एक कीमत “ज़िंदगी” की-26

गतान्क से आगे…………..
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दिशा उसे पीठ पे थप्पड़ मारती है..और अलग होती है….
दिशा :- बाइ गॉड तुझसे तो गले लगना भी बड़ा ही मुश्किल है…तू नही सुधरेगा…
(बोलते हुए एक कातिलाना स्माइल देती है..)
अंकित भी एक स्माइल दे देता है…..और फिर दिशा भी जाने लगती है..और पीछे मूड के एक बार फिर हाथ

हिला के बाइ करती है….अंकित भी बाए करता है..लेकिन उसे कुछ अजीब लगता है..

अंकित :- दिशा की नाक इतनी लाल क्यूँ हुई थी….(वो अपना मुँह बनाता है जैसे पता नही क्यूँ है)

और फिर सोचते हुए जीन्स लेने लगता है….और एक अच्छी जीन्स कबाड़ के वापिस आने लगता है..

रितिका के साथ हुई घटना को दिशा की मुलाक़ात ने भुला दिया था…..

लेकिन वो ये नही जानता कि अभी तो सिर्फ़ लहरे उठनी शुरू हुई है…किनारे तक आते आते बहाव बहुत तेज

होने वाला है….

रितिका के साथ हुई घटना को दिशा की मुलाक़ात ने भुला दिया था…..

अंकित को रात में नींद नही आ रही थी…वो पलंग पर आँखें खोल के कुछ सोचने लगा…..

काफ़ी टाइम पहले स्कूल टाइम में….गोआ ट्रिप….दिशा एक सेक्सी बिकनी में आके बीच पे खड़ी थी

और सभी लड़के उसे ताड़ रहे थे…पर किसी की हिम्मत नही थी की कोई उससे कुछ जाके बात करे..सिवाय

अंकित के और वो पहुच गया उससे बात करने…

अंकित :- हेलो..

दिशा उसकी तरफ घूरती है और फिर सामने समुंदर की तरफ देखने लगती है..

अंकित :- हेलो मेने कहा है..समुंदर ने नही…

दिशा इस बात को सुन के अंकित की तरफ फिर से देखने लगती है…

दिशा :- मे आइ नो यू

अंकित :- नो..यू डोंट…

दिशा :- देन व्हाट यू वान्ट?

अंकित :- बस कुछ नही..वैसे तो में भी आपको नही जानता…लेकिन वहाँ खड़े जितने लड़के हैं सब आप

को ही ताड़ रहे हैं (वो उंगली लड़कों की तरफ करता है )

जिसे दिशा वहाँ देखने लगती है..तो सभी लड़के इधर उधर देखने लगते हैं…

फिर दिशा अंकित की तरफ नज़र करके…मानो पूछ रही हो तो?

अंकित :- किसी की हिम्मत नही है आपसे बोलने की…सब शायद डरते हैं फट्टू साले…

दिशा :- (मन ही मन थोड़ा मुस्कुराती है पर शो नही करती ) अच्छा तुम नही डरते..

अंकित :- में..अरे क्यूँ डरूँ..कोई ग़लत कम थोड़े ही कर रहा हूँ..जो सच है वही बोलूँगा इसमे

डरना कैसा..

दिशा :- सच कैसा सच…

अंकित :- ओ तेरी (माथे पे हाथ मार के) साला इन अलुंडों के चक्कर में वो बात तो बोलना भूल गया

जिसके लिए आया था….आक्च्युयली आप इस बिकनी में…सूपर हॉट ह्म्म एक दम मस्त लग रही हैं..यहाँ जितनी

भी गोरी मेम है ना..वो तो कुछ भी नही है आपके सामने…यू आर लुकिंग डॅम हॉट…

दिशा अंकित की बात सुन के उसे अपनी आँखों से घूर्ने लगती है….अंकित के फेस पे कोई टेन्षन नही था..

अंकित :- अच्छा चलो बाए..यही बोलने आया था में तो…(और फिर मूड के जाने लगता है)

रूको….तभी उसके कानो में आवाज़ पड़ती है..वो मुड़ता है..

दिशा :- थॅंक यू सो मच….

अंकित के चेहरे पे कमीनी वाली स्माइल आ जाती है..

दिशा :- वैसे कौन सी क्लास में हो

अंकित :- 8थ में..

दिशा :- 8थ में…बाते तो बहुत बड़ी है तुम्हारी..

अंकित :- ह्म्म अच्छा..तो आप कौन सी क्लास में हो..

दिशा :- 10 थ में..

अंकित :- क्लास के हिसाब से तो आपका भी सब कुछ बड़ा है…..(और अपने दाँत दिखा देता है)

दिशा उसे अपनी आँखें बड़ी करके घूर्ने लगती…लेकिन फिर एक कातिलाना स्माइल देती है..

दिशा :- तुम तो बड़े ही कमीनी हो…

अंकित :- हाँ…शायद…लेकिन जो सच है वो बोल देता हूँ..आप 10थ की नही लगती इसलिए बोला..जैसे

आपको मेरी बाते बड़ों वाली लगती है..वैसे मुझे आपका सब कुछ बड़ों जैसा लगता है..

इस बार दिशा अपनी हँसी कंट्रोल नही कर पाई…..और हँसने लगी…

उधर खड़े लड़कों का तो सब कुछ जल गया साले घूर घूर के देखने लगी..

अंकित :- अच्छा..बाए..आप एंजाय करो…

दिशा :- रूको..कहाँ जा रहे हो…

अंकित :- ह्म्म बोलो

दिशा :- आक्च्युयली मुझे सी के अंदर जाना है..पर कोई है नही..क्या तुम मेरे साथ चलोगे थोड़ी

मस्ती हो जाएगी…

(अपनी बॉडी को हिलाती हुई बोलती है)

अंकित के तो पैर काँपने लगते हैं उस सीन को देखने में…वो नीचे से दिशा को घूर्ने लगता

है…हाई गोरे गोरे एक़ दम पर्फेक्ट थिग्स…उपर एक छोटी सी कच्छि जिसके पीछे छुपी उसकी

छोटी सी इंसानो वाली कच्छि….उपर सपाट पेट..और उस ब्रा में क़ैद वो चुचे जिनकी दरार दिख

रही थी..मानो बस फॉरमॅलिटी के लिए धक दिया हो उसे ब्रा से……

दिशा :- बोलो..चलोगे..

अंकित होश में आते हुए..

अंकित :- यॅ श्योर…

और फिर दिशा के साथ अंकित चल पड़ा..सी के अंदर…और फिर जो हुआ थोड़ा बहुत उससे तो वहाँ कहदा एक एक लड़का बेचारा यही सोच रहा होगा कि अपना अपना लंड काट के फेंक दूं साला..किसी काम

का नही है….

उधर पानी के अंदर दोनो हंसते हुए खेल कूद रहे थे दोनो एक दूसरे के उपर पानी डाल रहे थे

कभी कभी दिशा फिसल जाती तो अंकित उसे उठाने के चक्कर में उसकी सॉफ्ट बॉडी पे हाथ लगाता

कभी कभी उसकी गान्ड तो कभी उसके चुचों पे हाथ लग जाता…उसका तो 8थ स्टॅंडर्ड में कच्छे

के अंदर बंबू बन गया था…

यही सोचते हुए अंकित के चेहरे पे बत्तीसी फट जाती है..और उसके हाथ धीरे धीरे खिसकते हुए

अपने लंड पे चले गये…जो पहले से ही राक सॉलिड की तरह आसमान छू रहा था……

पर..

क्रमशः………………………