एक कीमत “ज़िंदगी” की–30

अंकित धीरे धीरे साँप की तरह रेंगता हुआ रितिका के शरीर के उपर चढ़ने लगा..और अपनी गर्दन

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नीचे कर के…होंठो को पेट के उपर से चिपकाता हुआ उपर आने लगा और अपनी जीभ निकाल

कर साइड में से मम्मो से होते हुए उपर जाने लगा मानो कोई क्लीनिंग कर रहा हो….

रितिका तो पागल सी हो गयी..उसकी शरीर में झुनझुनी सी फैलने लगी..हालत बुरी होती जा रही थी..

अंकित ने सेम आइस ही दूसरी तरफ भी किया अपनी जीभ से…..

और हाथ आगे बढ़ाकर ब्लाउज को उस तरफ से भी शोल्डर से गिरा दिया था….

अब बस रितिका के मम्मो के उपर एक मात्र कपड़ा सा पड़ा हो…मानो किसी फल या सब्ज़ी के उपर

कपड़ा रख दिया हो …..

अंकित उस नज़ारे को देखने लगा उसका हथियार तो ऐसे सख़्त हो गया था मानो कोई पोल रोड

के साइड में सीधा खड़ा हो…

रितिका को अपने पेट के उपर उस भारी चीज़ का आभास बखूबी हो रहा था जिससे उसकी जान और बुरी

तरह से निकल रही थी…उसकी चुनमुनिया ने अंदर अंदर ही अपनी पानी की सेना बाहर निकालनी शुरू कर दी थी..

जिससे उसका टाट यानी कि उसकी पेंटी उस पानी की सेना में सनती जा रही थी….

फिर अंकित ने बड़े ही मज़ेदार अंदाज़ में ब्लाउज को रितिका के मम्मो पे से हटाया जिसे

देख कर रितिका को भी एक बार को कामुकता भरी मुस्कान देनी पड़ी….

वो अंकित ने किया ऐसा था … कि उसने अपना चेहरा आगे बढ़ाया और अपने दाँतों से पकड़ के उसके

ब्लाउज को खीच लिया वो भी बहुत धीरे धीरे..जिससे कि उसकी चुची धीरे धीरे उसकी आँखों के

सामने आने लगी….और जब उन चुचो के निपल सामने आए तो अंकित का मुँह खुल गया

और ब्लाउज वहीं पेट पे रितिका के गिर गया..

वाहह क्या बनाया है इतने सुंदर और गोल गोल मक्खन जैसे खरबूज़ पर ये बहुत ही

लाइट कलर के पिंक पिंक निपल्स…..मानो इसकी सुंदरता को और बढ़ा रहे हों…..

अंकित के मुँह से लार टपकने लगी….

रितिका ने जब अंकित को उसके मम्मो पे ऐसे घूरते पाया तो वो शरमा गयी..उसके गाल और उसकी

नाक एक दम लाल सुर्ख हो गयी..उसने अपने हाथों से उसे ढक लिया और अपनी आँखें बंद कर ली..

रितिका :- प्लीज़..डोंट सी देम लाइक दिस….

अंकित की उस कामुकता से भरी आवाज़ को सुन के और भी ज़्यादा गरम हो गया उसके चेहरे पे एक कातिलाना

स्माइल आ गयी…

अब और नही बसका हो रहा था उसके कि कुछ और करे..अब तो वो बस वो कर देना कहता था जिसके

लिए दोनो कब से सूखे पड़े हैं..आज वो यहाँ पानी का तसमा ले आना चाहता था…जिसमे दोनो

ही डूब जाए….और परम सुख का अनुभव लेते रहे….

अंकित ने अपने हाथ धीरे धीरे आगे बढ़ाए और रितिका के हाथों को उसकी चुचियों से हटाने

लगा…रितिका ने भी देरी नही की और ना ही उसे रोकने का कोई दम लगाया…..और उसके हाथ पीछे

की तरफ होते चले गये….और कुछ ही सेकेंड में दोनो हाथ पीछे की तरफ फैल गये…जिसकी वजह

से…

सामने वो उभरी हुई चुचियाँ जिसके निपल ऐसे खड़े हो रहे थे मानो जंग में लड़ने जा रहे

सिपाही खड़े हो सामने एक अद्भुत तरीके से उजागर हो गये…जिसे देख कर अंकित की आँखें

फटी की फटी रह गयी…

उसने तो सपने में भी नही सोचा होगा कि वो ऐसी चुचियाँ ज़िंदगी में देखेगा कभी….

अंकित ने धीरे धीरे हाथ आगे बढ़ाने शुरू करे..उसके दिल की धड़कन तेज चल रही थी…रितिका ने

जब आँखें खोल के देखा कि अंकित अपने हाथ आगे बढ़ा रहा है तो उसके भी दिल की धड़कन तेज़ी

से चलने लगी..और उसकी वजह से उसकी चुचियाँ उपर नीचे तेज़ी से हो रही थी…

अंकित का हाथ बेहद करीब आके रुक गया…..उसने रितिका की आँखों में देखा और कुछ सेकेंड तक

ऐसे ही देखते रही..

और फिर….आख़िर कर हाथों का शरीर का एक असली मिलन हुआ…

अंकित के हाथ रितिका के मम्मो पे पड़ड़ ही गये और उन्हे हल्का सा दबा दिया…

आआआआहह…रितिका ने अपनी गर्दन उपर की तरफ करते

हुए एक लंबी सी सिसकी ली..

आअहह जब ठंडे हाथों के स्पर्श में वो सॉफ्ट मक्खन जैसे चुचें और कड़क निपल

हाथ में चुबहे तो अंकित के मुँह से भी आह निकल ही गाइिईई………..

अंकित के हाथ रितिका के मम्मो पे पद ही गये और उन्हे हल्का सा दबा दिया…

आआआआहह…रितिका ने अपनी गर्दन उपर की तरफ करते

हुए एक लंबी सी सिसकी ली..

अंकित ने अपने हाथ उन मम्मो पे चलाने शुरू किए…जिससे वो चुची हाथों के नीचे दब के

इधर उधर होने लगी और घूमने लगी…

जैसी गोल गोल चक्की चल रही हू…..अंकित की हथेली में वो तने हुए थोड़े मोटे निपल्स

चुभ रहे थे..

फिर अंकित ने हाथ हटाया और उंगली से निपल्स के साथ खेलने लगता…

कभी इधर से मारता तो कभी उधर से उन पर उंगली से मारता … मानो बॉल लटकी हो रस्सी से और

उसे बॅट से मार रहा हो…

आह उूुुुुुुउउ उफफफफफफफफफफफ्फ़…अंकित………रितिका के मुँह से सिसकियाँ निकल रही थी…..

अब अंकित से भी रहा नही जा रहा था उसने अपना चेहरा नीचे किया और अपनी लंबी जीभ बाहर निकाली

और निपल ले टॉप पे अपनी जीभ को रख के उसको हल्का सा चख लिया….

आआहह ह्म्‍म्म्मममममम…..रितिका ने सिसकी लेते हुए अपने होंठ दबा लिए…

लेकिन अंकित के चेहरे पे एक मुस्कुराहट आ गयी…उससे अब कंट्रोल तो नही हो रहा था..लेकिन वो रितिका

और टीज कर के ही उसके साथ करना चाहता था…..

फिर उसने अपने दोनो होंठो के बीच में अपने निपल दबा ली और जैसे कोई बच्चा निपल वाली

बॉटल से दूध पीता है सेम वैसे ही पीने लगा……

आह न..ओ.हह..ह….ह्म्‍म्म सीईईईईईई …अंकित…म..त काओरूऊओ…. (अंकित के पीछे बालों पे हाथ फेरते

हुए बोल रही थी)

हाथ आगे बढ़ा के उसके बड़े ही फ्लफी दूसरे चुचे पे रख के उसे हल्का हल्का प्रेस

करने लगा..मानो कोई हॉर्न बजा रहा हो……

कुछ ऐसे ही 2 मिनट तक निपल को अपने मुँह में भर के उसे प्यार करने के बाद वहाँ से हटा.

हटते ही उसके पास चमकते निपल्स आ गये…जो उसके थूक़ से शाइन मार रहे थे…उसके बाद

उसने सेम दूसरे चुचे के साथ भी किया….

निपल्स को तो उसने अच्छे से चूसा ….और रितिका को बहुत बुरी तरह से टीज़ भी किया..उसका हाल तो

खराब पड़ा था…..

फिर अंकित ने जीभ निकाली..और दोनो मम्मो के बीच की दरार में घुसा दी और वहाँ से अपनी

छाप छोड़ता हुआ उपर आने लगा..

एक अजीब सी गुदगुदी और झुनझुनी सी फैल गयी..

अहह ओह ह्म्‍म्म्मममम उसके हाथ अंकित के बालों में बुरी तरह से घुसे हुए

थे और वहाँ चल रहे थे….

जीभ वो गर्दन से लाता हुआ वो रितिका के होंठो के करीब आ गया…..दोनो एक दूसरे की सांस

को अपने अपने गरम होंठो पे महसूस कर रहे थे….

अंकित ने रितिका के हाथ अपने पीछे से हटाए और उन्हे फिर से पीछे की तरफ फैला दिया…

फिर अंकित ने अपने होंठ आगे बढ़ा के रितिका के होंठ पे रखा और उन्हे चूसने लगा ही था

रितिका भी अपनी होंठो का उपयोग करके उन्हे चूसने लगी ही थी..कि अंकित ने अपना चेहरा हटा लिया

रितिका ने आँखें खोल के गुस्से भरी प्यारी नज़रों से अंकित को देखा..

अंकित मुस्कुरा दिया और फिर अपने होंठ आगे करके किस करने के पोज़िशन में आया रितिका तो पूरी

टायर थी … उसने अपने होंठ आगे करके अंकित को चूमने की कॉसिश की लेकिन अंकित ने फिर से एक बार

अपना चेहरा पीछे कर लिया..

इस बार रितिका की आँखों में जो गुस्सा था वो एक औरत के शरीर के साथ हो रहे मज़ाक का था…

जो अंकित समझ रहा था लेकिन उसे मज़ा आ रहा था…

अंकित ने मन में सोचा…क्यूँ ना थोड़ा और तडपाया जाए..बहुत मज़ा आ रहा है…इसमे…

अंकित ने सोचने के बाद अपना चेहरा आगे किया और फिर से होंठो को रितिका के पास लाने लगा..

रितिका ने भी पिछली 2 बार की तरह अपने होंठ आगे बढ़ाए….दोनो के होंठ आपस में हल्के से

जुड़ ही गये थे कि अंकित ने अपना चेहरा पीछे किया..लेकिन…

लेकिन इस बार वो कामयाब नही हुआ….क्यूँ कि रितिका ने अपने हाथ पीछे ले जाके उसे कस्स के

अपनी तरफ खीच लिया जिसे दोनो के होंठ चिपक गये ……

और अंकित की तो ऐसी तैसी कर दी…क्यूँ कि जो किया सिर्फ़ रितिका नी ही किया…उसके होंठो को बुरी तरह

से चूसने लगी…मानो वो अंकित से पिछली 2 बार की की गयी शरारत का बदला ले रही हो…उसे बुरी

तरह से चूस रही थी..चांट रही थी..अंकित तो बस उसके इशारों पे नाच रहा था….

अचानक अंकित के शरीर में दर्द भरी ल़हेर दौड़ गयी……उसने किसी तरह से रितिका के हाथ को पीछे

हटाया और खुद पीछे हो गया…..उसने अपना हाथ अपने होंठ पे लगाकर देखा तो निचला होंठ

पे खून उभर आया….वो गुस्से भरी आँखों से रितिका को देखने लगा….

(अब ऐसे देखने से क्या होगा….जब एक भूकि बिल्ली को ऐसे चोदेगा तो फिर वो तो ऐसे ही काटेगी ना)

रितिका ने अपने हाथ आगे बढ़ाए और अंकित के चेहरे पे रखे…लेकिन अंकित ने उन्हे झटक दिया..

वो जानती थी कि अंकित में गुस्सा बहुत है..लेकिन वो ये भी जानती थी कि इस वक़्त वो उसे शांत भी कर सकती

है..

इसलिए उसने दुबारा हाथ आगे बढ़ाया और आगे गालों पे रख के उसके चेहरे को अपनी तरफ खिचा

अंकित घूरती आँखों से खिचा चला गया….दोनो के चेहरे बेहद नज़दीक आ गये…

फिर रितिका ने अपनी जीब बाहर निकाली और उस उभरे हुए खून पे रख दिया और उसे वहाँ से चाट

गयी….

उफफफफफफ्फ़ अंकित के दिल में ये आया…क्यूँ कि ऐसा करने पर उसके पूरी शरीर में मस्ती की ल़हेर दौड़ गयी

फिर रितिका वहाँ चाटती रही…और अपने होंठों से बड़े प्यार से उसे चूसने लगी…..आख़िर कार खून

निकलना बंद हुआ…दोनो ने एक दूसरी की आँखों में देखा…

और फिर अंकित ने आगे बढ़ के रितिका के होंठों पे अपने होंठ रख दिए..और उन्हे प्यार से बेहद्द

कोमलता से उस कोमल रस का पान करने लगा….

इधर रितिका का हाथ अंकित की टी-शर्ट पे गया और उसने उसे उपर खिचने लगी….लेकिन गर्दन पे जाके

अटक गयी…अंकित को समझते देर ना लगी बस 3 सेकेंड के लिए उसने अपनी गर्दन पीछे की टीशर्ट बाहर निकली

और फिर से जुड़ गये होंठ..

लेकिन इस बार अंकित के शरीर में एक और मस्ती की लेहर दौड़ पड़ी..क्यूँ की इस बार नंगी चेस्ट पे

उसे रितिका के चुचों का एहसास हुआ और कड़क हो रहे निपल्स की चुभन हुई उसे…..

अंकित के मुँह से घुटि हुटी आवाज़ रितिका के मुँह में ही निकल गयी…दोनो एक दूसरे की जीब से

लड़ाई लड़ रहे थे