एक कीमत “ज़िंदगी” की-15

उसका हाथ अपने लंड पे चला जाता है और रितिका Hindi Sex Stories Antarvasna Kamukta Sex Kahani Indian Sex Chudai
के उन चुचों को याद करते हुए मसल्ने लगता
है जीन्स के उपर से…तभी कमरे का दरवाजा खुलता है तब वो होश में आता है और अपना

हाथ हटा लेता है अपने लंड से…और अपनी गर्दन उधर करके देखता है..

सामने रितिका अपने बलॉन को टवल से पोछते हुए बाहर निकलती है…

उफफफ्फ़ क्या कातिलाना नज़राना है ये…गीले बालों को पोछते हुए … पहनी हुई एक ब्लू कलर की

पतली सी नाइटी….जिस्म पे रेशम की तरह लग रही थी.

हाए ब्रा तक दिख रही है नाइटी में…..और उसके अंदर वो क़ैद दुनिया के सबसे खूबसूरत चुचें

खा जाने का मन कर रहा है…….क्या सेक्सी हॉट माल लग रही है…(अंकित अपने मन में सोचने

लगा)

रितिका :- हेलो अंकित…

अंकित होश में आता हुआ

अंकित :- हेलो….

रितिका :- तो..कैसा चल रहा है आर्नव पढ़ाई में..आज कल तो में इस्पे ध्यान ही नही दे पा रही

हूँ…..

अंकित :- हाँ हाँ..बिल्कुल बढ़िया एक दम मस्त चल रहा है सब कुछ..(बोल तो रहा था लेकिन

नज़र नाइटी कभी वो उभरते हुए बाहर आते चुचों पर तो कभी सपाट पेट…और कभी वो

पतली और सेक्सी हॉट लेग्स पे पड़ती)

रितिका :- इतनी गर्मी है दिल्ली में..मुझे नही पता था..मुझसे तो रहा नही जाता

अंकित :- हाँ आपको तो गर्मी की आदत नही है ना…यूएस में कहाँ इतनी गर्मी होती है…

(और अपने मन में..हाँ हाँ गर्मी तो लगेगी ही..जब शरीर के अंदर इतने सारे गरम पुर्ज़े

छुपा के रख रखे हैं…अरे खोल दो उन्हे तब देखना कैसे ठंडा कर दूँगा)

रितिका :- ह्म्म .. में तुम्हारे लिए कुछ लेके आती हूँ..

(और मूड के जाने लगती है)

अंकित के मूह से तो लार टपक जाती है..जब वो रितिका की गान्ड को देखता है..हाए वो रेशमी नाइटी

में रितिका की मतकती गान्ड क्या कमाल की लग रही थी…..गोल गोल फुटबॉल जैसे…मखमली जैसी गान्ड

कोई भी उस गान्ड को बुरी तरह सी मसल मसल के निचोड़ना चाहे….

अंकित उधर देख ही रहा होता है..की तभी अरणाव उसको बुलाता है..

अरणाव :- भैया हो गया..

अंकित को एक बार गुस्सा आता है लेकिन फिर वो शांत होकर..

अंकित :- ह्म्म वेरी गुड….अच्छा अब ये करो..इसके बाद छुट्टी…

बेचारा बच्चा हाँ में गर्दन हिलाता है..और फिर अपने काम में लग जाता है .. उधर अंकित

की नज़री रितिका के आने का इंतजार कर रही थी..

तभी अंकिता चलते हुए ट्रे में कोल्ड ड्रिंक लेके आती दिखाई दी…..

अंकित की नज़र तो उस पतली ठुमकती हुई कमर और हिलते हुए चुचें जो उस नाइटी में टिकने का

नाम नही ले रहे थे..हलाकी ब्रा के अंदर थे..लेकिन फिर भी हिल रहे थे..उपर नीचे..शायद

ढीली ब्रा पहनी हुई थी… (अंकित ने मन में सोचा)

आख़िर कार अंकित ने बड़ी मुश्किलों से वो पल गुज़ारा…और चल पड़ा घर..रात को सोचते हुए

क्या रितिका जान बुझ के ऐसी नाइटी पहेन के आई थी मेरे सामने..क्या वो सच में मेरे साथ करना

चाहती है..अगर चाहती है तो साली बोलती क्यूँ नही..बेकार में क्यूँ तड़पा रही है..अरे बहुत अच्छे

मज़े दूँगा उसे..(अपना पाजामा नीचे कर के दुबारा हिलाने लगता है)

और बस रितिका के चुचों और गान्ड और उसकी चूत मारने के बारे में सोचते हुए अपना

निकाल देता है….और फिर आख़िर कर सो जाता है….

कुछ दिनो तक ये सब चलता रहा…अंकित फ्रस्ट्रेशन की तरफ बढ़ता जा रहा था..ये एक ऐसी बात थी

कि किसी से शेअर भी नही कर सकता था..और वो जानता था रोज़ रोज़ मूठ मारना भी ठीक नही है…

उसको कोई रास्ता भी सूझ रहा था….दिमाग़ खराब होता जा रहा था..ना तो पढ़ाई में मन

लगता ना किसी काम में…छोटी छोटी बातों में गुस्सा हो जाता था…..

काफ़ी मुश्किलों से उसके दिन गुज़र रहे थे………एग्ज़ॅम्स भी करीब आ रहे थे..लेकिन पढ़ाई में

मन तो लग ही नही रहा था….

अंकिता ने नोटीस किया…लेकिन वो कुछ नही बोली..क्यूँ कि वो अंकित से चाहती थी कि अगर उसे कोई प्राब्लम

हो तो सामने आके बोले..लेकिन अंकित ने कुछ कभी किसी को नही बताया..

फिर आया वो दिन…..सनडे था…नॉर्मली हर सनडे की तरह अंकित गुज़ारने की कॉसिश कर रहा था

लेकिन नही कर पा रहा था…..फिर शाम को 5 बजे खुद बिना रितिका को बोले कि वो आ रहा है

चल पड़ा उसके घर….(नॉर्मली सनडे छुट्टी होती है ट्यूशन की लेकिन फिर भी वो चला गया)

रितका ने गेट खोला…और सामने अंकित को देख के थोड़ा सा चौंक गयी..

रितिका :- अरे अंकित तुम..

अंकित :- क्यूँ आपको अच्छा नही लगा कि में आज भी आ गया….

रितिका :- ओफ्फ़ॉकूर्स नोट…कैसी बात कर रहे हो मुझे तो बहुत अच्छा लगा..इनफॅक्ट मुझे खुशी है कि तुम

यहाँ आज भी आए..कम इन..

अंकित अपने मन में..हाँ साली तू क्यूँ मना करेगी…..(आँखों में एक अलग ही इरादा था आज)

दोनो सोफे पे बैठ जाते हैं…..

अंकित :- आर्नव कहाँ है..

रितिका :- वो…खेलने गया है पार्क में….वैसी आज तुम उसे पढ़ाने आए थे..

अंकित :- नही नही…में तो बस उसके साथ ऐसे थोड़ी सी मस्ती के लिए आया था……

रितिका :- ह्म्म ओके..अच्छा किया तुम आ गये..वो आता ही होगा…

अंकित :- रितिका ऐसा नही लग रहा है कुछ जल रहा है..

रितिका :- ओह्ह तुमसे बात करने के चक्कर में भूल गयी कि गॅस पे कुछ रखा हुआ है मेने..

में अभी आई…

अंकित रितिका को देख रहा था उसने ढीला सा पाजामा पहना हुआ था जिसमे उसकी गान्ड हिलती हुई इतनी

मस्त लग रही थी कि अंकित का बुरा हाल हो गया उसका लंड अकड़न लेने लगा…..

टीशर्ट तो ऐसी पहनी है कि उसमे कुछ दिख ही नही रहा है आज तो..लेकिन क्या मस्त गान्ड लग रही है

(बोलता हुआ अंकित ने अपने लंड को पकड़ लिया)

और कुछ सोचते हुए किचन की तरफ चल दिया….रितिका किचन में काम कर रही थी….

अंकित धीरे धीरे बढ़ता हुआ..रितिका की साइड में जाके खड़ा हो गया..

एक दम अचानक से ऐसे अंकित का वहाँ आना अनएक्सपेक्टेड था रितिका के लिए..इसीलिए वो घबरा गयी…

रितिका :- ओह्ह्ह्ह डरा दिया तुमने तो..

अंकित बस ज़रा सा मुस्कुरा दिया..

रितिका :- तुम यहाँ गर्मी में क्यूँ खड़े हो बाहर बैठो..आराम से में आती हूँ..

अंकित :- आप भी तो हो गर्मी में…

रितिका :- ह्म्म्म…कुछ काम था..मुझसे..

अंकित :- क्यूँ बिना काम के नही आ सकता क्या यहाँ आपके पास..

रितिका :- हहेः..नही नही बिल्कुल आ सकते हो..पर आज तुम कुछ अलग साउंड कर रहे हो…

अंकित :- अच्छा….

बोलता हुआ रितिका के नज़दीक आने लगता है….उसका लंड अपने पूरे ताव में खड़ा था इस वक़्त

अंकित का दिमाग़ बंद पड़ा था..दिल तो बहुत पहले ही खो चुका था वो अपना….

उसने एक दम से रितिका का हाथ पकड़ा और उसे अपने सामने कर दिया..रितिका कुछ समझ पाती इससे

पहले अंकित ने आगे बढ़ के अपने होंठ रितिका के होंठो से चिपका दिए..और उन्हे चूसने लगा

पागलों की तरह नही…बहुत ही गेंट्ली वे में….रितिका की आँखें पूरी खुल गयी..उसे कुछ समझ नही

आ रहा था कि अचानक क्या हुआ उसके साथ..सपने जैसा लग रह था….अंकित तो अपने होंटो से

रितिका के होंठो को चूसने में लगा था..लेकिन रितिका का कोई रेस्पॉन्स नही था…

फिर रितिका भी सपने से बाहर आई..वो समझ गयी कि ये सपना नही हक़ीकत है…उसने अपना पूरा ज़ोर

लगा के अंकित को अपने हाथो के ज़ोर से पीछे धकेला..जिसे अंकित दूर हो गया..रितिका से..इससे पहले

कोई भी कुछ बोलता ..

रितिका ने एक चाँटा अंकित के गाल पे ज़ोर से दे मारा….चटाअक्कक…वो आवाज़ पूरी किचन

में गूँज उठी…….अंकित अपना गाल पकड़ के खड़ा था…

अंकित ने अपना हाथ अपने गाल पे रखा हुआ था..और वो नीची ज़मीन की तरफ देख रहा था…

रितिका सामने खड़े होके उसे घूर रही थी…..वो इतनी ज़्यादा कन्फ्यूज़ थी कि उसे कुछ समझ नही आ रहा

था कि आख़िर ये हुआ क्या…

फिर अंकित ने रितिका की तरफ देखा…उसकी आँखों में जबरदस्त गुस्सा दिख रहा था….

रितिका को भी अंकित का वो गुस्सा दिख रहा था…

रितिका :- व्हाट यू डिड..यू कनव ट्त्ट…हाउ डेर यू

अंकित ने रितिका को बोलने नही दिया वो इस वक़्त फुल गुस्से में था…

अंकित :- ये इंग्लीश अपने पास रख…तो ज़्यादा अच्छा है…एक तो थप्पड़ मारा और उपर से अकड़ दिखा

रही है…(गुस्से में उसने सारी इज़्ज़त की ऐसी तैसी कर दी )

रितिका :- वॉट डिड यू से? (रितिका ने सवालिया नज़रो से पूछा)

अंकित :- क्या व्हाट…क्या व्हाट…ऐसा क्या ग़लत किया मेने कि तुमने थप्पड़ मार दिया…

रितिका :- तुमने कुछ नही किया…तुम नही जानते क्या किया है तुमने अभी…

अंकित :- एक किस ही तो करी है..उसमे कौन सा बड़ा पाप कर दिया है मेने…पहले तो खुद ही

अपने अंग प्रदर्शन कर के जान बुझ के मेरा बुरा हाल कर दिया और अब जब मेने कुछ किया तो

भोली बन रही है…