उफ्फ़ यह गर्मी – Hindi Sex Kahania – 3

उफ्फ़ यह गर्मी – Hindi Sex Kahania – 3

करीब आधा घंटा बीट चुका था और नहीखिल से वो सवाल सॉल्व ही नही हो पा रहा था, मदात तो वो ले नही सकता था क्योंकि उसने दावा किया हुआ था और फिर दोफर मे आंटी के पसीने भादी पेट और अब आंटी के हूतों के स्पर्श याद करता हुआ उसे खुजली होने लगा के वो कैसे भी हो सॉल्व करे. वाहा किचन मे नहीखिल को दुविधा मे देखके वैशाली मॅन ही मॅन हंस पड़ा और फिर काम मे जुट गयी पर फिर मॅन मे सोचने लगी के अब के बार इस सवाल के सॉल्व होने पर उसे क्या दिया जाए और उसकी बुर मे फिर से खुजली शुरू होने लगी. वोही खड़ी खड़ी आपनी जाँघो को आपस मे रग़ाद रग़ाद के काम करने लगी और बार बार हूतों पर जीभ फिरने लगी यह सोचके के आयेज और क्या क्या वो आपने नहीखिल को दे सकती थी, पर ममता के दायरे मे रहके.

वाहा सोफे पर नहीखिल नज़दीक आ चुका था पर बहुत परेशन भी होने लगा था, उसने घड़ी देखा तो 8:30 बाज चुके थे और आधे घंटे मे उसके पितः दफ़्तर से भी आने वाले थे. आंटी के हूतों का स्पर्श उसके लिए काफ़ी था हर कठिन से कठिन सवाल सॉल्व करने के लिए और वो आपने उभरे लॉड को पेंट के उपर से ही खुज़ला खुज़ला कर सॉल्व करने की कोशिश करता गया और हैरानी से 5 मीं के अंडर ही अंडर उसने एक नतीजा निकला और सीधे आंटी के पास दौर पड़ा. इस बार नहीखिल के चेहरे को देखके वैशाली नहीसचीत थी और उसने जवाब देखी और उसकी मूह से “वाआह नहीखिल!!!! शाबशह!!!! यह तो काफ़ी हार्ड था!” निकाल पड़ी और फिर कॉपे को साइड मे रखती हुई वो नहीखिल के आँखों मे आँखें डालने लगी “तो… मेरे लाल को अब क्या चाहिए?”.

नहीखिल आपने आंटी के बिल्कुल पास खड़ा हो गया और बहुत धीमे आवाज़ मे “आंटी…. इस जवाब के लिए… अगर तू….. अगर तुम आपनी …. आपनी”. वैशाली बेचन हो गयी “बोल नहीखिल…. जल्दी बोल, तेरे पॅपा के आने का वक़्त भी तो हो गया हैं, मैं आपनी क्याअ???” उसकी धड़कन तेज़ होने लगी और स्तन उपर नीचे होने लगी. नहीखिल नीचे देखके बोल पड़ा “अगर आप आपने पल्लू को थोडा सरका के मुझे ड्ड… द्दिखहाअई टूऊओ”. वैशाली बहुत घुस्सा हो गयी और आपनी हाथ मुट्ठी मे तब्दील की. जी मे आया के नहीखिल का खूब पिटाई करे पर फिर बात को संभालती हुई बोल पड़ी “ह्म्‍म्म्ममम… लगता है मैं तेरे हिम्मत को काफ़ी बड़वा दे रही हूँ”. नहीखिल शरम के आंटीरे लाल लाल हो चुका था पर वैशाली ने उसके जबुरे मे हाथ रखके उसे चेहरे को उपर किया “नहीखिल, एक आंटी से बुर्कर.. मैं एक औरत हूँ और औरत का दिल जितना आसान नहीं, शायद तुम्हे और तोड़ी महाँनत करनी पड़े, पर फिलहाल के लिए” कहती हुई आपनी चेहरे को आयेज की और इस बार आपनी दोनो हाथों मे आपने नहीखिल के मूह को जकड़ती हुई हूतों को सीधे नहीखिल के हूतों पर रखके चूसने लगी, कुछ ऐसे चूसने लगी के दोनो के जीभ भी एक दूसरे से टकराने लगे.

आंटी के ऐसे होन्ट पर होन्ट चूसने पर नहीखिल पागल होने लगा और उसने भी आंटी के पेठ को कस्स के पड़का और वापस उसकी हूतों को चूसने लगा. आंटी नहीखिल करीब 10 मीं तक एक दूसरे के हूतों को चूस्ते रहे और एक दूसरे के लाली पेते गये. चुंबन इतनी गीली थी के आंटीनो दो पड़ीेमी एक दूसरे को चूस रहे हो और फिर 15 मीं की लंबी चुंबन के बाद दोनो आज़ाद हो गये और दोनो के हूतों से लाली नीचे तपाक रहे थे. वैशाली ने इस बार बुरी तरह पेंटी गीली कर चुकी थी और नहीखिल के ककचे का सामने का हिस्सा ही गीला हो चुका था. आंटी नहीखिल के एक ही दशा थी और दोनो जैसे ही एक दूसरे को देखते गये तभी अचानक से बेल रिंग बाज उठा और दोनो के ध्यान एक दूसरे से टूट पड़ा. नहीखिल घबुराता हुआ हाथ मे कॉपे लिए किचन से भाग गया आपने कमरे मे और वैशाली आपनी हूतों को आपनी पल्लू से पोछती हुई मटकती हुई डरवाज़े के पा जाके उसे खोल दी “ओह आगाय आप!”.

वैशाली के डरवाज़ा खोलते ही अंडर आ पड़ते हैं उसके पति सचिन, 53 साल के होने के बावजुट एक हटता खट्टा हाटी जैसा इंसान और आज भी जो आपने बीवी को बिल्कुल वैसे ही प्यार करता हैं जैसे पहले था. सचिन अंडर आके आपने बीवी से गले मिला और उसके हाथ मे ब्रीफकेस थआंटी दिया.

सचिन : तो डार्लिंग, कैसा गया दिन (कस्स के वैशाली की गांद के गालो को सारी के उपर ही दबोचने लगा)

वैशाली : उफफफ्फ़… आप तो बॅस…. नहीखिल घर मे हे, कुछ तो… उफ़फ्फ़

सचिन मुस्कुराता हुआ आपने कमरे मे चला गया और वैशाली खाना बनाने मे जुट गयी.

रात को नहीखिल आपने बिस्तर मे लेता लेता आपने आंटी के साथ बीते हुए सारे लम्हे को एक के बाद एक याद करने लगा और उसके हाथ आपने आप ही लॉड पर आ गिरा और उसे मसालने मे जुट गया, आपने लॉड को मसल मसल के उसने बार बार खुद को यकीन दिलाने के कोशिश किया के सच मे उसके सूंस के सही जवाब पर उसके आपने ही आंटी ने उसे ऐसे ऐसे हसीन तोहफे दिए उसे और आयेज के नतीजो के बड़े मे सोच सोच के उसके लॉड मे खून दो गुना ज़्यादा दौर ने लगा और उसने उपर नीचे खीचना शुरू भी कर दिया था.

दूसरे और वाहा वैशाली आपने पति के साथ सोई हुई थी. दोनो मीया बीवी आपने आपने दुनहीया मे मदमस्त थे, सचिन आपने फाइल्स मे व्यस्त था और वैशाली नींद की दुनहीया से बहुत, बहुत दूर थी, वो तो बस आपने नहीखिल के साथ बीती हुई हर लम्हो को याद कर रही थी और जी मे आया के वोही सारी के अंडर आपनी कोहाँी घुसाए बुर की मरम्मत करे, ना जाने काब्से आँसू बहा रही हैं. कुछ मिंटो बाद सचिन फाइल देखते ही देखते बोल पड़ा “तो बुरखूडर के पड़ाई कैसे चल रहा हैं?”.

वैशाली : ह्म, अछा चल रहा हैं, देखना इस बार बाड़िया आंटीर्क्स लेके आएगा वो

सचिन : ह्म, हाँ तुम जो हो उसके साथ, ज़रा डीटेल मे पड़ना उसे और हाँ यह ज़िम्मदारी तुम्हारी

वैशाली आपनी जाँघो को मसालने लगी “ह्म हाँ, आप बिल्कुल .. बिल्कुल टेन्षन मत लीज्ज…उ एम्म्म”. कजिनकियों के आवाज़ से सचिन फाइल बाजू रखके आपने बीवी को जांघे दबाए देखता रहा और उसके पाजामे के अंडर लॅंड बहुत मोटा होने लगा “ह्म लगता हैं के मेरे पड़ाई का वक़्त हो गया हैं”, इतना कहके वो आपने शर्ट के बटन खोलने लगा और बिना कुछ विचार किए ही पाजामे के नडा लूस करके सीधा आपने बीवी के उपर. पति के वजन आपनी चौड़ी वजन पर पाके वैशाली की खुजली बाद गयी और दोनो पति पत्नी हिलने लगे एक साथ. सचिन आपने पाजामे के अंडर से उभरे लंड को बहार निकालता हुआ आपने पत्नी के सुडोल पेट पर घिसने लगा और वैशाली ने आपनी पल्लू सर्कदी और पति को सीने से लगा लिया “उःम्म्म्ममम ऑश लेल्लूओ मुझहीई!!!”.

हमेशा की तरह उनके कमरे के बहार नहीखिल चुप चुप के डरवाज़े मे कान लगता था और आंटी-बाप के वासना भरे आवाज़ सुन सुन के उसके पेंट के अंडर लॅंड बहार पूरा 90 डिग्री मे खड़ा होने लगता था. उसके आंटीन पसंद आवाज़ें अब शुरू हो चुका था और उसका हाथ आपने लॅंड पर अटल था.

“उूुुुुुुउउर्र्घह आअहह आंटीरो मुझे, आअहह!!!” वैशाली की मोटी वजन से बिस्तर तक हिलने लगा था और सचिन पूरा का पूरा नंगा ठुकाई करने लगा “यह ले…. रंडी कहीं किन….ली लीयी उघह उग्घह”. सचिन का आदात था ठुकाई के वक़्त गंदे से गंदे बातें करना और वैशाली को यह बहुत पसंद थी, इसमे उन दोनो के चुदाई मे स्वावग सा मज़ा आने लगता था. कजिनकियों के आवाज़ से नहीखिल का बहुत मॅन किया के डरवाज़ा एक दमसे खोलके आपने आंटी-बाप को नंगा छोढ़ते हुए देखके, पर काबू मे खुद को रखे उसने सिर्फ़ आपने शॉर्ट्स और ककचे को घुटनो तक लाए सिर्फ़ लॉड को पागलो की तरह मसालने लगा, ख़ास करके जब उसने आपने पॅपा के कजिनकियाँ सुनी तो उसके लॉड के सूपड़ा फूलने लगा और फिर आंटी के चीखो से तो सूप़ड़े ने गड़ गड़ पानी चॉर्ने लगा.

करीब 15 मीं की चुदाई के बाद सचिन तका हुआ आपने बीवी पर ही लेट गया और वैशाली की पसीना उसके पति के पसीने भरे शरीर से मिल गयी. दोनो मीया बीवी फॉरन चड़र ओढ़ लेते हैं और वैशाली लाइट्स ऑफ कर लेती हैं, इतनी गहरी चुदाई के बाद भी उसकी मॅन कुछ ख़ास नही भादी थी. उसके दिआंटीग़ मे एक ही नाम थी “नहीखिल”, जिसको लेके वो हर हाल मे परेशान थी. वो खुद को लेके भी परेशान थी, फिर उसने सोचा के सारे के सारे 10 सवाल के जवाब देने पर वो आपने नहीखिल को क्या इनाम देगी और इनाम कितनी मीठी होगी… इस सोच मे ही वैशाली फिर आपनी चुदी हुई बुर को फिर खुजलने लगी और सोने की बहुत कोशिश की. बहार खड़ा नहीखिल भी झाडे हुए लंड से निकला रस को डरवाज़े पर से सॉफ करने लगा और आपने कमरे मे चला गया, दिल मे एक ही जुनून लेके के उसे हर हाल मे सारे के सारे 10 सवाल सही करने थे.

अगले दिन

“तो बुरखूडर, कैसा चल रहा हैं पड़ाई?” पूछते हुए सचिन आपने जुतो के लेसस बाँध ने लगा और नहीखिल के तरफ देखने लगा.

नहीखिल : जी पॅपा, एसी.. अछा चल रहा हैं.

पॅपा के रात के कजिनकियों के आवाज़ के मुक़ाबले उनके आदेश देने वाले आवाज़ कितना अलग था, यह सोचने लगा नहीखिल और तभी वाहा वैशाली आ गयी “यह लीजिए तिफ्फ़िं” कहती हुई आपनी पति के पास जाने लगी. कुछ ही पल मे सचिन निकाल पड़ा और वैशाली ने डरवाज़ा देते हुए आपने नहीखिल के तरफ देखने लगी, चेहरे मे ममता और कामुकता, दोनो भरे हुए थे और वैशाली आपनी कमर पर हाथ रखे एक पोज़ देने लगी. पोज़ को देखते ही नहीखिल के डंडे मे असर होने लगा. वैशाली आपनी नहीखिल के करीब जाने लगी और सामने खड़ी हो गयी. उफ्फ़ यह गर्मी – Hindi Sex Kahania – 3

वैशाली : देखो नहीखिल, तुम हर कोई सवाल को इतना आसान मत समझना और हाँ मैं थोड़ी बेज़ार जा रही हूँ, आते ही मुझे 6त सवाल का जवाब चाहिए, ओके?

वैशाली आपने नहीखिल के बालों को थोडा सहलके वाहा से मटकती हुई चल पड़ी और नहीखिल दौर के आपना कॉपे और किताब लेके हॉल के सोफे मे बेठ पड़ा. कुछ डेढ़ मे वैशाली कमरे से निकाली, उसकी स्लीव्ले ब्लाउस और पतली सारी देखके नहीखिल ने किताब को ही ज़ोर से दबाने लगा. वैशाली ग्रोक्सेरी बाग और पर्स हाथ मे लिए डरवाज़े के पास गयी और बहार जाती हुई बोल पड़ी “याद रखना नहीखिल, जवाब सही हुई तो …. शायद मनचाही इनाम भी मिल सकती हैं” कहती हुई एक मुस्कुराहट देने लगी जो काफ़ी कातिलाना थी और फिर निकाल पड़ी.

नहीखिल के लॉड मे ऐसे ऐसे हुलचूल हुए के उसे पहले थोडा लॉड को दबोचा फिर हाथ मे पेन लिए.

वैशाली सबसे महले ड्रेस मेटीरियल्स के वाहा गयी और कुछ अंडरगार्मेंट्स खरीदने के सोची. उसने दो या टीन बहुत पतली सी सरीिया, कुछ ट्रॅन्स्परेंट ब्ल्काउसस और डार्क रंग के ब्रास कराइडे, फिर थोड़ी सी और पेंटी सेक्षन के जाके कुछ रंग बिरंगी सिल्क की पॅंटीस खरीदी, जिसमे मे से एक पेंटी काफ़ी छोटी थी, वैशाली ने उसे हाथ मे ली और मॅन ही मॅन खुश हो पड़ी. फिर कुछ और शोप्पिंग्स के बाद, वो वाहा से निकाल पड़ी और क्योंकि सामने का राता बेंड पड़ा, उसने एक आदमी से पूछा.

वैशाली : अरे भाई साहब, यह क्या, सामने बेंड क्यों है?

आदमी : अरे मेडम, क्या बातें… यह कम्बख़्त मरम्मत भी इन्ही रास्तो का ही तो करते हैं, आप. उम्म्म आप जल्दी से ऑटो मे चले जाइए, अब तो इस रास्ते मे बस भी शायद ना मिले आपको.

वैशाली थोड़ी घुस्से मे थी, एक तो ऐसी तपती गर्मी और उपर से अब घर वापस जल्दी जाना भी तो ज़रूरी ही था, उसने पेछे मूडी तो देखी के एक पतली सी गुली थी जो शायद उसकी घर तक एक शॉर्टकट बन सकती थी, वो फॉरन आपनी हाथ मे ड्रेसस के बॅग्स लिए धीरे धीरे उस गली की तरफ जाने लगी. गली मे घुसते ही कुछ अजीब और ग़रीब आवाज़ें उसे आने लगी, कुछ कामन आवाज़ें, कुछ सीटियों की आवाज़ जो उन अवदा लोंडो से आ रहे थे, वो लोंडे वोही गली के इर्द गिर्द मंडरा रहे थे और वैशाली ने गौर की के गली काफ़ी खुल्लम खुला था और उन लोंडो को बोलने वाला कोई नही.

लोंडो मे से एक लोंदा तो अंजाने मे बोल भी पड़ा “अरे… ज़रा संभाल के तो चलिए मदमम्म अरे अरे .. कहीं गिर ना जाए मदमम्म” और उसकी बदतमीज़ी से वैशाली हैरान नही थी, उसे तो खुजली होने लगी थी. वो आपनी आधेर उमर की कसी हुई जवानी दिखना चाहती थी इन लोंडो को, वो जान बुझ के मटक मटक के चलने लगती हैं और आपनी पल्लू से कभी आंटीता पोछती हुई यहा वाहा उन लोंडो के तरफ देखने लगती हैं. वैशाली जा ही रही थी के अचानक उसे बहुत ज़ोर की पेशाब आने लगती हैं. गली ख़तम भी नही हुई थी और उसका ऐसे बीच रास्ते मे रुक जाना उसे बिल्कुल आक्ची नही लगी, पर आंटीमला ज़रूरी थी, उसे तो कुछ करनी ही थी.

“अफ है राम, अब … अब मैं यहा कहाआ… क्या मुसीबत हाीइ” वैशाली सोच मे प़ड़ गयी, एक तो ऐसा गंदा मोहल्ला और गली और उपर से अब करे भी तो कहा करे, वैशाली ने फिर थोड़ी सी एक कोने वाले साइड मे चल देती हैं और वाहा पे एक छोटी सी शोचलाए जैसी देखती हैं. आस पास किसी को ना पाके… वो फिर से सोच ने लगती हैं पर अब खुद को ज़्यादा रोक नही पाती और वो छोटी सी गांडी दीवारी अड्डे मे घुस पड़ती हैं और घुसते ही आपनी पल्लू से आपनी नाक तक धक लेती हैं, उसे किसी भी हालत मे मुक्त होने थी और तभी उसे हैरानी होती हैं. दीवार के इर्द गिर्द छोटे छोटे खड्डे थे और किसी भी झक ने के पूरे चान्सस थे.

वैशाली ने अब और परवाह नही की और सच पूछे तो उसे ऐसे एक जगह मे खुद को मुक्ति देने का आइडिया ही बहुत गांडी लगी और उसकी जिस्म में बहुत गर्मी चड़ गयी, उसने मुतना शुरू कर दी और आँखें बेंड कर ली. करीब 5 मीं के बाद उसे सुकुउँ मिली और फिर जल्द जल्द से आपनी सारी ठीक ही कर रही थी के उसे एक खड्डे के उस पार कुछ नहीगाहो का अंदाज़ा लगाई और वो चौुक्ति हुई झट से सारी ठीक कर लेती हैं और वाहा से जैसे बहार निकाल पड़ी, उसने देखी के कुछ आवारा लड़के वाहा से फॉरन भागे जा रहे थे.

“बेशरम, हरामी कहीं के!” मॅन ही मॅन वैशाली सोचती रही और फिर हैरान थी के ऐसे मे भी उसकी बुर ने नहीचोरना भी शुरू कर दी थी. थोड़ी सी आपनी बुर को सारी के उपर से घिस्सती हुई वो झट से आयेज गुली मे चल देती हैं और करीब 10 और मिंटो के बाद उसे आपनी मोहल्ले दिखी. दिल मे सुकून लेके वो फॉरन आपनी घर के तरफ चल देती हैं. शोचले की घटना उस बस के घटने से कुछ ज़्यादा कम नही थी और उसे पूरा यकीन थी के ऐसे भारी भड़कं औरत को देखके उन लोंडो को ज़रूर मज़ा आया होगा. मॅन ही मॅन मुस्कुराती हुई वो मटकती हुई घर मे चल देती हैं और बेल रिंग पर डरवाज़ा खोल लेता हैं नहीखिल “अरे.. मम्मी आपप.. आग्गाए”.

नहीखिल का हालत कुछ बिगड़ा हुआ था, ज़ाहिर था के सवाल काफ़ी हार्ड था. वैशाली मुस्कुराती हुई आपनी बॅग्स समेत अंडर आ पड़ी “तो नहीखिल, सॉल्व कर रहे हो की नही?”. नहीखिल चौक पड़ा “मत्तलाब्ब? म्‍मैइन तो सॉल्व ही कर रहा हूँ!” उसके आवाज़ मे तेज़ भाव था और वैशाली को यकीन आगाय “ओह ठीक हैं, खैर जवाब ज़रूर दिखना… मुझे तो लगा अब तक 6त सवाल हो गयी होगी, ह्म” वापस मटकती हुई आपनी बॅग्स लेके आपनी कमरे मे चली जाती हैं. नहीखिल वापस सोफे पर बैठा आपने कॉपे लेके और वो आपने सवाल मे व्यस्त ही था के कुछ डेढ़ मे उसके आंटी के कमरे का डरवाज़ा खुला और उसे हील्स की आवाज़ सुनाई दिया. नहीखिल हैरानी से मुदके देखा तो उसके धड़कन बहुत तेज़ होने लगे. सामने आ रही थी वैशाली एक काले रंग की ट्रॅन्स्परेंट सिल्क सारी पहाँी हुई, उसके ब्लाउस सफेद रंग की थी और इतनी ट्रॅन्स्परेंट थी के अंडर काले ब्रा का भी अंदाज़ा लगाना मुश्किल नही था और…. और फिर उसके आँखें उसके आंटी के नीचे उसकी लाल रंग की लंबी सी हील्स पे गया.

वैशाली धीरे धीरे आयेज बादने लगी और उसकी हील्स की आवाज़ से नहीखिल का ध्यान लगाना बहुत ही मुश्किल हो रहा था और उसके मूह से निकाल पड़ा “ववो उूव आंटी… यह हील्स… यह वाउ”.

“कैसे लग रही हूँ नहीखिल?” कहके वैशाली आपनी नहीखिल को एक पोज़ देने लगी और कमर मे हाथ लगाए उससे कुछ ही दूरी मे खड़ी रही. नहीखिल के पेंट के अंडर फिर से हुलचूलें होने लगा पर उसे आपने सवाल पे ध्यान देने थे. वो फॉरन बेठ पड़ा और वैशाली हील्स पहाँी यहा से वाहा चलने लगी. नहीखिल नज़रें चुराए बार बार आंटी की चल देखता गया, कभी उसकी लंबे खुले बाल, कभी उसकी सारी तले हील्स और कभी वो विशाल सी गांद का काले सारी मे मटकना. नहीखिल पेन को लॉड के तरह ही दबाने लगा और बहुत मुश्किल से मॅन लगाया आपने सवाल पे. सवाल हार्ड था पर उसे जवाब लाना ही था क्यॉंके आयेज के नतीजा तो उसे चाहिए था. वैशाली आपनी नहीखिल के चेहरे के गंभीर भाव देखके काफ़ी खुश हुई मॅन ही मॅन और फिर उसके विपरीत बेठ गयी सोफे पे.