एक औरत की दास्तान–7

गान्ड से बहता हुआ तैल नीचे समीर Hindi Sex Stories Antarvasna Kamukta Sex Kahani Indian Sex Chudai के बाबूराव और मेरी चुनमुनिया पर आने लगा….तभी उसने वो किया जिससे मैं एक दम से उचक से गयी…..पर समीर ने मुझे मेरी कमर से कस्के पकड़ लिया, समीर ने अपनी उंगली को मेरी गान्ड के छेद पर रगड़ना शुरू कर दिया….मेरी कमर को पकड़ते ही, उसने तीन चार जबरदस्त वार मेरी चुनमुनिया पर किए, चुनमुनियँ बहाल हो उठी, और मुझ मे विरोध करने की शक्ति ना बची….उसने फिर से मेरी गान्ड को दोनो हाथों से दबोच कर फैलाया, और फिर अपने दाएँ हाथ के अंगूठे से मेरी गान्ड के छेद को कुरदेने लगा…..

एक के बाद एक मेरी कमर उसके अंगूठे की हरकत के साथ झटके खाने लगी….उसका बाबूराव एक रफतार से मेरी चुनमुनिया के अंदर बाहर हो रहा था….और उसका अंगूठा अब मेरी गान्ड के छेद को और ज़ोर से चौड़ाने लगा था….मैं इतनी गरम हो चुकी थी कि, अब मैं समीर का विरोध करने की हालत मे नही थी….वो जो भी कर रहा था….मैं चुप चाप उसका बाबूराव अपनी चुनमुनियाँ मे लेते हुए करवा रही थी…उसने मेरी गान्ड के छेद को अब उंगली से दबाना शुरू कर दिया…..तैल की वजह से और उसकी उंगली रगड़ के कारण मेरी गान्ड का कुँवारा छेद नरम होने लगा…

और मुझे अपनी गान्ड के छेद पर मस्ती से भरी हुई गुदगुदी होने लगी थी…..जिसे महसूस करके मेरी चुनमुनिया और पानी बहा रही थी…..फिर उसने अपनी उंगली को धीरे-2 से मेरी गान्ड के छेद पर दबाया….और उंगली का अगला भाग मेरी गान्ड के छेद मे उतरता चला गया…पहले तो कुछ खास महसूस नही हुआ….पर जैसे ही उसकी आधे से थोड़ी कम उंगली मेरी गान्ड के छेद मे घुसी, तो मुझे तेज दर्द महसूस हुआ…..”आहह समीर मत करो दर्द हो रहा है…” समीर शायद समझ गया था कि, मेरी गान्ड का छेद एक दम कोरा है…..वो कुछ पलों को रुका और फिर उतनी ही उंगली मेरी गान्ड के छेद के अंदर बाहर करने लगा……

उसने मेरी चुनमुनिया से अपने बाबूराव को बाहर निकाला, और फिर गान्ड के छेद से उंगली को निकाल कर चुनमुनिया मे पेल दिया…और चुनमुनिया मे अंदर बाहर करते हुए घूमने लगा….”हाई समीर ये क्या क्या कर रहे है आप ओह्ह्ह्ह ऐसे मत करिए…..” समीर ने फिर से मेरी चुनमुनिया से उंगली बाहर निकाली, और चुनमुनिया मे अपना मुन्सल बाबूराव घुसेड कर धक्के लगाने शुरू कर दिए… उसके उंगली मेरी चुनमुनिया के पानी से एक दम तरबतर हो चुकी थी…..उसने फिर उसी उंगली को मेरी गान्ड के छेद पर लगाया….और मेरी चुनमुनिया के पानी को गान्ड के छेद पर लगाते हुए तर करने लगा….मुझे ये सब बड़ा अजीब सा लग रहा था…..समीर ने फिर से अपनी उंगली मेरी गान्ड के छेद मे घुसेड दी….इस बार समीर ने कुछ ज़्यादा ही जल्दबाजी दिखाई…..

अगले ही पल उसकी पूरी उंगली मेरी गान्ड के छेद मे थी….मैं दर्द से एक दम कराह उठी..” भले दर्द बहुत ज़्यादा नही था…..” पर मुझे अब तक समीर के इरादे समझ आ चुके थे. और मैं उसके इस इरादे से घबरा गयी थी….”हाई समीर ईए क्या कर रहे है…..वहाँ से उंगली निकाल लो……बहुत दर्द हो रहा है……” पर समीर ने मेरी कहाँ सुनी…वो अब अपनी एक उंगली को मेरी गान्ड के छेद मे अंदर बाहर करने लगा…..मुझे दर्द हो रहा था….पर कुछ पल और कुछ पल और मेरी गान्ड का छेद और नरम और नरम पड़ता गया….मेरी चुनमुनिया के पानी और तैल ने गान्ड के छेद के छल्ले की सख्ती बहुत कम दी थी…..

अब तो समीर बिना किसी रोक टोक के मेरी गान्ड के छेद को अपनी उंगली से चोद रहा था…..मैं एक दम मस्त हो गयी…..मुझे पता नही चला कि, कब समीर की दो उंगलियाँ मेरी गान्ड के छेद के अंदर बाहर होने लगी……तभी दर्द तो कभी मज़ा कैसा अजीब है ये सेक्स का मज़ा….. फिर समीर ने अपना बाबूराव मेरी चुनमुनिया के छेद से बाहर निकाला, और मेरी गान्ड के छेद पर टिका दिया. उसकी इस हरकत से मैं एक दम दहल गयी……”नही समीर ये ऐसा मत करो…..मैं दर्द सहन नही कर पाउन्गी…….” पर समीर तो जैसे मेरी बात सुनने को तैयार ही नही था….

उसने दो तीन बार अपने बाबूराव के सुपाडे को मेरी गान्ड के छेद पर रगड़ा, और फिर धीरे-2 मेरी गान्ड के छेद पर दबाता चला गया…..जैसे ही उसके सुपाडे का अगला हिस्सा मेरी गान्ड के छेद मे उतरा…..मैं बिचक कर आगे हो गयी….दर्द बहुत तेज था……”नही समीर मुझसे नही होगा…..तुम्हे हो क्या गया है….” मेने अपनी गान्ड के छेद को अपनी उंगलियों से सहलाते हुए कहा….”चुप कर मुझे आज तेरे गान्ड मारनी ही है……..” ये कह कर उसने मुझे सोफे से खड़ा किया, और खेंचते हुए बेड पर लेजा कर पटक दिया…..

फिर उसने मेरी टाँगों को पकड़ कर उठाया और अपने कंधे पर रखा लिया….और एक हाथ से अपने बाबूराव को पकड़ कर मेरी गान्ड के छेद पर टिका दिया…..मैं समझ चुकी थी…अब समीर एक नही सुनने वाला…..”धीरे से करना समीर” मेने अपने हाथों मे बेडशीट को दोबचते हुए कहा……और अगले ही पल “गच” एक तेज आवाज़ के साथ उसका लौडा मेरी गान्ड के छेद को चीरता हुआ, आधे से ज़्यादा अंदर घुस गया…..दर्द के मारे मेरा पूरा बदन ऐंठ गया….आँखे जैसे पथरा गयी….मूह खुल गया….और मैं साँस लेने के लिए तड़पने लगी. मुझे यकीन नही हो रहा था कि, समीर मेरे साथ इतनी वहसियत से पेश आएगा…

“बस रुखसाना हो गया……..बस हो गया……..” और उसने उतने ही बाबूराव को मेरी गान्ड के छेद के अंदर बाहर करना शुरू कर दिया….उसके हर धक्के के साथ मुझे अपनी गान्ड के छेद का माँस भी अंदर बाहर खींचता हुआ महसूस हो रहा था……पर उसका बाबूराव तैल और मेरी चुनमुनिया के पानी से एक दम भीगा हुआ था…..इसलिए गान्ड का छेद थोड़ा नरम हो गया था… 1 मिनिट 2 मिनिट 3 मिनिट बीते किसी तरह और मेरी गान्ड मे उठा दर्द अब ना के बराबर रह गया था…..अब उसके बाबूराव के सुपाडे की रगड़ मुझे अपनी गान्ड के अंदर की दीवारो पर सुखद अहसास कराने लगी थी…..मैं आहह ओह्ह करने लगी….

.”दर्द हो रहा है अभी भी….” उसने अपने बाबूराव को और अंदर की ओर धकेलते हुए कहा

……”आह थोड़ा सा हो रहा है……तुम जल्दी करो…..” मेने उसे जल्द से पानी छोड़ने के लिए कहा…..धीरे-2 अब उसका पूरा बाबूराव मेरी गान्ड के छेद के अंदर बाहर होने लगा….दर्द और मस्ती की तेज लहर बदन मे दौड़ रही थी……ढेरे-2 उसके धक्को की रफतार बढ़ने लगी….और फिर वो मेरी गान्ड के छेद में झड़ने लगा….. पिछला एक घंटा बहुत मुस्किल से बीता था…..समीर ने अपना बाबूराव बाहर निकाला….और मेरी सलवार से सॉफ करके बाहर चला गया…..

मैं किसी तरह उठी, और बाथरूम मे गयी…..अपनी चुनमुनिया और गान्ड को अच्छे से धोया…और फिर कपड़े पहन कर बाहर आई…..समीर वापिस चला गया….अब समीर जब स्टेशन पर पहुँचा तो 3 बजे चुके थे……समीर ने टिकेट काउंटर खोला और काम मे बिज़ी हो गया. स्टेशन पर सिर्फ़ एक टिकेट विंडो थी…..जो मेन कंट्रोल रूम मे ही थी…

समीर से कुछ ही दूरी पर एक टेबल अनुराधा नाम की औरत का था…..उसकी उम्र उस समय लगभग 40 साल की थी….उसके बच्चे अब्रॉड मे स्टडी कर रहे थे…..और हज़्बेंड की पोस्टिंग दूसरे सहर के स्टेशन पर थी……अनुराधा अपनी साँस के साथ रेलवे कॉलोनी मे बने फ्लॅट मे रहती थी. उसके पास 3 रूम का फ्लॅट था……

उसके हज़्बेंड महीने मे दो बार आते थे…..अनुराधा पढ़ी लिखी और खुले विचारो वाली औरत थी….और बेहद रंगीन मिज़ाज थी…..शादी शुदा जिंदगी के 20 सालो मे वो 5-6 बाबूराव तो ले ही चुकी थी….पर वो हरकीसी ऐरे गैरे के साथ ही संबंध नही बनाती थी….

अनुराधा से आगे रुक्मणी का टेबल था…..रुक्मणी का रुक्मणी भी 40 साल की थी…..रुक्मणी का एक ही बेटा था…..जो देल्ही मे रह कर पढ़ रहा था….उसके हज़्बेंड का तीन साल पहले बहुत बुरा आक्सिडेंट हो गया था….जिसके कारण उसके हज़्बेंड पॅरलेलिज़्ड हो गये थे…..और बेड पर पड़े रहते थे…..उनकी देख भाल के लिए उन्होने एक कामवाली को रखा हुआ था…जो उनके सारे काम करती थी….रुक्मणी के हज़्बेंड को भी गवर्नमेंट जॉब से रेटायरमेंट मिली हुई थी…दोनो की कमाई काफ़ी थी…..इसीलिए सुख की जिंदगी जी रही थी….वो शहर से थोड़ा सा बाहर अपने खुद के मकान मे रहती थी….जो उसके पति का पुस्तैनी घर था…..घर काफ़ी बड़ा था….रुक्मणी के घर मे 6 बेड रूम थे…..तीन नीचे और तीन पहली मंज़िल पर……

शाम के समय तक लगभग सारा स्टाफ फ्री हो जाता था….समीर अभी अपने काम मे वयस्त था…..धीरे-2 मुसाफिर जो टिकेट लेने के लाइन मे खड़े थे, कम हो गये. समीर अपनी चेअर पर आँखे मूंद कर बैठ गया….स्टेशन मास्टर फ़ारूक़ बाहर निकल गये…..

जैसे ही अजमल बाहर गया तो दोनो औरतें शुरू हो गयी…..रुक्मणी अनुराधा के पास आकर बैठ गयी…..”और अनुराधा कल तो तेरा पति आया था…..खूब चुदाई की होगे तुम लोगो ने…..”

अनुराधा: अर्रे धीरे बोल वो समीर भी है….अगर उसने सुन लिया तो…..

रुक्मणी: अर्रे सुन लेगा तो क्या होगा……उसके पास भी तो बाबूराव है…..और सारी दुनिया करती है ये काम…..हम क्यों किसी से डरे…..

अनुराधा: अर्रे नही यार अच्छा नही लगता…..अगर सुन लेगा तो क्या सोचेगा बेचारा…..

रुक्मणी: तू वो छोड़ बता ना कल तो ज़रूर तेरी गान्ड का बॅंड बजाया होगा भाईसहाब ने..

अनुराधा: अर्रे कहाँ….अब उनमे वो बात नही रही……ऊपेर से इतनी तोंद (पेट बाहर निकाल लिया है…..कि दो तीन धक्को मे ही उनकी साँस फूलने लगती है…..)

रुक्मणी: तो मतल्ब कुछ नही हुआ हाँ….?

अनुराधा: अर्रे नही वो बात नही है…..पर अब वो मज़ा नही रहा….एक तो उनका मोटापा और अब उम्र का असर भी होने लगा है…..कितनी बार कह चुकी हूँ कि सुबह जिम मे जाया करें कसरत वसरत कर करें…..पर मेरी सुनते ही कहाँ है वो…..

रुक्मणी: मतलब तेरी गान्ड का बॅंड नही बजा इस बार हाहाहा……

अनुराधा: अर्रे कहाँ गान्ड तो मारी…पर बाबूराव बड़ी मुस्किल से घुसा पाते है अब गान्ड मे. अब तो उनका लौडा भी ढीला पड़ने लगा है……तुम्हे तो सब पता है….जब तक गान्ड से पुर्र्रर-2 की आवाज़ ना आए, तो मज़ा कहाँ आता है……और उसके लिए मोटा सख़्त बाबूराव चाहिए….तू सुना तेरी कैसे चल रही है…तेरा भतीजा तो तेरी गान्ड की बॅंड तो बजा ही रहा होगा…..

रुक्मणी: ह्म्म क्या यार क्यों दुखती रग पर हाथ रखती हो…..यार उसकी माँ ने एक दिन देख लिया था….तब से वो घर नही आया…..

अनुराधा: चल पहले तो बहुत ऐश कर ली तूने…..देख कितनी मोटी गान्ड हो गयी है तेरी….

रुक्मणी: यार चुनमुनिया तक तो ठीक था लड़का……पर साले का 5 इंच का बाबूराव क्या खाक मेरी गान्ड की बॅंड बजाता…..सिर्फ़ 2 इंच ही अंदर जाता था…..बाकी 2-3 इंच तो चुतड़ों मे ही फँस कर रह जाता था…….

रुक्मणी की ये बात सुन कर अनुराधा खिलखिला कर हँसने लगी…..”अनुराधा तुम्हे वो आदमी याद है…..जो उस दिन इस स्टेशन पर ग़लती से उतार गया था…..” रुक्मणी की बात सुनते ही, अनुराधा की चुनमुनिया से पानी बाहर आकर उसकी कच्छि को भिगोने लगा…..

अनुराधा: यार मत याद दिला उसकी…..साले का क्या बाबूराव था…..एक दम मुनसल था मुनसल…

रुक्मणी: हां यार मर्द हो तो वैसा….साले ने हम दोनो की गान्ड रात भर बजाई थी…गान्ड और चुनमुनिया दोनो का ढोल बजा दिया….कैसे गान्ड से पर-2 की आवाज़ आ रही थी तेरे….

अनुराधा: और तेरी गान्ड ने क्या कम पाद मारे थे…..साले के धक्के थे ही इतने जबरदस्त कि, साली गान्ड हवा छोड़ ही देती थी….

रुक्मणी: हां अन्नू यार मेरी तो अभी से गान्ड और चूत मे खुजली होने लगी है….कुछ कर ना….यार कहीं से बाबूराव का इंतज़ाम कर……

अनुराधा: यार वैसे लौन्डे तो बहुत पीछे है……पर साला काम का कॉन सा है….पता नही लग रहा…अब हर किसी को तो ये कहने नही लगी कि, पहले अपना बाबूराव दिखा….किसी साले को घर बुला लिया….और बाद मे 5 इंच की नुन्नि निकली तो फिर सारा काम बिगड़ ना जाए…..

रुक्मणी: यार मैं तो नज़रें जमाए हुए हूँ….तू भी देख शायद कोई काम का लौंडा मिल जाए…..