एक औरत की दास्तान–15

सोनिया अपनी शर्ट के बूटों लगाने में मसरूफ़ थी कि, Hindi Sex Stories Antarvasna Kamukta Sex Kahani Indian Sex Chudai समीर ने उससे पीछे से बाहों में भर लिया…और उसकी लंबी सुरहीदार गर्दन पर अपने होंटो को लगा दिया…..सोनिया एक दम से चोंक गयी….और समीर के बाहों से निकालने की कॉसिश करने लगी….पर समीर के होंटो के तपिश अपने नेक पर महसूस करके, वो एक दम से बेजान से हो गये….”सीईईईई उम्म्म्म आह क्या क्या कर रही है आप……”

समीर: कुछ नही अपनी जान को प्यार कर रहा हूँ……(समीर ने अपने होंटो को सोनिया के गर्दन पर रगड़ते हुए कहा….)

सोनिया: उंघ माआ सीईइ बस करें…..कोई देख लेगाअ अहह……

समीर: (सोनिया के शर्ट के ऊपेर से उसकी चुचियों को मसलते हुए) ह्न्म्म्म यहंन कोई नही देखेगा….प्लीज़ मेरी जान मुझसे रहा नही जा रहा……आज तुम बहुत खूबसूरत लग रही हो.. प्लीज़ एक बार और दी दो ना…..? (समीर लगातार सोनिया की चुचियों को मसलते हुए, उसकी गर्दन और गाल पर अपने होंटो को रगड़ रहा था….और सोनिया भी मस्त होती जा रही थी) प्लीज़ जान एक बार और दे दो ना…..

सोनिया: (लड़खड़ाती हुई आवाज़ में) क क क्या…….?

समीर: ओह्ह फुद्दि तुम्हारी फुद्दि चाहिए……

सोनिया: हाए तोबा अहह कैसी बातें करते है आप……

समीर: प्लीज़ जान मेरे लिए इतना भी नही कर सकती…प्लीज़ एक बार……

ये कहते हुए, समीर ने सोनिया के स्कर्ट को पकड़ कर ऊपेर उठाना शुरू कर दिया…..उसने सोनिया के स्कर्ट को उठा कर उसकी कमर पर फँसा दिया….और फिर अपने टाँगों को फेला कर अपने घुटनो को मोड़ कर नीचे झुका, और सोनिया के कान में धीरे से कहा….

समीर: सोनिया खोला ना….

सोनिया: लड़खड़ाती हुई आवाज़ में) क्या ?

समीर: अपनी टांगे खोलो ना……

सोनिया: सीईइ नही कुछ हो गया तो…..

समीर: में भला अपनी जान को कुछ होने दूँगा…..प्लीज़ सोनिया एक बार और कर लेना दो ना. तुम्हे मेरे कसम…..

सोनिया समीर के प्यारी भरी चिकनी चुपड़ी बातों को सुन कर एक दम से पिघल गये….उसने लर्जते हुए अपनी टाँगों को खड़े खड़े फेला लिया…..समीर ने एक हाथ से अपने बाबूराव को पकड़ कर सोनिया की गान्ड से नीचे लेजाते हुए उसकी चुनमुनिया के फांको पर रख कर अपने बाबूराव के सुपाडे को सोनिया के चुनमुनिया के छेद पर टीकाने की कॉसिश करने लगा….पर खड़े-2 उससे सोनिया की चुनमुनिया के छेद तक अपने बाबूराव को परेशान हो रही थी…….

समीर: सोनिया तुम्हारी फुद्दि के छेद पर बाबूराव लगा क्या……?

समीर: ह्म्म मुझे नही पता…..

समीर: बताओ ना…

सोनिया: नही….(सोनिया ने कसमसाते हुए कहा)

समीर: (सोनिया की चुनमुनिया की फांको में अपने बाबूराव को रग़ाड़ कर छेद को तलाशते हुए) अब…..

सोनिया ने फिर से ना में गर्दन हिला दी……और समीर ने फिर से अपने बाबूराव को अड्जस्ट किया. “अब” और जैसे ही समीर के बाबूराव का सुपाडा सोनिया की चुनमुनिया के छेद से टकराया. सोनिया के पूरे बदन ने एक तेज झटका खाया….उसके होंटो पर शर्मीली मुस्कान फेल गयी. और उसने अपने सर को झुका लिया…..”अब” सोनिया ने हां में सर हिलाते हुआ कहा……”ह्म्‍म्म”

समीर ने धीरे-2 अपने मुनसल बाबूराव को ऊपेर की ओर चुनमुनिया के छेद पर दबाना शुरू कर दिया….समीर का बाबूराव सोनिया की टाइट चुनमुनिया में धीरे-2 अंदर जाने लगा….बाबूराव के सुपाडे सोनिया को अपनी चुनमुनिया की दीवारो पर रगड़ मदहोश करती जा रही थी…..उसके पैर खड़े-2 कँपने लगी थी…..और आँखे मस्ती में बंद होने लगी थी……समीर ने सोनिया को थोड़ा सा दखा देकर ठीक एक पेड के नीचे कर दिया….और उसकी पीठ को दबाते हुए उससे झुकाना शुरू कर दिया. सोनिया ने अपने हाथों को पेड के तने पर टिका दिया…..और झुक कर खड़ी हो गयी….

सोनिया की बाहर की तरफ निकली गान्ड देख कर समीर एक दम से पागल हो गया….उसने ताबड्तोड धक्के लगाने शुरू कर दिए…..समीर की जाँघ सोनिया के चुतड़ों से टकरा कर थप-2 का शोर कर रही थी…..और सोनिया बहुत कम आवाज़ में सिसकारियाँ भरते हुए चुदाई का मज़ा ले रही थी….उसके पैर मस्ती के कारण काँपने लगी थी…..समीर ने सोनिया की चुनमुनिया से बाबूराव बाहर निकाला, और फिर से एक झटके के साथ सोनिया की चुनमुनिया में पेल दिया….सोनिया एक दम से सिसक उठी. समीर ने फिर से अपने बाबूराव को रफ़्तार से सोनिया की चुनमुनिया के अंदर बाहर करना शुरू कर दिया. 5 मिनिट बाद सोनिया और समीर फिर से झड गये…..समीर ने अपना बाबूराव सोनिया की चुनमुनिया से बाहर निकाला, और तरपाल पर पड़ी हुई पैंटी को फिर से उठा कर अपना बाबूराव सॉफ करने लगा..

सोनिया उस पेड के तने से कंधे को टिकाए हुए, अपनी मदहोशी से भरी आँखों से ये सब देख रही थी…..समीर ने अपना बाबूराव सॉफ करने के बाद अपनी पेंट पहनी, और सोनिया के पास आकर झुक कर बैठ गया….और उसकी जाँघो को फेलाते हुए, उसकी चुनमुनिया को पैंटी से सॉफ करने लगा. सोनिया बहाल सी ये सब देख रही थी…..फिर सोनिया ने अपने कपड़े ठीक किए, और दोनो घर की ओर वापिस चल दिए…..समीर ने उसे घर से थोड़ा पहले ही उतार दिया…..बेचारी सोनिया अपनी स्कर्ट को पकड़े हुए धीरे-2 चलते हुए घर पहुँची….उसके मन में अजीब सा डर था….

जब मेने डोर खोला तो सोनिया को बाहर खड़ा देखा…..उसकी हालत कुछ बदतर सी नज़र आ रही थी…..”क्या हुआ सोनिया तुम ठीक तो हो ना? “ मेने सोनिया की ओर देखते हुए कहा….हां अम्मी ठीक हूँ बस थोड़ा सर में दर्द है…..” और फिर सोनिया घर के अंदर आई, और सीधा अपने रूम में जाने लगी…..”ठीक है, तुम फ्रेश होकर ड्रेस चेंज कर लो…..में चाइ बना देती हूँ….” उसके बाद सोनिया अपने रूम में चली गयी…..वहाँ से अपने कपड़े लेकर वो बाथरूम में घुस्स गयी……और सलवार कमीज़ पहन कर बाहर आ गयी…..

मुझे नही पता था कि, मासूम सी दिखने वाली सोनिया आज हमारे समाज में हवस का शिकार हो चुकी थी….खैर हम दोनो ने खाना खाया, और सोनिया अपने रूम में जाकर सो गयी…..वो कहते है ना….सेक्स का नशा जो भी इंसान एक बार कर ले, फिर तो जैसे उसे उसकी लत से लग जाती है…दिल के किसी कोने में उसे कुछ पछतावा भी था…..पर सोनिया जवान लड़की थी, घी में लेपेटी हुई उस रूई की तरह जिसे आग दिखाओ तो जल उठे…सोनिया भी अपनी उम्र के ऐसे ही मुकाम पर खड़ी थी……दूसरे तरफ समीर भी जवानी के नशे में इतनी बुरी तरह बिगड़ चुका था….कि उसे कुछ होश नही था कि, वो किस राह पर चल निकला है…..

उसी दिन फ़ारूक़ भी घर वापिस आ गये……में नही जानती थी कि, सोनिया और समीर के बीच इतना कुछ हो चुका है, सोनिया ने भी कुछ जाहिर नही होने दिया था….और मुझे पता चलता भी कैसे, में तो खुद अपनी चुनमुनियँ की आग को मिटाने के लिए समीर की गुलामी करने लगी थी. पर फ़ारूक़ के वापिस आजाने के कारण मेरे और समीर में बात चीत भी बहुत कम होने लगी थी….समीर इस दौरान अपने बाबूराव को शांत करने के लिए, रुक्मणी और अनुराधा के घर कई बार जाने लगा था….जिसका मुझे पता तक नही था…..

मेरा तो बुरा हाल था ही, पर सोनिया जैसी जवान लड़की जो एक बार बाबूराव का स्वाद चख ले, और वो भी समीर जैसे जवान लड़के के लंड का स्वाद जो किसी भी औरत की चुनमुनिया का पानी निकाल सकता हो….उसकी बुरी हालत थी….सोनिया भी अक्सर समीर को खा जाने वाली नज़रों से घुरती. पर ना तो सोनिया को मौका मिल पा रहा था, और ना ही मुझे….एक दिन की बात है…..उस दिन सनडे था….फ़ारूक़ और समीर अपनी ड्यूटी पर जा चुके थे…..उस दिन निम्मी भाभी हमारे घर आई, और सोनिया को अपने साथ ले गयी…..अब सोनिया को दुनियाँ की वो बातें पता चलने वाली थी…..जिसका उसकी जिंदगी में बहुत गहरा असर होने वाला था……

किसी ने सच कहा है कि, अपने जवान हो रहे बच्चों पर कड़ी नज़र रखनी चाहिए. दुनिया में क्या सही और क्या ग़लत है, हमारे जवान हो रहे बच्चे इस बात को सही तरीके से समझ नही पाते…..और जो बाहर से उन्हे पता चलता है, वही उनके लिए सही होता है…..ऐसा वो सोचते है. अब उस दिन निम्मी भाभी और उसके बीच में एक अजीब सा रिस्ता बनने लगा था…उस दिन जब निम्मी भाभी उसे अपने घर ले गयी. तो क्या हुआ वही में बताने जा रही हूँ…..उस दिन जब सोनिया निम्मी भाभी के घर गयी तो,सोनिया निम्मी भाभी के रूम में बैठी हुई थी. उनका बेटा बाहर हाल में टीवी देख रहा था….

निम्मी भाभी ने अपने कपड़ो को प्रेस करते हुए सोनिया से कहा……”सोनिया देख ना क्या जमाना आ गया है, आज कल किसी पर कोई भरोसा नही किया जा सकता…..”

सोनिया: क्यों क्या हुआ आंटी जी…..

निम्मी: अब देखो ना…..ये जो हमारी पड़ोसन मीना है ना ?

सोनिया: हां क्या हुआ उससे…..?

निम्मी: अर्रे होना क्या है उसे……कल से घर से लापता है…..

सोनिया: क्या ?

निम्मी: हां और नही तो क्या….मुझे तो पहले से ही पता था कि यही होने वाला है…

सोनिया: पर हुआ क्या मीना आंटी को ? और आप को क्या पता है……

निम्मी: अर्रे कुछ नही अपने यार के साथ भाग गयी है……अपने घर वाले को छोड़ कर….

सोनिया: आप को कैसे पता…..

निम्मी: सोनिया बताना नही किसी को…..मेने एक बार पहले भी विजय (मीना के हज़्बेंड ) और उसकी माँ सीमा को ये बात बताई थी कि, उनकी बहू के चाल चलन ठीक नही है….पर वो माँ बेटा उल्टा मुझ पर ही बरस पड़े…..कहते है कि, मुझे दूसरे के घरो में तान्क झाँक करने की आदत है……और में अपने काम से काम रखा करूँ….उनके घर में मुझे दखल देने की ज़रूरत नही है…..अगर मेरी बात पहले मान लेते तो, आज मोहल्ले वालो के सामने यूँ जलील तो ना होना पड़ता……

सोनिया: पर आप को पहले कैसे पता चल गया आंटी ?

निम्मी: अर्रे क्या बताऊ तुम्हे सोनिया…..एक दिन में दोपहर को अपनी छत पर सूखे कपड़े उतारने के लिए गयी थी…..तब मेने पहली बार उस लड़के को छत पर देखा था….. जब मेने विजय की माँ से पूछा तो उसने कहा कि, ऊपेर के रूम में किराए पर रह रहा है…मेने भी ज़्यादा ध्यान नही दिया….पर फिर एक दिन और मेने उनकी बहू मीना को छुपते हुए, उसके रूम में जाते हुए देखा, तो मेरा दिमाग़ ठनक गया….मेने उन दोनो पर नज़र रखनी शुरू कर दी……

एक दिन मुझे याद है, तब शायद विजय टूर पर गया हुआ था……और उसकी माँ सीमा बाहर गयी हुई थी किसी काम से……तो मेने उन दोनो को उस लड़के कमरे के बाहर बरामदे में रंग रलियाँ मनाते हुए देख लिया था….अब तुम्हे क्या बताऊ सोनिया मेने जो देखा….मुझे तो देखते ही शरम आ गयी….

सोनिया: (सोनिया के दिल की धड़कने भी निम्मी की बातें सुन कर बढ़ने लगी थी) क्या क्या देखा आप ने….?

निम्मी: जाने दे, तुम्हारी उम्र नही है इन्नसब बातों के बारे में जानने की …..कही ग़लती से तूने कही मुँह खोल दिया, तो सारा मोहल्ला मेरा ही कसूर निकालने लग जाएगा….

सोनिया: नही आंटी में नही बताती आप बताओ ना क्या देख आप ने…..

निम्मी: पक्का ना…..नही बतायेगी ना….?

सोनिया: हां नही बताउन्गी……

निम्मी: तो उस दिन जब में ऊपेर छत पर गयी तो, मेने देखा कि दोनो उस लड़के के रूम के बाहर बरामदे में खड़े हुए थे….दोनो ने एक दूसरे को बाहों में कस रखा था….मीना ने उस समय मॅक्सी पहनी हुई थी….और उस लड़के ने मीना को अपनी बाहों में उठा रखा था….और वो भी किसी कंजरी की तरह उसकी कमर में अपनी दोनो टाँगें लपेटे हुए थी. उसकी मॅक्सी उसकी कमर तक ऊपेर चढ़ि हुई थी…..”हाए-2 सोनिया मेने आज तक किसी को ऐसे करते नही देखा….वो तो उसकी खड़े-2 ही ले रहा था….और वो कमीनी भी उसकी गोद में चढ़ि हुई, अपनी कमर हिला-2 कर उसे दे रही थी……

कहानी अभी बाकी है दोस्तो

दोस्तो आप को कहानी कैसी लग रही है मुझे ज़रूर बताए मुझे आपके कमेंट्स का इंतजार रहेगा