एक औरत की दास्तान–13

दोस्तो अभी तक आपने पढ़ा कि कैसे Hindi Sex Stories Antarvasna Kamukta Sex Kahani Indian Sex Chudai समीर ने सोनिया को अपने साथ बाहर घूमने के लिए राज़ी कर लिया था और बाहर जाकर सोनिया के साथ रंगरेलियाँ मनाने के लिए कैसे सोनिया को राज़ी किया

गतान्क से आगे………….

समीर ने सोनिया की तरफ देखा, और बोला…..”अर्रे नही बाबा अब नही बोलता में कुछ तुम फिर भड़क जाओगी…..” सोनिया अब समीर की चटपटी बातों का मज़ा लेना चाहती थी…..ये उम्र ही होती ऐसी है…

समीर: अब में कैसे कहूँ…..वो कह रहे थे कि तुम्हारे ये दोनो पहले से ज़्यादा बड़े हो गये है…..

समीर ने अपनी आँखो से सोनिया की शर्ट में क़ैद कसे हुए बूब्स की तरफ इशारा किया….तो सोनिया का चेरा शरम से लाल हो गया…..उसने अपनी नज़रें नीचे झुका ली…..समीर थोड़ी देर चुप रहा

…”और बताऊ वो और क्या कह रहे थे…..” सोनिया का दिल धक-2 करने लगा…नज़ाने अब समीर उसे क्या बोल दे….साथ ही चुनमुनिया की धुनकि भी बजने लगी….

.”बताऊ और बताऊ…..” सोनिया ने शरमाते हुए हां में सर हिला दिया….समीर को समझते देर ना लगी, कि मुर्गी कटने के लिए बेताब हो रही है…..समीर खिसक कर सोनिया के साथ बैठ गया….उसकी जाँघ सोनिया की जाँघो से टकराने लगी….सोनिया के बदन में झूर झूरी सी दौड़ गयी.

समीर: पता है वो तुम्हारे बारे में और क्या कह रहे थे…..(थोड़ी देर खामोश रहने के बाद) वो कह रहे थे….कि ज़रूर तुम्हारी झान्टे भी आ गयी होंगी……

ये सुनते ही सोनिया का दिल मानो धड़कना ही भूल गया हो…..साँसे जैसे गले में ही अटक गयी हो….शरम और हया की जैसे कोई सीमा ही ना रही हो….पर अब बेचारी वो क्या बोलती….”समीर के मुँह से ऐसे वर्ड सुन कर उसका पूरा जिस्म कांप गया था…उसने अपने आप को भोला दिखाते हुए कहा……”ये क्या होती हैं….”

समीर: तुम्हे नही पता झान्टे क्या होती है…..

सोनिया ने ना में सर हिला दिया……

समीर: अब में तुम्हे कैसे बताऊ……देखोगी ?

सोनिया का दिल जोरो से धड़कने लगा….समीर जान चुका था कि, ये नयी जवान लौंडया भी मस्ती करने के मूड में आ चुकी है….पर नासमझी और नादानी और घर वालो की वजह से घबरा रही है….समीर ने बिना सोनिया के जवाब का इंतजार किए बिना खड़ा हुआ, और इधर उधर देखते हुए, अपनी पेंट की ज़िप खोल दी….सोनिया का दिल धड़क-2 कर रहा था…..हाथ पैर काँपने लगे थे….समीर ने ज़िप्प खोल कर अपने अंडरवेर के छेद को खोल कर अपने बाबूराव को बाहर निकाल लिया….सोनिया ने सर झुका रखा था…इसलिए वो समीर का बाबूराव नही देख पा रही थी…..फिर उसने अपनी कुछ झान्टो को बाहर निकाला….और सोनिया के ठीक पास आकर उसके सामने खड़ा हो गया….

और अपनी काली लंबी झान्टो को हाथ से पकड़ कर दिखाते हुए बोला, “ये देखो इसे कहते है झान्ट…” सोनिया बेचारी नही जानती थी कि, उसके ना कहने पर कि, वो झांट क्या होती है नही जानती….समीर अपना बाबूराव निकाल कर उसे दिखा देगा…..जैसे ही सोनिया ने समीर की तरफ नज़र उठाई….तो उसकी आँखे फटी की फटी रह गये….उसकी आँखो के सामने समीर का साढ़े 8 इंच लंबा और 4 इंच मोटा बाबूराव था….और वो अपने बाबूराव को अपने हाथ से मुट्ठी में भर कर हिलाते हुए बोला…..”ये देखो इसे कहते है लौडा….और ये बाल देख रही हो….इसे कहते है झांट…”

सोनिया: हाए तोबा ये आप क्या कर रहे है…..

सोनिया ने फिर से नज़रें झुका ली….पर जवान लौंडिया 8 इंच के तने हुए लौडे को देख कर उसकी पैंटी के अंदर कुँवारी चुनमुनिया में धुनकि बजने लगी थी….और चुनमुनिया की फांके फडफडाने लगी थी…..समीर एक बार मुस्कुराया…..और उसने अपने बाबूराव को अंदर कर लिया.. “क्यों अच्छा नही लगा” समीर ने फिर से सोनिया के पास बैठते हुए कहा….

.”आप बहुत बेशर्म हो….” सोनिया ने नीचे सर किए हुए शरमाते हुए कहा…..

समीर: क्यों क्या हुआ ?

सोनिया: ऐसे भी कोई करता है क्या…..?

समीर: तुम ने ही तो कहा था कि, तुम्हें पता नही झांट किसे कहते है…..वैसे एक बात कहूँ बुरा तो नही मनोगी….

सोनिया का मन अब और गुदगुदा देने वाली जवानी के रस से भरपूर बातें सुनने का कर रहा था. “अभी तक मेने आपकी किसी बात का बुरा माना है “

समीर सोनिया का जवाब सुन कर मुस्कुरा उठा…..”वैसे तुम्हारे गान्ड पर सच में बहुत माँस चढ़ा है…..बहुत मस्त और मोटी है.”

सोनिया समीर के मुँह से ऐसी बात सुन कर एक दम से चोंक गयी….”हाई आप ऐसी बात ना करिए मुझे शरम आती है….में ऐसी बातें नही करती…..”

समीर: अच्छा वैसे तुम्हारी मस्त गान्ड देख कर मुझे सपना की याद आ गयी…..

सोनिया: ये सपना कॉन ?

समीर: वही जिसके बारे में थोड़ी देर पहले तुम्हे बताया था……क्या मस्त गान्ड थी उसकी बिल्कुल तुम्हारी तरह, बाहर को निकली हुई, जब भी देखता था. दिल करता था….उसकी गान्ड को पकड़ कर मसल दूं…..जब में उसकी मारता था….तो साली की गान्ड से पादने जैसी आवाज़ आने लगती थी….

सोनिया: हाए हाए ये आप क्या बोल रहे है….आप को तो किसी लड़की से बात करना ही नही आता. बहुत गंदा बोलते हो आप…..

समीर: अब ये क्या बात हुई….मेने कहा तो था कि, मुझे ऐसे ही बोलना आता है…और मेने सच में आज तक किसी लड़की से बात नही की, जो मुझे पता चलता कि किसी लड़की से कैसे बात करते है….

सोनिया: पर ऐसे भी नही बोलना चाहिए आप को…….

समीर: अच्छा एक बात कहूँ मानोगी…..

सोनिया: क्या…..?

समीर: पहले बताओ मानो गी….

सोनिया ने हां में सर हिला दिया…..समीर का 8 इंच का तन्नाया हुआ मोटा लंड देख कर उसकी चुनमुनिया की तो पहले से धुनकि बज रही थी…

.”तुम भी मुझे अपनी झान्टे दिखाओ ना” सोनिया के समीर की ये बात सुनते ही, एक दम होश उड़ गये….वो बुत सी बनी उसको देखने लगी. “क्या हुआ सोनिया प्लीज़ दिखाओ ना….देखो अगर तुम मुझे अपना दोस्त मानती हो तो प्लीज़ दिखा दो ना…तुमने भी तो मेरी देख ली है…..बोलो तुम मुझे अपना दोस्त नही मानती….मानती हो ना”

सोनिया ने हां में सर हिला दिया….

.”तो फिर दिखाओ ना….”

सोनिया: नही मुझे डर लगता है…..

समीर: कैसा डर….

सोनिया: किसी को पता चल गया तो…..?

समीर: नही चलता किसी को पता….तुमने मेरी देखी किसी को पता चला….तुमने तो मेरा बाबूराव भी देख लिया है……

सोनिया को समझ नही आ रहा था कि, वो क्या करे और क्या ना करे….एक तरफ समीर ने उसे अपना दोस्त कह कर उसके दिल पर एक बड़ा वार किया था….प्यार की पहली मंज़िल दोस्ती होती है. शायद सोनिया के दिमाग़ में यही सब चल रहा था….पर दिमाग़ के एक कोने में डर भी था. “अगर आप ने किसी को बता दिया तो….” सोनिया ने अपना डर जाहिर करते हुए कहा…

समीर: अब भला में क्यों बताने लगा…..प्लीज़ दिखा दो ना….अपने दोस्त की इतनी सी भी बात नही मान सकती…चलो मत दिखाओ…..में आगे से तुमसे कुछ नही कहूँगा….

समीर ने फिर से उसे इमोशनली ब्लॅकमेन्ल किया…..”पक्का किसी को पता तो नही चलेगा….” समीर बेंच से खड़ा हो गया…और इधर उधर देखते हुए बोला…..”मुझ पर भरोसा रखो नही पता चलेगा…..”

सोनिया: अगर इधर कोई आ गया तो ?

समीर: (इधर उधर देखते हुए, उसकी नज़र थोड़ी आगे घनी झाड़ियों पर पड़ती है….वो झाड़ियाँ कोई 10 फीट उँची जंगली घास की थी….) तुम उन झाड़ियों के बीच में चली जाओ….वहाँ ऐसे बैठना जैसे पेशाब करते हुए बैठते है…..में तुम्हारे पीछे आता हूँ….

सोनिया बिना कुछ बोले खड़ी हुई, और डरते हुए झाड़ियों की तरफ बढ़ने लगी….समीर वही खड़ा इधर उधर देख कर जायज़ा लेता रहा….तभी उसकी नज़र दूसरी तरफ की झाड़ियों पर लटक रही तिरपाल पर पड़ी….शायद किसी ट्रक के ऊपेर रखे समान को कवर करने वाली तरपाल का फटा हुआ टुकड़ा था….समीर ने आगे बढ़ कर उस तिरपाल को उठाया….और उसे लपेट कर इधर उधर देखने लगा.

उसके दोस्त रवि ने बतया था कि इधर कोई नही आता… थोड़ी देर बाद वो भी झाड़ियों की तरफ बढ़ने लगा….झाड़ियाँ बहुत घनी और उँची थी…..समीर जगह बनाता हुआ आगे बढ़ा….तभी उसे सोनिया उकड़ू बैठी नज़र आई…..समीर को देखते ही उसके फेस का रंग लाल सेब जैसा हो गया….समीर उसके पास जाकर खड़ा हुआ, और उसने वहाँ की झाड़ियों को जल्दी से हटा कर थोड़ी जगह बनाई, और उस तिरपाल को बिछा दिया…सोनिया खड़ी होकर ये सब देख रही थी….

आगे क्या होने वाला है, ये सोच-2 कर उसकी चुनमुनिया में तेज सरसाहट से होने लगी थी….समीर तिरपाल पर घुटनो के बल बैठ गया….और सोनिया को पास आने का इशारा क्या…सोनिया धड़कते हुए दिल के साथ सहमी सी समीर के पास आ गयी….”पक्का सिर्फ़ देखोगे ना…..प्लीज़ कुछ और मत करना….” उसने समीर की और देखते हुआ कहा….

.”हन -2 कुछ नही करूँगा सिर्फ़ देखूँगा… जल्दी करो उतरो अपनी कच्छि…..” सोनिया फिर से बुरी तरह शरमा गयी…उसने अपनी स्कर्ट के अंदर नीचे से हाथ डाले, और अपनी वाइट कलर की चड्डी की इलास्टिक में उंगलियाँ फँसा कर धीरे-2 नीचे सरकाना शुरू कर दिया….

फिर उसने अपनी पैंटी निकाल दी….समीर ने उसके हाथ में लटक रही पैंटी को पकड़ कर तिरपाल पर रख दिया….और उसे कमर से पकड़ कर बैठने को कहा….सोनिया सहमी सी डरते हुए नीचे अपने चुतड़ों के बल बैठ गयी….समीर ने उसकी टाँगों को उसकी पिंडलयों से पकड़ कर फेला दिया…..और उसकी आँखों में झाँकते हुए बोला….”अब दिखाओ भी……”

सोनिया ने अपने काँपते हुए हाथ से अपनी स्कर्ट को नीचे से पकड़ा और धीरे-2 ऊपेर करने लगी….सोनिया की गोरी चिकनी टाँगे और जाँघ देख कर समीर का बाबूराव उसकी पेंट में कुलाँचे भरने लगा.

और अगले ही पल समीर का मुँह खुला का खुला रह गया…..सोनिया की कुँवारी गुलाबी चुनमुनिया देखते ही समीर का बाबूराव झटके पे झटके खाने लगा….झांट तो दूर बाल का एक रोया भी नही था…एक दम चिकनी गुलाबी चुनमुनिया…..दोनो फांके आपस में कसी हुई थी…..समीर से रहा नही गया….उसने अपनी उंगली को उसकी चुनमुनिया की फांको के बीच रख कर फिरा दिया.

.”श्ह्ह्ह्ह उंह ये क्या कर रहे है समीर आप…..” सोनिया ने लड़खड़ाती हुई आवाज़ में कहा…और समीर का हाथ पकड़ कर हाथ हटाने की कॉसिश करने लगी…..समीर ने धीरे-2 उसकी चुनमुनिया की फांको के बीच अपनी उंगली रगड़ते हुए पूछा……

समीर: इस पर तो एक भी बाल नही है…..बोल उस्तरे से सॉफ किया था…..या क्रीम से….

सोनिया को जवानी का ऐसा मज़ा पहली बार मिल रहा था….उसका पूरा बदन कांप रहा था.. उसके हाथ में इतनी ताक़त नही बची थी, कि वो समीर का हाथ हटा पाए,…..”आह सीईईईई उईईइ मत करिए अहह” समीर ने जैसे ही अपनी उंगली को उसकी चुनमुनिया की फांको के बीच में दबाया तो उसकी उंगली उसकी चुनमुनिया के रस टपका रहे छेद पर जा लगी…..सोनिया का पूरा बदन थरथरा उठा.. “बोलो ना कैसे सॉफ की तुमने झांट…”

इस बार समीर ने अपनी उंगली को सख्ती से रगड़ा तो सोनिया की चुनमुनिया पिघल उठी…..”उईईइ माँ सीईईईई क्रीम से…..”

समीर: क्यों……

सोनिया: (मस्ती में सिसकते हुए) वो दो दिन बाद मेरे मेनेसी आने वाली थी……इसलिए…..

तभी सोनिया को कुछ सरसराहट सुनाई दी….उसने अपनी आँखे खोल कर देखा, तो समीर अपनी पेंट और अंडरवेर उतार रहा था….सोनिया ये देख कर एक दम से घबरा गयी…..”ये ये आप क्या कर रहे है…..सीईईई”

समीर: कुछ नही मेरे जान तेरी चुनमुनिया का उद्घाटन करने की तैयारी कर रहा हूँ……

सोनिया: नही ये ठीक नही प्लीज़ मुझे जाने दो…..

समीर: प्लीज़ सोनिया एक बार…….

ये कहते हुए, समीर घुटनो के बल नीचे झुक गया….और सोनिया की तमतमा रही लाल चुनमुनिया की फांको पर अपना मुँह रख दिया….

.जवान लौन्डिया को जैसे ही जवानी का मज़ा मिला वो एक दम से पिघल गयी…..वो पीछे की तरफ लूड़क गयी….उसकी स्कर्ट उसकी कमर पर इकट्ठी हो गयी. “नही ओह्ह्ह्ह ईए आप हाईए सीईईईईईईईईई उंघह” सोनिया जैसी जवान लड़की के लिए ये सब बर्दास्त से बाहर था…..आज तक उसे किसी लड़के ने छुआ तक नही था….और कहाँ आज वो अपनी जवानी के अनमोल खजाने को समीर के सामने खोल कर बैठी थी….

सोनिया की आँखे मस्ती में बंद हो चुकी थी…..उसने सिसकते हुए दोनो हाथ से समीर के सर को पकड़ लिया….और उसके फेस को पीछे करने की नाकाम कॉसिश करने लगी…सोनिया की चुनमुनिया में तेज सरसराहट और मस्ती की लहरें दौड़ने लगी…..चुनमुनिया फक फक करने लगी….आख़िर कार उसने चुनमुनिया की आग के आगे हथियार डाल दिए…और बुरी तरह काँपते सीसियाते हुए, पीछे की तरफ लेट गयी….सोनिया की कमर अब उसके काबू में नही थी….रह रह कर उसकी कमर झटके खाती, और उसकी गान्ड ऊपेर की और उछल जाती….चुनमुनिया से रसीला रस बह बह कर बाहर आने लगा..