एक औरत की दास्तान–19

दिन इस तरह गुजर रहे थे…..उस दिन के बाद मुझे फिर कभी मौका नही मिला….क्योंकि सोनिया को शायद शक था….पर वो भी श्योर नही थी….उसका रवैया मेरे से नॉर्मल था Hindi Sex Stories Antarvasna Kamukta Sex Kahani Indian Sex Chudai इस दौरान में और निम्मी भाभी कुछ और ही ज़्यादा ही फ्रेंक हो गये थे….जब भी निम्मी भाभी हमारे घर आती या में उनके घर जाती तो हम सिर्फ़ सेक्स की ही बातें करते….मेने और निम्मी भाभी ने कई बार उनके घर में पॉर्न वीडियोस भी देखी……में किसी चुदेल रांड़ की तरह होती जा रही थी…….जिसे हर समय अपनी चुनमुनिया में लंड चाहिए होता है….

इस दौरान मेरे और निम्मी भाभी के बीच इतनी नज़दीकया बढ़ गयी कि, हम दोनो लेज़्बीयन सेक्स करने लगी…….में निम्मी भाभी की और निम्मी भाभी मेरी चुनमुनिया को चाट कर ठंडा करने लगी थी…पर बाबूराव तो बाबूराव ही होता है…..एक दिन में जब निम्मी भाभी के घर गयी तो, उन्हो ने बताया कि, उनके हज़्बेंड कल टूर पर जा रहे है….और परसो वापिस आएँगे….कल रात वो घर पर अकेली होंगी…..

निम्मी: यार रुखसाना कल रात में यहाँ अकेली रहूंगी……यार अच्छा मौका है….तू समीर को कल रात यहाँ बुला ले……हम दोनो खूब मस्ती करेंगे…..

में: (निम्मी भाभी की बात सुन कर एक दम चोन्कते हुए) क्या क्या कहा तुमने भाभी….

निम्मी: वही जो तूने सुना…..देख यार में तेरी मदद कर रही हूँ….तो बदले में मुझे भी तो कुछ मिलना चाहिए….और वैसे भी तेरा कॉन से]आ उसके साथ कोई रिस्ता है….वो आज यहाँ कल कहीं और चला जाएगा…

में निम्मी भाभी की बात सुन कर सोच में पड़ गयी कि क्या करू….इतने दिनो बाद ऐसा मौका हाथ आया था….में उसे हाथ से जाने नही देना चाहती थी……”ठीक है भाभी में आपको कल दोपहर में सोच कर बता दूँगी कि क्या करना है….”

निम्मी: चल सोच ले….रोज रोज ऐसे मोके नही आएँगे…..

उसके बाद में अपने घर आ गयी….दिल और दिमाग़ दोनो में जंग चल रही थी….में सोचने लगी कि निम्मी भाभी कह तो ठीक रही है…जवान लड़का है, क्या भरोसा वो कल कहाँ हो. कल को अगर उसका तबादला हो गया तो ये दिन बार-2 नही आएँगे….रुखसाना इन दिनो को जी भर कर के जी ले….शाम को जब समीर वापिस आया तो मेने उसे सारी बात बताई….मेरे सामने समीर ने शरीफ बनते हुए कहा कि, वो ये काम किसी और के साथ नही करेगा….पर मेरे एक दो बार कहने पर ही वो मान गया…..

अगले दिन सनडे था…..फ़ारूक़ ने रात को खाने में मुझे बताया कि, उनके मामा की मौत हो गयी है….और कल सुबह हमें उनके घर जाना है….शाम को हम 4-5 बजे तक आ जाएँगे…एक पल के लिए मुझे सब बेकार होता नज़र आया….पर ये सोच कर मन को तसल्ली मिली के शाम को तो हम वापिस आ ही जाएँगे…..अब कल के प्लान के मुताबिक अब समीर को किसी बहाने से वही सहर में 8 बजे तक रुकना था. और निम्मी भाभी को मुझे अपने घर सोने के लिए फ़ारूक़ को कहना और मनाना था…..अगली सुबह फ़ारूक़ और में उनके मामा के गाँव के लिए निकल गये.

समीर भी हमारे साथ ही घर से निकला था स्टेशन को जाने के लिए…..स्टेशन में हमे ट्रेन में चढ़ा कर वो अपने कॅबिन में चला गया…..अब मेरे पीछे समीर जानता था कि, सोनिया घर पर अकेली है…..और में इस बात से अंजान थी कि, समीर और सोनिया इतने करीब आ चुके है कि वो सेक्स भी कर चुके है…..में और फ़ारूक़ करीब 11 बजे उनके मामा के घर पहुँचे….पर हमें वहाँ देर हो गयी, और हमारी लास्ट ट्रेन मिस हो गयी….

मेने और निम्मी भाभी ने जो भी प्लान बनाया था……वो मुझे सब मिट्टी मिलता हुआ नज़र आ रहा था….मुझे समझ में नही आ रहा था कि, में क्या करूँ……उधर सोनिया घर पर अकेली थी. मेने सोनिया कभी रात भर के लिए अकेला नही छोड़ा था…..मुझे उसकी चिंता सताने लगी थी. मेने फ़ारूक़ से कहा कि, वो सोनिया को घर पर फोन कर दें…..और उसे बता दें कि, हम आज रात नही आ पाएँगे….कल सुबह आएँगे…..इसलिए वो निम्मी भाभी के यहाँ सो जाए….

मेरे जेहन में अजीब सा डर था….समीर को लेकर….कहीं वो सोनिया के साथ कुछ ग़लत ना कर दे. इस बात से अंजान कि वो किस हद तक आगे बढ़ चुके थे….मेरी परेशानी समझते हुए फ़ारूक़ ने घर पर सोनिया को फोन क्यिया….और उसे बताया कि, ट्रेन मिस हो गयी है..इसलिए वो निम्मी भाभी के घर सो जाए….उसके बाद मेने फ़ारूक़ से मोबाइल लेकर निम्मी भाभी को फोन किया….और सारी बात बताई….और कहा कि, सोनिया को आज रात अपने घर सुला ले….और समीर के आने पर उसे घर की चाभी दे दी…..

निम्मी भाभी ने मुझे निश्चिंत रहने के लिए कहा….मेने दिल ही दिल में शूकर किया कि, चलो निम्मी भाभी की वजह से मुझे सोनिया की फिकर नही करने पड़ेगी…..पर जो में सोच रही थी. शायद उससे भी बदतर होने वाला था….शाम के 5 बजे के करीब निम्मी भाभी हमारे घर जाने के लिए अपने घर से बाहर निकली…..ताकि वो सोनिया को साथ लेकर अपने घर आ सके….जैसे ही निम्मी भाभी अपने घर से बाहर निकली, तो उन्होने देखा कि समीर बाइक पर था…थोड़ी देर बाद डोर ओपन हुआ, और समीर ने बाइक अंदर कर डी…फिर डोर बंद हुआ…..

अब निम्मी भाभी तो थी ही ऐसी…..वो हर बात में कुछ ना कुछ उल्टा ज़रूर सोचती थी. वो तेज़ी से चलते हुए हमारे घर के पास आई, और डोर के पास ऐसे खड़ी होकर रिएक्ट करने लगी जैसे वो डोर नोक करने के बाद डोर खुलने का वेट कर रही हो….फिर उसने गली में इधर उधर देखा….और फिर थोड़ा सा आगे होकर गेट के पल्लों के बीच की झिर्री में अंदर झाँकने लगी…..

अंदर का नज़ारा देख कर निम्मी भाभी के होंटो पर एक कमीनी मुस्कान फेल गयी…अंदर समीर ने सोनिया को गेट के कुछ ही फाँसले पर अपनी बाहों में भरा हुआ था….सोनिया और समीर एक दूसरे के होंटो को चूस रहे थे…सोनिया अपने पैरो की एडियाँ उठाए हुए, समीर से किसी बच्ची की तरह लिपटी हुई अपने होंटो को चुसवा रही थी….समीर का एक हाथ सोनिया की सलवार के अंदर था…..और वो उसकी चुनमुनिया को मसल रहा था….

सोनिया: ओह्ह्ह्ह समीर ये आप ने मुझे क्या कर दिया है……

समीर: ओह्ह सोनिया मेरी जान….बहुत दिनो बाद आज तुम मेरे हाथ आए हो…..

सोनिया: समीर प्लीज़ हट जाओ….निम्मी आंटी आने वाली होंगी…अम्मी ने निम्मी आंटी को फोन करके बताया है कि वो आज घर नही आने वाली तो वो मुझे अपने साथ अपने घर सुला लें…

समीर: ओह्ह ये क्या बात है……..साला आज इतना अच्छा मौका था…..

सोनिया: अब में क्या कर सकती हूँ…में तो खुद आप से मिलने के लिए तड़प रही थी….

तभी निम्मी भाभी ने गेट नॉक किया….समीर और सोनिया दोनो हड़बड़ा गये…समीर जल्दी से ऊपेर चला गया…..सोनिया ने अपने आप को ठीक किया और गेट खोला तो सामने निम्मी भाभी खड़ी थी….”सोनिया क्या कर रही थी…”

सोनिया: कुछ नही आंटी पढ़ रही थी….

निम्मी: अच्छा वो लड़का जो ऊपेर किराए पर रहता है आ गया क्या ?

सोनिया: जी….

निम्मी: कहाँ है वो ?

सोनिया: जी ऊपेर है…..

निम्मी: अच्छा एक काम कर तू जल्दी से उसके लिए चाइ बना दे…..में उसे छाई दे आती हूँ. और उसे बता दूँगी, आज तेरे अम्मी और अब्बू नही आएँगे और तुम मेरे साथ मेरे घर पर सोने जा रही हो…खाना वो होटेल में खा लेगा…..

सोनिया: जी ठीक है….

उसके बाद सोनिया ने चाइ बनाई, और निम्मी भाभी समीर को चाइ देने ऊपेर चली गयी…समीर अपने बेड पर बैठा कुछ सोच रहा था….निम्मी भाभी ने उसकी तरफ देख कर मुस्कुराते हुए कहा “चाइ रखी है आपके लिए पी लेना….वो आज रुखसाना और फ़ारूक़ भाई साहब नही आ पाएँगे….इसलिए सोनिया को में अपने साथ अपने घर ले जा रही हूँ….किसी चीज़ की ज़रूरत हो तो बता दो…..”

समीर: जी कोई बात नही में मॅनेज कर लूँगा…..

निम्मी भाबी पलट कर जाने लगी…फिर वो रुकी और समीर की तरफ पलटी….”वैसे समीर रुखसाना ने जो आज प्लान बनाया था. वो तो हाथ से गया…..पर अगर तुम चाहो तो रात को 9 बजे आ सकते है….में 9 बजे तक इंतजार करूँगी…..” निम्मी भाभी ने कॅटली मुस्कान के साथ समीर की तरफ देखते हुए कहा…..

समीर: पर सोनिया वो तो आपके घर ही जा रही है……

निम्मी: तुम उसकी फिकर ना करो…..तुम ठीक 9 बजे हमारे घर की बैठक के डोर के बाहर आ जाना….में उसका डोर अंदर से खुला छोड़ दूँगी…..बैठक में आने के बाद अंदर से डोर लॉक कर लेना…और वही बैठे रहने…जब सोनिया सो जाएगी..तो में वहाँ आ जाउन्गी….

उसके बाद निम्मी अपने घर सोनिया को साथ लेकर चली गयी…..सोनिया निम्मी भाभी और सन्नी रूम में बैठे थे….शाम के 6 बज चुके थे….” सोनिया चल खाना बना लेते है….” निम्मी भाभी ने सोनिया को कहा….फिर सोनिया और निम्मी भाभी किचन में आ गये….और खाना बनाने लगी……”सोनिया एक बात पूछूँ…” निम्मी भाभी ने सोनिया की तरफ देखते हुए कहा..

सोनिया: जी आंटी……

निम्मी: तुम्हे समीर कैसा लगता है….

सोनिया: (निम्मी भाभी की बात सुन कर घबराते हुए) जी पर आप ये सब क्यों पूछ रही हो…

निम्मी: चल अब नाटक करने से क्या फ़ायदा….में तुम्हे बता ही देती हूँ….जब में तुम्हारे घर आई थी….तब मेने गेट की झिरी से सब देख लिया था…..तू कैसे उससे अपने होंटो को चुसवा रही थी….और वो तेरी फुद्दि को सलवार के अंदर हाथ डाल कर मसल रहा था…

ये बात सुनते ही सोनिया का रंग एक दम से उड़ गया….उसका केलज़ा मुँह को आ गया. वो कभी निम्मी भाभी की तरफ देखती तो, कभी नीचे फरश की तरफ….. “तुझे ये सब करते हुए डर नही लगा…..बता अगर तेरी अम्मी और अब्बू को पता चल गया कि, तू उनके पीछे अपना मुँह काला करवाती फिरती है……तो वो तुझे जिंदा छोड़ेंगे….बोल बताऊ तेरी अम्मी को…..”

सोनिया की हालत रोने जैसी हो गयी थी…..उसकी आँखों से आँसू निकल कर उसके गालों पर आने लगे….सोनिया ने सुबकते हुए निम्मी भाभी का हाथ पकड़ लिया….और रुआंसी आवाज़ में बोली… “ प्लीज़ आंटी अम्मी को नही बताना…..वो मुझे माफ़ नही करेंगी….

निम्मी: (शिकार को अपने जाल में फँसता देख कर….)तुझे क्या यही लड़का मिला था सोनिया….क्यों क्या तूने उसके साथ ये सब…तुमने उसे रोका क्यों नही…..

सोनिया: आंटी में समीर से प्यार करती हूँ…..

निम्मी: प्यार हुन्न्ं…….आने दे तेरी अम्मी को सब प्यार व्यार भूल जाएगी….

सोनिया: आंटी में आपके हाथ जोड़ती हूँ प्लीज़ आप अम्मी से कुछ मत कहना….

निम्मी: ह्म्‍म्म्म चल ठीक है नही बताती…..पर उसके बदले में मुझे क्या मिलेगा….

सोनिया: जी आप जो कहेंगी में वो करूँगी……

निम्मी: सोच ले, वरना फिर मत कहना कि मेने तुम्हे मौका नही दिया और तुम्हारी अम्मी से तुम्हारी शिकायत कर दी….

सोनिया: नही आंटी ऐसे नौबत नही आएगी…..आप जो कहेंगी में वही करूँगी…..

निम्मी: तो फिर मेरी बात का सही सही जवाब देना….ये बता तूने समीर के साथ सेक्स किया है क्या देख सच बोलना…वरना पता लगाने के मुझे और भी तरीके आते है…..
निम्मी की बात सुन कर सोनिया खामोश हो गयी…वो कुछ ना बोल पाई….निम्मी ने फिर से उससे पूछा पर सोनिया चुप रही…हार कार उसने सोनिया को दीवार से सटाते हुए कहा…”चल अपनी सलवार खोल…

सोनिया: क्या ?

निम्मी: में जो बोल रही हूँ वो कर चल अपनी सलवार खोल……

ये कहते हुए निम्मी भाभी ने आगे बढ़ कर सोनिया की सलवार का नाडा पकड़ कर खेंच दिया…..और झटके के साथ उसकी सलवार उसकी जाँघो तक सरका दी….फिर उसकी पैंटी के अंदर हाथ डाल कर उसकी चुनमुनिया को मसलने लगी…..फिर अपनी एक उंगली सोनिया की चुनमुनिया के अंदर पेलने लगी…निम्मी भाभी की उंगली सोनिया के गीली चुनमुनिया में फिसलती चली गयी….”हाईए मर जावां में तू तो उसका बाबूराव भी अपनी फुद्दि में ले चुकी है…..कब तोड़ी उसने तेरी फुद्दि की सील…”

सोनिया: वो आंटी एक दिन घर पर ही…..

निम्मी: इसका मतलब तू उससे चुदवा चुकी है ना ?

सोनिया ने हां में सर हिला दिया….

निम्मी: और ये क्या तूने आपनी झांते क्यों बढ़ा रखी है….रात को जब समीर तेरी चुनमुनिया देखे गा तो उसे तेरी झान्टे पसंद आएँगी क्या ?

सोनिया: रात को में समझी नही….

निम्मी: चल ठीक है तो फिर सुन मेने समीर को आज रात यहाँ बुलाया है….

सोनिया: (एक दम चोन्कते हुए) क्या ?

निम्मी: हाँ मेने उसे बुलाया है….वो रात को 9 बजे आएगा….अब मुद्दे की बात करते है… देख तू तो जानती है तेरे अंकल तो मेरी चुनमुनिया की प्यास नही बुझा पाते…..इसलिए मुझे भी जवान लंड की ललक है…..आज में भी तेरे साथ उससे अपनी चुनमुनिया की आग को ठंडा कर्वाउन्गी..

सोनिया: ये ये आप क्या बोल रही है आंटी……

निम्मी: वही जो तू सुन रही है….अगर तुझे मेरी बात नही माननी तो ठीक है में कल तुम्हारी अम्मी को सब बता दूँगी….

सोनिया: नही नही प्लीज़ आप अम्मी से कुछ नही कहना आप जो बोलेंगी वो में करूँगी…..

निम्मी: अच्छा चल अब पहले जल्दी से खाना तैयार करते है….फिर अपनी झान्टो को सॉफ करके समीर के बाबूराव के लिए तैयार करते है…..

फिर निम्मी और सोनिया ने जल्दी से खाना बनाया….और फिर दोनो ने एक दूसरे की चुनमुनिया की झान्टो को सॉफ किया….8 बजे दोनो फुद्दियाँ बाबूराव लेने के लिए मचलने लगी…समीर भी बाहर खाना खाने चला गया….

कहानी अभी बाकी है दोस्तो

दोस्तो आप को कहानी कैसी लग रही है मुझे ज़रूर बताए मुझे आपके कमेंट्स का इंतजार रहेगा

क्रमशः………………………..