ही रितिका की उस भारी गान्ड को वो ऐसे हिलाता रहा और फिर वहाँ पे अपने हाथ रख के

चुम्म लिया..

सीईईईईई हा ओह्ह्ह्ह प्लीज़…नो…..डोंट..डू…….. (थोड़ी देर वहाँ उसकी गान्ड को सहलाता रहा फिर उपर उठ गया)

रितिका के कंधो पे हाथ रख के उसे चिपक गया…और अपनी जीब बाहर निकाल के उसके कानो में घुमाने लगा…..

रितिका कसमसा सी गयी उसने अपनी गर्दन हिलानी शुरू कर दी..

रितिका :- अंकित….बस….अभी..नही…प्ली.स.स…ई.ए……..

सस्स्स्स्स्स्सह अंकित बोलता हुआ उसके होंठो पे उंगली रख देता है…

अंकित :- अभी कुछ नही…बोलना..मुझे करने दो…इस वक़्त बस करने दो दिल बोल रहा है इस लड़की को जितना प्यार दे सकता है दे दे…बस वही देने की कॉसिश कर रहा हूँ…

रितिका के दिल में एक अजीब सा एहसास होता है अंकित की ये बात सुन के….वो कुछ नही बोलती…

अंकित तो कानो को छोड़ के रितिका की गर्दन पे चूमने चाटने लगता है..रितिका की आँखें बंद हो जाती है…

ऐसा करते हुए अंकित रितिका को घुमा के अपने सामने की तरफ कर लेता है … रितिका ने अपने हाथों से अपनी चुचियों को ढक रखा था…

अंकित अपने हाथ से धीरे धीरे उन हाथों को उस लाजवाब चुचों के उपर से अलग करता है और उन्हे साइड हटा देता है..

रितिका का सर दीवार से लगा हुआ था आँखे बंद थी और साँसे तेज चल रही थी…जिसकी वजह से उसकी चुचियाँ ज़ोर ज़ोर से उपर नीचे हो रही थी……अभी तो अंकित ने कुछ ज़्यादा नही किया था और रितिका की चूत जिसने थोड़ी देर पहले ही सैलाब निकाला था एक बार फिर से वहाँ नमी आनी शुरू हो गयी थी…

अंकित रितिका के चेहरे को देखते हुए अपने हाथों को रितिका की गर्दन पे रख के अपनी उंगलियों से उसके शरीर को सहलाते हुए नीचे आने लगता है…

नीचे आते हुए बीच में पहले उन उंगलियो को एक सख़्त पहाड़ का सामना करना पड़ा जिसपे एक कड़क बिंदु भी लगी हुई थी….फिर उसके नीचे कँपता हुआ सपाट पेट और सहलता हुआ जा पहुचा एक खड्डे में

जो कि हल्का सा गीला था यानी कि चूत पे……

आहससिईई..हल्की सी सिसकियाँ लेते हुए रितिका ने अपनी उंगली मुँह में डाल दी..और आँखें टाइट करते हुए मिच ली….

अंकित को चूत पे गीला पन सॉफ महसूस हो रहा था…उसने अपना हाथ हटाया चूत के उपर से और घुटनो के बल बैठ गया और चूत को घूर घूर के देखने लगा…

रितिका की चूत फडक रही थी उसकी चूत की फाके हिल रही थी और खुल बंद सी हो रही थी….

अंकित ने ऐसा पहली बार देखा था अपनी ज़िंदगी में … पॉर्न तो बहुत देखी थी..लेकिन उसने आज तक ऐसा कभी कुछ नही देखा था जो आज वो देख रहा है…

ये देखने के बाद अब जो वो करने जा रहा था वो खुद ब खुद हो रहा था … उसका चेहरा चूत की तरफ बढ़ता गया…..और चूत के बेहद करीब पहुच के उसकी साँसे तेज हो गयी

चूत पे अंकित की गरम साँसे पड़ने से रितिका के शरीर में लग रही आग को और भड़का दिया और उससे जुलसने लगी…रितिका का हाथ खुद बा खुद नीचे की तरफ बढ़ता हुआ अंकित के सर पे चला गया…

अंकित ने अपनी जीब बाहर निकाली और जीब को आगे बढ़ा के चूत के एक हिस्से को उठाने की कॉसिश करने लगा..और वहाँ अपनी जीब से चाटने की कॉसिश भी करने लगा….(बिना अपने हाथ का इस्तेमाल करे)

रितिका को ये एहसास पहली बार हुआ था अपनी लाइफ में वो खड़े खड़े ही उछल सी रही थी उसके पंजे अपने आप उपर की तरफ उसे उठा रहे थे….

अंकित उस फाँक को उठा के वहाँ अपनी जीब से चाटने की पूरी कॉसिश कर रहा था जिसकी वजह से चूत में से निकल रहा रस उसके चेहरे और नाक में घुसने की कॉसिश कर रहा था..

फिर उसने अपनी जीब वहाँ से हटा ली और अपनी उंगलियों की मदद से दोनो फांकों को अलग कर के अंदर के रेड

रेड मास पे अपनी जीब रख दी और वहाँ के अदभुत टेस्ट के मज़े लेने लगा..

आहह (इस बार रितिका के मुँह से लंबी सिसकी निकल गयी और उसके हाथ अंकित के सर पे और कड़े हो गये)

अंकित ने अपनी जीब अंदर रख कर वहाँ घुमानी शुरू कर दी….चूत का छेद अंदर से कभी बंद होता तो कभी खुल जाता..अंकित को बड़ा मज़ा आ अरहा था ऐसे चूसने में…वो उस छेद के अंदर अपनी जीब फँसा देता और गोल गोल करके घुमाने लगता…इससे रितिका का तो हाल इतना बुरा था कि वो हाल उसकी चूत बयान कर रही थी … चूत में से पानी बहने लगा…निकला हुआ पानी आधा मुँह के अंदर और आधा नीचे गिर रहा था…

उफफफफफफफफफफफफफफफफ्फ़ ससिससिईईईईईईई अंकित..त.त.त..त्त.त्त..त……..आहाहहहाहहहह

ऑश बबबी……ओह मययययययययी गो..द.द.द……………..आइ अम्म डइनन्नग.ग.ग…….

(रितिका ने अंकित के सर को पकड़ के अपनी चूत की ओर बढ़ाने लगे)

अंकित ने अपना सर ढीला छोड़ रखा था इसलिए वो चूत पे चिपक सा गया…

अंकित के हाथ रितिका की थाइस को सहला रहे थे और उसकी जीब चूत के अंदर सहला रही थी……

कुछ 5 मिनट तक ऐसी चटाइ के बाद अंकित ने अपना सर हटाया…..

और फिर चूत के छेद को देखने लगा..और उसपे अपने होंठ रख के उसे चूसने लगा…

अहह नूऊऊऊऊऊ…ओह उफफफफफफफफफफफफफफ्फ़….अंकित.त.त.त…..आइ आमम्म्ममम

डाइयिंग…प्लीज़.ए…..ससीसीईईईईईईईईईई आहह(रितिका तेज़ तेज़ गहरी सानें लेते हुए सिसकी ले रही थी…उसके चेहरे पे अपनी चूत की इतनी शानदार चटाइ का आनंद अलग ही नज़र आ रहा था)

क्रमशः………………………