एक औरत की दास्तान–6

समीर मेरी तरफ बढ़ा……मेरी चुनमुनिया Hindi Sex Stories Antarvasna Kamukta Sex Kahani Indian Sex Chudai मेरी जाँघो और टाँगों के बीच दबी हुई धुनक-2 करने लगी…..समीर मेरी तरफ बढ़ रहा था…..पर मैं उसकी तरफ देख भी नही पा रही थी….समीर मेरे पास आया…और उसने मुझे एक बार फिर से गोद मे उठा लिया…..मेने समीर के सीने मे अपना चेहरा छुपा लिया….उसने मुझे खाट पर पटका…..और मेरे ऊपेर छाता चला गया…..थोड़ी देर मे ही वो मेरी टाँगों के बीच मे था….मेरी टाँगें उसकी जाँघो के ऊपेर थी….उसने अपनी हथेली मेरी चुनमुनिया पर रखी, तो मेरे मूह से आह निकल गयी….मेने अपनी चुनमुनिया को छुपाने की कॉसिश के तो, उसने मेरे हाथों को हटा दिया….

उसका स्पर्श इतना उतेजक था कि, मेने खाट पर पड़ी चद्दर को दोनो हाथों मे थाम लिया…. नीचे से मेरी चुनमुनिया भी पानी -2 हो गयी थी…..समीर का बाबूराव मेरी चुनमुनिया की फांको पर रगड़ खा रहा था……”रुखसाना तुम्हारी चुनमुनिया बहुत खूबसूरत है…..” उसने मेरी चुनमुनिया की फांको को हाथों से फैलाया…..तो मुझे ऐसा लगा कि, मैं शरम के मारे ज़मीन मे गढ़ जाउन्गी…..खुदा के लिए ऐसी बातें ना करे समीर…..” मेने बंद आँखें किए हुए लड़खड़ाती ज़ुबान मे कहा

…”क्यों ना करूँ……ऐसी बातें सुन कर ही तो चुदाई का मज़ा आता है…..” उसने अपने बाबूराव के सुपाडे से मेरी चुनमुनिया की फांको के बीच मे रगड़ा, तो मुझे ऐसा लगा जैसे मेरा दिल अभी धड़कना बंद कर देगा…..”उफ़फ्फ़ “ समीर के मूह से निकाला…पर मैं कुछ ना बोली……समीर ने अपने बाबूराव के सुपाडे को ठीक मेरी चुनमुनिया के ऊपेर रखा……

और मेरे ऊपेर झुकते हुए मेरे गालो को चूमा………”सीईइ मेरे तो रोम-2 मे मस्ती की लहर दौड़ गयी……फिर वो मेरे गालो को चूमते हुए, मेरे होंटो पर आ गया……ये पहला मोका था जब समीर मेरे होंटो को चूमने वाला था….ये सोचते ही, मेरी चुनमुनिया फुदकने लगी. बाबूराव को जैसे अंदर लेने के लिए मचल रही हो…..फिर तो जैसे समीर मेरे होंटो पर टूट पड़ा……और मेरे होंटो को चूसने लगा….आज तक मुझे इतना मज़ा कभी नही आया था…..सेक्स सिर्फ़ बाबूराव चुनमुनिया तक नही सिमटता…..पर ये बात मुझे आज पता चल रही थी….क्यों कि फ़ारूक़ के साथ मेने सेक्स तो ज़रूर किया था…..उन्होने मेरे होंटो को भी चूसा था….पर उनके मूह से हमेशा बीड़ी जरदे और दारू की स्मेल आती रहती थी….मेरा तो दम घुटने लगता था…

पर आज समीर ने मुझे ये सुख दिया था….मैं भी बहाल होकर उससे लिपटती चली गयी….और समीर का बाबूराव धीरे-2 मेरी चुनमुनिया की गहराइयों मे उतरता चला गया…..जैसे ही समीर का बाबूराव मेरी चुनमुनिया की गहराइयों मे उतरा…..उसने मेरे होंटो को छोड़ दिया…..और फिर झुक कर मेरे राइट मम्मे की निपल को मूह मे भर लिया….और ज़ोर-2 से चूसने लगा…..मैं एक दम मस्त हो गयी…..मेरी बाहें समीर की पीठ पर थिरकने लगी…..समीर कल की तरह जल्दबाज़ी मे नही था……वो कभी मेरे होंटो को चूस्ता तो कभी मेरे मम्मों को उसने मेरे निपल्स को निचोड़-2 कर लाल कर दिया…..

मेरे होंटो मे भी सरसराहट होने लगी….जब मेरे होंटो को चूसना छोड़ता, तो खून का दोरा होंटो मे तेज होता, और तेज सरसहराहट होने लगती…..दिल करता कि समीर फिर से मेरे होंटो को चूसे…..मेरी चुचियों और दोनो निपल्स का भी यही हाल था….नीचे मेरी फूदी सुबक रही रही थी….मैं इतनी मस्त हो गयी थी…..मेरी फुदी ऐंठने लगी….जब कि अभी तक समीर ने एक भी बार अपने मुनसल बाबूराव से मेरी चुनमुनिया मे वार नही किया था….वो मेरे मम्मों को चूस्ता गया….और मैं आँखे बंद किए हुए चुस्वाती रही…और फिर मेरी चुनमुनिया के सबर का बाँध टूट गया….मैं काँपते हुए झड़ने लगी…..पर समीर तो अभी मेरे मम्मों का स्वाद लेने मे ही मगन था…वो भी जान चुका था कि मैं एक बार झाड़ चुकी हूँ….

फिर वो उठा और घुटनो के बल बैठ गया…..और अपने बाबूराव को सुपाडे तक मेरी चुनमुनिया से बाहर निकाल-2 कर अंदर बाहर करने लगा…..बाबूराव चुनमुनिया के पानी से चिकना होकर ऐसे अंदर जाने लगा. जैसे मक्खन मे छुरी……”रुखसाना देखो ना तुम्हारी चुनमुनिया मेरे बाबूराव को कैसे चूस रही है आह देखो ना…..” मैं शरम के मारे पानी -2 हो रही थी……मैं पूरी रोशनी मे उसके सामने अपनी टाँगे फेलाए हुए एक दम नंगी होकर उसका बाबूराव अपनी चुनमुनिया मे ले रही थी…. और वो मेरी चुनमुनिया मे अपने बाबूराव को अंदर बाहर कर रहा था…..”आह देखो ना रुखसाना…. तुम्हारी चुनमुनिया कैसे मेरे बाबूराव को चूम रही है…..देखो आह सच रुखसाना तुम्हारी चुनमुनिया बहुत गरम है……” समीर ने झटके मारते हुए कहा……

मेरे 36 साइज़ के पर्वतों की तरहा तनी हुई चुचियाँ उसके धक्कों के साथ ऊपेर नीचे हो रही थी…..मैं जब भी अपनी चुचियों को छुपाने के कॉसिश करती, तो समीर मेरे हाथो को झटक देता…….”ऐसे ना कहिए समीर मुझे शरम आती है…..” समीर ने मेरी ये बात सुन कर दो तीन ज़ोर दार झटके मारे…..और अपना बाबूराव मेरी चुनमुनिया से बाहर निकाल लिया…..”देखो ना रुखसाना….तुम्हारी चुनमुनिया की गरमी ने मेरे बाबूराव के टोपे को लाल कर दिया है……” समीर की ये बात सुन कर मैं और शरमा गयी……और मन ही मन सोचने लगी कि, सच मे चुनमुनिया की गरमी से उसके बाबूराव का टोपा लाल हो सकता है…..”देखो ना प्लीज़ एक बार….”

मेने अपनी मस्ती से भरी हुई आँखो को खोल कर समीर की जाँघो की तरफ नज़र डाली, तो मुझे उसके बाबूराव का सुपाडा नज़र आया, जो किसी टमाटर की तरहा फूला हुआ एक दम लाल हो रखा था….”या खुदा हइई माँ मुझे शरम आती है…..” ये कह कर मेने फिर से आँखे बंद कर ली “रुखसाना तुम्हे मेरी कसम…अब अगर तुमने आँखे बंद करी तो…” समीर की बात ने तो जैसे मेरे दिल पर ही छुरी चला दी हो…..”समीर ये क्या कह रहे है आप….मुझसे नही होगा. अपनी कसम तो ना दो…..”

समीर: तो फिर अपनी आँखे खोलो…..

मेने बड़ी मुस्किल से अपनी आँखे खोली……समीर अभी भी मेरी चुनमुनिया की फांको पर अपने बाबूराव को रगड़ रहा था….समीर के बाबूराव का सुपाडा मुझे सॉफ नज़र आ रहा था…फिर समीर ने अपने बाबूराव को हाथ से पकड़ा और मेरी आँखों मे झाँका……और फिर बाबूराव को चुनमुनिया के छेद पर टिकाते हुए जोरदार झटका मारा……”हाईए सामीएर धीरे करो ना.,……..” फुद्दि की दीवारे जैसे मस्ती मे झूम उठी हों….मर्द क्या होता है…..ये आज मुझे पता चल रहा था…मेने समीर को अपने ऊपेर खेंचा….और उसके फेस को अपने हाथों मे लेकर बोली……”समीर मुझे प्यार करो…….इतना प्यार करो कि मेरा बदन पिघल जाए….” ये कहते हुए मेरे होंठ थरथराए, और चुनमुनिया ऐंठी…..जैसे आज चुनमुनिया ने अपने अंदर समाए बाबूराव को अपना मान लिया हो….

मैं चाहती थी कि समीर मेरे होंटो को बुरी तरह से चूसे….और ये सोच कर मेरे होंटो कांप रहे थे….शायद समीर भी मेरे दिल की बात समझ गया था…..वो मेरे होंटो पर टूट पड़ा……और अपने . से चबाने लगा हल्के-2 धीरे कभी चूस्ता तो कभी होंटो से काटता….दर्द होता तो होता…..और मज़े की लहर चुनमुनिया मे दौड़ जाती….मैं उससे चिपकी हुई, उसके बदन मे घुसती जा रही थी दिल कर रहा था कि दोनो बदन एक हो जाए….एक दो ना हो.. बाबूराव फिर मेरी चुनमुनिया की गहराइयों को नापने लगा था…..बाबूराव के सुपाडे का घर्षण कितना सुखदाई होता है…..ये मैने पहले नही महसूस किया था…..मेरी सिसकियाँ और बढ़ने लगी.

मैं अब खुद अपनी टाँगों को उठाए हुए उससे चुदवा रही थी…..मस्ती के पल एक के बाद एक आते जा रहे थे…..समीर के धक्कों से मेरा पूरा बदन हिल रहा था…और फिर से वही मुकाम चुनमुनिया ने बाबूराव को चारो ओर से कस लिया…..और अपना प्यार भरा रस बाबूराव पर चढ़ाने लगी….समीर के वीर्य ने भी मानो मेरी बंजर चुनमुनिया की ज़मीन पर बारिश कर दी हो… पूरा बदन झटके खाने लगा….मुझे समीर का वीर्य अपनी बच्चेदानी की तरफ जाता हुआ महसूस होने लगा….कैसा सुखद अनुभव था…..क्यों मेने आज तक अपनी जवानी जाया की…..

मैं दो बार झाड़ चुकी थी…..समीर अब मेरे बगल मे लेटा हुआ मेरे अंगो को सहला रहा था…..मैं चारपाई से उठने लगी तो उसने मेरा हाथ पकड़ कर रोक लिया…..”कहाँ जा रही हो ?” उसने मुझे अपनी तरफ खेंचते हुए पूछा….”अब हो गया ना…मुझे जाने दो….सन्नी उठ ना जाए…..”

समीर: एक बार और करने दो ना ?

मैं: (इनका एक बार मे मान नही भरता मैने मन मे सोचा….) उफ्फ मुझे पेशाब लगी है….पेशाब तो करके आने दो ना……

समीर: यही मोरी पर ही मूत लोना…..

मैं: हाए खुदा तोबा मुझे शरम नही आएगी…..

समीर: अभी शरमाने के लिए बचा ही क्या है……

मैं: पर तुम दूसरी तरफ मूह करो मुझसे नही होगा…..

समीर मुस्कुराया और दीवार की तरफ मूह करके लेट गया…..मुझे बहुत तेज पेशाब आया था…दो बार झड़ी जो थी…..मैं मोरी के पास गयी….और मूतने बैठ गयी……और जैसे ही मेरी चुनमुनिया से मूत की धार निकली, तो बहुत तेज आवाज़ हुई…..”तोबा” मेने अपने चेहरे को हाथो मे छुपा लिया…..समीर भी तो रूम मे है….इतनी तेज आवाज़ वो ज़रूर सुन रहा होगा….मेरी रूह जैसे कांप गयी हो….एक दम शर्मसार होकर मूतति रही…..करीब 1 मिनिट तक मेरी चुनमुनिया से मूत के धार बहती रही….आज तक कभी इतना नही मूता था…..

जब मूतना ख़तम हुआ तो चैन के साँस ली….फिर मैं धीरे-2 चारपाई पर गयी. और अपनी पैंटी से ही अपनी चुनमुनिया को सॉफ किया….समीर मेरी तरफ पलटा और मेरा हाथ पकड़ कर ऊपेर खेंच लिया…..उस रात उसने मुझे फिर से चोदा…..रात को 1 बजे मैं अपने रूम मे आई और सो गयी….सुबह उठी तो बदन मे मीठा-2 दर्द हो रहा था…..सुबह समीर नाश्ता कर चला गया…सन्नी की मम्मी भी आ गयी…..और सन्नी को ले गयी…दोपहर का वक़्त था कि, डोर बेल बजी…..

मेने जाकर गेट खोला तो बाहर सोनिया और उसके मामा खड़े थे….मेने सलाम किया और उनको अंदर आने को कहा….सोनिया के मामा और उनके घर का हाल चाल पूछने के बाद मेने उनके लिए चाइ नाश्ते के इंतज़ाम किया…..चाइ नाश्ते के बाद सोनिया के मामा ने वापिस जाने को कहा तो मेने कहा कि, वो आज रात रुक जाए….पर वो नही माने……उन्होने कहा कि वो स्पेशली सोनिया को छोड़ने आए थे….क्योंकि सोनिया की जून की छुट्टियाँ ख़तम हो गयी थी…. और कल से उसकी क्लासस भी स्टार्ट होने वाली थी…………

सोनिया अभी 11थ क्लास मे हुई थी….जवानी भी उस पर खूब आई थी…..पर अभी कच्ची थी…. सोनिया के आने से घर मे रोनक सी आ गयी थी……पर एक दुख था कि, अब मुझे समीर को मोका आसानी से नही मिलेगा…दो रातो मे चार बार चुदने के बाद, मुझे तो जैसे समीर के बाबूराव की आदत सी लग गयी थी…..शाम को जब बाहर डोर बेल बजी तो जाकर सोनिया ने डोर खोला, सोनिया ने समीर को सलाम कहा….और फिर अंदर आ गयी…..समीर ने बाइक अंदर की, और ऊपेर चला गया……उस दिन कुछ ख़ास ना हुआ…..सोनिया का स्कूल घर से बहुत दूर था…..उसे बस से जाना पड़ता था……कई बार वो लेट भी हो जाती थी….

उस दिन कुछ ख़ास ना हुआ….अगले दिन समीर सुबह जब नाश्ता करने नीचे आया तो, मेने गोर क्या कि, सोनिया बार-2 चोर नज़रों से समीर को देख रही थी….सोनिया उस समय स्कूल यूनिफॉर्म मे थी…..उसने वाइट कलर की शर्ट और ब्लू कलर की स्कर्ट पहनी हुई थी..जो उसके घुटनो तक आती थी….उसके गोरी टाँगे देख किसी का भी मन उस पर फिदा हो जाए….

दोस्तो यहाँ तक आपने जो भी सुना मेरी ज़ुबानी सुना….कि मेरे साथ क्या हुआ….अब मैं जो सुनाने जा रही हूँ….वो समीर और सोनिया के बीच मे हुआ था….जो बाद मे मुझे पता चला. अब मैं उनके बारे मे आपको बताने जा रही हूँ….हां तो उस दिन सोनिया कुछ ज़्यादा ही समीर की तरफ देख रही थी…..बीच मे कभी जब समीर सोनिया की तरफ देखता तो वो नज़रें झुका कर मुस्कुराने लग जाती……समीर ने पहले फातिमा की फुद्दि मारी थी और फिर बाद मे मेरी…..समीर ने उससे पहले सेक्स नही किया था….पर कुछ नालेज उसे थी…एक बात का उसे और पता चल गया था कि, औरत जिसके बच्चे ना हो और जो कम चुदि हो उनकी चुनमुनिया ज़्यादा टाइट होती है….

और आप तो जानते ही हो जब एक जवान लड़के को सेक्स की लत लग जाती है….तो वो कही नही ठहरती.. ख़ासतौर पर उन लड़कों के लिए जिन्होने ऐसी औरतों से सेक्स संबंध बनाए हों….जो उन्हे किसी तरह के बंधन मे ना बाँध सकती हो….जैसे कि मैं….वो जानता था कि, मैं उसे किसी तरह अपने साथ बाँध कर नही रख सकती….अब वो उस आवारा सांड़ की तारह हो गया था…जिसे सिर्फ़ चूत चाहिए थी….हर बार नयी…बिना किसी बंधन के…

उस दिन भले ही मेरे दिमाग़ मे ये सब बातें नही थी…..वरना जो हुआ शायद ना होता…. और अगर ना होता तो शायद आज हम इतने खुशहाल ना होते….मेने सोचा कि उम्र ही ऐसी है…चलो छोड़ो मैं काम मे लग गयी…..समीर ने नाश्ता किया…..और बाइक बाहर निकालने लगा. सोनिया दौड़ी किचन मे आए और बोली…..”अम्मी समीर से कह दीजिए ना कि वो मुझे स्कूल छोड़ आए…” मैं बाहर आई और समीर से कहा कि, क्या वो सोनिया को स्कूल छोड़ सकते है तो समीर ने हां कर दी….समीर ने बाइक स्टार्ट की और सोनिया उसके पीछे बैठ गयी….और फिर जो हुआ वो मुझे सोनिया से पता चला……

समीर के पीछे बैठी, सोनिया बहुत खुश थी…..भले ही दोनो मे अभी कुछ नही था…..पर सोनिया समीर की पर्सनॅलिटी से उसकी तरफ बहुत आकर्षित थी….दोनो मे कोई भी बात चीत नही हो रही थी…..सोनिया का स्कूल घर से काफ़ी दूर था….स्कूल से घर तक के रास्ते मे बहुत सी ऐसी जगह भी आती…..जहाँ पर एक दम वीराना सा होता…..थोड़ी देर बाद स्कूल पहुँचे, तो सोनिया बाइक से नीचे उतरी, और अपने बॅग को अपने कंधे पर लटकाते हुए समीर से बोली….”थॅंक्स” समीर ने सोनिया की तरफ नज़र डाली, उसकी स्कर्ट से उसकी मांसल गोरी चिकनी जांघे सॉफ नज़र आ रही थी….उसके मम्मे उसकी शर्ट के अंदर ब्रा मे एक दम कसे हुए पर्वतों की तरह तने हुए थे…..सोनिया अपनी जिंदगी के सबसे नाज़ुक मोड़ पर थी…..

जब उसने समीर को अपनी तरफ यूँ घूरता पाया, तो वो सर झुका कर मुस्कुराने लगी….और फिर पलट कर स्कूल की तरफ जाने लगी…..समीर वहाँ खड़ा सोनिया को अंदर जाते हुए देख रहा था….शायद पीछे सोनिया के चुतड़ों को घूर रहा था…..सोनिया ने अंदर जाते हुए तीन-2 चार बार पलट कर समीर को देखा….और हर बार वो शरमा कर मुस्कुरा देती…..तभी सोनिया के सामने से दो लड़के गुज़रे और स्कूल से बाहर आए…..दोनो आपस मे बात कर रहे थे….उन्हे नही पता था कि, आज सोनिया समीर के साथ आई है……

उनमे से एक लड़का बोला… “यार सोनिया तो एक दम पटाखा होती जा रही है….श्ह्ह साली की जांघे देखी, कैसी मोटी-2 और गोरी हो गयी है…..”तो दूसरा बोला……”हां यार साली की गान्ड पर भी अब बहुत चर्बी चढ़ने लागी है….देखा नही साली जब चलती है, तो कैसे उसकी गान्ड मटकती है…बस एक बार बात बन जाए तो उसकी गान्ड ही सबसे पहले मारूँगा…”

समीर खड़ा उन दोनो की बातें सुन रहा था……पर समीर कुछ ना बोला, उसने बाइक स्टार्ट की, और जॉब पर चला गया…..समीर के दिमाग़ उन लड़को की बातें घूम रही थी…और उनकी बातें याद करते हुए, उसका बाबूराव उसकी पेंट में अकड़ने लगा था….समीर ने करीब 1 बजे तक काम किया, और फिर लंच किया…..अगली ट्रेन शाम 4 बजे की थी….और स्टेशन पर रुकने वाली आखरी ट्रेन थी….जब उसे अपना टिकेट काउंटर 3 बजे खोलना था…..और वो दो घंटो के लिए फ्री था…..सुबह से उसका बाबूराव बैठने का नाम ही नही ले रहा था….

समीर ने एक बार घड़ी की तरफ नज़र डाली, और फिर उठ कर बाहर आ गया…..उसने अपनी बाइक स्टार्ट की, और घर की तरफ चल पड़ा….उन लड़को की बातों ने समीर का दिमाग़ सुबह से खराब कर रखा था….वो जानता था कि, सोनिया का स्कूल 3 बजे ऑफ होगा……और उसे घर पहुँचने मे भी बस से आधा घंटा लगेगा…..इसीलिए रुखसाना इस समय अकेली होगी…..समीर की बाइक हवा से बातें कर रही थी…..और 1:15 पर वो घर के बाहर था…….उसने घर की दीवार के साथ बाइक लगाई, और डोर बेल बजाई….थोड़ी देर बाद मेने गेट खोला तो, सामने समीर को खड़े देख कर हैरान होते हुए बोली…..”क्या हुआ आज इस समय….” समीर ने मेरी बात का जवाब नही दिया. और घर के अंदर आ गया……मैं गेट लॉक करने लगी…

जैसे ही मेने गेट लॉक किया…..समीर ने मुझे पीछे से अपनी बाहों मे भर लिया. “अह्ह्ह्ह क्या करते हो……कोई देख लेगा…..” समीर मेरी ये बात सुन कर झुंजला गया. पर अपने आप पर कंट्रोल करते हुए बोला…..”अब बंद घर के अंदर हमे कॉन देख सकता है…” ये कहते हुए, उसने मुझे बाहों मे उठा लिया….मैं ना ना करती ही रह गयी……वो मुझे उठा कर मेरे रूम मे ले आया, और मुझे सोफे के सामने खड़ा करते हुए, मुझे पीछे से बाहों मे भर लिया, और मेरी गर्दन पर अपने होंटो को रगड़ने लगा….मैने मस्ती मे आकर अपनी आँखे बंद कर ली……”छोड़ो ना समीर ये कॉन सा वक़्त है…..” पर समीर शायद किसी और ही धुन मे था…उसने मेरी गर्दन पर अपने होंटो को रगड़ना जारी रखा….और फिर एक हाथ से मेरी गान्ड को पकड़ कर मसलने लगा……

जैसे ही उसने अपने हाथों से मेरे चुतड़ों को दोबच कर मसला, तो मेरी तो साँसे ही उखड़ गयी….आज वो बड़ी बेदर्दी से मेरे दोनो चुतड़ों को अलग करके फेला रहा था…और मसल रहा था…..उसके कड़क मर्दाना हाथों से अपनी गान्ड को यूँ मसलवा कर मैं एक दम कामविहल हो गयी…..मेरी आँखे बंद होने लगी…..दिल धक-2 करने लगा……फिर अचानक ही उसने अपने दोनो हाथों को आगे मेरी सलवार के जबरन तक पहुँचा दिया….जब मैं समीर आया था, तो मैं सो रही थी….इसीलिए मेने एक पतली सी इलास्टिक वाली सलवार पहनी हुई थी…. जैसे ही उसे अहसास हुआ कि, मेने इलास्टिक वाली सलवार पहनी है, तो उसने दोनो तरफ सलवार मे अपनी उंगलियों को फँसा कर….मेरी सलवार नीचे सरका दी…..

नीचे पैंटी भी नही पहनी थी……जैसे ही सलवार नीचे हुई, समीर ने मुझे सोफे की ओर धकेला….और मैं सोफे की ओर लूड़क गयी……मेने सोफे के बॅक पर अपने दोनो हाथों को जमा लिया, और दोनो घुटनो को सोफे पर रख लिया…..”हाई क्या आज समीर मेरी पीछे से लेगा.” ऐसे करने से तो उसे पीछे से मेरी गान्ड का सिकुड़ता और फेलता हुआ छेद भी नज़र आएगा……” ये सोच कर मैं शरमसार हो गयी…….”ओह्ह्ह्ह समीर मत करो ना….बेड पर चलते है….” मेने लड़खड़ाती हुई ज़ुबान से समीर को कहा……..

पर समीर नही माना…..उसने पीछे से मेरी कमीज़ का पल्ला उठा कर मेरी कमर पर चढ़ा दिया…..मेरी सलवार पहले से ही मेरी जाँघो मे अटकी हुई थी….फिर मुझे कुछ सरसराह की आवाज़ हुई…..समीर थोड़ा पीछे हटा….और पास मे ही ड्रेसिंग टेबल पर पड़े हेरआयिल को उठा लिया….उसने अपनी पेंट और अंडरवेर नीचे किया…..और ढेर सारा तेल अपने बाबूराव पर गिरा कर उसे मलने लगा…..मैं अपने चेहरे को पीछे घुमा कर अपनी नशीली आँखों से उसे ये सब करता हुआ देख रही थी….फिर उसने वो आयिल की बोतल को टेबल पर रखा….मेरे पीछे आकर खड़ा हुआ, अपने घुटनो को थोड़ा सा मोड़ कर झुका…..और अगले ही पल उसके बाबूराव का मोटा गरम सुपाडा मेरी चुनमुनिया की फांको को फेलाता हुआ, मेरी चुनमुनिया के छेद पर आ लगा…..

ऐसा लगा मानो चुनमुनिया पर किसी ने सुलगती हुई सलाख रख दी हो……मेने सोफे की बॅक को कस्के पकड़ लिया….समीर ने मेरे दोनो चुतड़ों को पकड़ कर ज़ोर से फेलाते हुए, एक ज़ोर दार धक्का मारा…समीर का बाबूराव मेरी चुनमुनिया को चीरता हुआ, अंदर घुसता चला गया…..मैं एक दम से सिसक उठी……”हाईए माँ मरी……..” समीर ने अपना बाबूराव जड तक मेरी चुनमुनिया मे घुसेड़ा हुआ था…..उसने वैसे ही झुक कर फिर से वो तेल वाली बोतल उठाई….और मेरी गान्ड के ऊपेर करते हुए, आयिल को गिराने लगा…जैसे ही आयिल की धार मेरी गान्ड के छेद पर पड़ी……मैं बुरी तरह से मचल उठी…..समीर ने बोतल को नीचे रखा. और फिर अपना बाबूराव धीरे-2 अंदर बाहर करने लगा…..