एक औरत की दास्तान–10

रुक्मणी बेड पर चढ़ि, और समीर के ऊपेर झुकते हुए बोली…..”तो समीर जी ज़रा हमे भी बताए कि, आप क्या-2 जानते है Hindi Sex Stories Antarvasna Kamukta Sex Kahani Indian Sex Chudai दूसरी तरफ अनुराधा भी बेड पर समीर के दूरी तरफ करवट के बल लेट गयी…..और समीर के चौड़े सीने पर एक हाथ से सहलाते हुए, अपनी टाँग उठा कर समीर की टाँगों पर रख दी…

..”जी सब जानता हूँ…..” समीर ने अपने दोनो तरफ लेटी हुई मस्त चुदैल औरतों को देख कर कहा…..”अनु तुम्हे मॅंगो फ्लेवर बहुत पसन्द है ना…..” रुक्मणी की ये बात सुन कर समीर चोंक गया….अब साला मॅंगो फ्लेवर बीच में कहाँ से आ गया….समीर ने मन ही मन में सोचा…..

अनुराधा: हां यार बहुत पसंद है…….

रुक्मणी: तो उस ड्रॉयर में तेरे लिए कुछ है….जा निकाल कर ले आ……

अनुराधा उठी, और ड्रॉयर खोलने लगी…..उसमे आमरस की बोतल पड़ी हुई थी…..उसे देख कर अनुराधा की आँखों में चमक आ गयी….अनुराधा बोतल को लेकर बेड पर आकर बैठ गयी….उसने एक बार रुक्मणी की ओर मुस्कराते हुए देखा….तो रुक्मणी ने समीर के टवल को पकड़ कर खेंचा. पर टवल समीर के वजन से दबा हुआ था…..समीर ने खुद ही अपना टवल अपने बदन से अलग कर फेंक दिया….समीर का 8 इंच से लंबा और 4 इंच मोटा मुनसल जैसा बाबूराव झटके खाते हुए फूंकारने लगा….जिसे देख दोनो रांडो के मुँह से सिसकारी निकल गयी….”आह रुक्मणी ये तो बहुत तगड़ा घोड़ा है……..” अनुराधा ने समीर के बाबूराव को देखते हुए कहा……

रुक्मणी: हां सच यार साले ऐसे घोड़े की तो सवारी करने में मज़ा है…..आज तो अपनी किस्मत खुल गयी…..यार समीर पहले पता होता कि, तू अपनी टाँगों के बीच इतना लंबा घोड़ा छुपाए हुए है, तो पहले दिन ही तुमसे से चुदवा लेती…..

ये कहते हुए रुक्मणी ने हाथ बढ़ा कर समीर के बाबूराव को अपने हाथ में पकड़ लिया. और उसके बाबूराव के आगे की चमड़ी पीछे की तरफ सरकी, तो समीर के बाबूराव का सुपाडा लाल टमाटर की तरह चमकने लगा…..जिसे देख कर दोनो की चुनमुनिया कुलबुलाने लगी…..रुक्मणी ने जल्दी से आमरस की बोतल खोली, और समीर के बाबूराव के ठीक ऊपेर लाते हुए, उस पर रस टपकाने लगी. ठंडे रस को अपने बाबूराव पर गिरता महसूस करके समीर एक दम से सिसक उठा…..”क्या हुआ समीर बाबू…..?” रुक्मणी ने समीर को सिसकते हुए देख कर कहा…..”आहह बहुत ठंडा है” समीर ने रुक्मणी की ओर देखते हुए कहा…..

रुक्मणी: थोड़ा सा इंतजार करो….अभी देखना अब तुम्हारे इस बाबूराव को कितनी गरमी मिलने वाली है…..

समीर का बाबूराव पूरी तरह से आमरस से भीग गया….अनुराधा ने बोतल बंद की, और उसे नीचे रख कर समीर की जाँघो के पास मुँह करके पेट के बल लेट गयी…..दूसरी तरफ ठीक वैसे ही रुक्मणी भी, लेट गयी……अनुराधा समीर के बाबूराव पर झुक गइेव…..और अपने होंटो को समीर के बाबूराव के मोटे सुपाडे पर लगा दिया….समीर मस्ती से सिसक उठा….आज तक उसके बाबूराव को किसी ने नही चूसा था…..फातिमा वो पहली औरत थी…..जिसे समीर ने चोदा था…..समीर ने अनुराधा के खुले हुए बालो को कस्के पकड़ लिया….अनुराधा ने इस बात का बुरा नही माना. और अपने होंटो को समीर के बाबूराव के सुपाडे के चारो तरफ कस्ति चली गयी…..

थोड़ी ही देर में समीर के बाबूराव का सुपाडा अनुराधा के मुँह में था, और वो उसे अपने होंटो से दबा-2 कर चूसने लगी…..दूसरी तरफ लेटी रुक्मणी ने भी देर ना की, और अपनी जीभ और होंटो से समीर के बाबूराव के नीचले हिस्सो को चाटने लगी…..समीर के बाबूराव को अब दोहरी मार पड़ रही थी….समीर का बाबूराव एक दम अकड़ गया था….समीर ने अपने दूसरे हाथ से रुक्मणी के खुले हुए बालो को पकड़ लिया….दोनो औरतें समीर के बाबूराव पर कुतियों की तरह टूट पड़ी….अनुराधा तो समीर के बाबूराव को चूसने में मगन थी…..और रुक्मणी कभी समीर के बाबूराव की लंबाई पर अपनी जीभ फिराती, तो कभी के समीर के बॉल्स को पकड़ कर मुँह में भर कर चूसने लगती….

समीर आँखें बंद किए हुए जन्नत सा मज़ा ले रहा था…..रुक्मणी और अनुराधा जिस जोशीले अंदाज़ में समीर के बाबूराव को चूस चाट रही थी……देखने से लग रहा था…..जैसे सामने किसी पॉर्न मूवी का सेसेन चल रहा हो…..थोड़ी ही देर में समीर का बाबूराव दोनो के थूक से सन गया….जैसे ही अनुराधा ने समीर के बाबूराव को मुँह से बाहर निकाला, रुक्मणी ने उसे अपने मुँह में भर लिया…….पक-2 गलप -2 जैसी आवाज़ें पूरे रूम में गूंजने लगी…. “रुक्मणी यार बहुत मज़ा आ रहा है…..आज तक ऐसे जवान लंड का स्वाद नही चखा…..”

रुक्मणी: (समीर के बाबूराव को मुँह से बाहर निकाल कर अपने हाथ से हिलाते हुए) हां सच अनु मेने भी ऐसे लंड को कभी नही चूसा, मज़ा आ गाया यार…..दिल करता है रोज इस के चुप्पे लगाऊ…..(ये कहते हुए उसने फिर से समीर के बाबूराव को मुँह में भर लिया….और चूसना शुरू कर दिया….)

रुक्मणी का बेड रूम चुदाई की आवाज़ों से भर गया था…..”अनु बोल पहले तू इस बाबूराव की सवारी करेगी “ रुक्मणी ने समीर के बाबूराव मुँह से बाहर निकाल कर अपने हाथ से हिलाते हुए कहा….तो अनुराधा बिना कुछ बोले उठ कर बैठ गयी…..उसने अपना बाथरोब निकाल कर फेंक दिया……दूसरी तरफ रुक्मणी ने भी अपना बाथरोब उतार कर फेंक दिया…दोनो समीर की बगलो में लेट गयी, और उसके ऊपेर झुक गयी……दोनो की बड़ी-2 गुदाज चुचियाँ समीर के चेहरे के ऊपेर झूलने लगी….जिसे देख समीर की आँखों में चमक आ गयी…..रुक्मणी के निपल कुछ ज़्यादा ही लंबे और मोटे थे….देख कर ऐसा लग रहा था…..जैसे चीख-2 कर कह रहे हो….आओ हमे मुँह में भर कर निचोड़ लो…..समीर ने भी एक पल की देर ना की, और

अपने सर को थोड़ा सा ऊपेर उठा कर रुक्मणी की चुचि के निपल को मुँह में भर लिया….रुक्मणी समीर के ऊपेर झुक गयी…..और अपनी चुचि को और ज़्यादा समीर के मुँह में ठेल दिया….समीर ने भी उसकी चुचि और निपल को अपने होंटो में दबा-2 कर चूसना शुरू कर दिया….”अहह हाआँ चूस्सो समीर अहह बहुत अच्छा लग रहा है……” और उसने अपना एक हाथ नीचे लेजा कर समीर के बाबूराव को पकड़ कर हिलाना शुरू कर दिया….दूसरी तरफ लेटी, अनुराधा समीर के बॉल्स के साथ खेलने लगी…..समीर ने कभी सोचा ना था कि, ये दोनो औरतें उसे इतना मज़ा देंगी……रुक्मणी की चुचि को थोड़ी देर चूसने के बाद उसने चुचि को मुँह से बाहर निकाला, और अनुराधा की तरफ देखा….

अनुराधा ने अपनी एक चुचि को हाथ में पकड़ कर अपने निपल को और नोकदार बनाते हुए, उसे समीर के मुँह से सटा दिया….समीर ने भी मुँह खोल अनुराधा की चुचि को मुँह में भर लिया……और चूसना शुरू कर दिया…..अनुराधा की मस्ती में आँखे बंद होने लगी….उसका हाथ समीर के चौड़े सीने पर तेज़ी से घूमने लगा….दूसरी तरफ लेटी, रुक्मणी उठ कर समीर के ऊपेर आ गयी….और अपने घुटनो को समीर की कमर के दोनो तरफ रख कर बैठते हुए समीर के बाबूराव को हाथ से पकड़ लिया…..और अपनी चुनमुनिया की फांको पर जैसे ही उसने समीर के बाबूराव के सुपाडे को रगड़ा, तो वो एक दम से सिसक उठी….”आह समीर तेरा बाबूराव तो बहुत गरम है साले….” रुक्मणी की आवाज़ सुन कर अनुराधा ने भी अपने मम्मे को उसके मुँह से बाहर निकाला…..और समीर के सर की तरफ जाकर उसके सर के दोनो तरफ अपने घुटनो को बेड पर रखा.

जिससे अनुराधा की चुनमुनिया ठीक समीर के मुँह के ऊपेर आ गयी….अनुराधा रुक्मणी दोनो एक दूसरे की तरफ फेस करके समीर के ऊपेर बैठी हुई थी….अनुराधा ने अपनी चुनमुनिया के होंटो को फेलाते हुए, अपनी चुनमुनिया के दाने (क्लिट) को दिखाते हुए कहा…..”समीर ये है औरतों की ट्रिग्गर. जानते हो….ये औरतों का सबसे सेन्सिटिव पार्ट होता है….” समीर आँखें फाडे अनुराधा की गुलाबी चुनमुनिया के छेद और दाने को अपने आँखो के 4 इंच के फँसले पर देख रहा था….”चलो अब तुम्हारी बारी है हमें मज़ा देने की…..इसे चूसो…..”

समीर: पर मेने कभी ऐसा नही किया है….(समीर ने अजीब सा चेहरा बनाते हुए कहा)

रुक्मणी: अर्रे चाट ले….इस रस का स्वाद पाने के लिए तो कई मर्द तरसते रह जाते है….

अनुराधा: देखो समीर ये वो चीज़ है……जिससे हर लड़की और औरत पिघल जाती है….एक बार तुमने किसी के चुनमुनिया या दाने को चूस लिया…..तो लड़की खुद ब खुद तुम्हारे बाबूराव के नीचे आ जाएगी……मेरे बात याद रखना…..

समीर ने बेमन से अनुराधा की चुनमुनिया के छेद पर अपने होंटो को लगा दिया….कुछ पलों के लिए समीर को थोड़ा अजीब सा लगा…..पर जैसे ही उसने अनुराधा की चुनमुनिया के छेद पर अपने होंटो को लगाया, तो अनुराधा का पूरा जिस्म कांप उठा…..उसकी कमर झटके खाने लगी….”आहह समीर ओह अहह सीईईईईईई अहह उमाआ ओह समीर ईससस्स सक मी….अह्ह्ह्ह” समीर को समझते देर ना लगी कि अनुराधा जो कह रही है….वो एक दम सच है… अपने ऊपेर अनुराधा को यूँ तड़पता देख कर उसने अनुराधा की चुनमुनिया के दाने को अपने होंटो में भर कर और ज़ोर-2 से चूसना शुरू कर दिया…..अनुराधा एक दम से मचल उठी…..

अनुराधा: ओह्ह्ह्ह समीर अह्ह्ह्ह अहह सच में बहुत अच्छा लग रहा है…..हाई मेरी फुद्दि आह ओह सीईइ हइईई….

दूसरी तरफ समीर को अपना बाबूराव किसी गीली और गरम चीज़ में घुसता हुआ महसूस हुआ….”आह समीर तेरा बाबूराव तो सच में बहुत मोटा है रे…..अह्ह्ह्ह मेरी फुद्दि ओह्ह्ह अह्ह्ह्ह्ह्ह्ह…..” रुक्मणी धीरे-2 समीर के बाबूराव पर अपनी चुनमुनिया को दबाती जा रही थी….और समीर के बाबूराव का मोटा सुपाडा रुक्मणी की चुनमुनिया के अंदर उसकी दीवारों से रगड़ ख़ाता हुआ अंदर जाने लगा था…..रुक्मणी का जिस्म अपनी चुनमुनिया की दीवारो पर समीर के बाबूराव की रगड़ को महसूस करके थरथरने लगा…..उसने अपने आप को किसी तरह से संभालते हुए, अनुराधा के कंधो पर हाथ रख दिया…..जो उस वक़्त समीर के मुँह के ऊपेर बैठी उससे अपनी चुनमुनिया चुसवा कर मस्त हो चुकी थी…..”हाईए अनु ये लौडा तो नाभि तक अंदर आ जा रहा है.

अनुराधा: आह तो साली ले ले ना पूरा का पूरा अंदर अहह मेरी तो फुद्दि बुरी तरह से फुदक रही है….अह्ह्ह्ह समीर चुस्स्स ना……

रुक्मणी ने अब धीरे-2 अपनी गान्ड को ऊपेर नीचे करते हुए समीर के बाबूराव पर अपनी चुनमुनिया को पटकना शुरू कर दिया था……समीर का बाबूराव कुछ ही पलों में रुक्मणी की चुनमुनिया के पानी से भीग कर चिकना हो गया, और तेज़ी से अंदर बाहर होने लगा……”अहह साला ऐसा लौडा नही लिया मेने आज तक अपनी फुद्दि में अहह ओह्ह्ह्ह ओह अनु मेरी चूत आहह फटने वाली है……….समीर भी अब तेज़ी से अपने बाबूराव को ऊपेर की तरफ उछालने लगा. रुक्मणी की चुनमुनिया में समीर का बाबूराव फ़च-2 की आवाज़ करते हुए अंदर बाहर होने लगा…

रुक्मणी ने अपने सामने समीर के फेस के ऊपेर बैठी अनुराधा को अपनी बाहों में जाकड़ लिया…और अनुराधा के होंटो को अपने होंटो में लेकर चूसना शुरू कर दिया…अनुराधा भी पूरी तरह गर्म हो चुकी थी…दोनो पागलो की तरह एक दूसरे के होंटो को चूसने लगी….ये देख समीर ने अनुराधा की चुनमुनिया के दाने को अपने होंटो में और ज़ोर-2 से दबा कर चूसना शुरू कर दिया….अनुराधा एक दम से मचल उठी…..उसने अपने होंठो को रुक्मणी के होंटो से अलग किया….”ओह समीरर आह समीर मेरी फुद्दि आह हइई ओह्ह्ह्ह सीईईईईईईई उंह समीररररर ले मेरी फुद्दि के पानी का स्वाद चख अह्ह्ह्ह ओह”

अनुराधा की चुनमुनिया से पानी बह निकला. वो काँपते हुए झड़ने लगी….और थोड़ी देर बाद निढाल होकर समीर की बगल में लूड़क गयी….रुक्मणी ने भी अपनी गान्ड को तेज़ी से ऊपेर नीचे हुए उछालते हुए समीर के बाबूराव पर उछलना शुरू कर दिया…और थोड़ी देर बाद ही रुक्मणी की चुनमुनिया ने भी समीर के बाबूराव पर पानी छोड़ना शुरू कर दिया….रुक्मणी भी समीर के ऊपेर लूड़क गयी…..तीनो आपस में लिपटे हुए थोड़ी देर तक अपनी सांसो को दुरस्त करते रहे.. “ओह्ह्ह समीर तूने तो कमाल ही कर दिया…..में अभी मूत कर आती हूँ….” ये कह कर अनुराधा बेड से उठ कर बाथरूम में चली गयी…..और मूतने के लिए बैठ गयी….अभी कुछ ही पल हुए थे कि, उसे बाहर से रुक्मणी के तेज सिसकने की आवाज़ आई….

अनुराधा: साली रांड़ लगता है फिर से बाबूराव बुर में ले लिया है…

अनुराधा मूतने के बाद हाथ धो कर बाहर आई तो उसने देखा, कि रुक्मणी बेड पर कुतिया की तरह अपनी गान्ड पीछे की ओर निकाल कर अपनी कोहानियों को बिस्तर पर टिकाए हुए थी…और समीर बिस्तर पर अपने घुटनो को मोड़ कर कुतिया बनी रुक्मणी के ऊपेर चढ़ा हुआ था… समीर का बाबूराव रुक्मणी की गान्ड के छेद में बुरी तरह फँसा हुआ था……”आह समीर धीरे ओह्ह्ह्ह तेरा लौडा तो मेरी गान्ड ही फाड़ देगा…..हाई मर गयी में….” पीछे खड़ी अनुराधा ये सब देख कर मुस्कुराते हुए बेड पर चढ़ि…..और समीर की पीठ को सहलाते हुए बोली…..”शाबाश समीर बाबू…..अब बजा दे साली की गान्ड का ढोल…..पूरे घर में उसकी गान्ड बजने का ढोल सुनाई देना चाहिए…..”

रुक्मणी: अह्ह्ह्ह चुप कर साली……जब तेरी गान्ड में घुसेगा ना इसका लौडा तब देखना ऐसी बातें दिमाग़ में आती है कि नही….ओह्ह्ह्ह मारा डाला री….”

समीर का अभी आधा बाबूराव ही रुक्मणी की गान्ड में उतरा था….और रुक्मणी को दर्द की तेज लहर अपनी गान्ड में महसूस होने लगी थी…..समीर धीरे-2 अपना आधा बाबूराव ही रुक्मणी की गान्ड के अंदर बाहर करने लगा…….”समीर बाबू ऐसे मज़ा नही आएगा….हमारी रुक्मा को.. ज़ोर से चांप साली की गान्ड को देख फिर कैसे इसकी गान्ड फटने की आवाज़ आती है…..समीर अनुराधा की तरफ मुस्कुराते हुए देखता है….”तुम क्यों फिकर कर रही हो मेरी जान…..तुम्हारी गान्ड का ढोल भी आज बजा दूँगा….

अनुराधा: ओह्ह्ह समीर ये साली तेरा लौडा छोड़े तब ना …..पहले इसकी गान्ड फाड़…..

समीर अब नॉर्मल स्पीड से रुक्मणी की गान्ड के छेद में अपना बाबूराव अंदर बाहर कर रहा था….थोड़ी देर बाद रुक्मणी को मज़ा आने लगा….और उसने भी अपनी गान्ड को पीछे की तरफ धकेलना शुरू कर दिया….”अहह ओह हइई समीर और तेज मार मेरी गान्ड पूरा का पूरा घुसा दे अपना लौडा…..कर ले अपने दिल के अरमान पूरे ओह्ह्ह्ह….में भी देखू कि कितनी अकड़ है तुम्हारे बाबूराव में” आह अहह…….समीर अब पूरी ताक़त के साथ अपना मोटा मुनसल जैसा बाबूराव रुक्मणी की गान्ड के छेद में अंदर तक पेलने लगा…..और रुक्मणी भी किसी मन्झि हुई रंडी की तरफ अपनी गान्ड को पीछे की तरफ समीर के बाबूराव पर फेकने लगी…..
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