एक कीमत “ज़िंदगी” की-21

सब कहते हैं लड़कियों को समझना मुश्किल Hindi Sex Stories Antarvasna Kamukta Sex Kahani Indian Sex Chudai
होता है पर तुम जैसे लड़के को में आज तक नही समझ पाई…प्यार करूँ या नफ़रत कुछ समझ नही आता…जो तुमने उस दिन किया वो ग़लत था या सही नही पता पर हाँ इतना जान गयी हूँ..कि तुमने जो किया उस दिन सिर्फ़ मेरी भलाई के लिए किया..अगर तुम ऐसा ना

करते तो आज शायद में मेंटल कन्डीशन की उस स्टेज पे पहुच गयी होती जहाँ से बाहर निकलना

नामुमकिन था…लेकिन तुम्हारी कही हुई उन प्यारी बातों से जैसे दिल में अलग नशा सा पैदा कर दिया

हो…जानती हूँ एक पत्नी और एक बेटे की माँ होने के नाते ये सब जो बोल रही हूँ ग़लत है…पर तुमने

सच कहा था एक औरत का जीवन उसका परिवार नही होता…उसका खुद का भी होता है…उसे जीने

का भी पूरा हक है…और बात जब तुम्हारे साथ बिताए उस 15 मिनट की आती है जो तुमने मेरे साथ

किया जानती हूँ कि वो तुमने वो सब वासना में आके नही बल्कि प्यार के नाते किया..उस दिन तुमसे ये

कह ना पाई..लेकिन आज कह रही हूँ..उस दिन तुम्हारा प्यार झलक रहा था..जो शायद हर औरत चाहती

है…हाँ पर तरीका बहुत ग़लत था..शायद हम दोनो का….

लेकिन तुम्हारी कही हुई बातों ने दिल को छू लिया और मेने तभी फ़ैसला कर लिया था कि अब में तुम्हारे

लिए सिर्फ़ पहले जैसे बनूँगी…

तुम्हे मेरी बातें बकवास लग रही होंगी..या फिर सोच रहे होगे कि सफाई दे रही हूँ में…पर मेरा

यकीन मानो ऐसा कुछ नही है….

और लिखने के लिए मेरे पास कुछ नही है..बस तुमसे एक रिक्वेस्ट है..कल शाम 4 बजे मेरे घर

में तुम्हारा इंतजार करूँगी..अगर तुम आए तो में समझूंगी कि हम से जो ग़लती हुई वो सिर्फ़ मेरी ही

वजह से हुई थी….

क्यूँ कि जितनी ग़लती तुम्हारी थी उससे कहीं ज़्यादा मेरी…मेरा तरीका बहुत ग़लत था…

लेकिन में दिल से चाहती हूँ कि तुम एक बार आओ…तुमसे मिलने के लिए में बहुत बेचैन हूँ…

रितिका…

अंकित ने आख़िरकार पूरा लेटर पढ़ लिया..उसका दिल ज़ोरों से धड़क रहा था..वो अपना सर पकड़ के

बैठ गया…उसे खुद कुछ समझ नही आ रहा था कि जो हो रहा है वो सही है या ग़लत और जो हुआ

वो सही था या ग़लत….अब जब वो रितिका का चॅप्टर अपने लाइफ से बंद कर चुका था तो अचानक ये

सब क्या हुआ…..

अंकित :- ओह्ह शिट..शिट..शिट….ये कहाँ से आ गई..कई बार हम जो चाहते हैं वैसा क्यूँ नही होता..जब

में चाहता था कि रितिका मुझे मिल जाए तब गड़बड़ हो गई..और जब में नही चाहता था कि कभी भी

रितिका सामने आए तो आज …..ये साली लड़कियाँ इतनी ब्लॅक मैल क्यूँ करती है….

यार ये क्या हो गया अब क्या करूँ….(और फिर पलंग पे आँखें बंद कर के पसर जाता है)

अच्छा भला दिन टेन्षन से भर गया था अंकित का..कहाँ तो उसने सोचा था कि आज मज़े से बाहर

जाएगा…लेकिन इस लेटर ने उसका तो क्ल्प्ड कर दिया…ऐसा उसे अभी लग रहा है…

कल का दिन आख़िर आ ही गया….अंकित ने रात भर बहुत सोचा …

वो जानता है कि उसने रितिका का चॅप्टर क्लोज़ कर दिया था लेकिन वो रितिका से कभी नफ़रत नही करता

था और ना ही कभी कर पाएगा इसलिए उसने जाने का फ़ैसला कल रात को ही कर लिया था..

वो घर से 3:30 ही बाजी तैयार होके निकल गया था….

उधर रितिका ने पूरी तैयारी कर रखी थी….सॉफ सफाई घर की खुद ही की..आर्नव भी आज घर पे नही

था…सब काम किचन के उसने खुद ही किए शायद काम वाली की भी छुट्टी कर रखी थी उसने…

जब उसने घड़ी में देखा कि 3:30 बाज गये तो वो सीधा रूम में घुस गयी तैयार होने के लिए..

4:00 (क्लॉक में टाइम हुए और तभी)

तिंज्गग तोंगगगगगगगगग…..घर में ये आवाज़ गूँजी…रितिका ने रूम का डोर खोला..

आईईई…रितिका बोलते हुए दरवाजे पे जाती है..उसकी दिल की धड़कन तेज हो रही थी…इतने दिनो के बाद

अंकित से मिल रही थी उसके दिल में हलचल हो रही थी..उसने गेट का डोर लॉक पकड़ा और उसे खोल के

गेट को खींचा और मुस्कुराते हुए सामने देखा तो….

गुडआफ्टरनून मॅम..में इस कंपनी से आया था क्या आप ये प्रॉडक्ट लेना चाहेंगी…

सामने एक सेल्स मॅन खड़ा था….रितिका के चेहरे की मुस्कान चली गयी….वो रूड्ली बोली..

नही चाहिए…और उसने गेट को बंद कर दिया बिना उस लड़के की सुने….

एक बार उसे बहुत गुस्सा आया सारे मूड का सत्यानाश हो गया उसका…..

तिंज्ग तोंज्गग…..फिर से एक बार बेल बाजी…..रितिका के दिल की धड़कन एक बार फिर तेज हो गयी….

वो मूडी और गेट का डोर लॉक पकड़ के गेट को खोला…

मॅम एक बार तो प्रॉडक्ट देख लीजिए…..सामने वही सेल्स मॅन खड़ा था…

रितिका एक पढ़ी लिखी वेल मॅनेज्ड आइजुकेड़िट लड़की है..गुस्सा तो शायद ही कभी आता है लेकिन..

इस वक़्त आ गया उसे….

रितिका :- आइ सेड ना आइ डोंट वॉंट .. डोंट यू अंडरस्टॅंड…(चिल्लाते हुई गेट को धडाम से बंद

कर देती है ) इन सब को भी इसी वक़्त आना है…नॉनसेन्स..स्टुपिड..(गुस्से में)

तिंगगगग तोंगगगगगगगगगग….एक बार फिर से बेल बजी….

रितिका का गुस्से का ठिकाना नही रहा वो अपने आप से बोलती हुई…नाउ आइ आम गूना स्लॅप हिम…

गुस्से में बोलती हुई गेट खोलती है..

रितिका :- क्या है..तुम्हे…शरम नही आती बार बार परेशान करते हुए….आइ गॉना कोंपलिन फॉर यू

(वो बिना देखी बोल देती है)

लेकिन जैसे ही शांत होती है और सामने देखती है…तो उसका मूह खुला का खुला रह जाता है..

सामने बेचारा अंकित हाथ में बुके लिए अपने फेस को बचाने के लिए उपर किया हुआ था

जब रितिका का बोलना बंद हुआ तो उसने सामने देखा….और एक डरी हुई हल्की सी स्माइल दी…

रितिका उसको आँखें फाडे तके जा रही थी……

बेचारा अंकित उसको लगा शायद उसने कुछ ग़लती कर दी तो वो घबराते हुए बोला.

अंकित :- स.सस्स..सॉरी…

रितिका होश में आते हुए..

रितिका :- नो नो..आइ आम सॉरी…वो मुझे लगा कि वही सेल्स मॅन है बार बार परेशान कर रहा था..

इसलिए मेने वो सब..

इधर रितिका बोल रही थी…उधर अंकित की आँखें रितिका पर जम गयी बिल्कुल पहले की तरह…लेकिन इस बार

रितिका और खूबसूरत लग रही थी….चेहरे पे एक अलग ग्लो एक अलग ही क्यूट्नेस..चरम्म ब्यूटिफ्युल्नेस..

झलक रहा था … गुस्से की वजह से रितिका की नाक लाल हो गयी थी जो उसकी सुंदरता को और बढ़ा रही थी..

आज एक अलग ही ड्रेस में रितिका को अंकित देख रहा था..सुंदर गोरा चेहरा उसके ना के बराबर का

मेकप और लाल नाक…कातिलाना चेहरा लग रहा था बिल्कुल….

एक पंजाबी सूट रेड कलर का…उसकी चुन्नी साइड से लाते हुई कमर पे बँधी हुई…

उफ़फ्फ़..कोई इतना सुंदर कैसे लग सकता है…अंकित अपने मन में बोला…

अंकित….क्या हुआ..? रितिका अपने हाथ को अंकित के चेहरे के सामने हिलाते हुए बोलती है..

अंकित होश में आता हुआ…..नही..न.आ.ही…कुक..ह नही..

रितिका :- प्लीज़ कम इन..(दरवाजा छोड़ते हुए अंकित को अंदर बुलाती है)

अंकित अंदर आ जाता है और अपने हाथ में पकड़ा बुके रितिका की तरफ बढ़ाता है..

रितिका :- इसकी क्या ज़रूरत थी..(हाथ से बुके लेते हुए)

अंकित :- ह्म्म बस…इतने दिनो के बाद आया था तो खाली हाथ तो नही आ सकता था ना इसलिए ले आया..

रितिका :- ह्म्म बैठो पंनी लाती हूँ…(और फिर रितिका मटकते हुए पानी लेने चली जाती है)

लेकिन अंकित ने इस बार रितिका की चाल पर ध्यान नही दिया और वो वहीं सोफे पे बैठ गया…..

थोड़ी देर बाद…..

अंकित और रितिका एक ही सोफे पे कुछ ही डिस्टेन्स पे बैठे थे..बिल्कुल चुप…दोनो में से कोई

कुछ नही बोल रहा था….शायद वक़्त इतना गुज़र गया था कि कुछ कहने के लिए नही था और वैसे

भी आखरी मुलाकात भी कुछ ज़्यादा अच्छी नही थी…..

कुछ देर ऐसे ही आपस में उंगलियाँ घिसने के बाद रितिका ने चुप्पी थोड़ी जो शायद अंकित भी

यही चाहता था…

रितिका :- तुम बिल्कुल भी नही बदले….वैसी ही हो..

अंकित उसकी तरफ मुड़ते हुए देखता है..

अंकित :- लेकिन आप बहुत बदल गयी हैं … थॅंक यू….

रितिका :- थॅंक यू क्यूँ?

अंकित :- अपने मेरी बात रख ली…

रितिका :- उसके लिए तो मुझे थॅंक यू बोलना चाहिए तुम्हे….

अंकित :- नही..आप क्यूँ थॅंक यू बोलोगे जब कि ग़लती तो मेने की थी

रितिका :- नही..ग़लती हम दोनो की थी..लेकिन मेरी ग़लती का एहसास तुमने दिलाया और तुम्हे अपनी ग़लती का एहसास

खुद हुआ…ना जाने में क्या कर रही थी..अगर कोई और होता..तो वो सच में मेरे साथ सब कुछ

आसानी से कर जाता और ना जाने फ्यूचर में वो और क्या क्या करता…(बोलते हुए उसका गला भारी हो

गया आँखें नम हो गयी नाक बिल्कुल लाल हो गयी)

अंकित को लगा कि महॉल फिर से पहले जैसा हो रहा है और वो नही चाहता था कि पहले जैसा माहौल एक बार

फिर से बन जाए..

अंकित :- आपकी नोज…बिल्कुल ऐसी रेड हो गयी मानो किसी ने लिपस्टिक लगा दी हो….

रितिका अंकित की तरफ देखते हुए उसकी बात सुन के हल्का सा मुस्कुरा देती है…

वो उस चेहरे पे मुस्कुराहट ने अंकित के दिल पे एक गहरा वार कर दिया इतनी प्यारी हँसी इतना प्यारा

एहसास था वो अंकित के लिए…अंकित रितिका को घूर्ने लगा उसके चेहरे को अपनी आँखों से निहारने लगा..

रितिका ने देख लिया..लेकिन उसने कुछ कहा नही..वो भी उसकी आँखों में देखने लगी और फिर बोली..

रितिका :- क्या किया तुमने इतना टाइम?

अंकित होश में आते हुए..

अंकित :- बस कुछ पुरानी यादों को भुला के आगे बढ़ गया था और लाइफ के आने वाले टाइम को

अच्छा बनाने की तैयारी…

रितिका :- इसका मतलब तुम मुझे भी भूल गये थे?

अंकित :- नही….में अपनी यादों को भुला था..और यादें उसकी होती है जिसे इंसान अपनी ज़िंदगी में दफ़न

कर देता है…मेने वो वक़्त दफ़न किया जिसमे मेने आप जैसी इतनी प्यारी इंसान के साथ ग़लत किया