एक औरत की दास्तान–4

अब मुझे चलने फिरने मे उतनी दिक्कत नही हो रही थी Hindi Sex Stories Antarvasna Kamukta Sex Kahani Indian Sex Chudai फ्रेश होने के बाद मैं किचन मे गयी….और नाश्ता तैयार करने लगी…..नाश्ता तैयार करते हुए मैं बार-2 किचन के डोर पर आकर सीढ़ियों की तरफ देख रही थी….समीर के जॉब पर जाने का टाइम भी हो गया था…जैसे ही मैं नाश्ता तैयार करके बाहर आई तो समीर सीढ़ियों से नीचे उतरा…..”अब कैसी तबीयत है भाभी जी….” उसने अपने होंटो पर दिलकश मुस्कान लाते हुए कहा…..बदले मे मेने भी मुस्कुराते हुए कहा….”पहले से बेहतर है….अप डाइनिंग टेबल पर बैठिए……..मैं नाश्ता लेकर आती हूँ……मेने और समीर ने एक साथ नाश्ता किया…..और फिर समीर जाते हुए मुझसे बोला.

समीर: भाभी जी, रात का खाना मैं बाहर से ही लाउन्गा…..आप बनाना नही…..

मैं: ठीक है……

समीर: अगर किसी और चीज़ के ज़रूरत हो तो बता दीजिए…..मैं आते समय वो लेता आउन्गा.

मैं: नही अभी किसी और चीज़ की ज़रूरत नही है….

समीर के जाने के बाद मैं घर के काम मे लग गयी…..पिछले दो दिन से मेने घर की सफाई भी नही की थी……इसीलिए मेने पहले नीचे के सभी रूम की सफाई की, और फिर ऊपेर आकर समीर के रूम के सफाई करने लगी….जब मैं समीर के रूम मे फर्श पर पोछा लगा रही थी, तो मुझे उसके बेड के नीचे कुछ पड़ा हुआ नज़र आया…..वो शायद कोई कपड़ा था.. मेने नीचे झुक कर उसे बाहर निकाला, तो मेरी आँखें एक दम से फेल गयी…..वो एक रेड कलर की कॉटन पैंटी थी…..रेड कलर की पैंटी ना तो मेरे पास थी और ना ही सोनिया के , तभी मुझे परसो शाम वाली घटना याद आ गयी….जब समीर ने फातिमा को इसी रूम मे चोदा था…..ये ज़रूर फातिमा की ही पैंटी थी….

उस पैंटी पर जगह -2 चुनमुनिया से निकले पानी और शायद समीर के बाबूराव से निकले वीर्य के धब्बे थे….पैंटी का कोई भी हिस्सा ऐसा नही था……जिस पर उस दिन हुई घमसान चुदाई के निशान ना हो…..मेने पैंटी को अपने दोनो हाथों मे लेकर नाक के पास लेजा कर सूँघा तो मंत्रमुग्ध करदेने वाली खुश्बू मेरे जिस्म को झींझोड़ गयी…….मेने पैंटी को लेकर बेड पर बैठ गयी…..और उसकी और देखते हुए, उस दिन देखे हुए दृश्यों को याद करने लगी… समीर का मुन्सल जैसा बाबूराव फातिमा की चुनमुनिया मे अंदर बाहर हो रहा था…..मैं एक बार फिर से अपना आपा खोने लगी…..पर तभी बाहर मेन गेट पर नॉक हुआ, तो मेने उस पैंटी को वही बेड के नीचे फेंक दिया….

और बाहर आकर छत से नीचे गली की तरफ झाँका तो देखा कि पड़ोस मे रहने वाली निम्मी भाभी खड़ी थी…..”अर्रे निम्मी भाभी आप…..मैं अभी नीचे आती हूँ…..” मेने जल्दी से समीर के रूम को लॉक किया, और नीचे आकर डोर खोला…..निम्मी भाभी हमारे पड़ोस मे रहती थी….वो दोपहर मे कई बार हमारे घर आ जाया करती थी….और बातें किया करती थी….उस दिन भी मेने और निम्मी भाभी ने गली मोहाले की ढेरों बातें की…

निम्मी भाभी के जाने के बाद मेने घर का दूसरा काम भी निपटा लिया…और फिर नहाने चली गयी….जब कभी फ़ारूक़ घर पर नही होते थे तो मैं घर मे साड़ी पहन लिया करती थी….क्योंकि फ़ारूक़ को मेरा और सोनिया का साड़ी पहनना पसंद नही था….इसलिए मेने उस दिन ब्लू कलर की प्रिंटेड साड़ी पहन ली….समीर के आने का टाइम भी हो चला था….समीर आज 5:30 बजे ही आ गया……जब मेने डोर खोला तो वो मुझे बड़े गोर से देखने लगा. उसे यूँ अपनी तरफ ऐसे घूरता देख कर मैने शर्मा कर सर झुका लिया और बोली…..”ऐसे क्या देख रहे है आप”

तो वो मुस्कुराता हुआ बोला…”वाउ भाभी आप आज बहुत खूबसूरत लग रही हो इस साड़ी मे…..” ये कह कर वो अंदर आ गया……वो साथ मे रात का खाना भी ले आया था…..”भाभी ये खाना लो…..और बाद मे गरम कर लेना…..मैं ऊपेर जा रहा हूँ फ्रेश होने के लिए…..आप एक कप चाय बना देंगी…..”

मेने उसकी तरफ देख कर मुस्कुराते हुए कहा….”हां क्यों नही…”

फिर समीर ऊपर चला गया….फ्रेश होकर जब वो नीचे आया तो उसने एक ढीली सी टीशर्ट और हाफ पेंट पहना हुआ था…..मैने चाइ बनाई और उसे बेड रूम मे ले गयी…सोचा चाइ के साथ ही मेडिसिन भी ले लेती हूँ…..समीर रूम मे आकर बेड के सामने चेर पर बैठ गया. और मुझे मेडिसिन लेते हुए देख कर बोला…..”भाभी आब आपकी कमर का दर्द कैसा है…..”

मैं: अब ठीक है….बस कल तक पूरी तरह ठीक हो जाएगा…..(मेने मेडिसिन ली और फिर हम दोनो ने चाइ पी……)

समीर: (खाली कप टेबल पर रखते हुए) भाभी आप उल्टी लेट जाओ…..मैं एक बार और आख़िरी मालिश बॉम से कर देता हूँ…….

मैं: नही समीर मैं अब ठीक हूँ…..

समीर: भाभी आप मेरे लिए इतना कुछ करती है…..मैं आपके लिए इतना भी नही कर सकता…. चलाओ लेट जाइए….

मैं समीर की बात टाल ना सकी, और बेड पर लेट गयी….क्योंकि आज मेने साड़ी पहनी हुई थी…..इसीलिए मेरी कमर पीछे से पूरी उसकी आँखो के सामने थी….उसने बॉम को पहले अपनी उंगलियों पर लगाया….और बोला……”भाभी बताएँ कि दर्द कहाँ पर है…..” मेने अपने हाथ से अपने कुल्हों की तरफ इशारा किया….पर अपनी चोट की असली जगह बताते हुए मुझे बेहद शरम आ रही थी….उसने पहले मेरी कमर को दोनो हाथों से मालिश करना शुरू किया. और फिर धीरे-2 नीचे की तरफ बढ़ने लगा…..

समीर: भाभी…..

मैं: जी……….

समीर: भाभी आपकी स्किन कितनी सॉफ्ट है…….एक दम स्मूद…..भाभी आप अपनी साड़ी थोड़ा नीचे सरका दें…..चोट वाली जगह पर भी अच्छे से मालिश हो जाएगी…..

मैने शरमाते हुए, अपनी साड़ी और कमर के बीच मे हाथ डाला और पेटिकोट का नाडा खोल दिया….और पेटिकोट और साड़ी ढीली कर दी….”क्योंकि आज मैने काफ़ी काम किया था….इसीलिए मेरी कमर मे फिर से दर्द बढ़ गया था…इसीलिए सोचा अगर सही जगह बॉम से मालिश हो जाएगी तो दर्द से राहत मिले…..जैसे ही मेरी साड़ी ढीली हुई, तो उसने मेरी साड़ी और पेटिकोट के अंदर अपनी उंगलियों को डाल कर उसे नीचे सरका दिया…..पर मुझे अहसास हुआ मेने बहुत बड़ी ग़लती कर दी है….मेने नीचे पैंटी भी नही पहनी हुई थी….पर तब तक बहुत देर हो चुकी थी…….मेरे आधे से ज़्यादा नितंब अब उसकी आँखों के सामने थे….

उसने धीरे-2 कमर से मालिश करते हुए, अपने हाथों को मेरे नितंबो की और बढ़ाना शुरू कर दिया…..उसके हाथों का स्पर्श मेरे जिस्म के हर अंग को ऐसा सकून पहुँच रहा था…. जैसे बरसो के प्यासे को पानी पीने के बाद सकून मिलता है…..चाहते हुए भी उसका विरोध नही कर पा रही थी….मैं बस लेटी हुई, उसके स्पर्श का मज़ा उठा रही थी….मेरा विरोध ना पा कर उसकी हिम्मत बढ़ी…..अब उसने मेरे आधे से ज़्यादा नंगे हो चुके चुतड़ों को ज़ोर-2 से मसलना शुरू कर दिया….मेरी साड़ी और पेटिकोट उसके हाथ से टकराते हुए और थोड़ा-2 और नीचे सरक जाते…..मुझे अहसास हो रहा था कि, अब उसे मेरी चुतड़ों के बीच की दरार भी दिखाई दे रही होगी…..

मेने शरम के मारे अपने चेहरे को तकिये मे छुपा लिया…..और अपने होंटो को अपने दांतो में भींच लिया….ताकि कही मैं मस्ती मे आकर सिसक ना उठु…..और उसे मेरी बढ़ती हुई कामुकता अहसास हो….वो मेरे दोनो गोरे-2 चुतड़ों को बॉम लगाने के बहाने से सहला रहा था….बॉम कम लगाया….और सहला ज़्यादा रहा था….जब मेने फिर भी विरोध नही किया तो वो और नीचे बढ़ा….यहाँ चोट नही लगी थी वहाँ भी सहलाने लगा…थोड़ी देर बाद उसके हाथों की उंगलियाँ मेरी गान्ड की दरार मे थी….फिर उसने अचानक से मेरी उसने मेरे दोनो चुतड़ों को हाथों से छोड़ा कर फेला कर बीच के जगह देखी, तो मैं साँस लेना ही भूल गयी….शायद उसने मेरे चुतड़ों को फेला कर मेरी गान्ड का छेद और चुनमुनिया तक देख ली होगी. अब मैं क्या बताऊ उसके हाथों के सपर्श से मैं बहुत ज़्यादा कामुक हो गयी थी…और मेरी चुनमुनिया गीली और गीली होती चली जा रही थी….मैं ये सोच कर और शरमा गयी कि, वो मेरे काली घनी झान्टो को देख रहा होगा…..जिन्हे मेने पिछले तीन सालो से नही बनाया था…..

आख़िर था ही कॉन जिसके लिए मैं अपनी चुनमुनिया को सॉफ चिकना रखती…..मेरे घर मे रहने वाला किरायेदार मेरे सभी गुप्तांगो को देख रहा था….और मैं पड़े-2 दिखा रही थी…पर जब उसने जानबूजकर या अंजाने मे मेरी गान्ड के छेद को अपनी उंगली से छुआ तो मैं एक दम से उचक पड़ी…बदन मे जैसे करेंट लग गया हो….जैसे तन्बदन मे आग लग गयी हो….मेने एक दम से उसका हाथ पकड़ कर झटक दिया….और कह उठी….”हाए तोबा क्या करते हो….” साथ ही उससे दूर होते हुए उठ बैठी…..मैं एक दम से घबरा गयी थी….और समीर मुझसे भी ज़्यादा घबरा गया था….. मुझे उसका इरादा ठीक नही लगा…..और मैं एक दम से बेड से नीचे उतर कर खड़ी हो गयी…..

पर मेरे खड़े होने का नीतज़ा ये हुआ कि गजब हो गया….मेरी साड़ी और पेटिकोट कमर से खुला हुआ था…..खड़ी हुई तो साड़ी और पेटिकोट दोनो सरक कर पावं मे जा गिरे….मैं नीचे से एक दम नंगी हो गयी…..इस तरह से अपने किरायेदार और 20 साल के जवान लड़के के सामने नंगी होने मे मेरी शरम की कोई इंतिहा ना रही….मुझे कुछ नही सूझा….दिमाग़ ने काम करना बंद कर दिया….साँस जैसे अटक गयी थी….मैं घबराहट मे वही ज़मीन पर बैठ गयी…

इससे पहले कि मुझे कुछ समझ आता….तब तक उसने मुझे गोद मे उठा कर बेड पर डाल दिया. और अगले ही पल वो हुआ जिसकी मेने कल्पना तक नही की थी कि, आज मेरे साथ ये सब होगा. मुझे पलंग पर पटकते ही वो खुद मुझ पर चढ़ गया….अगले ही पल मैं उसके नीचे थी और वो मेरे ऊपेर था…..उसके बाद अगले ही पल उसने मेरी टाँगों को हवा मे उठा दिया…मुझे वो कुछ भी सोचने समझने का मोका नही दे रहा था…..उसके अगले ही पल वो मेरी टाँगों के बीच मे जगह बना चुका था…..पाँचवे सेकेंड मे ही उसका हाफ पेंट और अंडरवेर उसके बदन से अलग हो गये….और उसके अगले ही पल उसने अपने बाबूराव को हाथ मे लेकर अपने लंड का मोटा सुपाडा मेरी चुनमुनिया के छेद पर लगा दिया……एक मोटी सी गरम सी कड़क सी चीज़ मेरी चुनमुनिया के अंदर जाती हुई महसूस हुई…..

बस फिर क्या था शाम के समय मैं मेरे ही रूम मे किरायेदार और मालकिन औरत और मर्द बन गये थे….मेरी तो साँसे उखाड़ने लगी थी….बदन ऐंठ गया था…आँखे झपकना भूल गयी थी….और जीभ सूखने लगी थी…मुझे कुछ होश नही क्या हो रहा है….वो कर रहा था….और मैं चुप चाप पड़ी थी…….मैं ना तो उसका विरोध कर रही थी और ना ही उसका साथ दे रही थी…..मैं बिना कुछ बोले अपनी टाँगों को उठाए लेटी रही….उसका मोटा मुन्सल जैसे बाबूराव मेरी चुनमुनिया को रौन्दता रहा रगड़ता रहा….पता नही कब तक मुझे चोदता रहा….ये नही था कि मुझे मज़ा नही आ रहा था….पर मैं जैसे सकते मे थी….फिर उसने मेरी चुनमुनिया को अपने गाढ़े वीर्य से भर दिया….मैं अपने किरायेदार के बाबूराव के पानी से तरबर्तर हो चुकी थी…..

जैसे ही वो मेरे ऊपेर से उठा….मैं काँपती हुई उठी और नंगी ही बाथरूम मे चली गयी.. मेरे मन उलझने बढ़ने लगी….”हाए ये मेने क्या कर दिया…..शादी शुदा होकर दूसरे मर्द से चुदवा लिया….वो भी सोनिया की उम्र के लड़के से नही ये ग़लत है….सरासर ग़लत है.. जो हुआ नही होना चाहिए था…..अब क्या होगा…..मैं बाथरूम मे गयी, और बैठ कर मूतने लगी….बहुत तेज पेशाब लगी थी…मेने झुक कर देखा तो मेरी झान्टे मेरी चुनमुनिया के पानी और उसके वीर्य से चिपचिपा रही थी…..मूतने के बाद मेने अपनी चुनमुनिया की फांको को फेलाया, और चुनमुनिया की मसपेशियों पर ज़ोर लगाया….तो समीर का वीर्य मेरी चुनमुनिया से बाहर टपकने लगा……एक के बाद एक कई बड़ी-2 बूंदे वीर्य की मेरी चुनमुनिया से बाहर नीचे फरश पर गिरती रही…..फिर मेरे अपनी झान्टो और जाँघो को पानी सॉफ किया……क्योंकि मेरे मेन्स चार दिन बाद आने वाले थे…….

इसीलिए बच्चा ठहरने का भी डर नही था…..मैं नहाई और फिर सलवार सूट पहन लिया… फिर मैं बातरूम से निकल कर बाहर आई, और अपने बेड पर जाकर गिर पड़ी…..समीर ऊपेर जा चुका था. शाम के 6 बज रहे थी…..खुमारी मे नींद आ गयी….मैं आज पूरे 4 साल बाद चुदि थी…चुदाई अंजाने और बेमन से हुई थी….पर चुदाई तो चुदाई है……मैं ऐसी सोई कि रात के 9 बजे बाहर मैन गेट पर हुई नॉक की आवाज़ से उठी….मैने घड़ी मे देखा तो 9 बज रहे थे…..हाए ये क्या 9 बज गये…..मैं जल्दी से उठी और बाहर जाकर गेट खोला तो बाहर निम्मी भाभी भी खड़ी थी…..उनके साथ मे उनका बेटा सन्नी था…..जो महज ** साल का था….

मैं: निम्मी आंटी आप इस समाए…खैरायत तो है ना ?

निम्मी: रुखसाना मेरे पिता जी की तबयत बहुत ज़्यादा खराब हो गई है….अभी फोन आया है….मैं और ये (निम्मी भाभी के हज़्बेंड) अभी वहाँ के लिए रवाना हो रहे है…..तुम सन्नी को दो दिन के लिए अपने पास रख लो……हम दो दिन बाद वापिस आ जाएगे..

मैं: कोई बात नही भाभी ये भी तो आपका अपना ही घर है….आप इसे छोड़ कर बेफिकर होकर जाए……

उसके बाद निम्मी आंटी सन्नी को हमारे घर छोड़ कर चली गयी…..मैने गेट लॉक किया. और सन्नी के साथ रूम मे आ गयी….मेने एक बार फिर से घड़ी की तरफ नज़र डाली 9::05 हो रहे थे…..मेने टीवी ऑन किया और सन्नी को कहा कि तुमने खाना खाया है कि नही…तो बोला…नही आंटी अभी नही खाया……मेने कहा कि तुम टीवी देखो मैं खाना गरम कर के लाती हूँ…. मैं रूम से बाहर निकल कर किचन मे गयी, और खाना गरम करने लगी….खाना काफ़ी था…इसीलिए किसी बात की परेशानी नही थी….. मेने खाना गरम किया…और फिर डाइनिंग टेबल पर लगा दिया…..और सन्नी को खाना परोस कर उसके साथ चेर पर बैठ गयी….