एक औरत की दास्तान–11

समीर ने रुक्मणी की गान्ड को चोदते हुए, एक दम से अपने बाबूराव को पूरा बाहर निकाला Hindi Sex Stories Antarvasna Kamukta Sex Kahani Indian Sex Chudai तो उसने देखा कि, रुक्मणी की गान्ड का छेद और आसपास का हिस्सा एक दम लाल हो चुका था….और अगले ही पल उसने फिर से अपने बाबूराव को एक ही बार में रुक्मणी के गान्ड के छेद में पेल दिया. जैसे ही समीर के बाबूराव का मोटा सुपाडा रुक्मणी की गान्ड के छेद के अंदर की तरफ हवा को दबाते हुए बढ़ा…..और जड तक अंदर घुसा…..तो हवा गान्ड के छेद से पूर्र की आवाज़ करते हुए, बाहर निकली…..जिसे सुनते ही रुक्मणी की गान्ड और फुद्दि के छेद में सरसराहट दौड़ गयी……”सीईईईई समीर ओह्ह्ह्ह तूने तो कमाल ही कर दिया ह अब मार मेरी गान्ड और ज़ोर से अह्ह्ह्ह ओह हां ऐसे ही सबाश मेरे शेर ओह्ह्ह्ह और तेज फाड़ दे समीर फाड़ दे मेरे गान्ड ओह्ह्ह्ह ओह्ह…..”

समीर अब बिना किसी परवाह के रुक्मणी की गान्ड में अपना बाबूराव तेज़ी से अंदर बाहर कर रहा था….और बीच -2 में रुक्मणी की गान्ड में से हवा बाहर निकल कर पररर-2 की आवाज़ करती…और समीर की जाँघ रुक्मणी के मोटे चुतड़ों के साथ टकराते हुए थप-2 की आवाज़ करती….जो रूम के अंदर गूंजने लगी….थोड़ी ही देर में रुक्मणी को अपनी गान्ड और चुनमुनिया के छेद में सरसराहट बढ़ती हुई महसूस हुई, और फिर रुक्मणी की चुनमुनिया ने अपना लावा उगलना शुरू कर दिया….रुक्मणी आगे की तरफ लूड़क गयी….समीर का बाबूराव रुक्मणी की गान्ड से बाहर आकर हवा में झटके खाने लगा…..

दूसरी तरफ अनुराधा ये सब देखते हुए अपनी चुनमुनिया को रगड़ रही थी….जैसे ही उसने रुक्मणी का काम होते देखा,उसने समीर को बाथरूम में जाकर अपना बाबूराव धो कर आने को कहा…..समीर बेड से उठ कर बाथरूम में चला गया…..और अपना लंड धो कर बाहर आया…और जैसे ही बेड पर चढ़ा, अनुराधा ने उसे बेड पर धक्का दे कर लिटा दिया. समीर का बाबूराव वियाग्रा के असर के कारण अभी भी आकड़ा हुआ था…..जैसे ही समीर पीठ के बल लेटा, अनुराधा भूखी कुतिया की तरफ समीर के ऊपेर चढ़ गयी….और जोशीले अंदाज़ में समीर के बाबूराव को पकड़ कर अपनी चुनमुनिया के छेद पर टिका दिया…..और गॅप से समीर के बाबूराव पर अपनी चुनमुनिया को दबाते हुए बैठ गयी…..एक ही पल में समीर का बाबूराव रुक्मणी की चुनमुनिया की गहराइयों में समा चुका था…..

अनुराधा: ओह्ह्ह्ह समीर तेरा लौडा तो सच में बहुत बड़ा है सीईईईईई हाई कमीना नाभि तक पहुँच गया है…….

समीर: क्यों तुम्हे अच्छा नही लगा…..

अनुराधा: (झुक कर समीर के होंटो को चूमते हुए) ओह्ह्ह्ह समीर अच्छा पूछा मत यार ऐसा लौडा पाने के लिए नज़ाने कितने ख्वाब देखे है…..काश कि तुम 10 साल पहले मिले होते ओह्ह्ह समीर, जवानी में तुम्हारे जैसे लंड वाले लड़के से चुदने का मज़ा ही कुछ और होता.

समीर: तो अब आप कॉन सा बूढ़ी हो गयी हो…..

अनुराधा: अर्रे मेरी जान तेरी उम्र का मेरा बेटा है…..बूढ़ी नही तो जवान कहाँ से हूँ….

अनुराधा ने अपने हाथों को समीर की चौड़ी छाती पर रखा, और अपनी गान्ड को ऊपेर नीचे करना शुरू कर दिया….समीर का बाबूराव अनुराधा की पनियाई हुई चुनमुनिया में रगड़ ख़ाता हुआ अंदर बाहर होने लगा….दो बार झाड़ चुकी रुक्मणी अपनी नशीली आँखों से उन दोनो को देख कर फिर से सरूर में आने लगी थी….समीर अनुराधा की चुनमुनिया में अपना बाबूराव पेलते हुए, उसकी गान्ड को अपनी हाथों से दबा -2 कर मसलने लगा….ये देख रुक्मणी अनुराधा के पीछे आ गयी……”समीर चल इस साली रांड़ की गान्ड को खोल दे……मैं इसकी गान्ड को नरम कर दूं….फिर इसकी गान्ड का ढोल भी बजाना है…..”

समीर ने अनुराधा की गान्ड को दोनो तरफ से पकड़ कर फेला दिया…..जैसे ही अनुराधा की गान्ड का छेद रुक्मणी की आँखो के सामने आया, रुक्मणी ने अपनी जीभ अनुराधा की गान्ड के छेद पर लगा दी……”सीईईईईईई रुक्मा अहह ओह्ह्ह मेरीई जान क्या कर रही है….ओह्ह्ह्ह सक मी ओह ईसस्स…….” नीचे लेटा समीर अनुराधा की मस्ती भरी सिसकारियाँ सुन कर और जोश में आ गया…..और अपनी कमर को तेज़ी से ऊपेर की ओर उछालने लगा….समीर का बाबूराव एंजिन के पिस्टन की तरह अनुराधा की चुनमुनिया के अंदर बाहर होने लगा…..”ओह्ह्ह समीर अह्ह्ह्ह धीरे ऊहह सीईईईई हाईए स उम्म्म्मममह ओह्ह्ह समीर मेरी जान” अनुराधा अब एक दम मस्त हो चुकी थी…..उसने झुक कर फिर से समीर के होंटो को अपने होंटो में भर कर चूसना शुरू कर दिया……उसके मुँह से उंघह जैसी सिसकारियों की आवाज़ आने लगी……

और फिर उसका बदन एक दम ऐंठने लगा….बदन का सारा खून उसे अपनी चुनमुनिया की तरफ दौड़ता हुआ महसूस हुआ, और अगले ही पल अनुराधा की चुनमुनिया से गाढ़े लैस्दार पानी की धार बह निकली, अनुराधा बुरी तरह काँपते हुए झड़ने लगी….और फिर समीर के ऊपेर निढाल होकर गिर पड़ी…..रूम में एक दम से सन्नाटा सा छा गया…..थोड़ी देर बाद समीर ने अनुराधा को अपने ऊपेर से उठा कर नीचे लेटा दिया….और उसकी गान्ड के नीचे एक तकिये को लगा कर उसकी गान्ड ऊपेर उठा दी…..रुक्मणी ने पहले ही, उसकी गान्ड के छेद को अपनी जीभ और उंगलियों से चोद कर नरम कर दिया था…..

समीर ने जैसे ही अपने बाबूराव के सुपाडे को अनुराधा की गान्ड के छेद पर रख कर दबाया, तो समीर के बाबूराव का सुपाडा अनुराधा की गान्ड के छेद को फेलाता हुआ, अंदर की ओर फिसल गया….जैसे ही समीर के बाबूराव का सुपाडा अनुराधा की गान्ड के छेद में घुसा तो अनुराधा की आँखे फेल गयी…..साँसे मानो अटक गयी हो……”समीर चिंता करने की ज़रूरत नही है. सबाश मेरे शेर फाड़ दे इस रांड़ की गान्ड को भी….” रुक्मणी ने नीचे झुक कर , समीर के बॉल्स को सहलाते हुए कहा…….अनुराधा पथराई हुए आँखों से समीर को देख रही थी…..और अगले ही पल समीर ने एक जोरदार झटका मारा…..”हइई मर गयी री… कमीने फाड़ दे नाअ मेरी गान्ड ओह बहुत जलन हो रही है…..हाए माँ…..”

समीर: अभी तो शुरुआत है मेरी जान…आगे -2 देखो तुम्हारी गान्ड के आज कैसे चिथड़े उड़ते है…..(ये कहते हुए समीर ने एक बार और करारा झटका मार कर अपना पूरा का पूरा बाबूराव अनुराधा की गान्ड के छेद में चांप दिया…….)

अनुराधा के चेहरे पर दर्द के भाव उभर आए….पास बैठी रुक्मणी का दिल उसके लिए पिघल गया….उसने झुक कर पहले अनुराधा की चुनमुनिया की फांको को फैलाया, और उसके चुनमुनिया के मोटे अंगूर जैसे दाने को बाहर निकाल कर अपने मुँह में भर लिया…..जैसे ही अनुराधा की चुनमुनिया का दाना रुक्मणी के मुँह में गया…..अनुराधा एक बार फिर से सिसक उठी….उसने रुक्मणी के बालों को कस के पकड़ लिया…..”अहह चाट साली मेरी चुत ओह्ह्ह रुक्मणी चाट ले मेरी चुनमुनिया ओह्ह्ह्ह देख तेरी सहेली की चूत ने आज कितना रस बहाया है…..”

रुक्मणी ने भी अनुराधा की बात सुनते हुए उसकी चुनमुनिया के छेद पर अपना मुँह लगा दिया, और उसकी चुनमुनिया की फांको और छेद को चाटते हुए, उसकी चुनमुनिया से निकल रहे गाढ़े लैस्दार पानी को चाटने लगी…..उसने अनुराधा की चुनमुनिया को चाटते हुए समीर को धक्के लगाने का इशारा किया. और समीर ने धीरे-2 अपना बाबूराव बाहर निकाल कर अंदर पेलना शुरू कर दिया.. समीर का बाबूराव पूरी तरह फँसता हुआ अनुराधा की गान्ड के छेद के अंदर बाहर हो रहा था. कुछ ही पलों में अनुराधा भी अपने रंग में आ गयी……अब समीर का बाबूराव जब उसकी गान्ड के छेद में अंदर बाहर होता, तो उसके बदन में मस्ती की लहर दौड़ जाती……

अनुराधा: ओह्ह्ह्ह समीर य्स्स फक मी आस ओह फदद्ड़ दे मेरी गान्ड ओह्ह ह ह अह्ह्ह्ह्ह

समीर: अहह ले साली मेरा लौडा अपनी गान्ड में आह आह आह….

समीर ने भी ऐसे कस-2 के शॉट्स लगाए, कि अनुराधा की गान्ड में सुरसुराहट दौड़ने लगी…अब समीर अपना पूरा लंड बाहर निकाल -2 कर अनुराधा की गान्ड में पेल रहा था. और अनुराधा की चुनमुनिया का पानी और रुक्मणी का थूक बह कर समीर के बाबूराव को गीला कर रहा था…..एक बार फिर से वही पर्र्ररर-2 की आवाज़ पूरे रूम में गूंजने लगी….जिसे सुन कर दोनो की चुनमुनिया की धुनकि बज उठी….ख़ासतोर पर अनुराधा की चुनमुनिया कुलबुलाने लगी…..

और वो अह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्ह समीर अहह अहह सीईईईई करते हुए झड़ने लगी….समीर ने भी अपनी रफ़्तार को चरम तक पहुँचा दिया….जिससे बेड के चरमराने की आवाज़ भी गूंजने लगी….”ओह्ह्ह्ह समीर अंदर मत झड़ना….हमें तुम्हारे बाबूराव के पानी का स्वाद चखना है….” समीर ने जल्दी से अपना बाबूराव बाहर निकाला, और खड़े होते हुए, अपने बाबूराव को हिलाने लगा, रुक्मणी ने जल्दी से घुटनो के बल बैठते हुए, समीर के बाबूराव को अपने हाथ में ले लिया, और उसके बाबूराव के सुपाडे पर अपनी जीभ फेरते हुए, उसके बाबूराव के मूठ मारने लगी. अनुराधा भी रंडी के तरह समीर के बॉल्स को अपने मुँह में भर कर चूसने लगी…कुछ ही पलों में समीर के बाबूराव के नसें फूलने लगी….

और फिर जैसे ही दोनो रंडियों को अंदाज़ा हुआ कि, समीर के बाबूराव से अब वीर्य निकलने वाला है, दोनो ने अपना मुँह खोल लिया, और फिर समीर के बाबूराव से वीर्य की लंबी-2 पिचकारियाँ निकलने लगी, जो सीधा जाकर दोनो के मुँह और मम्मों पर गिरने लगी…..शमीर के बाबूराव से इतना पानी निकला कि दोनो के मम्मे पूरी तरह से सन गये…..फिर समीर झड़ने के बाद बेड पर लेट गया…..उस रात तीनो सुबह 3 बजे तक चुदाई का खेल खेलते रहे…..और सुबह 3 बजे सोए, फिर सुबह रुक्मणी ने समीर और अनुराधा को 8 बजे उठाया, समीर ने अपने कपड़े पहने और घर की तरफ चला गया….जैसे ही उसने घर पहुँच कर डोर बेल बजाई, तो रुखसाना ने डोर खोला, और समीर ने बाइक अंदर करी, और दुआ सलाम के बाद ऊपेर चला गया,

ऊपेर जाने के बाद समीर फ्रेश हुआ, और नाश्ता करके फिर से स्टेशन पर पहुँच गया….जब समीर वहाँ पहुँचा तो रुक्मणी और अनुराधा भी आ चुकी थी….तीनो ने एक दूसरे की तरफ देखा और मुस्कुरा पड़े…..दोस्तो मैं उस वक़्त नही जानती थी कि, समीर किस रास्ते पर चल पड़ा है….और जान भी कैसे सकती थी…..जब दो चुदेल और प्यासी औरतें एक जवान लड़के को अपनी हवस की आग बुजाने का ज़रिया बनाती है तो उसका असर उस जवान लड़के पर क्या होता है, ये आने वाले दिनो में आपको पता चलेगा…

उस दिन जब समीर रात को घर आया, तो सोनिया घर पर नही थी….निम्मी भाभी उसे अपने साथ अपने घर ले गयी थी, कि क्यों कि वो घर पर अकेली थी, उनके पति और बेटा निम्मी भाभी के पापा के पास गये हुए थे……इसलिए वो सोनिया को अपने साथ घर पर ले गयी थी. सोनिया को आज रात वही सोना था….जब समीर ने सोनिया का पूछा तो, मेने उसे बताया कि, आज सोनिया निम्मी भाभी के घर पर सोएगे…..ये सुन कर समीर के चेहरे पर कोई भाव ना देख कर मुझे बहुत हैरानी हुई…..

समीर ऊपेर चला गया, और फ्रेश होकर नीचे खाने के लिए आया….जब से सोनिया निम्मी आंटी के घर गयी थी….तब से ये सोच-2 कर के, आज मैं और समीर फिर से घर में अकेले है, और समीर ज़रूर मेरी फुद्दि मारेगा…..मेरा बुरा हाल था….चुनमुनियाँ शाम से कुलबुला रही थी. पर समीर आज जैसे किसी और ही दुनियाँ में था…..उसने खाना खाया, और बिना कुछ बोले ऊपेर चला गया….में उसके हाथों को स्पर्श को पाने के लिए तरस कर रह गयी…..मेने सोचा था कि, जब समीर को पता चले गा कि आज हम दोनो अकेले है, तो वो मुझे अपनी बाहों में कस्के खूब प्यार करेगा….पर ऐसा कुछ ना हुआ……

मेने भी ज़्यादा ज़ोर ना दिया….और बर्तन सॉफ करके अपने रूम में जाकर लेट गये. पर रात तो जैसे मुझे काटने को दौड़ रही थी….मेरा पूरा बदन सुलग रहा था….दिल चाह रहा था कि, समीर अभी आकर मुझे बाहों में जाकड़ कर मेरे बदन को पीस दे…..और चुनमुनिया की धुनकि तो सुबह से ही बज रही थी…..जब मुझसे बर्दास्त ना हुआ तो, मैने ऊपेर जाने का फैंसला किया….प्यासे को ही कुँए के पास जाना पड़ता है…..और इस वक़्त मेरे बदन की प्यास सिर्फ़ समीर और उसका बाबूराव ही बुझा सकता था……

में बेड से नीचे उतरी, और पैरो में चप्पल डाल कर ऊपेर की तरफ चल दी, मेरा दिल जोरो से धड़क रहा था….सोच रही थी कि, समीर क्या सोचेगा……कि में कितनी चुदासी हूँ….जो खुद अपनी फुद्दि चुदवाने ऊपेर आ गयी…..शरम के मारे मेरा बुरा हाल हो रहा था…पर चूत कहाँ शरम करने दे रही थी….में ऊपेर पहुँची, तो मुझे छत के दूसरे तरफ बने हुए बाथरूम में कुछ आवाज़ सुनाई दी….समीर बाथरूम में था…..में समीर के रूम में जाकर उसके बेड पर पैर नीचे लटका कर बैठ गयी…..थोड़ी देर बाद समीर के कदमो की आहट रूम की तरफ बढ़ती हुई सुनाई दी तो मेने अपने सर को झुका लिया….और धड़कते हुए, दिल के साथ उसके अंदर आने का इंतजार करने लगी…..

थोड़ी देर बाद समीर अंदर आया तो, मेने हल्की से नज़रे उठा कर उसकी तरफ देखा, तो वो सिर्फ़ अंडरवेर पहने हुए था….मेने फिर से नज़रें झुका ली, समीर ने एक बार मेरी तरफ देखा, पर ना तो वो मुझे देख कर कुछ बोला और ना ही हैरान हुआ…..शायद वो समझ गया था कि, में उसके रूम में क्या कर रही हूँ……समीर ने बेड के पास रखे टेबल लॅंप को ऑन किया, और मेन लाइट ऑफ कर दी, फिर टवल उठा कर अपने हाथ पोन्छते हुए मेरे सामने आकर खड़ा हो गया…..वो मेरी तरफ ही देख रहा था….पर कुछ बोल नही रहा था…और ना ही मेरी हिम्मत हो रही थी कि, में उससे कुछ बात कर सकूँ…..

समीर ने एक हाथ से टेबल लॅंप की रोशनी को बेड की तरफ कर दिया….और फिर से अपने हाथों को टवल से पोंछते हुए बोला…..”उतरो….” मेने चोंक कर उसकी तरफ देखा, तो उसने फिर से हल्की सी मुस्कुराहट के साथ कहा….”अपनी सलवार उतारो….” उसकी बात सुनते ही मेरा दिल जोरो से धड़कने लगा….और ना जाने मुझे क्या हो गया था…पता नही समीर ने मुझ पर क्या जादू कर दिया था कि, मेने वैसे ही बैठे-2 अपनी कमीज़ के नीचे से हाथ डाल कर अपनी सलवार का नाडा खोलना शुरू कर दिया….मेने सलवार का नाडा खोलते हुए एक बार समीर की तरफ देखा तो वो अपने अंडरवेर के ऊपेर से अपने बाबूराव को मसल रहा था….मेने अपनी सलवार उतार कर बेड के एक तरफ रख दी…..

समीर ने भी एक झटके में अपना अंडरवेर उतार फेंका, और फिर नीचे झुक कर मेरी टाँगों को पकड़ कर ऊपेर उठा दिया…..जिसके कारण में पीछे की तरफ लूड़क गयी…समीर ने मुझे टाँगों से खींच कर बेड पर सीधा लिटा दिया….और मेरी टाँगों को खोल कर जाँघो के बीच में आ गया….उसने अपने बाबूराव को एक हाथ से पकड़ और मेरी चुनमुनिया की फांको पर रगड़ते हुए, अपनी एक उंगली को मेरी चुनमुनिया के छेद के बीच में घुसाया, और बोला…..”रुखसाना तुम्हारी चुनमुनिया तो पहले से ही लार टपका रही है……”

समीर की बात सुन कर में बुरी तरह से झेंप गयी, और उसकी चौड़ी छाती में मुक्का झाड़ दिया. और उसने मेरे मुक्के के जवाब में अपने बाबूराव को मेरी चुनमुनिया में एक धक्के के साथ पेल दिया. “सीईईईई हाईए सामीएर ओह उंह अहह” में सिसक कर उससे चिपक गयी……समीर ने झुक कर मेरे होंटो को अपने होंटो में भर लिया, और तेज़ी से अपने बाबूराव को अंदर बाहर करते हुए, मेरे होंटो को चूसने लगा…..में मस्ती के सागर में गोते खाते हुए, उसके नीचे मचल रही थी….और वो मेरी टाँगों को उठा कर लगतार अपना मुन्सल मेरी चुनमुनिया में चला रहा था…..उसके बाबूराव की रगड़ मुझे अपनी चुनमुनिया की दीवारो में बहुत सुखद अनुभव दे रही थी….मेरे हाथ खुद ब खुद उसके पीठ पर कसते चले जा रहे थे…..

मेरी गान्ड बेकाबू होकर अपने आप ऊपेर की ओर उछलने लगी थी…..10 मिनिट की चुदाई में ही में सतावें आसमान में उड़ रही थी…..और फिर मेरी चुनमुनिया में तेज संकुचन होने लगा…..और मेरी चुनमुनिया ने समीर के बाबूराव के टोपे को चूमते हुए, उस पर अपना प्यार भरा रस न्योछावर करना शुरू कर दिया….समीर भी चन्द और झटकों के बाद मेरी चुनमुनिया में ही झड़ने लगा…..और फिर थोड़ी देर बाद वो मेरे ऊपेर से हट कर बगल में लेट गया…..झड़ने के बाद मुझे बेहद सकुन मिल रहा था….शाम से जिस के लिए तड़प रही थी… उस एक चीज़ ने मुझे 10 मिनिट्स में दुनियाँ भर की जन्नत दिखा दी थी…..

थोड़ी देर बाद जब मेने समीर की तरफ देखा, तो वो आँखें बंद किए हुए लेटा हुआ था…और लंबी-2 साँसे ले रहा था….हम दोनो के बीच कोई बात नही हुई, शायद वो सो गया था. में बेड से नीच उतरी, और अपनी सलवार पहन कर नीचे आ गयी……नीचे आकर मैं बेड कर लाइट गयी……भले ही सेक्स और वासना के नशे में ये सब कुछ कर रही थी….पर दिल के एक कोने में ये ख़याल आ रहा था कि, यही मेरा वजूद है….मैं समीर में अपना प्यार ढूँढ रही थी. पर समीर के लिए शायद में सिर्फ़ सेक्स करने की ज़रूरत हूँ…..क्या समीर मुझे मेरे बदन के लिए चाहता है….और मैं भी क्या से क्या बन गयी हूँ…

ये बात किस शादीशुदा औरत को शोभा देती है, कि आधी रात को किसी जवान लड़के के कमरे में जाए, और उसके एक बार कहने पर अपनी सलवार उतार कर उसके सामने अपनी टांगे और चुनमुनिया खोल कर उससे चुदवा ले, और उसके वीर्य से भरी चुनमुनिया और बच्चेदानी को लेकर वापिस आ जाए…ये मैं क्या कर रही हूँ…..ये सब क्यों कर रही हूँ….वो तो जवान लड़का है….आज यहाँ कल पता नही कहाँ….और तुम रुखसाना….तुम क्यों उसके पीछे बदनाम होना चाहती हो…..

यही सब उधेड़बुन मेरे दिमाग़ में चल रही थी कि, मैं फ़ारूक़ और सोनिया को भी धोका दे रही हूँ….जिस प्यार के लिए मेने अपना जिस्म समीर को सोन्पा था….शायद वो मुझे समीर से नही मिलने वाला है….पता नही मुझे कब नींद आई…..सुबह मैं 7 बजे जाग गई, मैं उठ कर फ्रेश हुई, और नाश्ता तैयार करने लगी….सोनिया भी आ गयी……सोनिया जल्दी से तैयार हुई, और फिर समीर सोनिया और मेने एक साथ नाश्ता क्या….जैसे ही समीर नाश्ता करके उठा तो उसने सोनिया से कहा…..” तुम्हे स्कूल जाना हो तो छोड़ दूं….” सोनिया ने समीर की बात सुनते हुए, मेरी तरफ देखा….में उसे समीर के सामने मना नही कर सकती थी……

इसलिए मेने हां में सर हिला दिया……”ठीक है में दो मिनिट में आता हूँ…तुम तैयार रहना..” ये कह कर समीर ऊपर चला गया…..सोनिया ने अपना बॅग पॅक किया….और फिर वो समीर की बाइक के पीछे बैठ कर चली गयी….दोस्तो अब समीर सोनिया को अपने नीचे लिटाने की फिराक में था…और उन दोनो के बीच जो भी हुआ था….वो बाद में मुझे सोनिया से पता चला था….वही में यहाँ बयान करने की कॉसिश कर रही हूँ…