एक औरत की दास्तान–2

फ़ारूक़: वो दरअसल बाबू ये बात ये है कि Hindi Sex Stories Antarvasna Kamukta Sex Kahani Indian Sex Chudai रुखसाना मेरी दूसरी बीवी है….जब मैं 25 साल का था….तब मेरी पहली शादी हुई थी…..और पहली बीवी से सोनिया का जनम हुआ…..लेकिन सोनिया के जनम के 13 साल बाद मेरी पहली पत्नी की मौत हो गयी.. फिर मेने अपनी बीवी की मौत के बाद 35 साल की उम्र मे रुखसाना से शादी की. रुखसाना की भी पहले शादी हुई थी…..लेकिन उसके पति की मौत हो गयी….. और बाद मे जब रुखसाना 20 साल की थी….तब मेरी और रुखसाना की शादी हुई…..

अब सारा मसला समीर के सामने था…..थोड़ी देर बाद समीर वापिस चला गया…अगले दिन फ़ारूक़ सुबह काम पर चले गये……दोपहर को फ़ारूक़ समीर का सारा समान लेकर वापिस आए, और फिर समीर का समान ऊपेर वाले रूम मे रख कर मुझसे कहा…..कि मैं और सोनिया दोनो मिल कर समीर का समान सेट कर दें…..मेने और सोनिया ने ऊपेर वाले रूम मे समीर का समान सेट कर दिया….और अच्छे से सॉफ- सफाई भी कर दी…..

फिर फ़ारूक़ शाम को समीर के साथ घर वापिस आए, और उन्हे ऊपेर रूम मे ले गये….समीर ने अपने रूम को देखा….जो शायद उसे पसंद आ गया था…..उनका पूरा समान पूरे तरीके से रख दिया था….

फ़ारूक़: क्यों बाबू जी रूम पसंद आया ना…..

समीर: हां ठीक है…..

फ़ारूक़: अच्छा बाबू जी गरमी बहुत है…..आप नहा धो लो….फिर रात के खाने पर मिलते है…..उसके बाद हम नीचे आ गये….नीचे आने के बाद फ़ारूक़ ने मुझसे बोला कि जल्दी से रात का खाना तैयार कर दो…..मैं थोड़ी देर बाहर टहल कर आता हूँ,….ये कह कर फ़ारूक़ बाहर चले गये…..मैं जानती थी कि, फ़ारूक़ अब कही जाकर दारू पीने बैठ जाएँगे. और पता नही कब वापिस आएँगे….इसीलिए मेने खाना तैयार करना शुरू कर दिया….आधे घंटे मे मेने और सोनिया ने मिल कर खाना तैयार कर लिया….अभी मैं खाना प्लेट्स मे डाल ही रही थी कि, लाइट चली गयी…..ऊपेर से इतनी गरमी थी कि, नीचे तो साँस लेना भी मुस्किल हो रहा था…

मेने सोचा कि, क्यों ना समीर को ऊपेर ही खाना दे आउ…..इसीलिए मेने खाना थाली मे डाला और ऊपेर ले गयी….जैसे ही मैं ऊपेर पहुँची तो लाइट भी आ गयी….समीर के रूम की तरफ बढ़ते हुए मेरे जेहन मे अजीब सा डर उमड़ रहा था…..रूम का डोर खुला हुआ था. मैं सर को झुकाए हुए रूम मे दाखिल हुई, तो मेरे कदमो के आहट सुन कर समीर ने पीछे पलट कर मेरी तरफ देखा…..”हाई तोबा…..” समीर सिर्फ़ लोवर पहने खड़ा था… उसने ऊपेर बनियान वहगरा कुछ नही पहना हुआ था….मेरी नज़रें उसकी चौड़ी छाती पर ही जम गयी…..एक दम चौड़ा सीना मांसल बाहें…..एक दम कसरती बदन….मेने अपनी नज़रों को बहुत हटाने की कॉसिश की….पर नज़ाने क्यों बार-2 मेरी नज़रें समीर की चौड़ी छाती पर जाकर टिक जाती….

मैं: जी वो मैं आपके लिए खाना लाई थी……

अभी समीर कुछ बोलने ही वाला था कि, एक बार फिर से लाइट ऑफ हो गयी…..रूम मे एक दम से घुप अंधेरा च्छा गया…..एक जवान लड़के के साथ अपने आप को अंधेरे रूम मे पा कर मैं एक दम से घबरा गयी…मेने हड़बड़ाते हुए कहा…..”मैं लालटेन जला देती हूँ….” पर समीर ने मुझे रोक दिया……”अर्रे नही आप वही खड़ी रहिए….आपके हाथ मे खाना है.. मैं लालटेन जला देता हूँ….” ये कह कर समीर लालटेन और माचिस ढूँढने लगा….फिर थोड़ी देर बाद समीर ने लालटेन जला कर टेबल पर रख दी….

जैसे ही लालटेन की रोशनी रूम मे फेली, मेरी नज़र एक बार उसके गठीले बदन पर जा ठहरी, पसीने से भीगा हुआ उसका कसरती बदन लालटेन की रोशनी मे ऐसे चमक रहा था मानो जैसे सोना हो…..तभी समीर मेरी तरफ बढ़ा, और मेरी आँखो मे झाँकते हुए मेरे हाथ से खाने की थाली पकड़ ली…..मेने शर्मा कर नज़रें झुका ली, और हड़बड़ाते हुए बोली. “मैं बाहर चारपाई बिछा देती हूँ….आप बाहर बैठ कर आराम से खाना खा लीजिए….”

मैं बाहर आई, और बाहर चारपाई बिछा दी, समीर भी खाने की थाली लेकर चारपाई पर बैठ गया…..”फ़ारूक़ भाई कहाँ है….” समीर ने खाने की थाली अपने सामने रखते हुए कहा…पर मेने समीर की आवाज़ नही सुनी….मैं तो अभी भी उसके बाइसेप्स देख रही थी…. जब मेने उसकी बात का जवाब नही दिया, तो वो मेरी ओर देखते हुए दोबारा फ़ारूक़ के बारे मे पूछने लगा…..समीर की आवाज़ सुन कर मैं होश मे आई….और एक दम से झेंप गयी. और सर झुका कर बोली…….”पता नही कही पी रहे होंगे….रात को देर से ही घर आते है….”

समीर : अच्छा कोई बात नही….उफ़फ्फ़ ये गरमी….इतनी गरमी मे खाना खाना भी मुस्किल हो जाता है…..

मैं समीर के बाथ रूम मे चली गयी….और हाथ से हिलाने वाला पंखा लेकर बाहर आ गयी……और समीर के पास जाकर बोली…”आप खाना खा लीजिए. मैं हवा कर देती हूँ……”

समीर: अर्रे नही -2 मैं खा लूँगा…..आप क्यों तकलीफ़ कर रही है…..

मैं : इसमे तकलीफ़ की क्या बात है….आप खाना खा लीजिए ….

समीर चारपाई पर बैठ कर खाना खाने लगा….और मैं समीर के साथ चारपाई के बगल मे खड़ी होकर पंखा हिलाने लगी…..”अर्रे आप खड़ी क्यों है….बैठिए ना…” समीर ने मुझ को यूँ खड़ा हुआ देख कर कहा….

मैं : नही कोई बात नही मैं ठीक हूँ….(मेने अपने सर को झुकाए हुए कहा)

समीर : नही रुखसाना जी ऐसे अच्छा नही लगता मुझे कि मैं आराम से खाना खाऊ. और आप खड़ी होकर मुझे पंखे से हवा दें….मुझे अच्छा नही लगता…आप बैठिए ना….(अंजाने मे ही उसने मेरा नाम बोल दिया था….पर उसे जलद ही अहसास हो गया)सॉरी मैने आप का नाम लेकर बुलाया…वो जल्दबाज़ी मे बोल गया…

मैं : कोई बात नही….

समीर: अच्छा ठीक है…अगर आपको इतराज ना हो तो आज से मैं आपको भाभी कहूँगा… क्योंकि मैं फ़ारूक़ को भाई कहता हूँ….अगर आप को बुरा ना लगे.

मैं : जी मुझे क्यो बुरा लगेगा…

समीर : अच्छा भाभी जी….अब ज़रा आप बैठने की तकलीफ़ करेंगी….

समीर की बात सुन कर मुझे हँसी आ गयी….और फिर सामने चारपाई पैर नीचे लटका कर बैठ गयी…और पंखा हिलाने लगी….समीर ने खाना खाना शुरू कर दिया…..समीर खाना खाते हुए बार-2 मुझे चोर नज़रों से देख रहा था. लालटेन की रोशनी मे मेरा हुश्न भी दमक रहा था…..बड़ी-2 भूरे रंग की आँखे….तीखे नैन नक्श गुलाब के रसीले होन्ट….लंबे खुले हुए बाल…. सुराही दार गर्दन….भले ही लाखों मे ना सही पर हज़ारो मे तो एक हूँ ही…

मेने गौर क्या कि समीर की नज़र मेरी चुचियों पर बार-2 रुक जाती…ब्लॅक कलर की कमीज़ मे मेरे गोरे रंग की चुचियाँ गजब ढा रही थी…बड़ी-2 और गोल-2 गुदाज चुचियाँ…..इसका अहसास तब मुझे हुआ जब मेने उसके पयज़ामे मे तन रहे लंड की हल चल को देखा….. खैर समीर ने जैसे तैसे खाना खाया…..और हाथ धोने के लिए बाथरूम मे चला गया…..जब वो बाथरूम मे गया, मेने बर्तन उठाए और नीचे आ गयी….नीचे आकर मेने बर्तन किचिन मे रखे और अपने बेड पर आकर लेट गयी….ओह्ह्ह्ह आज नजाने मुझे क्या हो रहा है…. ऐसी बेचैनी मेने कभी जिंदगी मे महसूस नही की थी…बेड पर लेटे हुए मेने जैसे ही अपनी आँखे बंद की, तो समीर का चेहरा और उसकी चौड़ी छाती और बालिस्ट बाइसेप्स मेरे आँखो के सामने आ गये…..पेट के नीचले हिस्से मे कुछ अजीब सा महसूस होने लगा था….रह-2 कर समीर की छवि आँखों के सामने से घूम जाती….

मैं पेट के बल लेटी हुई, अपनी चूत को अपनी टाँगो में दबा कर अपनी उमँगो को दबाने की कॉसिश कर रही थी…..पर ये करना इतना आसान नही था…..तभी मैं सपनो की दुनिया से बाहर आई, तब जब सोनिया रूम मे अंदर आई और बोली…..”मम्मी क्या हुआ खाना नही खाना क्या” मैं एक दम से बेड पर उठ कर बैठ गयी….और अपनी सांसो को संभालते हुए अपने बिखरे हुए बालो को ठीक करने लगी….सोनिया मेरे पास आकर बेड पर बैठ गयी…..और मेरे माथे पर हाथ लगा कर देखते हुए बोली…..”अम्मी आप ठीक तो हो ना ?”

मैं: हां ठीक हूँ….मुझे क्या हुआ है ?

सोनिया: नही आपका बदन बहुत गरम है…..और ऊपेर से आपका चेहरा भी एक दम लाल है.

मैं: नही कुछ नही हुआ….वो शायद गरमी की वजह से है….तू चल मैं खाना लगाती हूँ.

फिर मेने और सोनिया ने मिल कर खाना खाया….और बर्तन वेघरा सॉफ करने लगी, तभी फ़ारूक़ भी आ गये….जब मेने उनसे खाने का पूछा तो, उन्होने कहा कि, वो बाहर से ही खाना खा कर आए है…..फ़ारूक़ शराब के नशे मे एक दम धुत बेड पर जाकर लेट गये..और बेड पर लेटते ही सो गये…..मैने अपना काम ख़तम किया और मैं भी सो गयी….

खैर करवटें बदलते कब नींद आई पता नही चला….सुबह-2 फ़ारूक़ ने ऊपेर जाकर समीर का रूम का डोर नॉक किया…..समीर ने डोर खोला तो फ़ारूक़ शर्मिंदगी से सर झुकाए बाहर खड़ा था….समीर को देखते हुए फ़ारूक़ बोला…”बाबू जी मुझे माफ़ कर दीजिए….कल आप का यहा पहला दिन था….और मेरी वजह से…”

समीर : अर्रे फ़ारूक़ भाई कोई बात नही….अब जबकि मैं आपके घर रह रहा हूँ. तो मुझे बेगाना ना समझे…..

फ़ारूक़: अच्छा आप तैयार होकर आ जाइए…आज नाश्ता नीचे मेरे साथ कीजिए..

अच्छा : अच्छा ठीक है मैं तैयार होकर आता हूँ…..

फ़ारूक़ नीचे आ गये, और मुझसे जल्दी खाना तैयार करने को कहा….थोड़ी देर बाद समीर तैयार होकर नीचे आ गया……मेने नाश्ता टेबल पर रखा और समीर की ओर देखा तो उसने मुझे सलाम किया…मेने नाश्ता रखा और फिर से किचन मे आ गयी…..नाश्ते के बाद समीर और फ़ारूक़ स्टेशन पर चले गये…..शाम के 6 बजे डोर बेल बजी….मेने सोचा कि समीर और फ़ारूक़ आ गये है….मैने सोनिया को आवाज़ लगा कर कहा कि, तुम्हारे अबू आ गये है, जाकर डोर खोल दो….

सोनिया बाहर डोर खोलने चली गयी……मुझे याद है कि सोनिया ने उस दिन पिंक कलर का सलवार कमीज़ पहना हुआ था….जो उसके गोरे रंग पर कहर ढा रहा था….गरमी होने की वजह से वो अभी थोड़ी देर पहले नहा कर आई थी…..उसके बाल खुले हुए थे….बला की कयामत लग रही थी मेरी सोनिया उस दिन…..मुझे यकीन है कि, जब समीर ने उसे देखा होगा, तो उसके दिल पर भी सोनिया के हुश्न ने कहर बरपाया होगा……

सोनिया डोर खोलने चली गयी…..मैं रूम मे बैठी सब्जी काट रही थी……और आँखे रूम के डोर पर लगी हुई थी….तभी मुझे बाहर से समीर की हल्की सी आवाज़ सुनाई दी….वो शायद सोनिया को कुछ कह रहा था….पता नही मुझे सोनिया का इतनी देर तक समीर के साथ बातें करना खलने लगा…..मैं उठ कर बाहर जाने ही वाली थी, कि समीर डोर के सामने से गुज़रा, और ऊपेर चला गया……उसके पीछे सोनिया भी आ गयी, और सीधा मेरे रूम मे चली आई..

इससे पहले कि मैं सोनिया से कुछ पूछ पाती, वो खुद ही बोल पड़ी…..”अम्मी आज अबू घर नही आएँगे….वो समीर बोल रहे थे कि, आज उनकी नाइट ड्यूटी है….” सोनिया सब्जी काटने मे मेरी मदद करने लगी…..मैं सोच मे पड़ गयी कि, आख़िर मुझे हो क्या गया है…..समीर तो शायद इसलिए सोनिया से बात कर रहा था कि, आज फ़ारूक़ घर पर नही आएँगे….यही बताना होगा उसे…..पर मुझे क्या हुआ था कि मैं इस कदर बेचैन हो उठी….अगर वैसे भी सोनिया और समीर आपस मे कुछ बात कर भी लेते है तो इसमे हर्ज ही क्या है….वो दोनो तो हम उम्र है, कुंवारे है और मैं एक शादीशुदा औरत हूँ…..

मुझे सोनिया और समीर का बात करना इस लिए भी अच्छा नही लगा था कि, जब से समीर हमारे यहाँ रहने आया था. तब से सोनिया की चाल चलन बदल गयी थी…..कहाँ तो मुझे उसके पीछे घूम घूम कर उसके बालो को संवारना पड़ता था…और कहाँ वो अब कितनी-2 देर तक आयने के सामने से नही हटती थी….समीर के आने के बाद से उसका पहनावा भी बदल गया था…वो अब अपने आप को बहुत सवार कर रखती थी….यही सब करना था कि, मुझे सोनिया के ऊपेर शक सा होने लग गया था……

खैर मैने सोच लिया था कि, समीर एक अच्छा लड़का है…..अगर हमारी सोनिया उसे पसंद करती भी है तो उसमे सोनिया की क्या ग़लती है…..समीर था ही इतना हॅंडसम लड़का कि, जो भी लड़की उसे देखे उस पर फिदा हो जाए…..मैने उठी और सोनिया को सब्जी काट कर किचन मे रखने के लिए कहा…और फिर एक ग्लास मे पानी लेकर ऊपेर चली गयी…..सोचा कि गरमी बहुत है…समीर को प्यास लगी होगी…..मैं जैसे ही ऊपेर समीर के रूम के डोर पर पहुची, तो समीर अचानक से बाहर आ गया….उसके बदन पर सिर्फ़ एक टवल था..जो उसने कमर पर लपेट रखा था…..शायद वो नहाने के लिए बाथरूम मे जा रहा था……

मैने उसकी तरफ पानी का ग्लास बढ़ाया…..और उसने पानी का ग्लास लेते हुए पानी पीना शुरू कर दिया…..मेरी नज़र फिर से समीर की चौड़ी छाती पर अटक गयी…..पसीने की कुछ बूंदे उसकी छाती से बह कर उसके पेट की तरफ बह रही थी…..जिसे देख मेरे होंठ थरथराने लगी…. समीर ने पानी ख़तम किया, और मेरी तरफ ग्लास बढ़ा दिया…..मेने नोटीस किया कि, समीर मेरे कांप रहे होंटो को बड़ी ही हसरत भरी निगाहों से देख रहा है….मेने अपने सर को शरमा कर झुका लिया….और ग्लास लेकर नीचे आ गयी…..

जब मैं नीचे पहुची तो सोनिया खाना तैयार कर रही थी….सोनिया को पहले कभी इतनी लगन और प्यार से खाना बनाते मेने कभी नही देखा था….वो भी इतनी गरमी मे….सोनिया का चेहरा गरमी के कारण लाल होकर दहक रहा था…..थोड़ी देर मे ही खाना तैयार हो गया. मैने समीर के लिए खाना थाली मे डाला, और मेने सोचा क्यों ना आज समीर को खाने के लिए नीचे ही बुला लूँ…..पता नही उसे अकेले मे खाना खाने की आदत है भी या नही… मैने सोनिया से कहा कि, वो खाना टेबल पर लगा दे, मैं ऊपेर से समीर को बुला कर लाती हूँ. मेरी बात सुन कर सोनिया एक दम चहक से उठी……

सोनिया: अम्मी स्मीर आज खाना नीचे खाएँगे ?

मैं: हां मैं बुला कर लाती हूँ…..
मैं ऊपेर की तरफ गयी…..ऊपेर सन्नाटा पसरा हुआ था….बस समीर के रूम से उसके गुनगुनाने की आवाज़ सुनाई दे रही थी….मैं धीरे-2 कदमो के साथ समीर के रूम की तरफ बढ़ी…..और जैसे ही मैं समीर के रूम के डोर पर पहुची, तो मेरी तो साँस ही अटक गयी….समीर बेड के सामने एक दम नंगा खड़ा हुआ था…..उसका बदन बॉडी लोशन के कारण एक दम चमक रहा था……और वो अपने बाबूराव को बॉडी लोशन लगा कर मूठ मारने वाले अंदाज़ मे हिला रहा था…..समीर का 8 इंच लंबा और मोटा बाबूराव देख मेरे साँसे अटक गयी. उसके बाबूराव का सुपाडा किसी साँप कर तरफ फूँकार रहा था….

क्या सुपाडा था उसके बाबूराव का एक दम लाल टमाटर की तरह इतना मोटा सुपाडा उफ्फ हाई मेरी चुनमुनिया तो जैसे उसी पल मूत देती….मैं बुत सी बनी समीर के बाबूराव को हवा मे झटके खाते हुए देखने लगी….इस बात से अंजान कि मैं पराए जवान लड़के के सामने उसके रूम मे खड़ी हूँ….जो इस वक़्त एक दम नंगा खड़ा है…..तभी समीर एक दम मेरी तरफ पलटा, और उसके हाथ से लोशन की बोतल नीचे गिर गयी….एक पल के लिए वो भी सकते मे आ गया…..फिर जैसे उसे होश आया, उसने बेड पर पड़े टवल को पकड़ कर जल्दी से कमर पर लपेट लिया….और बोला “सॉरी वो मैं डोर बंद करना भूल गया था….” अभी तक यूँ बुत बन कर खड़ी थी. समीर की आवाज़ सुन कर मैं इस दुनिया मे वापिस लॉटी, “तोबा “ मेरे मूह से निकाला और मैं तेज़ी से बाहर की तरफ भागी और वापिस नीचे आ गयी……

मैं नीचे आकर चेर पर बैठ गयी…..और तेज़ी से साँसे लेने लगी…..जो कुछ मेने थोड़ी देर पहले देखा था…..मुझे यकीन नही हो रहा था…..मुझे अब समीर की नियत पर भी शक होने लगा था….जिस तरह से वो अपने बाबूराव को हिला रहा था….उसे देख कर तो मेरे रोंगटे ही खड़े हो गये थे……तभी सोनिया अंदर आई, और मेरे साथ वाली चेर पर बैठते हुए बोली. “अम्मी समीर नही आए क्या ……”

मैं: नही वो कह रहा है की, वो ऊपेर ही खाना खाएगा…..

सोनिया: ठीक है अम्मी मैं खाना डाल देती हूँ…..आप खाना दे आओ…..

मैं: सोनिया तुम खुद ही देकर आ जाओ….मेरी तबीयत ठीक नही है…..

सोनिया बिना कुछ कहे खाना थाली मे डाल कर ऊपेर चली गयी…..और समीर को खाना देकर वापिस आ गयी और बोली……”अम्मी समीर कह रहा था कि, आप खाना देने ऊपेर नही आई….आप ठीक तो हो ना…..” मेने एक बार सोनिया की तरफ देखा और फिर कहा…….”मैं ठीक हूँ…चलो अब खाना खाते है……” खाना खाने के बाद हमने घर का काम निपटाया और सो गये….अगले दिन सुबह फ़ारूक़ वापिस आ गये, और सोनिया और मुझसे कहा कि, सोनिया की मामी की तबीयत खराब है. इसीलिए वो सोनिया को कुछ दिनो के लिए अपने पास बुलाना चाहती है….फ़ारूक़ ने सोनिया को तैयार होने के लिए कहा……मेने जल्दी से नाश्ता तैयार क्या, और नाश्ते की ट्राइ लगाकर सोनिया से कहा कि, वो ऊपेर समीर को नाश्ता दे आए….आज हमारी सोनिया और ज़्यादा कह ढा रही थी….

उसने महरूण कलर का सुर्ख सलवार कमीज़ पहना हुआ था….उसका गोरा रंग उस सुर्ख जोड़े मे और खिल रहा था….ज़रूर समीर बाबू हमारी सोनिया की खूबसूरती को देख कर घायल हो गये होंगे……..सोनिया नाश्ता देकर वापिस आई तो उसके चेहरे पर बहुत ही प्यारी से मुस्कान थी…..फिर थोड़ी देर बाद समीर भी नीचे आ गया….मैं किचन मे ही काम कर रही थी, कि फ़ारूक़ किचन मे आए और बोले….

रुखसाना: मैं शाम तक वापिस आ जाउन्गा…..और हां आज फातिमा भाभी आने वाली है… उनकी अच्छे से मेहमान नवाज़ी करना…..

ये कह कर सोनिया और फ़ारूक़ चले गये….मैने मन ही मन सोचा अच्छा तो इसलिए फ़ारूक़ सोनिया को उसकी मामी के घर छोड़ने जा रहे थे, ताकि वो अपनी भाभी फातिमा के साथ खुल कर रंगरलियाँ मना सके…..क्योंकि अब सोनिया समझदार हो चुकी थी…..इसलिए फ़ारूक़ सोनिया को उसकी मामी के यहाँ छोड़ने गये थे