एक कीमत “ज़िंदगी” की-24

रितिका मन ही मन उसे थॅंक्स बोल रही थी Hindi Sex Stories Antarvasna Kamukta Sex Kahani Indian Sex Chudai
लेकिन तभी अंकित ने ध्यान दिया कि वो अपनी कमर
हिला रहा है तो उसने अचनाक कमर हिलानी बंद कर दी….और फिर उसने सर झुका लिया वो रितिका से

आँखें नही मिला पा रहा था….

रितिका समझ गयी……लेकिन पहले उसने खूब गहरी गहरी साँसें ली…जिसके लिए वो कब से बेकरार थी…

फिर उसने अपने हाथों को अंकित के चेहरे पे ले झटके उसे अपनी तरफ किया….अंकित ने अपनी आँखें

उस वक़्त भी नीचे कर रखी थी….

फिर रितिका ने अंकित के चेहरे को अपने चेहरे के करीब किया…और अपनी साँसें चेहरे पे छोड़ने लगी

फिर और करीब कर लिया अंकित के चेहरे को…इससे दोनो की नाक आपस में टकरा गयी…..

टकराने की वजह सी अंकित की नज़रे रितिका पे पड़ी….

रितिका के चेहरे पे एक मुस्कान आ गयी..और वो मुस्कान इतनी ज़्यादा खूबसूरत लग रही थी उस वक़्त उस

चेहरे पर कि अंकित भी बिना मुस्कुराए नही रह पाया….

रितिका ने अंकित के चेहरे को थोड़ा पीछे किया और फिर अपने होंटो से अंकित की नाक पे किस किया फिर

उसकी आँखों पे फिर उसके चीक्स पे…और फिर उसके होंठो पे एक प्यार भरी छोटी सी किस कर दी

और फिर दोनो एक दूसरे की आँखों में देखने लगे……

अंकित और रितिका दोनो की आँखों में एक नशा सेक्स का नशा था फिर अंकित ने अपने होंठ आगे बढ़ा

के रितिका के गले में चूमना शुरू कर दिया कभी होंठ तो कभी जीभ से रितिका के गाल

को चाटने लगा…रितिका अपने हल्के होंठ खोले अपनी गरम साँसें बाहर निकाल रही थी….और अंकित

के बालों में हाथ फिरा रही थी……

कुछ सेकेंड बाद अंकित गालो पे अपने होंठ फेरता हुआ नीचे आने लगा…और रितिका के चुचों के

बीच की दरार पे अपने होंठ फेरता हुआ नीचे आने लगा..और पेट की नाभि पे आके रुक

गया…और वहाँ सूट के उपर अपने होंटो से पकड़ कस लिया और नाभि को चूसने लगा…

रितिका का पूरा शरीर बुरी तरह से कांप गया इससे…..वो अपनी कमर उछालने लगी……

अहहह..नो…अंकित…..आ…ह….(हल्की हल्की सिसकी निकलने लगी रितिका के मूह से)

फिर अंकित खड़ा हुआ और उसने सूट को उपर करना चालू किया..रितिका ने अपना हाथ आगे बढ़ा के उसे

रोकने की कॉसिश करी….नो नो करके बोलने भी लगी..(लेकिन उसके बोलने में झलाक नही रहा था कि वो

सच में ना कर रही है) अंकित ने रितिका के उपर ध्यान ना देते हुए उसका सूट आधा उपर कर

दिया जिससे उसका वो सपाट सुंदर पेट अंकित के सामने आ गया…रितिका ने अपनी आँखें हल्की बंद

कर रखी थी…..

अंकित की आँखों में एक चमक आ गयी…ठीक नाभि के उपर एक छोटा सा तिल था..जिसे अंकित ने

पहली बार देखा था….फिर अंकित की नज़र थोड़ी नीचे गयी..तो ठीक पाजामे के उपर लाल निशान

और थोड़ा सा पेट पे गड्ढा सा पड़ा हुआ था….

अंकित सोचने लगा कि ये शायद उसके हिलने की वजह से हो गया होगा…अंकित को अपने उपर गुस्सा

आया….

फिर उसने अपनी उंगलियो आगे बढ़ा के वहाँ निशान पे फिराने लगा…और उपर ले जाके नाभि के

चारों तरफ फिराने लगा….रितिका का तो जलता बदन और सुलगता जा रहा था…उसकी कमर हवा

में उछलने लगी….जब अंकित की ठंडी उंगलिया उसके गरम बदन पर हिचकोले खा रही थी..

फिर अंकित ने अपने होंठ रख दिए..और बड़े प्यार से उस सुंदर पेट पे फिराने लगा…और हर

तरफ अपने चुंबन की छाप छोड़ने लगा….फिर नाभि की तरफ अपनी जीभ निकाल के उसमे घुसा

दी और वहाँ अपनी जीभ को गोल गोल घुमाने लगा…..

आ..ह.ह..ह.ह अंक….ई.ई….त.त..त……रितिका ने सिसकी लेते हुए उसके सर को पकड़ लिया……उसे बड़ी गुलगुली हो रही

थी पर साथ साथ में काफ़ी मज़ा भी आ रहा था……अंकित उसके तिल को अपने होंटो के बीच में

दबा के सक करने लगा….रितिका का तो रोम रोम हिल चुका था…उसकी कंट्रोल करने की शक्ति

ख़तम हो रही थी..

एक तरफ अंकित के होंठ उसके गरम पेट को ठंडा करने की कॉसिश कर रहे थे…दूसरी तरफ अंकित ये सब

करते हुए अपने हाथ रितिका के दोनो थाइस्स पे फिरा रहा था…..

और जब वो हाथ उसकी चूत के करीब जाते तो..रितिका की चूत की फांके खुल के अंदर से बारिश की बूंदे

बाहर टपका देती और उसकी पेंटी को गीला कर देती….अब तो हाल इतनी बुरा हो गया था कि पेंटी के

साथ चूत वाले एरिया के उपर पाजामा भी गीला होने लगा था….

अच्छी तरह से चाटने के बाद अंकित ने अपने होंठ हटा लिए…..लेकिन उसके हाथ नही रुके …

और वो रितिका के चेहरे की तरफ देखने लगा…जो एक दम किसी देसी पहाडन की तारह लाल सुर्ख हो चुका था

और ऐसा लग रहा था मानो कोई ज़िंदा डॉल उसके सामने लेटी हो……

देखते देखते अंकित ने अपने हाथ अपनी जीन्स की तरफ किए और वहाँ से अपनी बेल्ट खोल के जीन्स

में से निकाल दी…..और जीन्स का बटन खोल के जीन्स को खिसका कर नीचे कर दिया…ज़्यादा नही पर उतनी

कि अब उसका अंडरवेर और उसके अंदर बैठा उसका शैतान लंड जो अंदर से इस खूबसूरत बाला को

सलामी ठोक रहा था जो उसे दिखाई दे रही थी…और एक दम से अंकित रितिका के उपर लेट गया….

रितिका की आँखे अचनाक पूरी खुल गयी और अंकित की नज़रे जो उसके बिल्कुल करीब थी उसको देखने लगी..

वो इसलिए हुआ..कि रितिका के पेट पे अंकित का लंड पड़ा था सिर्फ़ अंडरवेर था जो दोनो के मिलन में

अड़ा हुआ था…लेकिन रितिका उसे सॉफ बिल्कुल सॉफ महसूस कर रही थी….उसकी शक्ति को उसके वेट को अपने

उपर महसूस कर रही थी…

अंकित ने एक मुस्कान दी और रितिका के होंठो को गिरफ़्त में लेके उन्हे चूसने लगा…

रितका भी डबल मज़ा लेते हुए होंटो में गुम हो गयी..और बेइन्तिहा दोनो एक दूसरे के होंटो

को और जीभ को चाटने लगे………

बीच बीच रितिका थोड़ी ज़्यादा वोलेंट हो जाती क्यूँ कि अंकित का लंड अंडरवेर में से हिचकोले ख़ाता

जिससे रितिका के पेट पे ऐसा लगता मानो कोई नरम चीज़ पर हठोड़ा पड़ रहा हो….

रितिका को वोलेंट देख अंकित भी पागल हो गया..और पहली बार अपने हाथ नीचे ले जाके रितिका के

सूट के उपर से उसके लेफ्ट चुचे पे हाथ रख दिया…

क्या एहसास था ये अंकित के लिए कपड़ों के उपर से ही वो ऐसे नरम सख़्त शेप चुची लग

रही थी कि बस अभी उन्हे बाहर निकाल के उनका सारा दूध अंदर का पिए जाए और उसे खाली कर

दे…..रितका के निपल भी और सख़्त हो गये अंकित का स्पर्श पा कर..

अंकित को भी वो निपल्स अपनी हथेली पे सॉफ सॉफ महसूस होने लगी……फिर अंकित ने अपनी हथेली को

ज़रा सा बंद किया तो वो चुची भी हल्के से दब गयी…..वाहह कितना मज़ा आया

अंकित को ऐसे दबाने में…वो उसका लंड दिखा रहा था क्यूँ कि वो हिचकोले ख़ाता हुआ

फिर से रितिका के पेट पे लग जाता….

दो तरफ इस गंभीर हमले से रितिका और भी ज़्यादा पागल हो गयी….उसने अपना एक हाथ तो अंकित की गर्दन

में जैसे साँप लिपटा होता है वैसे लिपटा रखा था..और दूसरा हाथ ले जाके सीध अंकित की गान्ड के

उपर रख दिया अंडरवेर के उपर से….और वहाँ उसे सहलाने लगी….

दोनो एक दूसरे को आग दे रहे थे…लेकिन कोई किसी को ठंडा नही कर पा रहा था..महॉल और भी

ज़्यादा गरम होता जा रहा था किसी भट्टी से भी ज़्यादा…दोनो एक दूसरे की आग को और भड़काने

में मशगूल थे….ठंडा पानी कौन गिराएगा इस आग में अभी वो तय नही कर पाया दोनो में से

कोई……

अंकित ने रितिका के चुचों को हथेली से कस के अंदर की तरफ दबा दिया…और उन्हे ज़ोर ज़ोर से दबाने

लगा मानो कोई हॉर्न बजा रहा हो……..वो जितना दबाता उतना रितिका उसके होंठो को अपने जीभ से चाटती

अंकित ने चुचो के निपल्स को कपड़े के बाहर से ही पकड़ लिया और उन्हे अपनी उंगलियो से ट्विस्ट

करने लगा…कभी आधा लेफ्ट की तरफ घूमता कभी राइट की तरफ…मानो कोई निपल नही हो पानी का नल

हो…..

रितिका के लिए ये सब एक नया और बेहद कामुक और शरीर को तरसा देना वाला पल था जो उसने आज तक

ना ही झेला था…वो तो इस वक़्त सागर की गहराइयों में डूब चुकी थी और वहाँ के वातावरण का

मज़ा ले रही थी…..इसलिए वो भी पीछे रहने वाली नही थी…

अंकित की गान्ड पे जो उसका हाथ था वहाँ वो अंकित की गान्ड को दबाने लगी वो भी बिल्कुल वैसा

कर रही थी जैसा अंकित उसके चुचों को दबा रहा था….

दोनो ही कम नही थे……जैसा कि कहा मेने..दोनो एक दूसरे के अंदर आग लगा रहे थे लेकिन

ठंडा नही कर रहे थे……..

अंकित भी कहाँ पीछे रहने वाला था उसने इस लड़ाई को और बढ़ा दिया और शुरू हो गया…….

रितिका के इस वार से अंकित और भी ज़्यादा उतेज़ित हो गया और उसने फिर से दुबारा अपनी कमर हिलानी शुरू

कर दी………और अपने पूरे लंड को सिर्फ़ रितिका के पेट के उपर ही घिसने लगा…

रितिका की आँखें पूरी खुल गयी….उंगघह उःम्म्म्ममम की आवाज़ें अंकित के मूह के अंदर

जाने लगी….

अब अंडरवेर के अंदर लंड रितिका के नंगे पेट के उपर घिसा जा रहा था और दूसरी तरफ से एक

हाथ उसके चुचों को मसले जा रहा था…(आँखें फटना लाज़मी है)

अंकित अपनी कमर तेज़ी से हिला रहा था..रितिका की तो बॅंड ही बज रही थी…

अंकित के कमर हिलने की वजह से रितिका का जो हाथ अंकित के गान्ड पे चल रहा था वो उपर नीचे

हो रहा था..और तभी रितिका की नखुनो की वजह से अंकित की कच्छि थोड़ी उपर उठी और अंकित के

आगे की तरफ धक्का लगाने की वजह से रितिका का हाथ कच्चे के अंदर चला गया और अंकित की नंगी

और ठंडी गान्ड के उपर आ गया..

उंगघह उःम्म्म्मममममममम इस बार सिसकी लेने की बारी अंकित की थी….क्यूँ कि रितिका का गरम

हाथ उस ठंडी गान्ड पे ऐसा पड़ा था मानो किसी गरम तवे पे पंनी छिड़क दिया जाए तो

कैसी भाँप निकलती है….सेम अंकित का भी यही हाल था…

अंकित ने आख़िर किस तोड़ डाली (आज दोनो ने किस का तो रेकॉर्ड बना लिया था) दोनो के चेहरे पे

एक दूसरे का रस भरमार लगा हुआ था…दोनो एक दूसरी की आँखों में देखने लगी….

अंकित की कच्छि थोड़ी सी खिसक गयी नीचे की तरफ रितिका के हाथ अंदर जाने से…जिसकी वजह से

अंकित के लंड का लाल रंग का सुपाडा उसकी कच्छि से बाहर आ गया और रितिका के पेट को छू गया…

एयेए…..ह.ह..ह.ह.ह…..ह.ह.ह.ह..ह….म…..एम्म.म…..रितिका के मूह से ये सिसकी निकली तो ह…ओ..उ..उ.उ…..

अंकित के मूह से भी ये सिसकी निकल गयी…

दोनो जानते थे कि क्या हुआ है….लेकिन अगले ही पल रितिका का हाथ बाहर निकल गया और कच्छि अपनी

जगह पर सेट हो गयी….और सुपाडा भी अंदर चला गया…..

रितिका का हाथ अंकित की कमर में था…..

रितिका और अंकित दोनो को एक पल के लिए बुरा लगा लेकिन जो एहसास उन्हे कुछ सेकेंड पहले मिला था

उसकी खुशी ने सारा गम भुला दिया……

अंकित ने अपनी कमर हिलानी तेज़ी कर दी…और दूसरा हाथ ले जाके रितिका के चुचे पे रख दिया

और उसे भी कस कस के दबाने लगा..

आहहह ह्ह्म.म……..सस्स्सिईईई…ओह्ह्ह.ह.ह…..रितिका के मूह से ये आवाज़ें निकल रही थी..उसके दोनो

हाथ अंकित की टीशर्ट के अंदर से उसकी कमर पे…वो बुरी तरह से हिल रही थी…

दूर से देखने पर यही लगेगा कि दोनो सेक्स कर रहे हैं..लेकींन ऐसा था ही नही….

अंकित ज़ोर ज़ोर से कमर हिलाता हुआ………

अंकित :- आ…रीत…ई…का…….

और अपना मूह आगे बढ़ाने लगा..रितिका भी गरम साँसें छोड़ रही थी…अंकित की इस स्पीड को देख

कर वो समझ चुकी थी की अंकित अब जाने वाला है..और वो खुद भी जानती थी..कि उसका भी जो रस इतने

सालों से इकट्ठा कर रखा था अब उसके निकलने का समय था..दोनो के होंठ आपस में जुड़ने

ही वाले थे कि तभी….

तभी डोर पे एक के बाद एक बेल बजने लगी………..