एक कीमत “ज़िंदगी” की–32

अंकित उसके चेहरे और उसके बूब्स को सहलाने लगा और 2 मिनट के लिए कोई हरकत नही की…

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कुछ मिनट बाद रितिका की शक्ल नॉर्मल दिखने लगी…जो अंकित को पता चल गया..और फिर उसने अपनी कमर

हिलानी शुरू कर दी…..उसने होंठ हटा लिए रितिका के उपर से..

उसने लंड बाहर खिचा….और पcछ्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह की आवाज़ के साथ अंदर घुस गया पूरा..

आहहह उहह…..सिसकी लेते हुए अंकित को अपने से चिपका लिया और अपने नाख़ून

गढ़ा दिए पीठ पे…

अहह एक मीठे दर्द की सिसकी निकालते हुए अंकित धक्का लगाने लगा…पहले कुछ बहुत धीरे

धक्के लगे..

आह ऊहह उहह येस्स….अंकित….ओह्ह माइ……फक्क मी……आइ कॅंट टोलेरती दिस…प्लीस..ए..ए..

इतने सालों से किसी तरह अपने आप को रोक रखा था….नाउ प्लीज़….फक मईए हार्डर हर्दरर प्लीज़

रितिका के मुँह से सुन के अंकित तो पागल सा हो गया और अपने लंड को तेज़ी से चूत के अंदर बाहर करने

लगा…पकच पकक्चह आजीब अजीब सी आवाज़ें आने लगी….

अहहह ओह अंकित..येस..स..स.स.स.स.स.मयी गोड्ड़….डार्लिंगग.ग..ग.ग…फ्कूककककककक……

अँकति धका धक धक्के लगा रहा था दोनो का शरीर पसीने में नहा गया था….

पचह पचह लंड और चूत के मिलन से आवाज़ें आ रही थी……

आहहह ओह्ह फुक्ककककक अनक़ित्त्त…..आइ कंटत्तत्त आइ कंटत्त्टतत्त मेईएईिन अब नही रुक सकती..प्लीज़

फुक्ककक मी मोर … हार्डर…

(चिल्लाते हुए सिसकी ले रही थी)

अंकित ने अपना चेहरा रितिका के कंधों में छुपा रखा था और वो ज़ोर ज़ोर से धक्के मार

रहा था…..लंड बड़ी तेज घुसने के साथ अंदर बाहर हो रहा था…

आहहह अंकित.त.त.त..त.त…..श बाब्बयययी मययी बबब्बययी…..आइ अम्म…आई आमम्म्म कुम्मीणटज्ग…ग.ग..ग

ई अम्म कुम्मीणटज्ग.ग…बबबी…आइ आम कुम्मीणटज्ग.ग..ग.ग.ग.ग.ग.गगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगग….

बोलती हुए रितिका की कमर ने जो झटके मारे हैं बसपुछो ही मत एक के बाद एक 4 झटके

मारे और मानो आज तो दम तोड़ दिया फिर इतना तेज बहाव कि सतह अंदर से निकल के आजू

बाजू वाले इलाक़ों को डुबोने लगा…….

उसकी आँखें पूरी खुली हुई थी….वो तो जैसे किसी स्वर्ग में घुस चुकी थी..

इधर जब रितिका का पानी निकल के चूत सिकुड़ने लगी…तो अंकित का डबल प्रेसर उसके लंड पे पड़ा

एक तो गरम बहता पानी उपर से कसाव….इससे अंकित की भी हालत खराब हो गयी…

आआहह रितिका…ओह आइ आम कुम्मीणत्ग त्तोटूऊऊऊऊऊओ

और कुछ 4 या 5 धक्के लगाने के बाद उसने भी अपना गरम ढेर सारा पानी रितिका की चूत में

एक के बाद एक 3 झटके मारे और अपना सारा पानी उसकी चूत के अंदर ही छोड़ दिया…..

और हान्फता हुआ रितिका के उपर ही लेटा रहा…

रितिका ने अपनी बाहें डाल के अंकित को बाँध रखा था..दोनो की साँसे ज़ोरों से चल रही थी..

और आँखें दोनो की बंद थी…….

आज दोनो ने अपनी अपने शरीर और दिल की सुनी जिससे दोनो को एक ऐसे सुख का आनंद प्राप्त हुआ जिसे शब्दों में बयान करना बेहद ही मुश्किल है…

रितिका और अंकित दोनो ने स्वर्ग का रास्ता देख लिया….जिसे वो बता नही सकते..

दोनो हान्फते हुए एक दूसरे के उपर पड़े थे…….अंकित का चेहरा रितिका के शोल्डर पे पड़ा हुआ था

और रितिका छत की तरफ देखते हुए अंकित के बालों में हाथ फिरा रही थी..

अचानक अंकित ने अपना चेहरा उठाया और रितिका की आँखों में देखने लगा….

अंकित :- आज मेने अपनी वर्जिंटी आपको दी है….कितना लकी हूँ में कि आपने मेरी विर्ग्निटी ली है…थॅंक यू सो मच रितिका थॅंक यू सो मच…..

और फिर आगे बढ़ के रितिका के होंठो को चूम लेता है..

अंकित :- थॅंक यू….(बोलता है और साइड में आके लेट जाता है और अपनी टाँगें रितिका की कमर में डाले रखता है…रितिका कुछ नही बोलती बस देखती रहती है उसको और बालों में हाथ फिराए जा रही थी..उसकी साँसे अभी भी तेज चल रही थी..)

फिर रितिका भी अपनी टाँग उठा के अंकित के कमर पे रख देती है…अंकित थोड़ा खिसकते हुए रितिका से दुबारा चिपक जाता है..रितिका के बूब्स अंकित की चेस्ट में धँस जाते हैं दोनो के चेहरे एक दूसरे से बस कुछ ही दूरी पे थी…

अंकित अपने पैर से रितिका की गान्ड को सहलाने लगता है…ऐसा करने पर..अंकित का लंड खुद ब खुद खड़ा होने लगता है और पैर ऐसे रखने पर उसका लंड सीधे रितिका की चूत पे जाके ठोकर मार रहा था…मानो दरवाजा ठोक रहा हो अंदर आने के लिए…..

रितिका के चेहरे पे एक स्माइल आ जाती है…..

रितिका :- फिर से……

अंकित के चेहरे पे एक स्माइल आ जाती है..

अंकित :- क्या करूँ….मन ही नही कर रहा है हटाने का……(और अपने हाथों को रितिका की पीठ पे सहलाने

लगता है)

रितिका की आँखें मदहोशी में बंद हो जाती है..ये देख के अंकित अपने होंठ आगे बढ़ा के उसके होंठों पे रखता है और दोनो एक बेहद फ्रेंच स्मूच में घुस जाते हैं..कभी अपर लिप्स तो कभी लोवर लिप्स का मिलन हो रहा था….(अंकित के हाथ खिसकते हुए रितिका की गान्ड पर चले जाते हैं और उन्हे बड़े प्यार से दबाने लगता है और गान्ड भी फ्लफी होके अंदर बाहर होने लगती है)

रितिका के हाथ भी अंकित की पीठ पे घूम रहे थे……रितिका फिर से गर्म होने लगी थी किस नही बल्कि अंकित के खड़े लंड से जो बार बार उसकी चूत पे ठोकर मार रहा था……

अचनाक… फोन की रिंग बजी….

जिसे दोनो ने किस तोड़ी….फोन रितका का था…..रितिका ने हाथ साइड ले जाके फोन देखा..

रितिका :- सर का फोन है…

अंकित :- आटेंड करना ज़रूरी है…

रितिका :- ह्म्‍म्म्म….

फिर अंकित बुझे मन से रितिका को छोड़ देता है…..रितिका के चेहरे पे एक प्यारी स्माइल आ जाती है वो अंकित के होंठों पे एक प्यारी सी किस देके कमरे में ही फोन रिसेव कर लेती है और रूम में टहलते हुए बात करने लगती है….

अंकित मन में…अच्छा हुआ फोन आ गया इसके बॉस का..नही तो ऐसा नज़ारा देखने को कहाँ मिलता…(वो अपनी कोनी को तकिये में गढ़ाए और हथेली को सर पे रख के सामने का नज़ारा देखने लगा)

रितिका रूम में नंगी फोन पे बात करते हुए टहल रही थी..जो बहुत ही कामुक नज़ारा था अंकित के लिए…या फिर किसी भी लौन्डे के लिए लड़की को ऐसे नंगा चलते हुए देखना….

अंकित का हाथ अपने आप लंड पे चला गया…और उसे हल्का हल्का दबाने लगा……

रितिका :- यस सर..डिफिनेट्ली … आइ विल मॅनेज टूमारो बाए सर. (बोलते हुए वो मुड़ती है और उसकी नज़र अंकित पे पड़ती है जो उसे ही घूर रहा होता है..)

उसने अपने गर्दन नीचे करी और अपनी हालत को देखा….एक शानदार सेक्स के पूर्ण आनंद में डूबने के

बाद शरीर की चमक और बढ़ रही थी रितिका के..

और फिर सामने अंकित की नज़रों को देखा..जो उसके शरीर को अपनी आँखें गढ़ाए घूर रहा था…..बस

इसी एहसास ने रितिका का बुरा हाल कर दिया…उसके दिल की धड़कने बढ़ने लगी….और धक धक करते हुए

तेज़ी से चलने लगी…उसका चेहरा शरम से लाल हो गया उसका हाथ अपने कान पे जो फोन के साथ था वो

धीरे धीरे नीचे आ गया…

साँसे तेज़ी से लेने की वजह से उसकी जो तनी हुई चुचियाँ थी उन्होने अपने होने का प्रमाण दिया कि हम भी है यहाँ पे….

वो चुचियाँ भी बुरी तरह से उपर नीचे उपर नीचे होने लगी…..ये देख के अंकित का तो बॅंड बज गया उसका लंड उसके पेट पे ज़ोर ज़ोर से मारने लगा….और उसने अपने होंठो को गोल कर लिया मानो

बोल रहा हो वाऊऊओ…..

अंकित को ऐसा करता देख रितिका को कुछ अंदाज़ा हुआ..उसने अपनी आँखें नीचे की तो देखा तेज़ी से सांस

लेने की वजह से उसकी बेहद खूबसूरत ब्रेस्ट तेज़ी से उपर नीचे हो रही है…..वो शरम से पानी पानी

हो गयी..उसने फट से अपने हाथों को अपने उन रसीले चुचों पे रखा उन्हे ढकने के लिए लेकिन वो हाथों के पीछे कहाँ छुपने वाले थे……