एक कीमत “ज़िंदगी” की-28

लेकिन अंकित ने अपने हाथ की ताक़त
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से उसे पीछे ढकलने लगा…और आख़िर वो उसमे सफल भी हुआ..
रितिका पीछे की तरफ हो गयी..उसके नाज़ुक हाथों में इतनी जान कहाँ थी..अंकित अंदर घुसा और
उसने दरवाजे को अंदर से बंद कर लिया..
रितिका :- ये क्या कर रहे हो अंकित…..
इस बात पर अंकित मुद्दा और उसने रितिका को देखा…शायद अभी ही आई थी ऑफीस सी…

सारे पहन रखी थी लाइट रेड महरून टाइप कि ट्रांसपेरेंट थी हल्की सी…और एक ग़ज़ब की सेक्सी लग रही थी..

अंकित तो वैसी भी आज बहुत ज़्यादा उत्तेजित था..और रितिका को ऐसे देख के वो तो और ज़्यादा भड़क गया

आग में घी का काम हो गया ये तो..

रितिका ने अंकित को अपनी तरफ घूरते हुए देख लिया..और उसने अपने आप को समेटती वो घूम गयी..

रितिका :- प्लीज़ जाओ यहाँ से…क्या चाहते हो…

अंकित :- वही जो आप भी चाहती हो..

रितिका :- में कुछ नही कहती..ये सिर्फ़ तुम्हारी सोच है…

अंकित :- अच्छा…सिर्फ़ मेरी सोच है….(बोलता हुआ वो धीरे धीरे कदम आगे बढ़ा रहा था)

इधर रितिका उसके कदमो को अपने करीब आते सुन उसकी दिल की धड़कने तेज चल रही थी….

अंकित की नज़र रितिका के उस न्यूड बॅक पे थी जो पीछे से काफ़ी खुली हुई थी..ब्लाउस ही ऐसा था कि

बॅक तो हद से ज़्यादा खुला हुआ था और बस एक पतली सी स्ट्रॅप्स से बंद था…..

अंकित ने करीब आते ही रितिका की बॅक को अपने हाथ से सहला दिया……

बस इससे तो रितिका की पूरी आँखें खुल गयी और उसका पूरा बदन काँपने लगा….वो कुछ बोल

पाती या कुछ कर पाती….

अंकित ने शोल्डर पे से हल्की सी साड़ी हटा के रितिका के कूल्हो पे अपने तपते होंठ रख दिए…

अंकित.त………हल्की सी आवाज़ मुँह से निकली और फिर उसकी आँखें बंद हो गयी….

फिर अंकित अपने होंठ नीचे करते हुए आने लगा और बड़ी तेज़ी से उसने पीठ पे अपने होंठो की

बरसात कर दी……

रितिका की आँखें बंद हो गयी…दिल और दिमाग़ इस शरीर के सामने हारने लगी….रितिका मदहोशी में

अपनी गर्दन हिलाने लगी..उसका चेहरा लाल हो गया था वो बहुत गहरी साँसें ले रही थी…

उसके चेहरे को देख के कोई नही कह सकता था कि वो नही चाहती कि ऐसा हो…उसके चेहरे पे एक

नशा चढ़ चुका था……

उधर अंकित ने तो पीठ पे चुंबनों की बौछार करनी बंद नही करी..वो तो मन बना के आया

था कि आज तो सब कुछ लूट लेगा इस हसीना का….

अचानक उसने अपने हाथ आगे बढ़ाए और उस ब्लाउस की स्ट्रिप्स जो हुक से बंद थी..उसे खोल दिया.

कत्तिथल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्ल अजीब सी आवाज़ करके वो खुल गया….

और ये आवाज़ रितिका के कानो में बखूबी पड़ गयी..और जैसे ही पड़ी..उसने अपनी आँखें खोल ली..

मानो जैसे अभी अभी एक कड़वे सपने से जागी हो…और एक दम से आगे होके मूड गयी और अपनी

बूब्स के आगे हाथ लगा लिए…उसकी साड़ी हल्की सी साइड से गिरी हुई थी…हल्का सा क्लीवेज दिखाई दे

रहा था….ब्लाउस के हुक खुलने की वजह से वो ढीली हो गयी थी…पर रितिका ने आगे हाथ लगा रखा

था जिसकी वजह से वो नही गिरी पूरी…

रितिका की आँखों में पानी भर गया था और वो अंकित को घूर रही थी…

अंकित का फेस रियेक्शन चेंज नही हुआ वो रितिका को देखते हुए आगे बढ़ा…और अपने हाथ आगे

बढ़ा के उसे कमर से पकड़ लिया…..

रितिका अपने एक हाथ से उसे हटाने की कॉसिश करने लगी..लेकिन पकड़ इतनी मजबूत थी कि वो नही हट

रही थी…

रितिका :- तुम…ऐइस..आ.आ….की….उ.न….कर..रही ह.हो… (अटकती हुई)

अंकित :- आपके लिए…..(इतना बोलता है)

और अपने होंठ आगे बढ़ा के रितिका की नेक पे रख देता है..और वहाँ बेइन्तिहा चूमने लगता है..

बिल्कुल पागलों की तरह…

आहह…रितका के मुँह से हल्की सी आवाज़ निकलती है….एक हाथ जो अंकित के हाथ को कमर से हटाने में

लगा था..वो तो ढीला पड़ता जा रहा था..बस नाम का हटा रही थी वो…

और जो दूसरे हाथ से उसने पल्लू पकड़ रखा था…वहाँ से भी वो हट गया..और अंकित के सर के पीछे

आ गया…

रितिका :- अंकित…आ.आ.ह..प्लीस..ए…मत.टीटी.त.. करूऊ (बोलते बोलते उसकी आँखें मदहोशी में बंद हो रही

थी) और वो अंकित के बालों को पकड़ के पीछे खिचने में लगी हुई थी..

प्लीज़..ए.ए..ए.ए… मत करो…ये सब ठीक नही हाइयैई……..

अंकित ने अपनी होंठ हटा लिए और रितिका की आँखों देखने लगा..

अंकित :- अगर ये ठीक नही है…तो फिर क्यूँ भेजा मुझे वो लेटर क्यूँ वो सब किया क्या वो ग़लत नही

था…और अभी…खुद से क्यूँ बताया कि आर्नव घर पे नही है….इससे सिर्फ़ यही मतलब निकलता है कि

आपके दिल में भी वही है जो मेरे दिल में है..हम दोनो को अपनी अपनी परेशानी बतानी है…

और आप भी यही चाहती है…पर आपको एक अजीब सी डोर ने बाँध रखा है जो आज में तोड़ के

रहूँगा..क्यूँ कि ना तो में आपको परेशानी में देख सकता हूँ..और ना ही खुद परेशान

हो सकता हू….

(इतनी बाते उसने आँखों में आँखें डाल के बोली)

और रितिका को कमर से पकड़ की पीछे दीवार से सटा दिया..और अपने हाथ आगे करके…

उसके शानदार बूब्स के सामने से उसकी साड़ी का पल्लू हटा दिया जो सीधी जाके फर्श पर गिर गया

और फिर आगे बदः के उसके सीने से चिपक गया जिस्शे अंकित की चेस्ट में रितिका के बूब्स घुस गये

और फिर से..

पागलों की तरह कभी गालों तो कभी नेक और कभी ब्लाउस को शोल्डर पे से हटा के वहाँ

होंठो केए बरसात करने लगा…

रितिका ना कहते हुए भी हार चुकी थी..उसके हाथ अपने आप अप अंकित के सर के पीछे चले गये

और उसकी आँखें बंद हो गयी….और उसके मुँह से हल्की हल्की आह..निकलने लगी…

उसके शरीर ने उसके दिल और दिमाग़ पे आख़िर कर क़ब्ज़ा कर ही लिया…(इसमे अंकित की बातों का बहुत असर

था कि वो अब हार मान चुकी थी…)

अंकित का एक हाथ शरीर को सहलाता हुआ उसके पेट पे पहुच गया और उसकी उस न्यूड पेट की नाभि

पे रख वहाँ अपनी उंगलियों से ट्विस्ट करने लगा…

रितिका के पेट ने तो नाचना शुरू कर दिया इस प्रहार से…गहरी गहरी साँसे चल रही थी उसकी..

अंकित तो पागलों की तरह चुम्मा चाटी कर रहा था पूरी गर्दन पे…मानो कोई अनोखी चीज़

मिल गयी हो..(वैसे उसके लिए अनोखी ही है)

दूसरे हाथ से अंकित रितिका के चेहरे को सहला रहा था और रितका भी उसके हाथों पे अपना चेहरा घिस रही

थी…अब उसने अपने दिमाग़ की बाते सुननी बंद कर दी…

दिल और शरीर की बातों में खो गयी….और इस सुख का आनंद लेने लगी…

अंकित ने अपना हाथ रितिका के चेहरे से हटाया और ब्लाउज की तरफ बढ़ा के उसे शोल्डर पे से गिरा

दिया अब पीछे से तो खुला हुआ ही था…शोल्डर से गिरने की वजह से वो लटक सा गया मगर

अंकित की चेस्ट रितिका से चिपकने की वजह से वो पूरा नही गिरा..

अंकित ने वहाँ जीभ निकाली और शोल्डर पर अपनी छाप छोड़नी शुरू कर दी.

आहह..रितिका सिसकती हुई उसके बालों में हाथ फैरने लगी..उसके शरीर में गुलगुली होने

लगी….

कुछ सेकेंड तक ऐसे ही रितिका को गुलगुली करने के बाद उसने अपना चेहरा उठाया और रितिका की आँखों

में देखने लगा..रितिका के हाथ बराबर अंकित के बालों में चल रहे थे…

रितिका भी उसकी आँखों में देख रही थी…

दोनो की आँखों में एक ही बात मुझे नज़र आ रही है..

कि अब बस और नही…..और नही….इंतजार होता इस पल को ज़िने दो…

बस देखते ही देखती अंकित के होंठ आगे बढ़ने लगे…और करीब बढ़ते चले गये..

और आख़िर कर रितिका के उन रसीले होंठो पे पड़ गये..और उन्हे चूसने लगी….

बड़ी ही बहरामी से अंकित रितिका के होंठ चूस रहा था..तो रितिका भी पीछे नही हाटी..और वो

भी उसी जोश के साथ किस करने लगी…

सर का नशा अब सर चढ़ चुका था…और वो पूरी ढोल बजाते हुए आगे बढ़ रहा था..