एक औरत की दास्तान–8

उधर उन दोनो से थोड़ी दूर बैठा समीर उनकी बातों को सुन कर एक दम हैरान था Hindi Sex Stories Antarvasna Kamukta Sex Kahani Indian Sex Chudai उनकी बातें सुन कर उसका बाबूराव एक दम तन चुका था….और अब दर्द भी करने लगा था….समीर इतना तो जान गया था कि, ये साली दोनो शरीफ दिखने वाली औरतें कितनी चुदेल है….और उसे अब उनकी दुखती रग का भी पता था…..रुक्मणी और अनुराधा दोनो उँची कद काठी की औरतें थी…..दोनो की हाइट 5 फुट 6 इंच के करीब थी…..दोनो के गान्ड बहुत बड़ी और बाहर की ओर निकली हुई थी….दोनो ज़्यादातर साड़ी ही पहनती थी….

शाम को समीर घर वापिस आया, और ऊपेर चला गया….शाम के 5:30 हो रहे थे…लाइट एक बार फिर से गुल थी….सोनिया पढ़ने के बहाने ऊपेर छत पर आकर चेर पर बैठ गये. रुखसाना नीचे काम में बिज़ी थी….जब समीर ने सोनिया को बाहर छत पर देखा तो वो भी रूम से निकल कर बाहर आ गया……और इधर उधर टहलने लगा….सोनिया चोर नज़रों से बार-2 समीर की और देख रही थी….”कैसे रहा आज स्कूल में” समीर ने सोनिया के पास से गुज़रते हुए कहा…..सोनिया समीर की आवाज़ सुन कर एक दम चोन्कि, और फिर नज़रें झुका कर मुस्कुराते हुए बोली….”जी अच्छा रहा….”

समीर: (फिर से सोनिया के पास से गुज़रते हुए) एक बात पूछूँ……

सोनिया: (नज़रे किताब में गढ़ाए हुए) जी…….

समीर: क्या स्कूल मे स्कर्ट पहन कर जाना ज़रूरी है…..?

सोनिया: (सोनिया को समीर के ये सवाल अजीब सा लगा) जी स्कूल मे यही ड्रेस है….

समीर: क्यों सलवार कमीज़ में नही जा सकते…….

सोनिया: नही स्कूल वाले अलाउ नही करते….पर आप क्यों पूछ रहे है….क्या कुछ ग़लत है.

समीर: नही स्कर्ट पहनना तो ग़लत नही है…..पर जब तुम स्कूल के अंदर गयी तो, तुम्हे याद है तुम्हारे सामने से दो लड़के आ रहे थे बाहर की तरफ….

सोनिया: हां वो तो मेरी ही क्लास में है…..तो क्या हुआ…..?

समीर: कुछ नही वो बस तुम्हारे बारे में कुछ ग़लत कह रहे थे……

सोनिया: क्या बोल रहे थे….वो……

समीर: छोड़ो त तुम्हे नही बता सकता…कि कैसे कैसे गंदे वर्ड्स बोल रहे थे तुम्हारी बारी…..

सोनिया: वो है ही ऐसे आवारा……..उनके तो कोई मुँह भी नही लगता……

समीर: वैसे वो जो भी बोल रहे थी तुम्हारे बारे है तो वो सच…

सोनिया: (समीर की बात सुन कर हैरान परेशान रह गयी….) क्या ?

समीर: हां सच कह रहा हूँ……अगर टाइम आया तो तुम्हे जरूआर बताउन्गा…..

ये कह कर समीर अपने रूम मे चला गया…..सोनिया लड़को की बातों से अंज़ान नही थी. कुछ तो उसे भी मालूम ही था…..उस रात कुछ ख़ास नही हुआ, सोनिया की मौजूदगी में समीर और में दूर -2 ही रहे…..मैं उस रात खूब सोया……अगले दिन भी समीर ही सोनिया को चोदने को गया……उस दिन समीर सिर्फ़ एक लोवर और टी-शर्ट पहन कर ही स्टेशन पर गया… ये समीर ने पहले से प्लान कर रखा था…..जब समीर स्टेशन पर पहुँचा तो, आजमल ने समीर से कहा…..”अर्रे यार क्या बात है…..आज नाइट सूट में ही चले आए हो….ख़ैरयत तो है…..”

समीर: हाँ सिर सब ठीक है बस थोड़ी सी तबीयत खराब थी….इसलिए नहाने और तैयार होने का मन नही किया….ऐसे ही चला आया…..

आजमल: यार अगर तबीयत खराब थी तो फोन कर देते….और आज घर पर रेस्ट कर लेते…

समीर: सर घर में पड़ा-2 बोर हो जाता…..और वैशे भी यहाँ काम होता ही कितना है….

आजमल: हाँ वो तो है, वैसे मेडिसिन ली ना ?

समीर: जी सर खाई है…..

समीर जाकर अपनी चेर पर बैठ गया….उसने टिकेट काउंटर खोला और पहली ट्रेन के मुसफ़ीरों को टिकेट देने लगा…..थोड़ी देर बाद रुक्मणी और अनुराधा भी आ गयी…..समीर से हाए हेलो बोल कर वो अपने कामो में लग गयी……

अगली ट्रेन एक घंटे बाद थी….कुछ मुसाफिर तो अगली ट्रेन के टिकेट पहले से ही ले चुके थे….समीर चेर पर बैठा-2 कल की तरह रुक्मणी और औराधा की बातों को सुनने लगा…..कंट्रोल रूम में पीछे की तरफ बाथरूम थे……जिनमे एक लॅडीस था और एक जेंट्स….तभी अनुराधा उठ कर बाथरूम की तरफ गयी….तो वो समीर के पीछे से गुज़री…..समीर की जैसे ही नज़र साड़ी में क़ैद अनुराधा की गान्ड पर पड़ी….समीर का बाबूराव तुनक उठा…..और उसका बाबूराव पाजामे में कुलाँचे भरने लगा…..समीर ने जो प्लान सोचा था….अब उसको काम में लाने का टाइम आ गया था….”आहह कैसे दिखती होगी अनुराधा की गान्ड कितनी मोटी है साली के एक बार मिल जाए तो आह….” ये सोचते हुए समीर का बाबूराव पूरी औकात में आ गया…..

समीर के बाबूराव ने उसके पाजामे में तन कर तंबू सा बना दिया….जो बाहर से देखने से सॉफ पता चल रहा था….थोड़ी देर बाद अनुराधा के कदमो की आवाज़ आई…..समीर अपनी पीठ पीछे टिका कर चेर पर लेट सा गया….और अपने पायजामे के ऊपेर से अपने बाबूराव को जड से पकड़ लिया….ताकि वो ज़्यादा से ज़्यादा बड़ा दिख सके….उसने अपनी आँखें बंद कर ली, और वोही हुआ जो समीर चाहता था….जब अनुराधा वापिस आई, और समीर के पीछे से गुजरने लगी, तो उसकी नज़र समीर पर पड़ी…जो अपने हाथ से अपने बाबूराव को पाजामे के ऊपेर से पकड़े हुए था….अनुराधा एक दम धीरे-2 चलाने लगी…..और समीर के बाबूराव का मुयायना करने लगी….

पर वो रुक नही सकती थी….वो वापिस अपने टेबल पर आए और चेर पर बैठ कर सोचने लगी. थोड़ी देर सोचने के बाद, उसने रुक्मणी को धीरे से बुलाया, और अपने पास आने को कहा.. रुक्मणी उठी, और चेर खिसका कर अनुराधा के पास करके बैठ गयी….

अनुराधा: (एक बार इधर उधर देख कर) अये रुक्मणी वो देख लगता है, आज समीर हीरो का बाबूराव उसे तंग कर रहा है….देख साला कैसे अपने बाबूराव को पकड़ कर बैठा है….

रुक्मणी: तुमने देखा उसे अपना पकड़े हुए….?

अनुराधा: हां अभी देखा है…..ये देख तो सही….

रुक्मणी उठी, और बाथरूम की तरफ जाने लगी…..जब वो समीर के पीछे से गुज़री, तो उसने पलट कर तिरछी नज़रों से समीर की तरफ देखा, जो अभी भी अपने आँखे बंद किए हुए, लेटा हुआ था….समीर ने अभी भी अपने बाबूराव को हाथ में पाजामे के ऊपेर से थाम रखा था….रुक्मणी अच्छे से तो नही देख पे…..पर वो बाथरूम में चली गयी…रुक्मणी के जाने के बाद, समीर उठा और बाथरूम की तरफ चला गया….वो बाथरूम में घुसा, और जान बूझ कर कुछ आहह अह्ह्ह की आवाज़ की, और अपने पाजामे को नीचे सरका दिया….

समीर ने अपने बाथरूम का डोर थोड़ा सा खोल रखा था….और दीवार की तरफ देखते हुए, अपने बाबूराव को हाथ से सहलाने लगा….रुक्मणी उससे अगले बाथरूम में बैठी हुई समीर की आवाज़ सुन कर चोंक गयी….वो बाथरूम से बाहर आई तो उसने देखा कि साथ वाले जेंट्स बाथरूम का डोर हलका सा खुला हुआ था….अंदर लाइट जल रही थी…..जिससे अंदर का नज़ारा सॉफ दिखाई दे रहा था…..रुक्मणी धीरे से थोड़ा आगे बढ़ी….और दीवार से सटते हुए अंदर झाँका…..उसके हाथों मे पहनी हुई चूड़ियों की आवाज़ ने उसकी मौजूदगी से समीर को आगाह करवा दिया…..समीर ने अपने बाबूराव को जड से पकड़ कर दबाया, और उसका लंड और लंबा हो गया…..जैसे ही रुक्मणी ने अंदर देखा तो उसका केलज़ा मुँह को आ गया…..

अंदर समीर अपने मुनसल जैसे बाबूराव को हिला रहा था…..समीर के बाबूराव की लंबाई और मोटाई देख कर रुक्मणी की गान्ड का छेद फुदकने लगा….चुनमुनिया कुलबुलाने लगी…..समीर ने थोड़ी देर अपने बाबूराव का दीदार रुक्मणी को करवाया, और अपना पाजामा ऊपेर करने लगा…. रुक्मणी जल्दी से वापिस आ गयी…..और अनुराधा के पासकर बैठ गयी….उसकी साँसे उखड़ी हुई थी. और आँखो में जैसे वासना का नशा भरा हो…..”क्या हुआ रुक्मणी…तेरी साँस क्यों फूली है….” अनुराधा ने रुक्मणी के लाल चेहरे और उखड़ी हुई सांसो को देख कर पूछा….”पूछ मत यार, क्या लौडा है साले अपने हीरो का…..बाप रे बाद इतना बड़ा और मुनसल जैसा बाबूराव साला जैसे गधे का लंड हो….”

अनुराधा: क्या बोल रही है तू…..?

रुक्मणी: सच कर रही हूँ अनु……तू अगर एक बार देख लेती, तेरी चुनमुनिया की धुनकि बजने लगती….साले का ये लंबा बाबूराव है….(रुक्मणी ने हाथ से इशारा करते हुए दिखाया…) और इतना मोटा….मेने तो इतना मोटा बाबूराव कभी नही देखा…

अनुराधा: सच कह रही है तू ?

रुक्मणी: हां सच में तेरी इस मोटी गान्ड की कसम….

अनुराधा: चुप कर रंडी साली जब देखती हूँ….मेरी गान्ड के पीछे ही पड़ी रहती है.

रुक्मणी: तो क्या बोलती है…..साले चिकने को फँसाया जाए…..

अनुराधा: नही रुक्मणी ये ठीक नही……देख वो हमारे साथ जॉब करता है….जवान खून है अगर साले ने बाहर किसी के सामने कुछ बक दिया तो ख़ामाखाँ बदनामी हो जाएगी…

रुक्मणी: अर्रे यार कुछ नही होता साले को सॉफ -2 बोल देंगे मज़ा लो और अपना -2 रास्ता नापो. और तू तो है ही समझदार….यार पटा ना उसे….

अनुराधा: अच्छा -2 देखती हूँ…पहले ये तो पता चले साले का लौडा चुनमुनिया और गान्ड मारने के लिए उतावला है भी या नही….

रुक्मणी: यार कुछ भी कर पर जल्दी कर…..मेरी चुनमुनिया और गान्ड दोनो छेद में खुजली हो रही है….जब से उसका बाबूराव देखा है…..

अनुराधा: अच्छा तू बैठ अपनी टेबल पर जाकर….देखती हूँ कि, अपना चिकना हाथ आने वाला है कि नही….

रुक्मणी अपने टेबल पर जाकर बैठ गयी….और अनुराधा उठ कर समीर के पास गयी…और समीर के पास जाकर चेर पर बैठते हुए बोली…..”और समीर बाबू कैसे हो…..क्या बात है आज बड़े फॉर्मल कपड़ो में जॉब पर चले आए…..”

समीर: वो बस ऐसे आज तबियत थोड़ी खराब थी…..नहाने और तैयार होने का मन नही किया, तो ऐसे ही चला आया…..

अनुराधा: ( थोड़ा सा झुक कर उसे अपने ब्लाउज के अंदर क़ैद दोनो तरबूजों के बीच की घाटी के दर्शन करवाती हुई) उफ्फ ये गरमी भी ना…..और कहाँ पर रह रहे हो……

समीर: ये वो जो अपने यहाँ काम करता है ना फ़ारूक़ उसी के घर पर किराए पर रह रहा हूँ.

अनुराधा: अच्छा कितना किराया ले रहा है वो तुमसे….

समीर: ये खाने का मिला कर 4000 रुपये दे रहा हूँ…..

अनुराधा: ये तो बहुत ज़्यादा है….पहले बताया होता तो तुम्हे रुक्मणी के घर मे रूम दिलवा देती…..उसका इतना बड़ा घर है….और रहने वाले सिर्फ़ दो जने है बेटा उनका बाहर देल्ही में पढ़ रहा है…..

समीर: कोई बात नही में ठीक हूँ….

अनुराधा: और कभी हमारे साथ भी बैठ कर बातें वाते कर लिया करो…..यूँ अकेले बैठे-2 बोर नही हो जाते……

समीर: जी ज़रूर….में सोचता था कि शायद आप दोनो को बुरा ना लगे कि में आपके साथ ही चिपका रहता हूँ……

अनुराधा: अर्रे चिपकने को थोड़ा ही बोला है…बातें करने को कह रही हूँ…..

समीर: ओह्ह सॉरी मेरा मतलब वो नही था…..वैसे में भी बोर हो जाता हूँ….घर जाकर भी अकेले रूम मे बैठा-2 उकता जाता हूँ…..

अनुराधा: तुम्हारी कोई गर्लफ्रेंड है कि नही…..

समीर: नही….

अनुराधा: क्यों हॅंडसम अच्छी शक्ल सूरत है बॉडी भी अच्छी बनाई हुई है…..फिर क्यों नही है…..

समीर : वैसे और भी एक बहुत खूबी है मुझमे…..पर आप तो जानती है ना…आज कल की लड़कियों को….बस महँगे-2 गिफ्ट और बदले में क्या….बस पैसे बर्बाद…..

अनुराधा: अच्छा शाम को क्या कर रहे हो…..?

समीर: कुछ ख़ास नही….

अनुराधा: तो चलो आज रुक्मणी के घर मे पार्टी करते है….ड्रिंक तो कर ही लेते हो ना.

समीर: जी कभी-2

अनुराधा: और कोई शौक भी है तो बता दो…..उसका अरेंज्मेंट भी कर लेंगे…

समीर: जी शौक तो बहुत है…..जैसे-2 जान पहचान बढ़ेगी…..आपको पता चल जाएगा…

अनुराधा: अच्छा ऐसी बात है…चलो देखते है…..