एक औरत की दास्तान–5

समीर अभी तक खाना खाने नही आया था Hindi Sex Stories Antarvasna Kamukta Sex Kahani Indian Sex Chudai मैं उसे ऊपेर जाकर भी नही बुलाना चाहती थी. मेरी तो उससे आँखे मिलाने की हिम्मत भी नही होगी…..मुझे समझ मे नही आ रहा था कि, जो कुछ भी हुआ, उसके पीछे कसूर किसका है, मेरा या समीर का….मैं अभी यही सोच रही थी कि, समीर के कदमो की आहट सुन कर मेरा ध्यान टूटा…..मेने उसकी तरफ देखे बिना बोला…..”खाना खा लो गरम कर दिया है…..” समीर मेरे सामने वाली चेर पर बैठ कर खाना खाने लगा…..मैं भी बेमन से खाना खा रही थी….मैं अपनी नज़रें भी नही उठा पा रही थी….बार-2 मन मे यही ख़याल आ रहा था कि, शादी शुदा होते हुए भी मेने ये कैसा गुनाह कर डाला…..खाना खाते हुए समीर बोला “ये साहब कॉन है….”

मेने उसकी तरफ देखे बिना ही बोला दिया……”ये निम्मी भाभी का बेटा है….उनके पापा की तबीयत खराब हो गयी अचानक तो वो उनका पता लेने गये है” फिर ना वो कुछ बोला और ना ही मैं…..समीर ने खाना खाया और मुझे गुड नाइट बोल ऊपेर चला गया……मैने बर्तन उठा कर किचन मे रखे, और अपने रूम मे आकर डोर अंदर से बंद कर लिया…सन्नी के साथ मे होने के कारण मेरा डर थोड़ा कम हो गया था…..सन्नी बेचारा मासूम सा बच्चा था… मैं उसके साथ जाकर बेड पर लेट गयी….सन्नी बेचारा मासूम सा बच्चा जल्द ही सो गया.. मैं अभी तक जाग रही थी…..शाम को 3 घंटे तक सोने के कारण मुझे नींद भी नही आ रही थी….और आज तो मेरी जिंदगी ही बदल गयी थी….

मैं दो हिस्सो बॅट गयी थी दिल और दिमाग़….दिल कह रहा था कि जो हुआ ठीक हुआ, और दिमाग़ ग़लत कह रहा था…दिल कह रहा था कि, शादी शुदा होते हुए भी अपने मर्द के होते हुए भी मैं एक विधवा जैसे जीवन जी रही थी….और अगर खुदा ने मेरी सुन कर मेरे लिए एक बाबूराव का इंतज़ाम कर दिया है तो क्या बुराई है….मैं सही सब सोच रही थी कि रूम के डोर पर नॉक हुई, घर मे मेरे सन्नी और समीर के सिवाय कोई नही था….समीर ही होगा. पर अब वो क्यों आया है….मैं चुपचाप लेटी रही फिर से नॉक हुआ……

सन्नी कही उठ ना जाए…भले ही वो अबोध था…..पर अगर उसे किसी तरह का शक हो गया तो, मैं उठी और धीरे से जाकर डोर का लॉक खोला….सामने समीर ही था…..उससे देख मैं झेंप गयी…..

मैं: अब क्या है क्यों आए हो यहाँ पर….?

समीर: भाभी जी मैं अंदर आ जाउ…..

मैं: नही तुम जाओ यहाँ से…..

मेने डोर बंद कर दिया……मेरी साँसे तेज हो गयी थी…..ये तो अंदर आने को कह रहा है….क्या करेगा अंदर आकर मुझे फिर से चोदेगा…..हाईए सन्नी रूम मे है….दोबारा तोबा मेरी तोबा एक बार ग़लती कर दी अब नही…..तभी दिल के कोने से आवाज़ आई…”तो क्या होगया इसमे सब करते है….अब एक बार तो तू कर चुकी है….एक बार और कर लिया तो क्या है ?

अगर दोबारा भी करवा लिया तो क्या बिगड़ जाएगा….खुदा ने मोका दिया है इसे जाया मत जाने दे…..बार-2 ऐसे मोके नही आने वाले….पिछले 10 सालो से तरसी है इसी के लिए….मैं बेड पर लेटी सोचती रही….मोका मिला है तो रुखसाना इसका फ़ायदा उठा….आधी से ज़्यादा जवानी तो यू ही निकल गयी….बाकी भी ऐसे ही निकल जाएगी….

अच्छा भला आया था बेचारा….उसे तो कोई और मिल जाएगी…..वो तो अभी जवान हुआ है शादी भी होगी….तेरा कॉन है वो फ़ारूक़ जिसने तुझे कभी प्यार से छुआ तक नही…ये सब गुनाह ये ग़लत है वो ग़लत है…..इन्ही सब मे जिंदगी निकल गयी….थोड़ी देर बीती, मेने सोचा देखो तो सही कि वो ऊपेर गया है कि नही….मेने उठ कर डोर की कुण्डी खोली…..या खुदा वो तो बाहर ही खड़ा है… रूम की दीवार के साथ पीठ सटा कर…..मुझे डोर पर देख कर वो मेरे पास आया….मैं झिझकते हुए अपने दुपपटे के पल्लू को हाथ मे लेकर बोली…..”तुम गये नही अभी तक”

उसने आगे बढ़ कर मेरे हाथ को अपने हाथों मे थाम लिया….उसके मर्दानो हाथो का स्पर्श पाते ही मुझे नशा सा होने लगा….”मुझे यकीन था तुम ज़रूर आओगी….” ये कह कर उसने मुझे अपनी तरफ खेंचा…..और मैं उसकी तरफ खिंचती चली गयी….बिना किसी विरोध की… उसने मुझे अपनी बाहों मे भर लिया….उसके चौड़े सीने से लग कर मुझे जवानी का अनोखा सुख मिलने लगा….मेने उसके चौड़े सीने मे अपना चेहरा छुपा लिया और बोल पड़ी….”समीर मुझे डर लगता है…..” उसने मेरी कमर को अपनी बाहों मे और जाकड़ लिया…..”डर कैसा डर भाभी” मैं उसके बाहों मे कस्मसाइ, अपने जवान बदन को जवान बाहों की जकड़न मे पकड़ मुझे बहुत अच्छा लग रहा था…..

मैं: कोई देख लेगा….

समीर: यहा और कॉन है जो देख लेगा….

मैं: अंदर सन्नी है वो….

समीर: अर्रे वो तो अभी छोटा है…उसे क्या समझ…..

मैं: और अगर कुछ ठहर गया तो…..?

समीर: क्या….?

समीर को शायद समझ मे नही आया था…..मैं एक दम से शरमा गयी….थोड़ी देर रुकी और कहा….”अगर मैं पेट से हो गयी तो” समीर के द्वारा गर्भवती होने की बात से मेरे बदन मे झुरजुरी सी दौड़ गयी….समीर मेरी पीठ को सहलाते हुए बोला…..”ऐसा नही होगा…” मेने उसकी आँखों मे देखा कि क्या ऐसा हो सकता है…तो वो मुस्कुराने लगा….तो उसने कहा. “मैं कल बाज़ार से तुम्हे बच्चा ना ठहरने वाली मेडिसिन ला दूँगा….वैसे अगर तुम चाहो तो मेरे बच्चे को पैदा भी कर सकती हो….” मैं उसकी बात सुन कर सर झुका कर मुस्कुराने लगी…..उसने मुझे अपनी बाहों मे और ज़ोर से भींच लिया….मेरी चुचियाँ उसके सीने मे दब गयी…..उसने मेरे चुतड़ों को जैसे ही हाथ लगाया…..मैं एक दम से मचल उठी….

मैं: समीर यहाँ नही….

समीर मेरा इशारा समझा और मेरा हाथ पकड़ कर खेंचते हुए, बाहर गेट की तरफ बनी हुई बैठक मे ले गया….ये एक छोटा सा कमरा था…जिसमे एक चारपाई लगी हुई थी….ये रूम पहले फ़ारूक़ के अब्बू का था…..एक तरफ दो कुर्सियाँ और एक टेबल था…..बैठक का एक डोर बाहर गली मे भी खुलता था…..और डोर के पास ही एक मोरी सी बनी हुई थी…..जिससे फर्श का पानी बाहर बहता था….जैसे ही मैं रूम मे पहुँची तो मेरी धड़कन बढ़ गयी….शाम को तब सब इतनी जल्दी हुआ था कि कुछ समझ मे ही नही आया था…..

रूम मे आते ही समीर ने मुझे पीछे से बाहों मे भर लिया…..मेने चुपचाप अपनी पीठ उसके सीने से सटा ली….और उसने अपने होंटो को मेरी गर्दन पर रख दिया…मेरा तो रोम-2 कांप गया…”रुखसाना तुम बहुत खूबसूरत हो…..”उसने बुदबुदाते हुए कहा….समीर ने आज पहली बार मुझे नाम से पुकारा था…..उसके हाथ मेरे मांसल पेट और नाभि के आसपास थिरका रहे थे….कुछ देर उसके हाथो के स्पर्श का मज़ा लेती रही…..बहुत अच्छा लग रहा था. शादी के 10 साल बाद पहली बार मुझे ऐसा सुख नसीब हो रहा था….

मैं: समीर डोर बंद कर दो…..

समीर: अब यहाँ कॉन आ जाएगा….

मैं: ह्म्‍म्म तुम लगा दो ना ?

समीर ने मुझे छोड़ा और डोर लॉक कर दिया…और फिर से मुझे पीछे से जाकड़ लिया…मैं कस्मसाइ और सकपकाई….”समीर लाइट…..” मेने उसकी बाहों मे कसमसाते हुए कहा….”रहने दो ना रुखसाना…..मैं आज तुम्हारे हुश्न का दीदार करना चाहता हूँ…..” और मेरे पैट से होते हुए उसके हाथ मेरी चुचियों की तरफ बढ़ने लगे……”मुझे शरम आती है…लाइट ऑफ कर दो ना ……” समीर ने एक बार फिर से मुझे छोड़ा और लाइट ऑफ कर दी…..पर बेमान से….अंधेरे बंद कमरे मे मेने चैन की साँस ली…..उसने मुझे पकड़ा और खाट पर पटक दिया…और खुद मेरे साथ खाट पर आ गया…..

एक बार फिर से चुदने की घड़ी आ गयी थी…खाट पर आते ही वो मेरे साथ घुतम्घुथा हो गया…उसके हाथ कभी मेरी पीठ पर तो कभी मेरे चुतड़ों पर घूम रहे थे….मैं उससे और वो मुझसे चिपकने लगा…मेरी चुचियाँ बार -2 उसके सीने से दबी जा रही थी….ये मेरा उसके साथ दूसरा मोका था….इसलिए ज़्यादा सहयोग नही कर पा रही थी शरमा रही थी…..चुपचाप पड़ी रही थी…..पहले उसने मेरी कमीज़ उतारी फिर सलवार और फिर पैंटी भी खेंच कर निकाल दी…..मैं बस नही नही करती रही…..पर उसने मेरी एक ना सुनी….अब मेरे बदन सिर्फ़ ब्रा बची थी…..उसने मेरी चुचियों को अभी तक नही छुआ था… और जैसे ही उसने मेरी 38 साइज़ की चुचियों को ब्रा से बाहर निकालना चाहा तो, मेने उसके हाथों को पकड़ लिया….पर समीर कहाँ मानने वाला था….

मैं उसे रोकती रही…..इसके चलते उसके हाथ नज़ाने कितनी बार मेरी चुचियों से टकराए उसके हाथ कई बार मेरे मम्मों से छू गये….मुझे बहुत अच्छा लग रहा था,….मेरी हालत खराब हो गयी थी…..जब उसने मेरी ब्रा को खोला तो मेरी साँस तेज चल रही थी दिल धक-2 कर रहा था….बदन का सारा खून चुनमुनिया की तरफ सिमटता जा रहा था….अब मैं उस खाट पर एक दम नंगी पड़ी थी…..वो भी अपने किरायेदार के साथ, सोच कर ही शरमा जाती, कि मैं अपने से 10 साल छोटे जवान लड़के के साथ एक खाट पे एक दम नंगी लेटी हुई हूँ,

अगले ही पल वो मेरे ऊपेर आ चुका था…..उसने मेरी टाँगों को उठाया, और अपना मुनसल जैसा सख़्त बाबूराव मेरी चुनमुनिया के छेद पर लगा दिया….और फिर धीरे-2 दबाते हुए बाबूराव को अंदर घुसेड़ने लगा… वो घुसेड़ता गया, और मैं उसके बाबूराव को अंदर समेटती गयी…..

जैसे ही उसका बाबूराव मेरी चुनमुनिया की गहराइयों मे पहुँचा, तो मैं एक दम मस्त हो गयी. वो एक पल ना रुका, और अपने बाबूराव को मेरी चुनमुनिया के अंदर बाहर करने लगा….मानो जैसे स्वर्ग की वादियों मे उड़ रही हूँ….ऐसा सकून आज तक नही मिला, जैसे ही वो अगला शॉट लगाने के लिए अपना बाबूराव मेरी फुद्दि से बाहर निकालता, मेरी कमर उसके बाबूराव को अपनी फुद्दि मे लेने के लिए अपने आप ऊपेर की तरफ उठ जाती……उसका बाबूराव फिर से मेरी चुनमुनिया की गहराइयों मे उतर जाता….

वो एक स्पीड से बिना रुके अपने बाबूराव को अंदर बाहर करता रहा…..ना ही उसने मेरे मम्मोन से खेला और ना ही कोई चूमा चाटी की, 10 मिनिट बाद मुझे ऐसा लगा जैसे मेरी चुनमुनिया की नसें टाइट होने लगी हों…..मुझे अपनी चुनमुनिया की दीवारे समीर के बाबूराव के इर्द गिर्द कस्ति हुई महसूस होने लगी…..और फिर मेरी चुनमुनिया से पानी की नदी बह निकली…..मैं झाड़ कर बहाल हो गयी…”ओह्ह मेरे राजा अहह” मेने समीर को अपनी बाहों मे कस लिया…..समीर ने मेरी चुनमुनिया मे अपना बाबूराव पेलते हुए कहा…..”क्या कहा रुखसाना तुमने….” आह्ह्ह्ह मैं अभी भी झाड़ रही थी….चुनमुनिया मे अभी भी सकुंचन हो रहा था…..

मैं उस आनंद के चर्म पर थी……मेने मस्ती मे आकर उसके होंटो को चूम लिया….”मेरा राजा…..” मैं उसके सीने मे सिमटती चली गयी….” उसने फिर तेज़ी से धक्के मारे, और मेरी चुनमुनिया के अंदर अपने वीर्य की बोछार करने लगा….झड़ते हुए उसने झुक कर मेरे एक मम्मे को मूह मे भर लिया….समीर के मूह और जीभ का सपर्श अपने मम्मे अंगूर के दाने जितने बड़े निपल पर पाकर एक बार फिर से मेरी चुनमुनिया ने झड़ना शुरू कर दिया…..मेरी चुनमुनिया ने पता नही उसके बाबूराव पर कितना पानी बहाया…..हम दोनो उसी तरह नज़ाने कितनी देर लेटे रहे…..

समीर मेरे नंगे अंगो को सहलाता रहा….और मैं उससे सहल्वाती रही…..मैं खाट से उठी, और अंधेरे मे अपने कपड़े ढूँढ कर लाइट ऑन की, और कपड़े पहनने लगी……समीर चारपाई से उठा…और मेरा हाथ पकड़ कर बोला…..”क्या हुआ”….मेने उसकी तरफ देखा और फिर शरमा कर नज़रें झुका ली……”सन्नी अकेला है मुझे जाने दो……”

समीर: थोड़ी देर और रूको ना……

मैं: नही मुझे जाने दो…….अगर वो उठ गया तो…..

समीर चुप हो गया…..मैं अपने कपड़े पहने बिना रूम से बाहर निकली और अपने रूम का डोर खोल कर अंदर झाँका अंदर सन्नी अभी भी सो रहा था…..मैं रूम मे आई, और डोर लॉक किया….और अपने कपड़े पहन कर लेट गये……रात कब नींद आई पता नही चला…सुबह जब उठी तो नाश्ता तैयार किया…..समीर नाश्ता करने नीचे आया…..मैं अभी भी उसके साथ नज़रें नही मिल पा रही थी, और सन्नी की मज़ूदगी मे वो कुछ बोला भी नही बस चुपचाप नाश्ता किया, और चला गया….

पूरा दिन सन्नी की बच्कानी बातें सुन कर हँसते खेलते निकल गया…शायद आज मेरे खुश होने का कारण और भी था….मुझे नही पता था कि, मेरा ये उठाया हुआ कदम मुझे किस मुकाम की और ले जाएगा…..या आने वाले वक़्त मे मेरी तक़दीर मे क्या लिखा हुआ है…..शाम को किसी ने गेट के सामने हॉर्न बजाया….मेने सोचा ये कॉन है जो हमारे घर गाड़ी ले कर आया. जब मेने बाहर जाकर गेट खोला तो देखा कि, बाहर समीर बाइक पर बैठा था….वो मेरी तरफ देख कर मुस्कुराया….और उसने बाइक घर के अंदर की स्टॅंड पर लगाई…..मैं अभी कुण्डी लगा ही रही थी कि, उसने मुझे पीछे से बाहों मे दबोच लिया……”आह क्या करते हो…कोई देख लेगा….” मैं कस्मसाइ…..”कॉन देखेगा हमे यहाँ….” समीर ने मुझसे अलग होते हुए कहा.

मैं: सन्नी है ना घर पर……

समीर: उसे क्या समझ वो तो बच्चा है…….

मैं: नही मुझे डर लगता है…..कुछ गड़बड़ ना हो जाए……

समीर: अच्छा रात को आऊगा ना…..बैठक मे…..

मैं: ये बाइक किसकी है……

समीर: आज ही खरीदी है नयी है……

मैं: हां वो तो देख ही रही हूँ……

मैं चुप रही….समीर ने हाथ मे खाना पकड़ा हुआ था….जो वो ढाबे से लेकर आया था… “अब मैं ठीक हूँ…घर पर बना लेती इसकी क्या ज़रूरत थी……” मेने समीर के हाथों से खाने के पॅकेट लेते हुए कहा…..”तुम बना तो लेती…….पर मैं तुम्हे काम करके थकाना नही चाहता था…….रात को तुम्हे और मेहनत करनी पड़ेगी…..” ये सुनते ही मेरे गाल शरम से लाल होकर दहकने लगे….मैं दौड़ती हुई किचन मे चली गयी…सन्नी टीवी पर कार्टून देख रहा था…..समीर सीधा पहले अपने रूम मे ऊपेर चला गया…… वो काफ़ी देर ऊपेर ही रहा…….रात के करीब 9 बजे समीर नीचे आया…..और मेने खाना गरम टेबल पर लगाया…..समीर सन्नी के साथ वाली चेर पर बैठा था…..”आज बड़ी देर कर दी नीचे आने मे” मेने समीर की ओर देखा और फिर नज़रें झुका ली…..”वो रात को जागना है तो सोचा कुछ देर सो लेता हूँ………”

फिर कुछ ख़ास बात ना हुई, समीर खाना खा कर ऊपेर चला गया…..मैं सन्नी के साथ अपने रूम मे जाकर लेट गये……सन्नी थोड़ी देर मे ही सो गया….आधे घंटे बाद डोर पर नॉक हुई….मैं जानती थी कि ये समीर ही है……मेरा दिल फिर से जोरो से धड़कने लगा…..मैं धीरे से बेड से नीचे उतरी….और डोर खोला…..बाहर समीर खड़ा था……मुझे देखते ही, उसने मेरा हाथ पकड़ा और खेंचते हुए, बैठक की तरफ लेजाने लगा……मैं भी बिना किसी ना नुकर के खिंचती चली गयी…….रूम मे पहुँचने के बाद समीर ने डोर लॉक किया, और मुझे बाहों मे भर लिया……मेरे तनी हुई चुचियाँ समीर के सीने मे दबने लगी..

मैं: उनन्ं क्या कर रहे हो लाइट तो बंद कर दो ना ?

समीर ने बेमन से मुझे छोड़ा और लाइट ऑफ कर दी, और फिर से मुझे बाहों मे भर कर मेरी पीठ को सहलाते हुए, मुझे अपने से चिपका लिया…….मैं भी उसके बदन से साँप की तरफ लिपटती चली गयी……सरूर मे मस्त हो चुकी थी….उसके हाथ मेरे बदन पीठ हर हिस्से को जैसे जाँच रहे थे……एक पराए मर्द के हाथों से ऐसा सकून मिलेगा….जिंदगी मे कभी सोचा नही था….फिर वही….उसने मेरे कपड़े उतारने शुरू कर दिए…..इस बार खड़े खड़े ही, मैं फिर से ना ना करती रही…..पर उसने मुझे एक दम नंगी कर छोड़ा……फिर वो मुझसे अलग हुआ, फिर कुछ सरसराहट सुनाई देने लगी…..दिल सोच कर धोन्कनि की तरहा बजने लगा कि समीर अपने कपढ़े उतार रहा है…..फिर एक सख़्त सी चीज़ मुझे अपनी जाँघो पर चुभती हुई महसूस हुई…..मेरा बदन एक दम से थरथरा गया……ये सोच कर समीर का बाबूराव मेरी जाँघो से रगड़ खा रहा था…..

पर फिर अचानक से पता नही क्या हुआ, मेने अंधेरे बंद कमरे मे अपने आप को अकेला पाया… मुझे समझ मे नही आया आख़िर हुआ क्या है…..”समीर” मैं धीरे से फुस्फुसाइ… पर कोई आवाज़ आ नही आई…..एक अजीब सा डर मेरे जेहन मे उतरने लगा…..तभी जैसे मेरे ऊपेर फाड़ टूट पड़ा हो…..रूम की लाइट ऑन हो गयी…..और मैं रूम मे ठीक बीचो-2 एक दम मादरजात नंगी खड़ी थी…समीर लाइट के स्विच के पास खड़ा मेरी ओर देखते हुए अपने मुनसल जैसे बाबूराव को हाथ मे लेकर मूठ मार रहा था…..मैं शरम से पानी-2 हो गयी….और अपनी चुचियों को अपने हाथों से छुपाती, तो कभी अपनी हथेली फेला कर अपनी झान्टो से भरी चुनमुनिया को…..फिर जब मेरी शरम की इंतिहा ना रही तो…..मैं पैरों के बल नीचे बैठ गयी… अपने घुटनो को अपनी छाती से चिपका कर….और सर को घुटनो के बीच मे छुपा लिया