एक औरत की दास्तान–3

अभी कुछ ही वक़्त गुजरा था कि, Hindi Sex Stories Antarvasna Kamukta Sex Kahani Indian Sex Chudai डोर बेल बजी, जब मेने गेट खोला तो बाहर फातिमा खड़ी थी. मुझे देख कर उसने एक कमीनी मुस्कान के साथ सलाम कहा, और अंदर चली आई. मेने गेट बंद किया, और रूम मे आकर फातिमा को सोफे पर बैठा दिया….”और सूनाओ फातिमा दीदी कैसे है आप” मेने किचन से पानी लाकर फातिमा को देते हुए कहा…..

फातिमा: मैं ठीक हूँ…..तुम सूनाओ तुम कैसी हो….?

मैं: मैं ठीक हूँ भाबी जिंदगी कट रही है…..अच्छा क्या लेंगी आप चाइ या शरबत…

फातिमा: तोबा रुखसाना इतनी गरमी मे चाइ, तुम एक काम करो शरबत ही बना लो….

मैं किचन मे गये और शरबत बना कर ले आई, और शरबत फातिमा को देकर बोली, “भाभी आप बैठिए, मैं ऊपेर से कपड़े उतार लाती हूँ…..” मैं ऊपेर छत पर गयी, और कपड़े उतार कर नीचे आने लगी….कुछ ही सीढ़ियाँ बची थी कि अचानक से मेरा बॅलेन्स बिगड़ गया, और मैं सीढ़ियों से नीचे गिर गयी….गिरने की आवाज़ सुनते ही, फातिमा दौड़ कर बाहर आई, और मुझे यूँ नीचे गिरा देख कर उसने मुझे जल्दी से सहारा देकर उठाया और रूम मे लेजा कर बेड पर लेटा दिया…..”या खुदा ज़्यादा चोट तो नही लगी रुखसाना…..”

मैं: अहह हाई बहुत दर्द हो रहा है भाभी….आहह आप जल्दी से डॉक्टर बुला लाओ…

फातिमा फॉरन बाहर चली गयी, और गली के नुकड पर डॉक्टर का क्लिनिक था….वहाँ से डॉक्टर को बुला लाई….डॉक्टर ने चेकप किया और कहा…”घबराने की बात नही है….” कमर मे हल्की सी मोच है…आप ये दवाई खाए और ये बॉम दिन मे तीन चार बार लगा कर मालिश करे, आपकी चोट जल्द ही ठीक हो जाएगी…….

डॉक्टर के जाने के बाद फातिमा ने मुझे दवाई दी, और बॉम से मालिश की……शाम को फ़ारूक़ और समीर घर वापिस आए तो फातिमा ने डोर खोला…..फ़ारूक़ बाहर से भड़क उठे….मुझे रूम मे उनकी आवाज़ सुनाई दे रही थी…

फ़ारूक़: भाभी जान आपने क्यों तकलीफ़ की, वो रुखसाना कहाँ मर गयी…..वो डोर नही खोल सकती थी क्या…..

फातिमा: अर्रे फ़ारूक़ भाई इतना क्यों भड़क रहे हो…..वो बेचारी तो सीढ़ियों से गिर गयी थी. चोट आई है उसे डॉक्टर ने आराम करने को कहा था….उसके बाद समीर एक बार रूम मे आया, और मेरा हालचाल पूछ कर ऊपेर चला गया….और एक मेरे शोहार थे कि, उन्होने मेरा हाल चाल भी पूछना ज़रूरी नही समझा….रात का खाना फातिमा ने तैयार किया…..और फ़ारूक़ समीर को ऊपेर खाना दे आए….फ़ारूक़ आज मटन लाए थे…..जिसे फातिमा ने बनाया था.

रात के 11 बजे फ़ारूक़ और फातिमा अपनी रंगरेलियों मे मसगूल हो गये……मैं बेड पर लेटी उनकी सब हरकतों को देख कर खून के आँसू पी रही थी…..फातिमा सोच रही थी कि, मैं सो चुकी हूँ…पर दरअसल मैं जाग रही थी…..पर मेरी मौजूदगी से उन्हे क्या फरक पड़ता था…..”फ़ारूक़ मियाँ अब आप मे वो बात नही रही…..” फातिमा ने फ़ारूक़ के बाबूराव को चूस्ते हुए कहा…

फ़ारूक़: क्या हुआ फातिमा रानी किस बात की कमी है….

फातिमा: ह्म्‍म्म देखो ना पहले तो ये मेरी फुद्दि को देखते ही खड़ा हो जाता था… और अब देखो 10 मिनिट हो गये इसके चुप्पे लगाते हुए, अभी तक सही से खड़ा नही हुआ है….

फ़ारूक़: आह तो जल्दी कैसी है मेरे जान थोड़ी देर और चूस ले, फिर मैं तेरे चुनमुनिया की आग भी बुझाता हूँ…..

थोड़ी देर बाद फातिमा फ़ारूक़ के बाबूराव पर सवार हो गयी…..और ऊपेर नीचे होने लगी…थोड़ी देर बाद दोनो शांत हो गये……”फ़ारूक़ मैं कल घर वापिस जा रही हूँ….”

फ़ारूक़: क्यों अब क्या हो गया…….

फातिमा: मैं यहाँ तुम्हारे घर का काम करने नही आई……ये तुम्हारी बीवी जो अपनी कमर तुड़वा कर बेड पर पसर गयी है…..मुझे इसकी चाकरी नही करनी मैं घर जा रही हूँ कल…

फ़ारूक़: फातिमा मेरे जान कल मत जाना…..

फातिमा: क्यों मेने कहा नही था तुम्हे कि, तुम मेरे घर आ जाओ…..तुम्हे तो पता है तुम्हारे भाई जान देल्ही गये है….10 दिनो के लिए वहाँ पर कोई नही है…..बच्चे है स्कूल चले जाते है. और शाम को 5 बजे आते है….

फ़ारूक़: तो ठीक है ना कल तक रुक जाओ…..मैं कल बड़े साहब से छुट्टी ले लेता हूँ…फिर परसो साथ मे चलेंगे…..

उसके बाद दोनो सो गये…..मैं भी करवटें बदलते-2 सो गयी….अगली सुबह जब उठी तो देखा फातिमा ने नाश्ता तैयार किया हुआ था….और फ़ारूक़ बेड पर बैठे ही नाश्ता कर रहे थे….फ़ारूक़ ने फातिमा से कहा कि, ऊपेर समीर बाबू को थोड़ी देर बाद नाश्ता दे आएँ…..क्योंकि आज समीर ने छुट्टी ले रखी थी…..समीर ने कुछ ज़रूरी समान जो खरीदना था….फ़ारूक़ के जाने के बाद फातिमा ने नाश्ता ट्रे मे डाला और ऊपेर चली गयी…..थोड़ी देर बाद जब फातिमा नीचे आई तो उसके होंटो पर कमीनी मुस्कान थी…..पता नही क्यों पर मुझे फातिमा की नीयत ठीक नही लग रही थी…..

आज मेरी कमर मे दर्द कुछ कम हुआ था…..पर अभी भी उठने बैठने मे परेशानी हो रही थी…..फातिमा ने दिन मे तीन बार मेरी बॉम से मालिश की, डॉक्टर भी एक बार फिर से चेक करके दवाई दे गया….इस दौरान मेने नोटीस किया कि, फातिमा बार-2 किसी ना किसी बहाने दोपहर तक चार पाँच बार ऊपेर जा चुकी थी…..मुझे कुछ गड़बड़ लग रही थी….फिर समीर नीचे आया, और मेरे रूम मे आकर मेरा हाल चाल पूछा…..मैं बेड से उठने लगी तो उसने मुझे लेटे रहने को कहा….और कहा कि वो बाज़ार जा रहा है, अगर किसी चीज़ की ज़रूरत हो तो बता दें…..वो साथ मे लेता आएगा…..मैने कहा कि, किसी चीज़ की ज़रूरत नही है…..समीर बाहर चला गया….शाम के करीब 4 बजे समीर वापिस आया…..दवाई की वजह से मेरा सर भारी हो रहा था….थोड़ी -2 देर बाद मुझे नींद आ रही थी……

लेटे-2 मेरी आँख लग गयी…..अभी सोए हुए 20 मिनिट ही गुज़रे थी कि तेज प्यास लगने से मेरी आँख खुली…..मेने बेड से उठना चाहा तो दर्द की तेज टीस कमर मे उठी….मेने फातिमा को आवाज़ लगाई….पर वो नही आई……मैं किसी तरह से खड़ी हुई, और किचन मे पहुँची, पानी पिया, और फिर दूसरे रूम्स मे देखा पर फातिमा नज़र नही आई…बाहर मेन डोर भी अंदर से बंद था…फिर फातिमा गयी कहाँ…..तभी मुझे फातिमा की सुबह वाली हरकतें याद आ गयी…..हो ना हो डाल मे ज़रूर कुछ काला है….कही वो समीर पर डोरे तो नही डाल रही……

ये सोचते ही पता नही क्यों मेरा खून खोल उठा…..मैं बड़ी मुस्किल से पर हिम्मत करके सीढ़ियाँ चढ़ि और ऊपेर आ गयी….जैसे ही मैं समीर के डोर के पास पहुँची, तो मुझे अंदर से फातिमा की आहों की पुकार सुनाई दी…….”अह्ह्ह्ह आह धीरे सामीएर बाबू अहह मुझसे भूल हो गयी अह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्ह हाईए मेरी फुद्दि फाड़ दी रे अहह मेरी चुनमुनिया ओह फॅट गाईए समीरररर”

ये सब सुन कर मैं तो जैसे साँस लेना ही भूल गयी…..क्या मैं जो सुन रही थी वो सच है…. मैं समीर के रूम के डोर की तरफ बढ़ी…..जो लॉक नही था और थोड़ा सा खुला हुआ था….अभी मैं डोर की तरफ बढ़ ही रही थी कि, मुझे समीर की आवाज़ सुनाई दी…..”साली मुझे नामर्द कहती है……आह आहह ईए ले और ले ले मेरा लौडा अपनी चुनमुनिया मे साली……अगर रुखसाना भाभी घर पर ना होती तो आज तेरी चुनमुनिया मे लौडा घुसा -2 कर सूजा देता…..”

फातिमा: ह्म्‍म्म्म हइई सूजा दे मेरीए शेर ओह तेरी ही चुनमुनिया है…..और तू उस गश्ती की फिकर ना कर मेरे राजा वो ऊपेर चढ़ कर नही आ सकती…..

मैं धीरे-2 काँपते हुए कदमो के साथ डोर के पास पहुँची और अंदर झाँका….. अंदर का नज़ारा देख मेरे होश ही उड़ गये…..अंदर फातिमा बेड पर घोड़ी बनी हुई झुकी हुई थी…और समीर उसके पीछे से अपना मुनसल जैसा बाबूराव तेज़ी फातिमा की चुनमुनिया के अंदर बाहर कर रहा था… फातिमा ने अपना चेहरा बिस्तर मे दबाया हुआ था…उसका पूरा बदन समीर के झटको से हिल रहा था…….”अह्ह्ह्ह अहह सामीएरर बाबू मैने तो सारी दुनिया पा ली आह ऐसा लंड आज तक नही देखा अह्ह्ह्ह एक दम जड तक अंदर घुसता है तेरा लौडा अह्ह्ह्ह मेरी चुनमुनिया के अंदर जाकर बच्चेदानी पर ठोकर मार रहा है…..आह चोद मुझे फाड़ दे मेरी चुनमुनिया को मेरे राजा”

समीर ने अपना बाबूराव फातिमा की चुनमुनिया से बाहर निकाला और बेड पर लेट गया….फिर उसने फातिमा को उसके खुले हुए बालो से पकड़ कर अपने ऊपेर चढ़ा लिया….फातिमा ने ऊपेर आते ही समीर के बाबूराव अपने हाथ मे थाम लिया…..और उसके बाबूराव के सुपाडे को अपनी चुनमुनिया के छेद पर लगा कर उसके बाबूराव पर बैठ गयी…..और तेज़ी से अपनी गान्ड ऊपेर नीचे उछलाते हुए चुदने लगी…. समीर का फेस डोर की तरफ था…..तभी उसकी नज़र अचानक से मुझ पर पड़ी….हम दोनो एक दूसरे की आँखो मे देख रहे थे….मुझे लगा कि अब गड़बड़ हो गयी है….पर समीर ने ना तो कुछ कहा और ना ही बोला…..उसने मेरी और देखते हुए फातिमा के चुतड़ों को दोनो हाथों से पकड़ कर दोनो तरफ फेला दिया…..

फातिमा की गान्ड का छेद मेरी आँखो की सामने आ गया…..जो फातिमा की चुनमुनिया से निकले पानी से एक गीला हुआ था…..समीर ने मेरी तरफ देखते हुए अपनी कमर को ऊपेर की तरफ उछालना शुरू कर दिया….समीर का 8 इंच का बाबूराव फातिमा की गीली चुनमुनिया के अंदर बाहर होना शुरू हो गया…..समीर बार-2 फातिमा की गान्ड के छेद को फेला कर मेरी ओर दिखा रहा था…मेरे तो जैसे पैर वही जाम गये थे……मैं कभी फातिमा की चुनमुनिया मे समीर के बाबूराव को अंदर बाहर होता देखती तो कभी समीर की आँखो मे …….

समीर: बोल रांड़ मज़ा आ रहा है ना ?

फातिमा: हां समीर बाबू बहुत मज़ा आ रहा है अह्ह्ह्ह दिल कर रहा है कि मैं सारा दिन तुमसे अपनी चुनमुनिया ऐसे पेलवाती रहूं…..अह्ह्ह्ह सच मे बहुत मज़ा आ रहा है…..

समीर अभी भी मेरी आँखो मे देख रहा था….फिर मुझे अचानक से अहसास हुआ कि, ये मैं क्या कर रही हूँ…..मैं वहाँ से हट कर नीचे आ गयी…..कुछ पलों के लिए मैं अपनी कमर का दर्द भी भूल गयी…..मेरी पैंटी अंदर से एक दम गीली हो चुकी थी…..ऐसा लग रहा था कि, बदन का सारा खून और गरमी चुनमुनिया की तरफ सिमटती जा रही हो…..मैं बेड पर निढाल से होकर गिर पड़ी…..अपनी टाँगों के बीच तकिया दबा लिया….और अपनी चुनमुनिया को तकिये पर रगड़ने लगी….पर चुनमुनिया मे सरसराहट और बढ़ती जा रहा थी…..मेरी खुली हुई आँखों के सामने फातिमा की चुनमुनिया मे अंदर बाहर होता समीर का 8 इंच लंबा और 4 इंच मोटा बाबूराव अभी भी था….मैं तब तक अपनी चुनमुनिया को तकिये से रगड़ती रही…..

जब तक कि मेरी चुनमुनिया के अंदर से बरसो का जमा हुआ लावा नही उगल पड़ा…..मेरा पूरा बदन थरथरा गया….मेरी कमर झटके खाने लगी…..मैं झड़ने के कारण एक दम निढाल से हो गयी….और करीब 15 मिनिट तक बेसूध लेटी रही….फिर मैं उठ कर बातरूम मे आई, और अपने कपड़े उतारने शुरू किए….मेने अपनी सलवार कमीज़ को उतार कर टंगा और फिर ब्रा को उतार कर बालटी मे डाल दिया…..फिर जैसे ही मेने अपनी पैंटी को नीचे सरकाया, मेने जाँघो से नीचे तो सरक गयी….पर मेरी पैंटी नीचे से बेहद गीली थी….

और गीले पन की वजह से वो चुनमुनिया की फांको पर चिपक सी गयी….मेने फिर से अपनी पैंटी को नीचे सरकाया, और फिर किसी तरह उसे उतार कर देखा….मेरी पैंटी मेरी चुनमुनिया के लैस्दार पानी से एक दम सनी हुई थी…..मेने पैंटी को बालटी मे डाल दिया…..और फिर नहाने लगी. दोपहर की तेज धूप के कारण पानी की टंकी मे जमा पानी एक दम गरम था…नहाने से मुझे बहुत सकून मिला…..नहाने के बाद मेने दूसरे कपड़े पहने और अपने रूम मे आई, तो मेने देखा कि, फातिमा बेड पर लेटी हुई थी….और धीरे-2 अपनी चुनमुनिया को सहला रही थी…

मुझे देख कर उसने अपनी चुनमुनिया से हाथ हटा लिया……फिर कुछ खास बात नही हुई…..रात को फ़ारूक़ घर वापिस आ गये….वो बहुत खुश लग रहे थे….शायद उन्हे छुट्टी मिल गयी थी. रात को फ़ारूक़ ही समीर का खाना उसे ऊपेर दे आए…मुझे यकीन था कि, अब फातिमा शायद जाने से मना कर दे…..क्योंकि अब उसे फ़ारूक़ के बाबूराव की क्या ज़रूरत थी….जब उसे यहाँ पर तगड़ा जवान लंड मिल रहा था…..और मेरा अंदाज़ा सही भी निकाला….जब फ़ारूक़ ने उसे बताया कि, उसे छुट्टी मिल गयी है…..तो फातिमा ने ये कह कर मना कर दिया कि, मेरी तबीयत अभी ठीक नही है…..

पर शायद किस्मत फातिमा के साथ नही थी…..देल्ही से उसके शोहार का फोन आ गया…..कि उनके बेटे की तबीयत खराब है….और वो जल्द से जल्द घर पहुचे….फातिमा बेमन से मान गयी. और अगले दिन फ़ारूक़ के साथ उसके गाओं चली गयी….अब मुझे समीर से चिढ़ सी होने लगी थी. मैने कभी सोचा ना था कि वो मासूम सा दिखने वाला समीर इस कदर तक गिर सकता है कि, अपने से दुगनी उम्र से भी ज़्यादा उम्र की औरत के साथ ऐसी गिरी हुई हरकत कर सकता है….समीर भी फ़ारूक़ के साथ स्टेशन पर चला गया था……

शाम को जब समीर के आने का टाइम हुआ तो मेने पहले से मैन डोर को अनलॉक कर दिया था. ताकि मुझे उसकी शक्ल ना देखनी पड़े…..मैं अपने रूम मे आकर लेट गयी….थोड़ी देर बाद मुझे बाहर के गेट के खुलने की आवाज़ आई…..और फिर अंदर गेट लॉक होने की….मैं अपने रूम मे लेटी हुई अंदाज़ा लगा रही थी कि समीर घर पर आ चुका है…..थोड़ी देर बाद समीर मेरे रूम मे दाखिल हुआ….मैं दर्द की वजह से पेट के बल लेटी हुई थी… वो जैसे ही रूम मे दाखिल हुआ, मैं उठ कर बैठ गयी….वो सीधा मेरी तरफ ही बढ़ रहा था. मैं डर के मारे सिमट कर बैठ गयी….वो पास आकर चेर पर बैठ गया….

समीर: आपका दर्द अब कैसा है…..?

मैं: (घबराते हुए) अब पहले से बेहतर है…..

समीर: आप दवाई तो टाइम से ले रही है ना ?

मैं: हां…

समीर: अच्छा मैं अभी फ्रेश होकर बाहर से खाना ले आता हूँ…..आप क्या खाएँगी….

मैं: कुछ भी ले आएँ….

समीर उठ कर बाहर जाने लगा…..तो नज़ाने मेरे दिमाग़ मे क्या आया……और मैं उससे पूछ बैठी…..”तुम ने ऐसी हरकत क्यों की….” मेरी बात सुन कर समीर फिर से चेर पर बैठ गया. और सर को झुकाते हुए बोला…..” मुझे माफ़ कर दीजिए…..मुझसे बहुत बड़ी ग़लती हो गयी….ये सब अंजाने मे हो गया……” उसने एक बार मेरी आँखों मे देखा और फिर से झुका लिया…..

“अंजाने मे ग़लती हो गयी….तुम तो पढ़े लिखे हो….समझदार हो……अच्छे घराने से हो…..तुम उस कंजरी फातिमा की बातों मे कैसे आ गये….” समीर ने एक बार फिर से मेरी आँखों मे देखा. इस बार मेरी आँखों मे शिकायत नही बल्कि उसके लिए फिकर्मन्दि थी…..”

समीर: भाभी सच कहूँ तो आप नही मानेगी…..पर सच यही है कि इसमे मेरी कोई ग़लती नही है…….दरअसल कल फातिमा बार-2 ऊपेर आकर मुझे उकसा रही थी….मेने इन सब बातों से अपना दिमाग़ हटाना चाहा और बाहर बाज़ार चला गया……बाज़ार मे मेने ड्रिंक भी कर ली. और जब शाम को मैं घर वापिस आया तो फातिमा ऊपेर मेरे रूम मे ज़बरदस्ती घुस्स आई… मेने उसे बहुत मना किया….पर उसने एक नही मानी और मुझे नामर्द कहा…मैं फिर भी चुप रहा तो उसने मुझे फिर से ये कह कर उकसाया कि, तू अपने बाप की औलाद हो ही नही सकता, ज़रूर तेरी माँ का ख़सम भी नामर्द रहा होगा….अपनी माँ से जाकर पूछना कि तेरा असली बाप कॉन है………..भाभी आप यकीन करे कि मैं इतना भड़क गया कि, मुझसे बर्दास्त नही हुआ…..पर फिर भी मैं चुप रहा तो उसने मेरे सामने कपड़े उतार दिए और बोली अगर तू अपने ही बाप की औलाद है तो दिखा अपना दम

ये कहते हुए समीर चुप हो गया……मैं अब उसकी हालत समझ सकती थी….आख़िर एक जवान लड़के के सामने अगर एक औरत नंगी होकर उकसाए तो उसका नीतज़ा वही होना था….जो मेने अपनी आँखों से देखा था…….”भाभी मैं सच कह रहा हूँ…..ये सब उस की वजह से हुआ… आप मुझे माफ़ कर दें…..” ये कह कर समीर ऊपेर चला गया…..फिर वो फ्रेश होकर नीचे आया, और बोला भाभी मैं ढाबे से खाना लेने जा रहा हूँ….” फिर समीर चला गया. मैं उठी और टेबल पर थाली और पानी वेग़ैरह रखा….. थोड़ी देर बाद समीर खाना लेकर आया…आज पहली बार समीर नीचे खाना खा रहा था…..खाना खाते हुए हम दोनो चुप रहे कोई बात नही हुई………

खाना ख़तम करने के बाद जब मैं बर्तन उठाने के लिए उठी, तो समीर ने मुझे रोक दिया और बोला …..”रहने दें भाभी मैं कर देता हूँ….”

मेने कहा नही मैं कर लूँगी…”पर उसने मेरे एक ना सुनी….और मुझे बेड पर रेस्ट करने को कह कर खुद बर्तन लेकर किचन मे चला गया….और बर्तन सॉफ करके सारा काम ख़तम कर दिया…..समीर फिर से मेरे रूम मे आया. मैं बेड पर उल्टी लेटी हुई थी…..क्योंकि पीठ के बल लेटने मे अभी थोड़ी दिक्कत होती थी….

उसने एक ग्लास पानी मुझे दिया….और बोला “भाभी जी बताए कॉन से वाली दवाई लेनी है आप ने” मेने उसे दवाई के बारे मे बताया और उसने मुझे वो दवाई निकाल कर डी…..मेने दवाई ली और फिर से पेट के बल लेट गयी…..तभी समीर की नज़र मेडिसिन के बीच मे रखे हुए बॉम पर गयी…..और वो बोला…….

समीर: क्या आप ने इस बॉम से मालिश की थी…..इससे आपकी तकलीफ़ जल्दी ठीक हो जाएगी….

मैं: जी कल दीदी ने की थी….पर आज कोई नही है…..इसलिए खुद ही थोड़ी सी की है.

समीर : चलिए आप लेट जाएँ मैं आपकी कमर पर बॉम लगा कर मालिश कर देता हूँ…..

मैं: नही रहने दीजिए……मैं खुद कर लूँगी….

समीर: आप लगा तो खुद लेंगी……..पर मालिश नही कर पायंगी…..मैं आपकी मालिश कर देता हूँ….आप जल्द ही ठीक हो जाएँगी…….

ये कह कर समीर चेर से उठ कर बेड पर आकर मेरी जाँघो के पास बैठ गया…….”चलाओ भाभी जी बताएँ कहाँ लगाना है…..” मेने शरमाते हुए अपनी कमीज़ को ऊपेर उठा लिया… और कहा “यहाँ कमर पर……” समीर ने थोड़ा सा बॉम अपनी उंगलियों पर लगाया और फिर मेरी कमर पर मलने लगा……जैसे ही उसके हाथ का स्पर्श मेने अपनी नंगी कमर पर महसूस किया……मेरा पूरा बदन कांप गया…..मेरी सिसकारी निकलते-2 रह गयी……समीर ने धीरे-2 दोनो हाथों से मेरी कमर की मालिश करनी शुरू कर दी….उसके हाथों का स्पर्श मुझे बहुत आनंद दे रहा था……कई बार उसके हाथों की उंगलियाँ मेरी सलवार के जबरबंद से टकरा जाती तो मेरा दिल जोरो से धड़कने लगता…..पर असल मे दर्द मुझे थोड़ा और नीचे था….पर मैं कुछ कह भी नही पा रही थी…..

समीर: भाभी ज़्यादा दर्द कहाँ पर है……

मैं: थोड़ा सा नीचे है……

समीर ने फिर थोड़ा और नीचे बॉम लगाना शुरू कर दिया….भले ही उस मालिश से कोई फ़ायदा नही होने वाला था…..क्योंकि चोट नीचे चुतड़ों के पास आई थी…पर फिर भी मुझे उसके हाथों के सपर्श से जो सकून मिल रहा था…..मैं उसको बयान नही कर सकती……”भाभी जी थोड़ी सलवार नीचे सरका दो….ताकि अच्छे से बॉम लगा सके….” समीर की बात सुन कर मेरा जहन मेरा वजूद कांप उठा….पर मुझे उसका सपर्श अच्छा लग रहा था…और मुझे सकून भी मिल रहा था…..मेने तुनकते हुए अपनी सलवार को और नीचे की तरफ सरकाया. क्योंकि मेने नाडा बाँधा हुआ था…इसलिए सलवार पूरा नीचे नही हो सकती थी….पर फिर भी काफ़ी हद तक नीचे हो गयी…..”भाभी जी आप तो बहुत गोरी है…मेने इतना गोरा बदन आज तक नही देखा….” वो तो अच्छा था कि मैं उलटी लेटी हुई थी……

उसकी बात सुन कर मेरे गाल शरम के मारे लाल हो गये थे…..मुझे यकीन है कि अकेले कमरे मे वो मुझे अपने इस तरह पास पाकर पागल हो गया होगा….उसने थोड़ी देर और मालिश की और मेने उससे कहा कि अब बस करे…..वो चुप चाप उठ कर ऊपेर चला गया…..मुझे आज बहुत सकून मिल रहा था…..आज कई सालो बाद मेरे जिस्म को ऐसे हाथों ने छुआ था…जिसके स्पर्श मे प्यार मिला हुआ था…..समीर के बारे मे सोचते हुए मुझे कब नींद आ गयी मुझे पता ही नही चला….. अगली सुबह जब मैं उठी तो मेरी कमर का दर्द अब बहुत कम हो गया था…..