एक कीमत “ज़िंदगी” की-20

तभी कॅबिन के डोर पे नॉक हुआ. Hindi Sex Stories Antarvasna Kamukta Sex Kahani Indian Sex Chudai
रितिका :- कम इन..
तभी अंदर एक पीऑन आया जिसके हाथ में बेहद ही खूबसूरत बुकेट था….
पीयान :- राहुल सर ने भेजा है..
रितिका :- ह्म्म ब्यूटिफुल…अच्छा एक काम करो…ये बुकेट और ये लेटर तुम्हे इस अड्रेस्स पे पहुचाना
है..
पीयान :- हो जाएगा मॅम..
रितिका :- अब तुम जा सकते हो….(फिर वो पीयान चला जाता है)

उधर अंकित मस्त पलंग पे पड़ा मोबाइल पे गाना चला के लेटा हुआ था…कि तभी…

हम तेरे बिन अब रह नही सकते….तेरे बिना क्या वजूद मेरा….(इतने महीने गुजर गये लेकिन भाई

साहब ने रिंगटोन नही चेंज करी)

भाई साहब ने जब स्क्रीन पे नाम देखा तो चेहरे पे एक खिलखिलाहट आ गयी…

अंकित :- हेलो मिस…..

हेलो के बच्चे रिज़ल्ट आ गया है….

बस जब सामने से रिज़ल्ट का नाम सुना तो चेहरे पे जो दाँत दिख रहे थे..वो अंदर घुस गये और

उसके दिल की धड़कन फस्टली बीट होने लगी….

अंकित :- क..क.क….क्या…इतनी जल्दी आ गया रिज़ल्ट..

हाँ … आ गया है जल्दी से चेक करो और मुझे बताओ…तुम्हारी जितनी हार्टबीट चल रही है ना

उससे ज़्यादा मेरी ही चल रही है…..

अंकित :- ना….नही….में नही देखूँगा…आप देखो…

में..लेकिन में क्यूँ?

अंकित :- क्यूँ कि आप मेरे लिए लकी हो…?

अच्छा जी…ऐसा कैसे??

अंकित :- मुझे ऐसा लगता है….बस..अब आप बताओगी कि नही मॅम..प्लीज़

अंकिता :- ओके ओके…चेक करती हूँ…होल्ड करो…

फिर अंकिता फटाफट से लप्पी ऑन करके….रिज़ल्ट वाली साइट खोल के उसे अंकित का रोल नंबर डाल देती है..

अंकिता :- अंकित ये क्या…..

अंकित की तो गान्ड फट के 8 हो गयी और उसे ऐसे लगा मानो फटी हुई गान्ड मे किसी ने उसके हाथ में दे

दी हो….उसकी शक्ल का सत्यानासी जैसा हाल बन गया..आँखें बाहर आ गयी और दिल तो मानो इतनी

ज़ोरों से धड़क रहा था मानो अभी बाहर आ के गिर जाएगा..

अंकित :- (बड़ी मुश्किल से) ..क..क्ककया…हुआ….मॅ..म…..

अंकिता :- मेहनत करवाने का ये फल दिया है तुमने मुझे?

अंकित अपने पलंग से उठ खड़ा हुआ उसके पैर कांप रहे थे…

अंकित :- मॅम प्लीज़..डराओ मत..मेरी जान सुख रही है…क्या हो गया ऐसा…

अंकिता :- हहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहेहहेहेहेः…(बहुत ज़ोरों ज़ोरों से हँसने लगी….)

अंकित कन्फ्यूज़ हो गया कि अचानक क्या हुआ…वो अपने मन में सोचने लगा…

कहीं मेरा खराब रिज़ल्ट देख के मॅम के दिमाग़ की साइट बिगड़ गयी है…

अंकित :- मॅम आप हंस क्यूँ रहे हैं?

अंकिता :- हालत देखो तुम्हारी..कितना डरे हुए तुम…हहेहेहेहेहेहहे कसम से तुम्हारी

शक्ल देखने वाली होगी इस वक़्त…हहेहेहेहेहेहहे

अंकित को थोड़ा रिलीफ हुआ हल्का सा..

अंकित :- मॅम यहाँ मेरी फट रही है…और आपको मज़ाक सूझ रहा है….(बोलने के बाद पछताया…और

सोचने लगा गया बेटा काम से…गाली दे दी..अब तो पक्का लगेगी)

अंकिता :- हहेहेहेहेहेहेहेहहे…(अंकिता ने शायद ध्यान नही दिया) अच्छा बाबा बताती हूँ…

मिस्टर अंकित आपका रिज़ल्ट ये है…..कि अपनी..अपनी…सारे ही सब्जेक्ट में …. डिस्टिंक्षन के साथ पास

किया है..

अंकिता के ये बोलना उधर अंकित का उछलना…..

अंकित :- ईईईईईई…ईपीईईई..ओये होई….हुर्रीईईई..

हुरईईई…में पास हो गया..बल्ले बल्ल्ले…..ऊऊओ पास हो गया…कमाल हो गया…

(थोड़ी देर हल्ला गुल्ला करने के बाद ही शांत हुआ)

उधर अंकिता अंकित को इतना खुश देख कर खुद भी मुस्कुरा रही थी..

अंकित :- थॅंक यू सो मच मॅम..थॅंक यू सो मच..थॅंक यू थॅंक यू थॅंक यू…जितना थॅंक यू बोलूं आपको

वो कम है…अपने जो किया है ना शायद कोई टीचर करती…यू हेल्प्ड मी सो मच जिसकी वजह से एक

साथ मेने इतने सारे एग्ज़ॅम क्लियर कर दिए….थॅंक यू सो मच….

अंकिता :- ओहो बस बस बस…इतना थॅंक यू माइ गॉड…तुम्हारी ट्यूशन कॅन्सल कर दूं क्या ..इतना थॅंक यू

बोलॉगे तो….

अंकित :- अरे नही नही..सॉरी..अब नही बोलूँगा..सॉरी

अंकिता :- अब सॉरी शुरू हो गये हहेहेहेहेः…

फिर अंकित भी हँसने लगता है…..

अंकिता :- आइ आम प्राउड ऑफ यू अंकित..तुम्हारे नंबर…सच में बहुत अच्छे हैं…यू गॉट 93 इन जावा आंड

89 इन वीबी..मेरे सब्जेक्ट्स में तो बहुत ही अच्छे नंबर है..

अंकित :- हाँ तो टीचर अच्छी है तो नंबर तो ऑटोमॅटिकली ही अच्छे आएँगे..

अंकिता :- अच्छा बताऊं तुम्हे फ्लर्टी लड़के…..अब जब मिलोगे तब क्लास लगेगी तुम्हारी..और हाँ पार्टी भी

चाहिए मेरी..

अंकित :- हनहा आप क्लास भी लेना और पार्टी में तो एवेरी रेडी हूँ आपके लिए….

अंकिता :-अच्छा अभी रखती हूँ फ्रेश होने जा रही हूँ…

अंकित :- ओहकक बाए…

अंकिता :- और हाँ..ये मिस क्या होता है जो तुमने शुरू में बोला था और वो गाली जो तुमने दी थी??

अंकित मन में..ओ तेरी की..कहाँ से याद आ गया..

अंकित :- (स्टाइलिश वे में) सूओरयय्यययययी…

अंकिता :- बदमाश….चलो बाइ टाटा..

अंकित :- ओहक बाबयए….टाटा…

(फोन कट)

हइईई…..इस बार तो बच गया हस्शह अंकिता मॅम की वजह से बस…मॅम मॅम

माँ…आपने तो दीवाना बना दिया है…एक तो आपकी हॉट बॉडी उपर से इतना हॉट नेचर कातिलाना..

हर तरफ धमाल मचा रखा है आपने…

और हाँ मॅम फ्रेश होने जा रही थी…ऊओ वाऊओ काश में भी देख सकता….मज़ा ही आ जाता..

हाए सुंदर बदन पे गिरते पानी की बूंदे…सीईईई…मेरे तो रोंगटे खड़े हो रहे हैं और

साथ साथ में कुछ और भी..(और उसका हाथ ऑटोमॅटिकली अपने लंड पे आ जाता है)

और अंकिता को नहाते हुए सोचने लगता है…..

हाँ मॅम यहाँ साबुन लगाओ..में हेलो कर दूँ क्या..हा…उफ़फ्फ़……क्या पैर हैं आपके..इतने

हॉट लेग्स तो मैने किसी के नही देखे…(और उसके हाथ की स्पीड बढ़ जाती है अपने लंड पे)

मॅम यहाँ लगाओ…आपकी इस छांटेकेदार आस पे..हाए कितनी सॉफ्ट है…बेबी टॉय जैसे…आराम आराम

से ळगाउन्गा हाए…(और तेज़ी से हाथ चलने लगते हैं..बस वो अपनी मज़िल के बिल्कुल करीब ही

पहुच चुका था)

तभी…घर के डोर बेल बाज गयी…और अंकित अपने होश में जगा…

अंकित :- व्हाट दा फक…बेह्न्चोद…(खिचते हुए) साला अभी आना था….

और फिर आवाज़ लगाते हुए..कौन है…बोलता हुआ गेट के पास पहुच जाता है…..
अंकित बड़बड़ाता हुआ उठा और बाहर जाके देखा तो उसके सामने एक आदमी हाथ में एक बड़ा
सा बुकेट लिए खड़ा था..

अंकित :- किससे मिलना है.

अंकित साहब से मिलना है..(वो आदमी बोला)

अंकित :- में ही अंकित हूँ..

ओह्ह..सर ये आपके लिए…(वो आदमी बुकेट देता जिसके साइड में ही वो लेटर घुसा हुआ था जिसे
अभी अंकित ने नही देखा था)

अंकित :- किसने भेजा है लेकिन…

सर आप ये ले लीजेए..मेडम ने बोला है कि दे दूं..तो दे रहा हूँ..(वो अंकित के हाथ में थमा
देता है)

अंकित :- हाँ लेकिन तेरी मेडम का कोई नाम तो होगा ही..

वो आदमी अनसुना करते हुए मूड के जाने लगता है..

अंकित :- अबे ओई….साला….बड़ा ही बेह्न्चोद आदमी है…चला गया…वैसे जो भी कहो ये
बुके है बड़ा प्यारा..किसने भेजा होगा…कहीं अंकिता मॅम ने तो नही..(घर के अंदर जाते हुए
अपने आप से बात करते हुए) नही नही..उनसे तो अभी ही बात हुई है इतनी जल्दी वो भी इतनी दूर से कैसे
भेज सकती है….(कमरे में आ जाता है और बुके को घुमाने लगता है और तब उसे वो लेटर
पीछे की तरफ दबा हुआ दिखाई देता है…वो बुके को बेड पे रख के लेटर निकाल लेता है)

अंकित :- लेटर भी है…ओहो…कौन मेहरबान हो गया आज मुझ पर..लगता है आज का दिन अच्छा है..

फिर लेटर खोल के पढ़ने लगता है…

डियर अंकित

कैसे हो?? इट्स बिन आ लोन टाइम मोर दॅन 7 मंत्स…तुम्हे मेरा ये लेटर और ये बुके देख के
अजीब लगेगा कि इतने महीनो तक कहाँ गायब थी…उस दिन के बाद ना तो मेने कोई कॉंटॅक्ट किया
ना कुछ..यही सोच रहे हो है ना…क्यूँ कि में जानती हूँ उस दिन के बाद कॉंटॅक्ट मुझे ही करना
था लेकिन मेने ऐसा कभी नही किया….

यहाँ तक अंकित पढ़ते हुए समझ गया कि ये सब रितिका का ही दिया हुआ है..

अंकित :- इतने महीनो के बाद इन सब का क्या मतलब है..(वो थोड़ा गुस्से में बुदबुडाया और फिर आगे
पढ़ने लगा)

जानती हूँ ये सब पढ़ते वक़्त तुम्हे गुस्सा आ रहा होगा..गुस्सा बहुत जल्दी आता है ना तुम्हे और हाँ
वैसी भी ये एज ही ऐसी है…पर क्या करूँ मेने तुम्हे जान बुझ के कॉंटॅक्ट नही किया उसका एक
रीज़न था बहुत बड़ा रीज़न..

अंकित :- हुहह..बहाने….मेने सोचा था उस दिन के बाद अटलीस्ट फोन कर के एक बार तो कह
ही दोगि कि अंकित मेने तुम्हे माफ़ कर दिया..लेकिन नही…आज इतने टाइम के बाद ये सब..क्या फ़ायदा
जब में आपके नाम का चॅप्टर अपनी ज़िंदगी से क्लोज़ कर ही चुका था तो…(अपनी गर्दन हिलाते
हुए)

रीज़न ये था कि मेने तुम्हे उसी दिन मन ही मन ये वादा दे दिया था कि जब तक में पहले
जैसी…जैसा तुम मुझे कहते थे वैसा नही बन जाती..तब तक तुमसे कोई बात नही करूँगी..और उसी
में ये वक़्त लग गया इतना…ये भी जानती हूँ कि तुम अब मुझसे कभी बात नही करना चाहोगी और
ना ही तुमने मुझे याद किया होगा..लेकिन मेने तुम्हे रोज याद किया…