एक औरत की दास्तान–17

में करीब आधे घंटे तक वैसे ही लेटी रही…..सोच-2 कर गरम होती रही Hindi Sex Stories Antarvasna Kamukta Sex Kahani Indian Sex Chudai और अपनी सलवार के अंदर हाथ डाल कर पैंटी के ऊपेर से अपनी फुद्दि को मसल्ति रही…..करीब आधे घंटे बाद बाहर डोर बेल बजी…..में बदहवास सी खड़ी हुई, और बाहर जाकर गेट खोला….सामने निम्मी भाभी खड़ी थी….उसके चेहरे का रंग अभी भी उड़ा हुआ था…..मेने निम्मी भाभी को अंदर आने के लिए कहा….और फिर गेट बंद कर उन्हे अपने रूम में ले आई…..और वो अंदर आकर मेरे बेड पर नीचे पैर लटका कर बैठ गयी…..खोफ़ उनके चेहरे से सॉफ नज़र आ रहा था…मेने उन्हे चाइ पानी के लिए पूछा तो उन्हे ने मना कर दिया…..

में: निम्मी भाभी जो हुआ उसे भूल जाए…..अप समझे कि मेने कुछ देखा ही नही है… में ये बात किसी को नही बताउन्गी…..आप बेफिकर जो जाएँ…..

मेरी बात सुनते ही निम्मी भाभी की आँखें नम हो गयी…..अब मुझे ये तो नही पता कि ये आँसू सच में पछतावे के थे….या निम्मी भाभी मगर्मछि आँसू बाहर कर मुझे इमॉशानली ये मनवा लेना चाहती थी कि, में उनके इस गुनाह के बारे में किसी को ना बताऊ.

“रुखसाना में जानती हूँ कि तुम ये बात किसी को नही बताओगी…..पर फिर भी मेरे मन में कही ना कही डर है…..इसलिए मुझे घबराहट हो रही है…..”

में: भाभी आप घबराएँ नही में नही बताती किसी को……. पर ये सब है क्या…..और वो लड़का तो आप को मासी बुला रहा था ना…..? क्या वो सच में आपका भांजा है…..?

निम्मी: (थोड़ी देर चुप रहने के बाद) हां वो मेरी बड़ी बेहन का बेटा है…….

में: (निम्मी की भाभी की बात सुन कर में एक दम से हैरान हो गयी) क्या….क्या सच कह रही है आप…..पर ये सब आप ने ये सब कैसे क्यों किया…..?

निम्मी: अब में तुम्हे क्या बताऊ रुखसाना…..तुम इसे मेरी मजबूरी समझ लो या फिर मेरी ज़रूरत…..हालत ही कुछ ऐसे हो गये थे कि, में अपने आप को रोक नही पाई…..शादी के बाद हमारी सेक्स लाइफ कुछ सालो तक ठीक चली….पर सन्नी के पैदा होने के बाद हमारी सेक्स लाइफ कम होती गयी…..तुमने इनका (निम्मी भाभी के हज़्बेंड) का पेट तो देखा है ना…..दिन ब दिन वो मोटे होते चले गये…..फिर डाइयबिटीस की बीमारी के कारण इनमे और कमज़ोरी आती गयी…..शादी के 6 साल बाद ही हमारी सेक्स लाइफ ख़तम हो चुकी थी…….

तुम तो अच्छे से जानती हो गी कि, बिना मर्द के प्यार के रहना कितना मुस्किल होता है…..पर में अपनी सारी ख्वाहिशें मार का जीती रही…..सन्नी की देख भाल में दिन का वक़्त तो कट जाता था. पर रात को बेड पर करवटें बदलती रहती थी…..इन्हे तो जैसे मेरी कोई परवाह ही नही थी…फिर सन्नी स्कूल जाने लगा…..और मुझे अकेला पन और खलने लगा…..फिर मुझे मेरे फ्रेंड्स से कुछ ब्लू फिल्म्स की सीडी मिल गयी….तो उन्हे देख कर मेरे अंदर की आग और भड़कने लगी….

में अपनी चुनमुनिया को मसल कर अपनी चुनमुनिया की आग को ठंडा करने की कॉसिश करने लगी. पर उससे भी कुछ फ़ायदा ना हुआ…..धीरे-2 वो सीडी पुरानी होकर बेकार हो गयी…..जिन्हे में घर पर अकेले होने पर देखती थी…..फिर एक दिन मेरी जिंदगी तब बदल गयी. जब आकाश हमारे यहाँ छुट्टियों में रहने आया….वो उस समय **** क्लास में था…..और गर्मियों के छुट्टियाँ थी. पति देव सुबह ही काम पर चले जाते….सन्नी के स्कूल में भी वकेशन शुरू हो गये थे…..सब कुछ नॉर्मल चल रहा था. सन्नी और आकाश के घर में होने से मेरा भी दिल लगा हुआ था…..

पर एक दिन सब कुछ बदल गया……वो दिन मुझे आज भी अच्छे से याद है….सन्नी के पापा ऑफीस जा चुके थी……सन्नी को नाश्ता देने के बाद में आकाश को उठाने के लिए गयी. वो तब तक सो रहा था…..में जैसे ही रूम में गयी….मेने देखा कि आकाश बेड पर बेसूध लेटा हुआ था. और वो सिर्फ़ अंडरवेर में था…..उसका अंडरवेर सामने से उठा हुआ था….उसका बाबूराव उसके अंडरवेर में बुरी तरहा तना हुआ था……मेरी तो साँस ही अटक गयी. उस दिन से पहले में आकाश को अपने बेटे जैसा ही समझती थी…..पर उसके अंडरवेर के ऊपेर से उसका तना हुआ बाबूराव देख कर मेरे बदन में झुरजुरी सी दौड़ गयी…. उसका बाबूराव पूरी तरह तना हुआ अंडरवेर को ऊपेर उठाए हुए था

में एक तक जवान हो रहे अपने भानजे के लंड को देख कर गरम होने लगी…..पता नही कब मेरा हाथ मेरी साड़ी और पेटिकॉट के ऊपेर से मेरी चुनमुनिया पर आ गया…..और में उसके अंडर वेर में बने हुए उभार को देखते हुए अपनी चुनमुनिया मसलने लगी…मेरी चुनमुनिया बुरी तरह से पनिया गयी….मेरा बुरा हाल हो चुका था….तभी बाहर से सन्नी के पुकारने की आवाज़ आए. में होश में आई और बाहर चली गयी….आकाश दिन भर गर्मियों की वजह से निक्कर पहने रहता था.

मेरे जेहन में बार-2 आकाश का वो अंडरवेर का उभरा हुआ हिस्सा आ रहा था…..उसी दिन दोपहर की बात है….सन्नी भले ही स्कूल जाने लगा था….पर वो अभी भी मेरा दूध पीने की ज़िद्द करता था…..बहुत मना करने पर भी वो कई बार ज़िद्द पर अड़ जाता, और मुझे उसे अपना दूध पिलाना पड़ता…..उस दिन भी पता नही क्यों सन्नी दोपहर के 1 बजे मेरा दूध पीने की ज़िद्द करने लगा…..

मेने उसे बहुत मना किया……पर वो नही माना….आकाश में और सन्नी उस समय एक ही रूम में बेड पर लेटे हुए थे…..बाहर बहुत तेज धूप और गरमी थी……और एक दम सन्नाटा पसरा हुआ था….मेन डोर पहले से अंदर से लॉक था…..रूम में खिड़कियों पर पर्दे लगे हुए थे….और डोर बंद था….बस सिर्फ़ टीवी की हल्की रोशनी आ रही थी…..जिस पर आकाश लो वॉल्यूम में कोई मूवी देख रहा था…..कूलर की ठंडी हवा गरमी से राहत दे रही थी…

सन्नी मुझे काफ़ी देर से तंग कर रहा था…..हार कर मेने उसे अपने पास लेटा लिया. और अपने ब्लाउज के बटान खोल कर अपना राइट साइड वाला बूब बाहर निकाला और सन्नी को दूध पिलाने लगी…..में सबसे लास्ट में दीवार वाली साइड पर लेटी हुई थी…..सन्नी बीच में था, और उसके आगे की तरफ आकाश लेटा हुआ था…..आकाश अब टीवी छोड़ कर मेरी ओर देख रहा था….सन्नी की पीठ आकाश की तरफ थी….और हम दोनो के फेस एक दूसरी की तरफ….जैसे ही सन्नी ने मेरे निपल सक करना शुरू किया…..मेरे पूरे बदन में झुरजुरी दौड़ गयी…

मेरी चुनमुनिया में फिर से कुलबुलाहट होने लगी……मेने मस्ती वाले अंदाज़ में आकाश को पूछा जो कि मेरी तरफ देख रहा था…..”तुम तो अभी तक अपनी मम्मा का दूध नही पीते हो….?” मेरी बात सुन कर आकाश शरमा गया…..और उसने सर झुका कर ना में सर हिला दिया….मेने सन्नी के बालों में अपनी उंगलियों को घुमाते हुए कहा…..”देखो बेटा आकाश भैया भी बड़े हो गये है……..वो अब अपनी मम्मा का दूध नही पीते….अब तुम भी ना पिया करो…ग्लास में दूध पीया करो…….” पर सन्नी तो मेरा निपल सक करने में मगन था…आकाश चोर नज़रों से मेरी तरफ देख रहा था…….में जानती थी कि, उसकी नज़र मेरी चुचियों पर थी.

और वो कभी टीवी की ओर देखता तो कभी मेरी ओर……थोड़ी देर में ही सन्नी गहरी नींद में सो चुका था…..मेने आकाश से कहा की वो टीवी बंद कर दे, और थोड़ी देर के लिए आराम कर ले, क्यों कि लाइट का पता नही कब चली जाए…..आकाश ने टीवी बंद कर दिया….अब कमरे में और अंधेरा हो गया था…..खिड़की के पर्दों से लाइट बहुत कम आ रही थी…..बहुत कम रोशनी थी रूम में

में: लगता है सन्नी तो सो गया…..?

ये कह कर मेने सन्नी के मुँह से अपनी चुचि बाहर निकाली, और उसे उठा कर दीवार वाली साइड पर कर दिया…..और खुद आकाश की तरफ फेस करके करवट के बल लेट गयी….और अपने मम्मे को ब्रा के अंदर डालने की कॉसिश करने लगी….में जान बुझ कर ऐसे कर रही थी कि, जैसे मुझे अपनी चुचि को ब्रा के अंदर डालने में तकलीफ़ हो रही हो……मेने आकाश की ओर देखते हुए कहा……”आकाश तुम्हे तो नही पीना…….?” आकाश मेरी बात सुन कर शरमा कर मुस्कुराने लगा…..मेने फिर से उससे पूछा…..”आकाश बोलो ना में इसे अंदर करने लगी हूँ….” मेने अपने मम्मे की ओर इशारा करते हुए कहा….आकाश हसरत भरी नज़रों से मेरी ओर देखने लगा….मेने इस बार अपने होंटो पर मुस्कान लाते हुए अपने पास आने का इशारा किया….

आकाश खिसक के मेरे करीब आ गया…….”बोल पीओगे मेरा दूध…..” मेने अपनी चुचि के निपल को पकड़ कर उसकी ओर देखते हुए कहा…..और उसने अपने गले का थूक गटाकते हुए हां में सर हिला दिया….में अपना एक हाथ उसके सर के पीछे ले गयी, और उसके सर को पकड़ कर अपनी चुचि की तरफ उसके फेस को पुश किया…..अपने दूसरे हाथ से अपने चुचि को पकड़ कर अपना निपल उसके मुँह के पास कर दिया…..उसने भी बिना कोई देर किए….मेरी चुचि के निपल को मुँह में भर कर चूसना शुरू कर दिया… मेने अपनी बाजू को उसके सर के नीचे से निकाल कर अपना हाथ उसके सर पर रखा, और उसे अपने चुचियों की ओर दबा दिया….

आकाश अब और खिसक कर मेरे साथ चिपक कर मेरी चुचि को चूसने लगा….एक बच्चे और जवान लड़के से अपनी चुचि चुसवाने में क्या फरक होता है…….वो मुझे मेरी चुनमुनिया की हालत बताने लगी थी…….मेरी चुनमुनिया की फांके फडफडाने लगी…..और मेरी चुनमुनिया से पानी बह कर बाहर आने लगा था….में एक दम मस्त हो चुकी थी……मेने अपने दूसरे हाथ से धीरे-2 अपना पेटिकॉट ऊपेर उठा दिया….मेने उस समय नीचे पैंटी नही पहनी हुई थी….और में नीचे हाथ डाल कर अपनी चुनमुनिया को मसलने लगी….मेरे मुँह से हल्की –2 उंह उंह की आवाज़ आने लगी…..मुझे अहसास भी नही हुआ कि, कब आकाश ने मेरी उस चुचि को हाथ से पकड़ कर मसलना शुरू कर दिया…जिसे वो साथ-2 में सक भी कर रहा था……

जैसे ही मेरा ध्यान इस ओर गया कि, आकाश मेरी चुचि को किसी मरद की तरह अपने हाथ से मसल रहा है…….तो मेरी चुनमुनिया में तेज सरसराहट दौड़ गयी…..मेने उसके सर को अपनी बाहों में और कस के जाकड़ लिया….और अपनी एक उंगली अपनी चुनमुनिया के अंदर डाल दी…..में अपनी सिसकारी को रोक नही पाई…”सीईइ उंह ओह आकाश….”

आकाश मेरे सिसकने की आवाज़ सुन कर एक दम चोंक गया…….उसने मेरे निपल को मुँह से बाहर निकाला. जो उसके चूसने से एक दम तन कर फूला हुआ था. और मेरी वासना से भरी आँखों में देखते हुए बोला…….”मौसी क्या हुआ….” में उसकी बात सुन कर होश में आई, कि में ये क्या कर रही हूँ….अपने जिस्म की आग को ठंडा करने के लिए में अपनी ही बेहन के बेटे के साथ ये काम कर रही हूँ…..मेने अपने आप को संभालते हुए कहा…..”कुछ नही अब बस करो…..मुझे नींद आ रही है….” पर वो मुझसे कहने लगा कि “मासी प्लीज़ थोड़ी देर और दूध पी लेने दीजिए ना….बस 1-2 मिनिट” और उसने मेरे जवाब सुने बिना ही फिर से मेरे निपल को मुँह में भर लिया…..इस बार वो मेरे चुचि के काफ़ी हिस्से को मुँह में भर चुका था….

और मेरी चुचि को चूस्ते हुए, बाहर की तरफ खींचने लगा…..मेरे पूरा बदन थरथरा गया…..और मुँह से एक बार फिर से आ निकल गये…..इस बार उसने फिर से चुचि को मुँह से बाहर निकाला, और बोला “बोलो ना मौसी क्या हुआ…..” मेने काँपती हुई आवाज़ में सिसकते हुए उसे जवाब दिया…..” कुछ नही आकाश जल्दी कर मेरा बहुत बुरा हाल है…” उसने फिर से मेरी चुचि को मुँह से बाहर निकाला……और काँपती हुई आवाज़ में बोला….”कहाँ पर मौसी…..” अचानक से मुझे उसका बाबूराव निक्केर के ऊपेर से मेरी नाभि में चुभता हुआ महसूस हुआ….तब तक वो फिर से मेरी चुचि को मुँह में भर चूसना शुरू कर चुका था…..

में इस क़दर मदहोश हो गयी कि, मुझे कुछ होश ना था…..मेने आकाश का एक हाथ पकड़ कर उसे नीचे लेजा कर अपनी टाँगों को फेलाते हुए अपनी चुनमुनिया पर रख दिया…..जो एक दम पनियाई हुई थी…..आकाश मेरी समझ कही ज़्यादा तेज था…..जैसे ही मेने उसका हाथ अपनी चुनमुनिया के ऊपेर रखा, उसने मेरी चुनमुनिया की फांको के बीच अपनी उंगलियों को घुमाते हुए रगड़ना शुरू कर दिया….मेरा पूरा बदन एक दम से ऐंठ गया….फिर उसने धीरे-2 से अपनी एक उंगली मेरी चुनमुनिया में घुसा दी, और अंदर बाहर करने लगा……में एक दम से मदहोश होती चली गयी. वो मेरी चुनमुनिया में उंगली अंदर बाहर करते हुए, मेरी चुचि को चूस रहा था….और वो धीरे-2 मेरे ऊपेर आ चुका था…..

तभी मेरा ध्यान सन्नी की तरफ गया……कि सन्नी भी इस रूम में है…..मेने आकाश के सर को दोनो हाथों से पकड़ कर पीछे की ओर धकेला…….तो मेरी चुचि उसके मुँह से बाहर आ गयी…….”आकाश सन्नी” आकाश ने सन्नी की तरफ देखा जो अभी गहरी नींद में था…..और फिर मेरी तरफ देखने लगा….उसकी उंगली अभी भी मेरी चुनमुनिया में थी…..में नही चाहती थी कि सन्नी उठ जाए और हमे इस हालत में देख ले……रुखसाना तुम तो जानती हो कि, हमारे घर में सिर्फ़ दो रूम है……एक ड्रॉयिंग रूम जो बाहर की तरफ बैठक में है…..और एक पीछे की तरफ मेरा बेड रूम जहाँ पर सब कुछ चल रहा था………..

फिर मुझे ख़याल आया कि सन्नी स्टोर रूम में कभी नही घुसता…….क्योंकि वहाँ पर काफ़ी समान भरा होता है…..और जब सन्नी कभी ज़िद्द करता है तो उसके पापा उसे ये कह कर डराते थे कि स्टोर रूम में भूत है, अगर तंग करोगे तो में तुम्हे वहाँ बंद कर दूँगा…. इस लिए मेने आकाश को धीरे से कहा कि, वो स्टोर रूम में जाए…..और वहाँ पड़े बिस्तर को नीचे ज़मीन पर ही बिछा लिए……में अभी थोड़ी देर में आती हूँ….

मेरी बात सुन कर आकाश खड़ा हुआ, और बाहर स्टोर रूम की तरफ चला गया….में धीरे से बेड से नीचे उतरी….फिर मेने अपने ब्लाउज जो कि आधा खुला हुआ था, उसे उतार दिया….फिर अपनी ब्रा उतारी, और फिर से ब्लाउज पहन लिया….मेने ब्लाउज के बटान बंद करने के लिए टाइम नही जाया किया….फिर रूम से बाहर आकर स्टोर रूम की तरफ चली गयी….जैसे ही में स्टोर रूम में पहुँची, तो देखा कि आकाश ने ज़मीन पर गद्दे बिछाए हुए थे….और वो करवट के बल उन पर लेटा हुआ था……मुझे देखते ही आकाश खड़ा हुआ, और मुझे पकड़ कर अंदर दीवार के साथ सटा दिया…….

उसने मेरे ब्लाउज के बाहर झाँक रही चुचियों को हाथो में पकड़ कर मसलना शुरू कर दिया…फिर उसने मेरी एक चुचि को मुँह में भर कर सक करना शुरू कर दिया…..”ओह्ह्ह आकाश हाआँ चुस्स ले मेरे बेटे हाई अपनी मासी के मम्मों को चूस ले बेटा…” मेने अपना पेटिकॉट पकड़ कर ऊपेर उठा लिया. और आकाश का हाथ पकड़ फिर से अपनी चुनमुनिया पर रख दिया. “ओह्ह्ह आकाश देख ना मेरा कितना बुरा हाल है…..” आकाश ने मेरी चुनमुनिया को मसलते हुए मुँह से चुचि को बाहर निकाला, और अपना निक्कर नीचे घुटनो तक सरका दी. और फिर मेरा हाथ पकड़ कर अपने तने हुए 6 इंच के बाबूराव पर रख दिया…….

आकाश: मासी देखो ना मेरा भी बुरा हाल है…..

जैसे ही मेरे हाथ में जवान तना हुआ लंड आया…….में सब कुछ भूल गयी…..और फिर में नीचे झुकते हुए घुटनो के बल बैठी, और आकाश के बाबूराव को हाथ से पकड़ कर हिलाने लगी. उसके बाबूराव टोपा एक दम लाल होकर दहक रहा था…..फिर मेने आकाश का हाथ पकड़ कर उसे खीचते हुए नीचे बिस्तर पर लिटाना शुरू कर दिया……और आकाश को अपने ऊपेर गिरा लिया. मेने अपनी टाँगों को नीचे से पूरा फेला लिया. और आकाश अब मेरी टाँगों के बीच में था. मेने उसके बाबूराव को पकड़ कर अपनी दहाकति हुई चुनमुनिया के छेद पर लगा दिया….

में: ओह्ह्ह्ह आकाश अपनी मासी की फुद्दि मार कर उसकी आग को ठंडा कर दे आज……

और फिर अपना हाथ उसके बाबूराव से हटा लिया. और अपनी टाँगों को उसकी कमर पर लपेट लिया….आकाश ने धीरे-2 अपने बाबूराव को मेरी चुनमुनिया के छेद पर दबाना शुरू कर दिया…बरसो की प्यासी चुनमुनिया जो एक जवान और तने हुए बाबूराव के लिए तरस रही थी….आकाश के तने हुए लंड की गरमी को महसूस करके कुलबुलाने लगी…..मेने अपनी गान्ड को पूरी ताक़त से ऊपेर की ओर उछाला. आकाश का बाबूराव मेरी चुनमुनिया की गहराइयों में समाता चला गया…….

फिर तो आकाश ने भी आव देखा ना ताव उसने अपनी गान्ड को उठा-2 कर मेरी चुनमुनिया के अंदर अपने बाबूराव को पेलना शुरू कर दिया….वो किसी जवान मर्द की तरह मेरे मम्मों को मसलते हुए, अपने बाबूराव को मेरी चुनमुनिया के अंदर बाहर कर रहा था…..और फिर उसने मेरे होंटो पर अपने होन्ट रख दिए……मुझे अपने 1**** साल के भान्जे से अपने होंटो चुसवाने में शरम आने लगी……पर बाबूराव की रगड़ चुनमुनिया की दीवारो पर मदहोश कर देने वाली थी…..मेने भी शारी शरम हया छोड़ कर उसका साथ देना शुरू कर दिया….अपनी गान्ड ऊपेर की ओर उछाल कर उसके बाबूराव को अपनी चुनमुनिया की गहराइयों में लेने लगी…….

उसके 5 मिनिट के धक्कों ने ही मेरी चुनमुनिया को पानी पानी कर दिया…….में झड कर एक दम बहाल हो गयी थी….थोड़ी देर बाद उसने भी अपना सारा पानी मेरी चुनमुनिया के अंदर उडेल दिया……”रुखसाना अब मेने तुम्हे सारी बात बता दी है…..प्लीज़ ये सब किसी से नही कहना. और हां तुम्हे जिंदगी में कभी मेरे ज़रूरत पड़े तो में तुम्हारे साथ हूँ. मुझसे एक बार कह कर देखना में तुम्हारे लिए कुछ भी कर सकती हूँ….”

उसके निम्मी भाभी मुझे अपनी चुदाई की दास्तान सुना कर चली तो गयी……पर मेरी चुनमुनिया में आग और भड़का गयी थी……

कहानी अभी बाकी है दोस्तो