एक कीमत “ज़िंदगी” की-25

दोनो की नज़रे गेट पे चिपक गयी…बेल बजे जा रही थी…..अचानक रितिका को होश आया उसने अंकित

Hindi Sex Stories Antarvasna Kamukta Sex Kahani Indian Sex Chudai को अपने हाथ से पीछे की तरफ प्रेस किया…अंकित रितिका की तरफ देखता हुआ एक दम से हड़बड़ाता हुआ

खड़ा हो गया….और उसने अपनी जीन्स को फटाफट से उपर चढ़ा के ठीक करने लगा..

उधर रितिका भी एक दम से उठी अपना पल्लू जो ज़मीन पे गिरा हुआ था उसे जल्दी से उठा के डालने

लगी और बाल ठीक करने लगी…तब तक अंकित रेडी हो गया था और उसने सोचा कि वही खोल दे

गेट…वो आगे बढ़ा और उसने धीरे धीरे करके गेट खोलने लगा..(उसका दिल ज़ोरों से धड़कने

लगा) और जब उसने गेट खोल दिया और सामने देखा तो उसने शांति मिली..सामने आर्नव खड़ा था

और उसी को देख के मुस्कुरा रहा था..

अंकित भी मुस्कुरा पढ़ा..और पूरा गेट खोल दिया और साइड हट गया…..

रितिका की नज़र सामने आर्नव पर पड़ी..तो उसके चेहरे पे स्माइल की जगह गंभीर भाव बन गये

वो किसी सोच में डूब गयी…

अंकित :- आर्नव कैसे हो?

आर्नव :- ठीक हूँ आप कैसे हो…(मासूमियत से पूछता हुआ)

अंकित :- ओह्ह..ह्म्म कहाँ से आ रहे हो..

आर्नव कुछ बोलता उससे पहले रितिका बोल पड़ी..

रितिका :- आर्नव गो टू युवर रूम नाउ..

आर्नव :- पर मुझे अंकित भैया से बात करनी है…

रितिका :- आइ सेड गो टू युवर रूम नाउ..अंकित वहीं आएगा…(थोड़ा उँची आवाज़ में)

अंकित उसे देखता रह गया कि इतना गुस्सा अचानक से कैसे आ गया रितिका को..

आर्नव अपनी मम्मी की बात को सुनता हुआ कमरे में चला गया…तभी अंकित रितिका के पास आके

कुछ बोले उससे पहले..

रितिका :- अंकित प्लीज़ यू गो नाउ टू…

अंकित चौंक के उसे देखने लगा…मानो पूछ रहा हो कि क्या हुआ..

रितिका :- आइ साइड प्लीज़ गो…

अंकित उसके करीब आके उसके हाथ पकड़ते हुए बोला..

अंकित :- लेकिन हुआ क्या…अभी तो..

रितिका ने अंकित के हाथ को झटकते हुए..

रितिका :- में वो सब कुछ नही कर सकती…जो भी अभी हुआ..मेरा एक बच्चा है डोंट यू सी..में तुमसे

कितनी बड़ी हूँ..और तुम्हारे साथ ये सब करते हुए..नही..में नही कर सकती…मेने सिर्फ़ तुमसे सारे गिले

शिकवे दूर करने के लिए बुलाया था पर ये सब इतना कुछ हो जाएगा…मेने नही सोचा था..प्लीज़

यू गो (वो थोड़ा झल्लाती हुए बोल रही थी)

अंकित :- पर रितिका मेरी बात तो..

रितिका :- (बीच में रोकते हुए) मुझे कुछ नही सुनना..तुम क्यूँ नही समझते..मेरा ये सब करना ग़लत

है…में अपने बच्चे से बहुत प्यार करती हूँ..और उसे ये धोका नही दे सकती…यू प्लीज़ गो..

(बोलते हुए वो सर अपना सर पकड़ के वहीं उसी सोफे पे बैठ जाती है)

अंकित 2 मिनट तक खड़ा रहता है…और फिर कुछ सोच के वो मूड के चला जाता है….

इधर रितिका अपने आप को समेटते हुए उसी सोफे पे लेट जाती है…और अपनी आँखें बंद कर लेती है….

उधर अंकित बड़बड़ाता हुआ घर की बजाए बाज़ार की तरफ निकल गया…

पता नही अपने आप को क्या समझती है..पहले तो खुद ही बुलाती है फिर खुद ही शुरू करती है

और जब इतना सब कुछ हो गया तो ये सब नाटक … कमाल है…मेने कहा था कि वो बुकेट और

कार्ड भेजने के लिए..तब समझ नही आई कि एक बेटा है…तब तो सब कुछ ठीक था..जब सब कुछ चल

रहा था..पता नही क्या चलता रहता है उसके दिमाग़ में..गुस्सा दिला रखा है….

(बड़बड़ाते हुए मार्केट की तरफ बढ़ रहा था जहाँ काफ़ी भीड़ थी..और उस भीड़ में काफ़ी सारी

सुंदर सुंदर लड़कियाँ और लॅडीस भी घूम रही थी)

अंकित :- छी..साला अच्छा भला मूड खराब कर दिया…..(बोलता हुआ अपनी गर्दन छटकता है तो

उसकी नज़र वहीं ज़म जाती है)

सामने एक टाइट जीन्स में लड़की थोड़ा उचक के कुछ समान लेने की कॉसिश कर रही थी…जिसकी वजह

से उसका पहना हुआ वाइट कलर का टॉप थोड़ा उपर हो गया जिसकी वजह से उसकी गोरी गोरी कमर का

साइड वाला हिस्सा उजागर हो गय्या..और जीन्स में फँसी टाइट गान्ड की शेप और अच्छे से उजागर हो

गयी….

एक पल के लिए अंकित की नज़रे वहीं चिपक गयी…लेकिन फिर उसके अपनी नज़रे हटा ली..

अंकित :- (अपने आप से) मत देख..साले मत देख..वैसे ही ज़िंदगी ने पोपट करने का फ़ैसला कर रखा

है…साला..जब कभी लगता है कि ये लड़की मिल जाएगी उसी वक़्त इस खड़े लंड को छुरी चला देता है..

हाए रे किस्मत…

रोते हुए वो एक शॉप में घुस जाता है…वो कुछ कपड़े खरीदने की सोचता है…और जाके जीन्स

देखने लगता है….

तभी उसे साइड में एक लड़की खड़ी दिखती है….वो उसे घूर्ने लगता है…अचानक वो लड़की अपनी गर्दन

इस तरफ घुमाती है और वो भी अंकित को घूर्ने लगती है दोनो एक दूसरे को घूर्ने लगते है…

और फिर कुछ ही मिनट में…अंकित के चेहरे पे स्माइल आ जाती है…और उस लड़की के भी…

दिशा…….तू यहाँ….(अंकित चलता हुआ वहाँ जाता है)

अंकित्त…..व्हाट आ प्लीज़ेंट सर्प्राइज़……(और वो आगे बढ़ के अंकित को एक हग देने लगती है)

उफ़फ्फ़ अंकित का तो बॅंड पहले से ही बजा हुआ था और इसे गले लगाते ही उसका तो ढोल बज गया..

वो अपने मन में..साला इसको भी आज ही गले लगना था….अगर इसे मेरे खड़े लंड का आभास हो

गया तो मेरी तो सॉलिड लग जाएगी…

लेकिन ऐसा कुछ नही हुआ..दिशा उससे अलग हुई और मुस्कुरा के देखने लगी अंकित को…पर अंकित तो

उसे नीचे से उपर तक घूर्ने लगा…टाइट ब्लॅक जीन्स…जिसके अंदर मस्त थाइस्स घुसी हुई थी…

थोड़ा उपर आके…एक दम सपाट पेट.और थोड़ा उपर उसके 34 साइज़ के टाइट और बेहद सेक्सी शेप्ड

के चुचे जो कि उस पर्पल थिन टॉप में छुपे हुए थे….

दिशा :- तेरी चेकिंग आउट की बीमारी अभी तक नही गयी ना….

अंकित दिशा की इस बात को सुन के हड़बड़ा गया…और वो हड़बड़ाते हुए बोल पड़ा..

अंकित :- आ.आ…रे नही न..आह..इ यार..वो तो तू इतनी बदल गयी है..ना कि में तो बस देखता ही रह

गया….

दिशा :- ओह्ह फ्लर्ट करने की कॉसिश इतने सालों के बाद पहली मुलाक़ात में..

अंकित :- (अपने मन में) अबे कुतरी पहली मुलाक़ात में लोग गान्ड और चूत ले जाते हैं और तू फ्लर्ट की

बात कर रही है..

दिशा :- (चुटकी बजाते हुए) क्या सोच रहा है…तेरी ये सोचने की आदत नही गयी ना…

अंकित :- अरे नही यार दिशा..सॉरी सॉरी…दिशा.. ऐसा नही है..वो इतने सालों के बाद मिली..और वो भी इस

तरह…तू बिल्कुल चेंज हो गयी है सच में….

दिशा :- दिशा जी.. हहेहेहेः….रहने दे..दिशा ही बोल….वैसे भी सिर्फ़ 23 साल की हुई हूँ और तुझसे 2 साल

ही बड़ी हूँ…

अंकित :- (अपने मन में) हाँ साली वैसे तो 23 साल की है लेकिन काम तो तू 30 साल की औरतों वाले

कर चुकी है….

दिशा :- ओये फिर किस सोच में डूब गया…

अंकित :- नही यार कुछ नही..बस वही स्कूल की याद जब हम मिले थे उस ट्रिप पे..में 8थ में था तू 10थ

में…वही मिले थे..नही तो उससे पहले तो कभी स्कूल में एक दूसरे को जानते भी नही थे…

दिशा :- हाँ यार सही कहा तूने…वो ट्रिप सच में आज भी याद है मुझे…जब तू उस गोरी मेम पे

लाइन मार रहा था और उससे थप्पड़ खाते खाते बचा था हहेहेहेहेहहे…

अंकित :- ऊओ ऐसा कुछ नही था…वो मुझे थप्पड़ नही मारती…..

दिशा :- रहने दे….अगर में ना आती और ना बचाती तो सच में पड़ जाता तुझे थप्पड़…

अंकित :- ओह्ह अच्छा जी..आज तक ऐसा कोई पैदा नही हुआ है..जो हमे थप्पड़ मार दे..(और फिर अपने मन में

साला थप्पड़ तो खा चुका हूँ..पर इसको क्या पता और थोड़ा फैंकने में चलता है)

दिशा :- ह्म्म सब पता है मुझे..वैसी थप्पड़ पड़ना भी चाहिए था तुझे 8थ स्टॅंडर्ड में था

तू..और बाते बहुत बड़ी बड़ी थी तेरी…

अंकित :- (साली अब क्या कहती है वही बात तुझसे भी पूछूँ अपने मन में सोचता हुआ)

लेकिन फिर उसने बात को बदलते हुए..

अंकित :- छोड़ यार…तू ये बता..उसके बाद स्कूल क्यूँ छोड़ दिया..तू दिखी नही उस गोआ ट्रिप के बाद..

दिशा :- अरे यार क्या बताऊ…डॅड का ट्रान्स्फर हो गया अचनाक..इसलिए ड्रॉप करना पड़ा..और तुझसे उस

वक़्त सिर्फ़ एक छोटी सी फ्रेंड्शिप हुई थी..इसलिए कोई कॉंटॅक्ट नही था..तो नही बता पाई..

अंकित :- ह्म्म हाँ भाई..हम से क्यूँ फ्रेंड्शिप करोगी..हुम्म तुम्हारे लेवेल के थोड़े ही है…

(एमोशनल अत्याचार करना शुरू कर दिया)

दिशा :- ओये ऐसी बात नही है…एक ट्रिप में हम मिले थे उसके बाद अब मिल रहे हैं तो कैसे

करती तुझसे फ्रेंड्शिप…

अंकित :- हाँ ये बात भी सही है…वैसे तू यहाँ वापिस कब आई..

दिशा :- लास्ट मंथ ही आई हूँ यार…

अंकित :- तेरी शादी हो गयी..

दिशा :- (थप्पड़ का इशारा करते हुए) मार खाएगा क्या….में तुझे शादी शुदा लग रही हूँ..

अंकित :- अरे यार 23 की हो गयी है तू..तो मुझे लगा शादी हो गयी होगी तेरी..

दिशा :- रहने दे…में सब समझ रही हूँ..कि तेरे कहने का मतलब क्या है….

अंकित :- हाहहहः तो समझ गयी है तो फिर क्यूँ बोल रही है..हाँ (छेड़ते हुए)

दिशा :- तू बिल्कुल नही बदला वैसा का वैसा ही है….चीप हहेहेहेहेः

अंकित :- अच्छा में चीप हूँ तो बात क्यूँ कर रही है फिर….मत कर…

दिशा :- क्या करूँ..तुझसे इंप्रेस बहुत हो गयी थी ना..लास्ट टाइम..तू थोड़ा अलग किसम का बंदा है..

अंकित :- (मन में सोचता हुआ) अच्छा..अलग किसम का..तो फिर अपनी ये कमसिन जवानी दे एक बार

फिर तुझे अच्छी तरह पता चलेगा कितना अलग हूँ में ….

दिशा :- मत सोच ज़्यादा….(दिशा मुस्कुराते हुए बोली)

अंकित झेप गया..उसने अपनी जीभ दिखा दी…

अंकित :- बिल्कुल अनएक्सपेक्टेड था यार तुझसे मिलना….सच में बहुत खुशी हुई तुझसे मिल के..

दिशा :- ओहो..लड़के में समझदारी आ गई क्या बात है…हहेहेः जोक्स अपार्ट…मुझे भी बहुत खुशी

हुई यार तुझसे मिल के…वैसे जब गोआ में मिले थे ना..उसके बाद मुझे लगा कि तू एक अच्छा

लड़का है बात करने में..पर चान्स नही मिला कभी..

अंकित :- हाँ यार..मेरी किस्मत में कोई ढंग की लड़की है नही..साला किस्मत और लड़की का 36 का आकड़ा है..

अच्छा ये बता कोई बाय्फ्रेंड तो होगा..

दिशा :- ना यार ये बाय्फ्रेंड वग़ैरह सब इल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्ल बकवास लगता है…..में किसी एक के साथ सेनटी नही होना चाहती..

वो रोने धोने की बाते वो रोज का झगड़ा…

हाहहहहहह अंकित हँसने लगता है…..

दिशा :- हाँ सही बोल रही हूँ..यू गाइस अरे सच में बड़े ही डंबो होते हो…

अंकित :- रहने दे बहाने ना मार…तुझे कोई मिला ही नही होगा..

दिशा :- ओह्ह हेलो लड़कों की तो लाइन लगा सकती हूँ में..किसी भी लड़के को लट्टू बना सकती हूँ अपने

इशारों पे….लड़के तो हर वक़्त मुझपे मिटने के लिए तैयार रहते हैं..

अंकित अपने मन में) हाँ साली तुझे तो मिटाने के लिए कोई भी खड़ा हो जाएगा…साली इतनी मस्त

माल है तो तू वैसे भी किसी की लुल्ली भी लंड बन जाए….

अच्छा तू अकेली आई है यहाँ..मतलब डॅड और मोम के साथ रहती है..

दिशा :- नही यार..मोम डॅड तो अभी भी वहीं हैं मुंबई में…में तो आंटी के साथ रहती हूँ

अपनी…

अंकित :- मतलब उनकी फॅमिली के साथ..

दिशा :- ना ना..वो आंटी अकेली रहती है…उन्होने शादी नही की

अंकित :- ओह्ह..मतलब की आंटी की जवानी चली गयी और शादी नही की..

दिशा :- तू नही सुधरेगा…उनकी एज सिर्फ़ 31 है…और वो ****** में काम करती है…

अंकित तो सुन के खुश हो जात्ता है….

अंकित :- अच्छा…कहाँ रहती है तू अब.?

दिशा :- (आँखें मतकाते हुए) क्यूँ..घर आएगा मेरे….हैं..

अंकित :- हाँ हाँ आ जाउन्गा जब तू अकेली होगी (कॉलेज जाके धीरे से बोलता है)

दिशा :- (उसके कंधे पे ज़ोर का थप्पड़ मारते हुए) कमिने…सुधर जा तू..हहेहेहहे..

अंकित अपने हाथ से कंधे को सहलाते हुए…

अंकित :- अगर हम सुधर गये तो तेरा क्या होगा ….. (आँखें मटकाते हुए)

दिशा :- और मार खाएगा क्या…

अंकित :- हाहहाहा..नही यार..वैसे ही एक पड़ गया है….

दिशा :- ह्म्म…(वो कुछ बोलती इससे पहले उसका फोन बज पड़ा वो फोन उठा के देखती है..)

अंकित एक्सक्यूस मी….(और फिर थोड़ा साइड में चली जाती है)

अंकित उसको देखने लगता है..और अपने मन में..

हाए क्या गान्ड हो गयी है इसकी…साली जीन्स में अंदर पसीने छोड़ रही होगी..बोल रही होगी कोई बाहर

निकालो मुझे…..

अरे हाँ ये तो में बताना भूल ही गया इसके बारे में…अरे अपने अपने पकड़ के रखो

कहीं हिलते हिलाते इधर उधर नही खिसक जाए क्यूँ कि ये दिखती ही ऐसी है..एक दम सेक्सबॉम्ब है ये..

इन मेडम का नाम है दिशा शेनाए पता नही इसका लास्ट नेम आज तक नही समझ आया मुझे…

ये एक टिपिकल पंजाबन है..और आप सब समझ सकते हो कि पंजाबी कुड़ी कैसी होती है…

चेहरा ऐसा कि साला इसके आगे दूध भी काला नज़र आए…इतना गोरा और इतना सुंदर….छोटी छोटी

आँखें बेहद खूबसूरत और थोड़े मोटे लिप्स … बीच में छोटी सी नाक..जो उसकी सुंदरता को और

बढ़ाती है….चेहरे पे हमेशा ऐसा रहता है कि ये कितनी बड़ी सेडक्टिव गर्ल है..लेकिन सच में

किसी भी आक्ट्रेस को फैल कर्दे सिवाय कटरीना कॅफ के इतना सुंदर चेहरा है इसका..जब भी हँसती है नाक और

गाल दोनो लाल हो जाते हैं..उस वक़्त तो मानो कोई परी उतर के आ गयी हो ऐसी लगती है…

अब ज़रा इसके असेट्स के बारे में बता दूं..जिसकी वजह से जैसे कि मेने पहले भी कहा कि कोई भी लड़का

इस्पे मिट जाए….बिल्कुल ऐसा है इसका शरीर..

साली के 34 साइज़ की एक दम गोल गोल कड़क चुचियाँ जिन्हे हाथ से दबाते रह जाओ ज़िंदगी भर पर फिर

भी मन ना भरे…कमर तो साली है ही नही..बिल्कुल पतली सपाट पेट..और उसके नीचे उसकी 30

की गान्ड….साइज़ भले ही ना बड़ा हो पर शेप इतनी शानदार है कि बस एक बार हाथ रख दो तो

बस उसे सहलाने के अलावा और कुछ भी मन ना करे……..

मेरी और इसकी मुलाक़ात स्कूल की गोआ ट्रिप में हुई थी जब में 8थ में था जैसा बताया हम ने…

और मेने उस गोरी से पूछा था कि तेरा साइज़ कितना है उसपे वो भड़क गयी थी..वहाँ आके इसने

बचाया था….और बात को घुमा दिया था..तब से हमारी बात हुई उस ट्रिप पे…लेकिन वो बात

और आगे जब बढ़ी..जब वो बीच पे एक सेक्सी हॉट टू पीस ब्लू क्लो की बिकनी में आई…

बस वहाँ खड़ा इसकी कसमिनट जवानी उस वक़्त 10थ में थी..को देख कर बेहोश सा हो गया…

साली उस वक़्त भी 4 लंड को अंदर ले ले..ऐसा शरीर था….किसी भी लड़के की हिम्मत नही थी उसके पास जाने

की….लेकिन में तो में हूँ…चल पड़ा..और उससे फ्लर्ट करना शुरू हो गया..

ये काम मेने स्कूल टाइम से ही शुरू कर दिया था…..मेरी बातों से ये बहुत अट्रॅक्ट हुई और सीनियर

होने के नाते हमारी अच्छी बात हुई..बाकी सभी लड़कों की तो झान्टे जल गयी थी मुझे उसके साथ

देख के….और.

अंकित अंकित……..तभी अंकित अपनी ख्यालों की दुनिया से बाहर आया…

दिशा :- कहाँ खो जाता है तू?

अंकित :- बस किसी को कुछ बता रहा था..

दिशा :- हैं…की बोल रहा है तू…

अंकित :- नही नही कुछ नही..वो.

दिशा :- अच्छा..यार मुझे जाना है..बाकी की बातें बाद में करेंगे…और टेंशन मत ले..इस

बार कॉंटॅक्ट रखूँगी तुझसे….मेरा नंबर. नोट कर ले..

और फिर वो नंबर बोलती है अंकित फटाफट से नंबर फोन पे लेता है और उसे मिस कॉल मार देता

है..दोनो एक दूसरे का नंबर सेव कर लेते हैं….

दिशा :- अच्छा चल बाए… (और फिर आगे आके..एक हग करती है)

इस बार अंकित भी पूरे मज़े से हग लेता है और देता है..और अपने हाथों से दिशा की पीठ को सहलाने

लगता है…पतली सी टॉप की वजह से अंदर पहनी हुई ब्रा हाथ पे महसूस हो रही थी…

क्रमशः………………….