अमीना की मस्ती–5

सामने लेटी नंगी रुबीना के पूरे जिस्म पे जय हाथ फेरने लगा Hindi Sex Stories Antarvasna Kamukta Sex Kahani Indian Sex Chudai जय का हाथ रुबीना की आँखों, होंठ, गाल, गर्दन, मम्मों से भर सीना, नंगा पेट, रुबीना की गोल और गहरी नाभि सहलाते हुए अब रुबीना की बिना झाँटों की चिकनी चूत पर आया। जय के सहलाने से रुबीना अब मस्ती से आहें भरती हुई बोली, “उफ्फ़्फ़्फ़, कितना अच्छा लग रहा है आपका ऐसे मेरा नंगा जिस्म सहलाना। आहहहहहह ऊँफ्फ़्फ़्फ़फ़्फ़ और सहलाते जाओ, जो मज़ा आपने अम्मी को दिया उससे ज्यादा मज़ा चाहिये मुझे।” यह कहते हुए रुबीना अपनी कमर उठा कर जय के हाथ पे अपनी चूत रगड़ने लगी। जय को भी मज़ा आ रहा था इस कमसिन लड़की के जिस्म से खिलवाड़ करने में। जय रुबीना को पूरी तरह गरम कर चुका था पर अभी रुबीना की चूत चोदने का वक्त नहीं आया था उसके हिसाब से। जय रुबीना के मुँह से चुदवाने की बात सुनना चाहता था।

फिर एक बार ऊपर होकर जय अब रुबीना के नंगे जिस्म को सहलते हुए चूमने लगा। रुबीना की आँखों से हो कर, गाल, होंठ, नेक, दोनों निप्पल चूमते हुए उसके मम्मे चाट कर रुबीना के पेट को चाटने के बाद जय जीभ रुबीना की नाभि में डाल कर, नाभि को जीभ से खोदने लगा। रुबीना एक दम गरम हो कर, ज़ोरों से साँसें लेती हुई और आहें भरती हुई खुद के मम्मे मसलने लगी। जय उसे ऐसा मज़ा दे रहा था जो उसने ख्वाब में भी नहीं सोचा था। रुबीना तो जैसे जन्नत में थी जय के खिलवाड़ से। रुबीना की नाभि चूस कर जय अब उसकी जाँघें सहलाते हुए धीरे-धीरे नीचे होने लगा। पूरी तरह नीचे जा कर जय अब रुबीना की टाँगें चाट कर ऊपर आने लगा। रुबीना ने अपनी जाँघें बंद कर रखी थीं तो जय वैसे ही उसकी जाँघें चाट कर रुबीना की चूत के तरफ़ बढ़ने लगा। रुबीना की चूत अपने पानी से पूरी गीली हो गयी थी।

रुबीना की टाँगों पे बैठ कर जय ने रुबीना के दोनों पैर खोल कर फिर रुबीना की चूत हल्के से चूमी। अपनी चूत पे ज़िंदगी में पहली बार जीभ लगने से रुबीना के जिस्म में और भी सरसराहट फ़ैल गयी और अब रुबीना और भी ज़ोर से सिसकरियाँ भरते हुए मम्मे मसलने लगी। रुबीना को खुद अपने जिस्म से करती हर्कत को देख कर जय ने मुस्कुराते हुए रुबीना के पैर थोड़े और खोल कर उसकी नंगी अनचुदी चूत का दर्शन किया। पूरी गीली गुलाबी चूत देख कर जय से रहा नहीं गया और उसने अपना मुँह रुबीना की चूत पे रख कर एक लंबा किस दिया। जय की इस अदा से रुबीना जय का सिर अपनी चूत पे दबाते हुए उत्तेजना से चिल्ला उठी, “आहहहहहहहह जय, ऊँफ्फ़्फ़्फ़फ्फ़्फ़्फ़ आहहहहहह ऐसे ही चाटो मेरी चूत, बड़ा मज़ा आ रहा है।”

रुबीना की चूत को एक लंबा किस करके जय ने सिर उठा कर कहा, “अरे रुबीना, तू देख आगे-आगे और क्या-क्या मज़ा देता हूँ तुझे। मेरी अमीना रंडी की बेटी, तुझे तो इतना मज़ा दूँगा कि तू हमेशा मेरे लौड़े के लिये बेताब रहेगी मेरी रंडी जान।” यह कहते हुए जय ने रुबीना की टाँगें खोलीं और उसकी चूत सहला कर नीचे झुका और रुबीना की चूत चाटने लगा। जय के चाटने के साथ रुबीना की सिसकरियाँ बढ़ रही थी। अपनी जीभ से रुबीना की चूत चाट कर, रुबीना की चूत का पूरा-पूरा मज़ा लेने के बाद रुबीना की चूत को उँगली से खोल कर अपनी जीभ रुबीना की चूत में डाल कर, जय जीभ से रुबीना की चूत चोदने लगा। जय की ज़ुबान अब रुबीना की चूत के अंदर बाहर हो रही थी और रुबीना की चूत से जो रस निकल रहा था उसका जय मज़ा लेने लगा।

रुबीना अब और भी ज़ोरों से सिस्करियाँ भरने लगी। अपनी कमर उठा कर, चूत जय के मुँह पे रगड़ते हुए वो चिल्लाने लगी, “आआआआआआ ऊऊऊफ्फ़्फ़्फ़, और चाटो, और अंदर डालो जीभ और मेरी चूत चोदो अपनी जीभ से। ऊफ्फ़्फ़्फ़ अहहहहहहह बड़ा मज़ा आ रहा है जय। और कुछ करो जिससे मुझे और मज़ा आये, कुछ भी करो पर और मज़ा दो मुझे।” रुबीना की सिसकरियाँ और बक-बक से ना जाने जय को क्या हुआ। जय रुबीना की चूत वैसे ही चाटते हुए कमर घुमा कर अब रुबीना के ऊपर आ गया। अब उसका मुँह रुबीना की चूत के पास था और उसका लंड रुबीना के मुँह पर था। अपनी जीभ रुबीना की चूत से निकाल कर जय बोला, “तेरी माँ की चूत, मेरी रंडी रुबीना, और कुछ चाहिये ना तुझे? साली बहुत बक-बक कर रही है, बहुत चिल्ला रही है तू, तेरी बक-बक बंद करने के लिये ले मेरा लौड़ा चूस रंडी रुबीना।” जैसे ही रुबीना ने जय का लंड पकड़ कर अपने मुँह में डाला, जय भी रुबीना की चूत और ज़ोर-ज़ोर से चाटते हुए अपना लंड रुबीना के मुँह में अंदर-बाहर-अंदर-बाहर करके उसका मुँह चोदने लगा। अब एक साथ रुबीना का मुँह और चूत जय चोद रहा था।

रुबीना अब जय का लंड चूसने लगी, पहले आराम से, फिर ज़ोर ज़ोर से और अपनी कमर उठा कर अपनी चूत जय के मुँह पे रगड़ने लगी। जय भी बड़ी मस्ती से चूत को जीभ से चोद कर रुबीना को बेहाल कर रहा था। जय का लंड खूब चूस कर रुबीना ने कमर उठाते हुए कहा, “हाआआआआयययय और चाटो… और चाटो। हाँ मेरा मुँह चोदोओओओओ जय, ऊँफ्फ़्फ़्फ़फ़्फ़्फ़ अब कुछ करो जय… मेरा बदन टूट रहा है, देखो कैसे काँप रहा है मेरा जिस्म… जय । प्लीज़ अब जैसे अम्मी को चोदा था वैसे मुझे चोदो, अब रहा नहीं जा रहा मुझसे।”

जय ने रुबीना की गुहार सुनी पर उसे और तड़पाने के लिये रुबीना का मुँह अपने लंड से चोदते हुए, फिर रुबीना कि चूत में अपनी उँगली डालकर उसे अंदर बाहर करके रुबीना की चूत चोदते हुए उसे और बेहाल करने लगा। जय अब रुबीना का मुँह चोदते हुए चूत में उँगली करने लगा जिससे रुबीना और तड़पने लगी। रुबीना से अब रहा नहीं गया, तो उसने धक्का दे कर जय को अपने जिस्म से उतारा और फिर उससे लिपट कर तड़पते हुए बोली, “आहहहहहह जय, प्लीज़ अब रहा नहीं जाता, प्लीज़ मुझे चोद डालो नहीं तो मैं अपने ही जिस्म की गर्मी में जल जाऊँगी, हाय राजा अब मत तड़पाओ।”

अब जय ने और रुकना मुनासिब नहीं समझा। रुबीना को नीचे लिटा कर उसने, रुबीना की टाँगें खोलीं और एक हाथ उसकी चूत पे घुमाते हुए दूसरे से अपना खड़ा, कड़क, मोटा, गरम लंड पकड़ कर रुबीना की चूत पे रख कर बोला, “चल रुबीना, अब तैयार हो जा ज़िंदगी में पहली बार अपनी चूत चुदवाने के लिये। आज तेरी चूत फाड़ कर रखुँगा मेरी रंडी अमीना की चिकनी बेटी। देखें तू और तेरी अम्मी में कौन ज्यादा मस्ती से चुदवाती है।” रुबीना को पता था कि पहली चुदाई में दर्द होगा पर वो अब किसी भी दर्द के लिये तैयार थी । एक हाथ से खुद के मम्मे मसलते हुए उसने दूसरे हाथ से जय का सिर नीचे झुकाया और वो जय को किस करने लगी। अपना लौड़ा ठीक से रुबीना की चूत के मुँह पे रख कर जय ने ज़ोर दिया। चूत का मुँह ज़रा सा खुला और जय के लौड़े की टोपी आधी अंदर घुस गयी।

रुबीना ने आँखें बंद कर लीं और जय का सीना सहलाने लगी। उस नंगी, कमसिन लड़की को इस हालत में देख कर जय को और गर्मी आ गयी और रुबीना की कमर पकड़ कर जय बोला, “रुबीना, मेरी रंडी, मेरी अमीना राँड की मस्त बेटी, अब तैयार हो जा जय से अपनी चूत की सील तुड़वा कर चुदाई की दुनिया में कदम रखने को। आज तेरी सील तोड़ कर तुझे लड़की से औरत बनाऊँगा मेरी जान।”

रुबीना की कमर कस कर पकड़ कर जय ने लंड अंदर धकेला। अब चूत फ़ैला कर लंड की टोपी और एक-चौथाई लंड चूत में घुस गया। रुबीना ने दर्द से अपने होंठ दाँतों के नीचे दबा लिये और अब ज़रा घबराहट से जय को देखने लगी। रुबीना की चूत को अपने लंड का एहसास देने के लिये जय कुछ वक्त वैसे ही रहा और फिर अपनी कमर पीछे कर के, रुबीना को कस कर पकड़ कर पूरे ज़ोर से लंड चूत में घुसा दिया। इस हमले से जय का लंड रुबीना की कमसिन, अनचुदी चूत की सील की धज्जियाँ उड़ाते हुए पूरी रफ़्तार से घुस गया। जय के इस हमले से दर्द के कारण रुबीना, जय को अपने ऊपर से धकेलने की कोशिश करने लगी और अपनी चूत से जय का लंड निकालने की नाकाम कोशिश करते हुए ज़ोर से चिल्ला उठी, “आहहहहहहहह मैं मर गयीईईईईईई, ऊँफ्फ़्फ़्फ़फ्फ़्फ़्फ़फ़्फ़ नहींईंईंईंईं, निकालो लंड मेरी चूत में से, मुझे नहीं करना कुछ।”

पर अब जय कहाँ उसकी बात माननेवाला था? उसे बहुत दिनों बाद सील पैक लड़की मिली थी तो आज वो पूरा जानवर बन कर चोदने वाला था। रुबीना के तड़पने पर ज़रा भी ध्यान ना देते हुए, जय ने रुबीना की कमर कस कर पकड़ी और फिर आधा लंड बाहर निकाल कर पूरी ताकत से चूत में घुसा दिया। इस बेरहम धक्के से रुबीना करीब-करीब बेहोश ही हो गयी, पर यह देख कर जय ज़रा रुका और रुबीना का एक निप्पल चूमते हुए प्यार से बोला, “अरे मेरी रुबीना रानी, अब तकलीफ वाला काम तो हो गया, ज़रा सब्र कर, दर्द अपने आप कम होगा और फिर तू भी मस्ती से मेरा लंड लेने लगेगी।” जय के रुकने से रुबीना की जान में जान आयी। उसे अपनी चूत से खून बहने का एहसास हुआ और उसका पूरा जिस्म पसीने से गीला हो गया था। रुबीना कुछ बोलने की हालत में नहीं थी, वो सिर्फ़ अपना हाथ चूत के पास घुमाते हुए दर्द से भरी चूत को आराम देने की कोशिश कर रही थी। यह सिलसिला पाँच-दस मिनट चलता रहा जिसमें जय रुबीना के मम्मे चूम रहा था, उसके जिस्म पे हाथ घुमा रहा था और रुबीना एक हाथ जय के जिम्स पे घुमाती हुई दूसरे हाथ से अपनी चूत के पास सहला रही थी।

जब जय को एहसास हुआ कि रुबीना की साँसें अब शाँत हो गयी हैं तो उसने हल्के से लंड दो-तीन बार आगे पीछे किया। पहले तो रुबीना दर्द से ‘आहहहहह, ओहहहहह’ कर रही थी पर जब और कुछ धक्कों के बाद रुबीना ने हल्की सी मुस्कुराहट के साथ जय की तरफ़ देखा, तो जय समझ गया कि रुबीना की चूत का दर्द अब खतम हो गया है। जय ने लंड, टोपी तक बाहर निकाला और एक दम आराम से चूत में घुसा दिया। रुबीना की चूत ने जैसे जय के पूरे लौड़े को लपेट कर अपने अंदर ले लिया। आठ-दस बार ऐसा करने पर रुबीना ने सिर उठा कर जय को चूमते हुए कहा, “अब दर्द नहीं हो रहा, अब करो जो करना है। मैं अब पूरी तरह तैयार हूँ आपसे अपनी चूत चुदवाने के लिये। आज पूरी मस्ती से अपनी अमीना रंडी की बेटी को चोदो जय।”

रुबीना की बात सुन कर खुश हो कर जय ने अपनी स्पीड ज़रा बढ़ाते हुए कहा, “अरे वाह रुबीना! बहुत जल्दी तेरा दर्द खतम हो गया, अब देख कैसे चोदता हूँ तुझे। अरे तेरी उस रंडी अम्मी से भी ज्यादा मज़ा मिलेगा तुझे क्योंकि तू कमसिन माल है, तुझे चोदने में बड़ा मज़ा आयेगा मेरी जान।”

जय अब मस्ती से रुबीना को चोदने लगा और रुबीना भी खुशी से चुदवा रही थी। इतने दिन उन हरामी लड़कों ने बहुत मसला था उसे, मम्मे खूब दबाये थे, चूत पे हाथ घुमाया था और उसे उनके लौड़े से खेलने में मज़ा भी आया था, पर चूत में लंड लेने का मज़ा कुछ और ही था। जय ने उसे क्या खूब गरम किया था और अब चोद रहा था । वो हरामी लड़के सिर्फ़ उसे गरम करना जानते थे पर जय को लड़की को गरम करना और फिर उसे चोदना बराबार मालूम था। जय के धक्कों से रुबीना का पूरा जिस्म हिल रहा था पर रुबीना खुशी-खुशी चुदवा रही थी।

रुबीना चुदाई का मज़ा ले रही है… यह देख, जय ने उसे तड़पाना चाहा और अपने लंड की टोपी अंदर रख कर बाकी लंड बाहर निकाल लिया। रुबीना जय के लौड़े के अगले धक्के के लिये तैयार थी पर जय उसे देख कर मुस्कुराता हुआ वैसे ही रुका रहा। जय की शरारत समझ कर रुबीना ने खुद अपनी कमर उठायी और जय का लंड अपनी चूत में घुसवा लिया और झूठे गुस्से से जय के सीने पर मुट्ठी से दो-तीन बार मारा।

रुबीना की इस अदा पर जय बड़ा खुश हुआ और कस कर रुबीना को दबोच कर लंड पूरे ज़ोरों से उसकी चूत में घुसा कर, उसे चोदते हुए बोला, “उम्म बहुत मज़ेदार हो तुम मेरी रानी, इतनी बेसब्री से तेरी अम्मी भी मेरा लौड़ा नहीं लेती। साली तुझे पहली बार चोद रहा हूँ पर अभी तक जो मज़ा मुझे मिला है वैसा मज़ा किसी को भी चोदने में नहीं आया था। साली तुझे खूब चोदुँगा मैं रुबीना, अब तो तुझे अपने घर ले जा कर चोदुँगा।” जय अब बड़ी तेज़ रफ़तार से रुबीना को चोद रहा था। रुबीना भी जय को पूरा सहयोग दे रही थी। जय का लौड़ा अपनी चूत में पूरा अंदर लेते हुए जय को बांहों में भर कर वो बोली, “हाँ, आज से मैं आपकी हूँ। आप जब कहोगे मैं आपके घर आऊँगी क्योंकि अब अम्मी का भी डर नहीं। मुझे भी आप जैसे माहिर मर्द के साथ चुदवाने में मज़ा आयेगा। हाँ जय, ऊऊऊऊफ्फ्फ आप तो मुझे जन्नत दिखा रहे हो, और चोदो, और ज़ोर से चोदो मुझे। फाड़ डालो मेरी चूत।”

चुदाई का शबाब अब पूरे ज़ोरों पर था। दोनों एक दूसरे को पूरा सहयोग देते हुए चुदाई का मज़ा ले रहे थे। जय पूरा का पूरा लौड़ा चूत में घुसा कर रुबीना को बहुत ज़ोर से चोदते हुए बोला, “नहीं मेरी जान, मैंने तुझे जन्नत नहीं दिखायी बल्कि जन्नत तो तूने मुझे दिखायी है। मेरे लिये जन्नत कहीं और नहीं… तेरी चूत में है, भगवान का शुक्र है जिसने मुझे तेरी चूत चोदने का मौका दिया और जिस वजह से मुझे जन्नत का दर्शन हुआ।”

रुबीना ने जय के होंठ चूमते हुए कहा, “ओहहह, कितना मज़ा आ रहा है मुझे आपसे चुदवा कर। अब मुझे कभी मत छोड़ कर जाना, मैं अब आपके बिना नहीं रह सकती हूँ।” जवाब में जय रुबीना को बहुत दबा कर ज़ोर ज़ोर से चोदते हुए और साथ-साथ उसकी चूचियाँ भी चूसते बोला, “नहीं मेरी जान… मैं तुम्हें कभी नहीं छोड़ूँगा, हमेशा इसी तरह चोदुँगा, मेरी जान।”

काफी वक्त यह चुदाई का सिलसिला चलता रहा जिसमें रुबीना दो बार झड़ गयी पर जय के तगड़े लौड़े ने उसे फिर चुदवाने के लिये मजबूर कर दिया। पर अब जय का वक्त आया था। जय ने ये रुबीना को बताया और रुबीना ज़िंदगी में पहली बार अपनी चूत में किसी मर्द के लौड़े का पानी लेने को तैयार हुई। रुबीना को कस कर दबोचते हुए, उसका एक निप्पल चूसते हुए जय बेरहमी से चोदने लगा। जैसे ही जय झड़ने लगा, उसने अपना लंड रुबीना की चूत में दबाया और वैसे ही दबा कर रख कर झड़ने लगा। रुबीना ने भी अपनी चूत जय के लंड पे दबा रही थी। रुबीना की कमसिन चूत, जय के गरम पानी से भरने लगी। दोनों ने एक दूसरे को कस कर पकड़ रखा था।

जब तूफ़ान शाँत हुआ तो दोनों ढीले पड़ गये। दोनों के जिस्म पसीने से लथपथ थे। धीरे-धीरे साँसें शाँत होने लगी। वो एक दूसरे से कुछ बोल नहीं रहे थे… बस हल्के किस करते हुए एक दूसरे का जिस्म सहला रहे थे। फिर जय ने अपना लंड रुबीना की चूत से निकाला और अपने बनियान से रुबीना की चूत साफ़ करके अपना लंड साफ़ किया। रुबीना दर्द से खड़ी भी नहीं हो पा रही थी तो जय उसे खड़ा करके बाथरूम ले गया और गरम पानी से उसकी चूत सेंकी।

दोनों आ कर हॉल में बैठे तो जय ने रुबीना द्वारा पहनी उसकी शॉट्‌र्स उठा कर उसको देते हुए कहा, “रुबीना यह शॉट्‌र्स पे दाग कैसे… तू पूछ रही थी ना, तो सुन, जब तेरा बाप घर पर होता है तब तेरी अम्मी मेरा लौड़ा चूसती थी। एक-दो बार ऐसा हुआ कि ठीक झड़ने के वक्त तेरे बाप की आहट सुनने से तेरी अम्मी लौड़ा छोड़ देती और मैं लंड शॉट्‌र्स में डालने की कोशिश करता पर तब तक लंड झड़ जाता था। तेरी अम्मी भी इतनी चुदक्कड़ है कि मुझे कहा कि जब मैं शॉट्‌र्स में झड़ जाऊँ तब मैं शॉट्‌र्स ना धोऊँ ताकि बाद में तेरी माँ मेरी शॉट्‌र्स चाट सके और इसी वजह से यह दाग है।” अपनी अम्मी की करतूत सुन कर रुबीना भी खुश हुई और उसने जय कि शॉट्‌र्स पहन ली पर ऊपर नंगी ही थी।

करीब आधे घंटे बाद अमीना घर आयी। दरवाजा खोल कर उसने देखा कि जय और रुबीना दोनों शॉट्‌र्स में बैठे बातें कर रहे थे। अमीना समझ गयी कि जय ने रुबीना का काम तमाम कर दिया था। जैसे ही अमीना उनके पास आयी, जय ने उसे खींच कर अपनी गोद में ले लिया और चुमने लगा। माँ-बेटी के सामने एक दूसरे का राज़ खुल गया था इसलिये दोनों बेशर्म बनी रहीं। अमीना को चूमने के बाद जय उनके बीच में बैठ गया और माँ-बेटी के मम्मों से खेलते हुए बोला, “अमीना अब तुझे और रुबीना को तो चोद डाला पर तेरी वो दूसरे बेटी और मेरी रुबीना जान की जुड़वाँ बहन को कब और कैसे चोदुँगा?”

अमीना के कुछ जवाब देने के पहले रुबीना ने जय का लंड पकड़ते हुए कहा, “जय, ज़हरा को घर आने में अभी २ महीने हैं, तब तक हम कोई प्लैन सोच लेंगे। लेकिन तब तक आप अम्मी को और मुझे चोदो ना, ज़हरा जब आयेगी तब देखेंगे क्या करना है।”

रुबीना की हर्कत पर खुश हो कर जय ने उसे बांहों में ले लिया और माँ-बेटी के साथ खेलने लगा।