एक कीमत “ज़िंदगी” की-19

उधर अंकित के मन के उपर से एक बोझ उठ गया था Hindi Sex Stories Antarvasna Kamukta Sex Kahani Indian Sex Chudai क्यूँ कि वो जानता था जो भी उसने कुछ किया और जो भी कुछ बोला उससे रितिका उसे अच्छी तरह समझ गयी होगी वो अब एक बार फिर पहले जैसा बन गया था….जब दिल को सुकून मिल जाता है..तो फिर वो इंसान वैसा हीबन जाता है जैसा होता है….(इंसान सिर्फ़ तभी बदलता है जब हालत ऐसा उससे करवाते हैं)

धीरे धीरे समय बीतने लगा…

एक तरफ रितिका नाम के चॅप्टर को भूलने की कोसिश में था…वो अपने इस पास्ट को भूलने की कॉसिश

कर रहा था….और आगे बढ़ रहा था…रोज कॉलेज वैसे ही मस्ती करते हुए जाना…

हर सेक्सी हॉट लड़की को घूर्ना…बस में चान्स मिलने पर लाइन मारना…

अंकिता काफ़ी खुश थी अंकित को ऐसे देख कर…अंकित का ध्यान अब पढ़ाई पर पूरा था…

दूसरी तरफ….रितिका ने भी अपने आप को संभाल लिया था अब वो दुबारा पहले जैसी बनती जा रही थी..

धीरे धीरे रिकवरी हो रही थी…नींद की गोलियाँ बहुत कम हो गयी थी….फेस पे धीरे धीरे वही

चर्म वापिस आ रहा था … और वो अपने काम को दिल से एक बार फिर करने लगी थी….

बस फ़र्क ये था इन दोनो में…कि जहाँ अंकित भूलने में लगा हुआ था..वहीं रितिका अंकित को

भुला नही पा रही थी..और उसी के बारे में सोचती रहती थी…कई बार रात में सोते हुए उसे

वही सब दिखता जो अंकित ने उसके साथ किया और जो भी कुछ बोला…..

रितिका :- (अपने आप से) क्या वो सब सही था….कैसे मुश्किल में डाला है..एक तरफ तो उसकी उन कड़वी

बातों से मजबूर किया नफ़रत करने के लिए…और दूसरी तरफ उसकी वो प्यारी बातों से दिल में कुछ

ना कुछ हो रहा है…आख़िर ऐसा क्यूँ हो रहा है….

धीरे धीरे…दिन हफ्ते में बदले…हफ्ते महीनों में बदल गये…और महीना ख़तम

होते होते वो साल भी ख़तम हो गया..

लेकिन दोनो के बीच कोई कॉंटॅक्ट नही था….कभी रितिका ने फोन नही किया जबकि वो अंकित को भुला

नही पाई थी..

इधर अंकित के 2न्ड सेमेस्टर के एग्ज़ॅम नज़दीक आ चुके थे….इस बार अंकित को डबल मेहनत

करनी थी..क्यूँ कि पिछली बार के सारे पेपर्स में बॅक थी उसका एग्ज़ॅम भी इस बार भी देना था..

और अंकित ये मेहनत दिखा भी रहा था..

कॉलेज की छुट्टियो में वो रोज़ अंकिता के घर जाता था..और वहाँ पढ़ता था..

इस चक्कर में अंकित अंकिता के बेहद क्लोज़ आने लगा..और ज़्यादा फ्लर्ट करने लगा..एक तो अंकिता ऐसे

कपड़े पहन के रहती थी..कि अंकित का तो बॅंड ही बज जाता….कभी छोटी छोटी निक्कर…उसमे दिखते

उसके वो सुंदर सुंदर हॉट लेग्स..तो कभी टाइट शॉर्ट टॉप्स…जिसमे से उसके चुचे अंकित की लालसा को

और बढ़ा रही थी….कभी कभी जब अंकिता पढ़ा रही होती थी..तो अंकित की नज़र अंकिता के चुचों

पे जा अटकती…कैसे वो उस टॉप में फँसे होते थे..जैसे पिंजरे में फँसा पंछी….

अंकित का तो वहीं तंबू बन जाता….

लेकिन अंकिता ने कभी भी ऐसा शो नही किया जैसे वो अंकित को जान बुझ कुछ शो कर रही है या

कुछ भी..वो सिर्फ़ पढ़ाने में ध्यान लगाती…और अंकित को एक स्टूडेंट की तारह मानती..

लेकिन पढ़ाई के बाद…दोनो खूब गप्पे लड़ाते….एक फ्रेंड्स के नाते….कई बार अंकित का फ़िजिकल

टच होता….जैसे हाथो पे हाथ रख दिया हो..या फिर कंधे टच हो गये हों…

अंकित के लिए तो यही काफ़ी था एरेक्ट होने के लिए..पर अंकिता ने हमेशा नॉर्मली ही लिया…

आख़िर दिन बीतते चले गये…और एग्ज़ॅम के दिन आ गये….अंकित ने कुत्ते की तरह मेहनत की थी इस

बार….एक एक कर के एग्ज़ॅम दे ही दिए…अब तो बस उसे वेट करना था रिज़ल्ट के आने तक का…

उसी बीच में दोनो की फोन पे काफ़ी बात होने लगी…ऐसा लग ही नही रहा था कि दोनो टीचर

स्टूडेंट है…..

एक दिन फोन पे

अंकित :- अच्छा मॅम एक क्वेस्चन पूछूँ?

अंकिता :- हाँ..बिल्कुल..

अंकित :- आपका कोई बाय्फ्रेंड नही है?

थोड़ी देर तक वहाँ से कोई आवाज़ नही आई..

अंकित :- आरयू देअर?

अंकिता :- (फिर बोली) तुमने ये क्वेस्चन क्यूँ किया?

अंकित :- क्यूँ कि मेरा मन किया इसलिए….

अंकिता :- अच्छा जी..तो तुम्हारा मन भी करता है….वैसे तुम्हे क्या लगता है?

अंकित :- ह्म्म्म…अगर मुझे पता ही होता तो आपसे क्यूँ पूछता..

अंकिता :- फिर भी गेस?

अंकित :- ह्म्म चलो आप कहते हो तो बोलता हूँ….मेरे हिसाब से कोई बाय्फ्रेंड नही होगा अभी आपका..पर हाँ आपके

पीछे बहुत से दीवाने पड़े होंगे..

अंकिता :- दीवाने..हहेहहे..अच्छा जी…लेकिन ये बताओ कि ये कैसे श्योर हो कि मेरा कोई बाय्फ्रेंड नही है?

अंकित :- बस लगता है….अब इसमे क्या बताऊं….

अंकिता :- ह्म्म्म तो फिर तुम कैसे कह सकते हो कि मेरे पीछे बहुत से दीवाने पड़े हैं..

(मुस्कुराते हुए)

अंकित :- अरे ये तो 100 % ट्रू है..आपके पीछे लड़के नही पड़ेंगे तो फिर किसके पीछे पड़ेंगे..

(फ्लर्ट करता हुआ)

अंकिता :- ओहो बातें तो देखो भाई साहब की..अच्छा मुझ में ऐसा क्या है..

अंकित :- ऐसा क्या नही है…आप इतनी ब्यूटिफुल..इतने सेक्सी हो कि आपके पीछे तो हर लड़का लट्तू हो

जाए….(बोलने के बाद मन में…साला ये क्या बोल दिया जोश जोश में…अब तो तू गया बच्चू..

टीचर के साथ इतना तगड़ा फ्लर्ट अब तो लग गयी..बजेगी बॅंड अब तो)

लेकिन जो उसने सोचा उसका उल्टा ही हुआ…

अंकिता :- हहेहेहेहेहेहेहहे…..

अंकित :- (जान में जान आई….और सोचने लगा…हँसी तो फँसी) लो इसमे हसना कैसा … में सच बोल

रा हूँ..(हिम्मत आ गयी थी आगे फ्लर्ट करने की)

अंकिता :- चलो चलो बदमाश…अपनी टीचर से फ्लर्ट करते शरम नही आती तुम्हे हाँ..

(झूठा गुस्सा दिखाते हुए…जो अंकित समझ गया था)

अंकित :- ओहो वाहह अब टीचर बन गयी आप..अभी तक तो फ़्रेंड थी…लेकिन सीरियस्ली मॅम आप

सच में बहुत ब्यूटिफुल हो…जब मेने आपको पहले दिन देखा था में तो तभी बस देखता

ही रहा था आपको….

अंकिता :- ओह्ह मिस्टर.. बस हाँ…फ़्रेंड हूँ इसका मतलब ये नही कि तुम भूल जाओ कि तुम मेरे स्टूडेंट भी हो..

बदमाश….कहीं का..फ्लर्ट करता है .. शरम नही आती..

अंकित :- हाहहाहा…..अब सच बोलो तो लोगों को लगता है कि फ्लर्ट कर रहा हूँ…हद है…

अंकिता :- तुम कल घर आओ तो बताती हूँ…अच्छी तारह से क्लास लूँगी तुम्हारी…चलो अभी रखती हूँ..

अंकित :- कोई नही मॅम थॅंक यू फॉर युवर टाइम..बाबयए….

फोन कट

अंकित अपने आप से…यार ये अंकिता मॅम बस किसी तारह से फँस जाए..तो मेरी तो लॉटरी निकल जाएगी..

काश ऐसा हो जाए…उफफफ्फ़…..मेरा तो बुरा हाल हो जाता है जब भी सोचता हूँ उनके बारे में…

…………………………….

या या सर….आब्सोल्यूट्ली…ओफ़फकौर्स वी डिड आ ग्रेट जॉब देअर…डिफिनेट्ली हमे ही मिलेगा ..

एक लड़की कार से उतरती हुई फोन पे बात कर रही थी…और चलते हुए एक बड़ी सी बिल्डिंग में एंटर

हुई……बॅस सभी जितने भी जेंट्स थी वहाँ पे उसी लड़की को घुरे जा रहे थी…किसी की नज़र भी

उस लड़की से हॅट ही नही रही थी….

वाइट स्टाइलिश टॉप…और उसके नीचे ब्लॅक मिनी स्कर्ट…जिसके नीचे उसके वो स्लिम हॉट लेग्स…बाल पीछे से

टाइ किए हुए थे जो कमर तक आ रहे थे……फेस पे इतना चर्म इतना क्यूटनेस कि बस नज़र ही

ना हटी….छोटी छोटी आँखें और वो सेक्सी लिप्स……

इन वन वर्ड……अमेज़िंग….

सभी जेंट्स की आँखें तो कभी उस लड़की की लेग्स पे तो कभी पहने टॉप के नीचे दबे वो

हॅग बूब्स…जो उस टॉप से चिपके पड़े थे…..

या या सर … सर हम ने 6 महीने हार्ड वर्क किया था उस प्रॉजेक्ट में…जी सर कल रात में ही वापिस आई

थी में …. नो नो इट्स ओके सर…हमे अभी प्रॉजेक्ट मिला है तो और मेहनत करनी पड़ेगी……

इसीलिए नो हॉलिडे…..ओके सर नो प्राब्लम बाइ..बाए…

(फोन कट)

वो लड़की बड़े से हॉल के बीचों बीच खड़ी थी…..फिर उसने अपनी गर्दन एक झटके में मोडी…

अपनी झुल्फो से उसने अपनी उंगलियो की मदद से चेहरे पे पड़े बाल की लट को साइड किया….

सब उसी को घूर रहे थे…जब उसकी नज़र ऐसे सब पर पड़ी..तब सारे जेंट्स हड़बड़ा गये…

सभी बोल पड़े…

गुड मॉर्निंग मॅम…गुड मॉर्निंग…..

वो गुड मॉर्निंग बोल के अपने कॅबिन के अंदर एंटर हो गयी….और सीधे जाके अपनी सीट पे बैठ

गयी……

और फिर उसने फोन मिलाया..

हाँ…सुमन…छोड़ आई तुम…ह्म्म ओक…अच्छा अब टाइम से वापिस ले आना और चाबी लेके घर पे

आराम से छोड़ देना..और अगर आर्नव को कोई भी दिक्कत हो तो ज़रूर कॉल करना…..

(फोन कट)

अंकित आज तुम्हारी वजह से शायद में इस पोज़िशन पे पहुच गयी हूँ…तुम्हारी उन कहीं हुई बातों

ने मेरी ज़िंदगी को एक अलग मोड़ दिया…..रितिका अपने आप से बोलती है..

और तभी दुबारा फोन मिलाती है..रिंग जाती है और दूसरी तरफ से कॉल पिक होती है..

रितिका :- हेलो…

रितिका :- हेलो..

अंकित :- हेलो….

रितिका :- क्या हाल चल है?

अंकित :- बस बढ़िया…और सूनाओ क्या चल रहा है

रितिका :- कुछ नही अभी अभी ऑफीस में आके बैठी हूँ?

अंकित :- अच्छा कब आई आप?

रितिका :- बस कल रात में आई…अच्छा मुझे अभी मिलना है तुमसे जल्दी आओ..कुछ काम है

अंकित :- इस वक़्त…नही नही .. कोई नही घर पे…आप आ जाओ?

रितिका :- अरे मेने कहा ना तुम आओ मुझे कुछ ज़रूरी काम है ?

अंकित :- क्या काम था…?

रितिका :- राहुल तुम पहले आओ तो बताऊगी ना..जल्दी से मेरे कॅबिन में आओ?

अंकित :- हाँ हाँ बुआजी…सब बढ़िया…हाँ मम्मी घर पे आएँगी तो बता दूँगा आपको…

अच्छा ओक बाइ (अंकित अपनी बुआ से फोन पे इस तरफ बात कर रहा था)

तभी रितिका के कॅबिन पे नॉक होता है…

रितिका :- कम इन..

राहुल ही होता है जिससे रितिका अभी फोन पे बात कर रही थी , वो अंदर आ जाता है….

रितिका :- ओह्ह वेलकम मिस्टर.. तुम कितने सवाल करते हो..मेने जब तुम्हे बुलाया तो सीधे आ नही सकते थे

यू आर ऑल्वेज़ लाइक ठ्त..एवेरिटाइम..

राहुल :- ओह्ह मॅम..मुझे काम भी करना होता है..

रितिका :- लेकिन तुम ये भूल गये कि में तुम्हारी बॉस हूँ..

एक मिनट के लिए शांति हो जाती है..फिर दोनो हँसने लगते हैं..

रितिका :- अच्छा..जोक्स अपार्ट..यार मुझे तुमसे काम है…क्या तुम कर दोगे अभी?

राहुल :- या शुवर…बोलो..

रितिका :- में कहती हूँ कि जो प्रॉजेक्ट कि थोड़ी देर में सेमिनार है उसका लेक्चर तुम प्रिपेर कर दोगे

मुझे कुछ और काम है..

राहुल :- बस इतना सा काम हो जाएगा…और कुछ?

रितिका :- हाँ..एक और काम…एक अच्छा सा बुकेट पर्चेस करना है और इस वक़्त में नही जा सकती तो?

राहुल :- (मुस्कुराते हुए) किसको देना है मेडम..कोई चाहने वाला मिल गया?

रितिका :- शटअप राहुल..तुम्हे जो बोल रही हूँ वो कर दोगे प्लीज़..

राहुल :- ओके मिस..हो जाएगा…और कुछ?

रितिका :- नही बस इतना कर दो…थॅंक यू

और फिर राहुल चला जाता है…रितिका के चेहरे पे जो मुस्कान थी जिसे चेहरा बेहद खूबसूरत लग रहा था.

वो अचनाक से गायब हो गयी और चेहरे पे एक अजीब से परेशानी के भाव बन गये….

फिर उसने एक पेन और एक पेपर लिया….

डियर अंकित,

और फिर वो लेटर लिखना शुरू करती है…बीच बीच में रुक के वो कुछ सोचती अपने हाथ में लिया हुआ

पेन उंगलियो के बीच में रख के हिलाती है….लेटर लिखते हुए उसके चेहरे को देख के ऐसा लग रहा

था मानो कोई बहुत बड़ा भार उतार रही हो…एक अलग सा सुकून दिखाई दे रहा था….

आख़िर कर उसने लेटर पूरा कर ही लिया…जिसे लिखने में उसे काफ़ी समय लगा…..

(अब आप सब सोच रहे होंगे कि इतनी टेक्नॉलॉजी के ज़माने में जहाँ फोन मेल्स..एट्सेटरा पता नही

कितनी सुविधाएँ है..जिससे हम किसी से कॉंटॅक्ट कर सकते हैं और रितिका खुद एक सॉफ्टवेर इंजीनियर.. होने

के बाद एक लेटर लिख रही है..अजीब है ना…??

नही…बिल्कुल भी अजीब नही है…टेक्नालजी इंपॉर्टेंट है पर वो दिलों की बातों को उस तरह बयान

नही कर पाती .. जितना एक लेटर कर सकता है…उसमे लिखे हुए एक एक वर्ड सामने वाले के दिल को छू जाता

है…जो शब्द हम कह नही सकते वो हम लेटर में लिख के सामने वाले को प्रभावित कर सकते हैं..

जो कि कोई भी मैल और फोन नही कर सकता…लेटर सबसे खूबसूरत चीज़ है अपने दिल का हाल बयान

करने के लिए क्यूँ कि उसके अक्षरो में एक सच्चाई छुपी होती है…जो सीधे दिल को छू जाती है)