एक औरत की दास्तान–9

इस दौरान समीर बार-2 अनुराधा की बड़ी-2 चुचियों को उसके ब्लाउज मे देख रहा था Hindi Sex Stories Antarvasna Kamukta Sex Kahani Indian Sex Chudai और अनुराधा समीर के बाबूराव को उसके पाजामे मे झटके ख़ाता हुआ सॉफ देख रही थी…. अनुराधा उठी, और अपनी मोटी गान्ड मटकाते हुए जाने लगी…..”भूलना नही आज शाम रुक्मणी के घर पर……रुकमणी से घर का अड्रेस समझ लेना….” अनुराधा ने जाते हुए कहा. थोड़ी देर बाद रुक्मणी उसके पास आई…..”तो क्या इरादा है समीर” समीर ने चोंक कर रुक्मणी की तरफ देखा…..”जी इरादा तो नेक है……बस आपके हुकम का इंतजार है….” रुक्मणी ने अपने होंटो को दाँतों से काटते हुए कहा…..”अच्छा ये लो इसमे मेरा अड्रेस लिखा है….और मोबाइल नंबर. भी घर आ जाना अगर रास्ता ढूँढने में तकलीफ़ हो तो फोन कर देना…

समीर: जी ठीक है….वैसे आपके घर वाले मतलब आपके हज़्बेंड कोई ऐतराज तो नही होगा.

रुक्मणी: अर्रे कहाँ वो तो ना ही उठ सकते है, और ना ही चल फिर सकते है…

ये कह कर रुक्मणी भी चली गयी….दोनो ने 1 घंटा पहले ही, छुट्टी ले ली…..रुक्मणी पहले अनुराधा के साथ उसके फ्लॅट मे गयी….वहाँ पर से अनुराधा ने अपनी एक साड़ी एक नाइटी और कुछ समान लिया….और फिर अपनी सास को बोला कि वो आज रुक्मणी के घर पर ही रहेगी.. वो पहले भी कई बार रुक्मणी के घर रात बिता चुकी थी…..फिर दोनो रुक्मणी के घर की तरफ ऑटो से चली गयी….रुक्मणी ने रास्ते मे से, खाने पीने की कुछ चीज़ें खरीदी और फिर घर पहुँच गई….

घर मे आकर उसने अपनी नौकरानी बिमला को बुलाया…..जब बिमला आई तो उसने उसे रात का खाना तैयार करने के लिए कहा…..और उसे कहा कि, वो 2 बोतल वाइन की अपनी पति से मंगवा दे…रुक्मणी ने उसे पैसे दिए….और बिमला पास ही के घर में चली गयी….जहा पर वो किराए पर रहती थी…..उसका पति दो बोतल वाइन ले आया….और बिमला ने वो वाइन रुक्मणी को लाकर दी…..रात की चुदाई की पार्टी का इंतज़ाम हो चुका था…..

दूसरी तरफ समीर ने भी अपना काम ख़तम किया, और स्टेशन से बाहर आकर अपना मोबाइल निकाला , और घर पर फोन किया….फोन सोनिया ने उठाया….समीर ने उससे कहा कि, आज रात कुछ ज़रूरी काम से उसे स्टेशन पर ही रुकना पड़ेगा….समीर कुछ देर मार्केट मे घमता रहा….जब अंधेरा होने लगा तो, उसका फोन बजने लगा…..फोन अनुराधा का था….

अनुराधा: हेलो समीर कहाँ रह गये……

समीर: जी अभी आ रहा हूँ….थोड़ी देर मे पहुँच जाउन्गा….

अनुराधा: ठीक है…..जल्दी आओ…..

फोन कट…..समीर ने बाइक रुक्मणी के दिए हुए पते की तरफ घमा दी….समीर जानता था कि आज रात बहुत लंबी होने वाली है….इसलिए वो एक मेडिसिन की दुकान पर रुका और एक दो गोली वियाग्रा की ले ली….वैसे तो समीर के जिस्म और बाबूराव मे इतनी जान थी कि, वो एक साथ रुक्मणी और अनुराधा की चुदाई तसल्ली से कर सकता था…..पर समीर आज उन्दोनो की गान्ड और चुनमुनिया पर अपने बाबूराव की ऐसी छाप छोड़ना चाहता था कि वो दोनो उसकी गुलाम हो जाए….और समीर ये भी जानता था कि, रुक्मणी और अनुराधा दोनो मालदार औरतें है…..दोनो के पास बहुत पैसा है…..वो वक़्त आने पर समीर की कोई भी जोरूरत पूरी कर सकती थी…

पर उसके लिए समीर को उन दोनो को अपने बाबूराव का आदी बनाना था…यही सोच कर उसने वियाग्रा खरीद ली फिर रुक्मणी के घर की तरफ चल पड़ा…..थोड़ी ही देर में वो रुक्मणी के घर के पास पहुँच गया….उसने अनुराधा को फोन किया, और अनुराधा ने फोन उठाया….

अनुराधा: हां बोलो समीर कहाँ पहुँचे……

समीर: जी मे उस गली मे पहुँच गया हूँ….पर समझ में नही आ रहा कि घर कॉन सा है…

अनुराधा : देखो तुम सीधा गली के एंड में आ जाओ…..राइट साइड पर सबसे आखरी घर है….उसके सामने खाली प्लॉट है…..

अनुराधा: ठीक है समझ गया……

और समीर ने फोन काटा….”अनुराधा क्या हुआ पहुँचा कि नही अभी तक”

अनुराधा: हां पहुँच गया है….तू जाकर गेट खोल और उसकी बाइक अंदर करवा ली….साला आज मुर्गा हाथ में आया है…..

रुक्मणी बाहर चली गयी…..उसने बाहर जाकर गेट खोला, और गेट पर खड़ी होकर इंतजार करने लगी..थोड़ी देर में समीर की बाइक उसके घर के सामने थी….जैसे ही समीर ने रुक्मणी को देखा तो उसने अपनी बाइक अंदर कर ली…रुक्मणी ने अंदर से गेट बंद किया…..”ज़्यादा तकलीफ़ तो नही हुई तुम्हे घर ढूँढने में….” रुक्मणी ने गेट बंद करने के बाद पूछा….

समीर: जी नही…..(रुक्मणी उस समय सिर्फ़ ब्लाउज और पेटिकोट में थी….उसके ब्लाउज के ऊपेर के दो हुक खुले हुए थे…..जिससे उसकी 38 साइज़ की बड़ी-2 चुचियाँ बाहर आने को उतावली हो रही थी…..समीर के बाबूराव में ये देखते ही सरसराहट होने लगी)

रुक्मणी भी समीर की नज़र को ताड़ गयी…..वो मुस्कुराते हुए बोली…..”चलो अंदर चलो…. यही खड़े-2 देखते रहोगे क्या……” रुक्मणी जान गयी थी कि, उन दोनो को समीर को सिड्यूस करने में ज़्यादा टाइम नही लेगगा…..रुक्मणी उसे साथ लेकर हाल में पहुँची….रुक्मणी का घर सच में बहुत बड़ा था….घर के सामने एक लॉन था……और पीछे की तरफ स्विम्मिंग पूल था….रुक्मणी के ससुर बहुत बड़े जागीरदार हुआ करते थे…..अपनी ढेर सारी दौलत और जायदाद वो रुक्मणी के पति के नाम कर गये थे…..

रुक्मणी ने उसे सोफे पर बैठाया……और कहा कि वो बैठे वो अभी आती है “जी वो अनुराधा जी कहाँ है…..” समीर ने रुक्मणी से पूछा….” अनुराधा चेंज करने गयी है….अभी आती है…..” ये कह कर रुक्मणी किचिन में चली गयी….और फिर कोल्ड्रींक ले आई…..समीर को कोल्ड्रींक देने के बाद बोली……”तुम बैठो में भी चेंज करके आती हूँ…..” जैसे ही रुक्मणी गयी…..समीर ने वियाग्रा की एक गोली निकाली, और कोल्ड्रींक के साथ निगल ली…..थोड़ी देर बाद रुक्मणी बाहर आई…..तो समीर के मुँह से सीटी निकल गयी…रुक्मणी ने रेड कलर का बाथरोब पहना हुआ था….. उसकी जाँघ समीर को सॉफ दिखाई दे रही थी…..

रुक्मणी: ऐसे क्या देख रहे हो….?

समीर: वो वो कुछ नही…..आप बहुत खूबसूरत लग रही है…..

रुक्मणी: अच्छा वैसे तुम्हे मुझ में क्या खूबसूरत लगता है….?

समीर: जी सब कुछ….

रुक्मणी: अच्छा तो फिर सब कुछ देखना भी चाहते होगे…..

समीर: जी अगर आप मौका दें तो……

रुक्मणी: (समीर के पास आकर अपना एक पैर उठा कर उसकी जाँघ पर रखते हुए) समीर आज तुम्हे ऐसे मोके मिलेंगे…..जो शायद दोबारा ना मिले….मेरी पायल उतारो ना….

समीर को ऐसे आशा नही थी…..ये तो खुला-2 आमंतरण था…..समीर थोड़ा नर्वस हो गया…उसने काँपते हुए हाथों से रुक्मणी की पायल उतारी….रुक्मणी ने फिर दूसरा पैर वैसे ही, उसकी जाँघ पर रख दिया….इस बार उसके पैर की उंगलियाँ सीधा उसके बाबूराव को छू गई….समीर का बाबूराव उसके पाजामे में तुनकि मारने लगा…..समीर ने वो पायल भी उतार दी….”घबराओ नही समीर……आज की रात तुम्हारे लिए यादगार होने वाली है…..अभी तुम्हे और भी कई सर्प्राइज़ मिलने है…..चल आजा” ये कह कर रुक्मणी आगे चलने लगी……

समीर खड़ा हुआ, और रुक्मणी के पीछे जाने लगा….रुक्मणी उसे घर के पीछे स्विम्मिंग पूल की तरफ ले गयी……वहाँ एक लंबी से चेर पर अनुराधा लेटी हुई थी….उसने भी महरूण कलर का बाथरोब पहना हुआ था……उसने अपनी एक टाँग लंबी कर बिछाई हुई थी, और दूसरी को घुटने से मोड़ा हुआ था….”ओह्ह्ह समीर आओ हम तुम्हारा ही वेट कर रही थी…..यहाँ बैठो….”रुक्मणी ने उसे अपने पास बैठा लिया…. और उसकी जाँघ को सहलाते हुए बोली….” समीर क्या लोगे…..”

समीर: जी वैसे मुझे तो दूध बहुत पसंद है…..ताज़ा निकला हुआ, पर आप जो भी पीला दें वो में पी लूँगा…..

अनुराधा: अर्रे वाह भाई तुम तो बहुत चन्ट हो बातें बनाने में……

समीर: जी बनाने में ही नही…..करने में भी चन्ट हूँ…..

अनुराधा: क्यों रुक्मणी लगता है आज की रात यादगार होने वाली है…..

रुक्मणी ने पास में टेबल पर रखी वाइन केए बोतल से एक ग्लास में वाइन डाल कर समीर को दी. और फिर अपने और अनुराधा के लिए एक -2 पेग बनाया….तीनो साथ में बैठ कर वाइन पीने लगे…. अनुराधा ने दो तीन सीप लिए….और अपने ग्लास को टेबल पर रख कर खड़ी हो गयेए….” चलो पूल में चलते है…..उफ्फ बहुत गरमी है यहाँ पर…..” ये कहते हुए, उसने अपने बाथरोब केए बेल्ट को खोला, और बाथरोब उतार दिया….समीर केए आँखे एक दम से चोंधया गयेए. ऊसे अनुराधा का फिगर देखते ही, जूलीया केए याद आ गयी…..

रत्ती भर भी कम नही था, अनुराधा का बदन….वैसे ही बड़े-2 तने हुए मम्मे, वैसे ही बाहर की तरफ निकली हुई गान्ड रेड कलर की ब्रा और वीशेप रेड कलर की पैंटी में कहर ढा रही थी…..अब अनुराधा अगर जूलीया अन्ना थी, तो रुक्मणी कहाँ से लिसा अन्ना से कम थी…..रुक्मणी ने भी अपना बाथरोब उतार दिया….उसने नीचे ब्लॅक कलर की ब्रा और ब्लॅक कलर की ही वीशेप पैंटी पहनी हुई थी…..अपने आप को इन दोनो गजब की सेक्सी औरतों के बीच पाकर समीर का बाबूराव उसके पाजामे में कुलाँचे भरने लगा…..”अब तुम किसकी वेट कर रहे हो….चलो कपड़े उतारो…..” समीर एक दम चोन्का और खड़ा होकर अपनी टी-शर्ट उतार दी. पर उसे याद आया कि, उसने नीचे अंडरवेर नही पहना तो वो एक दम से रुक गया….

अनुराधा: क्या हुआ समीर कोई प्राब्लम है…..?

समीर: जी वो मेने नीचे अंडरवेर नही पहना…….

अनुराधा: हंसते हुए, तो यहाँ कॉन सा कोई तुम्हे देख रहा है….सिर्फ़ हमारे सिवा….यार कोई बात नही आजा…..रुक्मणी ने अपना और अनुराधा के पेग को उठाया, और स्विम्मिंग पूल में उतर गयी….स्विम्मिंग पूल में सिर्फ़ कमर तक ही पानी था……समीर ने सोचा साला ये तो सीधे चुदाई का निमत्रण है…..ऐसा मौका हाथ से नही जाने देना चाहिए…..समीर ने अपना पयज़ामा भी उतार दिया….नर्वस होने के कारण उसका बाबूराव लटक गया था…..समीर अपने झूलते हुए, बाबूराव को लेकर स्विम्मिंग पूल में उतर गया……जैसे ही समीर पूल के अंदर आया, तो रुक्मणी उसके पास आ गयी…..और उसके होंटो पर अपना ग्लास लगाते हुए, एक जाम इस नयी दोस्ती के नाम….समीर ने एक सीप लिया, और मुस्कुरा कर रुक्मणी की तरफ देखा…. अनुराधा भी समीर के पास आई, और उसने भी अपने ग्लास को समीर के होंटो की तरफ बढ़ा दिया. रुक्मणी समीर के चौड़ी छाती को अपने एक हाथ से सहला रही थी…..समीर ने अनुराधा के ग्लास से भी एक सीप लिया….

समीर ने पूल के किनारे पड़े हुए अपने ग्लास को पकड़ा, और फिर धीरे-2 सीप करने लगी. अनुराधा और रुक्मणी दोनो अपने एक-2 हाथ से समीर के चौड़े सीने को सहला रही थी….अनुराधा बीच -2 में अपने हाथ को नीचे उसके पेट की ओर लेजाती, तो कभी रुक्मणी उसकी जाँघो को अपने हाथ से सहलाने लग जाती….समीर का बाबूराव अब धीरे-2 फिर से अपनी औकात में आने लगा था…..अनुराधा ने जब समीर के बाबूराव को खड़ा होते देखा, तो उसकी आँखो में चमक आ गयी….उसने इशारे से रुक्मणी को नीचे की और देखने को कहा…..और रुक्मणी की चुनमुनिया भी समीर के बाबूराव को देख कर कुलबुलाने लगी……..

अनुराधा: रुक्मणी चलो ना अब खाना खाते है……बहुत हो गया…..

रुक्मणी: हां चलो ना….

तीनो पूल से बाहर आए, और रुक्मणी ने समीर को एक टवल दिया…..समीर ने अपनी कमर पर टवल लपेटा…..और फिर अपने कपड़े उठा लिए…..रुक्मणी ने वहाँ पर बने हुए बाथरूम में जाकर अपनी गीली पैंटी और ब्रा उतार दी……फिर रुक्मणी और अनुराधा ने अपने बाथरोब पहने और घर के अंदर के तरफ जाने लगी…..अंदर आकर तीनो ने वैसे ही खाना खाया. शराब और शबाब का नशा अब तीनो पर हावी होने लगा था…..दोनो औरतें अब खुल कर बाथरोब में छुपे हुए अपने बदन का समीर को दीदार कराने लगी थी….

समीर का तो बुरा हाल हो चुका था…..बाबूराव ठुमकी पे ठुमकि मार रहा था……”तो समीर बाबू आपने कहा था कि आपकी कोई गर्लफ्रेंड नही है…..” अनुराधा ने रुक्मणी की ओर देखते हुए कहा……”जी नही है……” समीर ने भी रुक्मणी की ओर देखते हुए कहा……

रुक्मणी: तो प्यार के खेल में अभी अनाड़ी हूँ…..?

समीर: जी हां प्यार के खेल में हूँ……पर मस्ती के खेल में नही…..

औराधा: ओह्ह अच्छा फिर तो तुम बड़े छुपे रुस्तम निकले…….यार रुक्मणी मेने कहा था ना अपने समीर बाबू जितने भोले दिखते है , उतने है नही…..

समीर: यार ये आप बार-2 मेरे नाम के पीछे बाबू क्यों लगा रही हो…..

अनुर्धा: क्यों तुम्हे अच्छा नही लगता…..

समीर: नही बिल्कुल नही…..और वैसे भी हम अब दोस्त है…..आप मुझे समीर बुला सकती है.

रुक्मणी: वैसे तुम कह रहे थे कि, तुम मस्ती करने में अनाड़ी नही हो…..हमे भी तो पता चले कि तुमने कहाँ और किसके साथ मस्ती की है…..

समीर: छोड़िए वो बातें अब पुरानी हो गयी है….अगर आप कहे तो आज रात भी खूब मस्ती हो सकती है……

रुक्मणी: अच्छा….(रुक्मणी अपनी चेर से उठी, और बड़ी ही अदा के साथ चलते हुए समीर के पास आई, और अपनी एक बाँह को समीर के गले में डाल कर समीर की गोद में बैठ गयी) तो जनाब आज मस्ती के मूड है…..(रुक्मणी ने अनुराधा की और देख कर मुस्कुराते हुए कहा)

समीर: हां मूड में तो हूँ…..पर अगर आप कहे तो….

रुक्मणी: हां खूब पता चल रहा है तुम्हारे मूड का….(रुक्मणी ने अपनी गान्ड के नीचे चुभते हुए समीर के बाबूराव को महसूस करके कहा…..)

समीर: वो कैसे….?

रुक्मणी: वो कैसे…..तुम्हारा हथियार जो अभी मेरे हिप्स पर चुभ रहा है….

समीर: तो क्या इरादा है…..?

रुक्मणी: यार समीर आज की रात हम यहाँ मस्ती करने के लिए तो इकट्ठे हुए है…..

ये कहते हुए रुक्मणी समीर की गोद से खड़ी हुई, और समीर का हाथ पकड़ कर उसे बेड रूम की तरफ ले जाने लगी…..अनुराधा भी उसके पीछे रूम में आ गयी…..रुक्मणी ने रूम में पहुँच कर समीर को बेड पर धक्का दे दिया…..और अनुराधा ने पीछे से रूम के डोर को लॉक कर दिया….

कहानी अभी बाकी है दोस्तो

दोस्तो आप को कहानी कैसी लग रही है मुझे ज़रूर बताए मुझे आपके कमेंट्स का इंतजार रहेगा