एक कीमत “ज़िंदगी” की-23

रितिका सोच रही थी और Hindi Sex Stories Antarvasna Kamukta Sex Kahani Indian Sex Chudai
अंकित की तरफ देख रही थी की आख़िर ऐसा क्या देख रहा है अंकित….वो इतना सोच ही
रही थी..कि अंकित ने अपने होंठ आगे बढ़ाए और रितिका के पैरों की उंगलियों को अपने मूह में

लेके उन्हे सक करने लगा……

आहह…हल्की सी सिसकी निकल गयी रितिका के मूह से और उसकी आँखें बंद हो गयी…उसे बिल्कुल उम्मीद नही

थी कि अंकित ऐसा भी कुछ कर सकता है…..

फिर अंकित ने उंगली को मूह हे बाहर निकाला…और दूसरी उंगली मूह में लेके सक करने लगा…ऐसे करते

करते वो एक के बाद एक उंगली मूह में लेके सक करने लगा..

आह…..न…न.न..नू…..आन्कि..त..त…..(रितिका नो तो कर रही थी लेकिन उसकी नो में वो शक्ति नही थी जो होनी चाहिए

थी…उसकी तो साँसें तेज चलने लगी….जिसकी वजह से उसके वो बेहद अट्रॅक्टिव बूब्स उपर नीचे हो

रहे थे तेज़ी से)

अंकित ने उंगलियो को अच्छी तरह चूमने के बाद …. वो धीरे धीरे अपने होंठो की छाप छोड़ते

हुए उपर बढ़ने लगा…

रितिका ने जो पाजामा पहना था वो छुरिदार था इसलिए अंकित उससे ज़्यादा उपर नही कर पाया..थोड़ा सा

ही कर पाया पर जितने भी कर पाया उसमे रितिका के हॉट लेग्स की कुछ झलक तो मिल ही गयी और

इस बार उसने अपने होंठ के साथ साथ अपनी जीभ भी बाहर निकाल के वहाँ फिरा दी…एक दम चिकनी

लेग्स थी रितिका की..

जीभ टच होते ही रितिका को गुदगुदी होने लगी … लेकिन उसे मज़ा भी बहुत आ रहा था…

उसके हाथ आगे बढ़ते हुए अंकित के सर पे चले गये……

अंकित को ये तो पता चल गया था कि रितिका एंजाय कर रही है….इसलिए अंकित को और मस्ती की सूझी उसने

रितिका के लेग्स पे अपने दाँत गढ़ा दिए और हल्का हल्का बाइट करने लगा….

आअहह….इस बार थोड़ी तेज दर्द भरी मस्त सिसकी निकल गयी रितिका के मूह से…उसने

अपनी आँखें खोली….और अपनी हाथ की ताक़त लगा कर अंकित के सर को पकड़ा और अपने उपर खिच

लिया..और दोनो पीछे की तरफ सिफ़े पे गिर गये….

अंकित को एक पल के लिए समझ नही आया कि इतनी ताक़त कहाँ से आ गयी रितिका के पास….फिर उसने सोचा जाने

दो क्या करना है…इस पल का मज़ा लो….और वाकई में ये सीन दोनो की जान निकाल देना वाला

था…

नीचे से शुरू करे तो..जीन्स में अपना पूरा अवतार ले चुका अंकित का लंड जीन्स के आगे से

उभार बना चुका था…..और ये उभार सॉफ सॉफ रितिका महसूस कर पा रही थी….क्यूँ कि अंकित का लंड

आधा तो रितिका की चूत के उपरी हिस्से पे था और आधा लंड रितिका के पेट पे था..इसलिए रितिका को सॉफ

महसूस हो रहा था उसका भारीपन…..इसलिए रितिका बिल्कुल मदमस्त हो गयी और उसकी आँखें बंद

थी….

उधर रितिका के वो हेवी सॉफ्ट शेप्ड बूब्स अंकित की चेस्ट में जा धन्से थे…अंकित रितिका के

उपर था जिसकी वजह से उसकी चेस्ट में रितिका के वो थोड़े मोटे और थोड़े लंबे बूब्स के निपल

चुभ रहे थे..जो एक अलग ही मज़ा दे रहे थे….

अंकित को ऐसा लग रहा था मानो किसी स्पंच पे उसको लिटा दिया हो इतने सॉफ्ट और मुलायम था रितिका

का जिस्म…इसलिए उसकी आँखें भी बंद हो चुकी थी….

दोनो के चेहरे बिल्कुल आमने सामने थी…रितिका से निकल रही उसकी गरम साँसें अंकित के चेहरे पे पड़

रही थी और अंकित से निकल रही गरम साँसें…रितिका के चेहरे पे पड़ रही थी उससे और ज़्यादा गरम कर रही

थी..

महॉल एक दम गरम हो गया……गर्मी का सीज़न वैसा ही था उपर से दोनो की तपिश…

रितिका के शरीर से सहन नही हुई…और उसके माथे से पसीना बहता हुआ गले से होते हुए

ठीक चुचों की दरार के उपर आके रुक गया…..

अंकित ने अपनी आँखें खोली तो उसको नज़र आया … उसने अपनी गर्दन थोड़ी नीचे कर के…रितिका

के चुचों के ठीक थोड़ा उपर जहाँ वो बूँद आके रुकी थी..वहाँ अपनी जीभ निकाली..और वहाँ से

चाट्ता हुआ उपर की तरफ आने लगा..और रितिका के गले को गीला करते हुए उसके गालों तक पहुच

गया और माथे तक चाट डाला…

रितिका के शरीर में झुरजूरी सी फैल गई उसके हाथ अंकित की पीठ पे कस गये…होंठ तो खुल गये

लेकिन उसमे से कुछ नही निकल पाया…..

फिर रितिका ने आँखें खोली और एक जंगली बिल्ली की तारह अंकित के बाल पकड़ के खिचे जिससे अंकित थोड़ा पीछे

की तरफ और और फिर पीछे हाथ का ज़ोर डाल के अंकित के होंठ अपने होंठ पे रख दिए और फिर शुरू हुआ

एक घमासान युद्ध….

रितिका तो जैसे आज अंकित को खा जाना चाहती थी बिल्कुल वैसी ही टूटती पड़ी हुई थी….अपने होंठो

को अंकित के होंठो पे रख के पूरी ताक़त से उन्हे चूस रही थी..अंकित तो कुछ नही कर रहा था

बस रितिका के होंठो का मज़ा ले रहा था..बीच बीच में रितिका होंठो के साथ साथ अपनी जीभ बाहर

निकलती और अंकित के होंठ गीले कर देती…और फिर अपने होंठो से चूस्ते हुए उन्हे सुखा कर

देती..फिर जीभ निकालती और होंठो को गीला कर के इस बार अपनी जीभ को अंकित के मूह के अंदर घुसा

दिया और अंकित के मूह के अंदर घुमाने लगी…

अब अंकित से भी नही रहा गया…इसलिए उसने अपनी जीभ हिलानी शुरू कर दी और दोनो की जीभ आपस

में लड़ने लगी…कभी अंकित की जीभ उपर होती तो कभी रितिका अपनी जीभ का दबाब बना के

उसे नीचे कर देती…..कुछ सेकेंड तक दोनो जीब ऐसी ही लड़ती रही…लेकिन इन दोनो का प्यार ख़तम नही

हो रहा था बढ़ता ही जा रहा था……

फिर दोनो ने अपनी अपनी जीभ बाहर निकाली और इस बार मूह के बाहर से जीभ से लड़ाई करने लगे…

जीभ बार बार फिसल जाती और दोनो के मूह पे लग जाती..इसे दोनो के होंठ और उसके आस पास की जगह दोनो

के थूक से भीग गयी थी……फिर अंकित ने अपनी जीभ हटा ली….

और अपने होंठो से रितिका की जीभ को पकड़ लिया और उसे चूसने लगा…और जैसे आइस क्रीम का

कोन खाते हैं..उसी तरह अंकित रितिका की जीभ को अंदर निगलते हुए उसके होंठो पे आ गया

और और होंठो को चूसने लगा….उफफफफफफफ्फ़ क्या सीन था इन दोनो की किस्सिंग का….कोई भी देख ले

तो उसका तो वहीं बॅंड बाज जाए……

अंकित तो इतना पागल हो गया था किस करने में….कि उसने रितिका के कंधो को ज़ोर से पकड़ा हुआ

था…..और साथ साथ तो उसने अपनी कमर धीरे धीरे हिलानी भी शुरू कर दी थी….और उसकी गान्ड उपर

जाती फिर नीचे आती…अंकित जीन्स के उपर से ही अपने लंड को रितिका के उपर से उसकी चूत और पेट पे

रगड़ रहा था…

रितिका की तो आँखें पूरी खुल गयी…वो तो जैसी मानो अंदर से बुरी तरह से जल रही हो…उसकी तो

साँसें अटक रही थी….उसके मूह से……उंगग्घह उंह की आवाज़ें आ रही थी बॅस

बाकी तो अंकित अपने मूह के अंदर ही सोख रहा था….रितिका के हाथ अंकित की कमर पे बुरी

तारह से कसे हुए थे….

अंकित के ऐसे हिलने की वजह से रितिका की चुचियाँ अंकित की चेस्ट मे धँस चुकी थी और उसकी

वजह से वो अंकित की चेस्ट के साथ साथ उपर नीचे हो रही थी….

ओफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफ्फ़……..ऐसा नज़ारा देख के तो किसी का भी निकल जाए….इतना गरम दृश्य..हालत ही बुरी कर दी……

रितिका का तो बुरा हाल था….उससे अपनी पेंटी गीली होती हुई सॉफ महसूस हो रही थी..वो भी इतनी कि अगर

उससे निचोड़ दिया जाए तो आधा ग्लास पानी भर जाए….

अंकित ने ऐसे ही किस करते हुए अपनी कमर हिलानी नही बंद करी…..उसे तो पता भी नही था वो

क्या कर रहा है…वो तो अपने किस में ही मशगूल था…

वो तो रितिका थी जो इतनी तरफ से हमले झेल रही थी..एक किस..एक उसकी चुचे बुरी तरह धन्से होना

और हिलना..और दूसरी तरफ एक जवान तगड़ा लंड उसकी चूत के और पेट के उपर रगड़ खा रहा था…

(सच में एक औरत ही इतना झेल सकती है…मर्द तो कब का हार मान चुका होता)

किस तो जैसे मानो तोड़ने का मन ही ना हो अंकित का…..रितिका की हालत बुरी हो रही थी (किस करने

की वजह से नही) बल्कि अंकित के घिसाव से उसे सांस लेने में दिक्कत हो रही थी…

लेकिन अंकित तो मानो अपने होंठो से और अपनी जीभ से रितिका की जीभ और होंठो पे ऐसे टूटा पड़ा

हुआ था मानो ये आखरी बार है और उसके बाद वो रितिका को ऐसी किस कर ही नही पाएगा…

रितिका से अब सांस लेना मुश्किल हो रहा था….वो खुल के सांस लेना चाहती थी लेकिन अंकित की वजह से वो

ऐसा नही कर पा रही थी….उधर अंकित तो अपनी कमर हिलाए जा रहा था दोनो ने कपड़े पहन

रखे थे लेकिन जो गर्मी पैदा हो रही थी दोनो के ऐसे मिलन से उससे दोनो के बदन के अंदर

अलग ही आग लगी हुई थी…जिसका असर रितिका की उस तपती चूत पे हो रहा था जहाँ गर्मी की वजह से

उसने अपना पसीना निकालना शुरू कर दिया था…उधर अंकित का लंड इस गर्मी की वजह से अपने लंड की

नसें फुला बैठा था मानो गरम तवे पे रोटी सिक रही हो…..

.

रितिका को कुछ सूझ नही रहा था एक तरफ तो उससे इतना मज़ा आ रहा था मानो ये वक़्त चलता रहे

और ख़तम ही ना हो…और दूसरी तरफ उसकी साँसें भारी हो रही थी….और वो ढंग से सांस भी नही ले

पा रही थी..क्यूँ कि अंकित की चेस्ट से रितिका के बूब्स बुरी तरह से दबे हुए थे….

आख़िर रितिका को कुछ ना सूझा तो उसने अपने बड़े बड़े नखुनो वाला आइडिया निकाला…और उन्हे

अंकित की पीठ में गढ़ा दिया…..लेकिन ऐसे गढ़ाया जैसी उसे मज़ा आ रहा हो….

पर………………………………………….

पर रितिका का ये वॉर बिल्कुल उल्टा पड़ गया….अंकित को जब रितिका के नखुनो का आभास हुआ तो वो

और जोश में आ गया….और पागल सा हो गया…बुरी तरह सी रितिका के फेस पे टूट पड़ा…

हाए ऐसी जबरदस्त किस्सिंग तो शायद ही कहीं पॉर्न में भी देखी होगी….चेहरे पे हर जगह

दोनो की थूक के निशान बन रहे थे…..और तो और…ऐसे नाख़ून गढ़ने की वजह सी अंकित के धक्के

और भी ज़्यादा तेज हो गये…और भी ज़्यादा तेज हो गये थे….

सॉफा भी हिलने लगा अब तो…..रितिका की एक टाँग ज़मीन पे पड़ी थी..और एक लेग सोफे के उपरी

हिस्से पर…मतलब ये पोज़िशन बनी हुई थी..और अंकित उपर से धक्के लगा रहा था….वो भी

अब तेज़ी सी…..जीन्स के अंदर से अंकित का अब विकराल रूप ले रखा लंड और रितिका की उस पाजामी के

अंदर छुपके से बैठी वो रॉंडो चूत….आपस में घिसे जा रहे थे…एक अजीब सा सेक्स था

.. कपड़ों के साथ..लेकिन दोगुना मज़े दे रहा था……….

रितिका सोचने लगी कि ये तो और ज़्यादा भड़क गया..इसलिए उसने नाख़ून गढ़ाने बंद कर दिए उसकी

हालत और खराब हो गयी….लेकिन शायद अंकित अब भड़क चुका था….इसलिए उसका एक हाथ रितिका के

चुचों की तरफ बढ़ता हुआ नीचे आने लगा….

अब रितिका के चुचे तो दबे हुए थे अंकित की चेस्ट में..लेकिन दबने की वजह से साइड से वो

बाहर निकल रहे थे…

अंकित का हाथ सीधे वहाँ पहुच गया साइड से निकल रहे ज़रा से फूले हुए चुचों पर और

वहाँ जाके जैसे किसी गुबारे को दबाते हैं बिल्कुल वैसे दबाने लगा…

उफफफफफफफफफ्फ़…रितिका की तो हालत इतनी खराब हो गयी…कि अब सारी सहेन शीलता टूट चुकी थी…जहाँ उसकी

चूत थोड़ी देर पहले पसीना बहा रही थी…अब वो धीरे धीरे पानी की धार छोड़ने लगी थी

जैसे नल खोलने पर पानी निकलता है सेम वैसे ही….लेकिन अभी तक वो झड़ी नही थी..ये तो सिर्फ़

उसकी गर्मी थी जो इतने सालो से शरीर में दबी हुई थी….

रितका का अब सांस लेना लगभग नामुमकिन सा लग रहा था….वो अंकित को ऐसे धक्का देके उसे

निराश भी नही करना चाहती थी….वो सोच ही रही थी कि क्या करे..तभी उसको एक और आइडिया आया..कि

वो अंकित के होंठो को काट ले…शायद इससे वो हट जाए…लेकिन फिर दूसरे ही पल उसने सोचा नही..वो

ऐसे अपने मतलब के लिए दर्द नही देना चाहती….

(वाहह री दुनिया…ये प्यार है कि क्या….खुद को सांस नही आ रही पर दर्द नही देंगी ये)

लेकिन अचनक अंकित ने अपनी जीभ और होंठ चलाने बंद कर दिए और एक दम से उसने अपने होंठ

रितिका के मूह से अलग कर लिए……और रितिका को देखने लगा…

हाए रितिका का चेहरा बिल्कुल ऐसा लग रहा था जैसे कोई नवजात शिशु…बुल्कुल लाल हो रखा चेहरा..

नाक उससे भी ज़्यादा लाल टोमॅटो जैसी…आँखें आधी खुली हुई.. और होंठ खुले हुए आधे जिसमे से

तेज गहरी साँसें निकल रही थी….